10 अद्भुत Manipur Paryatan Sthal जो दिल जीत लेंगे

Manipur Paryatan Sthal: जैसा की हम सभी जानते हैं की मणिपुर भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में आता है | जो अपने विविध संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक धरोहर के लिए भली भांति जाना जाता है | यहां के शांत वातावरण, हरे-भरे पहाड़ और पारंपरिक जीवनशैली हर पर्यटक को अपनी तरफ खींचती है।

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मणिपुर का शाब्दिक अर्थ भी अति उत्तम है जैसे की ‘मणि की धरती’ या ‘रत्नों की भूमि’ के नाम से भी जाना जाता है।  मणिपुर राज्य की राजधानी इम्फाल है और मणिपुर को साउथ एशिया का प्रवेश द्वार के रूप में भी माना जाता है। इम्फाल जो मणिपुर की राजधानी है और इस राज्य का सबसे बड़ा शहर भी है | मणिपुर राज्य के उत्तरी भाग में नागालैंड, पूर्वी भाग में म्यांमार और पश्चिमी भाग में असम, तथा दक्षिणी भाग में मिज़ोरम स्थित है। पंडित जवाहरलाल नेहरु जी द्वारा मणिपुर को “भारत का गहना” भी कहा गया है या नाम दिया गया था। 

उस स्थान को मणिपुर ही कहा जाता है जहा पे पहली बार पोलो नामक खेल को खेला गया था । मणिपुर के लोग पोलो को “सगोल कांजेई” भी कहते है। मणिपुर भी भारत के खूबसूरत राज्यों में से एक है और यह अपने खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध भी है | मणिपुर के लोगो का खाना, मणिपुर का पहनावा या बेष-भूषा और मणिपुर के दर्शनीय स्थल यहाँ आने वाले पर्यटकों के दिलों को छू कर ही जाते हैं।

मणिपुर की स्थापना 21 जनवरी 1972 को हुई थी। इस राज्य में जिलों की संख्या 9 है। इस राज्य का क्षेत्रफल 22327 वर्ग किलोमीटर है।  मणिपुर के ढालों पर चाय और घाटियों में धान की उपज प्रमुख है। मणिपुर एक मात्र स्थान है जहॉ ब्राउ-एंटिलर्ड हिरन पाया जाता है इसका स्थानीय नाम संगी है। इस राज्य में सडकों की कुल लंबाई 12618 किमी है।  इस राज्य के सबसे बडे शहर चूडाचांदपुर, बशिनूपुर, इंफाल, सेनापति, चंदेल, तामेंगलोंग है।

मणिपुर की  प्रमुख फसलें चावल, मक्का हैं। यहॉ की प्रमुख नदियां मनिपुर, बराक हैं। यहॉ की राजकीय भाषा मणिपुरी है।  यहॉ का राजकीय पशु ‘संगाई’ है। यहॉ का राजकीय फूल ‘सिरोए लिली’ है।  यहॉ का राजकीय वृक्ष ‘टून’ है। यहॉ का राजकीय पक्षी ‘मिसेज हृाम्स फीशेन्ट’ है।  मणिपुर के उखरूल जिले में सिरोई पर्वतमाला में सिरोई लिली पाई जाती है विश्व में यह लिली पुष्प सिर्फ यहीं पाया जाता है।

मणिपुर आज से ही नहीं, प्राचीन काल से ही आर्यावर्त के मानचित्र पर चमकता रहा है। देश के पूर्वोत्तर महाभारत काल से लोगो के बीच यह देश में ज्ञात था। अपने वनवास के दौरान पाण्डवों ने भी मणिपुर का भी भ्रमण किया था। सन 1891 में पहले एंग्लो-मणिपुरी युद्ध के बाद यह राज्य ब्रिटिश शासन के अधीन था । अंग्रेजों नेे इंफाल पर कब्जा कर लेने के बाद युवराज टेकेंद्रजीत और जनरल थांगल को फांसी की सजा भी यही पे ही दी थी। सन् 1947 में भारत की आजादी के बाद मणिपुर संविधान अधिनियम बनाया गया, जिससे राज्य में एक लोकतांत्रिक सरकार बनाई जा सके। आजादी के कई वर्षो बाद 21 जनवरी 1972 को मणिपुर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला।

