couple jaipur me ghumne ki jagah, जयपुर, राजस्थान का दिल और अपनी भव्यता, ऐतिहासिक धरोहर और सांस्कृतिक धारा के लिए प्रसिद्ध है। जयपुर भारत के सबसे बड़े राज्य, राजस्थान की राजधानी है | जयपुर राजस्थान का सबसे बड़ा राज्य है | जयपुर, जिसे ‘पिंक सिटी’ या ‘गुलाबी नगरी’ के नाम से भी जाना जाता है | इसको सबसे पहले स्टैनली रीड ने पिंक सिटी बोला था ।
जयपुर की स्थापना आमेर के राजा सवाई जयसिंह (द्वितीय) ने की थी | यूनेस्को द्वारा जुलाई 2019 में जयपुर को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी का दर्जा दिया गया | जयपुर अपनी समृद्ध भवन निर्माण-परंपरा, सरस-संस्कृति और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यह शहर तीन ओर से अरावली पर्वत से घिरा हुआ है। जयपुर शहर की पहचान यहाँ के महलों और पुराने घरों में लगे गुलाबी धौलपुरी पत्थरों से होती है जो यहाँ के स्थापत्य की खूबी है।
1876 में तत्कालीन ब्रिटिश जमींदार सवाई रामसिंह ने इंग्लैंड की महारानी एलिज़ाबेथ प्रिंस ऑफ वेल्स युवराज अल्बर्ट के स्वागत में पूरे शहर को गुलाबी रंग से सजा दिया था। तभी से इस शहर का नाम गुलाबी नगरी पड़ा गया। जयसिंह द्वितीय के नाम पर ही इस शहर का नाम जयपुर पड़ा।

यह शहर न केवल एक पर्यटक स्थल के रूप में लोकप्रिय है, बल्कि कपल्स के लिए भी रोमांटिक और मजेदार अनुभव का खजाना प्रस्तुत करता है।
अगर आप अपने पार्टनर के साथ जयपुर घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो यहां कुछ ऐसी शानदार जगहें हैं, जो आपके इस सफर को और भी यादगार बना सकती हैं। आइए जानते हैं जयपुर में कपल्स के लिए 20 बेहतरीन जगहों के बारे में।
जयपुर पहुँचने का बजट – (एक व्यक्ति के लिए)
| माध्यम | स्थान के अनुसार खर्च | टिप्पणी |
|---|---|---|
| ट्रेन (स्लीपर/3AC) | ₹300 – ₹1000 (दिल्ली/मुंबई/अहमदाबाद से) | IRCTC से बुकिंग करें |
| बस (AC/Non-AC) | ₹400 – ₹1200 (राजस्थान, दिल्ली, MP से) | राजस्थान रोडवेज या प्राइवेट वोल्वो बसें |
| फ्लाइट | ₹1500 – ₹5000 (सस्ती बुकिंग में) | जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट |
| स्थानीय ट्रांसपोर्ट | ₹100 – ₹300/दिन (ऑटो, कैब, ई-रिक्शा, लोकल बसें) | Ola, Uber उपलब्ध |
जयपुर में ठहरने का खर्च
| होटल टाइप | प्राइस/रात (₹) | उदाहरण |
|---|---|---|
| बजट होटल / हॉस्टल | ₹300 – ₹800 | Zostel, Moustache Hostel, OYO होटल |
| मिड-रेंज होटल | ₹1000 – ₹2500 | Treebo, FabHotel, Ginger |
| लक्ज़री होटल | ₹3000 – ₹10,000+ | Trident, Taj Rambagh Palace, Hilton |
जयपुर के रेस्टोरेंट – बजट के अनुसार
| बजट रेंज | रेस्टोरेंट का नाम | स्थान | प्रमुख व्यंजन | औसत खर्च/व्यक्ति |
|---|---|---|---|---|
| बजट (₹100-300) | 1. लक्ष्मी मिष्ठान भंडार (LMB) 2. पांडित पाव भाजी 3. रावत कचौरी | जौहरी बाजार, स्टेशन रोड | कचौरी, पाव भाजी, घेवर, समोसा | ₹100 – ₹300 |
| मिड रेंज (₹300-800) | 1. नरोड़ा रेस्टोरेंट 2. RJ 14 3. टपरी – द टी हाउस | सी स्कीम, मालवीय नगर | राजस्थानी थाली, साउथ इंडियन, चाय-नाश्ता | ₹400 – ₹800 |
| फाइन डाइनिंग (₹800-2000) | 1. 1135 AD (आमेर फोर्ट में) 2. बार पल्लाडियम 3. सिटी केबिन | आमेर, सिटी पैलेस, MI रोड | राजस्थानी रॉयल थाली, इंटरनेशनल डिशेज | ₹1000 – ₹2000 |
| लक्ज़री (₹2000+) | 1. सुर्वाना महल (Taj Rambagh Palace) 2. ओखरा (ITC Rajputana) | सिविल लाइन्स, रामबाग | राजस्थानी रॉयल भोज, शेफ कस्टम मेन्यू | ₹2500+ |
1. आमेर किला (Amber Fort)(couple jaipur me ghumne ki jagah)
आमेर किला जयपुर का एक ऐतिहासिक किला है, जो अरावली पर्वत की ऊँचाई पर स्थित है। इस किले की दीवारें और महल, राजस्थानी शाही वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण हैं। यहाँ आप अपने पार्टनर के साथ हाथी की सवारी का आनंद ले सकते हैं और किले के अंदर की शानदार झीलों और बागों का अनुभव कर सकते हैं।
अंबर किला जयपुर couple jaipur me ghumne ki jagah के सबसे प्रसिद्ध किलों में से एक है और यहाँ की वास्तुकला एक अद्भुत मिश्रण है। किले का निर्माण राजपूतों के प्रमुख राजा मानसिंह ने 1592 में किया था। किले की सुंदरता और भव्यता को देखकर आप चकित रह जाएंगे। यहाँ की सफेद संगमरमर और लाल बलुआ पत्थर से बनी दीवारें और महल अद्वितीय हैं।
आमेर किला जयपुर नगर का प्रधान पर्यटक आकर्षण है। आमेर के बसने से पहले इस जगह मीणा जनजाति के लोग रहते थे , जिन्हे कच्छवाह राजपूतो ने अपने अधीन कर लिया। यह दुर्ग व महल अपने कलात्मक विशुद्ध हिन्दू वास्तु शैली के घटकों के लिये भी जाना जाता है।
लाल बलुआ पत्थर एवं संगमरमर से निर्मित यह आकर्षक एवं भव्य दुर्ग पहाड़ी के चार स्तरों पर बना हुआ है, जिसमें से प्रत्येक में विशाल प्रांगण हैं। इसमें दीवान-ए-आम अर्थात् जन साधारण का प्रांगण, दीवान-ए-खास अर्थात् विशिष्ट प्रांगण, शीश महल या जय मन्दिर एवं सुख निवास आदि भाग हैं।
आंबेर या आमेर को यह नाम यहां निकटस्थ चील के टीले नामक पहाड़ी पर स्थित अम्बिकेश्वर मन्दिर से मिला। अम्बिकेश्वर नाम भगवान शिव के उस रूप का है जो इस मन्दिर में स्थित हैं, अर्थात् अम्बिका के ईश्वर।
- राजस्थान में आमेर का यह सबसे बड़ा किला राजा मानसिंह ने 16वीं शताब्दी में बनवाया था। इस विशाल किले का नाम अंबा माता के नाम पर रखा गया था।
- हिंदू और मुगल वास्तुकला से निर्मित इस अनूठी संरचना को इसकी भव्यता और आकर्षण के कारण वर्ष 2013 में UNESCO द्वारा विश्व विरासत स्थल में शामिल किया गया था।
- भारत के सबसे महत्वपूर्ण किलों में से एक, शीश महल, दीवान-ए-आम, सुख निवास आदि इस आमेर किले के परिसर में बनी महत्वपूर्ण संरचनाओं में से हैं।
- जयपुर के पास स्थित इस विशाल किले को विशेष रूप से राजपरिवार के निवास के लिए बनवाया गया था। इस किले के परिसर में बनी ऐतिहासिक संरचनाओं में शीश महल सबसे महत्वपूर्ण है। अपनी अद्भुत नक्काशी के लिए मशहूर शीश महल को दुनिया का सबसे अच्छा कांच का घर भी माना जाता है।
- जयपुर से लगभग 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित आमेर का किला कई सदियों पहले कछवाहों की राजधानी हुआ करता था, लेकिन जयपुर शहर की स्थापना के बाद नवनिर्मित शहर जयपुर कछवाहों की राजधानी बन गया।
- आमेर के इस विशाल किले के अंदर 27 कचहरी नाम की एक भव्य इमारत भी बनी हुई है, जो यहां के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से एक है।
- आमेर किले के सामने माओटा नाम की एक बहुत ही सुंदर और आकर्षक झील भी है, जो भारत के महत्वपूर्ण किलों में से एक है, जो इस किले की सुंदरता को और बढ़ा रही है।
