20 अद्भुत Bhopal Paryatan Sthal जो आपको मंत्रमुग्ध कर देंगे

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Bhopal Paryatan sthal : भारत के हृदयस्थल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल है | भोपाल प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक विविधताओं का अद्भुत संगम है। यहां झीलों की शांति का अहसास होता है | भोपाल के स्थापत्य कला की भव्यता हर पर्यटक को मंत्रमुग्ध करती है। भोपाल, जिसे झीलों की नगरी (City of Lakes) कहा जाता है | मध्य प्रदेश की राजधानी और भारत के सबसे खूबसूरत एवं ऐतिहासिक शहरों में से भोपाल एक है। यह शहर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक धरोहरों, सांस्कृतिक समृद्धि और नवाबी विरासत के लिए प्रसिद्ध है।

इसकी स्थापना 11वीं सदी में राजा भोज द्वारा (भोजपाल के नाम से) हुई थी | आधुनिक भोपाल की स्थापना नवाब दोस्त मोहम्मद खान द्वारा 1707 में हुई थी | यहाँ की भाषा हिंदी (मुख्य), उर्दू, और अंग्रेज़ी है | यहाँ की जनसँख्या लगभग 23 लाख (2023 अनुमान) है | इसकी अर्थव्यवस्था में शिक्षा, प्रशासन, पर्यटन, उद्योग, और आईटी शामिल हैं | भोपाल का प्रारंभिक इतिहास राजा भोज से जुड़ा है, जिनके नाम पर यह भोजपाल कहलाया। बाद में अफगान योद्धा दोस्त मोहम्मद खान ने इसे आधुनिक शहर के रूप में बसाया। 19वीं और 20वीं सदी में यहाँ बेगमों का शासन रहा, जिन्होंने शहर को सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से विकसित किया।

20 शानदार himachal pradesh paryatan sthal जो मन मोह लें

भोपाल के प्रमुख दर्शनीय और पर्यटक स्थल – Bhopal Tourist Places In Hindi

bhopal paryatan

दिल्ली से भोपाल पहुँचने का यात्रा बजट (1 व्यक्ति के लिए)

यात्रा का माध्यमकिराया (INR)समय (घंटे में)विवरण
ट्रेन (स्लीपर क्लास)₹400 – ₹60012–14 घंटेसस्ती, आरामदायक, अग्रिम बुकिंग ज़रूरी
ट्रेन (3AC)₹1000 – ₹140012–14 घंटेवातानुकूलित सुविधा
बस (AC वॉल्वो)₹1200 – ₹160014–16 घंटेलंबी दूरी, थोड़ा महँगा
फ्लाइट ₹2500 – ₹60001.5 – 2 घंटेसबसे तेज़, पर महँगा
निजी कार (डीज़ल)₹3000 – ₹4000 (ईंधन)12–13 घंटेसुविधा अनुसार, 4 लोग शेयर करें तो सस्ता

भोपाल पर्यटन स्थल यात्रा: ट्रांसपोर्ट + रेस्टोरेंट बजट टेबल (प्रति व्यक्ति, प्रतिदिन)

खर्च का प्रकारअनुमानित बजट (INR ₹)विवरण
लोकल ट्रांसपोर्ट₹200 – ₹400ऑटो, ओला/उबर, या टैक्सी (स्थल: भीम बेटका, सांची, बड़ा तालाब, मानव संग्रहालय)
सार्वजनिक वाहन₹50 – ₹100सिटी बस/मिनी बस (लोकल यात्रा के लिए सस्ता विकल्प)।
नाश्ता₹50 – ₹100लोकल होटल, पोहा-जलेबी या चाय के साथ।
दोपहर का भोजन₹150 – ₹300मिड-रेंज रेस्टोरेंट या ढाबा (थाली/साउथ इंडियन भोजन)।
रात का खाना₹150 – ₹300कैफे या रेस्तरां में हल्का/मध्यम भोजन।
चाय/स्नैक्स₹50 – ₹100दिन भर में चाय, पानी, स्नैक्स आदि।

कुल बजट सारांश (प्रतिदिन):

श्रेणीन्यूनतम ₹अधिकतम ₹
ट्रांसपोर्टेशन₹200₹500
भोजन / रेस्टोरेंट₹250₹700
कुल खर्च (1 दिन)₹450₹1200

यातायात व कनेक्टिविटी

साधनजानकारी
रेलवे स्टेशनभोपाल जंक्शन, हबीबगंज (अब रानी कमलापति स्टेशन)
हवाई अड्डाराजा भोज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
बस सेवाBRTS, मिनी बस, ऑटो, कैब, मेट्रो (निर्माणाधीन)
निकटतम बड़े शहरइंदौर (190 किमी), जबलपुर (320 किमी), नागपुर (350 किमी)

अगर आप भोपाल घूमने का सोच रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए है। आइए जानते हैं 20 अद्भुत Bhopal Paryatan Sthal के बारे में, जो आपके यात्रा अनुभव को यादगार बना देंगे |

1. बड़ा तालाब (Upper Lake) (Bhopal Paryatan sthal )

भोजताल को भोपाल में बड़ा तालाब या बड़ी झील कहा जाता है | इस झील से लगभग 40% जल खेती तथा पीने में प्रयोग किया जाता है |

भोपाल के लोगो का मुख्य व्यवसाय खेती है | इस झील का निर्माण परमार राजा भोज ने की थी | बड़ा तालाब के मध्य में तलवार से सुशोभित परमार राजा भोज की एक बड़ी सी मूर्ति है , जो पर्यटकों को आकर्षित करती है |

भोपाल का सबसे प्रमुख आकर्षण, बड़ा तालाब 11वीं सदी में बना था। यहां बोटिंग, कायाकिंग और जलक्रीड़ा की सुविधाएं उपलब्ध हैं। सूर्यास्त का दृश्य बेहद मनमोहक होता है।

  • बड़ा तालाब का निर्माण परमार वंश के राजा भोज ने 11 वी सदी में करवाया था | यह भारत की मानव निर्मित झील है |
  • कथा या कहानी यह है कि राजा भोज एक असाध्य चर्म रोग से पीड़ित हो गए थे। एक संत के सुझाव पर, उन्होंने 9 नदियों और नालों की जलधाराओं को इकट्ठा कर विशाल झील बनवाया, जिसमें स्नान करने से उनका रोग ठीक हो गया था |
  • इस झील को एशिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित झीलों में गिना जाता है |
  • इसका क्षेत्रफल लगभग 31 वर्ग किमी है, और यह लगभग 361 वर्ग किमी क्षेत्र से पानी इकट्ठा करता है
  • भोपाल में एक कहावत प्रसिद्ध है—”तालों में ताल भोपाल का ताल बाकी सब तलैया”, जिससे इस झील की विशिष्ट पहचान झलकती है |
  • बड़ा तालाब और पास स्थित छोटा तालाब मिलकर एक वेटलैंड (आर्द्रभूमि) क्षेत्र बनाते हैं, जिसे ‘रामसर स्थल’ के रूप में अंतरराष्ट्रीय संरक्षित क्षेत्र का दर्जा दिया गया है |
  • तालाब के बीच स्थित ‘तकिया द्वीप’ पर 18वीं शताब्दी के सूफी संत हजरत शाह अली शाह की दरगाह बनी है, जहां सिर्फ नाव से ही पहुंचा जा सकता है |
  • इसमें 106 प्रकार के मैक्रोफाइट्स (जल पौधे), 208 प्रकार के फाइटोप्लांकटन, और प्रवासी पक्षियों सहित सैकड़ों प्रकार के पक्षी व जलजीव पाए जाते हैं |
  • तालाब के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सिंघाड़ा की खेती होती है, और यह आसपास के गांवों के लिए भी उपयोगी है |
  •  यहां धार्मिक पर्वों पर मूर्ति विसर्जन जैसी गतिविधियां आम हैं, जिससे झील का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बढ़ जाता है
  • भदभदा डैम बड़ा तालाब का जल स्तर नियंत्रित करता है, जो बारिश के मौसम में पानी की अधिकता होने पर खोला जाता है
  • इतिहास: यह झील 11वीं सदी में राजा भोज द्वारा बनाई गई थी और भोपाल की सबसे पुरानी जलाशय मानी जाती है।
  • भोजन: झील के किनारे स्थित कैफे में स्थानीय व्यंजन जैसे पोहा, चाय, और स्नैक्स उपलब्ध हैं।
  • ठहरने की जगह: झील के पास कई बजट और लग्ज़री होटल्स हैं।
  • करने के लिए चीज़ें: बोटिंग, पैडल बोटिंग, और सूर्यास्त का दृश्य देखना।
  • कैसे पहुँचे: भोपाल रेलवे स्टेशन से लगभग 5 किमी, ऑटो या कैब द्वारा पहुँचा जा सकता है।
  • प्रवेश शुल्क: बोटिंग के लिए ₹50-₹100।

