Bengaluru travel places: बैंगलोर, जिसे बेंगलुरु भी कहा जाता है | बेंगलुरु भारत के कर्नाटक राज्य की राजधानी है | यह अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और ऐतिहासिक स्थलों के लिए जाना जाता है | यहाँ घूमने के लिए हरे-भरे पार्क और खाने के लिए स्वादिष्ट व्यंजन आसानी से मिल जाते है। बेंगलुरु एक आधुनिक आईटी कम्पनीज वाला राजधानी है | यह ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक दर्शनीय स्थलों से भरपूर एक खूबसूरत शहर है।
बैंगलोर भारत का तीसरा सबसे बड़ा नगर है | यहाँ की जनसंख्या 84 लाख है | दक्षिण भारत में दक्कन के पठार पर 900 मीटर की औसत ऊँचाई पर स्थित है | यहाँ का मौसम सुहाना होता है | राज्य और केंद्रीय सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद 1 नवंबर 2014 को इसका नाम बैंगलोर से बदलकर बेंगलुरु रखा गया | लोकसंस्कृति में इसका उपनाम “भारत का उद्यान नगर” भी है |
बेंगलुरु को भारत की सिलिकॉन वैली या भारत की आईटी राजधानी के रूप में जाना जाता है |
अगर आप “Bengaluru Travel Places” की जानकारी चाहते हैं, तो यहाँ कुछ प्रमुख पर्यटन स्थलों की सूची दी गई है, जिनका इतिहास, वहां के प्रसिद्ध व्यंजन, गतिविधियाँ, टिकट शुल्क, समय और पहुँचने के साधन सहित विवरण नीचे दिया गया है:

बेंगलुरु के प्रसिद्ध व्यंजन:
- दोसाः मशहूर विद्यर्थी भवन या CTR से।
2. इडली-सम्भार: मTR, Brahmin’s Café।
3. मैसूर पाक: लोकप्रिय मिठाई।
4. बी.बी.क्यू और इंटरनेशनल फूड: इंदिरानगर और कोरमंगला में।
बेंगलुरु में करने के लिए कई चीजें हैं
- बन्नेरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान में वन्य जीवन का अवलोकन करें।
- नंदी हिल्स में ट्रेकिंग करें और सूर्यास्त देखें।
- स्नो सिटी जैसे मनोरंजन पार्क में बच्चों के साथ मज़ा करें।
- यूबी सिटी मॉल और कमर्शियल स्ट्रीट पर शॉपिंग करें।
बेंगलुरु पहुँचने का यात्रा बजट टेबल (एक व्यक्ति, एक तरफा यात्रा)
| यात्रा का माध्यम | बजट (INR ₹) | विवरण |
|---|---|---|
| ट्रेन (स्लीपर क्लास) | ₹300 – ₹600 | सामान्य स्लीपर क्लास; किफायती और सुविधाजनक। |
| ट्रेन (AC 3-टियर) | ₹800 – ₹1500 | आरामदायक यात्रा, लंबी दूरी (दिल्ली/मुंबई/कोलकाता आदि) के लिए उपयुक्त। |
| लॉन्ग डिस्टेंस बस | ₹500 – ₹1200 | प्राइवेट या सरकारी वोल्वो/AC बस (चेन्नई, हैदराबाद, पुणे आदि से)। |
| फ्लाइट (इकोनॉमी) | ₹2000 – ₹5000 | मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, पुणे, जयपुर आदि से डायरेक्ट फ्लाइट उपलब्ध। |
| कार/बाइक यात्रा (ईंधन) | ₹1000 – ₹3000 | पेट्रोल/डीजल का खर्च, दूरी के अनुसार; समूह यात्रा के लिए बेहतर। |
बेंगलुरु यात्रा: ट्रांसपोर्ट + रेस्टोरेंट बजट टेबल (प्रति व्यक्ति, प्रतिदिन)
| खर्च का प्रकार | अनुमानित बजट (INR ₹) | विवरण |
|---|---|---|
| मेट्रो / लोकल बस | ₹50 – ₹150 | बेंगलुरु मेट्रो, BMTC AC/Non-AC बसें – किफायती और सुविधाजनक। |
| टैक्सी / ऑटो | ₹200 – ₹500 | ओला/उबर कैब या ऑटो — स्थल के अनुसार किराया बदलता है। |
| बाइक रेंट (ऑप्शनल) | ₹400 – ₹700 | 1 दिन के लिए एक्टिवा/बाइक, पेट्रोल अतिरिक्त। |
| नाश्ता | ₹50 – ₹100 | इडली, डोसा, उपमा आदि लोकल ब्रेकफास्ट। |
| दोपहर का भोजन | ₹150 – ₹300 | साधारण रेस्टोरेंट या फ़ूड कोर्ट में साउथ इंडियन थाली या स्नैक्स। |
| रात का खाना | ₹150 – ₹300 | मिड-रेंज रेस्टोरेंट, स्ट्रीट फ़ूड या कैफे में भोजन। |
| चाय/कॉफी + स्नैक्स | ₹50 – ₹100 | बेंगलुरु की प्रसिद्ध फ़िल्टर कॉफी, भेल, फ्रैंकी आदि। |
कुल बजट सारांश (1 दिन के लिए):
| श्रेणी | न्यूनतम ₹ | अधिकतम ₹ |
|---|---|---|
| ट्रांसपोर्टेशन | ₹50 | ₹700 |
| भोजन / रेस्टोरेंट | ₹250 | ₹800 |
| कुल खर्च (1 दिन) | ₹300 | ₹1500 |
1. टिपू सुलतान का समर पैलेस (Tipu Sultan’s Summer Palace) (Bengaluru travel places)

टिपू सुलतान का समर पैलेस (Tipu Sultan’s Summer Palace), बेंगलुरु का एक ऐतिहासिक और दर्शनीय स्थल है जो शहर की सांस्कृतिक धरोहर के बारे में बताता है | यह महल भारत के प्रसिद्ध शासक टिपू सुलतान का ग्रीष्मकालीन निवास था | यह इन्डो-इस्लामिक वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण है।
यह महल 1791 में टिपू सुलतान द्वारा बनवाया गया था | जिसे उनके पिता हैदर अली ने प्रारंभ किया था। महल का निर्माण पूरी तरह से टीक की लकड़ी से किया गया है | यह महल आकर्षक इतिहास है | इसमें खूबसूरत नक़्क़ाशी और चित्रकारी देखी जा सकती है। यह महल अंग्रेजों और मैसूर की सेना के बीच संघर्ष का गवाह भी रहा है।