मणिपुर भारत के पूर्वोत्तर में स्थित एक खूबसूरत राज्य भी है, जिसकी राजधानी इंफाल है। इसे ‘आभूषणों की भूमि’ और ‘पूरब का स्विट्जरलैंड’ भी कहा गया है या कहा जाता है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, विविध जनजातियाँ, संस्कृति और अनूठा भोजन पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय है |

यहां तीन प्रमुख जनजातियां के लोग देखने को मिलते है या निवास करती हैं। घाटी में मीतई जनजाति के लोग रहते है, तो नागा और कूकी-चिन जनजातियां के लोग पहा‍ड़ियों पर रहते हैं। भारत के पूर्वी सीमा पर स्थित यह राज्य 23.83 डिग्री उत्तर और 25.68 डिग्री उत्तरी अक्षांश व 94.78 डिग्री पूर्वी देशांतर के बीच पड़ता है।  अपनी विविध वनस्पतियों व जीव-जंतुओं के कारण मणिपुर को ‘भारत का आभूषण’ व ‘पूरब का स्विट्जरलैंड’ आदि विविध नामों से संबोधित किया जाता है या जीव-जन्तुओ तथा वनस्पति की विवविधिता में एकता की वजह से ही इसे गहना यानि आभूषण के नाम से सम्बोधित किया गया है । लुभाने वाले प्राकृतिक दृश्यों, में विलक्षण फूल-पौधे, निर्मल वन, लहराती नदियां, पहाड़ियों पर छाई हरियाली शामिल है।

 इस राज्य के लोगो को कई तरह के नाम से बुलाया जाता है जैसे की मिति, पीरी मिति, मैती और मिति। इस राज्य के हर इन्सान को कला और संस्कृति से काफी लगाव है और यहां पर एक भी ऐसी लड़की नहीं मिलेगी जिसे गाना नहीं आता और नाचना नहीं आता। यहाँ का हर व्यक्ति कला में निपुण है | राज्य में हिन्दू और ख्रिश्चन धर्म के लोग अधिक संख्या में पाए जाते है लेकिन यहा पर अन्य धर्म के लोग भी बड़ी संख्या में पाए जाते है या रहते हैं । लुनगईनी निंगोल चाकूबा, याओशांग, गंगई, चुम्फा, चिरओबा, कंग और हिक्रू हिड़ोंगबा, ईद उल फ़ित्र, ईद उल अदा और क्रिसमस जैसे त्यौहार मणिपुर के प्रमुख त्यौहार हैं या यहाँ पर ये त्यौहार बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है ।

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यदि आप एक अनोखे पर्यटन अनुभव की तलाश में हैं, तो मणिपुर आपके लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है। आइए जानते हैं मणिपुर के 10 अद्भुत पर्यटन स्थल जो आपका दिल जरूर जीत लेंगे।

1. लोकतक झील (Loktak Lake)(Manipur Paryatan Sthal)

लोकतक झील भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है, जिसे “फ्लोटिंग लेक” भी कहा जाता है। यह मणिपुर राज्य में इम्फाल से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर है | लोकतक झील मणिपुर राज्य के बिष्णुपुर जिले में स्थित है | यहाँ की असली सुंदरता वहा की छोटे बड़े तैरते हुए द्वीप हैं | कुछ तैरते हुए द्वीप इतने बड़े हैं की उन पर रिसोर्ट बने हुए है |

इस झील की सबसे खास बात यह है की यह भारत की सबसे बड़ी ताजे पानी की झील है जबकि दूसरी खासियत झील पर जैविक कचरे से बना एक अस्थायी द्वीप है, जो क्षेत्र में एकमात्र पर्यटक घर है। इस झील में भूल भुलैया का खेल भी खेल सकते हैं |