2. छोटा तालाब (Lower Lake)

small lake

यह तालाब भोपाल को और सुन्दर बनाने के लिए 1794 में बनाया गया था | झील को बनाने का काम छोटे खान के आदेश पर नवाब हयात मोहम्मद खान बहादुर के एक मंत्री द्वारा कराया गया था | छोटे तालाब और बड़ा तालाब को ‘पुल पुख्ताा‘ द्वारा अलग करता है |

छोटा तालाब 1.29 वर्ग किलोमीटर (पानी फैल) के क्षेत्र में है और इस झील का जलग्रहण क्षेत्र 9.6 वर्ग किमी है।

Bhopal Paryatan sthal: बड़ा तालाब के पास स्थित यह झील भी शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक है। दोनों झीलों को एक पुल द्वारा जोड़ा गया है, जिसे ‘सरताज ब्रिज’ कहा जाता है।

  • छोटा तालाब बड़े झील (Upper Lake/भोजताल) के दक्षिण-पूर्व में है | दोनों झीलो को पुलपुख्ता नामक पुल एवं मिट्टी का बांध जोड़ता है | इसका क्षेत्रफल लगभग 7.99 वर्ग किमी से 9.6 वर्ग किमी है |
  • छोटा तालाब ऊपरी झील से रिसाव से पानी पाता है, इसका कोई अपना जल स्रोत नहीं है | यह Patra नाले के माध्यम से हलाली नदी में मिल जाता है, जो आगे जाकर बेतवा नदी की सहायक है |
  • छोटा तालाब के खूबसूरती में यहाँ की पहाड़िया और पुराने शहर की वास्तुकला इसमें चार चाँद लगा देती है | यह भोपाल का प्रशिद्ध आकर्षण स्थल है |
  • यहाँ नाव विहार (पैडल, सेल और मोटर बोट) का आनंद ले सकते हैं , जो पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय है |
  • कमला पार्क एवं पुलपुख्ता जैसे स्थान इसकी शोभा में चार चाँद लगाते हैं |
  • छोटा तालाब को लोअर लेक (Lower Lake) और कुछ जगह शाहपुरा झील के नाम से भी जाना जाता है |
  • बड़े तालाब और छोटा तालाब मिलकर भोज वेटलैंड बनाते हैं , जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त आर्द्रभूमि क्षेत्र है |
  •  समीपवर्ती इलाके में यह झील बनने से पहले कई कुएं थे, जो तालाब बनने के बाद पानी में समा गए |
  • छोटा और बड़ा तालाब मिलकर भोपाल को ‘झीलों का शहर’ (City of Lakes) बनाते हैं
  • तालाब के चारों ओर मानवीय बस्ती और नालों के बहाव के कारण पानी में प्रदूषण की भी बड़ी समस्या है, जिसे नियंत्रित करने के लिए प्रशासन प्रयासरत है
  • इतिहास: यह झील भी राजा भोज द्वारा बनाई गई थी और बड़ा तालाब से जुड़ी हुई है।
  • भोजन: झील के आसपास के स्टॉल्स में चाट, भेलपुरी, और स्थानीय स्नैक्स मिलते हैं।
  • ठहरने की जगह: झील के पास कई रिसॉर्ट्स और गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं।
  • करने के लिए चीज़ें: पैदल चलना, फोटोग्राफी, और झील के किनारे बैठकर शांति का अनुभव करना।
  • कैसे पहुँचे: बड़ा तालाब से पैदल या ऑटो द्वारा पहुँचा जा सकता है।
  • प्रवेश शुल्क: निशुल्क।

3. भारत भवन (Bhopal Paryatan sthal )

bharat bhavan

भारत भवन भोपाल में स्थित एक विविध कला , सांस्कृतिक केंद्र और संग्राहलय है | इसमें विभिन्न आर्ट गैलरी, ऑडोटोरियम और भारतीय कविताओं की पुस्तकालय भी सम्लित है | यह बड़ा तालाब के पास में है |

यहाँ की कलाये बहुत ही अनूठी हैं | यह श्यामला पहड़ियों पर स्थित है | यहाँ से भोपाल शहर का सुन्दर दृश्य दिखाई देता है | इस भवन को वास्‍तुकार चार्ल्‍स कोरिया ने डिजाइन किया था |

भारत भवन एक कला प्रेमियों का स्वर्ग है। यहाँ चित्रकला, नाट्यकला, संगीत और साहित्य के कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित होते हैं।

  • भारत भवन प्रदर्शन कला और दृश्य कला का मुख्य केंद्र भी है, जहाँ आदिवासी, लोक तथा आधुनिक भारतीय कला के अनेक रूपों को दिखाया, संरक्षण, प्रदर्शन और संवर्धन किया जाता है |
  • भारत भवन में कला दीर्घाएं, संग्रहालय, पुस्तकालय (जिसमें लगभग 20,000 पुस्तकें हैं), ओडिटोरियम (इनडोर/आउटडोर), रिहर्सल रूम, और कविता मंच जैसे ‘वागर्थ’ का अद्भुत संगम हैं, जो साहित्य और कला के विकास का प्रदर्शन करते है |
  • इसका डिज़ाइन चार्ल्स कोरिया इसके प्राकृतिक पर्यावरण और भोपाल के आसपास की झीलों एवं पहाड़ियों को ध्यान में रखकर किया है, इसका वास्तुशिल्पीय दृष्टि का बहुत ही प्रशंसा की जाती है | भारत भवन पानी पर टिका हुआ एक पठार है, जहाँ से तालाब और ऐतिहासिक शहर का दृश्य देखने को मिलता है |
  • यहाँ आयोजित कार्यशालाओं और आयोजनों के लिए कई नवीन डिजाइन तैयार किये गए हैं, जैसे कि कार्यक्रम के कार्ड, जिन्हें देशभर में कला प्रेमी प्राप्त करते हैं |
  • भोपाल तथा मध्य प्रदेश के कलाकारों और रंग कर्मियों को भारत भवन ने एक अनोखा पहचान दिलाया है | जिससे की यह स्थल कला, संगीत, नृत्य, रंगमंच, और साहित्य के लिए प्रशिक्षण एवं मंच प्रदान करता है |
  • यह भवन भोपाल की ऊपरी झील के सामने, शामला पहाड़ियों पर बसा हुआ है, जो इसे प्राकृतिक सौंदर्य और परंपरागत कला का अद्भुत मेल को दर्शाता है |
  • भारत भवन का उद्देश्य भारतीय कलात्मक विरासत को संरक्षित करना, नवाचार को बढ़ावा देना तथा कलाकारों और काव्यमय चिंतन के लिए एक समर्पित स्थान प्रदान करना है |
  • इतिहास: यह कला केंद्र 1982 में स्थापित हुआ था और मध्य प्रदेश शासन द्वारा संचालित है।
  • भोजन: परिसर में कैफे में हल्के नाश्ते और चाय की सुविधा है।
  • ठहरने की जगह: नज़दीकी होटल्स में ठहरने की सुविधा उपलब्ध है।
  • करने के लिए चीज़ें: नाटक, संगीत और कला प्रदर्शन देखना।
  • कैसे पहुँचे: भोपाल रेलवे स्टेशन से लगभग 6 किमी, कैब या ऑटो द्वारा पहुँचा जा सकता है।
  • प्रवेश शुल्क: ₹20-₹50 (कार्यक्रम के अनुसार)।

4. मानव संग्रहालय (Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya)

ndira gandhi

Bhopal Paryatan sthal : यह एक अनोखा संग्रहालय है जो विभिन्न जनजातियों की जीवनशैली और संस्कृति को जीवंत रूप में दर्शाता है। यह संग्रहालय श्यामला हिल्स पर स्थित है और विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है।

यह एक मानव बिज्ञान संग्राहलय है | इसका मूल मन्त्र है, मानव तथा संस्कृति के इतिहास को बढ़ावा देना है | यह संग्रहालय श्यामला की पहाड़ियों में 200 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है | जिसमे ३२ पारंपरिक एवं प्रागैतिहासिक चित्रित शैलाश्रय भी हैं। यह मानव जीवन को लेकर विशाल संग्रहलाय है |

