10 Shandar Amethi Me Ghumne Ki Jagah Jo Har Kisi Ko Pasand Aayengi

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Amethi me ghumne ki jagah: अमेठी, उत्तर प्रदेश का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर से भरपूर जिला है। यह न केवल राजनीति के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहाँ के धार्मिक स्थल, ऐतिहासिक किलें, और प्राकृतिक सुंदरता भी पर्यटकों को आकर्षित करती है। यदि आप अमेठी यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो निम्नलिखित 10 स्थानों को अपनी सूची में शामिल करें:

1. नंदमहर धाम (Nandmahar Dham) – श्रीकृष्ण और बलराम से जुड़ा धार्मिक स्थल

2. दुर्गन धाम मंदिर (Durgan Dham Temple) – माँ दुर्गा का प्रमुख मंदिर

3. लोधी बाबा मंदिर (Lodi Baba Mandir) – आस्था का केंद्र

4. उल्टा गढ़ा धाम (Ulta Gadha Dham) – उल्टे हनुमान जी की मूर्ति

5. मलिक मोहम्मद जायसी का मकबरा (Tomb of Malik Mohammad Jayasi) – प्रसिद्ध सूफी कवि का स्मारक

6. सामस्पुर पक्षी अभयारण्य (Samaspur Bird Sanctuary) – प्रकृति प्रेमियों के लिए बर्ड वाचिंग स्पॉट

7. माता मवाई धाम (Mata Mawai Dham) – ग्रामीण आस्था का स्थान

8. ग़रह माफी मंदिर (Garh Mafi Mandir) – बहुदेवता स्थल

9. दुखहरण नाथ शिव मंदिर (Dukhharan Nath Shiv Temple)

10. श्री हनुमान गढ़ी मंदिर (Shri Hanuman Garhi Temple)

अमेठी उत्तर प्रदेश राज्य का एक जिला और लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र है, जो देशभर में अपने राजनीतिक महत्व, ऐतिहासिक धरोहर और धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है। इसे कभी “रायपुर-अमेठी” कहा जाता था। यह पूर्वी उत्तर प्रदेश में बसा है | इसकी स्थापना 1 जुलाई 2010 (सुल्तानपुर से अलग होकर बना नया जिला) को हुआ | इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 2,329 वर्ग किमी है | यहाँ की प्रमुख नदियाँ गोमती, सई है | यहाँ की साक्षरता दर लगभग 59.1% है | यहाँ की प्रमुख भाषाएँ हिंदी, अवधी, उर्दू है |

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राजनीति में अमेठी का महत्व

अमेठी भारत की राजनीति में एक बड़ा नाम है। यह कांग्रेस पार्टी का गढ़ रहा है:

राजनीतिक हस्तियाँ:

शिक्षा और उच्च संस्थान

अमेठी में कई राष्ट्रीय स्तर की संस्थान हैं:

राजीव गांधी पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी संस्थान (RGIPT) – ऊर्जा और इंजीनियरिंग के लिए

राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय – पायलट और विमानन क्षेत्र की पढ़ाई

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी (IGRUA) – पायलट ट्रेनिंग

फुटवियर डिज़ाइन और विकास संस्थान (FDDI)

कैसे पहुँचें: रेलवे: गौरीगंज स्टेशन, अमेठी स्टेशन, सड़क मार्ग: लखनऊ, रायबरेली, सुल्तानपुर से अच्छी कनेक्टिविटी और निकटतम हवाई अड्डा: लखनऊ (लगभग 100 किमी), प्रयागराज |

खान-पान : यहाँ का स्थानीय भोजन पूड़ी-सब्ज़ी, कचौड़ी, लिट्टी-चोखा, अवधी मिठाइयाँ जैसे पेड़ा, मलाई |