यहां के फ्लोटिंग द्वीप ‘फुमदी’ और केबुल लामजाओ नेशनल पार्क पर्यटकों के बीच खासे लोकप्रिय हैं। लोकटक झील 40 किलोमीटर वर्ग में फैला हुआ है | जिसे 1977 में राष्ट्रीय रिजर्व के रूप में घोषित किया गया था। यह खूबसूरत पार्क 450 से अधिक किस्मों के ऑर्किड की मेजबानी करता है जबकि इसमें जलीय वनस्पतियों की 100 से अधिक प्रजातिया हैं | इस झील में  हिमालयी चितकबरे किंगफिशर, ब्लैक बत्तख, आदि पक्षियों की कई प्रजातियां भी पाई जाती हैं। तथ्य यह है कि यह एक तैरता हुआ द्वीप है, एक अनूठी विशेषता है जो दुनिया भर से प्रकृति के प्रति उत्साही और शोधकर्ताओं को आकर्षित करती है।

केबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान लोकटक झील का सबसे प्रमुख आकर्षण है जिसे दुनिया के एकमात्र तैरते हुए राष्ट्रीय उद्यान के रूप में भी जाना जाता है।

लोकटक झील में नौका विहार, वर्ड वाचिंग, और फिशिंग की एक्टिविटीज कर सकते है | लेक की टाइमिंग : सुबह 8.00 बजे से शाम 6.00 बजे तक | केइबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान की टाइमिंग : सुबह 7.30 बजे से शाम 5.30 बजे तक |

इस झील की फी एंट्री भारतीय पर्यटकों के लिए : 30 रूपये विदेशी पर्यटकों के लिए : 200 रूपये |

लोकटक झील के आस-पास घूमने की जगह कंगला फोर्ट, तारों केव, शहीद मीनार, सिंगड़ा डेम, मणिपुर जूलॉजिकल गार्डन, श्री गोविंदजी मंदिर, मणिपुर स्टेट म्यूजियम और लंगथबल है |

2. केबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान (Keibul Lamjao National Park)

Manipur Paryatan Sthal: यह झील 40 किलोमीटर वर्ग में फैला हुआ है यह लोकटक झील का ही अभिन्न हिस्सा है | यह दुनिया का एकमात्र फ्लोटिंग नेशनल पार्क है और यहां मणिपुर का दुर्लभ संगाई हिरण पाया जाता है, जिसे मणिपुर का ‘डांसिंग डियर’ भी कहा जाता है। मणिपुर के केबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान (Keibul Lamjao National Park- KLNP) के निवासी स्थल के स्थानांतरण या यहाँ रहने वाले डांसिंग डियर का विरोध कर रहे हैं।

3. इम्फाल घाटी (Imphal Valley) (Manipur Paryatan Sthal)

जैसा की हम सभी जानते हैं की इम्फाल मणिपुर की राजधानी है और यहां की घाटी, मंदिर, बाजार और संग्रहालय ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते है । यह भी सत्य है की यहाँ का कांगला फोर्ट खास आकर्षण का केंद्र है|

Manipur Paryatan Sthal: इम्फाल घाटी (Imphal Valley), जिसे मणिपुर घाटी भी कहा जाता है, हम सभी को यह पता है की पहाड़ियों सुंदरता में बसी जगह को घाटी कहते हैं ऐसी ही कुछ कहानी मणिपुर की घाटी की भी है | भारत के मणिपुर राज्य का एक प्रमुख भौगोलिक क्षेत्र इम्फाल घाटी भी है। यह घाटी राज्य के बीच में है जिसके चारो तरफ का इलाका पहाड़ी है | इस घाटी का आकार अंडाकार है यह छोटी छोटी नदियों से बनी है | जो नदिया आस पास की पहाड़ियों से निकलती है और यह घाटी के अंदर बहती है जैसे कि इम्फाल नदी, इरिल नदी, थौबल नदी, खुगा नदी और सेकमाई नदी |