  • यह संग्रहालय वर्ष 1977 में बना था और भोपाल के शामला हिल्स पर 200 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है |
  • यह केवल भारत में ही नहीं , अपितु पूरे एशिया में सबसे बड़ा ओपन-एयर मानव शास्त्रीय संग्रहालय है
  • बड़ी झील (Upper Lake) और वन विहार नेशनल पार्क के पास बसा यह संग्रहालय आपको प्रागैतिहासिक काल के वातावरण का अहसास कराता है
  • संग्रहालय को दो भागों में बांटा गया है: एक विशाल इमारत जिसमें 12 अलग-अलग गैलरियां हैं, और दूसरा विस्तृत ओपन एरिया जिसमें भारत के विभिन्न क्षेत्रों जैसे हिमालय, समुद्र तटीय, मरुस्थलीय, आदिवासी, एवं अन्य समाजों के घरों के प्रतिरूप और संस्कृति को करीब से दर्शाता है |
  • यहाँ 32 पारंपरिक एवं प्रागैतिहासिक शैलचित्र (rock shelters) हैं |
  • बोलियों, संस्कृति, परंपराओं व जीवनशैली की विविधता को दिखाने के लिए विभिन्न जनजातीय समूहों जैसे टोडा, बाराली, भील आदि के आवास, देवी-देवताओं की मूर्तियां, बस्तर का रथ, मारिया लोगों का घोटुल, 110 फीट लंबी लकड़ी की नाव आदि का अद्भुत संगम है |
  • भारत में मानव और संस्कृति के ऐतिहासिक विकास को आम जनता के सामने लाना; खासकर भारतीय जनजातीय संस्कृतियों, उनकी जीवनशैली, कला, संगीत, और लोकसाहित्य का संरक्षण व प्रदर्शन करना, और उनकी गरिमा को बनाये रखना |
  • सोमवार और राष्ट्रीय अवकाश छोड़कर प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है
  • संग्रहालय समय-समय पर मानव समूहों द्वारा संजोयी गई धरोहरों, लोकगीतों, और अन्य पारंपरिक आयोजनों को आम जनता के लिए प्रस्तुत करता है |
  • यहाँ कई घर और सांस्कृतिक स्थल असली गांवों से लाकर स्थापित किए गए हैं, ताकि प्रामाणिकता बनी रहे।
  • इतिहास: यह संग्रहालय विभिन्न जनजातीय समुदायों की संस्कृति और जीवनशैली को प्रदर्शित करता है।
  • भोजन: संग्रहालय परिसर में कैफे में स्थानीय और भारतीय भोजन उपलब्ध है।
  • ठहरने की जगह: श्यामला हिल्स क्षेत्र में कई होटल्स और गेस्ट हाउस हैं।
  • करने के लिए चीज़ें: संग्रहालय में प्रदर्शनी देखना, फोटो खींचना।
  • कैसे पहुँचे: भोपाल रेलवे स्टेशन से लगभग 7 किमी, कैब या ऑटो द्वारा पहुँचा जा सकता है।
  • प्रवेश शुल्क: ₹30-₹50।

5. भोजपुर मंदिर (Bhopal Paryatan sthal )

भोजपुर मंदिर को भोजेश्वर मन्दिर भी कहा जाता है | इसका निर्माण राजा भोज ने की थी, जिनके नाम पर इस मंदिर का नाम भोजपुर या भोजेश्वर मंदिर पड़ा | यह मध्य प्रदेश राज्य के रायसेन जिले में स्थित है | इस मंदिर को पूर्व में सोमनाथ के नाम से भी जाना जाता था | यहाँ भगवन शिव का 7 फ़ीट से अधिक ऊचा शिवलिंग है |

भोपाल से 28 किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर राजा भोज द्वारा बनवाया गया था। यहाँ भगवान शिव का विशाल शिवलिंग स्थापित है, जो स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है।

  • भोजपुर मंदिर के पीछे की तरफ एक ढलान बनाया गया था जिसका उपयोग मंदिर के निर्माण के दौरान पत्थरों को ढोने के उपयोग में लाया गया था।
  • दुनिया में कहीं भी इस तरह बनाने की प्रक्रिया का उपयोग नहीं किया गया है। इस ढलान के तकनीक या प्रक्रिया का उपयोग करके 70 टन के पत्थर को मंदिर में लाया गया।
  • महा शिवरात्रि और मकर संक्रांति जैसे त्योहारों पर विभिन्न स्थानों से कई लोग मेले और त्योहार में भाग लेने के लिए यहां आते हैं।
  • इस मंदिर की छत के रूप में शीर्ष पर एक गुंबद बना हुआ है।
  • इस मंदिर कि विशेषता इसका विशाल शिवलिंग हैं जो कि विश्व का एक ही पत्थर से निर्मित सबसे बड़ा शिवलिंग (World’s Tallest Shiv Linga) हैं।  सम्पूर्ण शिवलिंग कि लम्बाई 5.5 मीटर (18 फीट ), व्यास 2.3 मीटर (7.5 फीट ), तथा केवल लिंग कि लम्बाई 3.85 मीटर (12 फीट ) है।
  • भोजेश्वर मंदिर (Bhojeshwar Temple) कि विशेषता इसका अधूरा निर्माण हैं।  इसका निर्माण अधूरा क्यों रखा गया इस बात का इतिहास में कोई पुख्ता प्रमाण तो नहीं है पर ऐसा कहा जाता है कि यह मंदिर एक ही रात में बनकर तैयार होना था परन्तु छत का काम पूरा होने के पहले ही सुबह हो गई, इसलिए काम अधूरा रह गया।
  • भोजेश्वर मंदिर (Bhojeshwar Temple) कि गुम्बदाकार छत हैं। चुकी इस मंदिर का निर्माण भारत में इस्लाम के आगमन के पहले हुआ था अतः इस  मंदिर के गर्भगृह के ऊपर बनी अधूरी गुम्बदाकार छत भारत में ही गुम्बद निर्माण के प्रचलन को प्रमाणित करती है। भले ही उनके निर्माण की तकनीक भिन्न हो। कुछ विद्धान इसे भारत में सबसे पहले गुम्बदीय छत वाली इमारत मानते हैं। इस मंदिर का दरवाजा भी किसी हिंदू इमारत के दरवाजों में सबसे बड़ा है।
  • इतिहास: यह मंदिर 11वीं सदी में राजा भोज द्वारा बनवाया गया था और शिव जी को समर्पित है।
  • भोजन: मंदिर के पास स्थानीय भोजनालयों में दाल-बाटी, चूरमा जैसे व्यंजन मिलते हैं।
  • ठहरने की जगह: भोजपुर क्षेत्र में कुछ धर्मशालाएँ और गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं।
  • करने के लिए चीज़ें: मंदिर दर्शन, आसपास के पहाड़ी क्षेत्र में ट्रैकिंग।
  • कैसे पहुँचे: भोपाल से लगभग 28 किमी, कैब या बस द्वारा पहुँचा जा सकता है।
  • प्रवेश शुल्क: निशुल्क।

6. भीम बेटका शैलाश्रय (Bhopal Paryatan sthal )

bheem betka

यह शैलाश्रय केंद्रीय-भारतीय के पठार दक्षिण के विंध्या पर्वत शृंखला की तलहटी में बसा हुआ है | यहाँ मध्य काल से लेकर ऐतिहासिक काल की चित्रकारिया देखी जा सकती हैं |

भीम बेटका UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट है जहाँ आपको हजारों साल पुरानी गुफा चित्रकला देखने को मिलती है। यह मानव सभ्यता के शुरुआती संकेतों को दर्शाता है।

  •  भीमबेटका को भारत का प्रागैतिहासिक मानव संग्रहालय कहा जाता है।
  • भीमबेटका आदिमानवों द्वारा बनाए गए शैलाश्रय और शैलचित्रों के लिए प्रसिद्ध है।
  • यहां करीब 750 शैलाश्रय हैं जिनमें से 500 शैलाश्रयों पर चित्र बने हैं |
  •  यहां की चट्टानें भूवैज्ञानिक रूप से भी अद्भुत हैं। ये चट्टानें 10,000 साल पुरानी हैं।
  • भीमबेटका से जुड़ा एक विशिष्ट तथ्य है कि दुनिया की सबसे पुरानी गुफ़ा और इतनी प्राचीन चित्रकारी भीमबेटका में ही मिली हैं। इन चित्रों की उम्र लगभग 30,000 साल से अधिक बताई जाती है। ये चित्र हमें हमारे पूर्वजों के जीवन, उनकी सोच और कला के बारे में बताते हैं।
  • यहां कई पुरातात्विक अवशेष मिले हैं, जैसे कि प्राचीन किले की दीवार, शुंग-गुप्त कालीन अभिलेख, पुराने समय में बनाया गया भवन, और परमार कालीन मंदिर के अवशेष।
  •   भीम बेटका को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है। यह भारत के लिए गर्व की बात है |
  •  इतिहासकारों, पुरातत्वविदों और छात्रों के लिए भीमबेटका एक महत्वपूर्ण अध्ययन केंद्र है। यहां से इतिहास के कई रहस्य खुल जाते हैं।
  • भीमबेटका की गुफ़ाएं प्राकृतिक रूप से बनी हुई हैं। इसकी ख़ूबसूरती और शांत वातावरण पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है।
  •  भीमबेटका रत्नागिरी और सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान के पास स्थित है। यह जगह आबादी से दूर प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पहाड़ियों के बीच में है।
  • यहां के चित्रों में शिकार, नाच-गाना, घोड़े और हाथी की सवारी, लड़ते हुए जानवर, श्रृंगार, मुखौटे और घरेलू जीवन से जुड़े कई दृश्य हैं।
  • इतिहास: ये गुफाएँ प्राचीन चित्रकला और मानव सभ्यता के संकेत प्रदान करती हैं, और UNESCO विश्व धरोहर स्थल हैं।
  • भोजन: गुफाओं के पास छोटे स्टॉल्स में स्नैक्स और पेय पदार्थ मिलते हैं।
  • ठहरने की जगह: नज़दीकी क्षेत्रों में होमस्टे और गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं।
  • करने के लिए चीज़ें: गुफाओं में चित्रकला देखना, ट्रैकिंग।
  • कैसे पहुँचे: भोपाल से लगभग 45 किमी, कैब या बस द्वारा पहुँचा जा सकता है।
  • प्रवेश शुल्क: ₹25-₹50।