घूमने का सर्वोत्तम समय

नवंबर से फरवरी: मौसम सुहावना रहता है

कार्तिक पूर्णिमा व नवरात्रि: धार्मिक स्थलों में भीड़ व मेलों का आयोजन

अमेठी में क्या क्या कर सकते है

घूमने और देखने लायक जगहे
गतिविधियाँ

अमेठी (उत्तर प्रदेश) पहुँचने के साधन और वहाँ के बजट रेस्टोरेंट्स

साधन (अमेठी पहुँचने के)विवरणयात्रा बजट (लगभग)रेस्टोरेंट्स (बजट में)औसत खर्च (प्रति व्यक्ति)
ट्रेनअमेठी रेलवे स्टेशन (लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी से ट्रेनें उपलब्ध)₹100 – ₹500 (स्लीपर क्लास)श्याम भोजनालय, राधे रेस्टोरेंट, जायका ढाबा₹80 – ₹150
बसUPSRTC और निजी बसें (लखनऊ, रायबरेली, सुल्तानपुर से)₹100 – ₹300सिंह ढाबा, नवीन भोजनालय₹70 – ₹120
टैक्सी / कैबनिजी टैक्सी या ओला/उबर (निकट शहरों से)₹1500 – ₹4000वही उपरोक्तवही उपरोक्त
निजी वाहनखुद की गाड़ी से (लखनऊ से ~130 किमी)₹1000 – ₹2000 (ईंधन)वही उपरोक्तवही उपरोक्त

Explanation of अमेठी में 10 घूमने की जगहें (Amethi me ghumne ki jagah)

1. नंदमहर धाम (Nandmahar Dham) – श्रीकृष्ण और बलराम से जुड़ा धार्मिक स्थल

नंदमहर धाम उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के गौरीगंज तहसील से 15 किलो मीटर दूर मुसाफिर खाना क्षेत्र में स्थित एक प्रमुख हिंदू मंदिर है। यह मंदिर भगवान श्री कृष्ण, बलराम, नंद बाबा और वासुदेव जी से जुड़ा हुआ है और द्वापर युग की महत्वपूर्ण धार्मिक मान्यताओं का केंद्र है |

​ नंदमहर धाम की मान्यता है कि महाभारत काल में राजा पौंड्रक, जो स्वयं को वासुदेव बताता था | उससे युद्ध करने के बाद भगवान श्री कृष्ण और बलराम के साथ नंद बाबा यहां आए थे।

यहां राक्षसों का वध करने के बाद नंद बाबा ने हवन पूजन किया था। इसी स्थान पर नंद बाबा का मंदिर स्थापित किया गया है, जो यदुवंशियों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। ​

कार्तिक पूर्णिमा: प्रत्येक सोमवार और शनिवार के अलावा कार्तिक पूर्णिमा पर यहां बड़े मेले का लगता है | यहां का प्रमुख मेला कार्तिक माह की पूर्णिमा को आयोजित होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु दूर-दराज से आते हैं। इस अवसर पर यदुवंशियों का महाकुंभ लगता है और श्रद्धालु दूध, झंडा चढ़ाकर अपनी मनोकामनाएं पूरी करने की प्रथा निभाते हैं।

बरही महोत्सव: भगवान श्री कृष्ण के जन्म के 12वें दिन मनाया जाने वाला यह उत्सव नंदमहर धाम पर बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम और बाल भोज का आयोजन होता है। ​

यहाँ मंदिर में प्रसाद और मिष्ठान के बदले बॉस चढ़ाते है जो और जगह की संस्कृति से अलग है | ये प्राचीन मान्यता वाला धार्मिक मंदिर है | जो भी व्यक्ति अपनी मुराद को लेकर बाबा नन्द के द्वार आता उसकी मनोकामना बाबा के नन्द के मंदिर में पूरी होती है |

मंदिर के पास एक हवन कुंड है कहा जाता है नन्द बाबा यहाँ हवन पूजन करते थे | इस मंदिर में भगवान् कृष्ण से जुडी तस्वीरे भी हैं |

और पढ़े : नंदमहर धाम के बारे में पूरी जानकारी

2. दुर्गन धाम मंदिर (Durgan Dham Temple) – माँ दुर्गा का प्रमुख मंदिर (Amethi me ghumne ki jagah)

दुर्गन धाम मंदिर (Durgan Dham Temple) उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के गौरीगंज क्षेत्र के भवन शाहपुर गांव में स्थित एक प्रमुख शक्तिपीठ है, जो विशेष रूप से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के लिए प्रसिद्ध है।​ दुर्गन धाम मंदिर की स्थापना लगभग 200 वर्ष पहले अमेठी के राजा भगवान बक्स सिंह ने की थी।

किंवदंती के अनुसार, राजा अपनी सीमाओं का निरीक्षण करते हुए भवन शाहपुर गांव के पास जंगल में रुके थे। इस दौरान एक पत्थर की मूर्ति अचानक जमीन चीरकर बाहर आ गई, जिसे देखकर राजा और उनके सैनिक आश्चर्यचकित हो गए। इसके बाद राजा ने इस स्थान पर मां दुर्गा के नाम पर मंदिर की स्थापना की। धीरे-धीरे यह स्थल भक्तों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल बन गया है।

