gorakhpur paryatan sthal: 15 अद्भुत जगहें जो चौंका देंगी!

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gorakhpur paryatan sthal: गोरखपुर (Gorakhpur) उत्तर प्रदेश राज्य का एक प्रमुख शहर है, जो उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में नेपाल बॉर्डर के पास स्थित है। यहाँ का मुख्य पहचान गोरखनाथ मंदिर, गोरखपुर रेलवे स्टेशन, बौद्ध स्थल है | यहाँ का रेलवे स्टेशन भारत का सबसे लंबा प्लेटफार्म (गोरखपुर जंक्शन) है |

यहाँ का हवाई सेवा महायोगी गोरखनाथ एयरपोर्ट (GOP) है | यहाँ राप्ती नदी है | यहाँ हिंदी, भोजपुरी, उर्दू भाषा बोली जाती है | यहाँ की जनसंख्या लगभग 45 लाख (2021 अनुमान) है |

गोरखपुर उत्तर प्रदेश में सभी सुबिधाये उपलभ्ध है जैसे रेलवे स्टेशन , हवाई अड्डा , बड़े अस्पताल , शिक्षा के लिए उच्च स्तर के स्कूल तथा कॉलेज, धार्मिक स्थल, घूमने के लिए पर्यटक स्थल, यहाँ का इतिहास जो सभी युगो में विविध था , यहाँ के नदी और तालाब जो इस स्थल को और भी अधिक आकर्षक बनता है |

यह शहर बाबा गोरखनाथ की तपोस्थली के रूप में प्रसिद्ध है और धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा प्राकृतिक धरोहरों से समृद्ध है |

  • प्राचीन काल में गोरखपुर बस्ती, देवरिया, आजमगढ़ और नेपाल तराई के कुछ हिस्सों सहित एक बड़ा क्षेत्र था, जो आर्य संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है |
  • यह कौशल राज्य का हिस्सा था और मौर्य, शुंग, कुशान, गुप्त, हर्षवर्धन जैसे अनेक राजवंशों के अधीन रहा |
  • 9वीं शताब्दी में थारू राजा मदन सिंह के शासनकाल में इस क्षेत्र का नाम गोरखपुर पड़ा, जो गुरु गोरखनाथ के नाम पर पड़ा था |
  • ब्रिटिश काल में 1801 में यह क्षेत्र ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन आया और आधुनिक गोरखपुर जिले का गठन हुआ |
  • गोरखपुर में गोरखनाथ मंदिर, गीता प्रेस, रामगढ़ ताल, और ऐतिहासिक चौरीचौरा कांड स्थल जैसे स्थल प्रसिद्ध हैं |
  • यह शहर हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों के लिए भी महत्वपूर्ण है। महावीर, गौतम बुद्ध, संत कबीरदास और गुरु गोरक्षनाथ जैसे महापुरुषों का संबंध इस क्षेत्र से रहा है |
  • मुंशी प्रेमचंद, फिराक गोरखपुरी जैसी हस्तियों की कर्मस्थली भी यही है |
  • मुंशी प्रेमचंद, फिराक गोरखपुरी जैसी हस्तियों की कर्मस्थली भी यही है |
  • गोरखपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन दुनिया के सबसे लंबे प्लेटफार्मों में से एक है और पूर्वोत्तर रेलवे का मुख्यालय भी है |
  • शहर सड़क, रेल और हवाई मार्ग से देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। यहाँ एक घरेलू एयरपोर्ट भी है |
  • नेशनल हाईवे-28 गोरखपुर को लखनऊ सहित अन्य शहरों से जोड़ता है
  • गीता प्रेस: दुनिया में सबसे अधिक हिंदी धार्मिक पुस्तकें प्रकाशित करने वाला प्रेस |
  • रामगढ़ ताल: प्रसिद्ध झील और पर्यटन स्थल |

1. गोरखपुर का इतिहास (History of Gorakhpur)(gorakhpur paryatan sthal)

गोरखपुर का नाम महान योगी गुरु गोरखनाथ के नाम पर रखा गया है, जो नाथ संप्रदाय के संस्थापक माने जाते हैं। इस नगर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व हजारों वर्षों पुराना है।

प्रमुख ऐतिहासिक बिंदु:

समय/युगऐतिहासिक घटना या महत्व
प्राचीन कालयह क्षेत्र कोशल और मगध राज्यों का हिस्सा था। रामायण काल में इसे भगवान राम से जोड़ा जाता है।
बौद्ध कालबुद्ध और उनके अनुयायियों ने यहाँ प्रचार किया। पास के कुशीनगर में बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ।
मौर्य वंशसम्राट अशोक के समय बौद्ध धर्म का विस्तार यहाँ से हुआ।
मध्यकालइस क्षेत्र में मुस्लिम शासकों और फिर मुगलों का शासन रहा।
नाथ संप्रदायगुरु गोरखनाथ ने यहाँ तपस्या की और अध्यात्म का प्रचार किया, जिससे यह स्थान योगियों का केंद्र बन गया।
ब्रिटिश कालब्रिटिश शासन में यह ज़िला मुख्य प्रशासनिक केंद्र था। यहाँ गोरखपुर जेल प्रसिद्ध है, जहाँ जवाहरलाल नेहरू को भी बंदी बनाया गया था।
आधुनिक कालअब यह शहर उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख शैक्षणिक, धार्मिक और औद्योगिक केंद्र बन चुका है।

गोरखपुर की भौगोलिक स्थिति

विवरणजानकारी
राज्यउत्तर प्रदेश
ज़िलागोरखपुर
क्षेत्रफललगभग 3,484 वर्ग किमी
जनसंख्या (2021 अनुमान)लगभग 45 लाख
प्रमुख नदियाँराप्ती नदी, घाघरा नदी
भाषाएंहिंदी, भोजपुरी, उर्दू
जलवायुगर्मियों में गर्म, सर्दियों में ठंडी, मॉनसून में अच्छी बारिश

और पढ़े : गोरखपुर के बारे में विस्तार से जानकारी

Gorakhpur, Uttar Pradesh पहुँचने का Transportation और Restaurant बजट

City (From)Transport ModeApprox Fare (One Way)Restaurants (Per Day)Total Budget (1-Day Trip)
DelhiTrain (Sleeper/3AC) / Bus₹500 – ₹1200₹400 – ₹600₹900 – ₹1800
LucknowTrain / Bus₹150 – ₹300₹400 – ₹600₹550 – ₹900
VaranasiTrain / Bus₹100 – ₹250₹400 – ₹600₹500 – ₹850
PatnaTrain (3AC) / Bus₹400 – ₹800₹400 – ₹600₹800 – ₹1400
MumbaiTrain (3AC) / Flight₹1300 – ₹4000 (Train/Flight)₹400 – ₹600₹1700 – ₹4600
KolkataTrain (3AC) / Flight₹1000 – ₹3500₹400 – ₹600₹1400 – ₹4100

2. गोरखपुर के 15 प्रमुख स्थल

गोरखपुर के 15 प्रमुख स्थल गोरखनाथ मंदिर (Gorakhnath Temple), रामगढ़ ताल (Ramgarh Tal), नक्‍कटोबंदी चिड़ियाघर (Nakkato Bandi Zoo), गीता वाटिका (Geeta Vatika), तारामंडल (Planetarium), बुद्ध संग्रहालय (Buddh Museum), नवीन पार्क (Navin Park), बौद्ध विहार (Buddhist Vihara), इमामबाड़ा (Imambara), कुशीनगर (Kushinagar), सहजनवा झील (Sahjanwa Lake), महालक्ष्मी मंदिर (Mahalaxmi Temple), महायोगी गोरखनाथ एयरपोर्ट (Mahayogi Gorakhnath Airport), गोरखपुर रेलवे म्यूजियम (Gorakhpur Railway Museum) और नवल उत्सव पार्क (Naval Utsav Park) है | इनका वर्णन नीचे किया जा रहा है :

2.1. गोरखनाथ मंदिर (Gorakhnath Temple)(gorakhpur paryatan sthal:)

यह मंदिर नाथ संप्रदाय के संस्थापक गुरु गोरखनाथ को समर्पित है। यह गोरखपुर का सबसे प्रमुख धार्मिक स्थल है और लाखों श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए आते हैं।

गोरखनाथ मंदिर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में स्थित है बाबा गोरखनाथ के नाम पर इस जिले का नाम गोरखपुर पड़ा | वर्तमान में इस मंदिर के महंत श्री योगी नाथ जी है जो अपनी जाती त्याग चुके हैं | जो वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी हैं | यहाँ मकरसंक्रांति में एक महीने का विशाल मेला लगता है, जिसे खिचड़ी मेला भी कहते हैं |