7. वन विहार राष्ट्रीय उद्यान (Bhopal Paryatan sthal )

यह थ्री-इन-वन राष्ट्रीय उद्यान है | यह राष्ट्रीय उद्यान होने के साथ-साथ, चिड़ियाघर और जानवर रेस्क्यू  भी है | 445 हैक्टेयर क्षेत्र में फैले हुए इस राष्ट्रीय उद्यान में मिलने वाले जानवरों को जंगल से पकड़कर नहीं लाया गया है। यहाँ पे जानवर खुद आकर मज़बूरी एवं परेशानी से बचने के लिए बसें हैं |

यह एक ओपन ज़ू है जो नैचुरल हैबिटेट में जानवरों को देखने का अवसर प्रदान करता है। यहाँ बाघ, तेंदुआ, भालू और कई पक्षी प्रजातियाँ देखने को मिलती हैं।

  • यह उद्यान भोपाल के हृदय में, बड़े तालाब (भोजताल) के किनारे स्थित है। इसे 26 जनवरी 1983 को राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला। आरंभ में यह सूनसान पहाड़ी थी, जिसके वनों का संरक्षण 1981 में शुरू हुआ था |
  • यहाँ लगभग 250 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
  • यहाँ मगरमच्छ, कछुए, सांप (कोबरा, अजगर आदि), तितलियाँ और ढेर सारे कीड़े-मकोड़े भी पाए जाते हैं |
  • यहाँ के जानवर जंगल से पकड़कर नहीं, बल्कि ज्यादातर घायल, अनाथ, बूढ़े या सर्कस/पकड़े गए जानवर हैं, जिन्हें बेहतर देखरेख और प्राकृतिक वातावरण देने के लिए लाया गया है |
  • उद्यान का एक भाग पहाड़ी है, दूसरा भाग बड़ा तालाब से सटा मैदानी इलाका। पार्क के अंदर ट्रेकिंग के लिए रास्ते हैं और प्राकृतिक व फोटोग्राफी प्रेमियों के लिए बहुत आकर्षक स्थान है |
  • यहाँ का ‘वाइल्ड कैफे’ खासतौर पर मशहूर है, जिसके नीचे से बारिश के समय पानी बहता है और पर्यटक वहाँ बैठकर प्रकृति का आनंद ले सकते हैं |
  • पर्यटन के लिए वॉटर कूलर, शौचालय, विक्रय केंद्र आदि सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
  • यह प्रदेश का सबसे बड़ा और वन विभाग द्वारा संचालित ‘लार्ज जू’ (विशाल चिड़ियाघर) है। अन्य चिड़ियाघर जैसे इंदौर और ग्वालियर में हैं, मगर वे छोटे हैं और नगर निगम द्वारा संचालित होते हैं |
  • प्रवेश समय:
  • 1 अप्रैल से 30 सितंबर: सुबह 7 से शाम 6:30 बजे तक
  • 1 अक्टूबर से 31 मार्च: सुबह 7 से शाम 6 बजे तक
  • हर शुक्रवार, होली, रंगपंचमी को बंद रहता है
  • इतिहास: यह उद्यान 1979 में स्थापित हुआ था और मध्य प्रदेश का प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य है।
  • भोजन: उद्यान के पास कैफे में हल्के नाश्ते और चाय की सुविधा है।
  • ठहरने की जगह: भोपाल शहर में कई होटल्स और रिसॉर्ट्स हैं।
  • करने के लिए चीज़ें: वन्यजीवों का अवलोकन, सफारी।
  • कैसे पहुँचे: भोपाल रेलवे स्टेशन से लगभग 10 किमी, कैब या ऑटो द्वारा पहुँचा जा सकता है।
  • प्रवेश शुल्क: ₹50-₹100।

8. ताज-उल-मस्जिद (Bhopal Paryatan sthal )

यह मस्जिद सफ़ेद रंग की और विशाल मंदिर है | इस मंदिर को मदरसे के तौर पे इस्तेमाल किया जाता है | कभी लगे गए अनुमान के हिसाब से ये एशिया का सबसे बड़ा मस्जिद है | इसका निर्माण भोपाल के आठवे शाशक शाहजहां बेगम के शासन काल में हुआ था, परन्तु धन की कमी के कारण ये पूरा न हो सका | 1971 में भारत सर्कार के दखल के कारण यह पूरा हुआ | ताज उल मस्जिद का अर्थ है ‘मस्जिदों का ताज’। 

भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक, यह मस्जिद अपनी गुलाबी दीवारों और संगमरमर के गुंबदों के लिए प्रसिद्ध है। इसका निर्माण नवाब शाहजहाँ बेगम ने कराया था।

  • ताज-उल मस्जिद एक ऊंचे प्लेटफॉर्म पर बनी है। जहां पहुंचने के लिए कई बड़ी-बड़ी सीढ़ियां बनी हुई हैं। इन सीढ़ियों को देखकर ही आप इसकी भव्यता का अंदाजा लगा सकते हैं।
  • भोपाल की सबसे बड़ी मस्जिद का बड़ा सा प्रांगण इसकी भव्यता को दर्शाता है।
  • ताज-उल मस्जिद का मुख्य द्वार दो मंजिला और 74 फीट ऊंचा है।
  • इसके आंतरिक उत्तरी भाग में जनाना भाग है, जिसमें महिलाएं नमाज अदा कर सकती हैं।
  • ताज-उल मस्जिद के प्रांगण के पश्चिम में इबादत भवन है, जिसमें स्तंभों पर आधारित 9 प्रवेश द्वार और छत हैं, जिसमें 27 खोखले गुंबद हैं।
  • मस्जिद में सोने की स्पाइक से जड़ी लाल सुर्ख रंग की मीनारें हैं।
  • यहां दो सफेद गुंबद जैसी मीनारें हैं जिसे दोपहर में मदरसा के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।
  • ताज-उल मस्जिद में एक मुख्य प्रार्थना हॉल है, जहां जाने के लिए 9 मुख्य द्वार हैं।
  • पता: ताज उल मस्जिद भोपाल, NH 12, Kohefiza, Bhopal, Madhya Pradesh 462001, India
  • इतिहास: यह मस्जिद 19वीं सदी में नवाब शाहजहाँ बेगम द्वारा बनवायी गई थी और भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है।
  • भोजन: मस्जिद के पास स्थानीय भोजनालयों में बिरयानी, कबाब, और अन्य व्यंजन मिलते हैं।
  • ठहरने की जगह: मस्जिद के पास कई होटल्स और गेस्ट हाउस हैं।
  • करने के लिए चीज़ें: मस्जिद का आंतरिक और बाहरी अवलोकन, फोटोग्राफी।
  • कैसे पहुँचे: भोपाल रेलवे स्टेशन से लगभग 3 किमी, ऑटो या कैब द्वारा पहुँचा जा सकता है।
  • प्रवेश शुल्क: निशुल्क |

9. गौहर महल (Bhopal Paryatan sthal )

यह महल बहुत ही भव्य एवं आकर्षक है | गौहर महल भोपाल शहर के बड़े तालाब के किनारे वी.आई.पी. रोड पर शौक़त महल के पास बड़ी झील के किनारे स्थित है। कुदसिया बेगम को गोहर के नाम से भी जाना जाता था जिनके नाम से इस महल का नाम गौहर महल पड गया |

भोपाल की पहली महिला शासक बेगम गौहर द्वारा बनवाया गया यह महल मुग़ल और हिंदू वास्तुकला का मिश्रण है। इसकी नक्काशी और भित्तिचित्र काफी आकर्षक हैं।

गौहर महल का निर्माण 1820 में भोपाल की पहली महिला शासक क़ुदसिया बेगम (गौहर बेगम) ने करवाया था। यह महल हिंदू और मुग़ल वास्तुकला का अद्भुत संगम है। यह नवाबी शासन की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है और महिलाओं की सशक्त भूमिका को दर्शाता है।

