15 शानदार Haryana Paryatan Sthal जो आपको चौंका देंगे

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Haryana paryatan sthal : हरियाणा, भारत का एक समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक राज्य है | हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ है ,जो केंद्र शासित प्रदेश होने के साथ पंजाब राज्य की भी राजधानी है | हरियाणा अपनी समृद्ध विरासत के लिए प्रसिद्ध है | यह अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए और विविध पर्यटन स्थलों के लिए भी जाना जाता है। हरियाणा राज्य के दक्षिण-पश्चिम में राजस्थान, उत्तर में पंजाब और हिमाचल प्रदेश, पूर्व में उत्तराखंड तथा उत्तर प्रदेश बसा है। हरियाणा की सीमाएं दिल्ली के तीनो ओर से घेरे हुए हैं , जिसके कारण दिल्ली का अधिकांश क्षेत्र हरियाणा में शामिल है | हरियाणा राज्य का सबसे बड़ा शहर फरीदबाद है , जो हरियाणा में एक जिला भी है |

हरियाणा राज्य की स्थापना 1 नवंबर 1966 को हुआ था | यह राज्य 44212 वर्ग किलो मीटर में फैला हुआ है | इसकी भौगोलिक स्थिति 30.73 डिग्री उत्तर और 76.78 डिग्री पूर्व में है। इस राज्य की भूमि बहुत उपजाऊ है | हरियाणा में बहुत खेती भी की जाती है | इस राज्य को भारत की हरित भूमि भी कहा जाता है | हरियाणा का राजकीय फूल ‘कमल’ है। हरियाणा का राजकीय पक्षी ‘श्याम फ़्रैंकोलिन’ है। हरियाणा का राजकीय पेड़ ‘पीपल’ है। हरियाणा का राजकीय पशु  ‘कृष्ण मृग’ है।

हरियाणा की धरती कृषि के लिए उपयुक्त है और इसकी 60% भूमि सिंचित है। यहां की एक चैथाई से ज्यादा आबादी कृषि करती है। यहाँ की प्रमुख फ़सलें तिलहन, कपास, गन्ना, आलू, दालें, जौ, ज्वार और बाजरा हैं।

राज्य के पुरुष वर्तमान समय में पेंट-कोट, कुड़ता-पायजामा, जेकट, जर्सी, सफारी-सूट, जींस-पेंट, लोवर-टी-शर्ट, पेंट-शर्ट, जूते-सेंडल-चप्पल, टोपी-पगड़ी आदि पहनते हैं। राज्य की महिलाये वर्तमान समय में सलवार-सूट, कुड़ता-कुडती-लहंगा, साड़ी, लहंगा-चोली, चुन्नी-जम्फर, पजामी-सूट-लोवर-टी-शर्ट, पेंट-शर्ट, जूते-सेंडल-जूती-चप्पल, सितारे-घोटों वाली चुंदड़ी पहनती हैं।

यदि आप हरियाणा की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यहाँ के 15 शानदार पर्यटन स्थल आपकी यात्रा को यादगार बना देंगे। आइए जानते हैं हरियाणा के वे अद्भुत स्थल जो आपको चौंका देंगे।

हरियाणा (चंडीगढ़, गुरुग्राम, पानीपत, अंबाला आदि) पहुँचने के साधन और वहाँ के बजट रेस्टोरेंट्स

साधन (हरियाणा पहुँचने के)विवरणयात्रा बजट (लगभग)रेस्टोरेंट्स (बजट में)औसत खर्च (प्रति व्यक्ति)
ट्रेनदिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान से सीधी ट्रेनें (अंबाला, रोहतक, पानीपत, गुरुग्राम आदि तक)₹100 – ₹500 (स्लीपर क्लास)Amrik Sukhdev Dhaba (Murthal), Haveli, Bikanervala, Sindhu Sweets₹100 – ₹200
बसदिल्ली, चंडीगढ़, जयपुर, लुधियाना से हरियाणा रोडवेज और प्राइवेट बसें₹150 – ₹600Local Dhabas, Vaishno Bhojanalay, Prem Dhaba₹80 – ₹150
टैक्सी / कैबदिल्ली या चंडीगढ़ से ओला/उबर/लो‍कल टैक्सी₹1500 – ₹4000 (शहर के अनुसार)वही उपरोक्तवही उपरोक्त
निजी वाहनदिल्ली से सभी प्रमुख शहरों तक बढ़िया हाइवे (NH44 आदि)₹700 – ₹2500 (ईंधन पर निर्भर)वही उपरोक्तवही उपरोक्त

1. कुरुक्षेत्र – धर्म की भूमि (Haryana paryatan sthal)

कुरुक्षेत्र वह पवित्र स्थल है, जहां महाभारत का युद्ध लड़ा गया था। यहां स्थित श्री कृष्ण संग्रहालय और ब्रह्म सरोवर जैसे स्थल धार्मिक आस्था का केंद्र है, और यहाँ इतिहास का अद्भुत संगम देखने को मिलता हैं। कुरुक्षेत्र महाभारत के युद्धक्षेत्र के रूप में भी प्रसिद्ध है और भगवद् गीता का जन्मस्थान माना जाता है। यहाँ ब्रह्म सरोवर, ज्योतिसर, सन्निहित सरोवर, कल्पना चावला तारामंडल जैसे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल हैं। कुरुक्षेत्र इंटरनेशनल गीता महोत्सव यहाँ की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करता है। यह स्थान आध्यात्मिकता और इतिहास का अनूठा संगम है |

कुरुक्षेत्र हरियाणा राज्य में एक पवित्र भूमि है जिसे महाभारत का युद्धक्षेत्र का केंद्र और धर्म भूमि कहा जाता है | यहाँ कौरवो और पांडवो के बीच 18 दिन तक युद्ध चला था | यही पे भगवान् श्री कृष्ण ने अर्जुन को भगवद गीता का उपदेश दिया था |

  • कुरु क्षेत्र का नाम चन्द्रवंश के राजा ‘कुरु’ के नाम पर पड़ा, जो उनकी तपोभूमि है |
  • इसे धर्म क्षेत्र भी कहते है क्यूंकि यहाँ पर धर्म की स्थापना हुई थी |
  • गीता में कुल 700 श्लोक है जो श्री कृष्ण और अर्जुन के बात- चीत को दर्शाता है |
  • कुरुक्षेत्र हरियाणा राज्य का एक ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण शहर है। इसे “धर्मक्षेत्र” भी कहते है, जिसका उल्लेख श्रीमद्भगवद्गीता के पहले ही श्लोक में किया गया है |
  • यही वह भूमि है जहाँ महाभारत का युद्ध लड़ा गया था और भगवान कृष्ण ने अर्जुन को “ज्योतिसर” नामक स्थान पर गीता का उपदेश दिया था |
  • राजा कुरु यहाँ के पूर्वज और कौरव-पांडवों के पूर्वज थे। कहते हैं, राजा कुरु ने यहाँ यज्ञ कर भूमि को धर्मभूमि का स्वरूप दिया
  • यह क्षेत्र 48 कोस (लगभग 144 किमी) में फैला हुआ है, जिसमें सैकड़ों तीर्थ, मंदिर और पवित्र सरोवर शामिल हैं। 48 कोस भूमि हरियाणा के पाँच जिलों (कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल, जींद, पानीपत) में फैली है |
  • ब्रह्मसरोवर, सरस्वती सरोवर, ज्योतिसर, सन्निहित सरोवर आदि, जिनका संबंध महाभारत और हिंदू धर्मग्रंथों से है |
  • मान्यता है कि महाभारत युद्ध के दौरान असंख्य योद्धा मारे गए थे। भगवान कृष्ण ने इस भूमि को वरदान दिया कि यहाँ मृत्यु को प्राप्त व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है |
  • माना जाता है कि ऋग्वेद, सामवेद और मनुस्मृति का संकलन भी इसी भूमि पर हुआ था
  • “कुरुक्षेत्र” को भारत का ‘राइस बाउल’ भी कहते है, यहाँ का बासमती चावल विश्व में मशहूर है |
  • थानेसर (Thanesar), जो वर्तमान में कुरुक्षेत्र का भाग है, कभी राजा हर्ष की राजधानी थी |
  • यहाँ हर साल लाखों श्रद्धालु तीर्थ यात्रा के लिए आते हैं और गीता जयंती जैसे भव्य धार्मिक आयोजनों का हिस्सा बनते हैं |
  • यहाँ की मिट्टी को पवित्र माना जाता है और माना जाता है कि यहाँ अंतिम संस्कार करने से भी मोक्ष की प्राप्ति होती है |
  • 2017 में कुरुक्षेत्र को आधिकारिक रूप से ‘पावन नगर’ घोषित किया गया था |

