Manipur Paryatan Sthal: जैसा की हम सभी जानते हैं की मणिपुर भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में आता है | जो अपने विविध संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक धरोहर के लिए भली भांति जाना जाता है | यहां के शांत वातावरण, हरे-भरे पहाड़ और पारंपरिक जीवनशैली हर पर्यटक को अपनी तरफ खींचती है।

मणिपुर का शाब्दिक अर्थ भी अति उत्तम है जैसे की ‘मणि की धरती’ या ‘रत्नों की भूमि’ के नाम से भी जाना जाता है। मणिपुर राज्य की राजधानी इम्फाल है और मणिपुर को साउथ एशिया का प्रवेश द्वार के रूप में भी माना जाता है। इम्फाल जो मणिपुर की राजधानी है और इस राज्य का सबसे बड़ा शहर भी है | मणिपुर राज्य के उत्तरी भाग में नागालैंड, पूर्वी भाग में म्यांमार और पश्चिमी भाग में असम, तथा दक्षिणी भाग में मिज़ोरम स्थित है। पंडित जवाहरलाल नेहरु जी द्वारा मणिपुर को “भारत का गहना” भी कहा गया है या नाम दिया गया था।
उस स्थान को मणिपुर ही कहा जाता है जहा पे पहली बार पोलो नामक खेल को खेला गया था । मणिपुर के लोग पोलो को “सगोल कांजेई” भी कहते है। मणिपुर भी भारत के खूबसूरत राज्यों में से एक है और यह अपने खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध भी है | मणिपुर के लोगो का खाना, मणिपुर का पहनावा या बेष-भूषा और मणिपुर के दर्शनीय स्थल यहाँ आने वाले पर्यटकों के दिलों को छू कर ही जाते हैं।
मणिपुर की स्थापना 21 जनवरी 1972 को हुई थी। इस राज्य में जिलों की संख्या 9 है। इस राज्य का क्षेत्रफल 22327 वर्ग किलोमीटर है। मणिपुर के ढालों पर चाय और घाटियों में धान की उपज प्रमुख है। मणिपुर एक मात्र स्थान है जहॉ ब्राउ-एंटिलर्ड हिरन पाया जाता है इसका स्थानीय नाम संगी है। इस राज्य में सडकों की कुल लंबाई 12618 किमी है। इस राज्य के सबसे बडे शहर चूडाचांदपुर, बशिनूपुर, इंफाल, सेनापति, चंदेल, तामेंगलोंग है।
मणिपुर की प्रमुख फसलें चावल, मक्का हैं। यहॉ की प्रमुख नदियां मनिपुर, बराक हैं। यहॉ की राजकीय भाषा मणिपुरी है। यहॉ का राजकीय पशु ‘संगाई’ है। यहॉ का राजकीय फूल ‘सिरोए लिली’ है। यहॉ का राजकीय वृक्ष ‘टून’ है। यहॉ का राजकीय पक्षी ‘मिसेज हृाम्स फीशेन्ट’ है। मणिपुर के उखरूल जिले में सिरोई पर्वतमाला में सिरोई लिली पाई जाती है विश्व में यह लिली पुष्प सिर्फ यहीं पाया जाता है।
मणिपुर आज से ही नहीं, प्राचीन काल से ही आर्यावर्त के मानचित्र पर चमकता रहा है। देश के पूर्वोत्तर महाभारत काल से लोगो के बीच यह देश में ज्ञात था। अपने वनवास के दौरान पाण्डवों ने भी मणिपुर का भी भ्रमण किया था। सन 1891 में पहले एंग्लो-मणिपुरी युद्ध के बाद यह राज्य ब्रिटिश शासन के अधीन था । अंग्रेजों नेे इंफाल पर कब्जा कर लेने के बाद युवराज टेकेंद्रजीत और जनरल थांगल को फांसी की सजा भी यही पे ही दी थी। सन् 1947 में भारत की आजादी के बाद मणिपुर संविधान अधिनियम बनाया गया, जिससे राज्य में एक लोकतांत्रिक सरकार बनाई जा सके। आजादी के कई वर्षो बाद 21 जनवरी 1972 को मणिपुर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला।
मणिपुर भारत के पूर्वोत्तर में स्थित एक खूबसूरत राज्य भी है, जिसकी राजधानी इंफाल है। इसे ‘आभूषणों की भूमि’ और ‘पूरब का स्विट्जरलैंड’ भी कहा गया है या कहा जाता है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, विविध जनजातियाँ, संस्कृति और अनूठा भोजन पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय है |
यहां तीन प्रमुख जनजातियां के लोग देखने को मिलते है या निवास करती हैं। घाटी में मीतई जनजाति के लोग रहते है, तो नागा और कूकी-चिन जनजातियां के लोग पहाड़ियों पर रहते हैं। भारत के पूर्वी सीमा पर स्थित यह राज्य 23.83 डिग्री उत्तर और 25.68 डिग्री उत्तरी अक्षांश व 94.78 डिग्री पूर्वी देशांतर के बीच पड़ता है। अपनी विविध वनस्पतियों व जीव-जंतुओं के कारण मणिपुर को ‘भारत का आभूषण’ व ‘पूरब का स्विट्जरलैंड’ आदि विविध नामों से संबोधित किया जाता है या जीव-जन्तुओ तथा वनस्पति की विवविधिता में एकता की वजह से ही इसे गहना यानि आभूषण के नाम से सम्बोधित किया गया है । लुभाने वाले प्राकृतिक दृश्यों, में विलक्षण फूल-पौधे, निर्मल वन, लहराती नदियां, पहाड़ियों पर छाई हरियाली शामिल है।