मंदिर में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है, जिन्हें नव पिंडी के रूप में स्थापित किया गया है। श्रद्धालु इन पिंडियों की पूजा करके अपनी मनोकामनाएं पूरी करने की कामना करते हैं। ​ नवरात्रि उत्सव: चैत्र और कुवांर माह की नवरात्रि में मंदिर में विशेष पूजा और हवन का आयोजन किया जाता है। इन नौ दिनों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

इस मंदिर में सोमवार और शुक्रवार को मेला लगता है और भक्त मनोकामना पूर्ण होने पर यहाँ भंडारा भी करते है | यहाँ आस- पास और भी छोटे बड़े मंदिर है जो दुर्गन धाम मंदिर की भव्यता में चार चाँद लगा देते हैं |

3. लोधी बाबा मंदिर (Lodi Baba Mandir) – आस्था का केंद्र (Amethi me ghumne ki jagah)

लोदी बाबा मंदिर (Lodi Baba Mandir) उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के गौरीगंज क्षेत्र में स्थित एक ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है। लोदी बाबा मंदिर में पूजा अर्चना की परंपरा पिछले 200 वर्षों से दलित समुदाय के पुजारियों द्वारा निभाई जा रही है। वर्तमान में, पुजारी अजय बाबा की तीसरी पीढ़ी इस मंदिर में सेवा कर रही है। यह परंपरा मंदिर की विशिष्टता और सामाजिक समरसता का प्रतीक है |

यहाँ पे लोग मनोकामना पूर्ण करने के लिए आते है जो संतान रहित हो , सुख शांति और कष्टों को दूर करने के लिए यहाँ पूजा आराधना करने आते है | मंदिर के पास एक पुरांना पीपल का वृछ है जहा सात दिन दिया जलाने से मनोकामना पूर्ण होती है |

इस मंदिर की स्थापना जिस संत के नाम पे हुई वो एक प्रशिद्ध संत थे | लोग उनकी बातो का भरोसा करते थे वे भक्ति में इतना खो गए थे की उनकी कही हर बात सच हो जाती थी |

यहाँ हर साल बड़ा भंडारा होता है जिसमे हजारो लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं |

4. उल्टा गढ़ा धाम (Ulta Gadha Dham) – उल्टे हनुमान जी की मूर्ति (Amethi me ghumne ki jagah)

उल्टा गढ़ा धाम उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के गौरीगंज क्षेत्र में स्थित एक ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है, जो अपनी उल्टे हनुमान जी की विशाल प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। उल्टा गढ़ा धाम की स्थापना लगभग 200 वर्ष पहले राजा रक्तंभ सिंह ने की थी, जो भगवान राम के वंशज माने जाते हैं।

कहानी के अनुसार, एक भूकंप के कारण इस स्थान का किला उलट गया था, जिससे इसे “उल्टा गढ़ा” कहा जाने लगा। उस भूकंप के खंडहर अब धाम के आसपास देखे जा सकते हैं, जिनमें प्राचीन मंदिर और लखौरी ईंट से बनी दीवारें शामिल हैं | स्थानीय लोग मानते हैं कि यह स्थल एक सिद्ध पीठ है, जहां की पूजा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

उल्टे हनुमान जी की प्रतिमा: मंदिर में 56 फीट ऊंची दक्षिणमुखी हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित है, जो सुरसा के मुंह में प्रवेश करती हुई दिखती है। यह प्रतिमा क्षेत्र की सबसे बड़ी हनुमान प्रतिमा मानी जाती है। ​हर मंगलवार को मंदिर में विशेष पूजा और हवन का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दराज से भक्त शामिल होते हैं। इस दिन विशेष रूप से बंदरों को लड्डू और चना चढ़ाने की परंपरा है। ​

5. मलिक मोहम्मद जायसी का मकबरा (Tomb of Malik Mohammad Jayasi) – प्रसिद्ध सूफी कवि का स्मारक

