
Delhi me ghumne ki jagah in hindi : दिल्ली में घूमने के लिए बहुत सारी शानदार जगहें हैं। दिल्ली, भारत की राजधानी है , यह न केवल एक ऐतिहासिक स्थल है, बल्कि यह आधुनिकता, संस्कृति और विविधता का भी केंद्र है। अगर आप दिल्ली में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो यहां कई ऐसी जगहें हैं जो आपके सफर को यादगार बना सकती हैं।
दिल्ली में कई ऐसी जगहें हैं, जो न केवल भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण हिस्से को दिखाती हैं, बल्कि पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र भी बन चुकी हैं। यहां पर हर किसी के लिए कुछ न कुछ है—चाहे वह ऐतिहासिक स्थल हो, धार्मिक स्थल हो या फिर शॉपिंग और मनोरंजन की जगह।
दिल्ली , आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (National Capital Territory of Delhi), भारत का एक प्रमुख महानगर और केंद्र-शासित प्रदेश है। इसमें नई दिल्ली भी शामिल है, जो भारत की राजधानी है। दिल्ली में केंद्र सरकार की तीनों इकाइयों—कार्यपालिका, संसद और न्यायपालिका—के मुख्यालय यही स्थित हैं |
“दिल्ली में राजधानी के होने के नाते केंद्र सरकार की तीनों इकाइयों- कार्यपालिका, संसद और न्यायपालिका के मुख्यालय नई दिल्ली और दिल्ली में स्थापित हैं। 1483 वर्ग किलोमीटर में फैला दिल्ली जनसंख्या के तौर पर भारत का दूसरा सबसे बड़ा महानगर है। यहाँ की जनसंख्या लगभग 1 करोड़ 70 लाख है। यहाँ बोली जाने वाली मुख्य भाषाएँ हैं : हिन्दी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेज़ी। भारत में दिल्ली का ऐतिहासिक और भौगोलिक महत्त्व है।
दिल्ली का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। महाभारत काल में इसे इन्द्रप्रस्थ कहा जाता था। दिल्ली सल्तनत और मुगल साम्राज्य के दौरान यह प्रमुख राजनीतिक, सांस्कृतिक और वाणिज्यिक केंद्र रहा है। यहाँ कई ऐतिहासिक स्मारक जैसे कुतुब मीनार, लाल किला, हुमायूं का मकबरा, जामा मस्जिद आदि स्थित हैं |
नई दिल्ली का निर्माण अंग्रेज़ों के शासनकाल में सर एडविन लुटियन द्वारा योजनाबद्ध तरीके से किया गया था। इसमें कनॉट प्लेस, इंडिया गेट, रायसीना हिल आदि प्रमुख स्थल हैं |
दिल्ली के पूर्व में यमुना नदी और दक्षिण-पश्चिम में अरावली पहाड़ियाँ हैं
इस ब्लॉग में हम आपको दिल्ली की 30 सबसे श्रेष्ठ और आकर्षक स्थलों के बारे में बताएंगे, जिनका दौरा आपको जरूर करना चाहिए।
1. भारत गेट (India Gate) (Delhi me ghumne ki jagah in hindi)

भारत गेट, दिल्ली का सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक युद्ध स्मारक है, जो दिल्ली के दिल में स्थित है। जो भारतीय सैनिकों की शहादत को सम्मानित करने के लिए बनवाया गया था। यह एक विशाल द्वार के रूप में स्थित है और यहां पर शाम के समय भारतीय तिरंगे की लहराती हुई झंकार के साथ एक बेहद खूबसूरत दृश्य देखने को मिलता है। खासतौर पर यहाँ शाम के समय बच्चों और परिवारों के साथ घूमने का अनुभव बहुत अच्छा होता है।
यहां पर आप शांति और प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव कर सकते हैं। यहां का शांतिपूर्ण वातावरण और शहीदों को सम्मान देने वाली भावना आपको बहुत प्रेरित करेगी।
India Gate 1921 में शुरू होकर 1931 में पूरा हुआ। इसके डिज़ाइनर सर एडविन लुटियन्स है | यह एक युद्ध स्मारक है जो प्रथम विश्व युद्ध और अफ़ग़ान युद्ध में शहीद हुए 84,000 से अधिक भारतीय सैनिकों की याद में बनाया गया था। 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद इसमें ‘अमर जवान ज्योति’ जोड़ी गई थी, जो शहीद सैनिकों की स्मृति में 24 घंटे जलती रहती है।
- देश के लिए मर मिटने वाले शहीदों की याद में बनाया गया यह स्मारक भारत के सबसे बड़े युद्ध स्मारकों में से एक है, जिसे उस समय के मशहूर वास्तुकार एडविन लुटियंस ने डिजाइन किया था।
- करीब 42 मीटर ऊंचे इस राष्ट्रीय स्मारक की आधारशिला 10 फरवरी, 1921 को ड्यूक ऑफ कनॉट ने रखी थी, जबकि इसका निर्माण काम को पूरा होने में10 साल का लंबा वक्त लग गया था।
- इंडिया गेट को शुरुआत में अखिल भारतीय युद्ध स्मारक के तौर पर जाना जाता था, लेकिन फिर बाद में इसका नाम इंडिया गेट कर दिया गया।
- इंडिया गेट के तल पर बनी अमर जवान ज्योति को भारत-पाक के युद्ध में शहीद हुए हजारों भारतीय सैनिकों की याद में बनाया गया है, जिसमें हमेशा एक लौ शहीदों की स्मृति और उन्हें श्रद्धांजली देने के लिए जलती रहती है।
- भारत की इस सबसे बड़े युद्ध स्मारक के दीवारों पर प्रथम विश्व युद्ध और तीसरे एंग्लों-अफगान युद्ध में शहीद हुए हजारों भारतीय सैनिकों के नाम शिल्पित किए गए हैं। जबकि इसे पेरिस में स्थित ”आर्क डी ट्रायम्फ” की तर्ज पर डिजाइन किया गया है।
- इंडिया गेट पर बने अमर जवान ज्योति का उद्घाटन देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था और 26 जनवरी के दिन देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों को श्रद्धांजली अर्पित की थी, तब से लेकर आज तक गणतंत्र दिवस के राष्ट्रीय पर्व के दौरान हर साल देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति एवं तीनों सेनाओं के प्रमुखों द्धारा अमर जवान ज्योति पर पूरे श्रद्धा भाव और सच्चे मन से शहीदों को श्रद्धांजली दी जाती है।
- अमर जवान ज्योति पर एक स्व-लोडिंग राइफल और सैनिक का हेलमेट भी रखा गया है, जो कि इसकी शोभा को और अधिक बढ़ा रहा है।
टाइमिंग (समय):
- प्रवेश समय: 24 घंटे खुला रहता है।
- लाइट शो और वातावरण: शाम के समय विशेष रूप से देखने लायक होता है क्योंकि लाइट्स और फव्वारे इसे और भी सुंदर बना देते हैं।
निकटतम मेट्रो स्टेशन:
- राजीव चौक मेट्रो स्टेशन (Rajiv Chowk Metro Station) – ब्लू और येलो लाइन पर स्थित। यहाँ से इंडिया गेट लगभग 2.5 किमी दूर है, जिसे आप ऑटो, कैब या पैदल तय कर सकते हैं।
निकटतम रेलवे स्टेशन:
- नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (NDLS): लगभग 5 किमी दूर
- हजरत निज़ामुद्दीन स्टेशन: लगभग 6-7 किमी दूर
- दोनों से टैक्सी, ऑटो या मेट्रो से आसानी से पहुँचा जा सकता है।
निकटतम हवाई अड्डा:
- इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (IGI Airport): लगभग 14-16 किमी दूर
- हवाई अड्डे से टैक्सी या मेट्रो (Airport Express Line) के माध्यम से पहुँचा जा सकता है।
प्रवेश शुल्क (Entry Fee):
- कोई प्रवेश शुल्क नहीं है।
- यह एक सार्वजनिक स्मारक है, जहाँ कोई टिकट नहीं लगता।
निकटतम प्रसिद्ध रेस्टोरेंट्स:
- Pandara Road Restaurants (लगभग 1.5-2 किमी दूर)
- Gulati Restaurant (North Indian)
- Have More (Mughlai)
2. India Gate के पास स्ट्रीट फूड स्टॉल्स:
- चाट, गोलगप्पे, आइसक्रीम, भुट्टा आदि
3. Connaught Place (CP) – लगभग 3 किमी दूर
- Big Chill Café
- Saravana Bhavan (South Indian)
- Burger King, KFC, McDonald’s
फूड बजट:
- Street Food/आइसक्रीम: ₹50 – ₹150 प्रति व्यक्ति
- Budget Restaurants: ₹200 – ₹400 प्रति व्यक्ति
- Mid-range Dining (Gulati आदि): ₹500 – ₹800 प्रति व्यक्ति
- High-end Dining: ₹1000+ प्रति व्यक्ति
2. कुतुब मीनार (Qutub Minar)
कुतुब मीनार, दिल्ली का सबसे ऊंचा मिनार और ऐतिहासिक स्थल है। , जो 72.5 मीटर ऊंचा है और इसे 1193 में कुतुब-उद-दीन ऐबक ने बनवाया था। इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है। इस मिनार की अद्भुत वास्तुकला और इसके आसपास के ऐतिहासिक स्थल आपके दिल्ली यात्रा के अनुभव को और भी खास बना देते है। यह एक प्रमुख पर्यटक स्थल बन चुका है।
- क़ुतुब मीनार की सबसे खास बात यह है कि यहाँ परिसर में एक लोहे खंभा लगा हुआ है जिसको लगभग 2000 साल हो गए हैं लेकिन अब तक इसमें जंग नहीं लगी है। लोहे के खम्भे में इतने सालों तक जंग न लगना अपने आप में एक बहुत बड़ी बात है |
- बता दें कि क़ुतुब मीनार भले ही भारत की सबसे बड़ी इमारत है लेकिन यह बिलकुल सीधी नहीं है यह थोड़ी सी झुकी हुई है। जिसका सबसे बड़ा कारण यह है कि इस इमारत का मरम्मत का काम कई बार हुआ है।
- क़ुतुब मीनार का असली नाम विष्णु स्तंभ बाताया जाता है, इसके साथ इसके सम्राट चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के नवरत्नों में से एक कहा गया है।
- क़ुतुब मीनार के इतिहास के बारे में बात करें तो शिलालेख मीनार में अरबी और नागरी लिपि में शिलालेख हैं। जो इसके इतिहास के बारे में बताते हैं।
- जब फिरोज शाह तुगलक के शासन में भूकंप के बाद क़ुतुब मीनार क्षतिग्रस्त हो गई थी तो इसके बाद फिरोज शाह ने इसकी मरम्मत करवाई। लेकिन इसके बाद में 1505 फिर से भूकंप की वजह से मीनार टूट गई थी जिसकी मरम्मत सिकंदर लोदी ने ने करवाई।
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के द्वारा 1871-72 में एक रिपोर्ट तैयार की गई थी। उस रिपोर्ट में बताया गया था कि कुतुब मीनार के परिसर में मौजूद मस्जिद का निर्माण हिंदू मंदिरों को तोड़कर किया गया है।
- कुतुब मीनार के नाम को लेकर कुछ इतिहासकारों का विवाद है। कुछ इतिहासकार मानते हैं कि क़ुतुब मीनार का नाम इसकी स्थापना करने वाले गुलाम वंश के शासक और दिल्ली सल्तनत के पहले मुस्लिम शासक कुतुबुद्दीन ऐबक के नाम पर रखा गया है, जिसका अर्थ न्याय का ध्रुव होता है। कुछ इतिहासकार मानते हैं कि क़ुतुब मीनार का नाम मशहूर मुस्लिम सूफी संत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी के नाम पर रखा गया था।
समय (Timings):
- खुला रहता है: हर दिन (Monday to Sunday)
- समय: सुबह 7:00 AM से शाम 5:00 PM तक
- सुझाव: सुबह जल्दी या शाम को जाना बेहतर होता है – भीड़ कम और मौसम बेहतर होता है।
निकटतम मेट्रो स्टेशन (Nearest Metro Station):
- Qutub Minar Metro Station – येलो लाइन पर स्थित।
- यहाँ से क़ुतुब मीनार लगभग 1.5 किमी दूर है – पैदल, ऑटो या ई-रिक्शा से पहुँचा जा सकता है।
निकटतम रेलवे स्टेशन:
- नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (NDLS): लगभग 15 किमी दूर
- हजरत निज़ामुद्दीन स्टेशन: लगभग 12 किमी दूर
- दोनों से मेट्रो या टैक्सी से पहुँचा जा सकता है।
निकटतम हवाई अड्डा:
- इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (IGI Airport): लगभग 13–15 किमी दूर
- एयरपोर्ट से टैक्सी या मेट्रो (Airport Express → येलो लाइन) से पहुँचना आसान है।
प्रवेश शुल्क (Entry Fee):
| श्रेणी | शुल्क |
|---|---|
| भारतीय नागरिक | ₹35 |
| विदेशी नागरिक | ₹550 |
| 15 वर्ष से कम उम्र | नि:शुल्क |
| ऑनलाइन टिकट (Indian) | ₹30 (कुछ पोर्टल्स पर) |
- नोट: कार्ड/UPI पेमेंट की सुविधा भी उपलब्ध है।
निकटतम प्रसिद्ध रेस्टोरेंट्स:
- Qutub Institutional Area (पास में):
- Olive Bar & Kitchen (High-end, Romantic ambience)
- Lavaash by Saby – Armenian cuisine
2. Mehrauli & Saket Area:
- Jugmug Thela – Casual café
- Big Chill Café (Saket) – Italian & Continental
3. Street Food: आसपास कुछ स्टॉल्स होते हैं जहाँ समोसा, छोले-भटूरे, पानीपुरी आदि मिल जाते हैं।
फूड बजट (Per Person Estimate):
| प्रकार | बजट |
|---|---|
| स्ट्रीट फूड | ₹50 – ₹150 |
| बजट रेस्टोरेंट | ₹150 – ₹300 |
| मिड-रेंज (कैफ़े/रेस्टोरेंट) | ₹400 – ₹800 |
| हाई-एंड (Olive आदि) | ₹1000 – ₹2000+ |
ट्रांसपोर्ट बजट (Local Travel Budget):
| साधन | लागत (प्रति सवारी) |
|---|---|
| मेट्रो टिकट | ₹10 – ₹60 |
| ई-रिक्शा/ऑटो | ₹30 – ₹100 |
| कैब (OLA/Uber) | ₹100 – ₹300 (दूरी अनुसार) |