इस राज्य के लोगो को कई तरह के नाम से बुलाया जाता है जैसे की मिति, पीरी मिति, मैती और मिति। इस राज्य के हर इन्सान को कला और संस्कृति से काफी लगाव है और यहां पर एक भी ऐसी लड़की नहीं मिलेगी जिसे गाना नहीं आता और नाचना नहीं आता। यहाँ का हर व्यक्ति कला में निपुण है | राज्य में हिन्दू और ख्रिश्चन धर्म के लोग अधिक संख्या में पाए जाते है लेकिन यहा पर अन्य धर्म के लोग भी बड़ी संख्या में पाए जाते है या रहते हैं । लुनगईनी निंगोल चाकूबा, याओशांग, गंगई, चुम्फा, चिरओबा, कंग और हिक्रू हिड़ोंगबा, ईद उल फ़ित्र, ईद उल अदा और क्रिसमस जैसे त्यौहार मणिपुर के प्रमुख त्यौहार हैं या यहाँ पर ये त्यौहार बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है ।
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यदि आप एक अनोखे पर्यटन अनुभव की तलाश में हैं, तो मणिपुर आपके लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है। आइए जानते हैं मणिपुर के 10 अद्भुत पर्यटन स्थल जो आपका दिल जरूर जीत लेंगे।
1. लोकतक झील (Loktak Lake)(Manipur Paryatan Sthal)
लोकतक झील भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है, जिसे “फ्लोटिंग लेक” भी कहा जाता है। यह मणिपुर राज्य में इम्फाल से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर है | लोकतक झील मणिपुर राज्य के बिष्णुपुर जिले में स्थित है | यहाँ की असली सुंदरता वहा की छोटे बड़े तैरते हुए द्वीप हैं | कुछ तैरते हुए द्वीप इतने बड़े हैं की उन पर रिसोर्ट बने हुए है |
इस झील की सबसे खास बात यह है की यह भारत की सबसे बड़ी ताजे पानी की झील है जबकि दूसरी खासियत झील पर जैविक कचरे से बना एक अस्थायी द्वीप है, जो क्षेत्र में एकमात्र पर्यटक घर है। इस झील में भूल भुलैया का खेल भी खेल सकते हैं |
यहां के फ्लोटिंग द्वीप ‘फुमदी’ और केबुल लामजाओ नेशनल पार्क पर्यटकों के बीच खासे लोकप्रिय हैं। लोकटक झील 40 किलोमीटर वर्ग में फैला हुआ है | जिसे 1977 में राष्ट्रीय रिजर्व के रूप में घोषित किया गया था। यह खूबसूरत पार्क 450 से अधिक किस्मों के ऑर्किड की मेजबानी करता है जबकि इसमें जलीय वनस्पतियों की 100 से अधिक प्रजातिया हैं | इस झील में हिमालयी चितकबरे किंगफिशर, ब्लैक बत्तख, आदि पक्षियों की कई प्रजातियां भी पाई जाती हैं। तथ्य यह है कि यह एक तैरता हुआ द्वीप है, एक अनूठी विशेषता है जो दुनिया भर से प्रकृति के प्रति उत्साही और शोधकर्ताओं को आकर्षित करती है।
केबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान लोकटक झील का सबसे प्रमुख आकर्षण है जिसे दुनिया के एकमात्र तैरते हुए राष्ट्रीय उद्यान के रूप में भी जाना जाता है।
- लोकटक झील पे तैरते हुए वृत्ताकार दलदल हैं जिसे मणिपुर की स्थानीय भाषा में फुमड़ी कहा जाता है | ये फुमड़ी मिटटी , जैविक पदार्थ और वनस्पतियों के संग्रह होने से बनता है और पानी के सतह या पानी के ऊपरी हिस्सा पे तैरता है |
- यह दुनिया का एकमात्र झील है जो तैरता रहता है | यह झील राष्ट्रीय उद्यान ‘केइबुल लामजाओ’ का घर भी है | इस तैरते हुए फुमदी पे घर भी बने हुए है | यह मणिपुर के राज्य पशु ‘सांगाई’ (डांसिंग डियर) का अंतिम प्राकृतिक आवास रहा है |
- लोकटक झील को 1990 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी महत्त्व को दर्शाने के लिए ‘रामसर साइट’ के रूप में बताया गया | जिससे इसके संरक्षण को वैश्विक मान्यता मिली |
- झील में फुमदी पर वहा के स्थानीय लोग बांस का घर यानि झोपडी बना कर रहते हैं और अपना गुजरा करने के लिए खेती , मछली पकड़ना और पर्यटनो की सेवा करते है |
- लोकतक झील मणिपुर की संस्कृति, लोककथाओं, गीतों और नृत्यों का भी केंद्र रहा है। यहाँ हर साल ‘लोकतक दिवस’ (15 अक्टूबर) और ‘सांगाई महोत्सव’ (21-30 नवंबर) जैसे उत्सव मनाए जाते हैं, जो राज्य की समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं |
लोकटक झील में नौका विहार, वर्ड वाचिंग, और फिशिंग की एक्टिविटीज कर सकते है | लेक की टाइमिंग : सुबह 8.00 बजे से शाम 6.00 बजे तक | केइबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान की टाइमिंग : सुबह 7.30 बजे से शाम 5.30 बजे तक |
इस झील की फी एंट्री भारतीय पर्यटकों के लिए : 30 रूपये विदेशी पर्यटकों के लिए : 200 रूपये |
लोकटक झील के आस-पास घूमने की जगह कंगला फोर्ट, तारों केव, शहीद मीनार, सिंगड़ा डेम, मणिपुर जूलॉजिकल गार्डन, श्री गोविंदजी मंदिर, मणिपुर स्टेट म्यूजियम और लंगथबल है |
2. केबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान (Keibul Lamjao National Park)
Manipur Paryatan Sthal: यह झील 40 किलोमीटर वर्ग में फैला हुआ है यह लोकटक झील का ही अभिन्न हिस्सा है | यह दुनिया का एकमात्र फ्लोटिंग नेशनल पार्क है और यहां मणिपुर का दुर्लभ संगाई हिरण पाया जाता है, जिसे मणिपुर का ‘डांसिंग डियर’ भी कहा जाता है। मणिपुर के केबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान (Keibul Lamjao National Park- KLNP) के निवासी स्थल के स्थानांतरण या यहाँ रहने वाले डांसिंग डियर का विरोध कर रहे हैं।
- लोगो का विचार है की वहा पर हिरणो की संख्या में कमी होते जा रहा है इससे वहा के लोगो को कोई फर्क नहीं पण रहा, वहा के लोग उसे बचाने का कोई प्रयास नहीं कर रहे | वही आस-पास के गावो को लोग जो वहा से थोड़ी दूर गावं वाले है वे हिरणो को बचाने का हर मुमकिन प्रयास कर रहे हैं |
- यह दुनिया में एक अनोखा तैरता हुआ राष्ट्रीय बगीचा है जिसमे नाचते हुए हिरणो का अंतिम प्राकृतिक रहने की जगह है | यहाँ के हिरणो को सांगाई भी कहा जाता है |
- 1950 में इन सांगाई हिरणो के लुप्त होने की खबर आई थी | फिर बाद में मणिपुर वाले राष्ट्र्रीय बगीचों वालो ने ऐसे दोबारा खोज निकाला |
- मणिपुर में हॉग डियर, ओटर, वाटर फाॅउल और प्रवासी पक्षियों का एक समूह देखा जा सकता है |
- लोकटक झील में फुमदी के ऊपर तैरता हुआ मीठे पानी का झील है, जो पूर्व भारत में है |
- फुमदी विभिन्न अपघटनो से बना हुआ है जिसमे वनस्पति, मिट्टी और कार्बनिक पदार्थ भी शामिल है |
- केबुल लामजाओ झील यहाँ पर पानी का सबसे बड़ा स्त्रोत है | जो यहाँ की अर्थव्यवस्था में महत्त्व पूर्ण भूमिका निभाती है | यहाँ का जल सिचाई, पीने के लिए पानी, और बिजली उत्पादन में इस झील के पानी का उपयोग किया जाता है |
- पारिस्थितिक स्थिति और इसके जैव विविधता मूल्यों के आधार पर इस झील को 1990 में रामसर अभिसमय इसके अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व को आद्रभूमि के रूप में जाना गया |
- इसे 1993 में मोंट्रेक्स रिकॉर्ड के आधार पर भी सूचीबद्ध किया गया |
3. इम्फाल घाटी (Imphal Valley) (Manipur Paryatan Sthal)
जैसा की हम सभी जानते हैं की इम्फाल मणिपुर की राजधानी है और यहां की घाटी, मंदिर, बाजार और संग्रहालय ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते है । यह भी सत्य है की यहाँ का कांगला फोर्ट खास आकर्षण का केंद्र है|
Manipur Paryatan Sthal: इम्फाल घाटी (Imphal Valley), जिसे मणिपुर घाटी भी कहा जाता है, हम सभी को यह पता है की पहाड़ियों सुंदरता में बसी जगह को घाटी कहते हैं ऐसी ही कुछ कहानी मणिपुर की घाटी की भी है | भारत के मणिपुर राज्य का एक प्रमुख भौगोलिक क्षेत्र इम्फाल घाटी भी है। यह घाटी राज्य के बीच में है जिसके चारो तरफ का इलाका पहाड़ी है | इस घाटी का आकार अंडाकार है यह छोटी छोटी नदियों से बनी है | जो नदिया आस पास की पहाड़ियों से निकलती है और यह घाटी के अंदर बहती है जैसे कि इम्फाल नदी, इरिल नदी, थौबल नदी, खुगा नदी और सेकमाई नदी |
- इम्फाल घाटी जलोढ़ मिटटी से भरपूर है जिस कारण यहाँ की मैदान या भूमि उपजाऊ है |
- इस घाटी की भूमि कभी दलदल थी , अब ये नदियों के गाद से भरने के कारण उपजाऊ भूमि में बदल गयी है |
- भारत के पूर्वोत्तर में सबसे बड़ी ताजे पानी का झील है जो प्राचीन झील का अवशेष मन जाता है और इस घाटी के दक्षिणी पश्चिमी भाग में लोकटक झील भी है |