इस भव्य महल को ‘रश-ए-जन्नत’ अर्थात ‘खुशियों का घर’ भी कहा जाता है | इस लकड़ी के महल में, अतीत की एक अनोखी झलक मिलती है, जो इंडो-इस्लामिक वास्तुकला शैली की शिल्पकला और कलाकारी की अद्भुत मिसाल पेश करता है।
- टीपू सुल्तान (1750-1799) दक्षिण भारत में मैसूर साम्राज्य पे राज्य किये और वहा के शासक भी थे |
- उनके पिता सुल्तान हैदर अली और उनकी माता फातिमा फख-उन-निसार थी और उनके सबसे बड़े बेटे थे |
- दिसंबर 1782 में टीपू सुल्तान ने अपने पिता हैदर अली का दर्जा लिया और 1784 में मैसूर के सुल्तान के रूप में जाने गए और तभी उन्होंने अंग्रेजों के साथ शांति संधि पर हस्ताक्षर किये।
- टीपू ने अपने सैनिको को आधुनिकता से परिचय कराया | टीपू सुल्तान अपने सैन्य रणनीति और मैसूर साम्राज्य के प्रशासन के रूप में जाने जाते थे |
- जब टीपू सुल्तान ने एंग्लो-मैसूर युद्ध लड़ रहे थे तब उन्हें शुरुआत में सफलता मिली पर वे अंततः अंग्रेजो से हार गए |
- उन्हें कन्नड़, फ़ारसी, अरबी और फ्रेंच आदि भाषाय बोलने आती थी |
- टीपू सुल्तान मुस्लिम होते हुए हिन्दू गरिमा को बनाये रखे वे हिन्दुओ को सम्मान देते थे | वे एक कुशल सेनापति और प्रशासक थे |
- टीपू सुल्तान को ‘मैसूर का बाघ’ भी कहा जाता है।
- उन्होंने बहुत छोटी उम्र 1766 में अपने पिता के साथ मालाबार के युद्ध में शामिल हुए |
- उन्होंने अपनी शिक्षा में निशानेबाजी, घुड़सवारी और तलवारबाजी जैसे विभिन्न विषयों की शिक्षा सैन्य अधिकारी गाजी खान से ली |
- उनकी शिक्षा में कुरान, इस्लामी न्यायशास्त्र, भाषाओं , दर्शन और विज्ञान शामिल हैं |
- 15 वर्ष की उम्र मात्र कुछ हजार सैनिकों के साथ टीपू ने मालाबार पर विजय प्राप्त कर ली |
- बाद में, टीपू के सफल आक्रमण के कारण मालाबार के राजा ने हैदर अली के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
- टीपू की सेना काफी प्रशिक्षित थी जिसमे पैदल सेना, घुड़सवार सेना और तोपखाने शामिल थी |
- उन्होंने दुनिया भर में मैसूर वस्तुओं के लिए व्यापारिक घरानों का निर्माण किया।
- 1785 में, टीपू ने स्थानीय व्यापारियों को कंपनी के साथ व्यापार करने से रोक दिया और अपने राज्य के बंदरगाहों के माध्यम से चंदन, काली मिर्च और इलायची के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया।
पास के प्रसिद्ध व्यंजन (Famous Nearby Food)
- VV पुरम फूड स्ट्रीट पास में है, जहाँ से आप प्रसिद्ध दोसास, इडली, मंचूरीयन और साउथ इंडियन स्ट्रीट फूड का स्वाद ले सकते हैं।
- पास के इलाके में मटन बिरयानी, कबाब, और मैसूर पाक भी काफी लोकप्रिय हैं।
प्रवेश शुल्क: भारतीय नागरिकों के लिए ₹20, विदेशी नागरिकों के लिए ₹200।
समय: सुबह 8:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक।
कैसे पहुँचें: यह महल बैंगलोर फोर्ट के पास स्थित है, जो शहर के केंद्र से आसानी से पहुँचा जा सकता है।
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2. लालबाग बोटैनिकल गार्डन (Lalbagh Botanical Garden)

Bengaluru travel places : लालबाग बोटैनिकल गार्डन (Lalbagh Botanical Garden), बेंगलुरु का एक प्रसिद्ध और ऐतिहासिक उद्यान है | यह प्रकृति प्रेमियों, बल्कि इतिहास और वनस्पति विज्ञान के छात्रों के लिए भी एक प्रमुख आकर्षण है। यह बेंगलुरु की हरियाली का प्रतीक माना जाता है। लालबाग गार्डन की स्थापना 1760 में हैदर अली ने की थी, और इसे आगे बढ़ाया उनके पुत्र टिपू सुलतान ने। मूल रूप से यह एक फ़ारसी शैली का बाग था, जिसे बाद में ब्रिटिश शासन के दौरान वनस्पति उद्यान का रूप दिया गया। यह भारत के सबसे पुराने और सबसे प्रसिद्ध बॉटैनिकल गार्डनों में से एक है। उद्यान लगभग 240 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। यहाँ लगभग 1,854 से अधिक प्रजातियों के पेड़-पौधे और दुर्लभ विदेशी पौधे मिलते हैं।
इस बगीचे में फ्रेंच, फारसी और अफगानी मूल के दुर्लभ पौधे पाए जाते हैं , जिन्हें लालबाग बॉटनिकल गार्डन की यात्रा में देखा जा सकता है। इस बगीचे में मैना, परकेट्स, कौवे, ब्राह्मणी पतंग, पॉन्ड हेरोन, कॉमन एगेट और पर्पल मूर हेन जैसे कई पक्षी भी रहते हैं जो इसे और अधिक आकर्षक बनाते है।
हर साल गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर, लालबाग के परिसर में पुष्प प्रदर्शनी लगाई जाती है। उद्यानिकी और मैसूर बागवानी सोसायटी द्वारा प्रदर्शित किया जाता है | यह शो गार्डन में वनस्पतियों का एक सुंदर चित्रण है जो स्थानीय लोगों और पर्यटकों के बीच काफी पॉपुलर है।
- लाल बाग़ में हज़ार से अधिक प्रजातिया है | जिसमे से कुछ पेड़ 100 साल से अधिक पुराने हैं |