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2. पिंजौर गार्डन (Yadavindra Gardens) – मुग़ल वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण

पिंजौर गार्डन, जिसे यादविंद्र गार्डन के नाम से भी जाना जाता है, हरियाणा के पंचकूला जिले में स्थित एक ऐतिहासिक और भव्य मुग़ल शैली का बाग़ है। यह गार्डन 17वीं सदी में औरंगज़ेब के शासनकाल के दौरान बनाया गया था और बाद में पटियाला रियासत के राजा यादविंद्र सिंह ने इसका पुनरुद्धार किया, जिसके कारण इसे यादविंद्र गार्डन कहा जाने लगा।

पिंजौर गार्डन 100 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है और यह प्रकृति के साथ समय बिताने के लिए एक सुंदर जगह है। इसकी हरियाली और फव्वारे बहुत प्रशिद्ध है | बैसाखी के दौरान, अप्रैल से जून के बीच, हर साल मैंगो फेस्टीवल का आयोजन किया जाता है | इसका आयोजन विशाल रूप में होता है। इसमें केवल सुंदर पेड़-पौधे ही नहीं बल्कि एक मिनी चिड़ियाघर, जापानी उद्यान, एक शानदार नर्सरी और कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जो पिकनिक स्पॉट के लिए जाने जाते है |

  • पिंजौर गार्डन के भीतर बने शीश महल को फिदाई खान का दरबार कहा जाता था , वहीं रंग महल बेगमों का मनोरंजन स्थल था । जबकि जल महल फिदाई खान की बेगमों के स्ननाघर के रूप में जाना जाता है।
  • पिंजौर गार्डन के अलावा पिंजौर में फ्लाइंग क्लब भी है, जहां ग्लाइडर उड़ानों की ट्रेनिंग दी जाती है। देश -विदेश से आने वाले पर्यटक ग्लाइडर उड़ानों की ट्रेनिंग यहां लेते हैं। इस बाग को खासतौर से औरंगजेब के लिए गर्मियों के लिए हिमालय की पहाड़ी पर बनाया गया था।
  • पिंजौर गार्डन में एक हैरिटेज ट्रेन चलती है जो परिसर में सभी स्मारकों और उद्यानों की सैर कराती है।

मुख्य विशेषताएँ:

  • मुग़ल शैली की वास्तुकला: गार्डन को सात स्तरों में बांटा गया है, प्रत्येक स्तर पर सुंदर फव्वारे, झरने, महराबें और पानी की नहरें हैं, जो मुग़ल बागवानी शैली का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
  • हरियाली और फूलों की सजावट: यहां की रंग-बिरंगी फूलों की क्यारियाँ और छायादार वृक्ष पर्यटकों को शांति और आनंद का अनुभव कराते हैं।
  • प्राचीन भवन और महल: गार्डन के भीतर कई ऐतिहासिक भवन और महल स्थित हैं, जिनमें से कुछ अब संग्रहालय और रेस्तरां के रूप में उपयोग किए जा रहे हैं।
  • प्रसिद्ध उत्सव: हर वर्ष अप्रैल में यहां “मैंगो फेस्टिवल” और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जो इस गार्डन को जीवंत बना देते हैं।

3. सुरजकुंड – हस्तशिल्प मेला का केंद्र (Haryana paryatan sthal)

सुरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला के लिए प्रसिद्ध है, जहां देश-विदेश के शिल्पकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। यह मेला हर वर्ष फरवरी में आयोजित होता है और यहां की सांस्कृतिक विविधता देखने लायक होती है। सूरजकुंड हस्तशिल्प मेला यहाँ का प्रमुख आकर्षण है, जो भारतीय कला और संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन करता है। यह मेला हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है |

सूरजकुंड में हर साल अलग-अलग राज्यों का थीम मेले में लगा कर और उस राज्य की विवधता को दर्शाते है | सूरजकुंड हरियाणा बाद में फरीदाबाद शहर के पास है जो दिल्ली से बहुत नजदीक है | सूरजकुंड एक झील है | सिर्फ फरवरी के महीने में ही यहाँ पे मेला लगता है | यहाँ पे जिस राज्य का थीम लगता है | उस राज्य की वस्तुए भी बेचीं जाती है और वही के स्टाल मेले में लगाए जाते है | वहा के भोजन भी थीम में होते है |

यहाँ पर कुछ विविध प्रकार की वस्तुए बताया जा रहा जो अलग-अलग राज्य के थीम में मेले मेलगता है | पश्चिम बंगाल और असम के बांस और बेंत की वस्तुएं, पूर्वोत्तर राज्यों के वस्त्र, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश की लोहे की वस्तुए, और मुरादाबाद के पीतल के बर्तन आदि मेले में स्टालों पे लगाए जाते है |

यहाँ पे अनेको व्यंजन होता है साथ-साथ विदेशी खानपान का स्वाद भी मिलता है। यहाँ पर अनेक राज्यों से कलाकार भी आते है और मंच पे अपनी कलाकारी दिखते भी है | शाम के समय कुछ अद्भुत सांस्कृतिक कार्यकर्म भी होते है |  दर्शक भगोरिया डांस, बीन डांस, बिहू, भांगड़ा, चरकुला डांस, कालबेलिया नृत्य, पंथी नृत्य, संबलपुरी नृत्य और सिद्घी गोमा नृत्य आदि का आनंद भी लेते हैं। 

  • हरियाणा सरकार ने 1987 में यह आयोजन शुरु किया ताकि भारतीय कारीगरों, कुटीर उद्योगों और पारंपरिक शिल्प कला को लोगो के सामने प्रस्तुत किया जा सके |
  • यह मेला लगभग 15 दिनों तक होता है और इस दौरान देश-विदेश से हजारों कारीगर अपनी कलाकृतियां प्रदर्शित करते हैं। इसमें मिट्टी के बर्तन, हस्तनिर्मित गहने, हथकरघा वस्त्र, लकड़ी के खिलौने, लोक कला, और पारंपरिक हस्तशिल्प शामिल हैं |
  • हर वर्ष इस मेले में किसी एक राज्य को थीम बनाकर उसकी कला, संस्कृति, लोक परंपरा और सामाजिक परिवेश का विशेष प्रदर्शन किया जाता है। इससे भारत के विभिन्न राज्यों की विविध सांस्कृतिक को लोगो के सामने लाया जाता है।
  • सुरजकुंड मेला केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नेपाल, थाईलैंड, श्रीलंका, तजाकिस्तान, मिस्र सहित 40+ देशों के शिल्पकार भी भाग लेते हैं, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का सांस्कृतिक उत्सव बन जाता है |
  • इस मेले में लोक संगीत, लोक नृत्य, सांस्कृतिक कार्यक्रम और मनोरंजन के कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं, जो मेले की जीवंतता और रंगीनता को बढ़ाते हैं |
  • मेले के आयोजन का उद्देश्य न केवल शिल्पकारों को आर्थिक सहायता देना है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत और लोककलाओं के संरक्षण और प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका को निभाते है |
  • सूरजकुंड मेला पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है और इसका स्थानीय अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। दिल्ली मेट्रो द्वारा विशेष टिकट व्यवस्था भी की गई है जिससे मेले में आने वाले आगंतुकों की सुविधा बढ़ रही है |
  • मेला क्षेत्र को आकर्षक पारंपरिक स्थापत्य और थीम आधारित प्रवेशद्वारों से सजाया जाता है, जो दर्शकों को ग्रामीण भारत की संस्कृति का सजीव अनुभव कराते हैं |
  • मेले की विशेषता यह भी है कि यहाँ लोक व्यंजनों का स्वाद भी लिया जा सकता है, जिससे यह सांस्कृतिक और खाद्य उत्सव का भी केंद्र बन जाता है |