  • गौहर महल 4.65 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है।
  • यह महल भोपाल रियासत का पहला महल है।
  • यह महल हिन्‍दु और मुग़ल कला का अद्भुत संगम है |
  • यह वास्तुकला का ख़ूबसूरत नमूना कुदसिया बेगम के काल का है।
  • इस तीन मंजिले भवन का निर्माण भोपाल राज्य की तत्कालीन शासिका नवाब कुदसिया बेगम (सन् 1819-37) ने गौहर महल को 1820 ई. में कराया था।
  • कुदसिया बेगम का नाम गौहर भी था इसलिए इस महल को गौहर महल के नाम से जाना जाता है।
  • इस महल की ख़ासियत यह है कि इसकी सजावट भारतीय और इस्लामिक वास्तुकला को मिलाकर की गई है।
  • इस महल में दीवान-ए आम और दीवान-ए-ख़ास हैं।
  • गौहर महल के आंतरिक भाग में नयनाभिराम फ़व्वारे थे जो कालान्तर में नष्ट हो गये हैं। फ़व्वारों की हौज़ अब भी विद्यमान है।
  • महल के ऊपरी भाग में एक ऐसा कमरा है जिससे पूरे शहर का नज़ारा दिखता है और इसके दरवाज़ों पर कांच से नक़्क़ाशी हो रखी है।
  • गौहर महल की दीवारों पर लकड़ी के नक़्क़ाशीदार खम्भा, वितान और मेहराबें हैं। स्तंभों पर आकृतियां और फूल-पत्तियों का अंकन है।
  • आंतरिक हिस्से में बेगम का निवास था जिसकी खिड़कियों से बड़े तालाब का मनोरम दृश्य दिखाई देता है।
  • भवन की दूसरी मंज़िल पर एक प्रसूतिगृह था, जिसकी दीवारों पर रंगीन चित्र बने थे।
श्रेणीजानकारी
भोजनमहल के पास स्थित चौक बाज़ार क्षेत्र में भोपाली बिरयानी, कबाब, कीमा पराठा और मिठाइयाँ (जैसे रबड़ी और फालूदा) लोकप्रिय हैं। शाम के वक्त स्ट्रीट फूड का आनंद लिया जा सकता है।
ठहरने की जगहमहल के आसपास कई बजट होटल्स और गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं। कुछ नज़दीकी विकल्प हैं: Hotel Lake View Ashok, Hotel Shalimar Deluxe, Jehan Numa Palace (लग्ज़री विकल्प)
करने के लिए चीज़ेंमहल की नक्काशी और स्थापत्य कला देखना, फोटोग्राफी, स्थानीय हस्तशिल्प और कला प्रदर्शनियाँ (कभी-कभी आयोजित होती हैं),आसपास के चौक बाज़ार में खरीदारी करना
कैसे पहुँचेरेलवे स्टेशन से दूरी: लगभग 2.5 किमी, बस स्टैंड: ISBT से 5 किमी, ट्रांसपोर्ट: ऑटो, ई-रिक्शा या कैब से आसानी से पहुँचा जा सकता है
प्रवेश शुल्कआम तौर पर निशुल्क, लेकिन विशेष आयोजनों के दौरान प्रवेश शुल्क लिया जा सकता है (₹10–₹50)।
खुलने का समयसुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक (सोमवार को बंद रह सकता है)

10. शौकत महल और सदर मंज़िल

शौकत महल यूरोपीय और इस्लामी वास्तुकला का अद्भुत मेल है। इसके पास ही स्थित सदर मंज़िल, कभी भोपाल नवाबों का दरबार हुआ करता था।

शौकत महल का निर्माण नवाब सुल्तान जहां बेगम के शासनकाल में हुआ था। यह महल यूरोपीय (फ्रेंच) और इस्लामी वास्तुकला का अनोखा मिश्रण है, जो नवाबी युग में रचनात्मकता की मिसाल माना जाता है।इसके पास स्थित सदर मंज़िल, नवाबों का दरबारी भवन था और यहाँ राज्य शासन का प्रशासनिक कामकाज चलता था। इसकी इमारत लाल पत्थरों से बनी हुई है और इसे आज नगरपालिका कार्यालय के रूप में भी प्रयोग किया जाता है।

शौकत महल

  • इस महल को बनवाने का काम भोपाल राज्य की प्रथम महिला शासिका नवाब कुदसिया बेगम ने सन् 1830 ई. में कराया था |
  • यह महल इस्‍लामिक और यूरोपियन शैली का मिश्रण है।
  • यहाँ पश्चिमी वास्तु और इस्लामी वास्तु का नायाब अद्भुत संगम है।
  • शौक़त महल समन्वयवादी स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • इस महल का आकल्पन एक फ़्रान्सीसी वास्तुविद ने किया था।
  • यह महल लोगों की पुरातात्विक जिज्ञासा को जीवंत कर देता है।
  • इस महल में नवाब जहांगीर मोहम्मद ख़ान और उनकी बेगम नवाब सिकन्दर जहां अपने शुरुआती दौर में रहे थे।
  • उनके बाद शासिका बनने के पहले शाहजहां बेगम अपने शौहर नवाब उमराव दूल्हा के साथ रहती थीं।
  • शौक़त महल के सामने एक विशाल गुलाब उद्यान था।

सदर मंज़िल

  • वर्ष 1898 ई. में सदर मंजिल की शानदार इमारत का निर्माण तत्कालीन नवाब शाहजहां बेगम द्वारा कराया गया था।
  • भोपाल स्थित अनोखा सदर मंजिल शामला की पहाडियों पर 200 एकड के क्षेत्र में फैला हुआ है।
  • सदर मंजिल जिस स्‍थान पर बनी है, उसे प्रागैतिहासिक काल से संबंधित माना जाता है।
  • वर्ष 1901 ई. में नवाब शाहजहां बेगम की मृत्यु के बाद उनकी एकमात्र पुत्री नवाब सुल्तानजहां बेगम जब नवाब भोपाल बनी तब उन्होंने सदर मंजिल को रियासत के दरबार हॉल के रूप में परिवर्तित कर दिया था।
  • इस मंजिल में भारत के विभिन्‍न राज्‍यों की जनजातीय संस्‍कृति की झलक देखी जा सकती है।
  • सदर मंजिल की पच्चीकारी दिल्ली के लाल किला स्थित दीवाने ख़ास के अनुरूप है।
  • अनेक ब्रिटिश वायसराय और देश की स्वतंत्रता के बाद महत्त्वपूर्ण राज नेताओं का यहाँ आगमन होता रहा है।
  • वर्ष 1953 में स्वर्गीय डॉ. शंकर दयाल शर्मा के मुख्यमंत्रित्व काल में इस दरबार हॉल में भोपाल शहर की नगर पालिका स्थापित की गई थी।
  • कहा जाता है कि भोपाल के शासक सदर मंजिल का इस्‍तेमाल पब्लिक हॉल के रूप में करते थे।
श्रेणीजानकारी
भोजनपास ही का चौक बाजार भोजन प्रेमियों के लिए आदर्श स्थान है। यहाँ भोपाली बिरयानी, कबाब, कीमा, चाट, समोसे और पारंपरिक मिठाइयाँ जैसे फिरनी और फालूदा प्रसिद्ध हैं।
नजदीक कुछ बढ़िया रेस्टोरेंट्स हैं: Zam Zam Fast Food, Manohar Dairy
ठहरने की जगहHotel Royal Sheraton, Hotel Arch Manor, Hotel Lake View Ashok (लग्ज़री विकल्प), सभी होटल्स 3-5 किमी की दूरी पर हैं।
करने के लिए चीज़ेंइमारतों की भव्यता और वास्तुकला का अवलोकन, फोटोग्राफी, चौक बाजार में खरीदारी, पास के गौहर महल और ताज-उल-मस्जिद भी घूम सकते हैं
कैसे पहुँचेभोपाल रेलवे स्टेशन से दूरी: लगभग 3 किमी, ISBT बस स्टैंड से दूरी: लगभग 6 किमी, कैब, ऑटो, या लोकल बस द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है
प्रवेश शुल्कआमतौर पर निशुल्क, लेकिन कुछ संरक्षित हिस्सों या विशेष प्रदर्शनों के लिए ₹10–₹30 तक शुल्क लग सकता है।
खुलने का समयसुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक (सरकारी अवकाश पर बंद हो सकता है)

11. राज्य पुरातत्व संग्रहालय (Bhopal Paryatan sthal )

यहाँ प्राचीन मूर्तियों, शिलालेखों और ऐतिहासिक अवशेषों का विशाल संग्रह है, जो मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं।

राज्य पुरातत्व संग्रहालय की स्थापना मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित और प्रदर्शित करने के लिए की गई थी। यह संग्रहालय भोपाल के श्यामला हिल्स क्षेत्र में स्थित है और इसमें मौर्य, गुप्त, शुंग, प्रतिहार, परमार व अन्य कालों की मूर्तियाँ, शिलालेख, चित्रकला और पुरातात्विक अवशेष संग्रहित हैं। यह संग्रहालय 2005 में नए भवन में स्थानांतरित हुआ।