यह मकबरा रामनगर में स्थित है और प्रसिद्ध सूफी संत मलिक मोहम्मद जयसी की याद में बनाया गया है। यह स्थल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। मलिक मोहम्मद जायसी मध्यकालीन भारत के प्रसिद्ध सूफी संत और कवि थे, जिन्हें अवधी भाषा के महाकाव्य “पद्मावत” सहित कई महत्वपूर्ण रचनाओं के लिए जाना जाता है। वे अमेठी के राजा के दरबारी कवि और निजी सलाहकार भी थे |

मलिक मुहम्मद जायसी (1492-1548) हिन्दी साहित्य के भक्ति काल के निर्गुण प्रेमाश्रयी धारा के कवि थे। वे अत्यंत सरल और उदार कवि और सूफी संत महात्मा थे | जायसी का जनम 1492 में हुआ | वे उत्तर प्रदेश के जायस नमक स्थान के रहने वाले थे | उनके नाम में जायसी नमक प्रयोग उनके उपनाम के भांति होता है |  यह भी इस बात को सूचित करता है कि वे जायस नगर के निवासी थे। इस संबंध में उनका स्वयं भी कहना है-जायस नगर मोर अस्थानू।नगरक नांव आदि उदयानू।तहां देवस दस पहुने आएऊं।भा वैराग बहुत सुख पाएऊं॥ 

मकबरा के आसपास साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की जाती हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने इनके सम्मान में मलिक मोहम्मद जायसी शोध संस्थान के कायाकल्प के लिए 10.86 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं, जिससे यह स्थल और भी बेहतर तरीके से संरक्षित और विकसित होगा |

6. सामस्पुर पक्षी अभयारण्य (Samaspur Bird Sanctuary) – प्रकृति प्रेमियों के लिए बर्ड वाचिंग स्पॉट(Amethi me ghumne ki jagah)

यह पक्षी अभयारण्य अमेठी जिले के सामस्पुर क्षेत्र में स्थित है। यहाँ विभिन्न प्रकार के पक्षियों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं, और यह स्थल पक्षी प्रेमियों के लिए आदर्श है।

उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में सलोन के पास स्थित समसपुर पक्षी अभ्यारण्य क्षेत्र है | यह 780 हेक्टेयर के अपेक्षाकृत छोटे क्षेत्र को घेरे यह अभयारण्य 1987 में स्थापित हुआ था। यह लखनऊ शहर से लगभग 122 किलोमीटर दूर जिले के रोहनिया ब्लॉक में स्थित है। यहाँ पर पक्षियों की 250 से अधिक प्रजातियां पाई जाती गर्मी में यहाँ प्रवासी पक्छी भी आकर्षित होती है |

इस अभयारण्य में, निवासी और घरेलू पक्षी सुरखाब भी बड़ी आबादी में पाए जाते हैं। समसपुर में स्थित झील में 11 से अधिक मछली प्रजातियां भी पाई जाती हैं। सुहावने मौसम में कुछ समय बिताने के लिए प्रवासी पक्षी 5000 किलोमीटर से अधिक दूर से आते हैं।

7. माता मवाई धाम (Mata Mawai Dham) – ग्रामीण आस्था का स्थान(Amethi me ghumne ki jagah)

मवाई गाँव में स्थित यह मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित है। यहाँ हर नवरात्रि में विशेष पूजा होती है, और यह स्थान भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है।

अमेठी जिले के गौरीगंज के निकट जेठू मवई गांव में स्थित माता मवाई धाम (Mata Mawai Dham) देवी दुर्गा को समर्पित एक प्रसिद्ध धार्मिक केंद्र है, जो ग्रामीण आस्था का महत्वपूर्ण स्थान है। यह मंदिर लगभग चार दशक पहले, वर्ष 1973 में स्थापित हुआ था।

अमेठी शहर के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक माता मवाई धाम मंदिर है, जो कि गौरीगंज तहसील में स्थित मावई माताजी को समर्पित मंदिर है। यहां आपको भगवान शिव जी के भी दर्शन मिलते है। इस मंदिर में माता की बहुत सुंदर प्रतिमा स्थापित है।

8. ग़रह माफी मंदिर (Garh Mafi Mandir) – बहुदेवता स्थल

यह मंदिर गौरिगंज से लगभग 8 किलोमीटर दूर स्थित है। यहाँ भगवान विष्णु, लक्ष्मी जी, ब्रह्मा जी, शिव जी और हनुमान जी की विशाल मूर्तियाँ स्थापित हैं। यह स्थल धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ​