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4. मोरनी हिल्स – प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग

मोरनी हिल्स हरियाणा का एकमात्र हिल स्टेशन है, जो हनीमून और प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग समान है। यहाँ की ठंडी जलवायु और खूबसूरत नज़ारे पर्यटकों को आकर्षित करते हैं | मोरनी हिल्स, हरियाणा के पंचकुला जिले में स्थित एक सुंदर हिल स्टेशन है।

कहा जाता इस हिल स्टेशन का नाम एक रानी से निकला था, जिन्हे मोरो से बहुत प्यार था ,उन्ही के नाम पे इस हिल स्टेशन का नाम मोरनी हिल्स पड़ा | उन्हें रानी मोरनी भी कहा जाता था |

यह हिल स्टेशन 1220 मीटर ऊचाई पर पहाड़ी पर एक गावं में स्थित है | यहाँ दृश्य अद्भुत है | इस हिल स्टेशन पर वनस्पति और विविध पारकर के जीव-जंतु भी हैं | यह स्थान हिमालय की शिवालिक श्रेणी की गोद में स्थित है यहाँ का वातावरण शांति पूर्ण है | यहाँ पर किला, झील, मंदिर और ट्रेकिंग का भी आनंद लिया जा सकता है |

कहानी के अनुसार रानी ने युद्ध के दौरान इस किले को शरण स्थली बनाया | ऐसा भी कहा जाता है की जब दुश्मनो ने इस किले को घेर लिया था तब रानी ने आत्म बलिदान दे दिया, लेकिन किले को किसी के हाथ में नहीं सौपा | और ये भी कहा जाता है की रानी की आत्मा इस किले के क्षेत्र की रक्षा करती है | अँधेरे में किले के पास जाने की अनुमति नहीं है | पास के ग्रामीण वासी कहते है की रात में अजीब से रौशनी और ध्वनिया सुनाई देती है |

  • मोरनी हिल्स हरियाणा का एकमात्र हिल स्टेशन है, जो पंचकूला जिले में शिवालिक रेंज की तलहटी में बसा है। यह चंडीगढ़ से लगभग 45 किमी और दिल्ली से 260 किमी दूरी पर है |
  • इस हिल स्टेशन का नाम 17वीं शताब्दी की रानी मोरनी के नाम पर पड़ा है, जिन्होंने इस क्षेत्र पर शासन किया था |
  • मोरनी हिल्स की ऊंचाई लगभग 1220 मीटर है, जो इसे प्राकृतिक सुंदरता और ठंडी हवा के लिए खास बनाती है
  • यहाँ के हरे-भरे जंगल, पहाड़ी घाटियाँ, सुंदर झीलें (जैसे टिक्कर ताल), और वनस्पतियाँ प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करती हैं। टिक्कर ताल पर बोटिंग भी की जा सकती है |
  • मोरनी हिल्स पर्यटन के लिए ट्रेकिंग, कैंपिंग, बर्ड वॉचिंग, रॉक क्लाइंबिंग, कमांडो नेट और रोमांचक(मनभावन ) साहसिक खेलों का केंद्र हैं |
  • यहाँ कई दुर्लभ पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जैसे वॉलक्रीर, क्रेस्टेड किंगफिशर, बार-टेल्ड ट्रीक्रीपर, हिमालयन बुलबुल, ब्लू पीफाउल आदि, जो बर्डवॉचिंग के शौकीनों के लिए स्वर्ग है |
  • मोरनी हिल्स पुरातात्विक दृष्टि से समृद्ध स्थल है; यहाँ 7वीं शताब्दी के ठाकुरद्वार मंदिर और प्राचीन किले (मोरनी फोर्ट) जैसी ऐतिहासिक धरोहरें भी मौजूद हैं |
  • करोह पीक, जो मोरनी हिल्स की सबसे ऊंची चोटी है (4813 फीट ऊँचाई पर), ट्रेकर्स के लिए प्रमुख आकर्षण है और यहाँ से आसपास के गावों व पहाड़ियों के नजारे शानदार दिखाई देते हैं |
  • यहाँ का प्राकृतिक वातावरण, वन्यजीव एवं पक्षियों की विविधता, और शांति-प्रेमी लोगों के लिये यह जगह एकदम उपयुक्त है। मोरनी हिल्स में सियार, लंगूर, हाइना, नीलगाय, जंगली सूअर जैसे कई जीव भी देखे जा सकते हैं |
  • मोरनी में चौड़ी सड़कें हैं, जिससे बाइकिंग और ड्राइविंग का अनुभव भी खास रहता है। पर्यटक यहाँ पिकनिक और सैर-सपाटे के लिए दूर-दूर से आते हैं |
  • कुल मिलाकर, मोरनी हिल्स हरियाणा का प्राकृतिक, ऐतिहासिक, और पर्यावरणीय दृष्टि से समृद्ध स्थल है जो शांति, रोमांच और प्रकृति के बीच परफेक्ट बैलेंस प्रदान करता है |

हरियाणा कय पर्यटन – विकिपीडिया


5. सोहना – गर्म पानी के झरने और शिव मंदिर (Haryana paryatan sthal)

सोहना, हरियाणा के गुरुग्राम (पूर्व में गुड़गांव) जिले में अरावली की पहाड़ियों की गोद में बसा एक सुंदर पर्यटन स्थल है। यह जगह अपने गर्म पानी के झरनों (Hot Springs) और प्राचीन शिव मंदिर के लिए प्रसिद्ध है, जो इसे धार्मिक और प्राकृतिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बनाते हैं।

सोहना के झरनों में पाए जाने वाला पानी सल्फरयुक्त होता है, जिसे आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा में त्वचा और जोड़ों की बीमारियों के उपचार में लाभकारी माना जाता है। यह पानी एक कुंड में इकट्ठा होता है, जहाँ पर्यटक स्नान करते हैं।

झरनों के पास स्थित प्राचीन शिव मंदिर धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां शिवरात्रि और अन्य पर्वों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। मंदिर की बनावट और उसका वातावरण भक्तों को अध्यात्म से जोड़ देता है।

प्राकृतिक सौंदर्य के बीच स्थित रिसॉर्ट्स और पर्यटन केंद्र इस जगह को पिकनिक और वीकेंड गेटअवे के लिए आदर्श बनाते हैं। हरियाणा पर्यटन विभाग द्वारा संचालित “Barbet Resort” भी यहीं स्थित है।