- यह उद्यान हैदर अली द्वारा बनाये गए टावरों के साथ संलग्न है | इस पार्क में कुछ फ्रांस,अफगानिस्तान, और फारस की प्रजातिया है जो बाग़ के आकर्षण को और बढ़ा देती हैं |
- इस पार्क की सिचाई जटिल जल प्रणाली से की जाती है जिसमें लॉन, फूल, कमल के पूल और फव्वारे हैं। अधिकांश सदियों पुराने पेड़ों को आसान पहचान के लिए लेबल किया जाता है।
- लाल बाग़ बोटैनिकल गार्डन के चार द्वार में से एक पश्चिमी द्वार सिदपुरा सर्कल के पास स्थित है, जो पर्यटकों के लिए खुला रहता है और उत्तरी पश्चिमी दीवार क्रुबिएगल रोड से मिलती है जिसका नाम जीएच क्रुम्बेगल के नाम पर रखा गया है, जो अंतिम स्वतंत्रता-पूर्व उद्यान का प्रधान अधिकारी था।
- इस बाग़ में कर्नाटक सर्कार द्वारा महीने के दूसरे और चौथे सप्ताह के अंतिम दिन पे ‘जनपद जैतरे’ का मेला आयोजित किया जाता है |
- लालबाग बगीचे के अंदर एक भूवैज्ञानिक स्मारक है जो 3,000 मिलियन वर्ष पुरानी प्रायद्वीपीय ग्निसिक चट्टानों से बना हुआ है।
- लालबाग गार्डन में मैसूर के पूर्व शासक श्री चमराजेंद्र वोडेयार की प्रतिमा और उनके द्वारा 1893 में स्वामी विवेकानंद की शिकागो की प्रसिद्ध यात्रा को भी दर्शाया गया है।
- बगीचे के अंदर एक जापानी सजावट की स्मारक भी है जो वास्तुकला शैली को प्रदर्शित करती है |
- लालबाग में बने ग्लास हाउस की आधारशिला प्रिंस अल्बर्ट विक्टर द्वारा 1889 ई॰ में लंदन के क्रिस्टल पैलेस पर रखी गई थी परंतु इसे जॉन कैमरन के समय में बनाया गया था। और इस ग्लास हाउस यह संरचना 1935 में विस्तारित की गई थी।
लाल बाग के आकर्षण – Attractions in Lal Bagh
- ग्लास हाउस
- लालबाग रॉक
- फ्लोरल क्लॉक
- लालबाग झील
करने के लिए चीजें (Things to Do)
- बॉटैनिकल वॉक और पौधों की विविधता को देखना।
- फोटोग्राफी के लिए एक आदर्श स्थान।
- सुबह-सुबह वॉकिंग या जॉगिंग करना।
- हर साल जनवरी और अगस्त में आयोजित होने वाला फ्लावर शो देखना बेहद लोकप्रिय है।
प्रवेश शुल्क (Entry Fee)
- सामान्य दिन पर: ₹20 प्रति व्यक्ति (वयस्क)
- 12 साल से कम आयु के बच्चों के लिए निःशुल्क।
- फ्लावर शो के दौरान टिकट दरें थोड़ी अधिक होती हैं (लगभग ₹70-₹100 तक)।
समय (Timings)
- खुला रहता है: रोजाना सुबह 6:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक
- सुबह 6 से 9 बजे और शाम 4 से 7 बजे तक जॉगर्स के लिए मुफ्त प्रवेश।
पास के प्रसिद्ध व्यंजन (Nearby Famous Food)
- निकट स्थित MTR (Mavalli Tiffin Rooms) में आप पारंपरिक साउथ इंडियन ब्रेकफास्ट जैसे कि दोसा, इडली, रवा इडली और कॉफी का स्वाद ले सकते हैं।
- आसपास के क्षेत्र में स्ट्रीट फूड और फलों की दुकानों की भी भरमार है।
कैसे पहुँचें (How to Reach)
- निकटतम मेट्रो स्टेशन: लालबाग मेट्रो स्टेशन (Green Line) – पैदल दूरी पर।
- बस सेवा: BMTC की बसें सीधे लालबाग के गेट तक जाती हैं।
- कैब/ऑटो: शहर के किसी भी कोने से आसानी से पहुँच सकते हैं।
3. क्यूब्बन पार्क (Cubbon Park) (Bengaluru travel places)

क्यूब्बन पार्क (Cubbon Park), बेंगलुरु शहर के दिल में स्थित एक विशाल और हरियाली से भरपूर पार्क है। यह न केवल स्थानीय निवासियों के लिए एक लोकप्रिय विश्राम स्थल है, बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक आकर्षण का केंद्र है। यह पार्क इतिहास, प्रकृति, वास्तुकला और शांति का अद्भुत मिश्रण प्रस्तुत करता है। 1870 में स्थापित, यह पार्क बैंगलोर के केंद्रीय व्यापारिक क्षेत्र में स्थित है और 300 एकड़ में फैला हुआ है।
क्यूब्बन पार्क को बेंगलुरु का फेफड़ा भी कहना कुछ गलत नहीं होगा | बैंगलुरु के व्यस्त जीवन शैली में यह पाश इलाका (क्यूब्बन पार्क) जो हरियाली से भरा-पूरा है , यह लोगो के दिनचर्या में सुकून भरा अहसास दे सकता है | इस पार्क को बनाने का संकल्प तत्कालीन ब्रिटिश साम्राज्य के मेजर जनरल रिचर्ड सेंकी ने की थी | सुरुवात में यह पार्क सिर्फ 100 एकड़ में फैला हुआ था |
- क्यूब्बन पार्क नाम तत्कालीन ब्रिटिश मुख्य आयुक्त मार्क कब् के नाम पर रखा गया था |
- जब यह पार्क बना था इसके सुरुवाती दौर में यहाँ भारतीयों का आना मना था हम लोग इस पार्क में नहीं जा सकते थे | यहाँ पर ब्रिटिश लोगो की पार्टिया चलती थी | यह हमारे लिए स्वतंत्रता के बाद खुला है | आम जनता को यहाँ आने की आज़ादी स्वतंत्रता के बाद मिली |
- यहां 6000 से अधिक पेड़ और 96 से ज़्यादा देशी एवं विदेशी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। साथ ही, यहाँ 68 से अधिक पौधों की प्रजातियाँ मौजूद हैं, जिससे इसकी जैव विविधता बेहद समृद्ध है |