9. दुखहरण नाथ शिव मंदिर (Dukhharan Nath Shiv Temple)(Amethi me ghumne ki jagah)

यह मंदिर अमेठी-गौरिगंज हाईवे पर स्थित है और भगवान शिव को समर्पित है। यहाँ का शांत वातावरण और सुंदर वास्तुकला भक्तों को आकर्षित करती है |

इस शहर का एक प्रशिद्ध मंदिर दुखहरन नाथ शिव मंदिर है , जहा भगवान् शिव की पूजा अर्चना की जाती है | इस मंदिर का शिवलिंग पारदर्शी है | इस मंदिर में शिवलिंग के अलावा भी कुछ मंदिर हैं, जैसे की लक्ष्मण जी, श्री राम और माता सीता की भी प्रतिमाएं देखने को मिलती है, जो बहुत ही सुंदर लगती है।

दुखहरण नाथ शिव मंदिर, अमेठी के प्राचीन और प्रसिद्ध शिव मंदिरों में गिना जाता है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। इस मंदिर की स्थापना पाल वंश के गंगा राम पाल ने अपनी पत्नी रामकली की स्मृति में वर्ष 2010 में कराई थी। यह मंदिर अमेठी कस्बे से करीब 2 किलोमीटर दूर मुराई के पुरवा गांव में स्थित है। मंदिर में भगवान शिव के साथ ब्रह्मा, विष्णु और माता सीता की मूर्तियाँ भी स्थापित हैं, जिससे यह एक विशेष धार्मिक स्थल बन गया है, जहां एक साथ त्रिमूर्ति के दर्शन होते हैं |

10. श्री हनुमान गढ़ी मंदिर (Shri Hanuman Garhi Temple)

यह प्राचीन मंदिर अमेठी शहर में स्थित है और भगवान हनुमान को समर्पित है। यहाँ मंगलवार और शनिवार को विशेष पूजा होती है, और भक्तों की भारी भीड़ होती है।

संबंधित उत्पाद:

स्थानीय हस्तशिल्प: अमेठी में विभिन्न हस्तशिल्प उत्पाद जैसे मिट्टी के बर्तन, काष्ठ शिल्प, और अन्य स्थानीय कला के सामान खरीदे जा सकते हैं।

निष्कर्ष

अमेठी की यह 10 शानदार जगहें न केवल धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर भी पर्यटकों को आकर्षित करती है। यदि आप एक शांतिपूर्ण और ऐतिहासिक यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो अमेठी एक आदर्श स्थल है।

FAQ


अमेठी के प्राकृतिक स्थलों में कौन सी जगहें सबसे सुंदर हैं?

Ans. अमेठी में प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली से भरपूर कई स्थल हैं, जो प्रकृति प्रेमियों और परिवार के साथ घूमने वालों के लिए खास आकर्षण रखते हैं। यहाँ कुछ ऐसी जगहें हैं, जो अपने प्राकृतिक वातावरण, हरियाली, झरनों और पक्षियों के लिए प्रसिद्ध हैं |
Samaspur Bird Sanctuary
Amethi me ghumne ki jagah: समसपुर पक्षी विहार अमेठी के पास सालोन में स्थित है और यह क्षेत्रीय और प्रवासी पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ प्राकृतिक झीलें, हरियाली और पक्षियों की चहचहाहट आपको एक अनूठा अनुभव देती है। फोटोग्राफी, बर्डवॉचिंग और शांत वातावरण के लिए यह जगह सबसे सुंदर प्राकृतिक स्थल मानी जाती है।
कादूनाला इकोस्पॉट पार्क (Kadunala Wetland Ecospot Park)

यह पार्क मुसाफिरखाना-लखनऊ हाईवे पर कादूनाला गांव के पास स्थित है। यहाँ हरे-भरे वृक्ष, वॉच टावर, नौकायन और इको-फ्रेंडली वातावरण मिलता है। 
टीकरमाफी शिवलिंग परिसर (Tikarmafi Shivling Complex)
यह स्थल 108 शिवलिंग, 12 ज्योतिर्लिंग और पंचमुखी भगवान शंकर के मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ का प्राकृतिक वातावरण, झरने और हरियाली इसे धार्मिक के साथ-साथ प्राकृतिक दृष्टि से भी खास बनाते हैं। 
तेलिया बुर्ज (Teliya Burj)
उल्टा गढ़ा धाम (Ulta Gadha Dham)

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