संपूर्ण देश में फैले नाथ संप्रदाय के विभिन्न मंदिरों तथा मठों की देख रेख यहीं से होती है। ज्वालादेवी के स्थान से परिभ्रमण करते हुए ‘गोरक्षनाथ जी’ ने आकर भगवती राप्ती के तटवर्ती क्षेत्र में तपस्या की थी और उसी स्थान पर अपनी दिव्य समाधि लगाई थी, जहाँ वर्तमान में ‘श्री गोरखनाथ मंदिर (श्री गोरक्षनाथ मंदिर)’ स्थित है। 

  • इस मंदिर का नाम बाबा गोरखनाथ के नाम पर पड़ा है, जिनकी तपस्यास्थली होने के कारण इस क्षेत्र का नाम गोरखपुर पड़ा।
  • मंदिर के परिसर में भगवान गोरखनाथ की दिव्य श्वेत संगमरमर की मूर्ति स्थापित है, जो ध्यानमग्न मुद्रा में है।
  • मंदिर में सदैव जलती रहने वाली अखंड ज्योति है, जिसके संबंध में कहा जाता है कि इसे त्रेता युग में गोरखनाथ ने जलाई थी और यह आज तक जलती आ रही है।
  • मकर संक्रान्ति के अवसर पर यहां विशाल खिचड़ी मेला लगता है, जिसमें यूपी, बिहार, नेपाल सहित अन्य जगहों से लाखों श्रद्धालु आते हैं।
  • इसमें पिछले कई सदियों से योग साधना का सिलसिला चला आ रहा है और यह नाथ योगियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
  • मुस्लिम शासनकाल में इस मंदिर को कई बार तोड़ा गया था, लेकिन इसे पुनः स्थापित और संवारा गया।
  • गोरखनाथ मंदिर के वर्तमान पीठाधीश्वर और महंत योगी आदित्यनाथ हैं, जो 15 फरवरी 1994 से इस पद पर हैं।
  • मंदिर परिसर में गोरखबानी शब्द और नवनाथों के चित्र भी संगमरमर पर अंकित हैं।
  • मंदिर के भव्य ढांचे का निर्माण 19वीं सदी में महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवैद्यनाथ ने करवाया था।

गोरखनाथ मंदिर की प्रमुख जानकारी (Details Table)

विवरणजानकारी
मंदिर का नामश्री गोरखनाथ मंदिर, गोरखपुर
पतागोरखनाथ रोड, नाथपैठ, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश – 273015
निकटतम रेलवे स्टेशनगोरखपुर जंक्शन (GKP) – लगभग 4 किमी दूरी पर
निकटतम हवाई अड्डामहायोगी गोरखनाथ एयरपोर्ट, गोरखपुर – लगभग 10 किमी दूरी पर
खुलने का समयसुबह 4:00 बजे से रात 10:00 बजे तक (प्रतिदिन)
प्रवेश शुल्कनिःशुल्क (कोई टिकट नहीं)
मुख्य पर्वमकर संक्रांति मेला, गुरु पूर्णिमा, नवरात्रि
पास में भोजनकचौड़ी-जलेबी, खस्ता, छोले भटूरे, लस्सी, दूध-जलेबी
पास में बाज़ारगोरखनाथ रोड बाज़ार, मंदिर गेट मार्केट, नाथपैठ लोकल मार्केट
यातायात सुविधाऑटो, ई-रिक्शा, लोकल बस, टैक्सी आसानी से उपलब्ध
देखने लायक चीजेंविशाल मंदिर प्रांगण, गुरु गोरखनाथ जी की मूर्ति, हवन स्थल, गायशाला

2.2. रामगढ़ ताल (Ramgarh Tal)

gorakhpur paryatan sthal: रामगढ़ ताल गोरखपुर का एक प्रमुख प्राकृतिक स्थल है, जो अपनी सुंदरता और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। यह ताल झील के रूप में स्थित है और यहाँ पर पर्यटक बोटिंग, वॉकिंग, और प्रकृति के सौंदर्य का आनंद लेने के लिए आते हैं। यह स्थल न केवल गोरखपुर के निवासियों बल्कि बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए भी एक प्रमुख आकर्षण है।