1 दिन का ट्रैवल बजट (औसतन):
- बजट ट्रैवलर: ₹150 – ₹250 (Metro + Auto)
- आरामदायक यात्रा (Cab आदि): ₹300 – ₹600
सुझाव:
- आप क़ुतुब मीनार के साथ ही मीनार के आसपास के परिसर (कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद, लौह स्तंभ, अलाई दरवाज़ा, अलाई मीनार) भी देख सकते हैं।
- कैमरा और मोबाइल फोटोग्राफी की अनुमति है।
3. लाल किला (Red Fort)

लाल किला, मुग़ल सम्राट शाहजहाँ द्वारा बनवाया गया था। यह किला मुग़ल काल का प्रसिद्ध किला है, जो दिल्ली के ऐतिहासिक स्थल में गिना जाता है। इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में भी मान्यता प्राप्त है। इसकी भव्यता और वास्तुकला को देखकर आप मुग़ल काल के गौरवमयी इतिहास से परिचित हो सकते हैं।
लाल किले में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण घटनाओं का भी गहरा इतिहास छिपा हुआ है, जिससे यह जगह न केवल ऐतिहासिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
लाल किला को मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने 1638 में बनवाना शुरू करवाया था और 1648 में पूरा हुआ था । राजधानी को आगरा से दिल्ली स्थानांतरित करने के बाद, इसे शाही निवास और प्रशासनिक केंद्र के रूप में बनाया गया। लाल बलुआ पत्थर से बना हुआ, यह किला भारत की स्वतंत्रता का प्रतीक है – हर साल 15 अगस्त को यहीं से प्रधानमंत्री झंडा फहराते हैं। UNESCO World Heritage Site: 2007 में घोषित किया गया।
- लाल किला भारत का एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। इसकी खूबसूरत वास्तुकला और अपना एक ऐतिहासिक महत्व है जो कि यहाँ आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करता है।
- इस किले के मुख्य वास्तुकार उस्ताद अहमद और उस्ताद हामिद थे। मुगल शासन के समय इस किले किला-ए-मुबारक कहा जाता था।
- यह किला यमुना नदी के किनारे स्थित है। इसे बाहरी हमलों से बचाने के लिए इसके चारों ओर एक विशाल दीवार बनाई गई थी। इसकी दीवार का निर्माण लाल पत्थर से हुआ है। जिसके चलते इसे लाल किला कहा जाता है। किले के मुख्य दो प्रवेश द्वार हैं- लाहौर गेट और दिल्ली गेट। लाल किला यह 256 एकड़ भूमि में बना हुआ एक अष्टकोणीय है संरचना है।
- लाल किले के अंदर कई खूबसूरत इमारतें हैं जैसे दीवान-ए-आम, दीवान-ए-ख़ास, रंगमहल, मोती मस्जिद, मोर सिंहासन हैं। कोहिनूर हीरा, मयूर सिंहासन का एक हिस्सा था जिसको अंग्रेज अपने साथ ले गए।
- कम लोगों को यह पता है कि लाल किला शुरू में सफेद रंग का था। इसे सफेद चूने (lime plaster) से ढंका गया था और जब यह प्लास्टर उखड़ गया, तो अंग्रेजों ने इसे संरक्षित रखने के लिए लाल रंग से रंगवा दिया। तभी से इसे ‘Red Fort’ यानी ‘लाल किला’ कहा जाने लगा।
- इसकी वास्तुकला में फारसी, तुर्की, और भारतीय शैलियों का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है।
- किले के भीतर ‘मीना बाजार’ यानी छत्ता चौक है, जो मुगल काल में शाही ख़रीददारी के लिए प्रसिद्ध था।
टाइमिंग (समय):
- खुला रहता है: मंगलवार से रविवार (सोमवार को बंद)
- समय: सुबह 9:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक
- लाइट एंड साउंड शो: शाम को अलग से टिकट लेकर देखा जा सकता है – हिंदी और अंग्रेज़ी में शो होते हैं।
निकटतम मेट्रो स्टेशन:
- चांदनी चौक (Chandni Chowk) – येलो लाइन पर
- यहाँ से लाल किला लगभग 1 किमी दूर है – पैदल, ई-रिक्शा या ऑटो से पहुँचा जा सकता है।
निकटतम रेलवे स्टेशन:
- ओल्ड दिल्ली रेलवे स्टेशन (Delhi Junction/DLI): लगभग 2 किमी
- नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (NDLS): लगभग 3-4 किमी
निकटतम हवाई अड्डा:
- इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (IGI Airport): लगभग 20-22 किमी
- एयरपोर्ट से मेट्रो (Airport Express → येलो लाइन ट्रांसफर) या टैक्सी द्वारा पहुँचा जा सकता है।
प्रवेश शुल्क (Entry Fee):
| श्रेणी | शुल्क |
|---|---|
| भारतीय नागरिक | ₹35 |
| विदेशी पर्यटक | ₹500 |
| 15 वर्ष से कम उम्र | नि:शुल्क |
| लाइट एंड साउंड शो | ₹60 – ₹100 (भाषा और सीट के अनुसार) |
निकटतम प्रसिद्ध रेस्टोरेंट्स:
- करीम्स (Karim’s), जामा मस्जिद के पास – मुग़लई खाना
2. अल जवाहर (Al Jawahar) – बिरयानी, कबाब
3. Paranthe Wali Gali, चांदनी चौक – विभिन्न प्रकार के परांठे
4. Haldiram’s (चांदनी चौक/CP) – North Indian Veg options
फ़ूड बजट:
| कैटेगरी | बजट (प्रति व्यक्ति) |
|---|---|
| स्ट्रीट फूड | ₹50 – ₹150 |
| बजट रेस्टोरेंट | ₹150 – ₹300 |
| मिड रेंज (करीम्स आदि) | ₹300 – ₹600 |
| हाई-एंड | ₹700+ |
ट्रांसपोर्ट बजट (दिल्ली में लोकल यात्रा के लिए):
| साधन | अनुमानित लागत (एक ओर) |
|---|---|
| मेट्रो | ₹10 – ₹50 |
| ई-रिक्शा/ऑटो | ₹20 – ₹100 (दूरी के अनुसार) |
| टैक्सी/OLA/Uber | ₹100 – ₹300 (लोकेशन पर निर्भर) |
एक दिन का लोकल ट्रैवल बजट (औसत अनुमान):
- मेट्रो + ऑटो/रिक्शा मिलाकर: ₹100 – ₹200 प्रति व्यक्ति
- टैक्सी द्वारा पूरा दिन घूमना: ₹600 – ₹1000
4. जामा मस्जिद (Jama Masjid)
यह न केवल भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है अपितु यह दिल्ली की सबसे बड़ी मस्जिद है और दिल्ली के पुराने शहर में स्थित है| इसे भी शाहजहाँ ने बनवाया था। यहां की वास्तुकला और माहौल बहुत आकर्षक है|
मस्जिद के आंगन में खड़े होकर आप दिल्ली के पुराने शहर का शानदार दृश्य देख सकते हैं। यह स्थल धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है और यहां आने वाले पर्यटकों को शांति का अनुभव होता है। यह स्थान न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि ऐतिहासिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है |
- मस्जिद को बनने में पुरे 12 साल लगे और तक़रीबन 5000 लोगो ने मिलकर इसे बनवाया था, और इसे बनाने में 1 मिलियन रुपयों की लागत लगी थी |
- मुगल शासक शाहजहाँ का यह अंतिम आर्किटेक्चरल काम था, इसके बाद उन्होंने किसी कलात्मक इमारत का निर्माण नही किया |
- “जामा मस्जिद” का अर्थ शुक्रवार मस्जिद होता है |
- यह मस्जिद लाल पत्थरों और संगमरमर का बना हुआ है।
- जामा मस्जिद का असली नाम “मस्जिद-ए-जहानुमा” (Masjid-e-Jahan Numa) है, जिसका अर्थ है “दुनिया को दिखाने वाली मस्जिद”।
- जामा मस्जिद भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है। इसमें एक समय में लगभग 25,000 लोग एक साथ नमाज अदा कर सकते हैं। इसका खुला आंगन 408 वर्ग फुट में फैला है, जो भारत के सबसे बड़े आंगनों में से एक है।
- मस्जिद का मुख्य भवन लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से बना है, जिसमें तीन विशाल द्वार और दो ऊंची मीनारें हैं।
- जामा मस्जिद की मीनारें करीब 40 मीटर ऊँची हैं। दक्षिणी मीनार पर चढ़कर आप पुरानी दिल्ली का खूबसूरत नजारा देख सकते हैं, लेकिन यहाँ चढ़ना थोड़ा चुनौतीपूर्ण है क्योंकि सीढ़ियाँ पतली और 130 के आसपास हैं।
- इसका पूर्वी द्वार केवल शुक्रवार को ही खोला जाता है। कहा जाता है कि कभी इसे सुल्तान ही उपयोग करते थे।
- मस्जिद के तीनों गुंबदों को सफेद और काले संगमरमर से सजाया गया है, जो इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं।
- यह मस्जिद लाल किला से केवल 500 मीटर की दूरी पर स्थित है और पुरानी दिल्ली का ऐतिहासिक और धार्मिक केंद्र है।
- जामा मस्जिद का निर्माण पारंपरिक फ़ारसी, भारतीय और मुगल स्थापत्य का अद्भुत संगम है, जो स्थापत्य प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
जामा मस्जिद, दिल्ली – सम्पूर्ण जानकारी तालिका
| विषय | विवरण |
|---|---|
| इतिहास | निर्माण: 1650-1656 ई. निर्माता: मुग़ल सम्राट शाहजहाँ विशेषता: भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक, 25,000 लोग एक साथ नमाज़ पढ़ सकते हैं |
| समय (Timings) | रोज़ाना खुला सुबह 7:00 बजे – दोपहर 12:00 बजे दोपहर 1:30 बजे – शाम 6:30 बजे (नमाज़ के समय पर्यटकों को प्रवेश नहीं) |
| निकटतम मेट्रो स्टेशन | – Jama Masjid Metro Station (मैजेंटा लाइन) – Chawri Bazar Metro Station (येलो लाइन) – 600 मीटर दूरी |
| निकटतम रेलवे स्टेशन | – Delhi Junction (Old Delhi) – 1.5 किमी – New Delhi Railway Station – 3 किमी |
| निकटतम एयरपोर्ट | IGI Airport (इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा) – लगभग 20-22 किमी |
| प्रवेश शुल्क | भारतीय/विदेशी नागरिक: नि:शुल्क फोटोग्राफी शुल्क: ₹300 – ₹400 मीनार चढ़ाई (यदि अनुमति हो): ₹100 ड्रेस कोड: अनिवार्य |
| प्रसिद्ध रेस्टोरेंट्स | – Karim’s (मुग़लई, कबाब) – Al Jawahar – Cool Point (शाही टुकड़ा, कुल्फ़ी) – Paranthe Wali Gali (थोड़ी दूरी पर) |
| फूड बजट (प्रति व्यक्ति) | स्ट्रीट फूड: ₹50 – ₹150 बजट रेस्टोरेंट: ₹150 – ₹300 मिड रेंज: ₹400 – ₹700 |
| ट्रांसपोर्ट बजट | मेट्रो: ₹10 – ₹50 ई-रिक्शा/ऑटो: ₹30 – ₹100 कैब (OLA/Uber): ₹100 – ₹250 |
| एक दिन का ट्रैवल बजट (अनुमान) | बजट ट्रैवलर: ₹150 – ₹250 कंफर्ट ट्रैवलर (Cab आदि): ₹300 – ₹600 |
5. अक्षरधाम मंदिर (Akshardham Temple)
अक्षरधाम मंदिर, दिल्ली के सबसे खूबसूरत और आधुनिक मंदिरों में से एक है। यहां की भव्यता, वास्तुकला, मूर्तियों और सांस्कृतिक प्रदर्शनों को देखकर आप मंत्रमुग्ध हो जाएंगे। मंदिर परिसर में एक बड़ा उद्यान और एक झील भी है, जहां आप शांतिपूर्ण वातावरण का आनंद ले सकते हैं। इस मंदिर का आर्किटेक्चर आपको अद्भुत भारतीय संस्कृति से परिचित कराता है।
यह मंदिर न केवल धार्मिक स्थल है, बल्कि भारतीय संस्कृति को समझने का एक बेहतरीन तरीका भी है। अक्षरधाम के प्रमुख आकर्षण यह मंदिर न केवल धार्मिक स्थल है, बल्कि भारतीय संस्कृति को समझने का एक बेहतरीन तरीका भी है।
- मंदिर का निर्माण लगभग 5 वर्षों में हुआ और 6 नवंबर 2005 को इसका उद्घाटन हुआ था |
- यह मंदिर परिसर लगभग 100 एकड़ भूमि में फैला है | मुख्य मंदिर की ऊँचाई 141 फीट, चौड़ाई 316 फीट और लंबाई 356 फीट है। इसमें 234 नक्काशीदार खंभे, 9 भव्य गुंबद, 20 शिखर और लगभग 20,000 मूर्तियाँ हैं।
- मंदिर गुलाबी बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से बना है। इसमें स्टील, लोहे या कंक्रीट का उपयोग नहीं किया गया है |
- मंदिर के गर्भगृह में भगवान स्वामीनारायण की 11 फीट ऊँची सोने की प्रतिमा स्थापित है
- अक्षरधाम मंदिर इतना विशाल है कि इसे हर पहलू से देखने में कम से कम 3 दिन लग जाते हैं।
- अक्षरधाम मंदिर का यज्ञ कुंड देश और दुनिया का सबसे बड़ा कुंड है। इस कुंड का नाम यज्ञपुरुष कुंड है।
- अक्षरधाम मंदिर भारत की महत्वपूर्ण वास्तुकला का एक आदर्श मिश्रण है।
- भरत उपवन एक वनस्पति उद्यान है, जिसमे पौधों और जड़ी-बूटियों की 300 से अधिक दुर्लभ प्रजातियाँ हैं।
- Akshardham Mandir में साप्ताहिक रूप से 1 लाख से अधिक लोग आते हैं।
- अक्षरधाम के प्रमुख आकर्षण मंदिर, हॉल ऑफ वैल्यू (सहजानंद प्रदर्शन), विशाल फिल्म स्क्रीन (नीलकंठ यात्रा), बोट राइड (संस्कृत विहार), म्यूजिकल फाउंटेन्स (यग्नपुरूष कुंड), गार्डन ऑफ इंडिया (भारत उपवन) , अभिषेक मंडप और सहज आनंद वॉटर शो हैं |
अक्षरधाम मंदिर, दिल्ली – सम्पूर्ण जानकारी तालिका
| विषय | विवरण |
|---|---|
| स्थान | अक्षरधाम रोड, पांडव नगर, नई दिल्ली |
| समय (Timings) | मंगलवार से रविवार: सुबह 9:30 AM – शाम 6:30 PM सोमवार को बंद दर्शन: 10:00 AM से अंतिम प्रवेश: शाम 6:30 PM फव्वारा शो: सूर्यास्त के बाद |