  • सोहना हरियाणा के गुरुग्राम जिले में अरावली की तलहटी में बसा है, जो गर्म पानी के झरनों (हॉट स्प्रिंग्स) के लिए मशहूर है। यह हरियाणा का एकमात्र गर्म पानी का झरना है, जिसका तापमान लगभग 46 से 51.7 डिग्री सेल्सियस तक रहता है |
  • सोहना के गर्म पानी में गंधक (सल्फर) की मात्रा अधिक होती है, इसलिए यह औषधीय गुणों से भरपूर है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस गर्म पानी में नहाने से सभी प्रकार के चर्म रोग ठीक हो जाते हैं |
  • यहां एक प्राचीन शिव मंदिर है, जिसे बाबा लखी शाह बंजारा ने बनवाया था। यह मंदिर धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है और हर साल नवंबर में यहाँ गंगास्नान मेला और जुलाई- अगस्त में तीज मेला लगता है।
  • कहानी है कि महाभारत के पांडवों में से अर्जुन ने यहां प्यास लगने पर कुआं खोदकर इस गर्म पानी का स्रोत पाया था, इसीलिए इसे पौराणिक महत्व भी प्राप्त है।
  • सोहना के आसपास की प्राकृतिक हरियाली, झरने, छोटे ताल और पहाड़ियां पर्यटकों को खूब आकर्षित करती हैं। यहां स्टीम बाथ और मिनी स्विमिंग पूल जैसी आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध हैं, ताकि लोग इस औषधीय जल का लाभ उठा सके |
  • सोहना में स्थित ऐतिहासिक सोहना हिल फोर्ट (भरतपुर हिल फोर्ट) भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है, जो पहाड़ी पर बना एक प्राचीन किला है |
  • सोहना के गर्म कुंड और शिव मंदिर की श्रद्धा देश-दुनिया भर के भक्तों को आकर्षित करती है, खासकर सावन और विशेष त्योहारों पर यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं |

6. असगढ़ किला (Asigarh Fort) – ऐतिहासिक किला (Haryana paryatan sthal)

हिसार जिले में स्थित असगढ़ किला, 11वीं सदी का एक ऐतिहासिक किला है। यह किला पृथ्वीराज चौहान से जुड़ा हुआ है और यहां की दीवारों पर प्राचीन हिंदू मूर्तियों के चित्रण देखे जा सकते हैं।

असगढ़ किला को हांसी किला भी कहा जाता है | भारत के हरियाणा के हांसी शहर में अमती झील के पूर्वी तट पर स्थित है | यह एनएच 9 दिल्ली से करीब 135 किलोमीटर दूर बसा है। यह 30 एकड़ में फैला हुआ है | यह किला अपने प्रमुख दिनों में इसके आसपास के क्षेत्र में 80 किलोमीटर में फैला हुआ था |

असीगढ़ तलवारों का किला, असी (तलवार) और गढ़ (किला) से, क्योंकि यह हिन्दू शासकों के प्राचीन काल से तलवार निर्माण का केंद्र था। विभिन्न उपाख्यानों में किले के लिए कई नामों का उपयोग किया गया है, जैसे कि असीदुर्गा, असीगढ़, असिका, ए-सिका, अंसी, हांसी, आदि।

बहुत प्राचीन समय से हांसी का क्षेत्र बड़ा रणनीतिक महत्व रखता आया है। ऐसा माना जाता है कि इसकी सबसे पहली संरचना सम्राट हर्षवर्धन या उनके दादा प्रभाकरवर्धन के वक्त बनी थी और यह पुष्यभूति वंश से जुड़ा है। खुदाई में यहाँ प्राचीन काल के सिक्के और अवशेष भी मिले हैं, जिससे पता चलता है कि हांसी हमेशा से बसा हुआ क्षेत्र रहा है

12वीं शताब्दी में चौहान वंश के राजा सोमेश्वर के भाई विग्रहराज चतुर्थ के अधिकार में यह किला आया था। इसके बाद प्रसिद्ध सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने इसमें कई महत्वपूर्ण निर्माण कराए। 1192 में मोहम्मद गौरी द्वारा पृथ्वीराज चौहान की पराजय के बाद यह किला दिल्ली सल्तनत के नियंत्रण में आ गया |

मुगल काल में, औरंगजेब जैसे शासक यहां आए और 1705 में गुरु गोबिंद सिंह जी भी हांसी पहुंचे। 1707 में बाबा बंदा सिंह बहादुर ने इस किले की घेराबंदी की। इसके बाद यह किला 1736 से मराठा शासन के अधीन आया। 1780 के दशक में यह किला सिख शासक महाराजा जस्सा सिंह रामगढ़िया के नियंत्रण में आया

1798 से 1801 के बीच जॉर्ज थॉमस, एक आयरिश प्रवासी, ने इस किले को अपनी राजधानी बनाया और इसका पुनर्निर्माण कराया। फिर 1802 के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने कब्जा कर लिया और 1810 से 1947 तक अंग्रेजों ने यहां से शासन चलाया

  • किला 1,000 साल से भी अधिक पुराना है। सम्राट हर्षवर्धन के समय इसकी आरंभिक संरचना हुई थी | 12वीं शताब्दी में चौहान वंश के राजा पृथ्वीराज चौहान ने इसको दोबारा से बनवाया |
  • किले की दीवारें 16 मीटर (52 फीट) ऊँची और 11 मीटर (37 फीट) मोटी हैं, जिससे यह दुर्गम माना जाता था
  • खुदाई में यहाँ ईसा-पूर्व काल के सिक्के, जैन तीर्थंकरों की 57 कांस्य प्रतिमाएं और बुद्ध की मूर्ति मिली । 1982 में “हांसी होर्ड” नाम का खजाना मिला जिसमें गुप्त काल और 7-8वीं सदी की मूर्तियाँ थीं |
  • इस किले पर चौहान, तोमर, दिल्ली सल्तनत, मराठा, सिख, और अंग्रेजों सहित कई शासकों का अधिकार था । 18वीं सदी में मराठाओं और फिर जॉर्ज थॉमस जैसे यूरोपीय शासकों के अधीन था |
  •  1857 के विद्रोह के दौरान हांसी और इसका किला स्वतंत्रता के लिए संघर्ष का केंद्र बना। बाद में अंग्रेजों ने यहाँ छावनी बनाई और किला काफी हद तक ध्वस्त कर दिया |
  • इसमें बारादरी (खंभों वाली संरचना), दरगाह (चार कुतुब), मंदिर और एक मस्जिद भी है, जो इसकी सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती हैं |
  • यह किला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षणाधीन स्मारक है |

7. भीमा देवी मंदिर – प्राचीन मंदिर और संग्रहालय

पिंजौर में स्थित भीमा देवी मंदिर, 8वीं से 11वीं सदी का प्राचीन मंदिर है। यहां की वास्तुकला और मूर्तिकला दर्शनीय हैं।

पिंजौर में बसा भीमा देवी मंदिर माँ दुर्गा का स्वरूप है | यह एक हिन्दू धर्म का मंदिर है | यहाँ माँ दुर्गा की पूजा आराधना की जाती है | इस मंदिर को गुर्जर प्रतिहार के शासनकाल में बनाया गया था | इस मंदिर का संबंध महाभारत काल से जुड़ा हुआ है।

कहा जाता है की पांडव अपने वनवास के दिनों में पिंजौर में भी ठहरे थे | उन्होंने यहाँ माँ काली की पूजा आराधना और यज्ञ किया था | भीमा देवी के बारे में कहा जाता है कि वो ऋषियों की रक्षा करने के लिए प्रकट हुई थी।