रामगढ़ ताल का इतिहास भी गोरखपुर के इतिहास से जुड़ा हुआ है। यह ताल गोरखपुर शहर के बाहरी इलाके में स्थित है और इसका महत्व न केवल प्राकृतिक सुंदरता बल्कि ऐतिहासिक रूप से भी है। यह ताल एक प्राकृतिक जलाशय है, जिसे जल संचयन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

रामगढ़ ताल का निर्माण प्राचीन समय में हुआ था, और यह ताल गोरखपुर के विभिन्न जलमार्गों से जुड़ा हुआ है। यह क्षेत्र न केवल पानी के भंडारण के लिए महत्वपूर्ण था, बल्कि यहां के आसपास की भूमि कृषि कार्यों के लिए भी उपयुक्त थी।

रामगढ ताल के बारे में कहा जाता है की पहले यहाँ पे विशाल नगर था , जो किसी ऋषि के श्राप से ध्वस्त हो गया और वहा तालाब बन गया | शुरुआती दौर में यह तालाब छह मील लंबा और तीन मील चौड़ा था और अब यह  1700 एकड़ क्षेत्र में फैला है |

इस ताल का केवल गोरखपुर के स्तर पर ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर ऐतिहासिक महत्व है। इतिहासकार डॉ. राजबली पांडेय के अनुसार ईसा पूर्व छठी शताब्दी में गोरखपुर का नाम रामग्राम था। यहां कोलीय गणराज्य स्थापित था। उन दिनों राप्ती नदी आज के रामगढ़ ताल से ही होकर गुजरती थी। बाद में राप्ती नदी की दिशा बदली तो उसके अवशेष से रामगढ़ ताल अस्तित्व में आ गया। रामग्राम से ही इस ताल को रामगढ़ नाम मिल गया। 

  • प्राचीन कथाओं व बौद्ध ग्रंथों के अनुसार, यह छठी शताब्दी में नागवंशी कोलिय गणराज्य की राजधानी क्षेत्र था, जहां से गोरखपुर का प्राचीन नाम “रामग्राम” पड़ा था। कहा जाता है कि इस क्षेत्र से भगवान बुद्ध की माता और पत्नी का संबंध था |
  • रामगढ़ ताल का अस्तित्व राप्ती नदी के पुराने मार्ग के कारण हुआ, जो समय के साथ दिशा बदलने से इस ताल का निर्माण हुआ। शुरुआत में इसकी लंबाई लगभग छह मील और चौड़ाई तीन मील थी, जिसका क्षेत्र लगभग 18 वर्ग किलोमीटर था, लेकिन अतिक्रमण के कारण यह अब लगभग 7 वर्ग किलोमीटर तक सिमट गया है |
  • ताल के बारे में एक जनश्रुति है कि प्राचीन काल में यहां एक बड़ा नगर था, जिसे किसी ऋषि के श्राप से तालाब में बदल दिया गया था |
  • यह क्षेत्र पहले मछली पालन के लिए प्रसिद्ध था, जिसके तहत 40 से अधिक प्रजातियों की मछलियां पाई जाती थीं, हालांकि अब उनकी संख्या काफी कम हो गई है। यहां की एक विशेष मछली के बारे में कहा जाता है कि उसे पकड़ना बहुत कठिन है और इसके पीछे रहस्यमय कहानियां जुड़ी हैं |
  • रामगढ़ ताल आज “पूर्वांचल का मरीन ड्राइव” कहलाता है, जहां पर्यटक प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने के लिए दूर-दूर से आते हैं। इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए भी महत्वपूर्ण योजनाएं बनी हैं और प्रदेश सरकार इसके संरक्षण में लगी है |
  • ताल की सुरक्षा के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (NGT) ने इसके 500 मीटर के दायरे में निर्माण कार्यों पर रोक लगा रखी है, ताकि संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके |
  • दशकों पहले यहां मछली पालन एक बड़ा व्यवसाय था और ताल के आसपास प्राकृतिक जीवन की विविधता थी, जिसमें अनेक पक्षी प्रजातियां भी शामिल थीं। समय के साथ अतिक्रमण और प्रदूषण के कारण इसकी जैव विविधता प्रभावित हुई है।

रामगढ़ ताल के बारे में विस्तृत जानकारी (Detailed Information of Ramgarh Tal)