- पार्क के अंदर टॉय ट्रेन, भारत का दूसरा सबसे बड़ा एक्वेरियम, और बच्चों के लिए विशेष खेल क्षेत्र है। साथ ही, यहाँ आप कर्नाटक हाई कोर्ट, सेंट्रल लाइब्रेरी और सरकारी संग्रहालय भी देख सकते हैं |
- यहाँ पर सप्ताह के अंतिम दिन सड़को पर वहां चलाने की अनुमति नहीं है, जिससे लोग सुकून से घूम सकते हैं | यहाँ पे पिकनिक के लिए बहुत से लोग घर का खाना लाते हैं |
- पार्क की सुंदरता को बनाये रखने के लिए यहाँ पर कई बार कमर्शियल प्रोजेक्ट्स को रोक कर प्राकृतिक सुंदरता को प्राथमिकता दी जाती है |
- आगंतुकों की सुरक्षा के लिए पार्क में CCTV कैमरे लगाए गए हैं |
- पार्क के अंदर स्थित संग्रहालय में होयसला शिल्पकला, मोहनजोदड़ो की खुदाई से मिले तीर, प्राचीन सिक्के और मिट्टी के पात्रों का संग्रह है, जो इतिहास प्रेमियों के लिए खास आकर्षण हैं |
पार्क के पास स्थित MG Road, Church Street और UB City जैसे इलाकों में प्रसिद्ध कैफे, स्ट्रीट फूड और रेस्टोरेंट हैं। कॉफ़ी, चाट, दोसा, बेंगलुरु बिरयानी और दक्षिण भारतीय थाली का स्वाद ज़रूर लें।
प्रवेश शुल्क: मुफ्त।
समय: सुबह 5:00 बजे से शाम 8:00 बजे तक।
कैसे पहुँचें (How to Reach)
- निकटतम मेट्रो स्टेशन: क्यूब्बन पार्क मेट्रो स्टेशन (Purple Line) – पार्क के मुख्य द्वार से सटा हुआ।
- बस सेवा: BMTC की कई बसें यहाँ रुकती हैं।
- कैब/ऑटो: बेंगलुरु के किसी भी हिस्से से आप आसानी से पहुँच सकते हैं।
4. बैंगलोर फोर्ट (Bangalore Fort)
बैंगलोर फोर्ट (Bangalore Fort), बेंगलुरु का एक ऐतिहासिक स्थल है जो शहर के गौरवशाली अतीत और युद्धकालीन विरासत का प्रतीक है। यह किला पुराने बेंगलुरु शहर के केंद्र में स्थित है और पर्यटकों के बीच विशेष आकर्षण रखता है। 1537 में केम्पे गोवदा द्वारा स्थापित, यह किला बाद में हैदर अली और टिपू सुलतान द्वारा सुदृढ़ किया गया।
बैंगलोर किला 1537 में एक मिट्टी के किले के रूप में शुरू हुआ था। इसके निर्माता केम्पे गौड़ा प्रथम थे, जो विजयनगर साम्राज्य के एक जागीरदार और बैंगलोर के संस्थापक थे। 1761 में राजा हैदर अली ने मिट्टी के किले को एक पत्थर के किले से बदल दिया और 18वीं शताब्दी के अंत में उनके बेटे राजा टीपू सुल्तान ने इसमें और सुधार किया। यद्यपि 1791 में एक एंग्लो-मैसूर युद्ध के दौरान इसे क्षतिग्रस्त कर दिया गया था, यह अभी भी 18वीं सदी के सैन्य किलेबंदी का एक अच्छा उदाहरण है |

- जहा पर अंग्रेजो ने किलो को तोड़ दिया था वहा पर एक संगमरमर की पट्टिका है | जिससे ऐसे जब्त कर लिया गया था | दर, अभी भी बंदूक के छेद देख सकते हैं जहां सैनिक खुद को तैनात करते थे।
- बेंगलुरु फोर्ट को ख़ुशी के निवास के रूप में जाना जाता था | बैंगलोर किला को सुंदरता की सच्ची भावना को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया था।
- महल के भूतल में चार कमरों में एक संग्रहालय है जो मैसूर के वीरता, शिष्टता और राजघरानों की शानदार जीवन शैली को प्रदर्शित करता है |
- सोने चांदी में जड़े राजा के मुकुट, शाही कपडे और अन्य दुर्लभ वस्तुए और टीपू सुल्तान के पिता हैदर अली को उपहार में मिले चांदी के बर्तन आदि चीजों का संग्रह भी इस किले में देखने योग्य है |
- इस किले के आसपास 1790 का एक गणेश भगवन की मूर्ति है जो अन्य धर्मो के सम्मान को दर्शाती है |
- केम्पे गौड़ा ने अपनी बहू की याद में गणेश मंदिर का निर्माण किया, जिसने किले के लिए अपना सिर तलवार से काटकर बलिदान कर दिया क्योंकि बुरी आत्माओं को भगाने के लिए कुछ मानव बलिदान की आवश्यकता थी।
- यहाँ पे एक आर्ट गैलरी भी जिसमे कुछ पिछले युग की तस्वीरें, पेंटिंग और नक्काशी भी है |
- मिट्टी के किले का निर्माण एक मील की परिधि में एक खाई और नौ द्वारों से घिरा हुआ था। लेकिन आज कई द्वारों में से केवल दिल्ली गेट और दो गढ़ समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं और बैंगलोर किले की एकमात्र बची हुई विरासत है जिसे देखा जा सकता है।
प्रवेश शुल्क: मुफ्त।
समय: सुबह 9:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक।
कैसे पहुँचें: यह किला बैंगलोर सिटी रेलवे स्टेशन के पास स्थित है।
5. बासवंगुडी मंदिर (Bull Temple)(Bengaluru travel places)
बासवंगुडी मंदिर (Bull Temple), जिसे नंदी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, बेंगलुरु का एक प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है। यह मंदिर दक्षिण भारतीय वास्तुकला, धार्मिक आस्था और शहर की सांस्कृतिक विरासत का एक अनमोल प्रतीक है। 1537 में केम्पे गोवदा द्वारा बनवाया गया, यह मंदिर विजयनगर स्थापत्य शैली में निर्मित है | यह मंदिर नंदी भगवान को समर्पित है और यहाँ दुनिया की सबसे बड़ी नंदी की मूर्ति स्थापित है।