इम्फाल घाटी मणिपुर राज्य का हृदय है, जो भौगोलिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

4. कांगला किला (Kangla Fort) (Manipur Paryatan Sthal)

यह किला मणिपुर के राजाओं की प्राचीन राजधानी का प्रतीक है। इस किले के अंदर कई ऐतिहासिक भवन और मूर्तियाँ हैं जो मणिपुरी संस्कृति को दर्शाती हैं।

यह किला राजधानी इम्फाल में स्थित है | एक समय मणिपुर के शाशको का प्रमुख निवास स्थान हुआ करता था | कांगला किला मणिपुरी संस्कृति, धार्मिक मान्यताओं और राजनीतिक इतिहास का एक अनमोल हिस्सा है।

कंगला किला मणिपुर के प्राचीन राजवंशों से जुड़ा हुआ है और इसकी जड़ें मणिपुरी इतिहास में गहराई तक समाई हुई हैं। कंगला को मणिपुर में पवित्र धार्मिक स्थल में से एक माना जाता है | यह किला धार्मिक और राजनितिक शक्ति का केंद्र माना जाता था | वर्षो पहले यह किला मणिपुरी शासकों का प्रमुख निवास स्थान और प्रशासनिक केंद्र हुआ करता था। बाद के दिनों में इस किले पर अंग्रेजों ने हमला किया और कांगला किले पर कब्ज़ा कर लिया। भारत की स्वतंत्रता के बाद या आजादी के बाद, किला भारतीय सेना के अधीन रहा और 2004 में इसे मणिपुर सरकार को सौंप दिया गया।

कांगला किला केवल एक राजमहल नहीं था बल्कि यह मणिपुरी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का भी केंद्र था। किले के भीतर या अंदर कांगला शा की विशाल मूर्तियाँ स्थापित थीं जो मणिपुरी संस्कृति में पवित्र मानी जाती हैं। कांगला शा को एक पौराणिक ड्रैगन के रूप में दर्शाया गया है जिसे शक्ति और संरक्षक देवता का रूप माना जाता था।

कंगला किला इम्फाल नदी के किनारे, इम्फाल शहर के मध्य में स्थित है |  ‘कांगला’ का अर्थ मणिपुरी भाषा में ‘सूखी भूमि’ होता है |

5. श्री गोविंदजी मंदिर (Shree Govindajee Temple)

यह मंदिर मणिपुर के इम्फाल शहर में स्थित है | यह मंदिर गोविन्द जी को समर्पित है या गोविन्द जी के लिए जाना जाता है | इस मंदिर का एक ऐतिहासिक महत्त्व है और यह प्रमुख वैष्णव (कृष्ण-भक्त) मंदिर है। यह मंदिर पूर्व मैतेई शासकों के महल के ठीक बगल में स्थित है | यह राज्य का सबसे बड़ा मंदिर है |

6. मोइरांग (Moirang)

मोइरांग एक पर्यटन स्थल है | मणिपुर का एक महत्त्वपूर्ण नगर है जो बिष्णुपुर जिले में स्थित है | यह मणिपुर की राजधानी इम्फाल से लगभग 47 किलोमीटर दक्षिण में बसा है |  यह स्थान मणिपुरी लोगों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है और यहाँ भगवान थाङजिङ का एक प्राचीन मंदिर है, जो स्थानीय धार्मिक आस्था का केंद्र है | यह स्थान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा हुआ है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज़ाद हिंद फौज ने यहीं पहली बार भारतीय ध्वज फहराया था। यहां का इंडियन नेशनल आर्मी म्यूज़ियम देखने लायक है।

7. अंद्रो गाँव (Andro Village)(Manipur Paryatan Sthal)

आंद्रो गाँव (Andro Village), मणिपुर का एक प्रसिद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थल है, जो मणिपुर की समृद्ध लोक कला और परंपराओं को संरक्षित करने के लिए जाना जाता है। यह मणिपुर को एक गावं है जो बहुत समृद्ध तथा इतिहास से जुड़ा हुआ है | यहां आप मणिपुरी हेंडलूम और मिट्टी के बर्तनों की कला को नज़दीक से देख सकते हैं।

