15 जबरदस्त Andaman and Nicobar Paryatan Sthal जो दिल जीत लें

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Andaman and Nicobar Paryatan Sthal द्वीपसमूह भारत का एक खूबसूरत केंद्र शासित प्रदेश है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक महत्व, सांस्कृतिक विविधता और रोमांचक पर्यटन स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ 15 जबरदस्त पर्यटन स्थल, इतिहास, भोजन, बजट, यात्रा का सही समय, ठहरने की जगहें, घूमने की अवधि और करने योग्य चीजें विस्तार से दी गई हैं।

अंडमान और निकोबार का इतिहास

अंडमान का इतिहास रामायण काल से शुरू होता है, इसे पहले हण्डुकमान, अगादेमन, अंगादेमन जैसे नामों से जाना गया। ब्रिटिश काल में यह कैदियों के लिए पेनल कॉलोनी था, जहां सेलुलर जेल बना था, जो स्वतंत्रता संग्राम का महत्वपूर्ण स्थल है।

निकोबार द्वीपों का इतिहास भी प्राचीन है, 1756 में डेनस ने कब्जा किया, बाद में अंग्रेजों ने 1869 में औपचारिक रूप से कब्जा किया। द्वितीय विश्व युद्ध में जापानी कब्जा भी रहा। स्वतंत्रता के बाद यह भारत का हिस्सा बना |

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15 जबरदस्त अंडमान और निकोबार पर्यटन स्थल जो दिल जीत लें

  1. सेल्युलर जेल – स्वतंत्रता संग्राम का ऐतिहासिक स्थल।
  2. राधानगर बीच (हवॉक बीच) – विश्व के सबसे सुंदर समुद्र तटों में से एक।
  3. बारातांग द्वीप – प्राकृतिक सुंदरता और समुद्री जीवन के लिए प्रसिद्ध।
  4. नेल्सन द्वीप – स्कूबा डाइविंग के लिए उपयुक्त।
  5. चिड़िया टापू – पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग।
  6. हैवलॉक द्वीप – सफेद रेत और साफ पानी के लिए मशहूर।
  7. माउंट हार्डिंग – ट्रेकिंग और वन्यजीव देखने के लिए।
  8. लॉन्ग आईलैंड – शांत समुद्र तट और स्थानीय संस्कृति।
  9. इंदिरा पॉइंट – भारत का सबसे दक्षिणी बिंदु।
  10. निकोबार द्वीप समूह – आदिवासी संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य।
  11. माहात्मा गांधी समुद्री राष्ट्रीय उद्यान – समुद्री जीवन का संरक्षण क्षेत्र।
  12. कैलास द्वीप – स्नॉर्कलिंग के लिए उपयुक्त।
  13. शहर पोर्ट ब्लेयर – राजधानी, जहां बाजार, संग्रहालय और सांस्कृतिक स्थल हैं।
  14. कच्छल द्वीप – रबर बागान और स्थानीय जीवन।
  15. चाथम द्वीप – ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थल

1. सेलुलर जेल (Cellular Jail) – पोर्ट ब्लेयर(Andaman and Nicobar Paryatan Sthal)

सेलुलर जेल, जिसे आमतौर पर “काला पानी” कहा जाता है, अंडमान द्वीप पर स्थित है और यह भारत के स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान की गवाही देने वाला स्थान है। ब्रिटिश शासन के दौरान इसे राजनीतिक कैदियों को यातना देने के लिए बनाया गया था।

सेलुलर जेल (Cellular Jail) का निर्माण 1896 में शुरू होकर 1906 में पूरा हुआ। इसका नाम “सेलुलर” इसलिए पड़ा क्यूंकि इसका डिज़ाइन इस तरह से था कि हर कैदी को अलग कोठरी (सेल) में रखा जाता था ताकि वे एक-दूसरे से बात न कर सकें। इसमें करीब 693 सेल्स थीं, हर सेल 4.5 x 2.7 मीटर की थी।

यह जेल तीन मंजिला और सात शाखाओं में फैली थी, जो एक सेंट्रल टावर से जुड़ी हुई थीं। कुछ देशभक्त जो यहाँ बंद थे वीर सावरकर (Vinayak Damodar Savarkar), बटुकेश्वर दत्त, योगेंद्र शुक्ल, बारिश चक्रवर्ती ,ये सभी क्रांतिकारी ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ रहे थे और उन्हें यहाँ अमानवीय यातनाएँ दी गईं।

यहाँ पर कैदियों को बहुत यातनाएँ सहन करनी पड़ती थी जैसे भारी श्रम (Hard Labor) – जैसे नारियल से तेल निकालना, कोल्हू चलाना, भूख और प्यास से तड़पाना, कोड़ों से मारना, और कई बार कैदियों को बिना किसी कारण के मृत्युदंड भी दे दिया जाता था।

हर शाम यहाँ एक लाइट एंड साउंड शो आयोजित होता है जिसमें बताया जाता है कि कैसे इस जेल में हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने बलिदान दिया। यह शो हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में होता है।

यह शो आमतौर पर शाम 6 बजे के बाद होता है, इसका टिकट ₹30 – ₹100 के बीच है |

सेलुलर जेल में देखने योग्य स्थल: वीर सावरकर सेल – जहाँ सावरकर जी को रखा गया था , सेंट्रल टॉवर – चौकीदार यहाँ से सभी सेल्स पर नजर रखता था , फांसी घर – जहाँ कैदियों को फांसी दी जाती थी, म्यूज़ियम और गैलरी – स्वतंत्रता संग्राम की तस्वीरें और दस्तावेज, और कयाकल्प भाग – जहाँ अब पर्यटकों के लिए सुविधा केंद्र हैं|

सेलुलर जेल, पोर्ट ब्लेयर के केंद्र में स्थित है, पोर्ट ब्लेयर एयरपोर्ट (Veer Savarkar Airport) से लगभग 15 मिनट की दूरी पर है | टैक्सी, ऑटो, या लोकल बस से आसानी से पहुँचा जा सकता है| 1.5 से 2 घंटे का समय जेल घूमने के लिए पर्याप्त है| लाइट एंड साउंड शो को मिलाकर आप 3 घंटे का प्लान रखें |

  • सेलुलर जेल को ‘काला पानी’ कहा जाता था, क्योंकि इसे ऐसे दूरवर्ती द्वीप पर अंग्रेजों ने बनाया था जहां से भाग पाना लगभग असंभव था। चारों ओर समुद्र और कठिन रास्ते इसे भयावह बनाते थे |
  • इसका निर्माण 1896 में शुरू हुआ और 1906 में पूरा हुआ। इसमें 7 शाखाएँ थीं और लगभग 694 कोठरियाँ, जिसमें प्रत्येक कैदी को अलग-अलग एकांत में रखा जाता था। लाल ईंटों का प्रयोग म्यांमार से लाकर किया गया था |
  • यह जेल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के लिए अमानवीय यातनाओं का स्थल थी। यहाँ विनायक दामोदर सावरकर, बटुकेश्वर दत्त, शचीन्द्रनाथ सान्याल समेत सैकड़ों क्रांतिकारियों को रखा गया गया था |
  • इस जगह को ‘काले पानी की सज़ा’ के लिए जाना जाता था— जिसका अर्थ था दुर्गम द्वीप, अलगाव, और असम्भव पलायन—जो कैदियों के लिए मृत्यु के समान मानी जाती थी |
  • जेल की बनावट पैनऑप्टिकन सिद्धांत पर आधारित थी—सातों विंग एक केन्द्रीय टॉवर से निकलती थीं, जिससे एक ही प्रहरी पूरी जेल पर नज़र रख सकता था, मगर कैदी प्रहरी को नहीं देख सकते थे |
  • 1942 में जापानी सेना ने अंडमान पर कब्ज़ा कर लिया था, बाद में 1945 में द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद यह फिर अंग्रेजों के अधीन आया |
  •  अब सेलुलर जेल भारतीय राष्ट्रीय स्मारक है और यहाँ शाम को ‘लाइट एंड साउंड शो’ होता है, जिसमें स्वतंत्रता संग्राम की गाथा सुनाई जाती है |
  • यहाँ एक संग्रहालय, आर्ट गैलरी और फोटो गैलरी भी है, जो कैदियों के जीवन की झलक दिखाते हैं |