| निकटतम मेट्रो स्टेशन | Akshardham Metro Station (ब्लू लाइन) – मंदिर से लगभग 300 मीटर पैदल दूरी |
| निकटतम रेलवे स्टेशन | – Anand Vihar Terminal – ~8 किमी – New Delhi Railway Station (NDLS) – ~10 किमी |
| निकटतम एयरपोर्ट | IGI Airport (इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा) – लगभग 20–22 किमी दूर |
| प्रवेश शुल्क (Entry Fee) | मंदिर दर्शन: नि:शुल्क Exhibition Shows (तीन मुख्य शो): ₹250 (बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए रियायती दर) फव्वारा शो (Sahaj Anand Water Show): ₹90 – ₹120 |
| मोबाइल/कैमरा | मोबाइल फोन, कैमरा, बैग आदि अंदर ले जाना प्रतिबंधित है (क्लोक रूम में जमा करना होता है) |
| रेस्टोरेंट / भोजन व्यवस्था | परिसर में ही Premvati Food Court शुद्ध शाकाहारी भोजन उपलब्ध |
| फूड बजट (प्रति व्यक्ति) | ₹150 – ₹300 (खाने के विकल्प: थाली, साउथ इंडियन, स्नैक्स, मिठाइयाँ) |
| ट्रांसपोर्ट बजट (Local Travel) | मेट्रो टिकट: ₹10 – ₹50 ऑटो/ई-रिक्शा: ₹30 – ₹100 टैक्सी (OLA/Uber): ₹100 – ₹300 |
| एक दिन का यात्रा खर्च (अनुमान) | बजट ट्रैवलर: ₹200 – ₹300 कंफर्ट ट्रैवलर (कैब + एग्जीबिशन): ₹500 – ₹700 |
6. हुमायूं का मकबरा (Humayun’s Tomb)
हुमायूं का मकबरा, दिल्ली का एक और प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल है जो मुग़ल सम्राट हुमायूं की याद में बनवाया गया था। यह मकबरा ताजमहल की तरह सफेद संगमरमर से बना हुआ है और इसकी वास्तुकला में भी ताजमहल का प्रभाव देखने को मिलता है। हुमायूं के मकबरे के आसपास का उद्यान भी बहुत सुंदर और शांतिपूर्ण है।
यह मकबरा मुग़ल सम्राट हुमायूं का है और इसका वास्तुशिल्प ताजमहल से प्रभावित है। यह भी एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।
- हुमायूँ के मकबरे को उनकी मृत्यु के नौ साल बाद बनवाया गया था।
- इसका निर्माण फ़ारसी वास्तुकार मिराक मिर्ज़ा गियाथ के डिजाइन पर 1565 से 1572 ईसवी के बीच हुआ था।
- एक समकालीन इतिहासकार अब्द-अल-कादिर बदांयुनी के अनुसार इस मकबरे का निर्माण 1565 से 1572 ईसवी के बीच स्थापत्य फारसी वास्तुकार मिराक मिर्ज़ा गियाथ (मिर्ज़ा घियाथुद्दीन) द्वारा किया था, जिन्हें हेरात, बुखारा (वर्तमान उज़्बेकिस्तान में) से विशेष रूप से इस इमारत के लिये बुलवाया गया था।
- इसे मकबरे को बनाने में मूलरूप से पत्थरों को गारे-चूने से जोड़कर किया गया है और उसे लाल बलुआ पत्थर से ढंका हुआ है। इसके निर्माण में सर्वप्रथम लाल बलुआ पत्थर का इतने बड़े स्तर पर प्रयोग हुआ था।
- इसके ऊपर पच्चीकारी, फर्श की सतह, झरोखों की जालियों, द्वार-चौखटों और छज्जों के लिये सफ़ेद संगमरमर के पत्थरों का प्रयोग किया गया है।
- जब इस मकबरे का निर्माण किया गया था, तब इसकी लागत 15 लाख रुपये थी।
- इस इमारत में अन्दर जाने के लिये दो 16 मीटर ऊंचे दुमंजिले प्रवेशद्वार पश्चिम और दक्षिण में बने हैं।
- मुख्य इमारत के ईवान पर सितारे के समान बना एक छः किनारों वाला सितारा मुख्य प्रवेश द्वार को ओर भी आकर्षक बना देता है।
- इस मकबरे की ऊंचाई 47 मीटर और चौड़ाई 300 फीट है।
- इस मकबरे पर एक फारसी बल्बुअस गुम्बद भी बना हुआ है। यह गुम्बद 42.5 मीटर के ऊंचे गर्दन रूपी बेलन पर बना है। जिसके ऊपर 6 मीटर ऊंचा पीतल का किरीट कलश स्थापित है और उसके ऊपर चंद्रमा लगा हुआ है, जो तैमूर वंश के मकबरों में मिलता है।
हुमायूं का मकबरा, दिल्ली – सम्पूर्ण जानकारी तालिका
| विषय | विवरण |
|---|---|
| स्थान | मथुरा रोड, निजामुद्दीन ईस्ट, नई दिल्ली |
| समय (Timings) | रोज़ाना खुला (Monday to Sunday) सुबह 6:00 AM – शाम 6:00 PM |
| निकटतम मेट्रो स्टेशन | JLN Stadium Metro Station (वायलेट लाइन) – लगभग 1.5 किमी Indraprastha Metro Station (ब्लू लाइन) – लगभग 2.5 किमी |
| निकटतम रेलवे स्टेशन | Hazrat Nizamuddin Railway Station – लगभग 1.5 किमी New Delhi Railway Station (NDLS) – लगभग 7 किमी |
| निकटतम हवाई अड्डा | IGI Airport (इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा) – लगभग 17–20 किमी दूर |
| प्रवेश शुल्क (Entry Fee) | भारतीय नागरिक: ₹35 विदेशी नागरिक: ₹550 15 वर्ष से कम उम्र: नि:शुल्क Online टिकट पर ₹5 तक की छूट मिल सकती है |
| फोटोग्राफी शुल्क | मोबाइल और कैमरा फोटोग्राफी: नि:शुल्क प्रोफेशनल शूट (फिल्मिंग): अनुमति और फीस के साथ |
| रेस्टोरेंट / भोजन विकल्प | – Cafe Lota (क्राफ्ट म्यूज़ियम के पास) – Sunder Nursery Café (पास में सुंदर नर्सरी) – नज़दीक में खान मार्केट, निज़ामुद्दीन बस्ती के स्ट्रीट फूड |
| फूड बजट (प्रति व्यक्ति) | स्ट्रीट फूड: ₹50 – ₹150 बजट कैफे: ₹150 – ₹300 मिड-रेंज कैफे/रेस्टोरेंट: ₹400 – ₹700 |
| ट्रांसपोर्ट बजट (Local Travel) | मेट्रो: ₹10 – ₹50 ऑटो/ई-रिक्शा: ₹30 – ₹100 कैब (OLA/Uber): ₹100 – ₹250 |
| एक दिन का अनुमानित यात्रा खर्च | बजट ट्रैवलर: ₹200 – ₹300 कंफर्ट ट्रैवलर: ₹400 – ₹600 (टिकट + फूड + ट्रांसपोर्ट शामिल) |
7. लोटस टेम्पल (Lotus Temple)
लोटस टेम्पल, दिल्ली का एक बहुत ही प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है जो अपनी अद्भुत कमल के फूल के आकार के लिए जाना जाता है। यह मंदिर बहाई धर्म के अनुयायियों के लिए है और यह हर धर्म के लोगों के लिए खुला है। मंदिर में शांति और ध्यान की स्थिति में बैठने के लिए एक बहुत ही शांतिपूर्ण वातावरण है। यहां आकर आप मानसिक शांति का अनुभव कर सकते हैं।
- दिल्ली के नेहरू प्लेस में स्थित लोटस टेम्पल बहाई धर्म की आस्था से जुड़ा एक पवित्र और धार्मिक स्थल है। जिसकी स्थापना बहा-उल्लाह ने की थी। जबकि कनाडा के रहने वाले मशहूर वास्तुकार फरीबर्ज सहबा ने इसका डिजाइन तैयार किया था।
- कमल मंदिर में बने इसके भव्य प्रार्थना सभागार में एक बार में करीब ढाई हजार लोग आ सकते हैं।
- अपनी अद्भुत वास्तुशिल्प के लिए मशहूर इस लोटस टेम्पल को देखने रोजाना करीब 10 हजार लोग आते हैं।
- लोटस टेम्पल एशिया महाद्धीप का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां मूर्ति पूजा नहीं होती है, यह मंदिर प्रभु की उपस्थिति में विश्वास रखता है एवं यह सभी धर्मों के लिए खुला हुआ है। यह मंदिर ”अनेकता में एकता’ के सिद्धांत को यथार्थ रुप देता है एवं सभी धर्मों का आदर करता है।
- करीब 42 मीटर लंबा यह प्रसिद्ध कमल मंदिर दुनिया के बहाई समुदाय के 7 प्रमुख स्थलों में से एक है। भारत के अलावा बहाई धर्म के अन्य स्थल पनामा, अपिया, विलेमेट, सिडनी, कंपाला, फ्रैंकफर्ट आदि शहरों में स्थित है।
- आधे खिले हुए कमल के फूल के आकार के बने इस मंदिर ने अपनी अद्भुत वास्तुशिल्प और डिजाइन के लिए कई आर्किटेक्चरल अवॉर्ड भी जीते हैं। दुनिया के कोने-कोने से लोग इसकी खूबसूरती को देखने आते हैं।
- 1986 में निर्मित आधुनिक वास्तुशिल्प पर आधारित इस कमल मंदिर को मॉडर्न भारत अर्थात 20वीं सदी का ताजमहल भी कहा जाता है।
- दिल्ली के प्रमुख आर्कषणों में से एक यह कमल मंदिर करीब 40 मीटर लंबा है और चारों तरफ से 9 तालाबों से घिरा हुआ है।
- विश्व के सात बहाई केन्द्रों में से एक लोटस टेम्पल के 9 दरवाजे एवं 9 कोने हैं, जिसे लेकर यह माना जाता है कि 9 सबसे बड़ा नंबर है जो कि विस्तार, एकता एवं अखंडता को प्रदर्शित करता है।
- करीब 26 एकड़ के क्षेत्रफल में बने इस मंदिर को करीब 700 टेक्नीशियन, इंजीनियर और कलाकारों ने मिलकर बनाया है।
- कमल के आकार में बने हुए इस मंदिर में 27 खड़ी हुईं कमल के फूल की पंखुड़ियां बनी हुई हैं, जिसे जंग से बचाने के लिए इसके शेल्स को स्टील से गेल्वनाइज्ड किया गया है।
लोटस टेम्पल (Lotus Temple), दिल्ली – सम्पूर्ण जानकारी तालिका
| विषय | विवरण |
|---|---|
| स्थान | कालकाजी, नेहरू प्लेस, दक्षिणी दिल्ली |
| समय (Timings) | मंगलवार से रविवार: 9:00 AM – 5:00 PM (अक्टूबर–मार्च) 9:00 AM – 7:00 PM (अप्रैल–सितंबर) सोमवार को बंद |
| निकटतम मेट्रो स्टेशन | Kalkaji Mandir Metro Station – वायलेट और मैजेंटा लाइन पर, लगभग 500 मीटर पैदल दूरी |
| निकटतम रेलवे स्टेशन | Hazrat Nizamuddin Station – ~7 किमी New Delhi Railway Station (NDLS) – ~13 किमी |
| निकटतम हवाई अड्डा | इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (IGI Airport) – लगभग 18–20 किमी दूर |
| प्रवेश शुल्क (Entry Fee) | पूरी तरह नि:शुल्क सभी नागरिकों के लिए |
| फोटोग्राफी | मोबाइल और कैमरा फोटोग्राफी अनुमत है (नि:शुल्क) प्रोफेशनल शूट के लिए अनुमति आवश्यक |
| रेस्टोरेंट / भोजन विकल्प | – Nehru Place और Kalkaji Area: Sagar Ratna (South Indian) Haldiram’s Local cafés & snack stalls |
| फूड बजट (प्रति व्यक्ति) | स्ट्रीट फूड: ₹50 – ₹150 बजट रेस्टोरेंट: ₹150 – ₹300 मिड-रेंज रेस्टोरेंट: ₹400 – ₹600 |
| ट्रांसपोर्ट बजट (Local Travel) | मेट्रो टिकट: ₹10 – ₹50 ई-रिक्शा/ऑटो: ₹30 – ₹100 कैब (OLA/Uber): ₹100 – ₹250 |
| एक दिन का अनुमानित यात्रा खर्च | बजट ट्रैवलर: ₹150 – ₹250 कंफर्ट ट्रैवलर: ₹300 – ₹500 |
8. दिल्ली हाट (Dilli Haat)
दिल्ली हाट, एक शॉपिंग और सांस्कृतिक केंद्र है जहां आपको भारतीय विभिन्न राज्यों के शिल्प, कला और भोजन का अनुभव मिलेगा। यहां आपको हैंडीक्राफ्ट्स, हस्तशिल्प, कपड़े, और अन्य अद्भुत भारतीय वस्तुएं मिलेंगी। इसके अलावा, यहाँ आपको हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, और अन्य राज्यों का पारंपरिक खाना भी मिल सकता है। यहां आपको बहुत कुछ नया देखने और सीखने को मिलेगा।
- अगर दिल्ली हाट बाजार घूमने के लिए जा रहे हैं विक्रेताओं की काफी भीड़ देखने को मिल सकती है। अगर आप यहां से कुछ खरीदते हैं तो मोलभाव जरुर करें, क्योंकि विक्रेता आपको किसी भी वस्तु का ज्यादा मूल्य ही बताएंगे।
- यहां की यात्रा के दौरान आप गर्मी से बचने के लिए आपको सिर पर टोपी पहनना चाहिए और खूब सारा पानी पीना चाहिए।
- अगर आप दिल्ली हाट बाजार की भीड़-भाड़ से बचना चाहते हैं तो वर्किंग डेज पर या घूमने आए। इस दौरान यहां पर काफी कम भीड़ देखने को मिलती है।
- आपको बता दें कि दिल्ली हाट को जनकपुरी में शहर के भीतर संगीत समारोहों का केंद्र बनाने के विचार से विकसित किया गया था। यहां पर लोगों को विभिन्न समारोह को देखने के लिए एक ऑडिटोरियम बनाया गया था।
- साल 2011 में भारत में पहला कॉमिक कॉन दिल्ली हाट में इसके केंद्रीय महत्व के कारण आयोजित किया गया था।
- पंद्रह दिनों के लिए 100 रूपये प्रति दिन के शुल्क के साथ व्यापारियों को यहां पर स्टॉल लगाने दिया जाता है।
- इस क्षेत्र में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए बहुत सारे त्योहार जैसे भोजन उत्सव, आम त्योहार और समर फेस्टिवल आयोजित किए जाते हैं।
दिल्ली हाट (Dilli Haat), INA – सम्पूर्ण जानकारी तालिका
| विषय | विवरण |
|---|---|
| स्थान | श्री अरबिंदो मार्ग, INA, दक्षिणी दिल्ली |
| समय (Timings) | हर दिन खुला (सोमवार से रविवार) सुबह 10:30 AM – रात 10:00 PM |
| निकटतम मेट्रो स्टेशन | INA Metro Station (येलो + पिंक लाइन इंटरचेंज) – लगभग 200 मीटर पैदल दूरी |
| निकटतम रेलवे स्टेशन | Hazrat Nizamuddin Station – लगभग 8 किमी New Delhi Railway Station (NDLS) – लगभग 10 किमी |
| निकटतम हवाई अड्डा | इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (IGI Airport) – लगभग 12–15 किमी |
| प्रवेश शुल्क (Entry Fee) | भारतीय नागरिक: ₹30 (व्यस्क) / ₹10 (बच्चे) विदेशी नागरिक: ₹100 |