- वर्ष 2007 के आँकड़ों के अनुसार उस वर्ष 15 लाख से अधिक पर्यटक आमेर किले की सुंदरता को देखने के लिए यहाँ आये थे।
- इस विशाल किले के अंदर पर्यटकों के लिए एक आकर्षक बाजार भी है, जहां पर्यटक रंग-बिरंगे पत्थरों और मोतियों से बनी वस्तुओं के अलावा हस्तकला की आकर्षक वस्तुएं भी खरीद सकते हैं।
- राजस्थान के इस सबसे आकर्षक और महत्वपूर्ण किले में कई बॉलीवुड और हॉलीवुड की सुपरहिट फिल्मों की शूटिंग भी हुई है, जिनमें बॉलीवुड फिल्में Bajirao Mastani, Shuddh Desi Romance, Mughal-e-Azam, Bhool Bhulaiyaa, Jodhaa Akbar आदि शामिल हैं। मैरीगोल्ड होटल, नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर आदि।
समय: 9:00 AM – 5:30 PM
फीस: भारतीय – ₹100, विदेशी – ₹500
दूरी: जयपुर रेलवे स्टेशन से 11 किमी
खाना: किले के भीतर स्थित रेस्तरां में राजस्थानी भोजन मिलता है।
2. जल महल (Jal Mahal)
जल महल एक सुंदर महल है जो मानसागर झील के बीच स्थित है। यहाँ की सुंदरता और शांतिपूर्ण वातावरण कपल्स के लिए परफेक्ट है। आप यहां बोट राइड का आनंद ले सकते हैं और झील के बीच स्थित इस महल को निहार सकते हैं।
जल महल, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, couple jaipur me ghumne ki jagah एक महल है जो जल के बीच स्थित है। यह मनोहक दृश्य प्रस्तुत करता है और इसके चारों ओर सुरम्य मनोहक दृश्य होते हैं।
अरावली पहाडिय़ों के गर्भ में स्थित यह महल झील के बीचों बीच होने के कारण ‘आई बॉल’ भी कहलाता है। इसे ‘रोमांटिक महल’ के नाम से भी जाना जाता था। राजपूत राजा सवाई जयसिंह द्वारा बनाया गया यह महल मध्यकालीन महलों की तरह मेहराबों, बुर्जो, छतरियों एवं सीढीदार जीनों से युक्त दुमंजिला और वर्गाकार रूप में निर्मित भवन है। यहाँ की नर्सरी में 1 लाख से अधिक वृक्ष लगे हैं जहाँ राजस्थान के सबसे ऊँचे पेड़ पाए जाते हैं।
यह महल 1699 में बना था। इसके निर्माण के लिए राजपूत शैली से तैयार की गई नौकाओं की मदद ली गई थी। इस महल को राजा सवाई जय सिंह ने अपनी रानी के साथ समय व्यतीत करने के लिए बनवाया था | यहाँ पर शाही पार्टिया भी होती थी |
- जल महल के आकर्षक टैरेस गार्डन को चमेली बाग के नाम से जाना जाता है।
- जलमहल एक आवासीय संरचना के बजाय एक पिकनिक स्पॉट के रूप में बनाया गया था, इसलिए इसके अंदर कोई व्यक्तिगत कक्ष नहीं हैं।
- यह माना जाता है कि महल का निर्माण एक अकाल के दौरान हुआ था जब झील का बिस्तर पूरी तरह से सूख गया था। इसलिए, जब यह बनाया गया था, तो पूरी तरह से दिखाई दे रहा था।
- इस पत्थर के महल की दीवारों को इतनी मजबूती से बनाया गया था कि यह किसी भी पानी को अंदर आने से रोकता था। दीवारों को मजबूत बनाने के लिए चूना पत्थर का इस्तेमाल किया गया था।
- जलमहल अब पक्षी अभ्यारण के रूप में भी विकसित हो रहा है। जल महल के नर्सरी में 1 लाख से ज्यादा वृक्ष लगे हुए हैं। जिसकी खास बात है की यह नर्सरी राजस्थान का सबसे उंचे पेड़ों वाला नर्सरी है।
- जलमहल झील में डूबा रहता है, इस तक पहुंचने के लिए नाव की सवारी ही एकमात्र रास्ता है। महल को सरकार द्वारा एक संरक्षित संपत्ति घोषित किया गया है, इसलिए वर्तमान में नाव की सवारी और महल परिसर में प्रवेश प्रतिबंधित है।
- जलमहल की झील के अंदर अधिकतम गहराई 15 फीट और न्यूनतम गहराई 4.9 फीट है। यह मुगल स्थापत्य शैली के प्रभाव के साथ वास्तुकला की राजपूत शैली में निर्मित पांच मंजिला संरचना है। जबकि इसकी चार मंज़िलें पानी के नीचे हैं,जिसके कारण केवल महल का शीर्ष ही दिखाई देता है, जिससे आपको आभास होता है कि महल झील के पानी पर तैर रहा है।
- जल महल का निर्माण लाल बलुआ पत्थर से किया गया है। अष्टकोणीय आकार में डिज़ाइन किए गए चार विस्तृत छत्र महल के चारों कोनों को सुशोभित करते हैं। महल की छत पर एक विशाल बंगाल शैली का आयताकार छतरी भी मौजूद है। इसके उत्तराधिकार में, जल महल का छत उद्यान धनुषाकार मार्ग से सजाया गया था।
समय: 9:00 AM – 6:00 PM
फीस: मुफ्त (सिर्फ झील पर नाव यात्रा के लिए शुल्क)
दूरी: जयपुर रेलवे स्टेशन से 10 किमी
खाना: आसपास के कैफे में हल्के नाश्ते और जलपान उपलब्ध हैं।
3. हवा महल (Hawa Mahal) (couple jaipur me ghumne ki jagah)
हवा महल, जिसे ‘पैलेस ऑफ विंड्स’ के नाम से भी जाना जाता है, जयपुर का एक प्रमुख आकर्षण है। इसका जालीदार निर्माण और वास्तुकला न केवल अद्वितीय है, बल्कि यह कपल्स के लिए रोमांटिक फोटोग्राफी का आदर्श स्थान है।
इसका निर्माण महाराजा सवाई Pratap Singh ने 1799 में करवाया था। यह महल अपनी खूबसूरत और अद्वितीय वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। इसकी छतों पर लगी खिड़कियाँ हवाओं को अंदर आने देती हैं, जो इसे गर्मी के मौसम में बेहद आरामदायक बनाती हैं।
इसकी अद्वितीय पाँच-मंजिला इमारत जो ऊपर से तो केवल डेढ़ फुट चौड़ी है, बाहर से देखने पर मधुमक्खी के छत्ते के समान दिखाई देती है, जिसमें 953 बेहद खूबसूरत और आकर्षक छोटी-छोटी जालीदार खिड़कियाँ हैं, जिन्हें झरोखा कहते हैं।
लाल चन्द उस्ता इस अनूठे भवन का वास्तुकार था, जिसने जयपुर शहर की भी शिल्प व वास्तु योजना तैयार करने में सहयोग दिया था। शहर में अन्य स्मारकों की सजावट को ध्यान में रखते हुए लाल और गुलाबी रंग के बलुआ-पत्थरों से बने इस महल का रंग जयपुर को दी गयी ‘गुलाबी नगर’ की उपाधि के लिए एक पूर्ण प्रमाण है।
- राजा सवाई प्रताप सिहं द्वारा निर्मित इस महल का निर्माण सिर्फ रानियों व राजकुमारियों को विशेष मोकों पर निकलने वाले जुलूस व शहर आदि को देखने के लिए करवाया था।
- इस महल की योजना एवं निर्माण का निर्माण लाल चंद उस्ता द्वारा किया गया है।
- इस महल बहुत ही अनोखे ढंग से बनाया गया है। इसकी रचना में मुग़लों और राजस्थानी शैलियों की वास्तुकला साफ़ दिखाई है।
- जयपुर के प्रसिद्ध जौहरी बाजार के पास स्थित है इस पांच मंजिला महल को पूर्ण रूप से लाल और गुलाबी बलुआ पत्थर से बनाया गया था।
- इस महल का आकर सर के ताज के समान है। ऐसा माना जाता है कि महाराजा सवाई प्रताप सिंह भगवान श्री कृष्ण को काफी मानते थे, जिसकी वजह से उन्होंने इस महल को ताज का आकर में बनबाया था।
- प्राचीन काल में विभिन्न राजपूतों के परिवार गर्मी के दिनों में ठंडी और ताजी हवा का आनंद उठाने के लिए इसी महल में निवास करते थे। यह राजस्थान की ऐतिहासिक इमारतों में से एक है।
- इस महल में अन्दर जाने के लिए कोई भी सीधा प्रवेश द्वार नहीं है। यहाँ जाने के लिए आपको शहर के मुख्य महल, सिटी महल के किनारे से जाना होगा।