मंदिर आकार में अपेक्षाकृत छोटा है, लेकिन इसमें दुनिया की सबसे बड़ी अखंड नंदी प्रतिमा है, जिसकी ऊंचाई 4.5 मीटर और लंबाई 6 मीटर है। इस मंदिर में भगवान सूर्य और चंद्र की प्रतिमाएँ भी हैं, जो अपने रथों पर सवार हैं। संरचना के आधार पर 17वीं शताब्दी के एक शिलालेख में वृषभवती नामक एक जलधारा का उल्लेख है जो यहाँ से निकलती है।
- यहाँ का बासवंगुडी मंदिर (Bull Temple) की मूर्ति ग्रेनाइट पत्थर से बना है जो बहुत ही विशाल है |
- जब यह मंदिर बना था तब यह नंदी प्रतिमा सफ़ेद-ग्रे रंग का था, लेकिन बाद में भक्तो द्वारा लगातार नारियल तेल चढाने के कारण यहाँ काली पद गई है |
- कहा जाता है कि पहले बासवंगुडी क्षेत्र (पूर्व नाम सुकेनहल्ली) में मूँगफली की खेती होती थी। यहां एक बार एक आवारा सांड खेतों को नष्ट कर देता था। एक किसान ने उसे लकड़ी से मारा, तब वह सांड बैठ गया और पत्थर बन गया। किसानों ने इस अद्भुत घटना के बाद उसी जगह नंदी मंदिर बनवाया |
- यहाँ के लोग हर वर्ष अपनी मूंगफली का पहला चढ़ावा भगवान् को चढ़ाते है | इसके बाद यहाँ बृहत् मेला लगता है इस मेले में किसान अपनी मुगफली बेचते हैं |
- मंदिर के पास 3000 मिलियन वर्ष पुरानी चट्टानें (Bugle Rock Park) और प्रसिद्ध डोड्डा गणेश मंदिर भी स्थित है |
- ऐसा भी कहा जाता है कि नंदी की प्रतिमा के पैरों से विश्वा भारती नामक नदी निकलती है |
- इस मंदिर को डोड्डा बसवाना गुड़ी, बिग बुल टेम्पल और नंदी टेम्पल भी कहा जाता है |
प्रवेश शुल्क: मुफ्त।
समय: सुबह 6:00 बजे से शाम 8:00 बजे तक।
कैसे पहुँचें: यह मंदिर बासवंगुडी क्षेत्र में स्थित है, जो शहर के केंद्र से आसानी से पहुँचा जा सकता है।
6. बंगलौर पैलेस (Bangalore Palace)
बंगलौर पैलेस (Bangalore Palace), बेंगलुरु का एक भव्य और ऐतिहासिक स्थल है, जो राजा-महाराजाओं के वैभवशाली जीवन, यूरोपीय स्थापत्य कला और कर्नाटक की राजसी विरासत को दर्शाता है। यह महल न केवल स्थापत्य प्रेमियों के लिए, बल्कि इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वाले सभी लोगों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है। यह महल 1887 में चामराजेन्द्र वोडेयार द्वारा बनवाया गया था और यह विंटेज यूरोपीय वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है।
यह महल भारत के सबसे सुंदर और महंगे महलों में से एक है जिसका निर्माण ट्यूडर रेवियल वास्तुकला में किया गया है | यहाँ पर्यटक अधिक मात्रा में आते है क्यूंकि ये एक अनोखे आकर्षण का केंद्र है |
- बैंगलोर पैलेस में वोडेयार शाही परिवार लम्बे समय तक निवास किया |
- इस समय इस महल का स्वामित्त्व श्रीमती देवी वाडियार के अंदर है |
- इसके फर्नीचर में एडवर्डियन और नव-शास्त्रीय दोनों थीम हैं।
- बैंगलोर पैलेस में 30,000 से अधिक तस्वीरो का एक संग्रहालय भी है | जो इतिहास प्रेमियों के लिए बेहद रुचिकर है |
- यह महल क्रॉस-सांस्कृतिक वास्तुकला का एक डिज़ाइन है जिसमे मुख्य रूप से ट्यूडर और स्कॉटिश शैलियों के बावजूद, दरबार हॉल में एक स्पेनिश बेंच है।
- यह महल जनता के लिए 2005 में खोला गया है इसके पहले यह बंद था |
- पैलेस को कुछ हिंदी फिल्मो में भी देखा जा सकता है जैसे ‘जो जीता वही सिकंदर,’ ‘कुली,’ और ‘बरसात’ |
- कर्नाटक सरकार के साथ कानूनी गड़बड़ के बाद, पैलेस को अब व्यावसायिक उपयोग के लिए उपयोग करने की अनुमति नहीं है।
प्रवेश शुल्क: भारतीय नागरिकों के लिए ₹230, विदेशी नागरिकों के लिए ₹460।
समय: सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक।
कैसे पहुँचें: यह महल वोडेयार रोड पर स्थित है, जो शहर के केंद्र से आसानी से पहुँचा जा सकता है।
7. नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (National Gallery of Modern Art)
यह गैलरी 2009 में स्थापित हुई थी और यहाँ भारतीय आधुनिक कला के कई महत्वपूर्ण चित्र प्रदर्शित हैं। यह एक आधुनिक आर्ट गैलरी है | जिसमे राजा रवि वर्मा, जैमिनी रॉय, अमृता शेरगिल, रवींद्रनाथ टैगोर और बड़ी संख्या में आधुनिक और समकालीन कलाकारों की पेंटिंग हैं। यह एक ऑडोटोरियम, एक सार्वजनिक कला संदर्भ पुस्तकालय, एक कैफेटेरिया और एक संग्रहालय की दुकान आदि चीजे यहाँ पे है |
- एनजीएमए का मुख्यालय प्रसिद्ध माणिक्यवेलु हवेली (Manikyavelu Mansion) में है, जो लगभग 3.5 एकड़ में फैला है। यह हवेली औपनिवेशिक शैली का 109 साल पुराना भवन है |
- इस गैलरी की स्थापना 2009 में हुआ और इस 18 फरवरी 2009 को आम जनता के लिए खोला गया |