| फोटोग्राफी | सामान्य फोटोग्राफी नि:शुल्क प्रोफेशनल शूट के लिए अनुमति आवश्यक |
| मुख्य आकर्षण | – हस्तशिल्प और हथकरघा बाजार – पूरे भारत के क्षेत्रीय व्यंजन – सांस्कृतिक कार्यक्रम, लाइव म्यूज़िक |
| रेस्टोरेंट / भोजन विकल्प | – हर राज्य का स्टॉल (जैसे बिहारी लिट्टी, नागालैंड का स्मोक्ड पोर्क, बंगाली मछली, पंजाबी छोले भटूरे आदि) – दिल्ली हाट में ही भोजन की पूरी सुविधा |
| फूड बजट (प्रति व्यक्ति) | स्ट्रीट/फूड स्टॉल: ₹100 – ₹200 क्षेत्रीय थाली/भोजन: ₹200 – ₹400 |
| ट्रांसपोर्ट बजट (Local Travel) | मेट्रो टिकट: ₹10 – ₹50 ई-रिक्शा/ऑटो: ₹30 – ₹80 कैब (OLA/Uber): ₹100 – ₹200 |
| एक दिन का यात्रा खर्च (अनुमान) | बजट ट्रैवलर: ₹200 – ₹300 कंफर्ट ट्रैवलर: ₹400 – ₹600 |
9. चांदनी चौक (Chandni Chowk)

चांदनी चौक, दिल्ली का सबसे पुराना और मशहूर बाजार है। यहां आपको भारतीय शिल्प, ज्वेलरी, कपड़े, और स्वादिष्ट खाना मिलेगा। यह स्थान दिल्ली के इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
चांदनी चौक, दिल्ली का एक बहुत ही पुराना और प्रसिद्ध बाजार है जो दिल्ली के पुराने शहर में स्थित है। यहां पर आपको पुराने समय की दिल्ली की असली झलक मिलेगी। इस बाजार में आपको सब कुछ मिलेगा, जैसे कि कपड़े, ज्वेलरी, खाने की दुकानें, और बहुत कुछ। इसके अलावा, चांदनी चौक के आसपास कई ऐतिहासिक स्थल भी हैं, जहा आप घूम भी सकते हैं।
चांदनी चौक दिल्ली का सबसे पुराना और व्यस्त इलाका है, जो पुरानी दिल्ली के दिल में स्थित है। यह बाजार लाल किले के ठीक सामने शुरू होता है और फतेहपुरी मस्जिद तक फैला है। चांदनी चौक का निर्माण 17वीं सदी में मुगल सम्राट शाहजहां ने करवाया था, जबकि इसका डिज़ाइन उनकी बेटी जहांआरा बेगम ने तैयार किया था |
चांदनी चौक नाम इसलिए पड़ा क्योंकि बाजार के बीच में एक बड़ा तालाब (या पानी की टंकी) था, जिसमें चांद की रोशनी पड़ने पर पानी चमकने लगता था। इसी चांदनी के प्रतिबिंब के कारण इसे ‘चांदनी चौक’ कहा गया
बाजार का डिज़ाइन चौकोर था, और बीच में बहती नहर या तालाब इसकी खासियत थी। बाद में यह जगह व्यापार और वाणिज्य का केंद्र बन गई |
- मुगल काल से ही यह भारत का सबसे बड़ा थोक बाजार रहा है। यहाँ वस्त्र, आभूषण, मसाले, मिठाइयाँ और अन्य कई पारंपरिक वस्तुएँ मिलती हैं |
- चांदनी चौक में हर धर्म से जुड़ी ऐतिहासिक इमारतें हैं—जैसे गौरी शंकर मंदिर (हिंदू), फतेहपुरी मस्जिद (मुस्लिम), शीशगंज गुरुद्वारा (सिख), और सेंट्रल बैपटिस्ट चर्च (ईसाई) |
- यहाँ की संकरी गलियाँ, पुराने मकान, गुंबद, और ऐतिहासिक बाजार आज भी मुगलकालीन दिल्ली की झलक दिखाते |
- यहाँ की परांठे वाली गली, चावड़ी बाजार, और दरीबा कला जैसी गलियाँ भी बहुत मशहूर हैं |
- यह दिल्ली का सबसे पुराना और सबसे व्यस्त बाजार है, जहाँ पिछले कई सौ वर्षों से दुकानें चल रही हैं और कई परिवार पीढ़ियों से कारोबार करते आ रहे हैं।
- चाँदनी चौक की गलियाँ इतनी संकरी और व्यस्त होती हैं कि यहाँ बैलगाड़ी, रिक्शा और पैदल चलना आम बात है—वाहनों का प्रवेश बहुत सीमित होता है।
- मुगलकालीन समय में यह बाजार शाही दरबार की जरूरतों को पूरा करता था—कपड़े, इत्र, गहनों की दुकानें और मीना बाजार यहीं स्थित था।
- पुरानी दिल्ली की ‘चाँदनी चौक’ फिल्म और साहित्य में भी कई बार वर्णित होती रही है, और यहाँ की भीड़-भाड़ तथा रंगीन संस्कृति इसके मुख्य आकर्षण हैं।
चांदनी चौक, दिल्ली – सम्पूर्ण जानकारी तालिका
| विषय | विवरण |
|---|---|
| स्थान | पुरानी दिल्ली, लाल किला के पास |
| समय (Timings) | हर दिन खुला (रविवार को कई दुकानें बंद हो सकती हैं) सामान्य समय: सुबह 10:00 AM – रात 8:00 PM धार्मिक स्थल (जैसे शीशगंज गुरुद्वारा, जैन मंदिर): सुबह से खुले |
| निकटतम मेट्रो स्टेशन | Chandni Chowk Metro Station (येलो लाइन) – लगभग 300 मीटर पैदल नई अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन से अब पहुँच और भी आसान हो गई है |
| निकटतम रेलवे स्टेशन | Old Delhi Railway Station (DLI) – लगभग 1 किमी New Delhi Railway Station (NDLS) – लगभग 3 किमी |
| निकटतम हवाई अड्डा | IGI Airport, दिल्ली – लगभग 20–22 किमी मेट्रो (एयरपोर्ट एक्सप्रेस → येलो लाइन) से जुड़ाव है |
| प्रवेश शुल्क (Entry Fee) | कोई प्रवेश शुल्क नहीं – यह एक ओपन मार्केट और पब्लिक एरिया है |
| प्रसिद्ध खाने के स्थान | परांठे वाली गली – Stuffed Parat करीम्स – मुग़लई खाना नटराज भल्ला चाट घांटेवाला हलवाई (मिठाई) Old Famous Jalebi Wala बृजभूषण छोले भटूरे |
| फूड बजट (प्रति व्यक्ति) | स्ट्रीट फूड: ₹50 – ₹150 बजट रेस्टोरेंट: ₹150 – ₹300 मिड-रेंज (करीम्स आदि): ₹400 – ₹600 |
| ट्रांसपोर्ट बजट (Local Travel) | मेट्रो टिकट: ₹10 – ₹50 ई-रिक्शा/ऑटो: ₹30 – ₹100 टैक्सी (OLA/Uber): ₹100 – ₹250 |
| एक दिन का यात्रा खर्च (अनुमान) | बजट ट्रैवलर: ₹200 – ₹300 कंफर्ट ट्रैवलर: ₹400 – ₹600 |
10. संसद भवन (Parliament House)
भारत की लोकतांत्रिक संरचना को दर्शाता संसद भवन, एक महत्वपूर्ण राजनीतिक स्थल है। संसद भवन दिल्ली के केंद्र में स्थित महत्वपूर्ण सरकारी भवन हैं। यहां पर भारतीय संसद के सभी कार्य होते हैं। यहां की भव्यता और वास्तुकला दर्शनीय है।
- पार्लियामेंट हाउस की इमारत का डिजाइन प्रसिद्ध वास्तुकारों- सर एडविन लुटियन और सर हर्बर्ट बेकर द्वारा किया गया था।
- संसद भवन का नींव का पत्थर 12 फरवरी 1921 को रखी गई थी।
- आपको बता दें कि इस भवन के निर्माण में छह साल लगे।
- उस समय पार्लियामेंट हाउस के निर्माण की लागत 83 लाख थी।
- पार्लियामेंट हाउस 560 फीट (170.69 मीटर) व्यास में का विशाल गोलाकार घेरा है।
- यह भवन लगभग छह एकड़ (24281.16 वर्ग मीटर) के क्षेत्र को कवर करता है।
- इस आकर्षक इमारत में बलुआ पत्थर से निर्मित 27 फीट ऊंचे 144 क्रीमी खंभे हैं।
- भवन का सेंट्रल हॉल आकार में गोलाकार है और इसका गुंबद जो 98 फीट (29।87 मीटर) व्यास का है, आपको जानकर हैरानी होगी कि इसे दुनिया के सबसे शानदार गुंबदों में से एक कहा जाता है।
- इस भवन के चैंबर में 550 सदस्यों के लिए बैठने की जगह है।
- चैंबर की सीटों को छह ब्लॉकों में विभाजित किया गया है, जिनमें से प्रत्येक में ग्यारह पंक्तियाँ हैं।
- संसद भवन में 212 कारों के लिए पार्किंग की जगह है।
संसद भवन (Parliament House), नई दिल्ली – सम्पूर्ण जानकारी तालिका
| विषय | विवरण |
|---|---|
| स्थान | संसद मार्ग, राष्ट्रपति भवन के पास, नई दिल्ली |
| समय (Timings) | आम जनता के लिए नियमित विज़िटिंग समय नहीं होता Guided Tour के लिए: सुबह 11:00 AM – दोपहर 1:00 PM तक (पूर्व अनुमति के साथ) संसद सत्र के समय विज़िटिंग बंद |
| निकटतम मेट्रो स्टेशन | Central Secretariat Metro Station (येलो और वायलेट लाइन इंटरचेंज) – लगभग 1 किमी दूर |
| निकटतम रेलवे स्टेशन | New Delhi Railway Station (NDLS) – लगभग 5 किमी Hazrat Nizamuddin Station – लगभग 8 किमी |
| निकटतम हवाई अड्डा | IGI Airport (T3, दिल्ली) – लगभग 15–17 किमी मेट्रो से एयरपोर्ट एक्सप्रेस → येलो लाइन द्वारा पहुँचा जा सकता है |
| प्रवेश शुल्क (Entry Fee) | नि:शुल्क, परंतु पूर्व अनुमति अनिवार्य – पास लोकसभा या राज्यसभा सचिवालय से मिलता है भारतीय नागरिकों के लिए पहचान पत्र आवश्यक है |
| गाइडेड टूर (Parliament Museum + Visit) | ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन (https://sansad.in पर) स्कूल ग्रुप, संस्थान, या आम नागरिक सीमित संख्या में |
| फोटोग्राफी | पूरी तरह प्रतिबंधित (सुरक्षा कारणों से) |
| रेस्टोरेंट / भोजन विकल्प | संसद परिसर में आम जनता के लिए रेस्टोरेंट नहीं पास में Connaught Place (CP), Janpath, और खान मार्केट में कई अच्छे रेस्टोरेंट उपलब्ध |
| फूड बजट (प्रति व्यक्ति) | स्ट्रीट फूड (राजपथ/CP): ₹50 – ₹150 बजट रेस्टोरेंट: ₹200 – ₹300 मिड रेंज (CP/Khan Market): ₹400 – ₹800 |
| ट्रांसपोर्ट बजट (Local Travel) | मेट्रो टिकट: ₹10 – ₹50 ऑटो/ई-रिक्शा: ₹30 – ₹100 टैक्सी (OLA/Uber): ₹100 – ₹250 |
| एक दिन का यात्रा खर्च (अनुमान) | बजट ट्रैवलर: ₹200 – ₹300 कंफर्ट ट्रैवलर: ₹400 – ₹600 |
11. राष्ट्रपति भवन (Rashtrapati Bhavan)

राष्ट्रपति भवन भारतीय राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास स्थान है। इसकी भव्यता और शानदार वास्तुकला से आपको भारतीय सरकार के कामकाजी माहौल का अहसास होगा। आप यहाँ पे घुन सकते है और भारतीय राजनीति का अहसास कर सकते हैं।
- राष्ट्रपति भवन भारत सरकार के राष्ट्रपति का सरकारी आवास है।
- राष्ट्रपति भवन, भारत की राजधानी नई दिल्ली में स्थित है।
- इसका निर्माण 1912 से 1929 के बीच ब्रिटिश आर्किटेक्ट एडविन लुटियंस द्वारा किया गया था।
- राष्ट्रपति भवन को पहले ‘वायसरॉय हाउस’ के नाम से जाना जाता था।
- राष्ट्रपति भवन का कुल क्षेत्रफल 330 एकड़ में फैला हुआ है।
- राष्ट्रपति भवन में 340 कमरे और कई विशाल हॉल हैं।
- बैंक्वेट हॉल, अशोक मंडप और गणतंत्र मंडप राष्ट्रपति भवन के प्रमुख हॉल हैं।
- राष्ट्रपति भवन में भारतीय और पश्चिमी वास्तुकला का मिश्रण देखा जा सकता है।
- गणतंत्र मंडप में भारत की नयी सरकार का शपथ ग्रहण समारोह होता है।
- राष्ट्रपति भवन के निर्माण में लाल बलुआ पत्थर का उपयोग हुआ है।
- राष्ट्रपति भवन में विश्व प्रसिद्ध “मुगल गार्डन” है, जो सुंदर फूलों और पेड़ों से भरा हुआ है।
राष्ट्रपति भवन (Rashtrapati Bhavan), दिल्ली – सम्पूर्ण जानकारी तालिका
| विषय | विवरण |
|---|---|
| स्थान | राष्ट्रपति मार्ग, राजपथ के पश्चिम छोर पर, नई दिल्ली |
| समय (Timings) | गाइडेड टूर (बुकिंग अनिवार्य): – गोल्डन ट्राएंगल (मुख्य भवन, संग्रहालय, उद्यान): शुक्रवार, शनिवार, रविवार – समय: सुबह 9:30 AM – शाम 4:30 PM (टाइम स्लॉट अनुसार) मुग़ल गार्डन (Amrit Udyan): जनवरी-मार्च (सीजनल) |
| निकटतम मेट्रो स्टेशन | Central Secretariat Metro Station (येलो + वायलेट लाइन इंटरचेंज) – लगभग 1 किमी दूर |
| निकटतम रेलवे स्टेशन | New Delhi Railway Station (NDLS): ~6 किमी Hazrat Nizamuddin Station: ~8 किमी |
| निकटतम हवाई अड्डा | IGI Airport (T3): लगभग 14–16 किमी एयरपोर्ट मेट्रो + येलो लाइन से पहुँचा जा सकता है |
| प्रवेश शुल्क (Entry Fee) | गोल्डन ट्राएंगल टूर: ₹50 (भारतीय) ग्रुप बुकिंग या स्कूल टूर: विशेष छूट म्यूज़ियम टूर: ₹50 Amrit Udyan Tour: निशुल्क (सीजनल) ऑनलाइन बुकिंग आवश्यक: https://rb.nic.in |
| फोटोग्राफी | बाहर फोटोग्राफी अनुमति है अंदर अनुमति नहीं |
| मुख्य आकर्षण | राष्ट्रपति भवन, अमृत उद्यान (मुग़ल गार्डन), संग्रहालय परिसर, 340 कमरे, भव्य वास्तुकला |
| रेस्टोरेंट / भोजन विकल्प | परिसर में कैफेटेरिया नहीं पास के स्थान: – Connaught Place – Janpath – Central Secretariat कैन्टीन (केवल सरकारी स्टाफ) |
| फूड बजट (प्रति व्यक्ति) | स्ट्रीट फूड/स्नैक्स: ₹50 – ₹150 बजट रेस्टोरेंट (Janpath/CP): ₹200 – ₹300 मिड रेंज (Khan Market/CP): ₹400 – ₹700 |
| ट्रांसपोर्ट बजट (Local Travel) | मेट्रो टिकट: ₹10 – ₹50 ऑटो/रिक्शा: ₹30 – ₹100 टैक्सी (OLA/Uber): ₹100 – ₹250 |
| एक दिन का यात्रा खर्च (अनुमान) | बजट ट्रैवलर: ₹200 – ₹300 कंफर्ट ट्रैवलर: ₹400 – ₹600 |
12. इस्कॉन मंदिर (ISKCON Temple)
इस्कॉन मंदिर, भगवान श्री कृष्ण के भक्तों के लिए एक प्रमुख स्थल है। यहां धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण में आपको शांति का अनुभव होगा।