8. थौबल (Thoubal)

थौबल भारत के मणिपुर में एक नगर और जिला है | थोबल अन्य सहरो के अपेक्षा अधिक विकसित है | शहर के ज्यादातर प्रमुख स्थल थौबल नदी के तट पर बसे हुए हैं। इम्फाल नदी यहां की दूसरी महत्वपूर्ण नदी है। यह जिला पूर्व में उखरुल और चंदेल उत्तर में सेनापति, पश्चिम में इम्फाल पश्चिम व इम्फाल पूर्व और दक्षिण में चुराचंदपुर और बिष्णुपुर जिले से घिरा हुआ है |  

खूबसूरत वृक्षों और वन्य जीवो के लिए प्रसिद्ध थौबल मणिपुर में स्थित है | थौबल में पाए जाने वाले वृक्षों में काबलिउ, खोक, सिलेमा, और तैरन विशेष रूप से यहाँ पाए जाते हैं | यहाँ पर जीवो में हिरन , जंगली मुर्गा और सर्दियों में प्रवाशी पक्छीया पाई जाती हैं |

थोबल के उत्सवों में यहाँ के लोगो के रहन-सहन और यहाँ की संस्कृति झलकती है | यह के उत्सवों में दुर्गा पूजा, जन्माष्टमी, निंगवाल और चैकोबा आदि सम्लित है |

9. उखरुल (Ukhrul)

उखरुल एक जिला है जो मणिपुर राज्य में बसा है | उखरुल एक आम जिला नहीं है खूबसूरती और सुंदरता से भरा जिला है | यहाँ पहाड़ियों और झीलों के बीच पर्यटक को जन्नत का एहसास होता है | यहाँ पर आप गर्मियों में घूमने का आनंद ले सकते है | यहाँ पहाड़ियों के बीच से आती ठंडी हवाएं आपको शांति तथा सुकून का अनुभव कराती हैं | यहाँ आप गर्मियों में छुट्टिया मानाने के लिए आ सकते है यहाँ जलवायु का आनंद लेकर आप अपना समय सुकून से काट सकते हैं |

उखरुल के बारे में ज्यादा लोग नहीं जानते यह सिर्फ ट्रैवलर के बीच ही प्रसिद्द हैं यहाँ जायदा भीड़ भाड़ नहीं होती है | प्रकृति प्रेमियों से लेकर एडवेंचर के शौक़ीन यहाँ अति आनंद प्राप्त कर सकते हैं |

10. तामेंगलोंग (Tamenglong)

Manipur Paryatan Sthal: यह स्थान अपनी दुर्लभ वनस्पतियों और जीव-जंतुओं के लिए जाना जाता है। यहाँ की वनस्पतिया और जगहों की वनस्पतियो से अलग हैं | यहां की झरनें और गुफाएँ प्रकृति के प्रेमियों के लिए किसी खजाने से कम नहीं हैं।

तमेंगलोंग मणिपुर का एक जिला है | तमेंगलोंग जिला 9 खूबसूरत जिलों में से एक है जिसका मुख्यालय भी तामेंगलोंग नगर में स्थित है। इसका क्षेत्रफल लगभग 4,391 वर्ग किलोमीटर है | इसमें कुल तीन विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र आते हैं। यहाँ की जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 1,40,143 थी, और जनसंख्या घनत्व करीब 32 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है |

तामेंगलोंग मणिपुर के पश्चिमी हिस्से में स्थित है और यह इलाका अपनी प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ियों, घने जंगलों और जलप्रपातों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ नागा समुदाय के लोग रहते हैं जो अपनी विशिष्ट संस्कृति और परंपराओं के लिए जाने जाते हैं | जिले में कई बार प्राकृतिक आपदाएँ, जैसे भूस्खलन, भी होती रहती हैं |