- इस 5 मंज़िला महल में जाने के लिए सीढियाँ नही हैं, इन ऊँचे मंज़िलों तक पहुँचने के लिए आपको ढलान पर बने रास्तों से जाना पड़ेगा।
- यह देश का एकमात्र ऐसा महल है, जिसे मुगल और राजपूताना वास्तुकला शैली में बना गया है।
- इस महल का रेख-रखाव राजस्थान सरकार के पुरातात्विक विभाग द्वारा किया जाता है।
- क्या आपको पता वर्ष 2005 में, 50 साल के लम्बे अंतराल के बाद बड़े स्तर पर महल की मरम्मत और नवीनीकरण का कार्य किया गया था, जिसमें लगभग 45,679 लाख रूपए का खर्चा आया था।
- हवा महल को “पैलेस ऑफ़ विंड्स (Palace of Winds)” के नाम से भी जाना जाता है, क्योकि इसकी जालीनुमा खिडकियों से हमेशा ठंडी हवाएं आती है।
- इस महल के प्रसिद्ध होने के बाद ही इसके कॉम्पलेक्स का निर्माण किया गया, उससे पहले यहाँ कॉम्पलेक्स नहीं था।
समय: 9:00 AM – 5:00 PM
फीस: भारतीय – ₹50, विदेशी – ₹200
दूरी: सिटी पैलेस से 1 किमी
खाना: पास के कैफे और रेस्तरां में हल्के भोजन मिलते हैं।
4. सिटी पैलेस (City Palace) (couple jaipur me ghumne ki jagah)
जयपुर का सिटी पैलेस शाही वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है। couple jaipur me ghumne ki jagah यहां आप अपने पार्टनर के साथ पुराने महलों और संग्रहालयों का दौरा कर सकते हैं, जहां राजस्थान के इतिहास से जुड़ी कई चीजें देखने को मिलती हैं।
सिटी पैलेस जयपुर के केंद्र में स्थित है और इसका निर्माण महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने 1729 में किया था। यह महल जयपुर के राजसी इतिहास को दर्शाता है और यहाँ की वास्तुकला में राजपूत और मुग़ल शैली का मिश्रण देखा जा सकता है।
- सिटी पैलेस जयपुर में हवा महल , जयपुर और जंतर-मंतर ये तीन शहर जयपुर के पुराने शहर के मुख्य आकर्षण हैं |
- सिटी पैलेस को दो वास्तुकारों (Architect) विद्याधर भट्टाचार्य और सर सैमुअल स्विंटन जैकब ने डिजाइन किया था।
- सिटी पैलेस राजपूत, मुगल और यूरोपीय शैलियों (European Style) की वास्तुकला का एक मिश्रण है।
- सिटी पैलेस के जयपुर में एक ओर संग्रहालय जबकि दूसरे ओर जयपुर के पूर्व शासकों के वंशजों (Descendents) का रहने का जगह है |
- सिटी पैलेस में त्रिपोलिया गेट (Tripolia Gate) को छोड़कर, जिसमे शाही परिवार (Royal Family) आरक्षित रहता है, इसे छोड़कर बाकी किसी भी प्रवेश द्वार के से पहुँचा जा सकता है |
- सिटी पैलेस का सबसे प्रभावशाली भाग तीसरे आंगन में चार छोटे द्वार हैं जो साल के चार मौसमों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- सिटी पैलेस में सबसे दिलचस्प वस्तुओं में से एक दो स्टर्लिंग चांदी के जार (Sterling Silver Jars) हैं जिसे आधिकारिक तौर पर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया हैं और ये दुनिया में सबसे बड़े शुद्ध चांदी के जारों में से एक हैं।
- सवाई माधोसिंह प्रथम द्वारा पहना गया कपडा इसी पैलेस के अंदर रखा गया है, जो 1.2 मीटर चौड़ा है और जिसका वजन 250 किलोग्राम था |
समय: 9:30 AM – 5:00 PM
फीस: भारतीय – ₹50, विदेशी – ₹500
दूरी: जयपुर रेलवे स्टेशन से 3 किमी
खाना: महल के भीतर रेस्तरां में राजस्थानी और अंतर्राष्ट्रीय भोजन उपलब्ध है।
5. जयगढ़ किला (Jaigarh Fort) (couple jaipur me ghumne ki jagah:)
जयगढ़ किला अरावली पर्वत श्रृंखला में स्थित है और यहाँ से पूरे जयपुर शहर का दृश्य दिखता है। यह किला कपल्स के लिए एक आदर्श रोमांटिक स्थल है, जहाँ आप खूबसूरत सूर्योदय या सूर्यास्त देख सकते हैं।
जयगढ़ किला अंबर किले के पास स्थित है couple jaipur me ghumne ki jagah और यह किला जयपुर के ऐतिहासिक किलों में प्रमुख है। यह किला अपनी विशालता और रणनीतिक स्थिति के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ का ‘जयविलास’ तोलवों का संग्रहालय है, जो कि एक विशेष आकर्षण है।
जयगढ़ किला राजस्थान की राजधानी जयपुर के पास, अरावली पर्वतमाला की ‘चील का टीला’ (ईगल्स हिल) पर स्थित है। यह किला आमेर किले और माओटा झील के ऊपरी भाग में स्थित है और सामाजिक दृष्टि से आमेर किले की सुरक्षा के लिए बनाया गया था |
- यह किला 1726 में बना |
- इसे महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने बनवाया था |
- इसके वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य थे जो आर्किटेक्ट इंजीनियर थे जिन्होंने इसको डिज़ाइन किया |
- इसका मुख्य उद्देश्य आमेर किले और जयपुर की रक्षा करना, सैन्य हथियारों का इकट्ठा करना था |
- यह किला कभी भी किसी युद्ध में पराजित नहीं हुआ, इसलिए इसे ‘विजय किला’ भी कहा जाता है |
- यह किला लाल बलुआ पत्थर से बना हुआ है | इसकी दीवारें लगभग 3 किमी क्षेत्र में फैली हुई है |
- इसमें लक्ष्मी विलास, ललित मंदिर, विलास मंदिर, आराम मंदिर, शस्त्रागार, जलाशय, और संग्रहालय शामिल हैं |
समय: 9:00 AM – 6:00 PM
फीस: भारतीय – ₹50, विदेशी – ₹200
दूरी: अंबर किले से 2 किमी
खाना: किले के पास छोटे भोजनालय और स्थानीय स्नैक्स उपलब्ध हैं।
6. नाहरगढ़ किला (Nahargarh Fort)
नाहरगढ़ किला भी जयपुर के ऊपर स्थित एक ऐतिहासिक किला है। यहाँ से शहर का शानदार दृश्य दिखाई देता है। अगर आप और आपके पार्टनर को शांति और खूबसूरत दृश्यों का अनुभव करना पसंद है, तो यह किला आपको निराश नहीं करेगा।
नाहरगढ़ किला जयपुर के बाहरी इलाके में स्थित है और यह किला अपनी शानदार स्थिति के कारण विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यहाँ से पूरे जयपुर शहर का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है। यह किला एक प्रमुख पर्यटन स्थल है और यहाँ पर शाम के समय का दृश्य अत्यधिक आकर्षक होता है।
- नाहरगढ़ किला शहर की सुरक्षा के लिए बना है, जिसकी ऊचाई 700 फ़ीट है | इस किला पर कभी भी कोई आक्रमण नहीं हुआ है | फिर भी इस किले की कुछ ऐतिहासिक घटनाये है | जिसमे जयपुर में 18 वी शताब्दी में मराठवो द्वारा हमला भी शामिल है |
- भरत विद्रोह जो 1857 में हुआ उस समय राजा सवाई राम सिंह ने बहुत से यूरोपियन लोगो को सुरक्षा के लिए नाहरगढ़ किले में भेजा था |
- बॉलीवुड की बहुत से फिल्मो की सूटिंग यही पर हुई है जिसमे से कुछ प्रशिद्ध फिल्म जैसे की रंग दे बसंती और जोधा अकबर के सीन यही से लिए गए हैं |
- नाहरगढ़ किले का सबसे मनमोहक भाग माधवेंद्र भवन है, जो रॉयल यानि की शाही महिलाओ के लिये बनवाया गया था। महल के कमरों को भी गलियारों से जोड़ा गया है। महल में महिलाओ के कमरों को इस तरह से बनवाया गया है जिससे की महाराजा दूसरी रानियों को पता चले बिना ही किसी भी अन्य रानी के रूम में जा सके।