खुलने का समय (Timings):

दिनसमय
मंगलवार – रविवारसुबह 9:00 बजे – दोपहर 1:00 बजे
दोपहर 1:30 बजे – शाम 5:00 बजे
सोमवारबंद रहता है (Maintenance Day)

प्रवेश शुल्क (Entry Fee):

श्रेणीशुल्क (INR में)
सामान्य टिकट₹30
कैमरा शुल्क (स्टिल)₹50
वीडियो कैमरा₹200

आसपास खाने की जगहें (Nearby Places to Eat):

  • Annapurna Restaurant – शुद्ध शाकाहारी भोजन
  • Lighthouse Residency – सी फूड के लिए प्रसिद्ध
  • New India Café – बजट फ्रेंडली

ट्रैवल टिप्स:

  • लाइट एंड साउंड शो के टिकट पहले से बुक करवा लें (ऑनलाइन भी उपलब्ध)
  • बच्चों को जेल की कहानी पहले समझा दें, यह एक संवेदनशील स्थान है
  • जेल के भीतर फ़ोटोग्राफ़ी के नियमों का पालन करें
  • फुल डे पोर्ट ब्लेयर घूमने का प्लान बनाते समय सुबह में सेलुलर जेल और शाम को शो रखें

क्यों जाएँ सेलुलर जेल?

  • यह सिर्फ एक दर्शनीय स्थल नहीं, बल्कि देशभक्ति की भावना से भरने वाला अनुभव है
  • भारत के वीरों के बलिदान को जानने और समझने का मौका मिलता है
  • यह यात्रा हर भारतीय को एक बार जरूर करनी चाहिए

2. राधानगर बीच (हवॉक बीच) – विश्व के सबसे सुंदर समुद्र तटों में से एक।

राधानगर बीच (Havelock Beach), अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के हैवलॉक द्वीप (अब स्वराज द्वीप) पर बसा, भारत ही नहीं बल्कि एशिया के सबसे सुंदर समुद्र तटों में गिना जाता है।

इसे टाइम मैगज़ीन ने “एशिया का सर्वश्रेष्ठ समुद्र तट” घोषित किया है। यह बीच अपने साफ-सुथरे सफेद रेत, नीले पारदर्शी पानी, और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। यहां का सनसेट (सूर्यास्त) बेहद मनमोहक होता है, जिसे देखना किसी सपने जैसा लगता है।

राधानगर बीच पर तैराकी, सनबाथ और फोटोग्राफी के अलावा, लोग यहाँ प्राकृतिक सुंदरता और सुकून का अनुभव लेने आते हैं। यह परिवार, कपल्स और नेचर लवर्स के लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है और अंडमान की यात्रा अधूरी है अगर आपने राधानगर बीच की सैर नहीं की। 

यहाँ का पानी स्विमिंग, स्नॉर्कलिंग और स्कूबा डाइविंग के लिए आदर्श है, साथ ही यह समुद्री जीवन का एक जीवंत घर भी है।

  • राधानगर बीच को टाइम मैगजीन ने 2004 में ‘एशिया का सबसे सुंदर समुद्र तट’ और कई बार ‘विश्व के शीर्ष समुद्र तटों’ में शामिल किया है।
  • यहाँ की सफेद, मुलायम और महीन रेत इस तट को और भी आकर्षक बनाती है। रेत इतनी साफ नजर आती है कि नंगे पांव चलना भी आनंददायक महसूस होता है।
  • पानी का रंग गहरा नीला और बेहद साफ है। लहरें कम और शांत रहती हैं, जिससे यह तैराकी के लिए भी बहुत मशहूर है।
  • चारों तरफ हरियाली और सुंदर वृक्षों से घिरा यह स्थल दूर-दूर तक फैली प्राकृतिक शांति के लिए जाना जाता है।
  • यहाँ से सूर्यास्त (Sunset) का नजारा दुनिया के सबसे खूबसूरत दृश्यों में माना जाता है; हर शाम पर्यटक इसे देखने यहाँ आते हैं।
  • यह तट बहुत अच्छे से संरक्षित और स्वच्छ रखा गया है। यहाँ प्लास्टिक और गंदगी पर सख्त प्रतिबंध है, जिससे इसका प्राकृतिक सौंदर्य बना रहता है।
  •  तैराकी के अलावा यहाँ स्नॉर्केलिंग, स्कूबा डाइविंग के लिए अन्य जगहें भी पास ही हैं, पर खुद राधानगर बीच तैराकी के लिए सबसे उपयुक्त है।
  •  तट के पास घने जंगलों में कई अनोखे पक्षी और तितलियाँ देखी जा सकती हैं।
  • यहाँ वॉशरूम, चेंजिंग रूम, छोटी दुकानें आदि उपलब्ध हैं, लेकिन कोई बड़ा होटल या दुकानें समुद्र तट के किनारे नहीं हैं जिससे इसकी शांति बरकरार रहती है।
  •  राधानगर को ‘हवॉक बीच’ भी कहते हैं, जो इसका मूल नाम है।
  •  इसे ‘ब्लू फ्लैग सर्टिफिकेट’ मिला है जो स्वच्छता और पर्यावरणीय मानकों के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन है।
  • यह बीच हनीमून कपल्स के लिए भी परफेक्ट है |

 खाने-पीने के लिए यहाँ सी फूड विशेष रूप से लोकप्रिय है, जैसे ग्रिल्ड फिश, लॉबस्टर, प्रॉन करी, साथ ही शाकाहारियों के लिए कोकोनट राइस, दाल-चावल, और स्थानीय व्यंजन मिल जाते हैं।

आसपास के रेस्टोरेंट्स में Full Moon Café, Something Different Café, Anju Coco Resto जैसे स्थान स्वादिष्ट भोजन और अच्छा माहौल प्रदान करते हैं।

राधानगर के पास स्थित अन्य आकर्षणों में एलीफैंट बीच, कालापत्थर बीच और विजयनगर बीच भी पर्यटकों को खूब भाते हैं।

और पढ़े : राधानगर बीच की पूरी जानकारी

3. बारातांग द्वीप – प्राकृतिक सुंदरता और समुद्री जीवन के लिए प्रसिद्ध।

बारातांग द्वीप अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का एक प्रमुख द्वीप है, जो पोर्ट ब्लेयर से लगभग 100 किमी दूर स्थित है। इसका इतिहास 19वीं सदी के अंत में ब्रिटिश काल से जुड़ा है, जब रांची के कुछ लोग यहाँ खेती के लिए बसाए गए थे।

यह द्वीप अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जैसे कि चूना-पत्थर की गुफाएं (Limestone Caves), मड वोल्केनो (कीचड़ फेंकने वाले ज्वालामुखी), और मैंग्रोव वन के लिए प्रसिद्ध है। बारातांग के आसपास बालू डेरा तट, लालाजी बे तट, मार्क बे तट, गिटार तट, स्पाइक द्वीप और पैरट द्वीप जैसे पर्यटन स्थल हैं, जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