  • भीमा देवी मंदिर का निर्माण 8वीं से 12वीं शताब्दी के बीच गुर्जर-प्रतिहार वंश के शासनकाल में हुआ था। यह मंदिर अपनी वास्तुशैली, धार्मिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है |
  • इस मंदिर परिसर को “उत्तर भारत का खजुराहो” भी कहते है, क्योंकि यहाँ की मूर्तियों और शिल्पकारी में कामुकता की शैली नजर आती है, जैसी प्रसिद्ध खजुराहो मंदिरों में देखने को मिलती है |
  • 1974 में यहां पुरातत्व विभाग द्वारा खुदाई की गई, जिसमें लगभग 100 प्राचीन मूर्तियां और मंदिर के खंडहर प्राप्त हुए। ये मूर्तियां देवी-देवताओं एवं अनेक सांस्कृतिक विषयों को दर्शाती हैं |
  • कहानी है कि पांडवों ने अपने वनवास के दौरान पिंजौर क्षेत्र में मां काली/भीमा देवी की पूजा की थी। ऐसा भी माना जाता है कि इस क्षेत्र का नाम ‘पंचपुरा’ से ‘पिंजौर’ इन्हीं कथाओं की बदौलत पड़ा |
  •  मंदिर के सामने प्रसिद्ध पिंजौर गार्डन है, जिसे मुगल काल में बनवाया गया था। कहा जाता है कि मुगलों ने हिंदू मंदिर के अवशेषों को संरक्षित करने के उद्देश्य से यहां बाग-बगीचा बनवाया था
  • मंदिर की दीवारों व परिसर में देवी-देवताओं (शिव, पार्वती, अग्नि, वरुण, सूर्य, विष्णु, गणेश, कार्तिकेय आदि) की खूबसूरत मूर्तियां मिली हैं, जिनकी नक्काशी अद्भुत है |
  • भीमा देवी मां दुर्गा का ही एक रूप मानी जाती हैं। तंत्र साधना और गुप्त नवरात्रि के समय यहां विशेष पूजा-अनुष्ठान होते हैं, और दूर-दूर से साधक और पर्यटक आते हैं |
  • यह मंदिर आज भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित स्मारक है, और इसके परिसर में एक स्थल संग्रहालय भी स्थापित है, जहाँ खुदाई से निकली मूर्तियां और शिलालेख रखे हैं |
  • आज भीमा देवी मंदिर और पास का पिंजौर गार्डन इतिहास, वास्तुकला, धर्म और प्रकृति प्रेमियों के लिए बड़ा आकर्षण बना हुआ है |

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8. डेम्डा झील (Damdama Lake) – साहसिक खेलों का स्थल

गुरुग्राम जिले में स्थित डेम्डा झील, साहसिक खेलों जैसे पैरासेलिंग, कयाकिंग और रॉक क्लाइम्बिंग के लिए प्रसिद्ध है। यहां की शांतिपूर्ण वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों को आकर्षित करती है।

दमदमा झील आपको मानसिक तनाव से मुक्त करती है क्यूंकि वहा पे बहुत से ऐसे साहसिक खेल खेले जाते है जो आपके दिनचर्या को संतुलित करके एक नया उमंग से आपको कुछ बदलाव और अच्छा महसूस करने का मौका देगा |

यह झील हरियाणा के सभी बड़ी प्राकृतिक झीलों में से एक है | यह गुड़गांव जिले के सोहना में स्थित है। यह गुड़गावं से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है | यह झील पहाड़ियों से घिरा हुआ है |

यह बहुत सुन्दर और अद्भुत झील है | पेड़ पर बने घर बहुत ही आकर्षक लगते है जो पर्यटकों को अपनी ओर खींचते हैं |

  • दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों के लिए डेम्डा झील एक लोकप्रिय पिकनिक और आउटिंग डेस्टिनेशन है। यहाँ बच्चों के लिए ऊँट की सवारी और नाव की सवारी भी उपलब्ध हैं |
  • अरावली पहाड़ियों की खूबसूरती, हरियाली और खुले वातावरण के कारण यह जगह फोटोग्राफी और शांति पसंद पर्यटकों के लिए भी आकर्षक या खूबसूरत है |
  • यह झील पक्षी प्रेमियों के लिए भी अच्छी जगह है—विभिन्न देशी व प्रवासी पक्षियों को देखने का मौका मिलता है
  • परिसर में होटल और खाने-पीने की व्यवस्था उपलब्ध है, लेकिन पर्यटक अपने साथ भी हल्का-फुल्का खाना ला सकते हैं
  • हरियाणा पर्यटन विभाग द्वारा यहाँ टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स की स्थापना की गई है, जिससे यात्री सुविधाजनक तरीके से अपनी यात्रा का आनंद ले सकते हैं
  • यह झील सोहना से तकरीबन 8 किमी और गुरुग्राम (गुड़गांव) से 21-24 किमी की दूरी पर है। दिल्ली व नोएडा से भी यहाँ सड़क मार्ग से पहुँचना आसान है |

9. पंचकुला – नियोजित शहर और पर्यटन स्थल

Haryana paryatan sthal: पंचकुला, चंडीगढ़ के पास स्थित एक नियोजित शहर है। यहां के कालका, रायपुर रानी किला और छतबीर चिड़ियाघर जैसे स्थल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। शिवालिक पर्वतमाला के आधार पर स्थित पंचकुला अपने बगीचों, गुरुद्वारा नाडा साहिब, माता मनसा देवी मंदिर, चट बीर चिड़ियाघर और कैक्टस गार्डन के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की ताजी हवा और प्राकृतिक सुंदरता मन को शांति देती है |

पंचकुला अपने पांच नहरों के लिए भी जाना जाता है | ये नहरे राज्य में जलपूर्ति का काम करता है | यहाँ पे शिवालिक पहाड़िया और मंदिर पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है |

पंचकूला में माँ मनसा देवी का मंदिर है जो बहुत ही पवित्र मन जाता है | यहाँ श्रद्धालु धार्मिक आस्था से जुड़ते है | जानकारी के अनुमान से यह मंदिर 210 साल पुरांना है |

  • पंचकुला की स्थापना 15 अगस्त 1995 को की गई और यह चंडीगढ़ की तरह ही एक सुव्यवस्थित एवं नियोजित शहर है
  • इसका नाम संस्कृत शब्द ‘पंच’ (पाँच) और ‘कुला’ (नहरें) से पड़ा है, अर्थात् “पाँच नहरों का शहर”। ये नहरें क्षेत्र की सिंचाई के लिए घग्गर नदी से पानी लाती थीं |
  • यह शहर, मोहाली (पंजाब) और चंडीगढ़ के साथ मिलकर ‘चंडीगढ़ ट्राई-सिटी’ के रूप में जाना जाता है और तीनों शहरीकरण का अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करते हैं |
  •  पंचकुला जिले में मोरनी हिल्स (हरियाणा का एकमात्र हिल स्टेशन), पिंजौर गार्डन, काली माता मंदिर, छठी माता मंदिर और प्रसिद्ध माता मनसा देवी मंदिर स्थित हैं, जिनका धार्मिक और पर्यटन दोनों दृष्टि से महत्व है |
  • यहाँ बीर शिकारगढ़ व रैतान वन्य जीव अभ्यारण्य और मोरनी क्षेत्र बन्य जीवों के लिए सुरक्षित स्थल हैं |
  • मोरनी की पहाड़ियाँ पंचकुला के प्राकृतिक सौंदर्य में चार चाँद लगाती हैं; करोह इन पहाड़ियों की सबसे ऊँची चोटी (1,514 मीटर) है
  • यहाँ के पिंजौर, बरवाला, कालका और रायपुररानी जैसे कस्बे अपनी पौराणिक और ऐतिहासिक धरोहर के लिए जाने जाते हैं। आर्यों से लेकर गुप्त, चंदेल, चौहान और मुस्लिम शासकों का प्रभाव यहाँ रहा है |
  • पंचकुला जिले में साक्षरता दर लगभग 81.88% है, जो राज्य और देश के औसत से अधिक है |
  •  पंचकुला राष्ट्रीय राजमार्ग 5 व 344 से जुड़ा हुआ है, जिससे यहाँ पहुँचने में सुविधा रहती है |

10. गुरुग्राम – आधुनिकता और संस्कृति का संगम

गुरुग्राम (पहले गुड़गांव), हरियाणा का सबसे तेजी से विकसित होता शहर है, जो दिल्ली से सटे होने के कारण एक प्रमुख वाणिज्यिक और शहरी केंद्र के रूप में उभरा है। यह शहर जहां एक ओर आधुनिकता की मिसाल है, वहीं दूसरी ओर यहां की संस्कृति, विरासत और पर्यटन स्थल भी दर्शनीय हैं। गुरुग्राम उन पर्यटकों के लिए एक अनूठा अनुभव प्रदान करता है जो आधुनिकता, आरामदायक जीवनशैली और सांस्कृतिक विविधता को एक साथ अनुभव करना चाहते हैं | यहां के साइबर हब, किंगडम ऑफ ड्रीम्स और दमदमा झील जैसे स्थल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