विवरणजानकारी
स्थल का नामरामगढ़ ताल (Ramgarh Tal)
पतारामगढ़ ताल, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
निकटतम रेलवे स्टेशनगोरखपुर जंक्शन (Gorakhpur Junction) – लगभग 10 किमी की दूरी पर
निकटतम हवाई अड्डामहायोगी गोरखनाथ एयरपोर्ट (Gorakhpur Airport) – लगभग 12 किमी दूरी पर
समयसुबह 6:00 AM से शाम 6:00 PM तक
प्रवेश शुल्कनिःशुल्क (बोटिंग और अन्य गतिविधियाँ अलग से शुल्क लेते हैं)
बोटिंग शुल्क₹100 – ₹200 (बोटिंग के प्रकार के आधार पर)
मुख्य गतिविधियाँबोटिंग, वॉकिंग, प्रकृति का आनंद लेना
भोजनपास के स्टॉल और छोटे कैफे में कचौड़ी, समोसा, चाय, बिस्किट आदि मिलते हैं
पास में प्रमुख स्थलगोरखनाथ मंदिर, राप्ती नदी, गोलघर

2.3. नक्‍कटोबंदी चिड़ियाघर (Nakkato Bandi Zoo)(gorakhpur paryatan sthal:)

नक्‍कटोबंदी चिड़ियाघर गोरखपुर का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह चिड़ियाघर बच्चों और परिवारों के लिए एक आदर्श स्थान है, जहां आप विभिन्न प्रकार के जानवरों को देख सकते हैं और प्रकृति के नजदीक जा सकते हैं। यहाँ पर जानवरों का संरक्षण किया जाता है और यह स्थल पर्यटकों के लिए बहुत ही आकर्षक है।

चिड़ियाघर में विभिन्न प्रकार के जानवरों के साथ-साथ पक्षियों और अन्य प्रजातियों को भी देखा जा सकता है। यहाँ पर शोध कार्य और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए भी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। चिड़ियाघर की स्थापना कुछ वर्षों पहले गोरखपुर नगर निगम द्वारा की गई थी। यहाँ शेर, बाघ, हिरण, सियार, बंदर, हाथी, सांप और पक्षियों की कई प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

  • कई लोगों के मन में ये सवाल जरूर आता होगा कि गोरखपुर के चिड़ियाघर का असली नाम क्या है? तो मै आपको बता दूं कि गोरखपुर Zoo का असली नाम (शहीद अशफाक उल्ला खाँ प्राणी उद्यान) के नाम पर रखा गया है |
  • अब बात करते हैं कि क्या गोरखपुर Zoo मे घूमने का टिकट लगेगा? इसका जवाब है, जी हाँ अगर आप गोरखपुर का चिड़ियाघर घूमने जाते हैं तो टिकट भी लगेगा |
  • आपको बता दें कि अगर आप चिड़ियाघर घूमने आते हैं तो monday (सोमवार) को मत आइए. क्योकि सोमवार को चिड़ियाघर बंद रहता है | 
  • इसमें लगभग 40 प्रजातियों के 225 वन्यजीव रखे गए हैं, जिनमें बाघ, शेर, तेंदुआ, गैंडा, जेब्रा, भालू, और कई प्रकार के पक्षी शामिल हैं। भविष्य में जेब्रा का जोड़ा भी यहां लाया जाएगा।
  • यह पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रमुख इको-टूरिज्म केंद्र है, जहां पर्यटक और विद्यार्थी वन्यजीव व पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होते हैं। अब तक लाखों पर्यटक इसे देख चुके हैं।
  • चिड़ियाघर में 34 एकड़ के विशाल वेटलैंड का निर्माण किया गया है, जो स्थानीय और प्रवासी पक्षियों के लिए प्रजनन स्थल बन चुका है।
  • चिड़ियाघर में वन्य जीवन संरक्षण, रेस्क्यू और मेडिकल सुविधाएं अत्याधुनिक हैं। यहाँ घायल और परित्यक्त जंगली जानवरों का उपचार और संरक्षण किया जाता है।
  • परिसर में गोरखनाथ मंदिर और महात्मा बुद्ध की थीम पर डिज़ाइन और सजावट की गई है, जो इसे सांस्कृतिक दृष्टि से भी विशेष बनाती है।
  • चिड़ियाघर में सरपेंटेरियम (साँप घर) और इंडोर बटरफ्लाई पार्क भी विकसित किया जा रहा है, जिससे इसकी खूबसूरती और दर्शनीयता बढ़ रही है।
  • पर्यावरण संरक्षण के तहत यह चिड़ियाघर “ग्रीन फेफड़ा” के रूप में कार्य करता है, क्योंकि इसके लगभग आधे क्षेत्रफल में पेड़-पौधे और जंगल हैं।
  • हाल ही में विश्व बाघ दिवस पर यहां नक्षत्र वाटिका की स्थापना भी की गई है
  • साल 2025 में बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के कारण चिड़ियाघर कुछ समय के लिए बंद भी रहा, जिसमें वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष कदम उठाए गए

gorakhpur paryatan sthal: नक्‍कटोबंदी चिड़ियाघर के बारे में विस्तृत जानकारी (Detailed Information of Nakkato Bandi Zoo)