  • पुरातात्विक धरोहर को संरक्षित करने के लिए यह संग्रहालय स्थापित किया गया है।
  • यहाँ मध्‍य प्रदेश के विभिन्‍न भागो से कला के ख़ूबसूरत नमूने और मूर्तियों को एकत्रित करके रखा गया है।
  • इस संग्रहालय के परिसर में विश्व धरोहर भीमबेटका के समान प्रागैतिहासिक काल के शैल चित्र अपने मूल रूप में विद्यमान हैं।
  • विभिन्‍न स्‍कूलों से एकत्रित की गई पेंटिग्‍स (चित्रकारियाँ), बाघ गुफाओं की चित्रकारियों की प्रतिलिपियाँ, लक्ष्मी  और बुद्ध  की प्रतिमाएँ इस संग्रहालय में सहेजकर रखी गई हैं।
  • पुरातात्विक संग्रहालय की दुकानों से पत्‍थरों की मूर्तियों ख़रीदी जा सकती हैं।
  • प्राचीन संस्कृति से अवगत होने में पुरातात्विक संग्रहालय मददगार साबित है क्योंकि इस संग्रहालय में शोधार्थियों और इतिहासकारों को जानकारी प्रदान करने के लिए काफ़ी वस्तुएँ मौजूद है।
श्रेणीजानकारी
भोजनसंग्रहालय के आसपास सीमित खाने-पीने की सुविधा है, लेकिन 1-2 किमी दूर भारत भवन, मानव संग्रहालय और श्यामला हिल्स रोड पर अच्छे रेस्टोरेंट्स व स्ट्रीट फूड स्टॉल मिलते हैं।
पास में मिलने वाले प्रमुख व्यंजन: पोहा-जलेबी, चाय, समोसे, भेलपुरी।
ठहरने की जगहJehan Numa Retreat, Hotel Lake View Ashok, Hotel Shagun, ये होटल संग्रहालय से 1–3 किमी के भीतर स्थित हैं और विभिन्न बजट में उपलब्ध हैं।
करने के लिए चीज़ेंप्राचीन मूर्तियाँ और अवशेष देखना, शिलालेखों का अध्ययन करना, चित्रकला और सिक्कों का संग्रह देखना, बच्चों और छात्रों के लिए ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त करना, फोटोग्राफी (जहाँ अनुमति हो)
कैसे पहुँचेभोपाल रेलवे स्टेशन से दूरी: लगभग 6 किमी, ISBT बस स्टैंड से दूरी: लगभग 7 किमी, लोकल ट्रांसपोर्ट: कैब, ऑटो, या लोकल बस के माध्यम से पहुँचा जा सकता है
प्रवेश शुल्कभारतीय नागरिक: ₹20 प्रति व्यक्ति, विदेशी नागरिक: ₹100 प्रति व्यक्ति, कैमरा शुल्क: ₹50 (यदि लागू हो)
खुलने का समयमंगलवार से रविवार: सुबह 10:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक
सोमवार को बंद रहता है

12. लक्ष्मीनारायण मंदिर (बिरला मंदिर) (Bhopal Paryatan sthal )

यह मंदिर एक पहाड़ी पर स्थित है जहाँ से भोपाल शहर का सुंदर दृश्य दिखाई देता है। मंदिर परिसर में एक छोटा संग्रहालय भी है।

यह भव्य मंदिर बिरला परिवार द्वारा बनवाया गया था और इसे लक्ष्मीनारायण मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को समर्पित है। मंदिर के साथ एक संग्रहालय भी है जिसमें मूर्तियाँ और ऐतिहासिक वस्तुएँ प्रदर्शित की गई हैं।मंदिर ऊँची पहाड़ी पर स्थित है, जहाँ से भोपाल शहर का सुंदर दृश्य दिखाई देता है। इसका निर्माण 20वीं सदी के उत्तरार्ध में हुआ था।

  • यह मंदिर भोपाल के मालवीय नगर क्षेत्र, अरेरा पहाड़ी पर, बड़ी झील के दक्षिण में स्थित है। तीसरी मंजिल से झील और शहर का सुन्दर दृश्य दिखाई देता है
  • मंदिर का शिलान्यास 1960 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. कैलाशनाथ काटजू ने किया था।
  • उद्घाटन 1964 में मुख्यमंत्री द्वारका प्रसाद मिश्र द्वारा हुआ।
  • इसे प्रमुख औद्योगिक बिड़ला परिवार ने बनवाया, इसलिए इसे ‘बिरला मंदिर’ भी कहते हैं |
  • यह मंदिर भगवान विष्णु (नारायण) और देवी लक्ष्मी को समर्पित है। साथ ही शिव, माँ जगदम्बा, हनुमानजी और शिवलिंग की प्रतिमाएं भी हैं |
  • मंदिर संगमरमर से बना है और इसके अंदर विविध पौराणिक दृश्य और गीता व रामायण के उपदेशों की नक्काशी बनी है |
  • मुख्य द्वार के सामने एक विशाल शंख बना हुआ है, जो आकर्षण का केंद्र है |
  • मंदिर लगभग 7-8 एकड़ पहाड़ी क्षेत्र में फैला हुआ है, चारों ओर हरियाली और शांत वातावरण है |
  • मंदिर को जन्माष्टमी पर काफी सजाया जाता है यहाँ पर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है और भारी संख्या में श्रद्धालु इकठ्ठे होते हैं |
  • मंदिर परिसर के पास एक संग्रहालय है, जिसमें मध्य प्रदेश के कई जिलों से लायी गई प्राचीन मूर्तियां और कलाकृतियां रखी गई हैं।
  • स्थापना के समय विशाल विष्णु महायज्ञ आयोजित हुआ था |
  • संग्रहालय सोमवार को छोड़ अन्य दिनों सुबह 9 से शाम 5 बजे तक खुला रहता है |
  • मंदिर का सौम्य माहौल और प्राकृतिक सौंदर्य स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों—दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बना देता है।
  • यह भोपाल के सबसे लोकप्रिय मंदिरों में से एक है, जहाँ शांति और आध्यात्मिक का एहसास किया जा सकता है

श्रेणीजानकारी
भोजनमंदिर के पास छोटी-छोटी चाय और स्नैक्स की दुकानों के अलावा 1-2 किमी दूर MP Nagar और New Market में कई अच्छे रेस्टोरेंट उपलब्ध हैं।
लोकप्रिय विकल्प: पोहा-जलेबी, समोसे, भेलपुरी, और शुद्ध शाकाहारी भोजन।
ठहरने की जगहHotel Amar Vilas, Hotel Rajhans Regency, Hotel Shree Vatika, ये सभी होटल मंदिर से 1-3 किमी के भीतर हैं और बजट से लेकर प्रीमियम श्रेणी तक के विकल्प उपलब्ध हैं।
करने के लिए चीज़ेंमंदिर में दर्शन और पूजा, संग्रहालय भ्रमण, भोपाल शहर का पैनोरमिक व्यू देखना, सुबह या शाम की आरती में भाग लेना, फोटोग्राफी
कैसे पहुँचेभोपाल रेलवे स्टेशन से दूरी: लगभग 5 किमी, ISBT बस स्टैंड से दूरी: लगभग 7 किमी, लोकल ट्रांसपोर्ट: ऑटो, कैब, और लोकल बस से आसानी से पहुँचा जा सकता है
प्रवेश शुल्कमंदिर दर्शन: नि:शुल्क, संग्रहालय प्रवेश: ₹10 – ₹20 प्रति व्यक्ति, फोटोग्राफी: सामान्यतः अनुमति है (विशेष कैमरा के लिए पूछना आवश्यक)
खुलने का समयसुबह 6:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक
शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक
(संग्रहालय सुबह 9:00 से शाम 5:00 बजे तक खुला रहता है)

13. कमला पार्क

बड़ा तालाब के किनारे स्थित यह पार्क शाम की सैर और फोटोग्राफी के लिए आदर्श स्थान है। यहाँ से झील और हेरिटेज भवनों का दृश्य मन को लुभाता है।

कमला पार्क भोपाल के सबसे पुराने और लोकप्रिय सार्वजनिक उद्यानों में से एक है। इसका नाम भोपाल की शासिका कमला नेहरू के नाम पर रखा गया है। यह पार्क छोटा तालाब के किनारे स्थित है और इसका वातावरण शांतिपूर्ण और हरियाली से भरपूर है। यह स्थान सुबह की सैर, परिवार के साथ घूमने और झील के किनारे बैठने के लिए उपयुक्त माना जाता है।