यह दिल्ली से ३२ किमी. दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। यह चण्डीगढ़ और मुम्बई के बाद यह भारत का तीसरा सबसे ज्यादा पर-कैपिटा इनकम वाला नगर है। गुरुग्राम दिल्ली के प्रमुख सैटेलाइट नगरों में से एक है |

महाभारत काल में इंद्रप्रस्थ के राजा युधिष्ठिर ने यह ग्राम अपने गुरु द्रोणाचार्य को दिया था | उन्ही के नाम पर इस नगर का नाम गुरुग्राम पड़ा और बाद में बदलकर गुड़गावं हो गया |

  • महाभारत काल में यह क्षेत्र राजा युधिष्ठिर ने अपने गुरु द्रोणाचार्य को उपहार के रूप में दिया था, इसलिए इसे “गुरु गाँव” कहते थे , जो बाद में “गुड़गांव” और फिर 2016 में गुरुग्राम नाम से जाना जाने लगा। इसी संबंध में यहां द्रोणाचार्य का मंदिर और तालाब के भग्नावशेष भी मौजूद हैं।
  • गुरुग्राम का महाभारत के महान गुरु भक्त एकलव्य से गहरा सम्बन्ध है, जहां द्रोणाचार्य ने उससे अंगूठा मांगा था
  • 1980 के दशक से यहाँ औद्योगिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में तेजी से विकास हुआ। आज यह डीएलएफ, माइक्रोसॉफ्ट, गुगल और कई मल्टीनेशनल कंपनियों के कार्यालयों का हब बन चुका है और ‘भारत का सिंगापुर’ के रूप में भी जाना जाता है |
  • गुरुग्राम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का भाग है और दिल्ली से केवल लगभग 32 किमी दूरी पर स्थित है, जिससे इसकी भौगोलिक और आर्थिक महत्व बढ़ जाता है |
  • 2011 की जनगणना के अनुसार, गुरुग्राम की जनसंख्या लगभग 8 लाख 80 हजार के आस-पास थी, जो हरियाणा का दूसरा सबसे बड़ा शहरी क्षेत्र है |
  • 1970 के पहले यह एक छोटा सा कृषि प्रधान गांव था लेकिन अब यह हरियाणा का तेजी से विकसित होता हुआ स्मार्ट शहर है, जहाँ बुनियादी ढाँचा, सड़कें, टावर, शॉपिंग मॉल्स और गगनचुंबी इमारतें देखने को मिलती हैं
  • पुरातन धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के साथ-साथ गुरुग्राम में अलग-अलग प्रदेशों, भाषाओं और संस्कृतियों के लोगों का संगम देखने को मिलता है, जिससे यह शहर बहुसांस्कृतिक और बहुभाषी है।
  • जबकि गुरुग्राम का शहरीकरण तेजी से हुआ है, आसपास की अरावली पहाड़ियों ने इस क्षेत्र को कुछ प्राकृतिक हरा-भरा स्वरूप भी प्रदान किया है |
  • 2016 में शहर का नाम गुड़गांव से गुरुग्राम किया गया ताकि इसके प्राचीन और पौराणिक महत्व को पुनर्स्थापित किया जा सके और हिंदू संस्कृतिक धरोहर को सम्मान मिले |

11. चंडीगढ़ – नियोजित शहर और पर्यटन स्थल

चंडीगढ़, भारत का पहला नियोजित शहर है, जिसे विश्वप्रसिद्ध वास्तुकार ली कॉर्बूज़िए (Le Corbusier) द्वारा डिज़ाइन किया गया था। यह शहर हरियाणा और पंजाब की संयुक्त राजधानी है और अपने बेहतरीन शहरी नियोजन, स्वच्छता, और हरे-भरे वातावरण के लिए प्रसिद्ध है।

यहां आधुनिकता और प्रकृति का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है। चंडीगढ़ शहरी नियोजन और प्राकृतिक सौंदर्य का एक दुर्लभ मेल है। यह उन लोगों के लिए एक आदर्श गंतव्य है जो स्वच्छ, शांत और व्यवस्थित वातावरण में छुट्टियाँ बिताना चाहते हैं।

यहां की हरियाली, संस्कृति और आधुनिक जीवनशैली यात्रियों को बार-बार आने पर मजबूर करती है। यहां के रॉक गार्डन, सुखना लेक और बटरफ्लाई पार्क जैसे स्थल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।

  • चंडीगढ़ स्वतंत्र भारत का पहला नियोजित शहर है, जिसका मास्टर प्लान 1950 के दशक में प्रसिद्ध स्विस-फ्रांसीसी वास्तुकार ली कोर्बुजिए ने तैयार किया था। इससे पहले अमरीकी वास्तुकार अल्बर्ट मेयर और पोलिश वास्तुकार मैथ्यु नोविकी ने योजना बनाई थी |
  •  1947 के विभाजन या बटवारे के बाद पंजाब की राजधानी लाहौर पाकिस्तान में चली गई, जिसके कारण भारत को एक नई राजधानी की आवश्यकता थी। 1952 में चंडीगढ़ की नींव रखी गई और इसे आधुनिक भारत के भविष्य का प्रतीक माना गया |
  • चंडीगढ़ अपनी वास्तुकला, खुली सड़कों, हरित पट्टियों और क्षेत्रीय नियोजन के लिए विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है। इसके कैपिटल परिसर को जुलाई 2016 में यूनेस्को ने विश्व विरासत स्थल के रूप में मान्यता दी
  • चंडीगढ़ का नाम शक्तिपीठ माता चंडी/चण्डिका के नाम पर रखा गया है, और शहर में आज भी चंडी मंदिर एक प्रमुख धार्मिक स्थल है |
  • यह शहर हरियाणा और पंजाब दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी है और एक केन्द्र शासित प्रदेश भी है
  • चंडीगढ़ गार्डन, रॉक गार्डन (नेकी चंद द्वारा निर्मित), स्कैंडल पॉइंट, सुखना झील, रोज़ गार्डन जैसे पर्यटन आकर्षण यहाँ के प्रमुख स्थल हैं। ये स्थल प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ सांस्कृतिक एवं कलात्मक धरोहर भी प्रस्तुत करते हैं |
  •  शहर की डिजाइन में आधुनिकता के साथ पर्यावरण का समन्वय है। चंडीगढ़ की हरियाली, साफ-सफाई और सुव्यवस्थित सड़कें इसे अन्य शहरों से अलग बनाती हैं |
  • चंडीगढ़ प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से भारत के सबसे समृद्ध शहरों में से एक है, जहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन के स्तर उच्च हैं |
  • चंडीगढ़ की योजना CIAM (Congrès International d’Architecture Moderne) के सिद्धांतों पर आधारित है, जिसमें कार्य, जीवन और अवकाश के लिए अलग-अलग क्षेत्र निर्धारित हैं

12. कुरुक्षेत्र संग्रहालय – ऐतिहासिक धरोहर का संग्रह

Haryana paryatan sthal: कुरुक्षेत्र में स्थित यह संग्रहालय महाभारत से जुड़ी ऐतिहासिक वस्तुओं का संग्रह प्रस्तुत करता है। यहां की प्रदर्शनी महाभारत के युद्ध और उससे जुड़ी घटनाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है।

हरियाणा में गीता की जन्मस्थली और कर्मस्थली कुरुक्षेत यहां की सांस्कृतिक धरोहर कर केंद्र रही है क्योंकि हरियाणा में संग्रहालय संस्कृति को सबसे अधिक संरक्षित करने का काम कुरुक्षेत्र(थानेसर) में हुआ है, इसीलिए कुरुक्षेत्र को संग्रहालयों की नगरी कहा जाता है |