  • बारातांग द्वीप भारत का इकलौता स्थान है जहाँ सक्रिय ‘मड वोल्केनो’ यानी मिट्टी के ज्वालामुखी पाए जाते हैं, जो भूगर्भीय दृष्टि से बहुत खास हैं |
  • यहाँ की Limestone Caves प्राकृतिक आकृतियों और चमकदार चूना पत्थर से बनी अद्भुत गुफाएँ हैं, जो पर्यटकों के बीच आकर्षण का बड़ा केंद्र हैं |
  • बारातांग का बड़ा हिस्सा घने मैंग्रोव (जलीय वृक्षों) के जंगलों से घिरा है। इन जंगलों के बीच नाव की सवारी रोमांचकारी अनुभव देती है |
  • यहाँ के समुद्र में अनेक प्रकार की मछलियाँ, केकड़े और अन्य समुद्री जीव मिलते हैं। साथ ही, आस-पास के जंगलों में अनेक प्रकार के पक्षी और तितलियाँ देखी जा सकती हैं।
  • सूर्यास्त के समय लौटते तोतों का यहाँ का दृश्य अत्यंत सुंदर माना जाता है, जिसे देखने के लिए विशेष भ्रमण किया जाता है |
  • बारातांग द्वीप जारवा जनजाति के निवास क्षेत्र से होकर गुजरती मुख्य सड़क (Andaman Trunk Road) के लिए भी प्रसिद्ध है। जारवा सबसे पुरानी मानव जनजातियों में मानी जाती है |
  • बारातांग द्वीप, पोर्ट ब्लेयर से लगभग 100-110 किमी दूर स्थित है और यहाँ पहुँचने के लिए विशेष सरकारी अनुमति तथा समूह में यात्रा जरूरी होती है |
  •  यहाँ की हरियाली, स्वच्छ समुद्र तट, शांत वातावरण, और कम भीड़भाड़ इसे प्रकृति प्रेमियों के लिए आदर्श स्थल बनाते हैं

यहाँ का भोजन मुख्यतः समुद्री भोजन पर आधारित होता है, जिसमें फिश करी, चिली करी, कुल्छे और चिकन टिक्का मसाला लोकप्रिय हैं।

पर्यटक यहाँ स्कूबा डाइविंग, तैराकी, और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकते हैं।

बारातांग द्वीप की यात्रा के लिए दिसंबर से फरवरी का मौसम सबसे उपयुक्त माना जाता है, जब यहाँ का मौसम सुहावना रहता है और पर्यटकों की संख्या अधिक होती है। यह द्वीप प्रकृति प्रेमियों और साहसिक पर्यटन के शौकीनों के लिए एक आदर्श स्थल है

और पढ़े : बारातांग द्वीप की पूरी जानकारी

4. नेल्सन द्वीप – स्कूबा डाइविंग के लिए उपयुक्त।

नेल द्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का एक शांत और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर द्वीप है, जो पोर्ट ब्लेयर से लगभग 2 घंटे की नाव यात्रा द्वारा पहुँचा जा सकता है ।

इसका ऐतिहासिक महत्व सीमित है, लेकिन यह द्वीप अपने अद्भुत समुद्र तटों और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ के प्रमुख पर्यटक स्थल में भरतपुर बीच, लक्ष्मणपुर बीच, रामनगर बीच, और प्राकृतिक पुल शामिल हैं, जो अपने सफेद रेत, नीले पानी और सुरम्य दृश्यों के लिए प्रसिद्ध हैं ।

  • नेल्सन द्वीप (Neil Island), जिसे अब शाहिद द्वीप भी कहा जाता है |
  • नेल्सन द्वीप साफ-सुथरे, सफेद बालू वाले समुद्र तटों, शांत वातावरण और हरियाली के लिए जाना जाता है। यहाँ की प्रकृति बहुत ही प्राचीन और लगभग अनछुई है।
  • नेल्सन द्वीप स्कूबा डाइविंग के लिए भारत के सर्वश्रेष्ठ स्थानों में गिना जाता है। यहाँ पानी इतना साफ और नीला है कि समुद्री जीवन का दर्शन करते समय अद्भुत दृश्य नजर आते हैं।
  • यहाँ डाइविंग के दौरान विविध रंग-बिरंगी मछलियाँ, प्रवाल (Coral reefs), कछुए और कई दुर्लभ समुद्री जीवों को देखने का मौका मिलता है।
  • नेल्सन द्वीप के आसपास कुछ प्रसिद्ध डाइव साइट्स हैं – जैसे- ‘मोहा टाइड्स’, ‘जंकयार्ड’, ‘बैराकुडा रीफ’ आदि। इन जगहों पर डाइविंग का अपना अलग अनुभव है।
  • द्वीप छोटा, शांत, कम भीड़भाड़ वाला है एवं यहाँ बीच के पास बढ़िया रिसॉर्ट्स भी हैं।
  • स्नॉर्केलिंग, जेट स्कीइंग जैसी दूसरी वॉटर स्पोर्ट्स भी यहाँ उपलब्ध हैं।
  • नेल्सन द्वीप पर्यावरण-सुरक्षा हेतु जागरूक है — यहाँ प्लास्टिक और दूसरी गंदगी पर सख्त रोक है जिससे इसकी प्राकृतिक सुंदरता बनी रहती है।
  • यहाँ से सूर्यास्त का दृश्य बहुत प्रसिद्ध है, जो कई पर्यटकों का पसंदीदा अनुभव होता है।
  • लक्ष्मणपुर, भरतपुर और सीतापुर समुद्र तट, काँच के साफ पानी के लिए प्रसिद्ध हैं।

यहाँ पर पर्यटक स्नॉर्कलिंग, जेट स्कीइंग, और बोट राइडिंग जैसी जल क्रीड़ाओं का आनंद ले सकते हैं।

भोजन के लिए, द्वीप पर स्थानीय सीफूड और दक्षिण भारतीय व्यंजन उपलब्ध हैं, जो ताजे और स्वादिष्ट होते हैं।

यहाँ की शांतिपूर्ण और प्राकृतिक सुंदरता, इसे प्रकृति प्रेमियों और शांति की तलाश करने वालों के लिए आदर्श स्थल बनाती है। यह द्वीप कभी आबाद नहीं रहा और यहाँ कोई स्थायी मानव बस्ती नहीं है।

नेल्सन द्वीप को पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है, जहाँ लाल-पैर वाले बूबी पक्षी, ब्राउन बूबी, वेज-टेल्ड शीयरवाटर और लेसर नॉडी जैसे कई समुद्री पक्षी प्रजनन करते हैं।

द्वीप पर केवल नारियल और पिसोनिया नामक दो प्रकार के पेड़ पाए जाते हैं, और यह प्लास्टिक कचरे की समस्या से जूझ रहा है।

और पढ़े: नेल्सन द्वीप – स्कूबा डाइविंग के लिए उपयुक्त।

5. चिड़िया टापू – पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग।

चिड़िया टापू, जिसे “बर्ड आइलैंड” के नाम से भी जाना जाता है, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के पोर्ट ब्लेयर से लगभग 25 किमी दूर बसा एक बेहद सुंदर और शांत पर्यटन स्थल है, जो पक्षी प्रेमियों और प्रकृति के दीवानों के लिए स्वर्ग जैसा है।

इसका ऐतिहासिक रूप से कोई खास सांस्कृतिक महत्व नहीं है, लेकिन यह द्वीप प्राकृतिक विविधता और जैवविविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ अनेक दुर्लभ और रंग-बिरंगे पक्षियों की प्रजातियाँ देखने को मिलती हैं, खासकर सुबह और सूर्यास्त के समय, जब पक्षियों की चहचहाहट वातावरण को जीवंत कर देती है।

पर्यटक यहाँ ट्रैकिंग, बर्ड वॉचिंग, समुद्र किनारे सैर, और सनसेट व्यू का आनंद लेते हैं। साथ ही, पास के “मुन्ना पहाड़ी” (Munda Pahar) ट्रेल पर ट्रेकिंग करना रोमांचकारी अनुभव होता है।