- यहाँ पर 14,000 से अधिक कलाकृतिया संग्रहित है | इस संग्रह में चित्रकला, मूर्तियां, ग्राफिक प्रिंट और फोटोग्राफ आदि शामिल हैं। यहाँ 18वीं सदी से लेकर समकालीन काल तक भारतीय कला का सफर दर्शाया गया है |
- यहाँ पे विशेष कार्यकम भी आयोजित किये जाते हैं जो राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्र्रीय दोनों स्तर पर होते है जैसे कला प्रदर्शनियाँ, कार्यशालाएँ, पैनल डिस्कशन, फिल्म स्क्रीनिंग और बच्चों के लिए विशेष कार्यक्रम |
- एनजीएमए में इतिहास (Itihaas) जैसी थीम पर आधारित विशेष प्रदर्शनियाँ भी होती रहती हैं, जिनमें भारत के प्रमुख मूर्तिकार, चित्रकार और ग्राफिक आर्टिस्ट शामिल होते हैं |
- यहाँ पर होने वाले इतिहास थीम प्रदर्शनी बेहद ख़ास होती है, जिसमे भारत के प्रशिद्ध कलाकार आते हैं जैसे मूर्तिकार, चित्रकार और ग्राफिक आर्टिस्ट होते हैं
- गैलरी का वातावरण शांत, सुरम्य और प्रेरणादायक है; सुबह जल्दी जाने पर भीड़ कम मिलती है, जिससे कला की सराहना का अनुभव बेहतर होता है |
प्रवेश शुल्क: भारतीय नागरिकों के लिए ₹20, विदेशी नागरिकों के लिए ₹500।
समय: मंगलवार से रविवार, सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक।
कैसे पहुँचें: यह गैलरी वासंत नगर क्षेत्र में स्थित है, जो शहर के केंद्र से आसानी से पहुँचा जा सकता है।
8. बेंगलुरु आईटी सिटी (Bangalore IT City)(Bengaluru travel places)
बेंगलुरु को “भारत की सिलिकॉन वैली” कहा जाता है, और यहाँ कई प्रमुख आईटी कंपनियाँ स्थित हैं। पहले यहाँ पे कम कम्पनीज थी | यहाँ का वातावरण भी काफी अच्छा और सुहाना रहता था | यहाँ पे पीने तथा नहाने के लिए स्वच्छ जल पर्याप्त था |
पर जबसे बेंगलुरु आईटी सिटी के रूप में विख्यात होता गया यहाँ पे कम्पनीज बढ़ती गई, यहाँ पे पीने तथा नहाने की किल्लत होती गई | पहले यहाँ पे तालाब और झीले हुआ करती थी | पर जबसे यहाँ पे पापुलेशन बढ़ती गई, यहाँ ट्रैफिक बढ़ती गयी और पानी की भी कमी होती गई | पहले यहाँ पे कपडे के उद्योग हुआ करते थे अब यहाँ पे ज्यादा आईटी हब है |
- बेंगलुरु भारत के सबसे बड़े औद्योगिक एलेक्ट्रोनिक पार्क है जो 800 एकड़ में फैला हुआ है | जहा 200 से अधिक आईटी कम्पनिया काम करती है |
- बेंगलुरु ने पारंपरिक विरासत को बरकरार रखते हुए आधुनिक तकनीकी विकास में जबरदस्त गति हासिल की है, इसी कारण इसे “सिलिकॉन वैली ऑफ इंडिया” कहा जाता है |
- यह शहर पिछले 30 वर्षो से आईटी के मार्ग में तेजी से विकाश कर रहा है | यह शहर हज़ारो स्टार्टअप्स और बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों का घर है |
- बेंगलुरु का 2023 का अनुमानित जीडीपी लगभग 359.9 अरब डॉलर था। जो भारत के नंबर वन उत्पादों में से एक था |
- एसटीपीआई-बेंगलुरु क्षेत्र ने सॉफ्टवेयर निर्यात में बढ़ोतरी के साथ देश में लाखों लोगों को रोज़गार के अवसर दिए हैं।
- यहाँ पर तकनीक के अलावा बहुत सारे पार्क भी हैं जिससे इसे ‘गार्डन सिटी’ भी कहा जाता है |
- देश के सबसे ज्यादा स्टार्टअप्स और तकनीकी नवाचार यहीं से निकलते हैं, जिनमें कई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हुए हैं |
- विंप्रो, इंफोसिस, टीसीएस जैसी प्रमुख आईटी कंपनियों का मुख्यालय यहीं स्थित है।
प्रवेश शुल्क: मुफ्त।
समय: 24 घंटे।
कैसे पहुँचें: यह क्षेत्र इलेक्ट्रॉनिक सिटी और व्हाइटफील्ड के आसपास स्थित है, जो शहर के केंद्र से मेट्रो और कैब द्वारा पहुँचा जा सकता है।
9. इस्कॉन मंदिर (ISKCON Temple)
Bengaluru travel places: इस्कॉन मंदिर (ISKCON Temple), बेंगलुरु एक प्रमुख और प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है | यह बेंगलुरु के रद्दीपेट क्षेत्र में स्थित है। इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है | इसे इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (ISKCON) के द्वारा संचालित किया गया है। इस मंदिर को श्रद्धालु श्री राधा कृष्ण मंदिर के रूप में भी जानते हैं, क्योंकि यहाँ भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की पूजा की जाती है। यह मंदिर बेंगलुरु के प्रमुख पर्यटन स्थलों में एक है। इस्कॉन मंदिर का निर्माण 1997 में हुआ था और यह ISKCON (International Society for Krishna Consciousness) के बेंगलुरु शाखा का प्रमुख केंद्र है।
- बेंगलुरु में यह मंदिर 700 एकड़ में फैला हुआ है बेंगलुरु का इस्कॉन टेम्पल दुनिया के सबसे बड़े हिन्दू कृष्ण मंदिरो में से एक है | जो मुख्य रूप से “हरे कृष्णा हिल” नामक पहाड़ी पर स्थित है |
- मंदिर का निर्माण वर्ष 1990 में प्रारंभ हुआ और इसका उद्घाटन 1997 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति श्री शंकर दयाल शर्मा द्वारा किया गया था