  • कमला पार्क का नाम गोंड राजवंश की रानी कमलापति के नाम पर रखा गया है। रानी कमलापति भोपाल-गिन्नौरगढ़ के राजा निजाम शाह की पत्नी थीं और गोंड राजवंश की अंतिम रानी मानी जाती हैं |
  • कमला पार्क परिसर में रानी कमलापति का ऐतिहासिक महल मौजूद है, जिसे जल महल भी कहा जाता है। इस महल की तीन मंज़िलें आज भी पानी में डूबी हुई हैं और इसे देखना अपने आप में एक रहस्यमयी अनुभव है |
  • प्रसिद्ध कथाओं के अनुसार, रानी कमलापति ने इसी महल में जल समाधि ली थी, जिससे यह जगह और भी ऐतिहासिक और आकर्षक बन जाती है |
  • कमला पार्क भोपाल की छोटी झील के किनारे स्थित है और आसपास करिश्मा पार्क भी है। इसके पास से ही ‘भोज सेतु’ गुजरता है, जो बड़ी और छोटी झील को जोड़ता है।
  • पार्क में सुंदर बगीचे, हरियाली और जलराशि का मनोहर दृश्य पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। सूर्यास्त के समय यहाँ झील के किनारे का दृश्य अद्भुत होता है, जो आपकी यात्रा को यादगार बना देता है |
  • कमला पार्क बच्चों, युवाओं और परिवारों के बीच भोपाल का एक लोकप्रिय पिकनिक स्थल और घूमने की जगह है
  •  रानी कमलापति महल भोपाल के पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है। यहाँ पर सुरंगों और पुराने किले के अवशेष भी मिलते हैं, जिसे देखने के लिए लोग आते हैं |
  • महल के नीचे से सुरंग निकली हुई थी, जो बड़े तालाब से छोटे तालाब की ओर जाती थी—ऐसा माना जाता है कि कभी इसे खास प्रयोजनों के लिए इस्तेमाल किया जाता था, हालाँकि आज यह बंद कर दी गई है |
श्रेणीजानकारी
भोजनपार्क के पास कई स्ट्रीट फूड स्टॉल और स्थानीय भोजनालय मौजूद हैं। यहाँ पोहा, समोसे, भेलपुरी, चाय, जलेबी जैसे व्यंजन लोकप्रिय हैं। पास के चौक बाजार और न्यू मार्केट में रेस्टोरेंट की अच्छी सुविधा है।
ठहरने की जगहHotel Lake View Ashok, Hotel Shalimar Deluxe, Hotel Amer Palace, ये होटल्स पार्क से 2–5 किमी के भीतर हैं और बजट से लेकर लग्ज़री तक के विकल्प उपलब्ध हैं।
करने के लिए चीज़ेंछोटा तालाब के किनारे सैर, बोटिंग का आनंद (तालाब में), फोटोग्राफी, पार्क में पिकनिक या योग, सुबह-शाम की सैर और शांत वातावरण का अनुभव
कैसे पहुँचेभोपाल रेलवे स्टेशन से दूरी: लगभग 3 किमी, ISBT बस स्टैंड से दूरी: लगभग 6 किमी, लोकल ट्रांसपोर्ट: ऑटो, ई-रिक्शा, कैब और सिटी बस उपलब्ध
प्रवेश शुल्कनि:शुल्क (बोटिंग या किसी आयोजन के लिए शुल्क लग सकता है, ₹20–₹100 तक)
खुलने का समयप्रतिदिन सुबह 6:00 बजे से रात 9:00 बजे तक (रात में सुरक्षा कारणों से सीमित पहुँच हो सकती है)

14. करिश्मा गार्डन और नेशनल पार्क

‘करिश्मा गार्डन’ और नेशनल पार्क दोनों ही भोपाल शहर के लोकप्रिय गार्डन हैं | यहाँ पर समय बिताना प्रमुख राष्ट्रए उद्यान जैसा अनुभव देता है |

करिश्मा पार्क छोटी झील के किनारे स्थित है और जो बहुत ही सुन्दर है | यहाँ का वातावरण शांत तथा सुखद है | यह बच्चो के घूमने के लिए एक आदर्श स्थान है | यहाँ सुबह शाम घुमा जा सकता है और पिकनिक के लिए भी काफी अच्छा स्थान है |

नेशनल पार्क बड़े तालाब के पास स्थित है, यह शहर का प्रमुख नेशनल पार्क है | यहाँ आपको ब्लैकबक, चीतल, सांभर, नीलगाय, जंगली सूअर, लकड़बग्घा, साही जैसे कई वन्यजीव देखने को मिलेंगे। 

यह विशेष रूप से बच्चों और परिवार के साथ घूमने के लिए बेहतरीन जगह है। हरियाली और प्राकृतिक वातावरण यहाँ की खासियत है।

करिश्मा गार्डन

  • यह गार्डन भोपाल के छोटी झील (Lower Lake) के किनारे स्थित है, जो पर्यटकों और शहरवासियों के बीच शाम की सैर के लिए प्रसिद्ध जगह माना जाता है।
  • गार्डन में रंग-बिरंगे फूल और प्राकृतिक हरियाली के साथ-साथ मछलीघर भी है जहाँ विभिन्न रंगीन मछलियाँ देखी जा सकती हैं। यह जगह खासतौर पर सूर्यास्त के समय बेहद मनमोहक लगती है।
  • करिश्मा गार्डन में बच्चों के खेलने के लिए भी क्षेत्र है और यह परिवारों के लिए पिकनिक स्थल के रूप में लोकप्रिय है।

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान (नेशनल पार्क)

  • यह भोपाल शहर के बीच स्थित एक खास राष्ट्रीय उद्यान है, जो 1983 में स्थापित हुआ। इसे तीन प्रमुख कार्यों के लिए जाना जाता है: राष्ट्रीय उद्यान, चिड़ियाघर और वन्य जीव रेस्क्यू सेंटर।
  • यहाँ आप बाघ, शेर, हिरण, तेंदुआ, भालू, और 250 से अधिक पक्षियों को देख सकते हैं। उद्यान में अनेक प्रकार के वनस्पति और जीव-जंतु संरक्षण के लिए प्रयास किए जाते हैं।
  • वन विहार राष्ट्रीय उद्यान भोपाल का सबसे बड़ा पारिस्थितिक क्षेत्र है और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक अच्छी जगह भी है है।

15. DB मॉल और न्यू मार्केट (Bhopal Paryatan sthal )

अगर आप खरीदारी के शौकीन हैं, तो DB मॉल और न्यू मार्केट आपके लिए आदर्श स्थान हैं। यहाँ पर स्थानीय हस्तशिल्प से लेकर ब्रांडेड वस्तुएँ सब मिलती हैं।

डीबी सिटी मॉल

डीबी सिटी मॉल मध्य भारत के सबसे बड़े, सबसे आधुनिक और लोकप्रिय मॉल्स में से एक है; यह 2010 में शुरू हुआ और लगभग 13 लाख वर्ग फीट क्षेत्र में फैला हुआ है। यहाँ एक छत के नीचे 135 से अधिक भारतीय और अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स, फूड कोर्ट, पांच रेस्तराँ, कैफे, ग्रोसरी स्टोर, फन जोन और छह-स्क्रीन मल्टीप्लेक्स मौजूद हैं। यह न सिर्फ़ खरीदारी के लिए बल्कि मनोरंजन, अवकाश और फैमिली टाइम के लिए भी शानदार जगह है—यहाँ महीने में लगभग 10-18 लाख विज़िटर आते हैं। बच्चों के लिए टॉय ट्रेन, परिवारों के लिए बड़ा गेमिंग एरिया और हाल ही में जुड़ा कोर्टयार्ड मैरियट होटल इसकी विशिष्टता बढ़ाते हैं।

न्यू मार्केट

न्यू मार्केट भोपाल का सबसे लोकप्रिय पारंपरिक बाजार है, जो वर्षों से हर वर्ग के लोगों के लिए किफ़ायती और विविध शॉपिंग का अड्डा बना हुआ है। यहाँ कपड़े, जूते, घरेलू सामान, किताबें, गिफ्ट आइटम्स, सजावटी सामान, स्ट्रीट फूड और हस्तशिल्प के सबसे ज़्यादा विकल्प बेहद वाजिब दामों पर मिलते हैं। हँसमुख और हलचल से भरे माहौल के कारण यह स्थानीय रहन-सहन एवं रोज़मर्रा की ज़रूरतों से लेकर विवाह तथा त्योहारों की शॉपिंग तक के लिए लोगों की पसंदीदा जगह है।

पहलूडीबी सिटी मॉलन्यू मार्केट
स्थानमहाराणा प्रताप नगर, एमपी नगरटीटी नगर, शहर का मध्य
शॉपिंग अनुभवब्रांडेड, मॉडर्न, एक छत के नीचे सब कुछलोकल, किफायती, विविधता से भरपूर
उपलब्धता135+ ब्रांड्स, फूड कोर्ट, मल्टीप्लेक्स, पबकपड़े, फुटवियर, घरेलू सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स
भीड़त्योहारों पर बहुत अधिक, सामान्यतः नियंत्रितहमेशा भीड़-भाड़, खासकर महिलाओं के लिए
मनोरंजनमल्टीप्लेक्स, गेमिंग ज़ोन, रेस्टोरेंट्ससीमित, मुख्यतः शॉपिंग केंद्रित
दामब्रांडेड, मिड-टू-हाई रेंजकिफायती, बार्गेनिंग की सुविधा

16. हबीबगंज रेलवे स्टेशन परिसर

यह भारत का पहला पुनर्विकसित और हवाई अड्डे जैसा दिखने वाला रेलवे स्टेशन है। इसकी आधुनिक सुविधाएं और डिज़ाइन पर्यटकों को प्रभावित करते हैं।

  • 14 नवंबर 2021 को हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर रानी कमलापति रेलवे स्टेशन रखा गया |
  • यह नाम भोपाल रियासत की अंतिम हिंदू रानी, रानी कमलापति के सम्मान में रखा गया है |
  • भारत का पहला निजी (प्राइवेट) रेलवे स्टेशन: इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत इंटरनेशनल स्तर पर डेवलप किया गया है |
  • एयरपोर्ट जैसी सुविधाएँ: स्टेशन में लिफ्ट, एस्केलेटर, एयर कंडीशन्ड वेटिंग रूम, डॉरमिटरी, रिटायरिंग रूम, वर्ल्ड क्लास शॉपिंग सेंटर, रेस्टोरेंट, फूड कोर्ट, पार्किंग, और फाइव स्टार होटल जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं

17. केरवा डैम

यह डैम भोपाल शहर से लगभग 15-16 किलो मीटर दूर  मेंडोरा गाँव के पास स्थित है | करवा डैम भोपाल में पानी का स्त्रोत भी है |