जलवायु की दृष्टि से तामेंगलोंग में गर्मी के मौसम में तापमान 29 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है, जबकि रात का तापमान अपेक्षाकृत ठंडा हो जाता है। यहाँ की जलवायु मूगा रेशम पालन के लिए भी उपयुक्त मानी जाती है

तामेंगलोंग जिला प्राकृतिक संसाधनों, जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध है, लेकिन कभी-कभी भूमि विवाद या अन्य सामाजिक कारणों से यहाँ झड़पें भी होती रही हैं |

मणिपुर कैसे पहुँचें? (Manipur Paryatan Sthal)

हवाई मार्ग:

रेल मार्ग:

सड़क मार्ग:

मणिपुर में क्या-क्या कर सकते हैं? (Manipur Paryatan Sthal)

मणिपुर का भोजन (Manipur Paryatan Sthal)

मणिपुर में रेस्टोरेंट और ट्रांसपोर्ट का बजट (Manipur Paryatan Sthal)

खर्च का प्रकारअनुमानित लागत (रुपये में)विवरण
साधारण थाली (रेस्टोरेंट)100 – 150 प्रति व्यक्तिस्थानीय रेस्टोरेंट/ढाबा, मणिपुरी थाली, स्ट्रीट फूड
मिड-रेंज भोजन200 – 400 प्रति व्यक्तिअच्छा रेस्टोरेंट, विविध मणिपुरी व्यंजन
स्ट्रीट फूड30 – 70 प्रति आइटमसिंग्जू, एरोम्बा, पक्नम आदि
लोकल बस/शेयरिंग ऑटो20 – 50 प्रति यात्राइंफाल शहर के भीतर
टैक्सी (शहर के भीतर)200 – 500 प्रति यात्रादूरी और समय के अनुसार
इंफाल एयरपोर्ट से शहर300 – 600 प्रति टैक्सीदूरी लगभग 8-10 किमी
एक दिन लोकल ट्रांसपोर्ट300 – 700 प्रति व्यक्तिघूमने के लिए (बस, ऑटो, टैक्सी मिलाकर)

नोट:

निष्कर्ष

Manipur Paryatan Sthal: मणिपुर एक छुपा हुआ रत्न है जो अब धीरे-धीरे पर्यटन मानचित्र पर अपनी खास जगह बना रहा है। यहां के अद्भुत स्थल न केवल आपकी आत्मा को छू लेंगे, बल्कि आपको भारत की विविधता और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का एहसास भी कराएंगे। अगली बार छुट्टियाँ हों, तो मणिपुर की ओर रुख ज़रूर करें।

FAQ

क्या लोकतक झील की तैरती हुई द्वीपें मेरी यात्रा को खास बना देंगी?

Ans. Manipur Paryatan Sthal: हाँ, लोकतक झील की तैरती हुई द्वीपें (फुमड़ी) आपकी यात्रा को बेहद खास और यादगार बना देंगी। ये तैरते द्वीप वनस्पतियों, मिट्टी और जैविक पदार्थों से बने होते हैं, जो पानी की सतह पर तैरते हैं और इस झील की सबसे अनोखी विशेषता हैं |
लोकतक झील में नौका विहार करते हुए आप इन तैरते द्वीपों के बीच से गुजर सकते हैं, जो एक अद्भुत और रहस्यमय अनुभव होता है। यहाँ का केइबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान, जो दुनिया का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान है, भी इसी झील पर स्थित है और दुर्लभ संगाई हिरण (नाचते हिरण) को देखना भी एक अनूठा आकर्षण है |
इसके अलावा, झील के किनारे होमस्टे में ठहरना भी एक विशेष अनुभव है, जहाँ आप प्रकृति के बीच शांति और तैरते द्वीपों के नजदीक रह सकते हैं |
इसलिए, लोकतक झील की तैरती द्वीपें आपकी मणिपुर यात्रा को प्राकृतिक सौंदर्य, अनोखे अनुभव और सांस्कृतिक समृद्धि से भरपूर बना देंगी।

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