  • चिड़िया टापू को पक्षी द्वीप के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यहाँ पक्षियों की विविधता बहुत अधिक है। यहाँ घरेलू (स्थानीय) और प्रवासी पक्षियों दोनों को देखा जा सकता है।
  • यह अंडमान द्वीप से लगभग 25-28 किलोमीटर दूर पोर्ट ब्लेयर के दक्षिणी भाग में स्थित है, जिसे घूमना और पहुँचना आसान है।
  • चिड़िया टापू का प्राकृतिक माहौल बहुत ही मनमोहक है, जहाँ घने मैंग्रोव जंगल और शांत समुद्री तट हैं।
  • यहाँ पक्षी देखना (Bird Watching) मुख्य आकर्षण है, क्योंकि यह एक जैविक उद्यान की तरह है जहां पक्षियों के साथ-साथ अन्य वन्यजीव भी पाए जाते हैं।
  • चिड़िया टापू में सुंदर सूर्यास्त के दृश्य देखने को मिलते हैं, जो पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। इसे ‘सनसेट प्वाइंट’ भी कहा जाता है।
  • पक्षी प्रेमियों के अलावा, यहां ट्रेकिंग, तट के आसपास वॉटर स्पोर्ट्स और मगरमच्छ और अन्य जीवों को देखने का मौका भी मिलता है।
  • यह स्थान प्रकृति प्रेमियों, वन्यजीव प्रेमियों और शांति की तलाश करने वालों के लिए आदर्श है।
  • चिड़िया टापू में समृद्ध जैव विविधता और स्वच्छ वातावरण के कारण पर्यटन को पर्यावरण-केंद्रित और सतत बनाने का प्रयास किया जाता है।

खाने-पीने की बात करें तो यहाँ ज्यादा रेस्तरां नहीं हैं, लेकिन आसपास के इलाकों में ताज़ा सीफूड और दक्षिण भारतीय व्यंजन जैसे मछली करी, नारियल चावल और समोसा इत्यादि आसानी से मिल जाते हैं।

चिड़िया टापू अपनी शांति, हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए अंडमान का एक खास रत्न माना जाता है।

और पढ़े : चिड़िया टापू कैसे पहुंचे

6. हैवलॉक द्वीप – सफेद रेत और साफ पानी के लिए मशहूर।

हैवलॉक द्वीप, जिसे अब स्वराज द्वीप के नाम से जाना जाता है, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है, जो पोर्ट ब्लेयर से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित है। इसका नाम पहले ब्रिटिश जनरल सर हेनरी हैवलॉक के नाम पर रखा गया था, लेकिन 2018 में इसे स्वतंत्रता सेनानी स्वराज्य के प्रतीक के रूप में नया नाम दिया गया।

यह द्वीप अपनी साफ-सुथरी सफेद रेत, फिरोज़ी पानी और शांत वातावरण के कारण पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है।

यहाँ के प्रमुख पर्यटक स्थलों में राधानगर बीच (एशिया का सबसे सुंदर बीच), एलीफैंट बीच, और कालापत्थर बीच शामिल हैं।

रोमांच पसंद करने वालों के लिए यहाँ स्कूबा डाइविंग, स्नॉर्कलिंग, कयाकिंग, और सी वॉक जैसी जल क्रीड़ा गतिविधियाँ उपलब्ध हैं।

  • हैवलॉक द्वीप में कई खूबसूरत और शांतिकर सफेद रेतीले बीच हैं, जिसमें राधानगर बीच सबसे प्रमुख है। यह बीच टाइम मैगजीन द्वारा एशिया के सर्वश्रेष्ठ समुद्र तटों में चुना गया है।
  • यहां का समुद्र जल बहुत ही साफ, नीला और पारदर्शी है, जो तैराकी, स्नॉर्कलिंग और स्कूबा डाइविंग के लिए उपयुक्त है।
  •  द्वीप में स्कूबा डाइविंग के बेहतरीन अवसर उपलब्ध हैं, जिसमें रंग-बिरंगे प्रवाल और समुद्री जीवों को नज़दीक से देखा जा सकता है।
  • हैवलॉक द्वीप में गहरे हरे मैंग्रोव जंगल, घने वृक्ष और प्राकृतिक ट्रेकिंग ट्रेल्स हैं जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
  • यह द्वीप शांतिपूर्ण वातावरण प्रदान करता है, जहां पर्यटक समृद्ध प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेकर आराम कर सकते हैं।
  • यहां कैफे, रिजॉर्ट्स, और वाटर स्पोर्ट्स की सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो इसे आरामदायक और मनोरंजक बनाती हैं।
  • आधिकारिक रूप से इस द्वीप का नाम अब स्वराज द्वीप है, लेकिन आमतौर पर इसे हैवलॉक ही कहा जाता है।
  • हैवलॉक द्वीप राजधानी पोर्ट ब्लेयर से लगभग 40-41 किलोमीटर दूर है, जिसे नौका या फैरी द्वारा 1.5 से 2 घंटे में पहुंचा जा सकता है।

भोजन के मामले में, हैवलॉक में ताजे सीफूड जैसे ग्रिल्ड फिश, प्रॉन्स करी, कोकोनट राइस और साउथ इंडियन डिशेज बहुत लोकप्रिय हैं, साथ ही कई कैफे और रेस्टोरेंट में कॉन्टिनेंटल भोजन भी मिलता है।

यह द्वीप अपने प्राकृतिक सौंदर्य, रोमांचकारी अनुभवों और आरामदायक माहौल के कारण हनीमून कपल्स और नेचर लवर्स के लिए एक आदर्श गंतव्य है।

और पढ़े : हैवलॉक द्वीप की पूरी जानकारी

7. माउंट हार्डिंग – ट्रेकिंग और वन्यजीव देखने के लिए।

माउंट हार्डिंग, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का एक प्रसिद्ध पर्वत है, जो साउथ एंडमैन में स्थित है और पोर्ट ब्लेयर से लगभग 50 किलोमीटर दूर है। यह माउंटेन ट्रैकिंग के शौकिनों के लिए आदर्श स्थल माना जाता है, क्योंकि यहाँ से अंडमान के प्राकृतिक सौंदर्य के दृश्य बेहद खूबसूरत दिखाई देते हैं।

माउंट हार्डिंग का ऐतिहासिक महत्व इस संदर्भ में है कि यह ब्रिटिश काल में एक रणनीतिक स्थान था, और यहाँ से अंडमान के विभिन्न भागों का सर्वेक्षण किया जाता था। यह स्थान अब ट्रैकिंग और एडवेंचर स्पोर्ट्स के शौकिनों के लिए एक लोकप्रिय गंतव्य बन चुका है।

  • माउंट हार्डिंग अंडमान द्वीप समूह का तीसरा सबसे ऊंचा पर्वत है, जिसकी ऊँचाई लगभग 383 मीटर (1256 फीट) है।
  • यह पर्वत दक्षिणी अंडमान में स्थित है और यहाँ से आसपास के सुंदर वन्यजीवों और घने जंगलों का अद्भुत नजारा मिलता है।
  • माउंट हार्डिंग ट्रेकिंग के लिए अंडमान का एक लोकप्रिय स्थल है, जहां पर्यटक सही रास्तों पर चलते हुए प्राकृतिक सुंदरता और विविध वनस्पति का अनुभव कर सकते हैं।
  • यहां वन्यजीवों की अच्छी विविधता है जैसे विभिन्न पक्षी प्रजातियां, छोटे स्तनधारी, और ऋषभ (बारहसिंगा) देखे जा सकते हैं।
  • माउंट हार्डिंग के आसपास ट्रेकिंग के दौरान धीरे-धीरे चढ़ाई होती है और ट्रेक का मार्ग प्रकृति प्रेमियों के लिए बिल्कुल उपयुक्त है क्योंकि रास्तों में शांति और प्राकृतिक वातावरण रहता है।
  • माउंट हार्डिंग नेशनल पार्क के अंतर्गत आने वाला यह क्षेत्र वन्यजीव संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है और यह जैव-विविधता को संरक्षित करता है।
  • यहां ट्रेकिंग करते समय पर्यटक अक्सर विभिन्न प्रकार के पक्षियों को सुन सकते हैं, जो इसे पक्षी प्रेमियों के लिए खास बनाता है।
  • माउंट हार्डिंग का ट्रेकिंग रूट लगभग 5 से 6 किलोमीटर का होता है, जो आराम से किया जा सकता है और रास्ते में प्राकृतिक झरने और हरियाली का आनंद मिलता है।