प्राकृतिक शांति के बीच, यह डैम पिकनिक और एडवेंचर गतिविधियों के लिए बहुत प्रसिद्ध है। यहाँ ट्री वॉक और ट्रैकिंग भी की जा सकती है।

  • प्राकृतिक सौंदर्य: मानसून के मौसम में केरवा डैम का क्षेत्र हरियाली से भर जाता है और झील का दृश्य बहुत सुंदर हो जाता है |
  • परिवार और दोस्तों के लिए: यह स्थान परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए आदर्श है। आसपास की घाटियाँ और पहाड़ियाँ इसे और भी आकर्षक बनाती हैं |
  • सावधानी: हाल ही में यहाँ टाइगर मूवमेंट की खबरें भी आई हैं, इसलिए पर्यटकों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है |
  • धार्मिक स्थल: डैम के पास भगवान श्रीराम, महादेव और माँ दुर्गा के मंदिर भी हैं

18. कलियासोत डैम

यह भी एक शांत और सुरम्य स्थान है जहाँ आप प्रकृति के बीच सुकून भरे पल बिता सकते हैं। यह खासकर मानसून में बेहद सुंदर दिखता है।  यह डैम भोपाल के मध्य में चुनाभट्टी और नेहरू नगर रहवासी कॉलोनी के पास स्थित है

  • स्थान: चुनाभट्टी और नेहरू नगर के पास, भोपाल शहर के मध्य में |
  • नदी: यह डैम कलियासोत नदी पर बना है, जो बेतवा नदी में मिलती है |
  • उपयोग: मुख्य रूप से सिंचाई के लिए उपयोग किया जाता है। नवंबर से फरवरी के बीच रबी की फसलों के लिए भोपाल और रायसेन जिलों में लगभग 10,425 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है |
  • जल प्रबंधन: डैम में 13 गेट हैं, जिनके माध्यम से वर्षा के अतिरिक्त जल को नियंत्रित किया जाता है। भारी बारिश के दौरान इन गेट्स को खोला जाता है, जिससे आसपास के इलाकों में जलस्तर नियंत्रित रहे

19. सीहोर रोड और फतेहगढ़ फोर्ट

सीहोर रोड भोपाल का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जो शहर को सीहोर और अन्य पश्चिमी क्षेत्रों से जोड़ता है। यह शहर को सीहोर जिले से जोड़ता है | होर रोड से भोपाल के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक आसानी से पहुँचा जा सकता है। यह सड़क परिवहन और व्यापार के लिए भी महत्वपूर्ण है।

भोपाल के बाहरी इलाकों में स्थित यह किला और सड़क यात्रा रोमांच पसंद लोगों के लिए बेहतरीन हैं। यहाँ से आसपास के गांवों और पहाड़ियों का दृश्य शानदार होता है।

फतेहगढ़ किला, भोपाल

  • निर्माणकर्ता: दोस्त मोहम्मद ख़ान (भोपाल रियासत के संस्थापक)
  • निर्माण वर्ष: 1726 ईस्वी
  • नाम का कारण: अपनी पत्नी बीवी फतेह के नाम पर ‘फतेहगढ़’ नाम रखा गया।
  • दोस्त मोहम्मद ख़ान के बाद उनके उत्तराधिकारी यार मोहम्मद खान और फिर फैज़ मोहम्मद खान ने इस किले पर शासन किया।

20. रानी कमलापति पैलेस और स्टेशन

नवीनतम परिवर्तनों के बाद यह स्टेशन स्मार्ट सुविधाओं से लैस हो गया है। इसके पास बना कमलापति पैलेस इतिहास की झलक देता है।

रानी कमलापति पैलेस (महल):

  • यह ऐतिहासिक पैलेस भोपाल की बड़ी झील और छोटी झील के बीच पुल पर, कमला पार्क के भीतर स्थित है
  • पैलेस का निर्माण लगभग 300 साल पहले (लगभग 1722 ई.) गोंड शासक निजाम शाह की प्रिय रानी, रानी कमलापति ने करवाया था |
  • इसे लाखौरी ईंटों और मेहराबदार अलंकरण के साथ दो मंज़िला वास्तुकला में बनाया गया; खंभों को कमल की पंखुड़ियों और मेहराबों से सजाया गया है, जो इसकी खूबसूरती को बढ़ाते हैं |
  • कभी इस महल की सात मंज़िलें थीं, जिनमें से नीचे की पांच मंज़िलें अब पानी में डूबी हुई हैं
  • महल की बालकनियाँ झील और बगीचे की ओर खुलती हैं, जिससे यह भोपाल की स्थापत्य कला का अलग उदाहरण है |
  • रानी कमलापति का जीवन संघर्ष, अकाल, युद्ध और बलिदान से जुड़ा है; ऐतिहासिक मान्यता है कि उन्होंने अपने राज्य व सम्मान की रक्षा हेतु जल समाधि ले ली थी |
  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने 1989 में इसे ‘राष्ट्रीय महत्व के स्मारक’ के रूप में संरक्षित किया
  • इसे ‘जहाज महल’ और ‘भोजपाल का महल’ नाम से भी जाना जाता है

रानी कमलापति रेलवे स्टेशन:

  • भोपाल का प्रसिद्ध हबीबगंज रेलवे स्टेशन अब रानी कमलापति के नाम पर है, जो गोंड रानी की ऐतिहासिक विरासत और योगदान को सम्मानित करता है |
  • यह स्टेशन भारत का पहला विश्व-स्तरीय, अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस “पीपीपी मॉडल” रेलवे स्टेशन है, जिसमें एयरपोर्ट जैसी सुख-सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
  • स्टेशन का नाम बदलना क्षेत्रीय धरोहर, महिला सशक्तिकरण और आदिवासी अस्मिता का प्रतीक कदम माना जाता है |
  • स्टेशन और पैलेस दोनों भोपाल के महत्त्वपूर्ण दर्शनीय स्थल और ऐतिहासिक-सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं |
विषयजानकारी
निर्माण वर्ष (महल)1722 ई.
निर्मातारानी कमलापति (गोंड शासक निजाम शाह की पत्नी)
स्थानकमला पार्क, भोपाल
विशेषता (महल)3 मंजिलें पानी में डूबी, जल समाधि स्थल
रेलवे स्टेशनरानी कमलापति रेलवे स्टेशन (पूर्व: हबीबगंज)
स्टेशन की विशेषताभारत का पहला विश्व स्तरीय निजी रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं

भोपाल क्यों है खास?

भोपाल की खासियत उसकी विविधता में है — जहाँ एक ओर प्राचीन संस्कृति की झलक है, वहीं दूसरी ओर आधुनिकता का स्पर्श भी। झीलों की नगरी के रूप में प्रसिद्ध यह शहर न सिर्फ़ देखने में सुंदर है, बल्कि इसके लोग भी बेहद मिलनसार और आतिथ्यभाव से भरपूर हैं।

यात्रा सुझाव (Travel Tips):

  • भोपाल घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक है।
  • शहर में लोकल ट्रांसपोर्ट (ऑटो, कैब, मेट्रो) की अच्छी सुविधा उपलब्ध है।
  • वाटर बोटिंग, ट्रैकिंग और म्यूज़ियम विज़िट के लिए टिकट्स ऑनलाइन या ऑन-साइट मिल जाते हैं।
  • स्थानीय व्यंजन जैसे भोपाली कबाब, बिरयानी और पोहे जरूर चखें।

निष्कर्ष :

भोपाल सिर्फ़ एक शहर नहीं, एक अनुभव है — झीलों, इतिहास, कला और संस्कृति का ऐसा संगम, जो आपको बार-बार बुलाएगा। अगर आप भारत की आत्मा को महसूस करना चाहते हैं, तो इन 20 अद्भुत Bhopal Paryatan Sthal को अपनी यात्रा सूची में अवश्य शामिल करें। यकीन मानिए, यह यात्रा आपके जीवन की सबसे खूबसूरत यादों में से एक बन जाएगी।

FAQ


सांची स्तूप की भव्यता क्यों विश्व धरोहर स्थल है?

Ans. Bhopal Paryatan sthal :  सांची स्तूप की भव्यता और ऐतिहासिक महत्व ही इसे विश्व धरोहर स्थल बनाते हैं। यह स्तूप भारत की सबसे प्राचीन पत्थर संरचनाओं में से एक है, जिसका निर्माण सम्राट अशोक ने तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए करवाया था | स्तूप का विशाल अर्धगोलाकार गुंबद, चारों ओर बनी वेदिका (बाड़), और चारों दिशाओं में बने भव्य तोरण द्वार इसकी स्थापत्य कला को अद्वितीय बनाते हैं |
लगभग 1300 वर्षों तक लगातार इसमें विभिन्न शासकों द्वारा निर्माण और विस्तार होता रहा, जिससे यह स्थल ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया |  1989 में यूनेस्को ने सांची स्तूप को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया, क्योंकि यह न केवल भारतीय बल्कि वैश्विक सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत उदाहरण है |

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