- नाहर सिंह भोमिया के नाम पर ही इस किले का नाम रखा गया है। लेकिन आखिर ये इंसान है कौन जिसके नाम पर इस किले का नाम रखा गया? कुछ लोगो का मानना है की वह एक राठोड प्रिंस था और जिस जगह पर राजा सवाई जय सिंह ने यह किला बनाया था वह जगह नाहर सिंह भोमिया की ही थी।
समय: 10:00 AM – 6:00 PM
फीस: भारतीय – ₹50, विदेशी – ₹200
दूरी: सिटी पैलेस से 6 किमी
खाना: किले के भीतर स्थित रेस्तरां में भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय भोजन उपलब्ध है।
7. चोकी ढाणी (Chokhi Dhani)
अगर आप जयपुर की लोकसंस्कृति और पारंपरिक राजस्थान का अनुभव करना चाहते हैं, तो चोकी ढाणी एक बेहतरीन जगह है। यहाँ आप अपने पार्टनर के साथ राजस्थान के पारंपरिक भोजन का स्वाद ले सकते हैं और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद उठा सकते हैं।
चो़की ढ़ीलाई जयपुर का एक पारंपरिक गाँव है, जहाँ राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर का अनुभव किया जा सकता है। यहाँ पर राजस्थानी भोजन, लोक संगीत, और पारंपरिक नृत्य का आनंद लिया जा सकता है।
- जयपुर में चो़की ढाणी 1994 से ही चर्चा में रहा है , और अपने 5-star होटल के माध्यम से भारत तथा दुनिया भर से आये मेहमानो की सेवा करता है |
- यहाँ के भोजन, कपड़े, जीवन शैली, कलाकृतियाँ, शिल्प, चित्रकारी, मूर्तियां, लोकगीत, विभिन्न नृत्य, गायन और कई अन्य पारंपरिक पहलु भी चोखी ढाणी को बेहद खास बनाते हैं।
- चोकी ढाणी राजस्थान गौण से दूर स्थित है पर फिर भी यहाँ के 5 स्टार होटल की वजह से पर्यटकों को आकर्षित करती है |
- चोखी ढाणी की वास्तुकला को वास्तुकारों के सबसे कुशल ने पारंपरिक राजस्थानी डिजाइन से बनाया है और इसमें वो सब कुछ है जो एक साथ लक्जरी होटल के साथ एक गांव की शांति का एहसास करवाता है।
- चोखी ढाणी में आने वाले पर्यटक नाव की सवारी, ऊंट की सवारी, घुड़सवारी, हाथी और बैलगाड़ी की सवारी कर सकते हैं।
- पूरे राजस्थान में प्रसिद्ध हल्दी घाटी की लड़ाई को चोखी ढाणी में नियमित रूप से प्रशिक्षित कलाकारों द्वारा दिखाया जाता है, जो कि यहाँ के प्रमुख आकर्षणों में से एक है।
- यहाँ पर एक प्राचीन रथखाना भी मौजूद है जो बहुत लोकप्रिय है और राजस्थान के राजस्थान के शाही परिवारों द्वारा उपयोग किए जाने वाले प्राचीन रथों को प्रदर्शित करता है।
- मेवाड़, रेगिस्तान और जैसलमेर के गाँव के जीवन को दर्शाने वाली झोपड़ियाँ, चोखी ढाणी के भीतर मौजूद हैं, जो यहां आने वाले पर्यटकों या मेहमानों को सही मायने में राजस्थानी अनुभव प्रदान करती हैं और इसके साथ इस रेगिस्तान राज्य के समृद्ध इतिहास को जानने के मौका देते हैं।
समय: 5:00 PM – 10:00 PM
फीस: ₹700 (पारंपरिक भोजन सहित)
दूरी: जयपुर रेलवे स्टेशन से 20 किमी
खाना: यहाँ राजस्थानी पारंपरिक व्यंजन जैसे दाल बाटी चूरमा, गट्टे की सब्जी आदि मिलते हैं।
8. जयपुर का केंद्रीय पार्क (Central Park)
केंद्रीय पार्क जयपुर का सबसे बड़ा और हरा-भरा पार्क है। यहाँ आप अपने पार्टनर के साथ शांति से समय बिता सकते हैं, सुबह की ताजगी का आनंद ले सकते हैं और एक-दूसरे के साथ पैदल चल सकते हैं।
- Central Park Jaipur ka उद्घाटन 21 जनवरी 2006 को राजस्थान की मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे सिंधिया द्वारा किया गया था | जो विकाश के प्राधिकरण के लिया बनाया गया था |
- Central Park Jaipur में भारत का सबसे ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज है, जिसकी लंबाई 28 फीट और चौड़ाई 72 फीट है।
- आपको बता दें कि सेंट्रल पार्क में व्यायाम और योग सत्र भी आयोजित किए जाते हैं।
- और कुछ लोगों के अनुसार यह माना जाता है कि सेंट्रल पार्क जयपुर को महाराजाओं द्वारा दिया गया उपहार है।
- सेंट्रल पार्क जयपुर शहर का सबसे बड़ा पार्क है, जो लगभग 129 एकड़ में फैला हुआ है।
- पार्क में एक रंग-बिरंगा संगीत फव्वारा है, जिसे सूर्यास्त के समय देखा जा सकता है। कोई भी प्रवेश शुल्क नहीं है।
- पार्क में 5किमी लंबा ट्रैक है जहाँ लोग दौड़ और पैदल चल सकते हैं, फिटनेस प्रेमियों के लिए आदर्श स्थान।
- यहाँ पर प्रवेश पूरी तरह मुफ्त है, और वाहन पार्किंग भी निःशुल्क है।
- यह पार्क पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग समान है, यहाँ स्थानीय और प्रवासी पक्षी बड़ी संख्या में आते हैं।
- रोज सुबह योग के सत्र होते हैं। यहाँ पर एक विशेष स्थान ध्यान और वर्कआउट के लिए है।
- पार्क में कई सुंदर पत्थर की मूर्तियाँ हैं, जिनमें मकर राशि के 13 शिल्प प्रमुख हैं।
- बच्चों के खेलने के लिए अलग जगह है, और परिवार के लिए पिकनिक का आदर्श स्थल है।
- जनता के लिए पार्क 21 जनवरी 2006 को खोला गया था।
- पार्क के पास राजस्थान सचिवालय, बिड़ला ऑडिटोरियम, रामबाग पोलो ग्राउंड जैसे प्रमुख स्थल स्थित हैं।
- यहाँ शुद्ध पीने का पानी, साफ़ टॉयलेट्स, और छायादार पेड़ हैं जो गर्मी से बचाते हैं।
9. गलगाटी मंदिर (Galtaji Temple)
गलगाटी मंदिर जयपुर के पास स्थित एक प्राचीन मंदिर है, जो प्राकृतिक झरनों और पवित्र कुंडों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की शांतिपूर्ण और प्राकृतिक सुंदरता कपल्स के लिए एक आदर्श स्थल है।
गलताजी मंदिर किसी भी पारम्परिक मंदिर की तुलना में अधिक भव्य और सुन्दर है और यह एक भव्य महल या हवेली की तरह दीखता है | इस मंदिर पर बंदरो की कई प्रजातिया दिखती है | अरावली पहाड़ियों द्वारा उल्लिखित, इसमें कई मंदिर, पवित्र कुंड, मंडप और प्राकृतिक झरने हैं। यह आकर्षित मंदिर एक पहाड़ी इलाके के दिल में स्थित है, जो एक खूबसूरत घाट से घिरा है, जो हर साल भारी संख्या में पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करता है।
ऐसा कहा जाता है की संत गालव ने यहाँ तपस्या की थी और अपने जीवन के सौ साल यही व्यतीत किये थे | उनकी तपस्या से भगवान् प्रकट हुए और उस स्थान को पवित्र जल से आशीर्वाद दिए | इस संत या ऋषि की वंदना करने के लिए इस मंदिर का निर्माण हुआ | और इस मंदिर का नाम ऐसी संत के नाम पर रखा दिया गया | ऐसा भी माना जाता है की तुलसीदास ने पवित्र रामचरित मानस के खंड यही पे लिखा था |
- गलगाटी मंदिर एक प्राचीन हिंदू तीर्थस्थल है, जहाँ सात पवित्र कुंड (स्नान-तलाब) हैं। इनमें से “गलता कुंड” सबसे पवित्र माना जाता है और ऐसी मान्यता है कि यह कभी सूखा नहीं।
- मान्यता है कि ऋषि गालव ने यहाँ 100 वर्षों तक तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवताओं ने यहाँ जल का वरदान दिया और यही स्थल उनके नाम पर “गलता जी” कहलाया।