पर्यटकों के लिए, यहाँ ट्रैकिंग के अलावा, वन्यजीवों को देखने, पक्षियों की नज़दीकी पहचान करने और जंगल में लंबी सैर का आनंद लेने का अवसर भी मिलता है।

खाने-पीने की बात करें तो, यहाँ के स्थानीय भोजन में ताजे सीफूड जैसे मछली करी, प्रॉन्स, नारियल चावल और अन्य दक्षिण भारतीय व्यंजन खासतौर पर प्रसिद्ध हैं।

माउंट हार्डिंग की शांति और प्राकृतिक सुंदरता इसे एडवेंचर और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक आदर्श स्थल बनाती है।

और पढ़े : अंडमान निकोबार द्वीप समूह पर्यटन

8. लॉन्ग आईलैंड – शांत समुद्र तट और स्थानीय संस्कृति।

लॉन्ग आइलैंड, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का एक शांत और सुंदर द्वीप है, जो पोर्ट ब्लेयर से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित है। इसका ऐतिहासिक महत्व सीमित है, लेकिन यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सजीव समुद्र तटों के लिए प्रसिद्ध है।

यहाँ के प्रमुख पर्यटक स्थलों में वोक्सविल बीच, लांग बीच, और कोरालिन बीच शामिल हैं, जो अपनी सफेद रेत, नीले पानी और शांति के लिए मशहूर हैं।

यह द्वीप विशेष रूप से उन पर्यटकों के लिए आदर्श है जो प्रकृति से जुड़ना चाहते हैं और यहाँ के सुंदर जलजीवों और कोरल रीफ्स को देखने के लिए स्नॉर्कलिंग और स्कूबा डाइविंग जैसी गतिविधियाँ कर सकते हैं।

  • लॉन्ग आईलैंड अंडमान के उन कम एक्सप्लोर हुए द्वीपों में से एक है, जो अब पर्यटकों के लिए खुला है और विदेशी पर्यटक भी यहां जा सकते हैं। यह द्वीप कम भीड़-भाड़ वाला और प्राकृतिक तौर पर शांतिपूर्ण है।
  • यह द्वीप स्थानीय आदिवासी संस्कृति का केंद्र भी माना जाता है, जहां स्थानीय लोग अपनी पारंपरिक जीवनशैली और सांस्कृतिक परंपराओं को आज भी जीवित रखे हुए हैं।
  • लॉन्ग आईलैंड सूरज के शानदार दिखावे, साफ समुद्र तट और प्राकृतिक हरियाली के लिए प्रसिद्ध है, इसलिए यह ट्रेकिंग, समुद्री तट भ्रमण और प्रकृति प्रेमियों के लिए उपयुक्त स्थल है।
  • यहां की समुद्री जिंदगी भी समृद्ध है, जो स्नॉर्कलिंग और अन्य जल क्रीड़ाओं के लिए अच्छी है।
  • लॉन्ग आईलैंड को अब अंडमान निकोबार के उन चुनिंदा द्वीपों में गिना जाता है जो पर्यटकों के लिए सुरक्षित और खुले हैं, जबकि कई अन्य द्वीप अब भी पूरी तरह संरक्षित या प्रतिबंधित क्षेत्र हैं।

खाने के लिए यहाँ पर ताजे सीफूड जैसे मछली करी, प्रॉन्स, और स्थानीय साउथ इंडियन डिशेज उपलब्ध हैं।

लॉन्ग आइलैंड का मुख्य आकर्षण इसका शांतिपूर्ण वातावरण है, जो हनीमून कपल्स और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक आदर्श गंतव्य बनाता है।

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9. इंदिरा पॉइंट – भारत का सबसे दक्षिणी बिंदु।

इंदिरा पॉइंट, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का सबसे दक्षिणी बिंदु है, जो निकोबार द्वीप पर स्थित है। इसका ऐतिहासिक महत्व इस कारण से है कि यह भारत के भूगोल का दक्षिणतम स्थान है और यहाँ से श्रीलंका की समुद्र रेखा भी दिखाई देती है।

इंदिरा पॉइंट तक पहुँचने के लिए पर्यटकों को खासकर नाव यात्रा करनी होती है, और यह क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। यह स्थल पर्यटकों के लिए एक शांतिपूर्ण अनुभव प्रदान करता है, जहाँ वे ताजे समुद्री दृश्य और ठंडी हवा का आनंद ले सकते हैं।

  • यह ग्रेट निकोबार तहसील की लक्ष्मीनगर पंचायत में स्थित है।
  • इसका आक्षांश और देशांतर निर्देशांक 6°45’38” N और 93°48’85” E हैं।
  • यह श्रीलंका के तलाईमन्नार द्वीप से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर है।
  • दिसंबर 2004 मे सुनामी  ने इस क्षेत्र के भूगोल और जनसांख्यिकी को बदल दिया।
  • 2004 की सुनामी में गाँव ने अपने कई निवासियों को खो दिया और अब इसकी आबादी 27 है, जिनमें से 27 पुरुष हैंऔर 2011 की जनसंख्या जनगणना के अनुसार 0 महिलाएँ हैं।
  • यहां के मुख्य पर्यटक आकर्षण लाइटहाउस और गलाथिया नेशनल पार्क हैं।
  • ग्रेट निकोबार द्वीप, जो अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का हिस्सा है, में लेदरबैक, ग्रीन और हॉकबिल कछुओं की महत्वपूर्ण प्रजातियाँ पायी जाती हैं।
  • हॉक्सबिल कछुए भारत के लक्षद्वीप और अंडमान द्वीपों के साथ-साथ निकोबार द्वीप समूह के कुछ समुद्र तटों जैसे ग्रेट निकोबार के दक्षिणी सिरे पर इंदिरा पॉइंट पर पाए जाते हैं।
  • इंदिरा प्वाइंट का समुद्र तट आधा किलोमीटर से भी कम लंबा है, और अपतटीय दृष्टिकोण बहुत चट्टानी है।
  • पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जीरो प्वाइंट कैंपबेल बे से इंदिरा प्वाइंट तक 56 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण की योजना बनाई गई है।

यहाँ के प्रमुख पर्यटक आकर्षण में चिड़ीया टापू, प्यारी और ताजे पानी के झरने, और समुद्री जीवन शामिल हैं।

भोजन की बात करें तो यहाँ पर सीफूड बहुत प्रसिद्ध है, जिसमें ताजे मछली, प्रॉन्स करी, नारियल राइस और अन्य स्थानीय व्यंजन शामिल हैं।

इंदिरा पॉइंट पर्यटकों को प्रकृति के करीब ले जाता है, और यहाँ शांति एवं दृश्यावली का अनुभव करने के लिए पर्यटक विशेष रूप से आते हैं।

और पढ़े : इंदिरा पॉइंट के बारे में जानकारी

10. निकोबार द्वीप समूह – आदिवासी संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य।

निकोबार द्वीप समूह अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का हिस्सा है, जिसका इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा हुआ है। 1756 में डेनस ने इन द्वीपों पर कब्जा किया था, लेकिन 1869 में अंग्रेजों ने औपचारिक रूप से इसे अपने अधीन कर लिया।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सेना ने 1942 से 1945 तक इस क्षेत्र पर कब्जा किया था। 15 अगस्त 1947 को यह भारत का अभिन्न हिस्सा बन गया। निकोबार द्वीप समूह, अंडमान और निकोबार केंद्रशासित प्रदेश का दक्षिणी भाग है, जो अपनी रहस्यमय सुंदरता, जैव विविधता और आदिवासी संस्कृति के लिए जाना जाता है।

इस द्वीप समूह का ऐतिहासिक महत्व समुद्री व्यापार मार्गों और ब्रिटिश शासन के दौरान सैन्य रणनीति से जुड़ा रहा है। यहाँ की प्रमुख जनजातियाँ जैसे शोम्पेन और निकोबारी आज भी अपनी पारंपरिक जीवनशैली को संजोए हुए हैं, और इन क्षेत्रों में बाहरी लोगों की आवाजाही सीमित व नियंत्रित है।