- ISKCON का पूर्ण रूप “International Society for Krishna Consciousness” है, जिसे हिंदी में अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ या इस्कॉन कहा जाता हैं।
- इस्कॉन मंदिर को हरे राम हरे कृष्ण पंथ के भक्तों द्वारा श्रीमद भगवत गीता के संदेश को पहुंचाने के लिए बनाया गया था।
- इस्कॉन के दिल्ली में कुल 8 मंदिर हैं और पूर्व कैलाश में बना मुख्य मंदिर 3 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है।
- यह मंदिर तीन भागो में विभाजित है। मंदिर परिसर के पहले भाग में श्री गौरी निताल का विस्तृत ढांचा है जिसमें श्री नित्यानंद प्रभु और श्री चैतन्य प्रभु का सबसे दयालु अवतार के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होता है।
- दूसरे भाग में श्री राधा कृष्ण पार्थसारथी के देवता के साथ ललिता और विशाका व उनके सबसे गोपनीय गोपियों की प्रतिमा बनी हुई है।
- तीसरे भाग में भगवान राम, देवी सीता, भगवान लक्ष्मण और वानरराज हनुमान जी की प्रतिमाएं भी मौजूद हैं।
- मंदिर के कुछ मुख्य भागो में वेदिक संस्कृति संग्रहालय, वैदिक कला प्रदर्शन संग्रहालय, आश्रम और कृष्ण जयंती उद्यान आदि शामिल है।
- यह मंदिर अद्भुत वास्तुकला का एक शानदार उदाहरण है, जिसके शिखर की ऊंचाई 90 मीटर से भी ज्यादा हैं।
- बैंगलोर में स्थित इस्कॉन मंदिर विश्व का सबसे बड़ा इस्कॉन मंदिर हैं। जिसका निर्माण साल 1997 में किया गया था।
- इस्कॉन के अनुयायी संसार में गीता एवं हिन्दू धर्म एवं संस्कृति का प्रचार-प्रसार करते हैं।
- इस्कॉन समूह के वर्तमान समय में विश्व के 77 देशों में लगभग 600 से ज्यादा मंदिर, 65 कृषि समुदाय, 30 शिक्षा केंद्र और 100 से अधिक रेस्तरां मौजूद हैं।
- सभी इस्कॉन मन्दिरों में श्री कृष्ण जन्माष्टमी, गौरी पूर्णिमा, रामनवमी, गोवर्धन पूजा और राधाष्टमी जैसे त्यौहारों को भव्यता से मनाया जाता है।
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| मंदिर का नाम | ISKCON मंदिर, श्री श्री राधा पार्थसारथी मंदिर, दिल्ली |
| समय (Timings) | सुबह 4:30 AM से शाम 9:00 PM (दोपहर 12:00 से 3:00 बजे तक बंद) |
| निकटतम मेट्रो स्टेशन | कैलाश कॉलोनी (वॉयलेट लाइन), लगभग 1.5 किमी दूर |
| प्रवेश शुल्क | नि:शुल्क |
| गोविंदा रेस्टोरेंट समय | सुबह 8:30 AM – 11:30 AM (नाश्ता), दोपहर 12:30 PM – 3:30 PM, शाम 7:00 PM – 10:00 PM |
| रेस्टोरेंट बजट | लगभग ₹850 दो व्यक्ति के लिए |
13. ख़रीदी महल (Khirki Masjid)
यह मस्जिद दिल्ली के एक अलग और अद्भुत क्षेत्र में स्थित है और इसकी वास्तुकला भी बहुत खास है। खिड़की मस्जिद दिल्ली के तुगलकाबाद क्षेत्र में स्थित एक ऐतिहासिक और स्थापत्य दृष्टि से अनूठी मस्जिद है, जिसका निर्माण 14वीं शताब्दी में फिरोज शाह तुगलक के प्रधानमंत्री खान-ए-जहान जुनैन शाह ने 1351-54 के बीच करवाया था |
यह मस्जिद ‘खिड़की मस्जिद’ इसलिए कहलाती है क्योंकि इसकी वास्तुकला में चारों ओर बड़ी-बड़ी खिड़कियां बनाई गई हैं, जो मस्जिद के अंदर प्राकृतिक रोशनी और हवा का संचार सुनिश्चित करती हैं |
- मस्जिद की संरचना चौकोर है और इसमें चार बड़े दरवाजे हैं, जो चारों दिशाओं में खुलते हैं |
- मस्जिद दो मंजिला है और चारों कोनों पर बुर्ज (मीनारनुमा टावर) बने हैं, जिससे इसे किले जैसा रूप मिलता है
- मस्जिद की ऊपरी मंजिल में बड़ी-बड़ी खिड़कियां हैं, जो इसे अन्य मस्जिदों से अलग बनाती हैं |
- मस्जिद के प्रवेश द्वार पर तीन मीनारें हैं, और पुराने समय में पूर्वी द्वार से प्रवेश किया जाता था, लेकिन अब दक्षिण द्वार खुला रहता है |
- मस्जिद में कई गुंबद हैं, जिनमें से कुछ अब ध्वस्त हो चुके हैं |
- यह मस्जिद तुगलक कालीन स्थापत्य का अद्भुत उदाहरण मानी जाती है; इसकी छत पर लगभग 81 गुम्बद बने हैं। खिड़कियों और जालीदार दीवारों की वजह से मस्जिद के अंदर स्वाभाविक रूप से रौशनी और हवा पहुंचती है।
- आमतौर पर अधिकतर मस्जिदें खुली होती हैं, लेकिन ख़िड़की मस्जिद एक ‘कवर्ड मस्जिद’ यानी छत-युक्त मस्जिद के रूप में प्रसिद्ध है—यह दिल्ली की चार-आँगन वाली मकबूल मस्जिदों में से एक है।
- यह मस्जिद दिल्ली की उन गिनीचुनी जगहों में से है जो आज भी अपने प्राचीन स्वरूप में अधिकांश संरक्षित हैं, हालाँकि समय के साथ इसमें कुछ क्षति जरूर पहुँची है।
- मस्जिद के चारों तरफ बने विशाल आँगन, मेहराबें और भारी खंबे इसकी सुंदरता में चार चाँद लगा देते हैं।
- यहां का शांत वातावरण, स्थापत्य और छायादार गलियाँ फोटोग्राफी और वास्तुकला प्रेमियों को आकर्षित करती है।
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| मंदिर का नाम | ख़रीदी महल (Khirki Masjid), दिल्ली |
| समय (Timings) | प्रतिदिन सुबह 7:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक |
| निकटतम मेट्रो स्टेशन | मलवीय नगर (Malviya Nagar) – लगभग 1.5 किमी दूर |
| प्रवेश शुल्क | नि:शुल्क |
| रेस्टोरेंट बजट | आस-पास के रेस्टोरेंट्स में ₹300–₹800 प्रति व्यक्ति (सामान्य बजट) |
14. समय भवन (Time Building)
यह भवन वास्तुकला के अद्भुत उदाहरणों में से एक है और दिल्ली की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करता है।
15. राजघाट (Raj Ghat)
राजघाट महात्मा गांधी की समाधि स्थल है। यह स्थल शांति और श्रद्धा का प्रतीक है, जहां गांधी जी की याद में एक साधारण सा स्मारक है।
राजघाट दिल्ली में यमुना नदी के पश्चिमी किनारे पर स्थित वह ऐतिहासिक स्थल है, जहाँ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अंतिम संस्कार किया गया था। यह स्थल एक सुंदर बगीचे के बीच स्थित है और यहाँ काले संगमरमर का एक चौकोर मंच (समाधि) बना है, जिस पर गांधीजी के अंतिम शब्द “हे राम” अंकित हैं |
- 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या के बाद, 31 जनवरी 1948 को इसी स्थान पर उनका अंतिम संस्कार किया गया था |
- समाधि स्थल को गांधीजी की सादगी को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है
- यह स्थल न केवल भारतीयों, बल्कि विदेशी पर्यटकों और गणमान्य व्यक्तियों के लिए भी श्रद्धा का केंद्र है। यहाँ आने वाले विदेशी उच्चाधिकारी भी गांधीजी को श्रद्धांजलि देने अवश्य आते हैं |
- राजघाट के पास ही शांति वन, विजय घाट, शक्ति स्थल आदि अन्य राष्ट्रीय नेताओं की समाधियाँ भी स्थित हैं |
- समाधि स्थल पर एक अमर ज्योति (अनन्त जलती हुई लौ) भी है |
- यहाँ हर शुक्रवार को (जिस दिन गांधीजी की हत्या हुई थी) शाम 5:30 बजे स्मारक समारोह आयोजित किया जाता है
- गांधीजी की जयंती (2 अक्टूबर) और पुण्यतिथि (30 जनवरी) पर विशेष प्रार्थना सभाएँ आयोजित होती हैं
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| स्थान | गांधी स्मृति, राजघाट, नई दिल्ली – 110006 |
| समय (Timings) | प्रतिदिन: सुबह 6:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक |
| निकटतम मेट्रो स्टेशन | दिल्ली गेट मेट्रो स्टेशन (वॉयलेट लाइन) – लगभग 800 मीटर दूर |
| प्रवेश शुल्क | नि:शुल्क |
| रेस्टोरेंट बजट | आस-पास के रेस्टोरेंट्स में ₹300–₹800 प्रति व्यक्ति (सामान्य बजट) |
16.नेहरू पार्क (Nehru Park)
नेहरू पार्क, एक बड़ा और शांतिपूर्ण पार्क है, जो दिल्लीवासियों और पर्यटकों के लिए एक लोकप्रिय स्थान है। यह एक आदर्श स्थल है जहां आप प्रकृति के साथ समय बिता सकते हैं।
- नेहरू पार्क की स्थापना 1969 में चाणक्यपुरी के निर्माण के समय हुई थी और इसका नाम भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाम पर रखा गया है |
- यह पार्क नई दिल्ली के डिप्लोमेटिक एंक्लेव, चाणक्यपुरी के एक सिरे पर स्थित है और लगभग 80 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है |
- पार्क में विभिन्न किस्म के पेड़-पौधे और खासतौर पर गुलाब के पौधे लगाए गए हैं। दिसंबर या अन्य महीनों में यहां गुलाब के फूलों की बहार रहती है |
- पार्क के चारों ओर जॉगिंग और वॉकिंग के लिए ट्रैक बना हुआ है, जो सुबह-शाम सैर करने वालों, धावकों और एथलीटों के बीच काफी लोकप्रिय है |
- पार्क के अशोक होटल वाले हिस्से में रूसी क्रांतिकारी व्लादिमीर लेनिन की अष्टधातु (एलॉय) से बनी मूर्ति लगी है। इसका अनावरण 1 नवम्बर 1987 को सोवियत संघ के प्रधानमंत्री निकोलाई रिझकोव और तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने किया था |
- नेहरू पार्क में समय-समय पर संगीत महोत्सव, सूफियाना संगीत, तबला वादन आदि सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता रहता है, जो इसे सांस्कृतिक रूप से भी खास बनाता है |
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| स्थान | नेहरू पार्क, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली – 110021 |
| समय (Timings) | प्रतिदिन: सुबह 5:00 बजे से रात 9:00 बजे तक |
| निकटतम मेट्रो स्टेशन | लोक कल्याण मार्ग (Yellow Line) – लगभग 1.9 किमी दूर |
| प्रवेश शुल्क | नि:शुल्क |
| रेस्टोरेंट बजट | आस-पास के रेस्टोरेंट्स में ₹300–₹800 प्रति व्यक्ति (सामान्य बजट) |
17. जंतर मंतर (Jantar Mantar)
जंतर मंतर, एक ऐतिहासिक खगोलशास्त्र स्थल है, जहां पुराने यांत्रिकी उपकरणों से आकाश की स्थिति का पता लगाया जाता था।
- दिल्ली का जंतर मंतर एक खगोलीय वेधशाला है, जिसका निर्माण महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने 1724 ई. में करवाया था। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रहों, तारों और समय की गणना करना था, जिससे प्राचीन भारत की वैज्ञानिक उन्नति का पता चलता है |
- जंतर मंतर का निर्माण उस समय हुआ जब हिन्दू और मुस्लिम खगोलशास्त्रियों में ग्रहों की स्थिति को लेकर बहस छिड़ गई थी। इस विवाद को सुलझाने के लिए जय सिंह ने यह वेधशाला बनवाई थी |
- महाराजा जय सिंह ने दिल्ली के अलावा जयपुर, उज्जैन, मथुरा और वाराणसी में भी ऐसी वेधशालाएं बनवाई थीं |
- सम्राट यंत्र: सूर्य की सहायता से समय और ग्रहों की स्थिति बताता है।
- मिस्र यंत्र: वर्ष के सबसे छोटे और सबसे बड़े दिन को मापता है।
- राम यंत्र और जय प्रकाश यंत्र: खगोलीय पिंडों की गति का अध्ययन करते हैं
- दिल्ली का जंतर मंतर, समरकंद (उज्बेकिस्तान) की वेधशाला से प्रेरित है |
- आज यह दिल्ली के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है और ऐतिहासिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है |
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| स्थान | जंतर मंतर, संसद मार्ग, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली – 110001 |
| समय (Timings) | प्रतिदिन: सुबह 6:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक |
| निकटतम मेट्रो स्टेशन | पटेल चौक मेट्रो स्टेशन (येलो लाइन) – लगभग 600 मीटर दूर |
| प्रवेश शुल्क | भारतीय नागरिक: ₹25, विदेशी नागरिक: ₹300, SAARC/BIMSTEC देशों के नागरिक: ₹25 |
| फोटोग्राफी शुल्क | सामान्य फोटोग्राफी: ₹0, वीडियो फोटोग्राफी: ₹25 |
| रेस्टोरेंट बजट | आस-पास के रेस्टोरेंट्स में ₹300–₹800 प्रति व्यक्ति (सामान्य बजट) |
18. डाकघर संग्रहालय (Post Office Museum)
यह संग्रहालय भारतीय डाक सेवा की शानदार यात्रा को प्रदर्शित करता है। यहां आपको भारतीय डाक सेवा से संबंधित बहुत सारी रोचक जानकारी मिलेगी।