- मुख्य जलाशय में शुद्ध पानी एक गाय के मुख जैसी चट्टान (गौमुख) से लगातार बहता रहता है। इस जल में स्नान को पावन माना जाता है।
- गलगाटी मंदिर को “मंकी टेम्पल” भी कहते हैं, क्योंकि यहाँ हजारों बंदरों का समूह रहता है। ये बंदर श्रद्धालुओं को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते और मंदिर परिसर में आसानी से घूमते हुए दिख सकते हैं।
- गुलाबी बलुआ पत्थर से बने इस मंदिर में महल जैसी वास्तुशैली देखी जा सकती है, जिसमें मंडप, चित्रित दीवारें, गोल छतें और आकर्षक स्तंभ हैं। मंदिर परिसर में राम, कृष्ण और हनुमान जी के अलग मंदिर भी हैं।
- मकर संक्रांति के पर्व पर यहाँ डुबकी लगाकर स्नान करना विशेष पुण्यदायक माना जाता है, जिसके लिए लाखों भक्त यहाँ आते हैं।
- गलगाटी मंदिर देश-विदेश के पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र है, यहाँ से अरावली पहाड़ियों और जयपुर शहर का सुंदर दृश्य देखा जा सकता है।
- यह मंदिर जयपुर शहर से लगभग 10किमी दूर अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित है, और यहाँ आसपास सिसोदिया रानी का बाग और सूर्य मंदिर जैसी अन्य ऐतिहासिक जगहें भी हैं।
- परिसर में स्थित हनुमान जी के छोटे मंदिर में प्राचीन काल से अखंड ज्योति जलती है।
10. अल्बर्ट हॉल म्यूजियम (Albert Hall Museum)
अगर आप कला और संस्कृति में रुचि रखते हैं, तो अल्बर्ट हॉल म्यूजियम एक बेहतरीन जगह है। यहाँ आप पुराने राजस्थानी शिल्प, कला और ऐतिहासिक वस्तुओं को देख सकते हैं, जो कपल्स के लिए एक शानदार अनुभव होगा।
अल्बर्ट हॉल म्यूजियम जयपुर का सबसे पुराना म्यूजियम है, और यह राजा महाराजाओं की धरोहर, कलाकृतियों, और संग्रह का प्रमुख स्थल है। यहाँ पर प्राचीन काल की वस्तुएं, सिक्के, और ऐतिहासिक चित्र देखने को मिलते हैं।
- अल्बर्ट हॉल संग्रहालय को सरकारी केंद्रीय संग्रहालय के रूप में भी जाना जाता है, जो राज्यस्थान राज्य का सबसे पुराना संग्रहालय है।
- अल्बर्ट हॉल संग्रहालय का नाम किंग अल्बर्ट एडवर्ड चतुर्थ के नाम पर रखा गया था।
- अल्बर्ट हॉल संग्रहालय इंडो-सरैसेनिक वास्तुकला का एक आदर्श मिश्रण है।
- शुरू में इसे एक टाउन हॉल बनाने का इरादा था लेकिन माधोसिंह द्वितीय द्वारा एक संग्रहालय बनने के लिए तैयार किया गया था।
- अल्बर्ट हॉल म्यूजियम 1887 में जनता के लिए खोला गया था और यह जयपुर का सबसे पुराना संग्रहालय है।
- मिस्र की 2300 साल पुरानी ममी: यहाँ ‘तूतू’ नाम की मिस्र की ममी रखी गई है, जो भारत के केवल कुछ संग्रहालयों में ही उपलब्ध है। इसकी देखरेख मिस्र के विशेषज्ञों के निर्देशानुसार होती है।
- इंडो-सरसेनिक स्थापत्य: इसकी वास्तुकला में भारतीय, मुगल और यूरोपीय शैली का संगम है। इसे ब्रिटिश आर्किटेक्ट सर सैमुअल स्विंटन जैकब ने डिज़ाइन किया था।
- इसका निर्माण 10 साल में हुआ और करीब 5 लाख रुपए खर्च हुए थे, जो उस समय बहुत बड़ी राशि थी।
- संग्रहालय रात में 7 से 10 बजे तक खूबसूरत रोशनी में जगमगाता है और रात में देखना अलग अनुभव देता है।
- यहाँ 16 से अधिक अलग-अलग दीर्घाएं हैं, जिनमें राजस्थानी, मुगल, ब्रिटिश, और प्राचीन धातु कलाकृतियाँ, हथियार, सिक्के, पेंटिंग, संगीत वाद्य यंत्र, गहने, भगवान शिव की प्राचीन मूर्तियाँ, मिट्टी के बर्तन, आदि प्रदर्शित हैं।
- इसका नाम 1876 में यहाँ आए प्रिंस ऑफ वेल्स (बाद में किंग एडवर्ड VII) के नाम पर रखा गया।
- यह खूबसूरत इमारत राम निवास बाग के अंदर स्थित है, जिसे जयपुर का हरा-भरा दिल भी कहा जाता है।
- यहाँ गुप्त, कुषाण, मुगल, ब्रिटिश काल के हजारों सिक्कों का संग्रह मौजूद है; साथ ही दुर्लभ पेंटिंग्स और वस्त्र भी प्रदर्शित हैं |
- हर वर्ष लाखों पर्यटक यहाँ आते हैं, जिससे यह जयपुर एवं राजस्थान के ऐतिहासिक आकर्षणों में प्रमुख स्थान रखता है।
अल्बर्ट हॉल संग्रहालय में विभिन्न मनोरंजक गैलरी हैं जो उन्नीसवीं शताब्दी से प्राचीन काल तक की वस्तुओं और खजाने का प्रदर्शन करती हैं। उनमें से कुछ हैं जो आप अवश्य देख सकते हैं –
- कालीन गैलरी
- क्ले आर्ट गैलरी
- सिक्का गैलरी
- ज्वेलरी गैलरी
- म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स गैलरी
यहाँ आप वस्त्र, वस्त्र, संगमरमर कला, मिट्टी के बर्तन, मूर्तियां, धातु कला, हथियार और कवच जैसी अन्य रोमांचक दीर्घाएँ भी देख सकते हैं।
11. जंतर मंतर (Jantar Mantar)
जंतर मंतर, एक विशाल खगोलशास्त्र संग्रहण है, जो पृथ्वी के हर हिस्से से जुड़ी विभिन्न खगोलशास्त्रीय जानकारी प्रदान करता है। यहां का अद्भुत यांत्रिक उपकरण और बड़ा खगोलीय उपकरण कपल्स को रोमांचित कर सकते हैं।
जयपुर में स्थित जंतर मंतर एक खगोलशास्त्र की प्रमुख संरचना है, जिसे महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने 1734 में बनवाया था। यह स्थल यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों में शामिल है। यहाँ पर खगोलशास्त्र की अद्वितीय यंत्रों का संग्रह है, जो उस समय की विज्ञान और तकनीकी समझ को दर्शाता है।
जयपुर के जंतर मंतर में विश्व की सबसे बड़ी पत्थर से बनी सूर्यघड़ी भी रखी गई है। यह ऐतिहासिक स्मारक भारत के खगोलीय एवं गणितीय कौशल का प्रतीक माना जाता है |
जयपुर के जन्तर मन्तर में स्थित प्रमुख यन्त्र हैं- बृहत सम्राट यन्त्र, लघु सम्राट यन्त्र, जयप्रकाश यन्त्र, रामयंत्र, ध्रुवयंत्र, दक्षिणायन्त्र, नाड़ीवलययन्त्र, राशिवलय, दिशायन्त्र, लघुक्रांति यन्त्र, दीर्घक्रांति यन्त्र, राजयंत्र, उन्नतांश यन्त्र, और दिगंश यन्त्र। इनके अलावा यहां महत्वपूर्ण ज्योतिषीय गणनाओं और खगोलीय अंकन के लिए क्रांतिवृत यंत्र, यंत्र राज आदि यंत्रों का भी प्रयोग किया जाता रहा था।
- जयपुर का जंतर-मंतर भारत की सबसे विशाल खगोलीय वेधशाला है, जिसके लिए एक सामूहिक टिकट है, जिसे लेकर पर्यटक नाहरगढ़ किला, आमेर किला, हवा महल और अल्बर्ट हॉल म्यूजियम भी घूम सकते हैं।
- जंतर-मंतर का अर्थ गणना करने वाले उपकरण से लिया गया है।
- वैश्विक धरोहरों की सूचि में शामिल जयपुर का जंतर-मंतर, महाराजा सवाई जय सिंह द्धारा बनवाएं गए पांच प्रमुख खगोलीय वेधशालाओं में से एक है। उन्होंने दिल्ली, मथुरा, जयपुर, उज्जैन और वाराणसी में वेधशालाओं का निर्माण करवाया था। जिनमें से अब जयपुर और दिल्ली के जंतर-मंतर ही बचे हैं, बाकी समय के साथ विलुप्त हो गए हैं।
- विश्व की सबसे बड़ी धूपघड़ी: जयपुर के जंतर मंतर में स्थित सम्राट यंत्र दुनिया की सबसे बड़ी पत्थर की धूपघड़ी है, जिसकी ऊंचाई लगभग 27 मीटर है। यह सूर्य की स्थिति के आधार पर समय बताती है.