- इस मंदिर में पारंपरिक भारतीय वास्तुकला के साथ-साथ आधुनिक स्थापत्य कला का अद्भुत मेल देखने को मिलता है। इसकी सजावट में भव्य गुम्बद, नक्काशीदार खंभे और सुंदर बाग-बगिचे शामिल हैं
- यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण और राधा को समर्पित है। यहाँ की मुख्य वेदिका पर राधा-कृष्ण की अत्यंत मनोहारी मूर्तियाँ स्थापित हैं
- इस्कॉन बेंगलुरु का उद्देश्य श्रील प्रभुपाद की शिक्षाओं के अनुसार कृष्ण चेतना का विस्तार करना है, जिसमें भगवद्गीता और श्रीमद्भागवतम का महत्वपूर्ण स्थान है
- जन्माष्टमी, राधाष्टमी, गीता जयंती आदि प्रमुख त्योहार यहाँ बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं। आयोजन के समय भव्य सजावट, विशेष आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं
- मंदिर परिसर में पुस्तकालय, गोशाला, धर्मार्थ भोजनालय (अन्नदान), सभागार और प्रसादम हॉल जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं
- परिसर से शहर का सुंदर दृश्य दिखाई देता है। समीप ही “वैकुंठ हिल” स्थित है, जो एक शांत स्थान है और ध्यान तथा प्रार्थना के लिए लोकप्रिय है
- इस्कॉन मंदिर में आमजन के लिए प्रवेश निशुल्क है, जिससे हजारों श्रद्धालु और पर्यटक यहाँ नियमित रूप से पहुँचते हैं
10. विधान सौधा (Vidhana Soudha)
Bengaluru travel places: विधान सौधा (Vidhana Soudha), बेंगलुरु का एक प्रमुख और ऐतिहासिक सरकारी भवन है। यह कर्नाटका राज्य की विधान सभा का मुख्यालय है और राज्य की राजनीति और प्रशासन का केंद्र है। विधान सौधा को कर्नाटका की राजधानी बेंगलुरु के गौरव के रूप में जाना जाता है, और यह भारतीय वास्तुकला का एक अद्भुत उदाहरण है। विधान सौधा का निर्माण 1954 में शुरू हुआ और 1956 में पूरा हुआ। इसकी आधारशिला पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 13 जुलाई 1951 को रखी थी | इसका निर्माण कर्नाटका के तत्कालीन मुख्यमंत्री क. एच. खान (Kengal Hanumanthaiah) के मार्गदर्शन में हुआ था।
बेंगलुरु का विधान सौधा भारत की सबसे भव्य विधानसभाओं में से एक है और कर्नाटक सरकार का सचिवालय तथा विधानसभा स्थल भी है।
- इसके निर्माण से 5,000 कैदियों और 1,500 कारीगरों की सजा में माफ़ी दी गई थी और इन्ही कैदियों ने ऐसे बनाया था |
- इमारत का डिज़ाइन नव-द्रविड़ (Neo-Dravidian) शैली में है, जिसमें द्रविड़, राजस्थानी, इंडो-सारासेनिक और यूरोपीय वास्तु का भी मिश्रण है |
- भवन दो मंजिलो में बना हुआ है , जिसमे से एक जमीन के अंदर है | इसका क्षेत्र फल 700 फ़ीट से 350 फ़ीट में फैला हुआ है | इसका कुल क्षेत्रफल 5,50,505 वर्ग फ़ीट है
- विधान सौधा का केंद्रीय गुंबद जमीन से 55 मीटर ऊंचा है और उसके ऊपर भारत का राष्ट्रीय चिह्न बना हुआ है |
- इसमें 12 ग्रेनाइट के विशाल स्तंभ हैं, जो 12 मीटर ऊंचे हैं |
- मुख्य सभा कक्ष तक जाने के लिए 45 चौड़ी सीढ़ियां बनी हुई हैं, जिनकी चौड़ाई 61 मीटर है |
- भवन के प्रवेशद्वार के आगे लिखा है: “सरकार का काम भगवान का काम होता है” (कन्नड़ में – “सरकारदा केलसा देवारा केलासा”) |
- इस इमारत में कुल 172 कमरे हैं, जिनका उपयोग विधायकों, अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए होता है |
- रविवार की रात इस इमारत को विशेष कृत्रिम प्रकाश से सजाया जाता है, जिसे देखना बहुत सुंदर अनुभव है।
- इसका निर्माण राष्ट्रवादी गर्व और भारतीय स्थापत्य परंपरा को प्रदर्शित करने के लिए किया गया था—ताकि यह पश्चिमी भवनों का जवाब दे सके |
11. बन्नेरघट्टा नेशनल पार्क (Bannerghatta National Park)
Bengaluru travel places: बन्नेरघट्टा नेशनल पार्क (Bannerghatta National Park), बेंगलुरु के पास स्थित एक प्रसिद्ध वन्यजीव अभयारण्य है, जो प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता का अद्वितीय मिश्रण प्रस्तुत करता है। यह पार्क बेंगलुरु शहर से लगभग 22 किलोमीटर दूर स्थित है और पर्यटकों को वन्यजीवों, खूबसूरत दृश्यों और एडवेंचर गतिविधियों का अनुभव प्रदान करता है। यह पार्क न केवल बेंगलुरु के नागरिकों, बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक प्रमुख आकर्षण स्थल बन चुका है।
- बन्नेरघट्टा नेशनल पार्क, बेंगलुरु के पास स्थित, दक्षिण भारत का एक प्रमुख वन्यजीव अभ्यारण्य एवं जैविक उद्यान है।
- पार्क बेंगलुरु के दक्षिण में, अनेकल रेंज की पहाड़ियों में बसा है और शहर से लगभग 20-22 किमी दूर है |
- यहाँ शेर, बाघ, तेंदुआ, हाथी, भालू आदि की सफारी कर सकते हैं। इस पार्क की खास बात यह है की इन जानवरों को उनके नजदीकी प्राकृतिक आवास में देखने की सुविधा मिलती है |