- इम्फाल एक प्रशाशनिक , सांस्कृतिक और व्यापारिक केंद्र है यहाँ पे ही इम्फाल घाटी है जो मणिपुर में है जिसकी राजधानी इम्फाल है |
- यहाँ पे बसने वाले लोगो में आमतौर पे मैतेई जनजाति के लोग है , जिनकी संस्कृति पहचान, बेष-भूषा, रहने और बोलने का तौर तरीका घाटी में केंद्रित है |
- द्वितीय विश्व युद्धः में इम्फाल घाटी में महत्त्वपूर्ण युद्धः हुआ था |
- इस घाटी की भूमि इतनी उपजाऊ है की यहाँ धान की खेती का भरमार है |
- इम्फाल घाटी में हस्तशिल्प और हथकरघा शिल्प बहुत ही बड़े पैमाने पर देखने को मिलता है |
- यहाँ पे ख्वैरम बाजार लगता है , जहा पर अक्सर दुकाने महिलाये ही चलाती हैं , जो इस बाजार को खाश बना देता है |
- इम्फाल घाटी के दर्शनीय स्थलों में कंगला पार्क , गोविन्द मंदिर और लोकटक झील आदि सम्लित हैं |
- यहां हवाई, रेल और सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है |
- हाल के वर्षों में घाटी में सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियाँ, जैसे हड़तालें और विरोध-प्रदर्शन, भी देखे गए हैं |
इम्फाल घाटी मणिपुर राज्य का हृदय है, जो भौगोलिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
4. कांगला किला (Kangla Fort) (Manipur Paryatan Sthal)
यह किला मणिपुर के राजाओं की प्राचीन राजधानी का प्रतीक है। इस किले के अंदर कई ऐतिहासिक भवन और मूर्तियाँ हैं जो मणिपुरी संस्कृति को दर्शाती हैं।
यह किला राजधानी इम्फाल में स्थित है | एक समय मणिपुर के शाशको का प्रमुख निवास स्थान हुआ करता था | कांगला किला मणिपुरी संस्कृति, धार्मिक मान्यताओं और राजनीतिक इतिहास का एक अनमोल हिस्सा है।
कंगला किला मणिपुर के प्राचीन राजवंशों से जुड़ा हुआ है और इसकी जड़ें मणिपुरी इतिहास में गहराई तक समाई हुई हैं। कंगला को मणिपुर में पवित्र धार्मिक स्थल में से एक माना जाता है | यह किला धार्मिक और राजनितिक शक्ति का केंद्र माना जाता था | वर्षो पहले यह किला मणिपुरी शासकों का प्रमुख निवास स्थान और प्रशासनिक केंद्र हुआ करता था। बाद के दिनों में इस किले पर अंग्रेजों ने हमला किया और कांगला किले पर कब्ज़ा कर लिया। भारत की स्वतंत्रता के बाद या आजादी के बाद, किला भारतीय सेना के अधीन रहा और 2004 में इसे मणिपुर सरकार को सौंप दिया गया।
कांगला किला केवल एक राजमहल नहीं था बल्कि यह मणिपुरी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का भी केंद्र था। किले के भीतर या अंदर कांगला शा की विशाल मूर्तियाँ स्थापित थीं जो मणिपुरी संस्कृति में पवित्र मानी जाती हैं। कांगला शा को एक पौराणिक ड्रैगन के रूप में दर्शाया गया है जिसे शक्ति और संरक्षक देवता का रूप माना जाता था।
कंगला किला इम्फाल नदी के किनारे, इम्फाल शहर के मध्य में स्थित है | ‘कांगला’ का अर्थ मणिपुरी भाषा में ‘सूखी भूमि’ होता है |
- यह किला मणिपुर के राजनीतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का केंद्र बना और इस किले की नीव 33 ई. में नोंगदा लैरेन पखंगबा ने रखी |
- प्राचीनकाल में यह मेइतेई राजाओं का निवास स्थान रहा और शासन का केंद्र था |
- बर्मी और अंग्रेजो के युद्धः के दौरान जो 19 वी शताब्दी में हुआ इस दौरान यह किला संघर्ष का केंद्र बना |1891 के आंग्ल-मणिपुर युद्धः में अंग्रेजो ने इस पर कब्ज़ा कर लिया था |
- किले में प्रवेश करने के लिए चार प्रमुख द्वार हैं, जो सुरक्षा और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं |
- किले के मुख्य द्वार पर कांगलाशा (सिंह-समान ड्रैगन देवता) की विशाल मूर्तियाँ हैं या चित्र है , जिन्हें राजशक्ति और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है |
- अब इस किले के अधिकांश भाग खंडहर में बदल चुके हैं, लेकिन यह आज भी मणिपुर के इतिहास, संस्कृति और पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है |
5. श्री गोविंदजी मंदिर (Shree Govindajee Temple)
यह मंदिर मणिपुर के इम्फाल शहर में स्थित है | यह मंदिर गोविन्द जी को समर्पित है या गोविन्द जी के लिए जाना जाता है | इस मंदिर का एक ऐतिहासिक महत्त्व है और यह प्रमुख वैष्णव (कृष्ण-भक्त) मंदिर है। यह मंदिर पूर्व मैतेई शासकों के महल के ठीक बगल में स्थित है | यह राज्य का सबसे बड़ा मंदिर है |