प्रमुख पर्यटक स्थलों में इंदिरा पॉइंट (भारत का सबसे दक्षिणी बिंदु), ग्रेट निकोबार बायोस्फीयर रिजर्व, और तटवर्ती सुंदर समुद्र तट शामिल हैं। यहाँ के जंगल, समुद्र तट और दुर्लभ जीव-जंतु रोमांच और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।

पर्यटक यहाँ ट्रेकिंग, बर्ड वॉचिंग, नेचर वॉक और समुद्र तटों पर आरामदायक समय बिता सकते हैं।

भोजन की बात करें तो निकोबार में स्थानीय समुद्री भोजन विशेष रूप से लोकप्रिय है जिसमें नारियल आधारित मछली करी, उबले चावल, और ताजे समुद्री झींगे शामिल हैं।

निकोबार द्वीप समूह आज भी प्रकृति और संस्कृति का एक प्राचीन संगम है, जो शांति और साहसिक यात्रा की चाह रखने वालों के लिए आदर्श स्थल है।

  • निकोबार द्वीप समूह में मुख्य रूप से निकोबारी जनजाति निवास करती है, जो यहां की सबसे बड़ी आदिवासी समुदाय है। उनका पारंपरिक जीवन “ट्यूहेट” या संयुक्त परिवार व्यवस्था पर आधारित है, जिसमें कई पीढ़ियाँ एक साथ रहती हैं।
  • निकोबारी समाज की कला एवं संस्कृति उनके पर्यावरण के अनुरूप है। यहाँ बने समुद्रीयान एक ही लकड़ी के टुकड़े से बनाए जाते हैं और बहुत हल्के होते हैं, जिससे वे आसानी से पानी में चल सकते हैं।
  • संगीत और नृत्य निकोबारी संस्कृति के अभिन्न अंग हैं। यहाँ के हर उत्सव में पारंपरिक गायन और लोक-नृत्य का आयोजन होता है। खास बात यह है कि कार निकोबार में पुरुष और महिलाएं एक साथ नृत्य नहीं करते, जबकि अन्य द्वीपों में मिलकर नृत्य करते हैं।
  • त्योहारों के दौरान लोककथाएँ सुनाई जाती हैं और आधुनिक दौर में यहाँ के लोग, गिटार आदि वाद्ययंत्र पर अपना संगीत भी रचते-बजाते हैं।
  • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह मिलाकर कुल 572 द्वीपों का समूह है, जिसमें से केवल 38 द्वीपों पर लोग रहते हैं। अधिकांश हिस्सा घने जंगलों से ढका है, जो दुर्लभ वनस्पति और जीव-जंतुओं का घर है।
  • निकोबार द्वीपसमूह का सबसे आकर्षक पक्ष प्राकृतिक समुद्र तट, साफ-स्वच्छ जल, मूंगा भित्ति (कोरल रीफ), और विविध जैव-विविधता है।
  • यहाँ का तापमान सालभर लगभग 22°C से 30°C के बीच रहता है, जो इसे पर्यटन के लिए आदर्श बनाता है।
  • अधिकतर निकोबारी लोग नारियल की खेती, मत्स्य पालन और कंद-मूल फसलों की खेती पर निर्भर रहते हैं। खेती बरसात पर निर्भर है, और नारियल यहाँ की प्रमुख फसल है।
  • पारंपरिक रीति-रिवाज, जैसे घरों के पास बस्ती की सामूहिक खेती (गृह वाटिका), हाल के वर्षों में बढ़ी है और इससे किसानों की आजीविका में सुधार आया है।
  • निकोबार नाम मलय भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ है ‘नग्न लोगों की भूमि’।
  • यहाँ के लोग अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं के प्रति बेहद सजग हैं। बाहरी समाज का प्रभाव कम है, जिससे इन द्वीपों की सांस्कृतिक विरासत आज भी काफी हद तक सुरक्षित है।
  • निकोबारी लोगों में आपसी सौहार्द एवं सामंजस्य बहुत गहरा है। धार्मिक विविधता के बावजूद त्योहार मिलजुलकर मनाए जाते हैं और अंतर्जातीय विवाह भी आम हैं।

और पढ़े : निकोबार द्वीप समूह ke बारे में

11. माहात्मा गांधी समुद्री राष्ट्रीय उद्यान – समुद्री जीवन का संरक्षण क्षेत्र।

महात्मा गांधी समुद्री राष्ट्रीय उद्यान, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के वांडूर क्षेत्र में स्थित एक प्रमुख पर्यटक स्थल है, जो पोर्ट ब्लेयर से लगभग 29 किलोमीटर की दूरी पर है। इस राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1983 में की गई थी, और इसका उद्देश्य समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र, कोरल रीफ्स, और दुर्लभ समुद्री जीवों की रक्षा करना है।

यह उद्यान 15 से अधिक छोटे-छोटे द्वीपों को समेटे हुए है, जिनमें जॉली बॉय, रेड स्किन, और ट्विन आइलैंड प्रमुख हैं। यहाँ पर्यटक ग्लास-बॉटम बोट राइड, स्कूबा डाइविंग, और स्नॉर्कलिंग जैसी गतिविधियों के ज़रिए रंग-बिरंगी मछलियाँ, कोरल और समुद्री जीवन का नज़दीक से आनंद ले सकते हैं।

इसका ऐतिहासिक महत्व संरक्षण और पारिस्थितिकीय संतुलन की दिशा में भारत के प्रयासों से जुड़ा है।

यहाँ के निकटवर्ती क्षेत्रों में मिलने वाला भोजन मुख्य रूप से ताजे सीफूड और दक्षिण भारतीय व्यंजन होते हैं, जिनमें मछली करी, नारियल आधारित डिशेज और चावल प्रमुख हैं।

यह उद्यान न केवल प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है, बल्कि यह समुद्री जैवविविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाने और रोमांचकारी अनुभव पाने के लिए एक आदर्श स्थल भी है।

  • यह राष्ट्रीय उद्यान 24 मई 1983 को समुद्री जीवन, खासकर मूंगे (Corals) और समुद्री कछुओं की रक्षा के लिए स्थापित किया गया था।
  • यह पोर्ट ब्लेयर से लगभग 16-29 किमी दक्षिण-पश्चिम में स्थित है और वंडूर गाँव के पास है।
  • पार्क का विस्तार 281.5 वर्ग किमी में है।
  • इसमें कुल 15-17 द्वीप और खुली समुद्री खाड़ियाँ हैं। मुख्य द्वीप समूह हैं – भूलभुलैया द्वीप (Labyrinth Islands) और जुड़वां द्वीप (Twin Islands)।
  • यहाँ के शुद्ध नीले पानी में खूबसूरत मूंगा चट्टानें, रंग-बिरंगी मछलियाँ, समुद्री घास, और घने मैंग्रोव जंगल हैं।
  • यह समुद्री कछुओं के प्रजनन स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। इसके अलावा कई दुर्लभ मछलियाँ, स्टारफिश, शंख-सीपी, और अन्य जलीय जीव पाए जाते हैं।
  • यहाँ पक्षियों की 271 से अधिक प्रजातियाँ भी पाई जाती हैं, जो इसे पक्षी प्रेमियों के लिए आकर्षक बनाती हैं।
  • यह क्षेत्र मुख्य वन्यजीव वार्डन, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के संरक्षण में है।
  • ये द्वीप खुद निर्जन हैं, पर आस-पास की बस्तियों में स्थानीय लोग रहते हैं।

12. कैलास द्वीप – स्नॉर्कलिंग के लिए उपयुक्त।

कैलास द्वीप, जो अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थित है, एक प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर पर्यटन स्थल है। इसका इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा हुआ है, जहां यह क्षेत्र समुद्री मार्गों और व्यापार के लिए महत्वपूर्ण रहा है।

अंडमान और निकोबार द्वीपों की विविधता में कैलास द्वीप अपनी अनोखी जैव विविधता और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है।