- 2006 में भारत का पहला तितली पार्क यहाँ बना, जो एक विशिष्ट आकर्षण है। इसमें तितलियों की 20 से अधिक प्रजातियाँ संरक्षित हैं, और शानदार ग्रीनहाउस व संग्रहालय भी मौजूद हैं |
- हाल ही में इसके आस-पास के कुछ हिस्सों को पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया है, जिससे यहाँ की जैव विविधता एवं प्रकृति को संरक्षण मिलता है |
- पार्क में कुछ प्राचीन मंदिर भी हैं और यहाँ पैदल भ्रमण के लिए अनेक ट्रेल्स उपलब्ध हैं
- यह बेंगलुरु और आसपास के क्षेत्रों का अत्यंत लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जो प्रकृति प्रेमियों, बच्चों और फोटोग्राफरों के लिए काफी अच्छा है |
- पार्क आमतौर पर सुबह 9:30 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है
12. वंडरला एम्यूज़मेंट पार्क (Wonderla Amusement Park)(Bengaluru travel places)
वंडरला एम्यूज़मेंट पार्क (Wonderla Amusement Park) बेंगलुरु का एक प्रमुख और रोमांचक मनोरंजन स्थल है, जो परिवारों, दोस्तों और एडवेंचर प्रेमियों के लिए आदर्श है। यह पार्क 2005 में स्थापित हुआ था और अब तक लाखों पर्यटकों का मनोरंजन कर चुका है।
- वंडरला में ज़मीन और पानी दोनों पर कई तरह की सवारी उपलब्ध हैं, जिनमें उच्च थ्रिल वाली रोलर कोस्टर, फ्लाइंग राइड्स, वॉटर स्लाइड्स आदि शामिल हैं |
- इसमें एक बड़ा वाटर पार्क भी है जो दोपहर 12:30 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है। यहाँ वाटर राइड्स जैसे वेव पूल, वॉटर फ्लूम आदि मिलते हैं |
- यहां वर्चुअल रियलिटी अनुभव, इंटरेक्टिव 4D सिनेमा और लेजर शो जैसे आधुनिक तकनीकी आकर्षण भी हैं जो मनोरंजन को और बेहतर बनाते हैं |
- पार्क सुबह 11 बजे से शाम 6 या 7 बजे तक खुला रहता है, जिससे दिनभर मज़े का पूरा मौका मिलता है |
- वंडरला को खासतौर पर समूहों और परिवारों के लिए डिजाइन किया गया है ताकि हर आयु के लोग आनंद ले सकें और टीम बॉन्डिंग का अनुभव हो |
- पार्क बेंगलुरु के हरे-भरे क्षेत्रों में बसा है, जिससे स्वच्छ हवा और प्राकृतिक माहौल का आनंद मिलता है।
- पार्क में सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाता है, जिससे यहां का अनुभव सुरक्षित और आरामदायक होता है।
पता: 28वें किलोमीटर, मांड्या रोड, बेंगलुरु, कर्नाटका।
निकटतम रेलवे स्टेशन: बेंगलुरु सिटी रेलवे स्टेशन – लगभग 28 किलोमीटर।
निकटतम हवाई अड्डा: कंपेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा – लगभग 71 किलोमीटर।
निकटतम हवाई अड्डा: कंपेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा – लगभग 71 किलोमीटर।
बैंगलोर के प्रमुख पर्यटन स्थलों के प्रवेश शुल्क की तालिका (हिंदी में)
| स्थान का नाम | प्रवेश शुल्क (भारतीय) | बच्चों के लिए शुल्क | समय | टिप्पणी |
|---|---|---|---|---|
| लाल बाग बॉटनिकल गार्डन | ₹20 | ₹15 | रोज़ाना, सुबह 6 से शाम 7 बजे | बहुत प्रसिद्ध बगीचा |
| नंदी हिल्स | कोई शुल्क नहीं | कोई शुल्क नहीं | सभी दिन | प्राकृतिक स्थल |
| बैंगलोर पैलेस | ₹225 | – | – | कैमरा शुल्क अलग से |
| टीपू सुल्तान समर पैलेस | ₹15 | – | सुबह 8:30 से शाम 5:30 बजे | विदेशी: ₹200 |
| टीपू सुल्तान किला | ₹15 | – | सुबह 8:30 से शाम 5:30 बजे | विदेशी: ₹200 |
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FAQ
बेंगलुरु पैलेस की खासियत क्या है और क्यों यह लोकप्रिय है?
Ans. बेंगलुरु पैलेस की सबसे बड़ी खासियत इसकी भव्य वास्तुकला, ऐतिहासिक महत्व और शाही वैभव है। यह महल इंग्लैंड के विंडसर कैसल से प्रेरित ट्यूडर और स्कॉटिश स्थापत्य शैली में बना है, जिसमें ऊँचे बुर्ज, गढ़वाले टॉवर, रोमन मेहराब और शानदार बाग-बगीचे शामिल हैं |
पैलेस के अंदरूनी हिस्से में:
विक्टोरियन, नव-शास्त्रीय व एडवर्डियन स्टाइल का फर्नीचर व सजावट की गई है |
महल में 35 कमरें हैं और अंदर फर्श व दीवारों पर सुंदर नक्काशी व कलाकृतियाँ देखी जा सकती हैं, जिनमें राजा रवि वर्मा जैसे प्रसिद्ध चित्रकारों के चित्र भी शामिल हैं |
पहली मंजिल का “दरबार हॉल” आकर्षण का केंद्र है, जिसमें भव्य सजावट और एक विशाल हाथी का सिर देखने लायक है |
लोकप्रियता के कारण:
बेंगलुरु पैलेस अपनी ऐतिहासिकता, भव्य डिजाइन, कलात्मकता और शानदार बग़ीचों के लिए देश-विदेश के पर्यटकों में अत्यंत लोकप्रिय है।
यहाँ मेले, सांस्कृतिक कार्यक्रम, फोटोशूट और निजी आयोजनों के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इसकी गतिविधियाँ और आकर्षण दोनों बढ़ जाते हैं |