- यह मंदिर महाराजा नारा सिंह ने 1846 में अपने कुलदेवता श्री गोविन्द जी यानि भगवान् कृष्ण के लिए बनवाया था |
- इस मंदिर का 1868 में आये एक बड़ा भूकंप से भरी क्षति हुई , पर मंदिर की मुख्य मूर्ति सेफ थी |
- इस मंदिर का पुनर्निर्माण 1876 में महाराजा चन्द्रकृति ने अपने शाशनकाल में करवाया |
- एंग्लो-मणिपुर युद्धः में 1891 में इस मंदिर की मूर्तियों का तबादला कोंगमा में अस्थायी रूप में किया गया | महाराजा चंद्र सिंह द्वारा 1908 में वर्तमान में इस मंदिर को दोबारा स्थापित किया गया |
- इस मंदिर की प्रमुख पहचान दो सुनहरे गुम्बद हैं , मंदिर की सुंदरता सफ़ेद रंग की भव्य इमारत है |
- इस मंदिर के केंद्रीय कक्ष में राधा और कृष्ण की मुर्तिया है , मंदिर का मुख्य भाग ( गर्भगृह ) (सैंक्चुअरी) ईंट और मोर्टार से बना हुआ है |
- मंदिर के गर्भगृह के दोनों ओर भगवान् बलराम , भगवान् जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और अन्य देवताओ की मूर्तियां बनी हुई हैं |
- मंदिर के चारों ओर प्रदक्षिणा पथ (circumambulation path) है, और एक बड़ा मंडप (सभा हॉल) भी है।
- मंदिर का प्रवेश द्वार पूर्व दिशा की ओर है |
- यह मंदिर मणिपुर के वैष्णव समुदाय का धार्मिक केंद्र है |
- यहाँ जन्माष्टमी, कंग रथ यात्रा और रास लीला (मणिपुरी नृत्य) जैसे त्योहार बड़े उत्साह के साथ मनाए जाते हैं |
- रास लीला, जो मणिपुरी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, मंदिर परिसर में विशेष अवसरों पर आयोजित होती है |
- मंदिर का वातावरण अत्यंत शांत और आध्यात्मिक है, जो भक्तों और पर्यटकों दोनों को आकर्षित करता है |
- सुबह की आरती के समय यहाँ लोक संगीत के साथ पूजा होती है, जो एक विशेष अनुभव प्रदान करती है |
- श्री गोविंदजी मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि मणिपुर की सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत का भी प्रतीक है
6. मोइरांग (Moirang)
मोइरांग एक पर्यटन स्थल है | मणिपुर का एक महत्त्वपूर्ण नगर है जो बिष्णुपुर जिले में स्थित है | यह मणिपुर की राजधानी इम्फाल से लगभग 47 किलोमीटर दक्षिण में बसा है | यह स्थान मणिपुरी लोगों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है और यहाँ भगवान थाङजिङ का एक प्राचीन मंदिर है, जो स्थानीय धार्मिक आस्था का केंद्र है | यह स्थान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा हुआ है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज़ाद हिंद फौज ने यहीं पहली बार भारतीय ध्वज फहराया था। यहां का इंडियन नेशनल आर्मी म्यूज़ियम देखने लायक है।
- मोइरांग पुराने समय में सात कबीले राजाओ का शक्तिशाली राजा का शासन मणिपुर था |
- आजाद हिन्द फ़ौज का मुख्यालय दूसरे विश्व युद्ध के दौरान यही था | मणिपुर के सहयोग से 14 अप्रैल 1944 को कर्नल शौकत मलिक ने पहला राष्ट्र्रीय ध्वज यही फहराया था |
- यहाँ पे राष्ट्र्रीय ध्वज फहराए गए घटना को याद करते हुए यहाँ पे भारतीय राष्ट्र्रीय सेना संग्रहालय भी स्थापित किया गया | जो स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष के बारे में है |
- मोइरांग की लोक संस्कृति बहुत ही अनोखी है जो पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है , यह संस्कृति अनोखी होने के साथ साथ समृद्ध और प्रशिद्ध भी है | यहाँ हर वर्ष मई में मनाया जाने वाला प्रमुख और पारम्परिक त्यौहार मोइरांग लाई हरोबा है, जिसमे सैकड़ो पुरुष और महिलाये भाग लेती है और भगवान थाङजिङ के सम्मान में नृत्य और गीत को प्रस्तुत करती हैं |
- मणिपुर संस्कृति का एक महत्त्व पूर्ण हिस्सा खम्बा-थोबी भी है, जो मणिपुर में मोइरांग लोक नृत्य है |
- मोइरांग की ऊँचाई लगभग 766 मीटर (2,513 फीट) है।
- यहाँ की जनसंख्या लगभग 19,893 है, जिसमें पुरुष 51% और महिलाएं 49% हैं। साक्षरता दर 64% है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है |