यहां का भोजन मुख्यतः समुद्री भोजन और स्थानीय भारतीय व्यंजनों पर आधारित होता है, जिसमें ताजा मछली, नारियल, और मसालों का उपयोग प्रमुख है।

पर्यटक यहां समुद्र तटों का आनंद ले सकते हैं, स्कूबा डाइविंग, स्नॉर्कलिंग, और वन्यजीव अभयारण्यों की सैर कर सकते हैं।

कैलास द्वीप के आसपास के क्षेत्र में राधानगर बीच, मैकलॉय घाट, और जॉर्ज टाउन जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल हैं, जो प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध हैं।

यहां आने वाले पर्यटकों के लिए जरूरी चीजों में समुद्री गतिविधियों के लिए उपकरण, आरामदायक कपड़े, और स्थानीय संस्कृति का सम्मान करना शामिल है।

अंडमान और निकोबार के कैलास द्वीप की यात्रा एक अद्भुत अनुभव प्रदान करती है, जो प्रकृति प्रेमियों और साहसिक यात्रियों दोनों के लिए उपयुक्त है।

  • कैलास द्वीप अंडमान द्वीपसमूह में स्थित एक छोटा और शांत द्वीप है, जो मुख्य रूप से अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और साफ पानी के लिए जाना जाता है।
  • यह द्वीप स्नॉर्कलिंग के लिए बहुत उपयुक्त माना जाता है क्योंकि यहां का समुद्र तट और जल जीवन अत्यंत समृद्ध है, और पानी बेहद पारदर्शी होता है, जिससे समुद्री जीवों और रंगीन मूंगे (corals) को नजदीक से देखा जा सकता है।
  • पर्यटक यहां स्नॉर्कलिंग के दौरान विभिन्न प्रकार की रंगीन मछलियों, समुद्री कछुओं, शंखों, सीपियों और अन्य जलीय जीवों को देख सकते हैं।
  • द्वीप का वातावरण बहुत शांत, हरा-भरा और भीड़-भाड़ से दूर रहता है, इसलिए यह प्रकृति प्रेमियों, रोमांचकारियों और फोटोग्राफरों के लिए स्वर्ग समान है।
  • कैलास द्वीप पर पर्यटन नियंत्रित और सीमित होता है, जिससे इसकी जैव विविधता और समुद्री पारिस्थितिकी संरक्षित रहती है।

13. शहर पोर्ट ब्लेयर – राजधानी, जहां बाजार, संग्रहालय और सांस्कृतिक स्थल हैं।

पोर्ट ब्लेयर, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह की राजधानी और मुख्य प्रवेश द्वार है, जो इतिहास, संस्कृति, समुद्री सुंदरता और आधुनिक सुविधाओं का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। इसका ऐतिहासिक महत्व विशेष रूप से सेल्युलर जेल (काला पानी) से जुड़ा है, जहाँ स्वतंत्रता सेनानियों को ब्रिटिश शासन के दौरान कैद किया गया था।

यह जेल आज एक राष्ट्रीय स्मारक है और यहाँ लाइट एंड साउंड शो पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। पोर्ट ब्लेयर में देखने योग्य अन्य प्रमुख स्थल हैं – राजीव गांधी वाटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, सामुद्रिक संग्रहालय, चिड़िया टापू, कोर्बिन्स कोव बीच, और पास के द्वीप जैसे रॉस आइलैंडनॉर्थ बे आइलैंड

यहाँ पर्यटक स्कूबा डाइविंग, स्नॉर्कलिंग, सी वॉक, जेट स्कीइंग जैसी रोमांचक जल क्रीड़ा गतिविधियों का आनंद भी ले सकते हैं।

भोजन की बात करें तो पोर्ट ब्लेयर में विभिन्न प्रकार के रेस्तरां और फूड स्टॉल्स मिलते हैं, जहाँ ताजे सीफूड, साउथ इंडियन, नॉर्थ इंडियन, और कॉन्टिनेंटल डिशेज का स्वाद लिया जा सकता है।

पोर्ट ब्लेयर न सिर्फ अंडमान की संस्कृति और इतिहास को दर्शाता है, बल्कि यह आराम, रोमांच और ज्ञानवर्धक यात्रा का परिपूर्ण केंद्र भी है।

  •  पोर्ट ब्लेयर अंडमान व निकोबार द्वीप समूह की राजधानी है, जो दक्षिण अंडमान द्वीप पर स्थित है।
  • यहाँ का सबसे प्रसिद्ध बाजार “एबरडीन बाजार” (Aberdeen Bazaar) है, जहाँ लकड़ी, समुद्री शंख, सीप, बांस की चटाई, मोती, हस्तशिल्प, कपड़े और लोकल स्मृति-चिन्ह (स्मारिका) आदि की खरीदारी की जा सकती है। इसके अलावा, गोलघर, जंगली घाट, प्रेम नगर और दलेनीपुर जैसे अन्य बाजार भी प्रसिद्ध हैं |
  • सेलुलर जेल (काला पानी) – भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का ऐतिहासिक स्थल, अब राष्ट्रीय स्मारक में बदल गया है |
  • समुंद्रिका नवल मरीन संग्रहालय – समुद्री जीवन, पारिस्थितिकी और अंडमान की सांस्कृतिक विरासत का सुंदर चित्रण |
  • मानव-विज्ञान (एंथ्रोपोलॉजिकल) म्यूजियम: अंडमान की जनजातियों और उनकी संस्कृति को दर्शाता है |
  • फिशरीज म्यूजियम: समुद्री जीवों और मछलियों की विभिन्न प्रजातियाँ यहाँ देखी जा सकती हैं |
  • फॉरेस्ट म्यूजियम: अंडमान के जंगलों, लकड़ियों और वन संपदा के बारे में विस्तृत जानकारी |
  • यहाँ भारतीय सेना और नौसेना की परियोजनाएँ, पुरानी बंदरगाहें, चर्च, मंदिर आदि भी देखे जा सकते हैं।
  • द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बने जापानी बंकर एवं रॉस द्वीप का ऐतिहासिक महत्व है |
  • पोर्ट ब्लेयर में विभिन्न आदिवासी जनजातियों, उनकी कला, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक गतिविधियों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है |
  • यह शहर अन्य द्वीपों, समुद्र तटों, चिड़िया टापू आदि के लिए भी मुख्य केंद्र है.

और पढ़े : शहर पोर्ट ब्लेयर के बारे में

14. कच्छल द्वीप – रबर बागान और स्थानीय जीवन।

कच्छल द्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के निकोबार क्षेत्र का एक प्रमुख द्वीप है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांति और सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है। यह द्वीप निकोबारी जनजाति की पारंपरिक संस्कृति का प्रमुख केंद्र है और इसका ऐतिहासिक महत्व स्थानीय जनजातीय जीवनशैली व पारंपरिक रीति-रिवाज़ों से जुड़ा है।

कच्छल भारत के उन कुछ स्थानों में से एक है जहाँ अभी भी जनजातीय जीवन अपेक्षाकृत कम बदला है, इसलिए यह स्थान सांस्कृतिक पर्यटन के लिए आदर्श माना जाता है।

यहाँ के प्रमुख पर्यटक स्थलों में इम्युएल हिल, शांत समुद्र तट और जंगलों की प्राकृतिक सैर शामिल हैं। पर्यटक यहाँ नेचर वॉक, फोटोग्राफी, और स्थानीय जनजातीय जीवन को देखने का अनुभव प्राप्त कर सकते हैं।

भोजन की बात करें तो कच्छल द्वीप में मुख्यतः स्थानीय निकोबारी व्यंजन और ताजे सीफूड जैसे मछली, झींगे, और नारियल-आधारित करी खासी लोकप्रिय है।

इस द्वीप की खासियत इसकी सादगी, सांस्कृतिक विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य में है, जो इसे भीड़-भाड़ से दूर एक शांत पर्यटन स्थल बनाता है।