विवरणजानकारी
स्थल का नामनक्‍कटोबंदी चिड़ियाघर (Nakkato Bandi Zoo)
पतारानीडीह, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
निकटतम रेलवे स्टेशनगोरखपुर जंक्शन (Gorakhpur Junction) – लगभग 8 किमी की दूरी पर
निकटतम हवाई अड्डामहायोगी गोरखनाथ एयरपोर्ट (Gorakhpur Airport) – लगभग 10 किमी की दूरी पर
समयसुबह 9:00 AM से शाम 5:00 PM तक
प्रवेश शुल्क₹30 – ₹50 (वयस्क), ₹20 – ₹30 (बच्चे)
विशेष कार्यक्रमबच्चों के लिए शैक्षिक कार्यक्रम, जानवरों के बचाव और संरक्षण पर कार्यशालाएँ
भोजनचिड़ियाघर के बाहर छोटे कैफे और स्टॉल्स में स्नैक्स जैसे समोसा, चाय, बिस्किट आदि
मुख्य आकर्षणशेर, बाघ, हाथी, बंदर, हिरण, विभिन्न पक्षी प्रजातियाँ
पास में प्रमुख स्थलगोरखनाथ मंदिर, रामगढ़ ताल, राप्ती नदी, गोरखपुर जंक्शन

2.4. गीता वाटिका (Geeta Vatika)

गीता वाटिका गोरखपुर का एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल है, जो शांतिपूर्ण वातावरण और अध्यात्मिकता का प्रतीक है। यह स्थल भगवान श्री कृष्ण की उपदेशों पर आधारित है और यहाँ पर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आत्मिक शांति मिलती है।

गीता वाटिका का वातावरण ध्यान, साधना और धर्म की गतिविधियों के लिए अनुकूल है। गीता वाटिका की स्थापना 1980 के दशक में हुई थी, और इसका उद्देश्य लोगों को भगवद गीता के सिद्धांतों के बारे में जागरूक करना है।

गीता वाटिका के मंदिर में राधा कृष्णा मंदिर का उल्लेख है यह मंदिर राधा कृष्णा को समर्पित है |  देश विदेश से सैलानी यहाँ आते हैं | यह वाटिका इस बाटीका में जो कोई भी आता है वह यहां राधा कृष्ण की भक्ति में रम जाता है |

गोरखपुर के असुरन पिपराइच रोड पर मौजूद यह गीता वाटिका राधा कृष्ण भक्ति का अलौकिक केंद्र माना जाता है | मंदिर में मौजूद देखरेख करने वाले हनुमान प्रसाद पोद्दार समिति के सदस्य बताते हैं कि इस वाटिका की स्थापना संत भाई जी हनुमान प्रसाद पोद्दार ने की थी | पहले यह जमीन कोलकाता के सेठ ताराचंद घनश्याम दास की थी जिसे ‘गोयदका गार्डन’ के नाम से जाना जाता था | लेकिन 30 मई 1933 को यह जमीन गीता वाटिका के लिए खरीद ली गई थी | तभी से यह गीता वाटिका नाम से सुमार हो गया |