- यहाँ की प्रमुख भाषाएँ कुकी और मणिपुरी हैं |
- मोइरांग के पास एशिया की सबसे बड़ी अलवण जल वाली झील, लोकटक झील, भी स्थित है |
7. अंद्रो गाँव (Andro Village)(Manipur Paryatan Sthal)
आंद्रो गाँव (Andro Village), मणिपुर का एक प्रसिद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थल है, जो मणिपुर की समृद्ध लोक कला और परंपराओं को संरक्षित करने के लिए जाना जाता है। यह मणिपुर को एक गावं है जो बहुत समृद्ध तथा इतिहास से जुड़ा हुआ है | यहां आप मणिपुरी हेंडलूम और मिट्टी के बर्तनों की कला को नज़दीक से देख सकते हैं।
- अन्द्रो गावं को पहली बार सर्वश्रेष्ट बिरासत पर्यटन पुरुष्कार 2024 में मिला है |
- यह पुरुष्कार यहाँ के लोगो के सांस्कृतिक विरासत और पारम्परिक प्रथाओं के कारण मिला है|
- गावं में एक मंदिर है जो यहाँ की समृद्धि और सांस्कृतिक विरासत के बारे में है |
- गावं के सांस्कृतिक बिरासत में वर्षो पुराणी अगिनि पूजा शामिल है जो पर्यटकों को दूर दराज से अपनी ओर खींच लेती है |
- आंद्रो मणिपुर के इम्फाल से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित है।
- अन्द्रो गावं को लोक कला और संस्कृति के लिए जाना जाता है , जो यहाँ का मुख्य केंद्र भी है | मणिपुर के पारम्परिक हस्तशिल्प लोक नृत्य, लोक संगीत और त्योहारों को संरक्षित किया जाता है |
- आंद्रो में मणिपुरी हस्तशिल्प संग्रहालय (Manipur Handicrafts Museum) भी स्थित है, जो मणिपुर की पारंपरिक कारीगरी, वस्त्र, हथियार, और अन्य सांस्कृतिक वस्तुओं को प्रदर्शित करता है।
- अन्द्रो गावं में मणिपुर के आयोजित कार्यकर्मो को कला के रूप में प्रदर्शित करने के लिए और शिल्प को दिखाने के लिए यहाँ के लोग कार्यकर्मो में बढ़ चढ़कर भाग लेते हैं |
- यहाँ के लोग अपनी विरासत को सजोय रखने के लिए अपनी परम्पराओ का बेहद ख्याल रखते हैं | मणिपुर में लोग अपनी परम्पराओ के लिए अपने पोशाक, नृत्य और संगीत की ओर ध्यान देते हैं |
- अन्द्रो गावं में रास लीला और खम्बा -थोबी का कार्यकर्म भी होता है |
- आंद्रो गाँव में पारंपरिक मणिपुरी घरों की वास्तुकला देखी जा सकती है, जो स्थानीय जीवनशैली को दर्शाती है।
- यहाँ का हस्तशिल्प संग्रहालय पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र है, जहाँ मणिपुर की विविध जातीय समूहों की कला और संस्कृति का प्रदर्शन होता है।
- यह गाँव मणिपुरी संस्कृति के अध्ययन और पर्यटन के लिए एक प्रमुख स्थल है।
8. थौबल (Thoubal)
थौबल भारत के मणिपुर में एक नगर और जिला है | थोबल अन्य सहरो के अपेक्षा अधिक विकसित है | शहर के ज्यादातर प्रमुख स्थल थौबल नदी के तट पर बसे हुए हैं। इम्फाल नदी यहां की दूसरी महत्वपूर्ण नदी है। यह जिला पूर्व में उखरुल और चंदेल उत्तर में सेनापति, पश्चिम में इम्फाल पश्चिम व इम्फाल पूर्व और दक्षिण में चुराचंदपुर और बिष्णुपुर जिले से घिरा हुआ है |
खूबसूरत वृक्षों और वन्य जीवो के लिए प्रसिद्ध थौबल मणिपुर में स्थित है | थौबल में पाए जाने वाले वृक्षों में काबलिउ, खोक, सिलेमा, और तैरन विशेष रूप से यहाँ पाए जाते हैं | यहाँ पर जीवो में हिरन , जंगली मुर्गा और सर्दियों में प्रवाशी पक्छीया पाई जाती हैं |
थोबल के उत्सवों में यहाँ के लोगो के रहन-सहन और यहाँ की संस्कृति झलकती है | यह के उत्सवों में दुर्गा पूजा, जन्माष्टमी, निंगवाल और चैकोबा आदि सम्लित है |
- थौबल पहाड़ो और टीलों के बीच बसा एक बहुत ही सुन्दर शहर है | यहाँ के कुछ महत्त्वपूर्ण पर्यटन स्थल पंथोईबी व् चिंगा लैरेनभी मंदिर , तोमजिंग चिंग और मणिपुर साहित्य समिति है इसके अलावा यहाँ और भी अन्य पर्यटन स्थल है |
- यहाँ के बाज़ारो में शॉपिंग करना से एक अच्छा सीख मिलती है | यहाँ के बाज़ारो में सोवेनियर से लेकर हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों का भरी मात्रा में शॉपिंग की जा सकती है |
- थौबल में लोग भरी संख्या में लोग पिकनिक मानाने के लिए यहाँ के बहरी क्षेत्रो में जाते है क्यूंकि स्थान खुला हुआ है | यहाँ पे आप ट्रैकिंग और लम्बी पैदल यात्रा भी कर सकते हैं |