- यहाँ कुल 19 विभिन्न खगोलीय यंत्र हैं, जैसे सम्राट यंत्र, जय प्रकाश यंत्र, राम यंत्र, दिशा यंत्र आदि, जो विभिन्न ग्रहों, तारे, समय व मौसम के पूर्वानुमान में काम आते हैं।
- इसका निर्माण जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने 1728 से 1734 के बीच कराया था। वे उच्च कोटि के खगोलशास्त्री थे।
- जंतर मंतर को 1 अगस्त 2010 को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल किया गया था।
- यहाँ के यंत्र पत्थर, संगमरमर और पीतल से बने हैं और आज भी सटीक कार्य करते हैं। हजारों साल बाद भी मौसम, समय और ग्रहों की सही स्थिति बताने में सक्षम हैं।
- यहाँ के उपकरणों को भारत के प्राचीन खगोलशास्त्र के सिद्धांतों पर डिजाइन किया गया है। इन्हें बिना किसी आधुनिक ऑप्टिकल उपकरण के आँखों से ही खगोलीय घटनाओं के विश्लेषण के लिए प्रयोग किया जाता था |
- ‘जंतर’ का अर्थ है ‘यंत्र’ और ‘मंतर’ का अर्थ है ‘गणना’, यानी ‘गणना करने का उपकरण’ |
- जयपुर के अन्य प्रमुख स्थलों की तरह, हर साल हजारों देशी-विदेशी पर्यटक जंतर मंतर को देखने आते हैं।
- यह वेधशाला सिटी पैलेस और हवा महल के पास शहर के मुख्य हिस्से में स्थित है |
समय: 9:00 AM – 4:30 PM
फीस: भारतीय – ₹50, विदेशी – ₹200
दूरी: सिटी पैलेस से 2 किमी
खाना: नजदीकी रेस्तरां में राजस्थानी व्यंजन मिलते हैं।
12. तितरी का तालाब (Tonk Road)
जयपुर से थोड़ी दूर स्थित तितरी का तालाब, प्रकृति प्रेमियों के लिए एक बेहतरीन जगह है। यहाँ आप अपने पार्टनर के साथ आराम से समय बिता सकते हैं और शांति से प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ले सकते हैं।
तितरी का तालाब जयपुर के टोंक रोड क्षेत्र में स्थित एक स्थानीय जलाशय (तालाब) है, जो आसपास के निवासियों के लिए प्राकृतिक जल स्रोत और मानसून के समय आकर्षण का केंद्र रहता है।
- टोंक रोड जयपुर का एक प्रमुख मार्ग है, जो शहर के दक्षिणी हिस्से को टोंक जिले, सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र और एयरपोर्ट से जोड़ता है |
- इस क्षेत्र में रियल एस्टेट, औद्योगिक विकास और नए प्रोजेक्ट्स के कारण तेजी से विकास हो रहा है |
13. विक्टोरिया गार्डन (Victoria Garden)
यह सुंदर बगीचा जयपुर के बाहरी हिस्से में स्थित है। यहाँ आप अपने पार्टनर के साथ एक शांत दिन बिता सकते हैं, क्योंकि यह स्थान बहुत ही शांत और खूबसूरत है।
विक्टोरिया गार्डन (जिसे The Victoria Palace भी कहा जाता है) जयपुर के मानसरोवर क्षेत्र में स्थित एक भव्य वेडिंग वेन्यू और मैरिज गार्डन है। यह स्थान खास तौर पर शादियों, रिसेप्शन, सगाई, मेहंदी, संगीत और अन्य पारिवारिक आयोजनों के लिए प्रयोग में लाया जाता है |
- यह वेन्यू एक सुंदर इंडोर बैंक्वेट हॉल और विशाल आउटडोर लॉन प्रदान करता है, जिसमें 400 से 3000 मेहमानों तक की व्यवस्था की जा सकती है |
- वेन्यू में मेहमानों के लिए कमरे, ब्राइडल ड्रेसिंग रूम, इन-हाउस डीजे, इन-हाउस कैटरिंग, इन-हाउस डेकोरेशन, पार्किंग, वैलेट पार्किंग जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं |
- यहाँ नॉन-वेज फूड की अनुमति है और हवन जैसे धार्मिक आयोजन भी किए जा सकते हैं |
- बैंक्वेट हॉल के अंदर और लॉन के बाहर दोनों जगह कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं, जिससे यह वेन्यू हर मौसम और जरूरत के अनुसार उपयुक्त है |
14. स्मृति वन (Smriti Van)
यह एक सुंदर पार्क है जो शांति और आत्ममंथन के लिए एक बेहतरीन स्थान है। यहाँ आप अपने पार्टनर के साथ एक रोमांटिक वॉक पर जा सकते हैं।
- स्मृति वन जयपुर का एक विशाल जैव विविधता वाला वन है, जो करीब 108 एकड़ में फैला हुआ है। यह वन प्रकृति प्रेमियों के लिए आदर्श स्थान है जहाँ आप कई प्रकार के पौधे और जानवर देख सकते हैं | यहाँ पर 43 से अधिक दुर्लभ तितलियों की प्रजातियाँ रिकॉर्ड की गई हैं |
- पार्क में सुंदर बगीचे, वॉकिंग ट्रेल्स, वाटरफॉल, बटरफ्लाई वैली, इको-म्यूज़ियम और कई प्राकृतिक आकर्षण हैं |
- यहाँ की हरियाली और शांति इसे शहर की भागदौड़ से दूर एक सुकून भरा स्थान बनाती है, जहाँ लोग मॉर्निंग वॉक, योग, ध्यान और पिकनिक के लिए भी आते हैं |
- यह स्थल कपल्स के लिए भी लोकप्रिय है, क्योंकि यहाँ प्राकृतिक वातावरण में समय बिताने का अलग ही आनंद है |
- इस वन का निर्माण 1981 में आई भयंकर बाढ़ के बाद हुआ था, जिसमें भारी जनहानि हुई थी। इसे उस बाढ़ की स्मृति में विकसित किया गया, इसलिए इसका नाम “स्मृति वन” रखा गया।
- स्मृति वन का विकास राजस्थान सरकार ने जयपुर के राजपरिवार की मदद से किया था ताकि शहर में एक प्राकृतिक और शांतिपूर्ण जगह को संरक्षित किया जा सके।
- स्मृति वन शहर के मध्य जेएलएन रोड पर स्थित है, जो जयपुर हवाई अड्डे को शहर से जोड़ता है। इसकी प्रमुखता शहर के बीच स्थित होने के कारण भी है।
- यह जगह शहरी जीवन की हलचल से दूर एक शांत आसरा प्रदान करती है। खासकर कपल्स और फोटोग्राफरों के लिए यह एक आकर्षक गंतव्य है।
- स्मृति वन सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है, और प्रवेश निशुल्क है। सुबह और शाम का समय यहां घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
15. जयपुर का बाजार (Jaipur Market)
जयपुर के बाजारों में घूमते हुए आप राजस्थानी कढ़ाई, चूड़ियां, गहने, ऊनी शॉल, और अन्य हस्तशिल्प सामान खरीद सकते हैं। ये बाजार न केवल खरीदारी के लिए अच्छे हैं बल्कि कपल्स के लिए एक शानदार अनुभव भी देते हैं। जयपुर न केवल ऐतहासिक इमारतों के लिए ही प्रशिद्ध है | यहाँ पे खरीदारी के लिए अच्छी-अच्छी मार्किट भी उपलब्ध है |
जयपुर के प्रमुख बाजार और उनकी खासियतें:
- जौहरी बाजार:
यह जयपुर का सबसे प्रसिद्ध और पुराना बाजार है , जो खासतौर पर सोने-चांदी के गहनों, कुंदन, पोल्की, मीना ज्वेलरी और कीमती रत्नों के लिए जाना जाता है | यहाँ पारंपरिक राजस्थानी गहनों की शानदार रेंज मिलती है।
- बापू बाजार:
कपड़े, जयपुरी जूतियाँ, बैग, साड़ियों, चादरों, सजावट के सामान और क्राफ्ट आइटम्स के लिए प्रसिद्ध। यहां मोलभाव करने का भरपूर मौका मिलता है और यह बाजार महिलाओं के बीच खासा लोकप्रिय है |
- किशनपोल बाजार :
लकड़ी के हैंडीक्राफ्ट, बंधेज साड़ियाँ, डाई फैब्रिक, पारंपरिक राजस्थानी कपड़े और सजावट के सामान के लिए जाना जाता है |
- चांदपोल बाजार:
संगमरमर की मूर्तियाँ, हस्तशिल्प, पारंपरिक जूते, कालीन, लकड़ी और पत्थर की कलाकृतियाँ यहाँ मिलती हैं |
- त्रिपोलिया बाजार:
कपड़े, चूड़ियाँ, ज्वेलरी, बंदिनी टाई-डाई कपड़े और घर के सजावटी सामान के लिए लोकप्रिय |
- यहां की शॉपिंग स्ट्रीट्स पर मोलभाव करना आम बात है।
- बाजार सुबह 10-11 बजे से लेकर रात 7-9 बजे तक खुले रहते हैं।
- हर बाजार की अपनी खासियत और अलग-अलग उत्पाद हैं, जो जयपुर को शॉपिंग के लिए एक आदर्श गंतव्य बनाते हैं।
- जयपुर के बाजार शहर की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा हैं, जिन्हें महाराजा जय सिंह द्वितीय के शहंशाह स्थापत्य एवं नियोजन के अनुसार विकसित किया गया था। ये बाजार आज भी पुराने मॉल की तरह काम करते हैं, जहाँ पर्यटक और स्थानीय लोग दोनों खरीदारी का आनंद लेते हैं।
- विशेष रूप से जयपुर के बाजार पारंपरिक और हस्तशिल्प वस्तुओं के लिए मशहूर हैं, जैसे जौहरी बाजार जहाँ स्वर्ण, चांदी, रत्न, और फूलदार आभूषण मिलते हैं। जयपुर को “रत्न सिटी” भी कहा जाता है।
- बाजारों में कई प्रमुख मंदिर और धार्मिक स्थल भी स्थित हैं, जो स्थानीय संस्कृति और आस्था से जुड़े हुए हैं, जैसे चांदपोल हनुमानजी का मंदिर, ताड़केश्वर महादेव मंदिर आदि।
- जयपुर के बाजारों में पारंपरिक और आधुनिक सामान दोनों उपलब्ध हैं, साथ ही आस-पास के ग्रामीण इलाकों के लोग भी यहाँ खरीदारी के लिए आते हैं। यहां पर स्थानीय त्योहारों और मेले की रौनक भी देखने को मिलती है।
- नेहरू बाजार हस्तनिर्मित जूती और नीले मिट्टी के बर्तनों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ से खरीदारी कर जयपुर की हस्तकला को करीब से देखा जा सकता है।
16. सीताराम जी मंदिर (Sitaram Ji Temple)
यह प्राचीन मंदिर शांति और आस्था का प्रतीक है। यहां की वास्तुकला और प्राकृतिक वातावरण कपल्स के लिए एक आदर्श स्थल बनाता है।
यह मंदिर जयपुर के छोटी चौपड़ पर स्थित है, जो शहर के केंद्र में है। इसका निर्माण जयपुर की बसावट के दौरान नगर सेठ लूणकरण दास नाटाणी ने विक्रम संवत 1787 (1730 ई.) में कराया था। मंदिर का निर्माण भारतीय स्थापत्य कला की विशिष्ट शैली में 4200 वर्ग गज भूमि पर हुआ था। इसके निर्माण में लगभग 300 सोने की मोहरें खर्च हुई थीं |
मंदिर की स्थापत्य कला बेजोड़ है और यह जयपुर के उन गिने-चुने मंदिरों में शामिल है, जिनका शिखर (गुंबद) स्वरूप है। मंदिर की छत से जयपुर शहर का सुंदर नजारा भी देखा जा सकता है |
यहां की खास परंपरा है कि सीताराम समाज भगवान श्रीराम को दामाद और माता सीता को अपनी बहन मानकर पूजा करता है। इस मंदिर में प्रतिदिन सात आरतियाँ होती हैं और महंत द्वारा प्रभु का नित्य नया श्रृंगार किया जाता है |
मंदिर में सीताराम जी की दो विग्रह (मूर्तियाँ) हैं—एक काले पत्थर से बनी स्थिर (अचल) मूर्ति और दूसरी अष्टधातु से बनी चलायमान (चल) मूर्ति। खास बात यह है कि प्रभु राम की अचल मूर्ति के चरणों पर सूर्य की पहली किरणें सीधी पड़ती हैं, जो इसे वास्तुशास्त्र की दृष्टि से भी विशेष बनाती है |
- यह मंदिर जयपुर के छोटी चौपड़ इलाके में स्थित है और लगभग 280-300 वर्ष पुराना है। माना जाता है कि यह मंदिर जयपुर के बसावट के समय ही बनाया गया था।
- मंदिर में भगवान राम और माता सीता की अष्टधातु की मूर्तियाँ विराजमान हैं। यहाँ दो विग्रह हैं: काले पत्थर का चल विग्रह और अष्टधातु का अचल विग्रह। राम जी के विग्रह में चांदी का धनुष है।
- इस मंदिर की वास्तुकला जयपुर की राजशाही और पारंपरिक कला का सुंदर मिश्रण है। मंदिर के पिलर और गर्भगृह में सुंदर मूर्तियां और कारीगरी देखी जा सकती है, जिसमें उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीय स्थापत्य शैलियाँ प्रभावी हैं।
- मंदिर के गर्भगृह में सोने की कारीगरी भी देखने को मिलती है। प्रतिदिन सुबह सूरज की पहली किरण सीधे भगवान राम के चरणों पर पड़ती है, जो इस मंदिर की एक विशेषता है।
- लूणकरण भिखारीदास नाटाणी नामक नगर सेठ ने 1784 में इस मंदिर का निर्माण करवाया था। मंदिर की सेवा शुरू में नाटाणी परिवार द्वारा चलायी जाती थी, बाद में उसे महंत गोपालदास को सौंपा गया।
- स्थानीय लोगों की गहरी आस्था इस मंदिर से जुड़ी है और यहाँ दूर-दूर से भक्त आएं मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है।
- मंदिर के आसपास गरुड़ जी की मूर्ति, हनुमान जी की सेवा और अन्य धार्मिक मूर्तियाँ भी स्थापित हैं। मंदिर रात में बंद होने के बाद भी हनुमान जी की परिक्रमा के बारे में लोककथाएं प्रचलित हैं।
- मंदिर को “जयपुर की अयोध्या नगरी” भी कहा जाता है क्योंकि यहाँ राम और सीता का राजसी स्वरूप पूजा जाता है और यह धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।
17. रामनिवास बाग (Ram Niwas Garden)
यह बाग जयपुर के प्रमुख बागों में से एक है, जहाँ आप प्रकृति से जुड़े समय बिता सकते हैं। यह एक शांतिपूर्ण स्थान है, जहाँ कपल्स के लिए सुकून से समय बिताना संभव है।
रामनिवास बाग जयपुर का एक प्रसिद्ध बाग है, जिसे महाराजा सवाई राम सिंह द्वितीय ने 1868 में बनवाया था। यह बाग एक शांतिपूर्ण वातावरण प्रदान करता है और यहाँ पर एक जीवित संग्रहालय भी है। यह बाग लगभग 30 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है और जयपुर के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में शामिल है |
- रामनिवास बाग का निर्माण अकाल राहत परियोजना के तहत कराया गया था। इसके निर्माण में उस समय लगभग 4 लाख रुपए की लागत आई थी |
- इस बाग का डिज़ाइन डॉ. डी. फैबेक्स और कर्नल सर स्विंटन जैकब द्वारा तैयार किया गया था |
- यह बाग अजमेरी गेट से सांगानेरी गेट तक फैला हुआ है और परकोटे के बाहर शहर के मध्य भाग में स्थित है |
- बाग के भीतर जयपुर का प्रसिद्ध चिड़ियाघर, बर्ड पार्क, अल्बर्ट हॉल संग्रहालय, रवीन्द्र मंच, मसाला चौक, पौधाघर, वनस्पति संग्राहलय, खेल का मैदान और एक ओपन थिएटर स्थित हैं |
- अल्बर्ट हॉल संग्रहालय, जो भारतीय वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है, इसी बाग के परिसर में स्थित है |
- यहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए रवीन्द्र मंच और आधुनिक कलादीर्घा भी बनाई गई है |
18. जोधा बाई महल (Jodha Bai Mahal)