कुरुक्षेत्र जिले में भगवान श्री कृष्ण का संग्रहालय है जिसकी स्थापना 1987 में कई गई थी इए संग्रहालय में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से सम्बंधित जानकारी एक सही स्थान पर एकत्रित करने का प्रयास किया है इस संग्रहालय को देखने के लिए विदेशी पर्यटक आते है और इस संग्रहालय के बाहर भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा स्थापित की गई है

कुरू ने जिस क्षेत्र को बार-बार जोता था, उसका नाम कुरूक्षेत्र पड़ा। कहते हैं कि जब कुरू बहुत मनोयोग से इस क्षेत्र की जुताई कर रहे थे तब इन्द्र ने उनसे जाकर इस परिश्रम का कारण पूछा। कुरू ने कहा-“जो भी व्यक्ति यहाँ मारा जायेगा, वह पुण्य लोक में जायेगा।” 

  • यह संग्रहालय पूरी तरह से भगवान श्रीकृष्ण और महाभारत के विषय पर समर्पित है और देश का एकमात्र ऐसा संग्रहालय है जो इस विषय को विशेष रूप से प्रदर्शित करता है |
  • इसकी स्थापना 1987 में कुरुक्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा की गई थी, और बाद में इसे मौजूदा इमारत में स्थानांतरित कर 2012 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने इसका उद्घाटन किया |
  • संग्रहालय में भगवान कृष्ण के जन्म से लेकर द्वारका में उनके विभिन्न कार्यों तक के दृश्य, मूर्तियां, चित्र और शिलालेख प्रदर्शित हैं, जिनमें आंध्र प्रदेश के कलमकारी, ओडिशा के पाटचित्र, बंगाल के धान से बने चित्र आदि की प्राचीन कला भी शामिल है |
  • यहाँ महाभारत के 18 दिनों तक चले युद्ध के हर प्रसंग को विस्तार से और ज्यादातर दुर्लभ जानकारियों के साथ प्रस्तुत किया गया है, साथ ही भगवान कृष्ण के गीता उपदेशों को भी उजागर किया गया है। संग्रहालय में 48 कोस कुरुक्षेत्र की पवित्र भूमि के बारे में भी बताया गया है
  • संग्रहालय परिसर में मल्टीमीडिया महाभारत और गीता गैलरी भी हैं, जो आधुनिक तकनीक के माध्यम से इस ऐतिहासिक कथा को जीवंत रूप में देखने का अनुभव देते हैं |
  • यह संग्रहालय कुरुक्षेत्र के ब्रह्मसरोवर के करीब है, जो धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है |
  • हाल ही में संग्रहालय में नई सजावट और कलाकृतियों के साथ इसे इतिहास, कला और संस्कृति का जीवंत केंद्र बनाने का कार्य भी चल रहा है, जिससे पर्यटकों को एक समृद्ध और आकर्षक अनुभव मिलता है

13. सुलतानपुर राष्ट्रीय उद्यान – पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग

सुलतानपुर राष्ट्रीय उद्यान (Sultanpur National Park), हरियाणा के गुरुग्राम जिले में स्थित एक अद्भुत पक्षी अभयारण्य है, जो खासतौर पर पक्षी प्रेमियों और प्रकृति पर्यटकों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। दिल्ली से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित यह उद्यान शांत वातावरण, हरे-भरे जंगलों और जलाशयों के कारण शहर के शोरगुल से दूर सुकून का अनुभव देता है। सुलतानपुर राष्ट्रीय उद्यान में हर साल 250 से अधिक प्रजातियों के पक्षी देखे जाते हैं, जिनमें से कई प्रवासी पक्षी सर्दियों में साइबेरिया, यूरोप और अफगानिस्तान जैसे स्थानों से यहाँ आते हैं। प्रमुख पक्षियों में ग्रे लैग गूज, कोम्ब डक, सारस क्रेन, फ्लेमिंगो, किंगफिशर और ब्लैक नेक्ड स्टॉर्क शामिल हैं।

  • सुलतानपुर राष्ट्रीय उद्यान गुरुग्राम जिले में है, जो दिल्ली से लगभग 46 किमी और गुरुग्राम से 15 किमी दूर स्थित है। यहां पहुंचना सड़क, ट्रेन और हवाई अड्डे से काफी सरल है, निकटतम बड़ा हवाई अड्डा इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय विमानक्षेत्र है |
  •  पहले यह क्षेत्र शिकारगाह था, लेकिन पक्षी विशेषज्ञ सलीम अली और पीटर जैक्सन जैसे वन्यजीव प्रेमियों के प्रयासों से इसे संरक्षित कर 1972 में पक्षी अभयारण्य घोषित किया गया और 1989 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा प्राप्त हुआ |
  • यह उद्यान एक विशाल प्राकृतिक झील और दलदली बाढ़ के मैदानों से घिरा है, जो पक्षियों के लिए आदर्श या उपयुक्त आवास प्रदान करता है। यमुना नदी का पानी भी यहां प्रवाहित होता है, जिससे यहां का पारिस्थितिकी तंत्र समृद्ध है |
  • सुलतानपुर राष्ट्रीय उद्यान एक शांतिपूर्ण और मनोरम स्थल है, जो पक्षी दर्शन, प्रकृति की खूबसूरती और प्राकृतिक हरियाली का आनंद लेने के लिए उत्तम है। यह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के लिए खास आकर्षण है
  • पिकनिक और पक्षी दर्शन के लिए नवंबर से मार्च का मौसम सबसे उपयुक्त माना जाता है, जब पक्षियों की संख्या और विविधता अपने चरम पर होती है |
  • उद्यान में प्रवेश के लिए पहचान पत्र और मामूली शुल्क देना होता है, जो वन विभाग द्वारा निर्धारित है

उपयोगी जानकारी:

  • प्रवेश शुल्क: ₹50 (भारतीय नागरिकों के लिए, अलग-अलग दरें हो सकती हैं)
  • समय: प्रातः 7:00 बजे से सायं 4:30 बजे तक (मौसम के अनुसार थोड़ा बदल सकता है |
  • सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से मार्च
  • कैसे पहुँचें: गुरुग्राम रेलवे स्टेशन से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, टैक्सी या निजी वाहन से आसानी से पहुँचा जा सकता है।

14. पिंजौर हेरिटेज मेला – सांस्कृतिक उत्सव

Haryana paryatan sthal: पिंजौर में आयोजित होने वाला यह मेला हरियाणा की सांस्कृतिक धरोहर का अद्भुत प्रदर्शन प्रस्तुत करता है। यहां की लोक कला, संगीत और नृत्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।

पिंजौर का मेला हर साल लगता है | यहाँ के कुछ मुख्य अधिकारी इसके उद्घाटन के लिए भी आते है |

  • यह मेला हर साल दिसंबर में हरियाणा के पंचकुला जिले में स्थित ऐतिहासिक यादवेंद्र गार्डन, जो एक प्रसिद्ध 17वीं शताब्दी का मुगल शैली उद्यान है, में आयोजित किया जाता है।
  • इसका आयोजन पिंजौर की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को उजागर करने और क्षेत्र के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा पर्यटन विभाग द्वारा किया जाता है।
  • मेले में देश भर के कलाकार विभिन्न लोक नृत्य, गरबा, शास्त्रीय और आधुनिक संगीत प्रस्तुत करते हैं। साथ ही, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में रॉक बैंड, रंगोली प्रतियोगिताएं, पतंगबाजी, फेस पेंटिंग जैसी गतिविधियां भी आयोजित होती हैं।
  • मेले के दौरान अनारकली बाजार जैसी जगहों पर पूरे भारत से लाए हुए हस्तशिल्पों की प्रदर्शनी लगती है, साथ ही फूड कोर्ट में क्षेत्रीय और विविध स्वादिष्ट व्यंजन मिलते हैं जो पर्यटकों को लुभाते हैं।
  • यदवेंद्र गार्डन को मेले के दौरान भव्य लाइटिंग और सजावट से सजाया जाता है, जो मुगलकालीन वैभव और वैदिक काल की सांस्कृतिक महत्व को दर्शाते हैं।
  • यह मेला केवल सांस्कृतिक प्रदर्शनों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों और परिवार के लिए भी अनेक मनोरंजक प्रतियोगिताएं और आयोजनों का हिस्सा होता है, जिससे यह समृद्ध और आनंदमय उत्सव बनता है।
  • आमतौर पर यह महोत्सव अक्टूबर या दिसंबर के महीने में लगभग 4 से 5 दिनों तक चलता है, जिसके दौरान सुबह से रात तक कार्यक्रम होते हैं और प्रवेश पर मामूली शुल्क रहता है।