- थौबल में आउटडोर गतिविधिया बहुत होती हैं क्यूंकि यहाँ पे काफी संख्या में झील और नदिया हैं |
- यहां धान के बड़े-बड़े हरे-भरे खेतों की खूबसूरती पर्यटकों को खूब रिझाती है। शुरू-शुरू में थौबल जिला कृषि के लिए जाना जाता था। यहां मुख्य रूप से चावल , सरसो, तिलहन, आलू, फल और सब्जियों का उत्पादन होता था। बाद में यहां के लागों ने पशुपालन का पेशा अपना लिया और कच्चे रेशम का उत्पादन करने लगे।
9. उखरुल (Ukhrul)
उखरुल एक जिला है जो मणिपुर राज्य में बसा है | उखरुल एक आम जिला नहीं है खूबसूरती और सुंदरता से भरा जिला है | यहाँ पहाड़ियों और झीलों के बीच पर्यटक को जन्नत का एहसास होता है | यहाँ पर आप गर्मियों में घूमने का आनंद ले सकते है | यहाँ पहाड़ियों के बीच से आती ठंडी हवाएं आपको शांति तथा सुकून का अनुभव कराती हैं | यहाँ आप गर्मियों में छुट्टिया मानाने के लिए आ सकते है यहाँ जलवायु का आनंद लेकर आप अपना समय सुकून से काट सकते हैं |
उखरुल के बारे में ज्यादा लोग नहीं जानते यह सिर्फ ट्रैवलर के बीच ही प्रसिद्द हैं यहाँ जायदा भीड़ भाड़ नहीं होती है | प्रकृति प्रेमियों से लेकर एडवेंचर के शौक़ीन यहाँ अति आनंद प्राप्त कर सकते हैं |
- यह एक पहाड़ी क्षेत्र है, जो समुद्र तल से लगभग 1662 मीटर (5453 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है |
- उखरुल मणिपुर के उत्तर में है और इसके आसपास म्यांमार, नागालैंड, सेनापति और चंदेल जिले स्थित हैं |
- यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता, हरे-भरे जंगलों, फूलों, ऑर्किड्स और खासकर दुर्लभ शिरुई लिली (Lilium mackliniae) के लिए प्रसिद्ध है, जो दुनिया में केवल उखरुल जिले के शिरुई गांव की पहाड़ियों में ही खिलती है |
- शिरुई लिली महोत्सव यहाँ बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है, जो शांति, भाईचारा और प्रेम का संदेश देता है |
- उखरुल जिले का क्षेत्रफल लगभग 4544 वर्ग किलोमीटर है और यहाँ की जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 2 लाख के करीब है |
- यहाँ की प्रमुख जनजाति तांगखुल नागा है, साथ ही कुकी जनजाति भी निवास करती है |
- खयांग पीक समुद्र तल से 3114 मीटर ऊँचा शिखर, जहाँ से पूरे क्षेत्र का मनोरम दृश्य दिखाई देता है और ट्रेकिंग के लिए उपयुक्त है |
- शिरुई कशुंग, खानखई गुफा, हुंदुंग मंगला गुफा, डिलिली जलप्रपात, और अजोआ जेनेफ्यू मागी झील जैसे प्राकृतिक दर्शनीय स्थल |
- यह पहाड़ी इलाका तांगखुल नागा जनजाति का घर है और यहां की हरी-भरी वादियाँ, सुंदर फूलों के खेत और अद्भुत सूर्योदय-सूर्यास्त मन मोह लेते हैं।
10. तामेंगलोंग (Tamenglong)
Manipur Paryatan Sthal: यह स्थान अपनी दुर्लभ वनस्पतियों और जीव-जंतुओं के लिए जाना जाता है। यहाँ की वनस्पतिया और जगहों की वनस्पतियो से अलग हैं | यहां की झरनें और गुफाएँ प्रकृति के प्रेमियों के लिए किसी खजाने से कम नहीं हैं।
तमेंगलोंग मणिपुर का एक जिला है | तमेंगलोंग जिला 9 खूबसूरत जिलों में से एक है जिसका मुख्यालय भी तामेंगलोंग नगर में स्थित है। इसका क्षेत्रफल लगभग 4,391 वर्ग किलोमीटर है | इसमें कुल तीन विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र आते हैं। यहाँ की जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 1,40,143 थी, और जनसंख्या घनत्व करीब 32 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है |
तामेंगलोंग मणिपुर के पश्चिमी हिस्से में स्थित है और यह इलाका अपनी प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ियों, घने जंगलों और जलप्रपातों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ नागा समुदाय के लोग रहते हैं जो अपनी विशिष्ट संस्कृति और परंपराओं के लिए जाने जाते हैं | जिले में कई बार प्राकृतिक आपदाएँ, जैसे भूस्खलन, भी होती रहती हैं |
जलवायु की दृष्टि से तामेंगलोंग में गर्मी के मौसम में तापमान 29 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है, जबकि रात का तापमान अपेक्षाकृत ठंडा हो जाता है। यहाँ की जलवायु मूगा रेशम पालन के लिए भी उपयुक्त मानी जाती है।