जोधा बाई महल आमेर किले (Amber Fort) परिसर में स्थित एक ऐतिहासिक महल है, जो जयपुर के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में गिना जाता है। आमेर किला जयपुर शहर से लगभग 11 किलोमीटर दूर अरावली पर्वत श्रृंखला पर स्थित है। यह महल अपनी भव्यता, स्थापत्य कला और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।
- आमेर किला, कछवाहा राजपूतों की राजधानी था और यहीं पर जोधा बाई का महल स्थित है। इस महल में राजपूताना और मुगल स्थापत्य का सुंदर संगम देखने को मिलता है |
- जोधा बाई महल को लेकर ऐतिहासिक तथ्यों में विवाद है। कई इतिहासकार मानते हैं कि अकबर और जोधा बाई की शादी की कहानी ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित नहीं है। ‘अकबरनामा’ जैसी प्रमुख ऐतिहासिक पुस्तकों में इस विवाह का उल्लेख नहीं मिलता। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि जोधा बाई का नाम असल में हरखा बाई था और वे आमेर के राजा भारमल की पुत्री थीं, जबकि कुछ शोधकर्ता इसे अंग्रेजी इतिहासकारों की गलती मानते हैं |
- महल के भीतर कई कक्ष, दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, शीश महल और अन्य संरचनाएँ भी हैं, जो इसकी भव्यता को बढ़ाती हैं |
- आमेर किला और जोधा बाई महल को 2013 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है |
- यह स्थान पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है और यहाँ हर दिन बड़ी संख्या में देशी-विदेशी सैलानी आते हैं।
19. लक्ष्मी नारायण मंदिर (Laxmi Narayan Temple)
लक्ष्मी नारायण मंदिर, जिसे आमतौर पर बिड़ला मंदिर भी कहा जाता है, जयपुर के प्रमुख दर्शनीय और धार्मिक स्थलों में से एक है। यह मंदिर मोती डूंगरी किले की तलहटी में स्थित है और भगवान विष्णु (नारायण) तथा देवी लक्ष्मी को समर्पित है |
- इस मंदिर का निर्माण प्रसिद्ध बिड़ला परिवार द्वारा वर्ष 1988 में करवाया गया था। यह पूरी तरह से सफेद संगमरमर से बना है, जो इसे अत्यंत भव्य और आकर्षक बनाता है। मंदिर का वास्तुशिल्प आधुनिक और पारंपरिक शैली का सुंदर संगम है |
- मंदिर जयपुर के केंद्र में, मोती डूंगरी किले के नीचे, एक ऊँचे प्लेटफॉर्म पर स्थित है, जिससे यहाँ से शहर का सुंदर दृश्य दिखाई देता है |
- सफेद संगमरमर की नक्काशीदार दीवारें और सुंदर झरोखे। |
- त्योहारों, खासतौर पर जन्माष्टमी और दीवाली के समय मंदिर को भव्य रूप से सजाया जाता है।
- मंदिर परिसर में हरियाली और शांति का वातावरण मिलता है।
20. राजमंच (Rajmandir Cinema)
अगर आप और आपके पार्टनर को बॉलीवुड फिल्मों का शौक है, तो राजमंच सिनेमा हॉल में एक फिल्म देखना एक रोमांटिक अनुभव हो सकता है। यह एक प्रसिद्ध थिएटर है, जो अपने शानदार इंटीरियर्स और धूमधाम के लिए जाना जाता है।
राजमंच जयपुर के एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है, जिसे अब संग्रहालय के रूप में रूपांतरित किया गया है। यहाँ पर जयपुर के इतिहास से जुड़ी विभिन्न वस्तुएं और कला प्रदर्शित की जाती है।
- राजमंदिर सिनेमा अपनी 1,200 से अधिक सीटों की क्षमता के कारण एशिया के सबसे बड़े सिंगल स्क्रीन थिएटरों में से एक है। इसकी अनोखी मेरिंग्यू (मसक) आकार की वास्तुकला इसे दुनिया के अन्य सिनेमा हॉलों से अलग बनाती है।
- इसकी नींव 1966 में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया ने रखी थी। निर्माण में लगभग 10 साल लगे और 1976 में इसे तत्कालीन मुख्यमंत्री हरि देव जोशी ने उद्घाटित किया था।
- बाहरी रूप से यह एक शाही महल जैसा प्रतीत होता है, अंदर से इसे घुमावदार पैटर्न, भव्य झूमर, मखमली पर्दों और राजस्थानी भित्ति चित्रों से सजाया गया है। थिएटर के डिजाइन में शाही राजस्थान की समृद्ध संस्कृति झलकती है।
- राजमंदिर केवल फिल्म देखने का स्थान नहीं है, बल्कि यह जयपुर की सांस्कृतिक विरासत का अहम् हिस्सा है जहां फिल्म की प्रीमियर, सांस्कृतिक कार्यक्रम और बॉलीवुड सेलेब्रिटीज़ का मेला लगता है।
- सीटें पर्ल, रूबी, एमराल्ड और डायमंड जैसी श्रेणियों में विभाजित हैं, जो आराम और व्यावसायिकता का बेहतरीन मेल प्रदान करती हैं।
- यह भगवान दास रोड पर स्थित है, जो एम आई रोड के समीप है और जयपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों के नजदीक होने के कारण पर्यटकों के लिए भी आकर्षक स्थल है।
- यहाँ पारंपरिक और समकालीन स्नैक्स मिलते हैं और दर्शकों को बेहतर अनुभव देने के लिए आधुनिक तकनीकी सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं।
निष्कर्ष
जयपुर न केवल अपने ऐतिहासिक किलों और महलों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य, शांतिपूर्ण वातावरण और सांस्कृतिक धरोहर कपल्स के लिए एक बेहतरीन छुट्टी स्थल बनाते हैं। इन 20 बेहतरीन जगहों पर जाकर आप अपने पार्टनर के साथ रोमांटिक और रोमांचक अनुभव कर सकते हैं, जो आपके संबंधों को और भी मजबूत बनाएगा।
FAQ
जयपुर में सिसोदिया रानी गार्डन क्यों खास है कपल्स के लिए ?
सिसोदिया रानी गार्डन जयपुर के सभी गार्डनों में सबसे बड़ा, सबसे सुंदर और सबसे रोमांटिक माना जाता है, खासकर कपल्स के लिए। इसके खास होने के मुख्य कारण:
प्रेम की मिसाल:
यह गार्डन राधा-कृष्ण के प्रेम का प्रतीक है और खुद महाराजा सवाई जयसिंह ने अपनी प्रिय रानी चंद्रकुंवर सिसोदिया के लिए 1728 में बनवाया था। रानी को प्रकृति से गहरा प्रेम था, इसी वजह से राजा ने उनके लिए यह खूबसूरत बाग बनवाया, जो आज भी सच्चे प्रेम की मिसाल के तौर पर देखा जाता है|
शांत और रोमांटिक माहौल:
गार्डन चारों तरफ से पहाड़ियों से घिरा हुआ है, जिसमें हरियाली, रंग-बिरंगे फूल, फव्वारे, झरने और खूबसूरत मंडप हैं। यहाँ कपल्स को भीड़-भाड़ से दूर शांति और सुकून में समय बिताने का मौका मिलता है|
आर्किटेक्चर और पेंटिंग्स:
गार्डन की दीवारों और मंडपों पर राधा-कृष्ण के प्रेम प्रसंगों की सुंदर चित्रकारी की गई है, जो कपल्स को प्रेम और समर्पण की भावना से जोड़ती है|
फोटोज और यादें:
यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक महल, फव्वारे और रंगीन बग़ीचे कपल्स के लिए परफेक्ट फोटोज़ और यादगार पल बनाने की जगह है|
प्राकृतिक झरना और मंदिर:
बाग में भगवान शिव, विष्णु और हनुमान के मंदिर भी हैं, जिससे कपल्स को आध्यात्मिक शांति भी मिलती है। बारिश के मौसम में झरना बहता है, जो जगह को और भी रोमांटिक बना देता है