15. कालका-शिमला रेलवे – विश्व धरोहर स्थल

Haryana paryatan sthal: कालका-शिमला रेलवे, यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है। यह रेलवे मार्ग पहाड़ी क्षेत्रों से होकर गुजरता है और यहां की प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों को आकर्षित करती है।

ब्रिटिश शासन की ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला को कालका से जोड़ने के लिए 1896 में दिल्ली अम्बाला कंपनी को इस रेल के निर्माण का कार्य दिया गया था | समुद्र तल से 656 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कालका (हरियाणा) रेलवे स्टेशन को छोड़ने के बाद ट्रेन शिवालिक की पहाड़ियों के घुमावदार रास्ते से गुजरते हुए 2076 मीटर ऊपर स्थित शिमला तक जाती है।

  • कालका-शिमला रेलवे को यूनेस्को द्वारा 7-8 जुलाई 2008 को विश्व धरोहर स्थल (World Heritage Site) का गौरवशाली दर्जा दिया गया। यह भारत की पहाड़ी रेलमार्गों में से एक प्रमुख नायरो-गेज (संकीर्ण पटरी) रेलवे है |
  • यह रेलवे लगभग 96.6 किलोमीटर लंबा एकल पटरी (सिंगल ट्रैक) लाइन है, जिसे 19वीं सदी के मध्य में हिमालयी क्षेत्र के लिए बनाया गया था ताकि कालका से शिमला तक पहाड़ी यात्रा सुगम हो सके |
  • कालका-शिमला रेलवे अपने अनुभवहीन कठिन भौगोलिक इलाके में कुशल इंजीनियरिंग और अद्भुत कर्व्स, सुरंगों और पुलों के लिए जाना जाता है। रेल मार्ग में 102 सुरंगें और 864 ब्रिज शामिल हैं जो इसे एक अद्वितीय तकनीकी उपलब्धि बनाते हैं |
  • यह रेलमार्ग पर्यटकों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र है, जो हिमालय की सुंदर घाटियों, हरे-भरे जंगलों और पहाड़ों की मनोरम छटा के बीच चलती है। शिमला जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल की प्रमुख कनेक्टिविटी प्रदान करती है |
  •  शुरुआत में इस मार्ग पर स्टीम इंजन चलाए गए, बाद में 1955 में डीजल इंजन, और 1970 में डीजल-हाइड्रोलिक इंजन का उपयोग शुरू हुआ। वर्तमान में यह आकर्षक विरासत रेलवे आधुनिक संचालन का उदाहरण है |
  • यह रेलवे भारत के पर्वतीय रेलवे नेटवर्क का एक प्रतीकात्मक हिस्सा है जो देश की तकनीकी, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाता है। यूनेस्को द्वारा इसे विश्व धरोहर स्थल चुनना इसकी वैश्विक महत्ता को और बढ़ाता है |
  • हिमालयी क्षेत्र की दुर्गम भागों में यह रेलवे कभी अंग्रेज़ों की ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला को जोड़ने के लिए बनाया गया था, जिससे शासन कार्य सुचारू रूप से हो सके।
  • वर्तमान में अंबाला मंडल इस विश्व धरोहर रेलवे का संरक्षक है और समय-समय पर इसे संरक्षण और नवाचार की दृष्टि से आधुनिक तकनीकों से जोड़ा जा रहा है, जैसे स्वच्छ ऊर्जा के लिए ग्रीन हाइड्रोजन पर चलाने के प्रयास |

निष्कर्ष:

हरियाणा न केवल ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां की सांस्कृतिक धरोहर, प्राकृतिक सुंदरता और साहसिक खेलों के लिए भी यह राज्य एक आदर्श पर्यटन स्थल है। इन 15 शानदार स्थलों की यात्रा आपके अनुभव को अविस्मरणीय बना देगी।

FAQ :


हरियाणा के कौन-कौन से साहसिक गतिविधियां हैं?

हरियाणा में साहसिक गतिविधियों का भी अच्छा खासा विकल्प मौजूद है, जो प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर के शौकीनों को खूब आकर्षित करता है। यहाँ के कुछ प्रमुख साहसिक खेल और गतिविधियाँ निम्नलिखित हैं:
1. पैराग्लाइडिंग (सोहना)
सोहना हरियाणा का एक लोकप्रिय एडवेंचर स्पॉट है जहाँ पैराग्लाइडिंग का आनंद लिया जा सकता है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता के बीच आसमान में उड़ान भरना एक रोमांचक अनुभव होता है|
हरियाणा में घूमने लायक सर्वश्रेष्ठ जगह | हरियाणा में पर्यटन स्थल 
2. रॉक क्लाइम्बिंग (मोरनी हिल्स, दमदमा झील)
मोरनी हिल्स हरियाणा का एकमात्र हिल स्टेशन है, जहाँ रॉक क्लाइम्बिंग की सुविधा उपलब्ध है। मोरनी हिल्स में एडवेंचर पार्क में रस्सी चढ़ाई, कमांडो नेट, बर्मा पुल, रैपेलिंग और रॉक-क्लाइम्बिंग जैसी गतिविधियाँ उपलब्ध हैं। दमदमा झील के आसपास भी रॉक क्लाइम्बिंग का आनंद लिया जा सकता है |
3. ट्रेकिंग (मोरनी हिल्स, करोह पीक)
मोरनी हिल्स में करोह पीक हरियाणा की सबसे ऊँची चोटी है, जहाँ ट्रेकिंग की जा सकती है। यहाँ का प्राकृतिक वातावरण और ऊँचाई ट्रेकिंग प्रेमियों के लिए उपयुक्त है |
4. बोटिंग (मोरनी हिल्स, तिल्यार झील)
मोरनी हिल्स में बोट राइड का भी आनंद लिया जा सकता है। इसके अलावा तिल्यार झील में भी बोटिंग एक लोकप्रिय साहसिक गतिविधि है |
5. जिपलाइनिंग और स्काई साइक्लिंग (झज्जर – जोयगांव)
झज्जर जिले के जोयगांव पिकनिक पार्क में जिपलाइनिंग, स्काई साइक्लिंग, 360-डिग्री साइक्लिंग, ट्रैक्टर की सवारी और ऊंट की सवारी जैसी कई साहसिक गतिविधियाँ उपलब्ध हैं। यहाँ बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए मनोरंजन के कई विकल्प हैं |
6. जल क्रीड़ा और वाटर पार्क (रोहतक – स्पलैश वाटर पार्क)
रोहतक में स्पलैश वाटर पार्क में जल क्रीड़ा का मज़ा लिया जा सकता है। यह स्थान परिवार और दोस्तों के साथ एडवेंचर और मनोरंजन के लिए उपयुक्त है |
7. ट्रैकिंग और एडवेंचर पार्क (मोरनी हिल्स)
मोरनी हिल्स का एडवेंचर पार्क कई रोमांचक गतिविधियाँ प्रदान करता है जैसे रस्सी पर चढ़ाई, कमांडो नेट, बर्मा पुल, रैपेलिंग, रॉक क्लाइम्बिंग आदि। यहाँ बच्चों के लिए झूले और सवारी भी उपलब्ध हैं, जिससे यह परिवार के लिए भी उपयुक्त जगह बन जाता है |

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