  • कच्छल द्वीप निकोबार समूह में रबर उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ 1970 के दशक में रबर बागानों की स्थापना के लिए तमिल बागान कर्मियों को विशेष रूप से लाया गया था, जिससे यह द्वीप अब भी रबर उत्पादन में अग्रणी है।
  • कच्छल द्वीप पर पारंपरिक निकोबारी जनजाति के लोग रहते हैं, जिनका जीवन सरल, सामुदायिक और प्रकृति के करीब है। इनके सामाजिक ताने-बाने में “टुहेत” (joint family system) बहुत महत्वपूर्ण है।
  • यहाँ के गाँव छोटे, हरे-भरे और साफ-सुथरे होते हैं। निर्माण सामग्रियों में ज़्यादातर लकड़ियाँ और प्राकृतिक संसाधन प्रयुक्त होते हैं।
  • रबर के अलावा: नारियल, सुपारी और केला भी द्वीप के मुख्य कृषि उत्पाद हैं।
  • यहां के लोग पारंपरिक वस्त्र पहनते हैं, स्वयं के बनाए गए घरों में रहते हैं और विशेष त्यौहार जैसे पांगल (नव वर्ष), पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य का आयोजन करते हैं।
  • कच्छल समेत अधिकांश निकोबार द्वीप आम पर्यटकों के लिए प्रतिबंधित हैं ताकि स्थानीय संस्कृति और प्रकृति की रक्षा की जा सके।
  • यह द्वीप बंगाल की खाड़ी में है और यहाँ सुंदर तट, साफ समुद्र और जैव विविधता देखने योग्य है।

15. चाथम द्वीप – ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थल

चाथम द्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का एक ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है, जो पोर्ट ब्लेयर के बहुत निकट स्थित है और एक पुल द्वारा मुख्य शहर से जुड़ा हुआ है।

इस द्वीप का इतिहास ब्रिटिश काल से जुड़ा हुआ है, जहाँ पर चाथम सॉ मिल की स्थापना 1883 में की गई थी – यह एशिया की सबसे पुरानी और अब भी क्रियाशील लकड़ी की आरा मिलों में से एक है।

द्वीप पर स्थित यह मिल आज एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण है, जहाँ पर्यटक लकड़ी की प्रोसेसिंग प्रक्रिया, ऐतिहासिक मशीनरी और लकड़ी से बनी कलात्मक वस्तुएँ देख सकते हैं। यहाँ एक छोटा सा वुड म्यूज़ियम भी है जो द्वीप की औद्योगिक विरासत को दर्शाता है।

चाथम द्वीप से जुड़ी एक दुखद ऐतिहासिक घटना यह भी है कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सेना ने इस स्थान पर बमबारी की थी।

खाने-पीने की बात करें तो यहाँ पास में ही पोर्ट ब्लेयर के रेस्तरां और फूड स्टॉल्स में स्वादिष्ट सीफूड, साउथ इंडियन, और कॉन्टिनेंटल भोजन उपलब्ध है।

चाथम द्वीप इतिहास, कारीगरी और प्राकृतिक सुंदरता का संगम है, जो विशेष रूप से उन पर्यटकों के लिए आकर्षक है जो अंडमान के औद्योगिक और सांस्कृतिक पहलुओं को समझना चाहते हैं।

  • यह द्वीप अंडमान और निकोबार समूह के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों में से एक है।
  • चाथम द्वीप पर 12 एकड़ भूमि पर ब्रिटिशों ने अंडमान में पहली कालोनी स्थापित की थी। यहाँ 1858 में पीनल (कैदियों) के पुनर्वसन के लिए बस्ती बनाई गई थी, जो ब्रिटिश शासन की शुरुआत थी।
  • द्वीप पर ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में जंगलों को साफ करके आवास बनाए गए और कृषि बागान लगाए गए थे।
  • द्वीप का ऐतिहासिक महत्व इस तथ्य से भी बढ़ता है कि अंग्रेजों ने यहां से अंडमान के बड़े द्वीपों में अपने नियंत्रण का विस्तार शुरू किया।
  • द्वीप में एक सॉ-मिल (लकड़ी काटने की मिल) है, जो एशिया की सबसे बड़ी और प्राचीनतम सॉ-मिलों में से एक है और यह समुद्र के ऊपर एक पुल से मुख्य भूमि से जुड़ा हुआ है।
  • द्वीप की प्राकृतिक सुंदरता में घने जंगल, साफ समुद्र तट और जैव विविधता शामिल हैं, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।
  • द्वीप पर ऐतिहासिक स्थल और प्राकृतिक स्थल मिलकर इसकी समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं, जो ब्रिटिश औपनिवेशिक इतिहास और स्थानीय पारिस्थितिकी के बीच पुल का काम करते हैं।

अंडमान और निकोबार: परिवहन और रेस्टोरेंट बजट तालिका

खर्च का प्रकारविवरणअनुमानित लागत (प्रति व्यक्ति)टिप्पणियाँ
परिवहन (ट्रांसपोर्टेशन)
फ्लाइट (दिल्ली/कोलकाता से पोर्ट ब्लेयर)राउंड ट्रिप (Economy क्लास)₹10,000 – ₹18,000कोलकाता से सस्ती फ्लाइट मिल सकती है
लोकल फेरी और बोट राइड्सहैवलॉक, नील आदि द्वीपों तक पहुँचने के लिए₹2,000 – ₹4,000सरकारी/प्राइवेट फेरी विकल्प मौजूद
टैक्सी / स्कूटी किरायालोकल ट्रैवल (1–2 दिन)₹500 – ₹1,000/दिनस्कूटी विकल्प बजट में रहता है

खाना (रेस्टोरेंट बजट)

| स्ट्रीट फूड और लोकल ढाबा | हल्का-फुल्का खाना | ₹150 – ₹300/दिन | लोकल फूड सस्ता और स्वादिष्ट होता है |
| मिड-रेंज रेस्टोरेंट | दो समय का खाना | ₹500 – ₹800/दिन | इंडियन, सी-फूड, कॉन्टिनेंटल उपलब्ध |
| हाई-एंड रेस्टोरेंट | स्पेशल डिनर (सी-फूड/लाइव ग्रिल) | ₹1,000 – ₹2,000 | रिज़ॉर्ट्स और बीचसाइड डाइनिंग में |

कुल अनुमानित न्यूनतम बजट (4–6 दिन): ₹18,000 – ₹30,000 प्रति व्यक्ति

निष्कर्ष

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह भारत का एक छुपा हुआ स्वर्ग है, जहाँ पर आप इतिहास, रोमांच, प्रकृति और समुद्र का बेमिसाल संगम एक ही जगह पर पा सकते हैं। यह स्थल हनीमून कपल्स, परिवार, और एडवेंचर लवर्स — सभी के लिए आदर्श हैं।

FAQ


अंडमान के सबसे खूबसूरत समुद्र तट कौन से हैं?

अंडमान के समुद्र तट अपनी सफेद रेत, नीले पानी और प्राकृतिक शांति के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। यहाँ कुछ सबसे खूबसूरत समुद्र तटों का चयन किया गया है, जो अपनी अनूठी सुंदरता और अनुभव के लिए हर पर्यटक को आकर्षित करते हैं।
राधानगर बीच (Radhanagar Beach)
राधानगर बीच स्वराज द्वीप (पूर्व में हैवलॉक) पर स्थित है और इसे एशिया के सबसे सुंदर समुद्र तटों में गिना जाता है। इसकी सफेद मुलायम रेत, फ़िरोज़ी पानी और हरियाली इसे बेहद आकर्षक बनाते हैं। 
Bharatpur Beach, Neil Island
Elephant Beach
Corbyn’s Cove Beach
वंदूर समुद्र तट (Wandoor Beach)
काला पत्थर बीच (Kala Pathar Beach, Havelock Island)
सीतापुर बीच (Sitapur Beach, Neil Island)
रॉस एंड स्मिथ आइलैंड्स (Ross & Smith Islands, Diglipur)
रामनगर बीच (Ramnagar Beach, Diglipur)

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