भारतीय डाक दुनिया की सबसे बड़ी डाक सेवाओं में से एक है, जिसकी शुरुआत 1774 में हुई थी और आज भी यह देश के दूर-दराज़ इलाकों को जोड़ती है। भारतीय डाक टिकटों के संग्रहण (फिलैटली) की परंपरा न केवल शौक बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक धरोहर को सहेजने का माध्यम भी है।
यह संग्रहालय भारतीय डाक टिकटों का सबसे बड़ा और अनूठा संग्रह प्रस्तुत करता है, जहाँ 19वीं सदी से लेकर आज तक के दुर्लभ, ऐतिहासिक और थीम आधारित डाक टिकटों की झलक मिलती है। यहाँ बच्चों और बड़ों के लिए डाक टिकट संग्रहण (फिलैटली) की दुनिया को समझने के लिए इंटरएक्टिव डिस्प्ले, दुर्लभ पत्र, डाक टिकट छपाई की प्रक्रिया और डाक सेवा के विकास की जानकारी दी जाती है। संग्रहालय में महात्मा गांधी, विज्ञान, कला, संस्कृति, वन्य जीव, ऐतिहासिक इमारतों आदि पर आधारित डाक टिकटों की विशेष गैलरी है, जिससे यह इतिहास और शिक्षा में रुचि रखने वालों के लिए बेहद आकर्षक है।
- यह संग्रहालय दिल्ली के डाक भवन, सरदार पटेल चौक में स्थित है और भारतीय डाक विभाग द्वारा संचालित है।
- राष्ट्रीय डाक टिकट संग्रहालय में विश्व भर के डाक टिकटों का अनूठा संग्रह मौजूद है। यहां पर विभिन्न युगों और विषयों के डाक टिकट, प्रथम दिवस आवरण, खास रद्द किए गए टिकट आदि प्रदर्शित होते हैं।
- संग्रहालय के पुनर्विकास के बाद अब इसमें एम्फीथिएटर, पुस्तकालय और कलाकारों के लिए विशेष क्षेत्र भी बना है, जहां वे डाक टिकट बनाते हुए देखे जा सकते हैं।
- डाक टिकटों के साथ-साथ यहां डाक सेवा और डाक प्रणाली के इतिहास को भी प्रदर्शित किया गया है, जिससे आगंतुक डाक सेवा के विकास को समझ सकते हैं।
- संग्रहालय नियमित रूप से स्कूलों के छात्रों के लिए डाक टिकट कार्यशालाएं आयोजित करता है, जिससे बच्चों को डाक टिकटों के माध्यम से इतिहास और कला सीखने को मिलती है।
- संग्रहालय में प्रवेश नि:शुल्क है, लेकिन तस्वीरें या वीडियो बनाने के लिए अनुमति लेनी पड़ती है।
- भारत में डाक सेवा की शुरुआत 31 मार्च 1774 को कलकत्ता में हुई थी; तब से डाकघर और डाक टिकटों की भूमिका देश की सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण रही है।
- वर्तमान में भारतीय डाक सेवा पेमेंट बैंक जैसी वित्तीय सेवाएं भी प्रदान करती है, जो गांव-ग्रामीणों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाती हैं।
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| स्थान | डाक भवन, सरदार पटेल चौक, नई दिल्ली – 110001 |
| समय (Timings) | प्रतिदिन: सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक (सोमवार को बंद) |
| निकटतम मेट्रो स्टेशन | पटेल चौक मेट्रो स्टेशन (येलो लाइन), गेट नंबर 3 से लगभग 100 मीटर दूर |
| प्रवेश शुल्क | नि:शुल्क |
| रेस्टोरेंट बजट | आस-पास के रेस्टोरेंट्स में ₹300–₹800 प्रति व्यक्ति (सामान्य बजट) |
19. राजीव चौक (Rajiv Chowk)
राजीव चौक दिल्ली का एक प्रमुख व्यापारिक और शॉपिंग स्थल है। यहां के बाजार, शॉपिंग मॉल्स और रेस्टोरेंट्स बहुत लोकप्रिय हैं।
- राजीव चौक मेट्रो स्टेशन दिल्ली मेट्रो का सबसे व्यस्त और प्रमुख स्टेशन है, जो कनॉट प्लेस के केंद्र में स्थित है। यह ब्लू और येलो लाइन का इंटरचेंज स्टेशन है, जहाँ से रोज़ाना लाखों यात्री सफर करते हैं |
- बहुत से लोग मानते हैं कि इसका नाम भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम पर रखा गया है, लेकिन असल में इसका नाम राजीव गोस्वामी के सम्मान में रखा गया है। राजीव गोस्वामी 1990 के दशक में मंडल कमीशन के विरोध में हुए छात्रों के आंदोलन के प्रतीक बन गए थे। उन्होंने कनॉट प्लेस में आत्मदाह किया था, जिससे आरक्षण विरोधी आंदोलन को नई दिशा मिली। उसी स्थान को यादगार बनाने के लिए मेट्रो स्टेशन का नाम ‘राजीव चौक’ रखा गया |
- राजीव चौक के ऊपर स्थित कनॉट प्लेस दिल्ली का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक व्यापारिक केंद्र है, जिसे ब्रिटिश काल में ड्यूक ऑफ कनॉट के नाम पर बसाया गया था। यहाँ अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स, रेस्त्रां, बार, किताबों की दुकानें और स्ट्रीट फूड के स्टॉल्स मिलते हैं |
- राजीव चौक दिल्ली का ट्रांसपोर्ट हब है, जहाँ से पूरे शहर में आसानी से पहुँचा जा सकता है। यहाँ से बस, मेट्रो और ऑटो-रिक्शा की सुविधा उपलब्ध है |
- राजीव चौक का पुराना नाम कनॉट प्लेस (Connaught Place) है, जिसे 1955 में बदलकर राजीव चौक कर दिया गया था, लेकिन आमतौर पर लोग इसे अब भी कनॉट प्लेस के नाम से ही जानते हैं।
- कनॉट प्लेस डिजाइन 1920 में ब्रिटिश वास्तुकार रॉबर्ट रसेल ने किया था। इसका वास्तुकला स्टाइल जॉर्जियाई है, जो सफेद कॉलोनियल इमारतों और गोलाकार परिधि से बना है।
- यह भारत के सबसे महंगे बाजारों में से एक है, जहाँ उच्चतम रियल एस्टेट मूल्य और व्यावसायिक गतिविधियाँ होती हैं। कई अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स और प्रीमियम स्टोर यहाँ मौजूद हैं।
- मेट्रो स्टेशन जुलाई 2005 में खोला गया था और यह शहर के परिवहन में एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
- राजीव चौक के कनॉट प्लेस में कुल 13 ब्लॉक होते हैं, जिनके नाम A से P तक हैं। इन ब्लॉकों में कई रेस्टोरेंट, कैफे, शॉपिंग सेंटर और ऑफिस केंद्र हैं, हर ब्लॉक की अपनी अलग पहचान है।
- कनॉट प्लेस कभी घने जंगलों का क्षेत्र था, जिसे काटकर व्यापारिक केंद्र में विकसित किया गया।
- यह क्षेत्र दिल्ली के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन का केंद्र माना जाता है, जहाँ पर शाम को लोग टहलने और समय बिताने आते हैं।
| श्रेणी | विवरण |
|---|
| स्थान | राजीव चौक, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली – 110001 |
| समय (Timings) | 24 घंटे (मेट्रो स्टेशन) |
| निकटतम मेट्रो स्टेशन | राजीव चौक मेट्रो स्टेशन (ब्लू और येलो लाइन) – प्लेटफ़ॉर्म 1 से 4 |
| प्रवेश शुल्क | नि:शुल्क |
| रेस्टोरेंट बजट | ₹100–₹1000 प्रति व्यक्ति (सामान्य बजट) |
20. सफदरजंग का मकबरा (Safdarjung Tomb)
यह मकबरा मुग़ल काल के अंतिम सम्राट सफदरजंग की याद में बनवाया गया था। इसकी सुंदर वास्तुकला और शांत वातावरण इसे एक प्रमुख पर्यटक स्थल बनाते हैं।
- सफदरजंग मकबरा, जिसे 1754 में बनाया गया था, अंतिम मुगल साम्राज्य शैली में बनाया गया अंतिम उद्यान मकबरा है।
- यह सफदरजंग का बलुआ पत्थर और संगमरमर का मकबरा है, जो मुगल राजनेता मिर्जा मुकीम अबुल मंसूर खान का लोकप्रिय नाम है।
- जबकि इस स्मारकीय मकबरे के निर्माण में अब्दुल रहीम खानखाना के मकबरे के स्लैब का उपयोग किया गया था, ऐसा प्रतीत होता है कि डिजाइन के लिए वास्तुशिल्प प्रेरणा हुमायूं मकबरे से आई थी।
- अपने गुंबददार और धनुषाकार लाल, भूरे और सफेद संरचनाओं के साथ, यह खुलेपन और डराने वाली उपस्थिति का अनुभव कराता है।
- मकबरा चार बाग लेआउट के केंद्र में स्थित है, जिसमें एक नौ मंजिला मंजिल योजना, पांच-भाग वाला अग्रभाग और एक गुप्त सीढ़ी वाला एक बड़ा मंच भी शामिल है।
- मकबरे का मुख्य प्रवेश द्वार पांच हिस्सों वाला दो मंजिला है, जिसे बैंगनी रंग से खूबसूरती से तैयार किया गया है।
- उद्यान मुगल शैली में है और मकबरे परिसर की सुंदरता को बढ़ाता है।
- यह उद्यान फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए एक उत्कृष्ट पृष्ठभूमि भी प्रदान करता है जो इसकी सुंदरता को कैद करना चाहते हैं।
- कुल मिलाकर, उद्यान इस शानदार मकबरे के आकर्षण और भव्यता को बढ़ाता है, जिससे यह दिल्ली के सबसे लोकप्रिय पर्यटक आकर्षणों में से एक बन जाता है।
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| स्थान | सफदरजंग रोड और ऑरोबिंदो मार्ग का चौराहा, नई दिल्ली – 110029 |
| समय (Timings) | प्रतिदिन: सुबह 7:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक |
| निकटतम मेट्रो स्टेशन | जॉर बाग मेट्रो स्टेशन (येलो लाइन), लगभग 500 मीटर दूर |
| प्रवेश शुल्क | भारतीय नागरिक: ₹25, विदेशी नागरिक: ₹300, 15 वर्ष तक के बच्चे: नि:शुल्क |
| फोटोग्राफी शुल्क | सामान्य कैमरा: नि:शुल्क, वीडियो कैमरा: ₹25 |
| रेस्टोरेंट बजट | आस-पास के रेस्टोरेंट्स में ₹300–₹800 प्रति व्यक्ति (सामान्य बजट) |
21. दिल्ली जू (Delhi Zoo)
दिल्ली जू (Delhi Zoo), जिसे आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (National Zoological Park) कहा जाता है, भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित एक प्रमुख चिड़ियाघर है। यह पुराना किला (Old Fort) के पास 176 एकड़ (लगभग 71 हेक्टेयर) क्षेत्र में फैला हुआ है और 1959 में स्थापित किया गया था
दिल्ली जू, भारतीय वन्यजीवों और पक्षियों का एक घर है। यहां पर बच्चों और परिवारों के लिए घूमने के लिए बेहतरीन स्थल है।
- यह मथुरा रोड, पुराना किला के पास, नई दिल्ली में स्थित है |
- यह 176 एकड़ में फैला हुआ है |
- यहाँ लगभग 130 प्रजातियों के 1350 से अधिक जानवर और पक्षी हैं, जिनमें एशियाई शेर, रॉयल बंगाल टाइगर, सफेद बाघ, भारतीय गैंडा, हाथी, भालू, हिरण, मगरमच्छ, विभिन्न पक्षी आदि शामिल हैं |
- यह दिल्ली के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है, खासकर बच्चों और परिवारों के लिए वीकेंड और पिकनिक स्पॉट के रूप में प्रसिद्ध है |
- यहाँ पैदल घूमने के अलावा बैटरी चालित वाहन (रिक्शा) भी किराए पर उपलब्ध हैं |
- आगंतुक पानी ले जा सकते हैं, लेकिन अन्य खाद्य पदार्थों को अंदर ले जाने की अनुमति नहीं है। चिड़ियाघर में एक कैंटीन भी है |
- वयस्कों के लिए टिकट लगभग ₹77 और बच्चों के लिए ₹4 है (यह दर समय के साथ बदल सकती है)।
- दिल्ली में स्वतंत्रता के बाद कोई चिड़ियाघर नहीं था, इसलिए 1951 में भारतीय वन्यजीव बोर्ड की सिफारिश पर इसकी स्थापना की गई |
- श्रीलंका के मेजर वाइनमेन और पश्चिम जर्मनी के डॉ. हेनरिक मुलर ने इसका डिजाइन तैयार किया था |
- चिड़ियाघर सप्ताह के सातों दिन खुला रहता है |
- यह न सिर्फ मनोरंजन बल्कि वन्यजीव संरक्षण और शिक्षा का भी केंद्र है |
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| स्थान | मथुरा रोड, सुंदर नगर, नई दिल्ली – 110003 |
| समय (Timings) | गर्मियों में (1 अप्रैल – 15 अक्टूबर): सुबह 8:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक (बुकिंग शाम 5:00 बजे तक) सर्दियों में (16 अक्टूबर – 31 मार्च): सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक (बुकिंग शाम 4:30 बजे तक) हर शुक्रवार को बंद रहता है |
| निकटतम मेट्रो स्टेशन | प्रगति मैदान मेट्रो स्टेशन (ब्लू लाइन) – लगभग 2 किमी दूर |
| प्रवेश शुल्क | भारतीय नागरिक: ₹80 (वयस्क), ₹40 (5–12 वर्ष), ₹40 (वरिष्ठ नागरिक) विदेशी नागरिक: ₹400 (वयस्क), ₹200 (5–12 वर्ष) SAARC देशों के नागरिक: ₹200 (वयस्क), ₹100 (5–12 वर्ष) |
| बैटरी ऑपरेटेड वाहन शुल्क | वयस्क: ₹70, बच्चा (5–12 वर्ष): ₹30, 8-10 सीटर: ₹400, 14-सीटर: ₹800, 20-सीटर: ₹1100 |
| फोटोग्राफी शुल्क | सामान्य कैमरा: नि:शुल्क, वीडियो कैमरा: ₹25 |
| रेस्टोरेंट बजट | आस-पास के रेस्टोरेंट्स में ₹300–₹800 प्रति व्यक्ति (सामान्य बजट) |
22. मेट्रो सेंट्रल पार्क (Metro Central Park)
मेट्रो सेंट्रल पार्क (Metro Central Park), जिसे आमतौर पर सेंट्रल पार्क, कनॉट प्लेस कहा जाता है, दिल्ली के सबसे प्रसिद्ध और खूबसूरत सार्वजनिक पार्कों में से एक है। यह पार्क राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के ठीक ऊपर, कनॉट प्लेस के बीचोंबीच स्थित है