तामेंगलोंग जिला प्राकृतिक संसाधनों, जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध है, लेकिन कभी-कभी भूमि विवाद या अन्य सामाजिक कारणों से यहाँ झड़पें भी होती रही हैं |
मणिपुर कैसे पहुँचें? (Manipur Paryatan Sthal)
हवाई मार्ग:
- मणिपुर का एकमात्र हवाई अड्डा इंफाल (तुलिहाल एयरपोर्ट) है, जो दिल्ली, गुवाहाटी और कोलकाता जैसे बड़े शहरों से सीधा जुड़ा है
रेल मार्ग:
- मणिपुर में कोई सीधा रेलवे स्टेशन नहीं है। निकटतम रेलवे स्टेशन दीमापुर (नागालैंड) है, जो इंफाल से लगभग 200 किमी दूर है। दीमापुर तक दिल्ली, गुवाहाटी आदि से ट्रेन मिलती है |
- दीमापुर से इंफाल तक टैक्सी, बस या निजी वाहन द्वारा सड़क मार्ग से पहुँचा जा सकता है |
सड़क मार्ग:
- इंफाल, दीमापुर, कोहिमा, गुवाहाटी आदि से सड़क मार्ग (NH 2, NH 39, NH 102) द्वारा अच्छी तरह जुड़ा है। निजी और सरकारी बसें उपलब्ध हैं |
मणिपुर में क्या-क्या कर सकते हैं? (Manipur Paryatan Sthal)
- लोकटक झील देख सकते हैं, जहाँ तैरते द्वीप (फुमदी) और दुर्लभ संगाई हिरण पाए जाते हैं |
- कीबुल लामजाओ नेशनल पार्क (दुनिया का एकमात्र तैरता राष्ट्रीय उद्यान) घूम सकते हैं |
- इमा कैथल (महिला बाजार), इंफाल का अनूठा बाजार, जहाँ केवल महिलाएँ दुकान चलाती हैं |
- गोविंद जी मंदिर, कांग्ला किला, युद्ध स्मारक, शहीद मीनार आदि ऐतिहासिक स्थल देख सकते हैं |
- शिरुई लिली फेस्टिवल (उखरुल), पारंपरिक नृत्य, संगीत और हस्तशिल्प का आनंद ले सकते हैं।
- एडवेंचर: ट्रेकिंग, बर्ड वॉचिंग, फोटोग्राफी, लोक संस्कृति का अनुभव।
मणिपुर का भोजन (Manipur Paryatan Sthal)
- इरोम्बा: उबली सब्जियाँ, मछली और मसालों से बना पारंपरिक व्यंजन।
- सिंग्जू: हरी सब्जियों, जड़ी-बूटियों और मसालों का सलाद।
- एनगा-ओबाई: मछली से बना व्यंजन।
- चामथोंग (ओटीटी): सब्जियों का सूप।
- मोइरांग सिंगु: चावल, मछली और सब्जियों का मिश्रण।
- चावल, बांस की कोपल, सूखी मछली, और स्थानीय जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल आम है।
- यहाँ के भोजन में मिर्च, अदरक, बांस की कोपल और स्थानीय मसाले खूब इस्तेमाल होते हैं।
मणिपुर में रेस्टोरेंट और ट्रांसपोर्ट का बजट (Manipur Paryatan Sthal)
नोट:
- महंगाई, मौसम, त्योहार या स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कीमतों में बदलाव संभव है |
- स्ट्रीट फूड और लोकल रेस्टोरेंट में खाना सस्ता और स्वादिष्ट मिलता है |
- मुख्य शहरों के बाहर ट्रांसपोर्ट विकल्प सीमित हो सकते हैं, इसलिए टैक्सी या प्राइवेट वाहन किराए पर लेना पड़ सकता है।
निष्कर्ष
Manipur Paryatan Sthal: मणिपुर एक छुपा हुआ रत्न है जो अब धीरे-धीरे पर्यटन मानचित्र पर अपनी खास जगह बना रहा है। यहां के अद्भुत स्थल न केवल आपकी आत्मा को छू लेंगे, बल्कि आपको भारत की विविधता और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का एहसास भी कराएंगे। अगली बार छुट्टियाँ हों, तो मणिपुर की ओर रुख ज़रूर करें।
FAQ
क्या लोकतक झील की तैरती हुई द्वीपें मेरी यात्रा को खास बना देंगी?
Ans. Manipur Paryatan Sthal: हाँ, लोकतक झील की तैरती हुई द्वीपें (फुमड़ी) आपकी यात्रा को बेहद खास और यादगार बना देंगी। ये तैरते द्वीप वनस्पतियों, मिट्टी और जैविक पदार्थों से बने होते हैं, जो पानी की सतह पर तैरते हैं और इस झील की सबसे अनोखी विशेषता हैं |
लोकतक झील में नौका विहार करते हुए आप इन तैरते द्वीपों के बीच से गुजर सकते हैं, जो एक अद्भुत और रहस्यमय अनुभव होता है। यहाँ का केइबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान, जो दुनिया का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान है, भी इसी झील पर स्थित है और दुर्लभ संगाई हिरण (नाचते हिरण) को देखना भी एक अनूठा आकर्षण है |
इसके अलावा, झील के किनारे होमस्टे में ठहरना भी एक विशेष अनुभव है, जहाँ आप प्रकृति के बीच शांति और तैरते द्वीपों के नजदीक रह सकते हैं |
इसलिए, लोकतक झील की तैरती द्वीपें आपकी मणिपुर यात्रा को प्राकृतिक सौंदर्य, अनोखे अनुभव और सांस्कृतिक समृद्धि से भरपूर बना देंगी।