यह पार्क दिल्ली की मेट्रो सेवा के समीप स्थित है और यह पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए एक आदर्श स्थान है। यहां आकर आप प्रकृति और शांति का अनुभव कर सकते हैं।
- राजीव चौक (ब्लू और येलो लाइन का इंटरचेंज स्टेशन)। सेंट्रल पार्क, राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के ठीक नीचे/ऊपर स्थित है |
- पार्क में हरे-भरे लॉन, फव्वारे, बैठने की जगहें और एक बड़ा भारतीय तिरंगा झंडा है, जो इसकी पहचान है।
- यह पार्क स्थानीय लोगों, पर्यटकों और परिवारों के लिए पिकनिक, घूमने और आराम करने की सबसे पसंदीदा जगहों में से एक है।
- पार्क के सामने ही पालिका बाजार है, जो दिल्ली का प्रसिद्ध अंडरग्राउंड मार्केट है |
- सेंट्रल पार्क में अक्सर सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत, और सार्वजनिक आयोजन होते रहते हैं।
- यहाँ का वातावरण साफ-सुथरा और सुरक्षित है, जिससे यह दिल्ली के केंद्र में एक शांत जगह बनाता है
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| स्थान | कनॉट प्लेस, राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के ऊपर, नई दिल्ली – 110001 |
| समय (Timings) | प्रतिदिन: सुबह 6:00 बजे से शाम 6:30 बजे तक |
| निकटतम मेट्रो स्टेशन | राजीव चौक मेट्रो स्टेशन (येलो और ब्लू लाइन), लगभग 0.21 किमी दूर |
| प्रवेश शुल्क | नि:शुल्क |
| रेस्टोरेंट बजट | ₹300–₹800 प्रति व्यक्ति (सामान्य बजट) |
23. ग्रेट इंडिया पैलेस (Great India Place)
ग्रेट इंडिया पैलेस (The Great India Place), जिसे आमतौर पर GIP मॉल कहा जाता है, दिल्ली-एनसीआर के नोएडा सेक्टर 38A में स्थित एक विशाल और लोकप्रिय शॉपिंग मॉल है। यह मॉल अपनी भव्यता, विशाल क्षेत्रफल और एक छत के नीचे शॉपिंग, मनोरंजन, भोजन और मौज-मस्ती के तमाम विकल्पों के लिए प्रसिद्ध है |
यह एक प्रमुख शॉपिंग मॉल है जहां आपको अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय ब्रांड्स मिलेंगे। यह जगह खरीदारी के शौक़ीनों के लिए स्वर्ग समान है।
- यह सेक्टर 38A, नोएडा, दिल्ली-एनसीआर (दिल्ली से सटा हुआ इलाका) में है |
- यह लगभग 9.47 लाख वर्ग फुट में फैला हुआ है |
- यह वर्ष 2007 में बना |
- यह देश के सबसे बड़े और व्यस्त मॉल्स में से एक है |
- यहाँ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स की सैकड़ों दुकानें हैं।
- मॉल के साथ ही वर्ल्ड्स ऑफ वंडर (WOW) एम्यूज़मेंट पार्क और फूड कोर्ट भी है।
- एक ही जगह पर शॉपिंग, मूवी, गेम्स, रेस्तरां, स्पा, और बच्चों के लिए मनोरंजन के कई विकल्प है |
- कोई प्रवेश शुल्क नहीं है |
- रोज़ाना सुबह 9:00 बजे से रात 10:00 बजे तक खुला रहता है |
- परिवार और दोस्तों के साथ घूमने के लिए बेहतरीन जगह – यहाँ हर उम्र के लोगों के लिए कुछ न कुछ है |
- हाल के वर्षों में मॉल की लोकप्रियता में कुछ कमी आई है, लेकिन यह अब भी नोएडा और दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख आकर्षणों में से एक है | लेकिन अब यह मॉल बिकने के कगार पे आ गया |
- मॉल में समय-समय पर विभिन्न सेल्स और इवेंट्स भी होते रहते हैं।
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| स्थान | Plot No A-2, Sector-38A, Noida-201301 |
| समय (Timings) | प्रतिदिन: सुबह 11:00 बजे से रात 10:00 बजे तक |
| निकटतम मेट्रो स्टेशन | Noida Sector 18 मेट्रो स्टेशन (ब्लू लाइन) – लगभग 500 मीटर दूर |
| प्रवेश शुल्क | नि:शुल्क |
| रेस्टोरेंट बजट | ₹300–₹800 प्रति व्यक्ति (सामान्य बजट) |
24. नाहर सिंह पैलेस (Nahar Singh Palace)
नहर सिंह पैलेस को बल्लभगढ़ किला महल के नाम से भी जाना जाता है | यह एक ऐतिहासिक और भव्य महल है | यह दिल्ली से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित है | दिल्ली एनसीआर के प्रमुख विरासत स्थलों में शामिल है |
यह ऐतिहासिक महल पुरानी दिल्ली के बाहरी इलाके में स्थित है और इसकी स्थापत्य कला आकर्षक है। यह स्थल इतिहास प्रेमियों के लिए एक बेहतरीन गंतव्य है।
- इस महल का निर्माण कार्य 1739 ईस्वी के आसपास जाट राजा नाहर सिंह के पूर्वजों द्वारा शुरू किया गया था और 1850 तक विभिन्न चरणों में पूरा हुआ |
- इसका नाम राजा नाहर सिंह के नाम पर पड़ा, जिन्होंने 1857 की स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी |
- यह महल अपनी सुंदर मेहराबों, मंडपों, आंगनों और शाही कमरों के लिए प्रसिद्ध है। इसकी वास्तुकला में शेखावटी शैली की झलक मिलती है |
- अब यह हरियाणा पर्यटन विभाग द्वारा एक विरासत होटल और रेस्तरां के रूप में संचालित किया जाता है |
- हर साल नवंबर में यहाँ कार्तिक सांस्कृतिक महोत्सव आयोजित होता है, जिसमें बड़ी संख्या में पर्यटक और स्थानीय लोग शामिल होते हैं।
- सकी भव्यता और ऐतिहासिकता के कारण यहाँ फिल्मों और विज्ञापनों की शूटिंग भी होती रहती है।
- महल की दीवारों पर सुंदर कलाकृतियाँ और शाही सजावट देखने को मिलती है |
- स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राजा नाहर सिंह को अंग्रेजों ने चांदनी चौक पर फांसी दी थी |
- यह महल आज भी स्थानीय इतिहास, संस्कृति और वास्तुकला का जीवंत उदाहरण है |
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| स्थान | अम्बेडकर चौक, बल्लभगढ़, फ़रीदाबाद, हरियाणा – 121001 |
| समय (Timings) | प्रतिदिन: सुबह 9:00 बजे से रात 11:00 बजे तक |
| निकटतम मेट्रो स्टेशन | बल्लभगढ़ मेट्रो स्टेशन (वायलेट लाइन) – लगभग 1 किमी दूर |
| प्रवेश शुल्क | नि:शुल्क |
| रेस्टोरेंट बजट | ₹800 प्रति व्यक्ति (इन-हाउस कैटरिंग) |
25. सीरी फोर्ट (Siri Fort)
सीरी फोर्ट, दिल्ली के ऐतिहासिक किलों में से एक है, जिसे दिल्ली के पहले सुलतान द्वारा बनवाया गया था। यहां की संरचनाएं और किले की दीवारें बहुत मजबूत और आकर्षक हैं।
- इस भव्य और ऐतिहासिक किले का निर्माण लगभग 1303 ई. में खिलजी राजवंश के प्रसिद्ध शासक अलाउद्दीन खिलजी ने करवाया था।
- वर्ष 1297- 1307 के मध्य अलाउद्दीन खिलजी ने सीरी शहर की स्थापना दिल्ली सल्तनत को मंगोलो से बचाने के लिए की थी।
- वर्ष 1303 ई. में इस क्षेत्र पर एक बहुत बड़ी विपदा आ खड़ी हुई थी मंगोल साम्राज्य के जनरल तर्गी ने इस किले को घेर लिया था लेकिन किले की बाहरी सुरक्षा दीवार काफी मजबूत होने के कारण वह किले में प्रवेश नही कर पाए और वापस अपने घर लौट गये थे।
- वर्ष 1303 ई. वाली घटना के 3 साल बाद ही वर्ष 1306 ई. में अलाउद्दीन की सेना ने इसके नेतृत्व में अमरोहा नामक स्थान पर मंगोलों के खिलाफ एक युद्ध छेड़ दिया जिसमे अलाउद्दीन खिलजी की सेना काफी अच्छे तरीके से जीती थी।
- सीरी को 13वीं शताब्दी तक “दारुल खिलफत” और “कैलिफोट की सीट” के नाम से भी जाना जाता था।
- वर्ष 1398 ई में दिल्ली सल्तनत पर हमला करने वाले मंगोल वंश के शासक तैमुर ने अपने संस्मरणों में इसे “सिरी एक गोल शहर” कहकर संबोधित किया था।
- एक लोककथा के अनुसार इस किले को सीरी नाम 1306 ई. में हुये युद्ध के नाम पर दिया गया था, ऐसा माना जाता है की इस युद्ध में अलाउद्दीन खिलजी ने लगभग 8,000 से अधिक मंगोल सैनिकों की हत्या कर उनके सर को इसे किले के आधार में दबवा दिया था।
- यह किला दिल्ली के पास स्थित कुतुब मीनार के उत्तर-पूर्व से मात्र 5 कि.मी. की दुरी पर स्थित है।
- यह किला भारत के सबसे विशालका्य किलो में से एक था, जोकि लगभग 1.7 वर्ग कि.मी. के क्षेत्रफल में फैला हुआ था।
- कुछ इतिहासकारों द्वारा ऐसा माना जाता है कि यह पहला ऐसा शहर था जो मुसलमानों द्वारा अंडाकार आकार में बनाया गया था।
- एक दंतकथाओ के अनुसार इस किले और शहर की संरचना एक योजना के अनुसार अंडाकार आकार में की गई थी, जिसमे लगभग 70,000 से अधिक श्रमिक इस शहर में स्थित किले के निर्माण में लगे हुये थे।
- इस किले का जब निर्माण किया गया था तो इसमें लगभग 7 प्रवेश द्वार बनाये गये थे जिनमे से आज केवल दक्षिण-पूर्व में स्थित द्वार ही मौजूद है।
- ऐसा माना जाता है की इस किले के भीतर स्थित महल में लगभग 1000 से अधिक खंभे स्थित थे जिस कारण इसे “हज़ार सुतन” भी कहा जाता था।
- वर्तमान में यह किला एक खंडहर बन चूका है जिसके पूर्वी हिस्से में एक ज्वाला के आकार की संरचना मौजूद है जिसमे तीर के उपयोग लिए लूप छेद, और बुर्जों के अवशेष आज भी देखे जा सकते हैं।
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| स्थान | शाहपुर जाट, नई दिल्ली – 110049 |
| समय (Timings) | प्रतिदिन: सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक |
| निकटतम मेट्रो स्टेशन | ग्रीन पार्क मेट्रो स्टेशन (येलो लाइन) – लगभग 1.27 किमी दूर |
| प्रवेश शुल्क | नि:शुल्क |
| रेस्टोरेंट बजट | आस-पास के रेस्टोरेंट्स में ₹300–₹800 प्रति व्यक्ति (सामान्य बजट) |
26. लोदी गार्डन (Lodhi Garden)
लोधी गार्डन दिल्ली के दक्षिणी मध्य क्षेत्र में स्थित एक ऐतिहासिक और सुंदर सार्वजनिक उद्यान है, जो लगभग 90 एकड़ में फैला हुआ है। यह सफदरजंग के मकबरे से लगभग 1 किलोमीटर पूर्व, लोधी रोड पर स्थित है
लोदी गार्डन, दिल्ली के एक हरे-भरे और शांतिपूर्ण स्थान में स्थित है। यहां आप ऐतिहासिक मकबरों और शानदार उद्यान का आनंद ले सकते हैं।
- लोधी गार्डन में मुख्य रूप से सैय्यद और लोधी वंश (15वीं-16वीं शताब्दी) के कई महत्वपूर्ण स्मारक स्थित हैं, जिनमें सैय्यद शासक मोहम्मद शाह (मकबरा 1444 ई.) और लोधी वंश के सिकंदर लोधी (मकबरा 1517 ई.) के मकबरे प्रमुख हैं |
- यहां बड़ा गुम्बद, शीश गुम्बद, अठपुला (प्राचीन पुल), और अन्य स्मारक भी हैं, जो दिल्ली सल्तनत काल की वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं |
- मुगल काल में अकबर ने इस क्षेत्र का उपयोग वेधशाला और रिकॉर्ड रखने के लिए किया था।
- ब्रिटिश काल में 1936 में, इसे लेडी विलिंगडन पार्क नाम दिया गया था; स्वतंत्रता के बाद इसका नाम बदलकर लोधी गार्डन कर दिया गया |
- ब्रिटिश काल में 1936 में, इसे लेडी विलिंगडन पार्क नाम दिया गया था; स्वतंत्रता के बाद इसका नाम बदलकर लोधी गार्डन कर दिया गया |
- यहां फव्वारे, तालाब, गुलाब उद्यान, बोंजाई पार्क, और जॉगिंग ट्रैक हैं, जिससे यह स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए एक लोकप्रिय पिकनिक स्थल और मॉर्निंग वॉक का स्थान है |
- उद्यान में विभिन्न प्रजातियों के पेड़-पौधे और पूरे वर्ष अनेक प्रकार के पक्षी देखे जा सकते हैं |
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| स्थान | लोधी रोड, लोधी एस्टेट, नई दिल्ली – 110003 |
| समय (Timings) | अप्रैल से सितंबर: सुबह 5:00 बजे से शाम 8:00 बजे तक<br>अक्टूबर से मार्च: सुबह 6:00 बजे से शाम 8:00 बजे तक |
| निकटतम मेट्रो स्टेशन | जोरबाग मेट्रो स्टेशन (येलो लाइन) – लगभग 1.1 किमी दूर |
| प्रवेश शुल्क | नि:शुल्क |
| रेस्टोरेंट बजट | आस-पास के रेस्टोरेंट्स में ₹300–₹800 प्रति व्यक्ति (सामान्य बजट) |
27. हाथीवाला मंदिर (Hathiwala Temple)
यह मंदिर एक सुंदर धार्मिक स्थल है, जो अपने शांतिपूर्ण वातावरण और आध्यात्मिक अनुभव के लिए प्रसिद्ध है।
- यह मंदिर गोमतीपार इलाके में स्थित है और इसे हाथी बाबा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इसे सन 1960 में वैष्णव संत मंडल के अध्यक्ष 1008 साकेतवासी रामदास जी महाराज ने स्थापित कराया था।
- मंदिर का नाम “हाथीवाला” इसलिए पड़ा क्योंकि रामदास जी महाराज के पास दो हाथी थे, और वे हाथी पर बैठकर भक्तों की समस्याएं सुनते और उनका समाधान करते थे। इस वजह से लोगों ने इसे हाथी बाबा मंदिर कहना शुरू कर दिया।
- मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति के अलावा श्रीराधा कृष्ण, मां दुर्गा, लक्ष्मी जी, लक्ष्मी नारायण, श्रीराम दरबार और भोलेनाथ की मूर्तियां भी स्थापित हैं।
- यहां नियमित रूप से भजन संध्या, सुंदरकाण्ड पाठ, प्रवचन और अन्य धार्मिक आयोजन होते हैं। इसके अलावा मन्दिर के बाहर पीपल का पेड़ और शनि मंदिर भी है, जहां हर शनिवार पूजा और दान के लिए भक्तों का तांता लगता है।
- मंदिर के पुजारी बताते हैं कि भक्तों की मनोकामनाएं यहां पूरी होती हैं, और कई लोग मनोकामना पूरी होने पर यहां पूजा कराते हैं।
- हाल ही में इस मंदिर को असम के एक भक्त द्वारा उपहार स्वरूप एक मादा हाथी दी गई है, जिसका नाम ‘रंजीता’ है। इसे दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में रखा जाएगा और यह मंदिर जानवरों की देखभाल के लिए भी जाना जाता है।
- मंदिर परिसर में पहले से ही कई पशु जैसे बिल्लियां, कुत्ते, घोड़े आदि रहते हैं, और मंदिर का उद्देश्य जानवरों की सेवा और देखभाल भी है।
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| स्थान | झंडेवालान, नई दिल्ली – 110055 |
| समय (Timings) | प्रतिदिन: सुबह 5:00 बजे से रात 9:00 बजे तक |
| निकटतम मेट्रो स्टेशन | झंडेवालान मेट्रो स्टेशन (ब्लू और येलो लाइन) – लगभग 0.5 किमी दूर |
| प्रवेश शुल्क | नि:शुल्क |
| रेस्टोरेंट बजट | सामान्य बजट: ₹300–₹800 प्रति व्यक्ति |
28. ओखला बर्ड सैंक्चुरी (Okhla Bird Sanctuary)
यह एक प्रसिद्ध पक्षी अभयारण्य है, जो विशेष रूप से पक्षी प्रेमियों के लिए आदर्श है। यहां आपको विभिन्न प्रकार के पक्षी देखने को मिल सकते हैं।
- आपको बता दें, यह बर्ड सैंक्चुरी करीब 3.5 किलोमीटर में फैला हुआ है. यहां की मुख्य विशेषता यमुना नदी पर बांध द्वारा बनाई गई झील है, जो देशीय व प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करती है |
- इस सैंक्चुरी में पक्षियों की 400 से ज्यादा प्रजातियां मौजूद हैं. यहां सर्दियों के मौसम के दौरान करीब 1 लाख प्रवासी पक्षी भी पाए जाते हैं. इसके अलावा यहां करीब 188 तरह के पेड़-पौधे हैं |
- यहां आप सर्पेंट ईगल, वाइट थ्रोटेड किंगफिशर, कॉमन किंग फिशर, ओरिएंटल डार्टर्स, ब्लिथ्स रीड वाल्बर, लेसर व्हाइट थ्रोट, जैसे अनगिनत पक्षियों को देख सकते हैं |
- बता दें, यहां पर आपको नीलगाय, ब्लैक-नेप्ड हेयर और जैकॉल जैसे जानवर भी देखने को मिलेंगे |
- ओखला बर्ड सैंक्चुरी दिल्ली-एनसीआर के नोएडा क्षेत्र में यमुना नदी के किनारे स्थित है। इसका क्षेत्रफल लगभग 4 वर्ग किलोमीटर है।
- यह स्थल देशी और प्रवासी दोनों तरह के पक्षियों के लिए स्वर्ग माना जाता है, जहां 320 से ज्यादा पक्षियों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इनमें से करीब 50% प्रवासी पक्षी साइबेरिया, तिब्बत और यूरोप जैसे ठंडे क्षेत्रों से सर्दियों में आते हैं।
- बर्ड सैंक्चुरी में पानी में रहने वाले 20, जमीन और पेड़ों पर रहने वाले लगभग 44 पक्षी प्रजातियां मौजूद हैं। इसके अलावा विभिन्न जीव-जंतुओं जैसे नील गाय, जैकाल, सियार, और कई तरह के सरीसृप भी देखे जा सकते हैं।
- यह पक्षी अभयारण्य भारत के 466 इंटरनेशनल बर्ड एरिया (IBA) में से एक है, यानी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पक्षियों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
- ओखला बर्ड सैंक्चुरी की झील यमुना नदी पर बने बांध की वजह से बनी है, जो पक्षियों के लिए पानी और भोजन का प्राकृतिक स्रोत है।
- पक्षी दर्शन के लिए नवंबर से मार्च का समय सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि इस दौरान सर्दियों में प्रवासी पक्षी यहाँ आते हैं।
- यहां 188 प्रकार के पेड़-पौधे भी पाए जाते हैं, जिनमें जड़ी-बूटियाँ, झाड़ियां, बेलें और अन्य वनस्पतियाँ शामिल हैं, जो पक्षियों के आवास के साथ-साथ जैव विविधता को भी बनाए रखती हैं।
- ओखला बर्ड सैंक्चुरी प्रकृति प्रेमियों, पक्षी प्रेमियों, फोटोग्राफरों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र है, जो यहां पक्षियों को देखकर और उनकी आवाजें सुनकर सुकून पाते हैं।
- संग्रहालय में प्रवेश के लिए मामूली शुल्क है, साथ ही कैमरा व वीडियो शूटिंग के लिए अलग से अनुमति और शुल्क का प्रावधान है।
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| स्थान | सेक्टर 94, नोएडा, उत्तर प्रदेश 201301, भारत |
| निकटतम मेट्रो स्टेशन | ओखला बर्ड सैंक्चुरी मेट्रो स्टेशन (Magenta Line) – लगभग 0.31 किमी की पैदल दूरी पर |
| समय | ग्रीष्मकाल: सुबह 7:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक <br> शीतकाल: सुबह 7:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक |
| प्रवेश शुल्क | भारतीय नागरिक: ₹30 <br> विदेशी नागरिक: ₹350 <br> कैमरा शुल्क: ₹500 <br> वीडियो कैमरा शुल्क: ₹5000 |
| सर्वश्रेष्ठ यात्रा का समय | अक्टूबर से मार्च तक (प्रवासी पक्षियों के आगमन के कारण) |
29. नीलम अशोक (Neelam Ashok)
यह एक अद्भुत सांस्कृतिक स्थल है, जो दिल्ली के एक प्रमुख शास्त्रीय नृत्य स्थल के रूप में प्रसिद्ध है।
- नीलम शर्मा, जिन्हें अक्सर नीलम अशोक के रूप में भी जाना जाता है, दूरदर्शन की एक वरिष्ठ और प्रसिद्ध न्यूज एंकर थीं। वे डीडी न्यूज में प्राइम टाइम न्यूज़ प्रस्तुतकर्ता के रूप में काफी लोकप्रिय थीं।
- नीलम बहुत ही प्रभावशाली और कौशलपूर्ण एंकर थीं, जिन्हें दूरदर्शन का प्रमुख चेहरा माना जाता था। उन्होंने पत्रकारिता क्षेत्र में कई सालों तक उत्कृष्ट कार्य किया।
- नीलम का व्यक्तित्व टीवी पर बहुत सहज और सादगीपूर्ण था, जिसकी वजह से वे लोगों की पसंदीदा बन गई थीं। उनका अंदाज शांत और सौम्य था, जो दर्शकों को आकर्षित करता था।
- वे हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में न्यूज एंकरिंग करती थीं और अपने ज्ञान एवं प्रस्तुति शैली के लिए सम्मानित थीं।
- नीलम शर्मा ने दूरदर्शन में कई पुरस्कार और सम्मान भी प्राप्त किए, जिनमें नारी शक्ति सम्मान और केपी सिंह गिल सम्मान शामिल हैं।
- पत्रकारिता के अलावा, नीलम एक सच्चे मित्र के समान थीं; उनके सहकर्मी अशोक श्रीवास्तव ने उन्हें नंबर वन एंकर और खुद को नंबर दो बताया था, दोनों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी थी।
- नीलम लंबे समय से डीडी न्यूज में सक्रिय थीं, लेकिन बाद में वे लंबी छुट्टी पर चली गईं; उनके जाने से डीडी न्यूज में एक बड़ा प्रभाव पड़ा।
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| स्थान | B-62, न्यू अशोक नगर, दिल्ली, दिल्ली 110096 |
| निकटतम मेट्रो स्टेशन | न्यू अशोक नगर मेट्रो स्टेशन (Magenta Line) – लगभग 0.5 किमी की पैदल दूरी पर |
| समय | आयोजनों के अनुसार बदलता है; आमतौर पर दिनभर उपलब्ध |
| प्रवेश शुल्क | आयोजनों के आधार पर शुल्क निर्धारित होता है; संपर्क करके जानकारी प्राप्त करें |
| रेस्तरां बजट | वेज: ₹900 प्रति व्यक्ति <br> नॉन-वेज: ₹1,100 प्रति व्यक्ति <br> डेकोरेशन शुल्क: ₹20,000 (लगभग) |
30. शांति वन (Shanti Van)
शांति वन दिल्ली का एक ऐतिहासिक और शांतिपूर्ण स्थल है, जो भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की समाधि के लिए प्रसिद्ध है। इसका अर्थ है “शांति का वन”। यह स्थल दिल्ली के केंद्र में, यमुना नदी के किनारे महात्मा गांधी मार्ग पर, मुख्य रिंग रोड के पास स्थित है। शांति वन लगभग 52.6 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है और हरियाली से भरपूर एक सुंदर पार्क के रूप में विकसित किया गया है
यह महात्मा गांधी की शांति और समर्पण की भूमि है। गांधीजी के जीवन के बारे में जानने और शांति का अनुभव करने के लिए यह एक बेहतरीन स्थल है।
- यहाँ पंडित जवाहरलाल नेहरू की समाधि स्थित है, जहाँ हर साल उनकी पुण्यतिथि और जन्मदिवस पर श्रद्धांजलि दी जाती है |
- शांति वन एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जहाँ लोग सुकून के पल बिताने, टहलने और पिकनिक के लिए आते हैं |
- पार्क में कई तरह के पेड़-पौधे, रंग-बिरंगे फूल, पक्षी और गिलहरियाँ देखी जा सकती हैं।
- शांति वन के पास ही राज घाट (महात्मा गांधी की समाधि) और अन्य राष्ट्रीय नेताओं के समाधि स्थल भी हैं |
- शांति वन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का स्मारक स्थल है। इसका मतलब है ‘शांति का वन’ और यह 1946 में स्थापित किया गया था।
- यहां पर सांची स्तूप जैसी शांति चिन्ह भी बनाई गई है, जो नेहरू के जीवन और उनके शांति-प्रेमी रवैये का प्रतीक है।
- यह स्थल जवाहर लाल नेहरू की समाधि के साथ-साथ राजीव गांधी, इंदिरा गांधी, संजय गांधी और अन्य कई महत्वपूर्ण नेताओं की समाधियाँ भी रखता है, इसलिए इसे राजघाट परिसर का हिस्सा भी माना जाता है।
- शांति वन मानसिक शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का स्थान है, जहां सुबह के समय वातावरण शोर से दूर और बहुत शांत होता है, जिससे यह विश्राम के लिए लोकप्रिय स्थल बनता है।
- यह जगह दिल्ली में पर्यटकों द्वारा खूब पसंद की जाती है, खासकर वसंत के मौसम में जब यहां रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं और पूरा पार्क आकर्षक नजर आता है।
- निकटतम मेट्रो स्टेशन जामा मस्जिद है, जो शांति वन से लगभग 1.7 किलोमीटर दूर है। शांति वन पहुंचने के लिए बस और ऑटो रिक्शा की भी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| स्थान | शांति वन, महात्मा गांधी मार्ग, राज घाट के पास, नई दिल्ली – 110002, भारत |
| निकटतम मेट्रो स्टेशन | चांदनी चौक मेट्रो स्टेशन (लगभग 1.7 किमी) |
| समय | प्रतिदिन: सुबह 5:00 बजे से शाम 7:30 बजे तक |
| प्रवेश शुल्क | कोई प्रवेश शुल्क नहीं (नि:शुल्क) |
| विशेष निर्देश | समाधि स्थल पर प्रवेश से पहले जूते निकालें। |
| फोटोग्राफी | अनुमति प्राप्त है; वीडियो शूटिंग भी संभव है। |
| निकटवर्ती स्थल | राज घाट (महात्मा गांधी की समाधि), संजय गांधी समाधि, फीरोज शाह कोटला स्टेडियम। |
पास के रेस्तरां (बजट में)
| रेस्तरां का नाम | प्रकार | अनुमानित बजट (₹) |
|---|---|---|
| अलजवाहिर | भारतीय/मध्य पूर्व | ₹300–₹600 |
| अल्सलाम चिकन | नॉन-वेज/मुगलई | ₹400–₹700 |
| भज गोविंदम | शाकाहारी/दक्षिण भारतीय | ₹200–₹500 |
| फिश प्वाइंट | सी-फूड | ₹500–₹800 |
| गुरु कृपा रेस्टोरेंट | पंजाबी/मुगलई | ₹300–₹600 |
| कल्लू निहारी | नॉन-वेज/लाहोरी | ₹400–₹700 |
| करीम्स | मुगलई/नॉन-वेज | ₹500–₹900 |
| मोटी महल | पंजाबी/मुगलई | ₹400–₹800 |
| श्री कृष्ण ढाबा | शाकाहारी/पारंपरिक | ₹200–₹500 |
निष्कर्ष
दिल्ली में घूमने के लिए बहुत सारी आकर्षक और दिलचस्प जगहें हैं। यहां पर ऐतिहासिक स्थल, धार्मिक स्थल, सांस्कृतिक केंद्र और मनोरंजन के स्थल सभी प्रकार के पर्यटकों के लिए उपलब्ध हैं। चाहे आप ऐतिहासिक प्रेमी हों, शॉपिंग के शौक़ीन हों या प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेना चाहते हों, दिल्ली में हर किसी के लिए कुछ न कुछ खास है।
FAQ
अग्रसेन की बावली रात में क्यों डरावनी मानी जाती है?
Ans. अग्रसेन की बावली रात में डरावनी इसलिए मानी जाती है क्योंकि इससे जुड़ी कई रहस्यमय और भूतिया कहानियाँ प्रचलित हैं। कहा जाता है कि पुराने समय में इस बावली में “काला पानी” हुआ करता था, जो उदास और परेशान लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता था, और कई लोग इसमें कूदकर अपनी जान दे देते थे