  • गीता वाटिका में अखंड हरि नाम संकीर्तन 1968 से लगातार चल रहा है, जो आध्यात्मिक शांति के लिए दूर-दूर से भक्तों को आकर्षित करता है। यह संकीर्तन राधाष्टमी के दिन शुरू हुआ था।
  • भक्तों का मानना है कि यहाँ भाईजी को श्री हरि विष्णु, महर्षि नारद और महर्षि अंगिरा के दर्शन हुए थे।
  • मंदिर परिसर में 16 गर्भगृह और 35 शिखर हैं, जिनमें वेद, उपनिषद, और भगवद गीता की सुंदर झांकियां भी देखने को मिलती हैं।
  • मंदिर में भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार और उनकी पत्नी रामदेई पोद्दार की मूर्तियां भी स्थापित हैं।
  • गीता वाटिका गोरखपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 3-4 किलोमीटर दूर स्थित है और जन्माष्टमी व राधाष्टमी के दिन यहां विशेष आयोजन होते हैं, जिनमें हजारों भक्त भाग लेते हैं।
  • यहां का प्रसाद विशेष रूप से श्री कृष्ण को प्रिय दूध आधारित मिठाई “राजभोग”, लड्डू और बर्फी होता है।
  • यह स्थान आध्यात्मिक जिज्ञासुओं के लिए एक शांतिपूर्ण और प्रेरणादायक ठिकाना माना जाता है।
  • इसके स्थापना स्थल का नाम पहले “गोयंदका गार्डन” था, जो 1933 में गीता वाटिका के लिए खरीदा गया था।

गीता वाटिका के बारे में विस्तृत जानकारी (Detailed Information of Geeta Vatika)

विवरणजानकारी
स्थल का नामगीता वाटिका (Geeta Vatika)
पतागोलघर, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
निकटतम रेलवे स्टेशनगोरखपुर जंक्शन (Gorakhpur Junction) – लगभग 5 किमी की दूरी पर
निकटतम हवाई अड्डामहायोगी गोरखनाथ एयरपोर्ट (Gorakhpur Airport) – लगभग 8 किमी की दूरी पर
समयसुबह 6:00 AM से रात 9:00 PM तक
प्रवेश शुल्कनिःशुल्क
विशेष कार्यक्रमध्यान, पूजा, सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम
भोजनपास के छोटे कैफे में चाय, स्नैक्स, और साधारण भोजन मिलते हैं
मुख्य आकर्षणभगवान श्री कृष्ण की मूर्तियाँ, ध्यान केंद्र, गीता के उपदेश
पास में प्रमुख स्थलगोरखनाथ मंदिर, रामगढ़ ताल, राप्ती नदी, गोलघर

2.5. तारामंडल (Planetarium)

तारामंडल, गोरखपुर का एक प्रमुख और आकर्षक स्थल है जो खगोल विज्ञान (Astronomy) के प्रति रुचि रखने वालों के लिए एक आदर्श स्थान है। यहाँ पर पर्यटक और छात्र खगोलशास्त्र (Astronomy) के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। तारामंडल में आधुनिक तकनीकी उपकरणों और प्रदर्शनों के माध्यम से आकाशगंगा, ग्रहों और तारे आदि के बारे में बताया जाता है।

यह स्थल खासकर बच्चों और युवाओं के लिए शैक्षिक और मनोरंजक अनुभव प्रदान करता है। तारामंडल की स्थापना 2001 में हुई थी। इसका उद्देश्य बच्चों और युवाओं को खगोलशास्त्र में रुचि पैदा करना और उन्हें शैक्षिक मनोरंजन प्रदान करना था। तारामंडल में 3D और डिजिटल प्रक्षेपण द्वारा आकाशगंगा, ग्रहों, और तारे दिखाए जाते हैं।

तारामंडल में आधुनिक तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है, जैसे डिजिटल सिनेमा प्रक्षेपण, उच्च गुणवत्ता वाले ऑडियो-वीडियो प्रणाली आदि।

  • 17 मीटर व्यास का नया 8K प्रोजेक्शन डोम, जो लखनऊ के मौजूदा डोम से बड़ा होगा।
  • वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला का 46.87 करोड़ रुपये की लागत से पूर्ण आधुनिकीकरण किया जा रहा है, जिसमें 8K गुणवत्ता वाला देश का सबसे बड़ा प्रोजेक्शन डोम स्थापित होगा।
  • यहाँ पर अब ऑनलाइन टिकट भी मिलेगा सॉफ्टवेयर बन चूका है |
  • अत्याधुनिक 2D और 3D प्रोजेक्शन सिस्टम, जिससे दर्शक वर्चुअल अंतरिक्ष यात्रा का अनुभव ले सकेंगे।
  • 4 हाई-टेक प्रोजेक्टर, जो विश्व स्तरीय एस्ट्रो डोम थियेटर के समकक्ष होंगे।
  • एक इंटरएक्टिव अंतरिक्ष गैलरी, जहां ग्रहों, उपग्रहों और स्पेस मिशन से जुड़ी जानकारी रोचक ढंग से प्रस्तुत की जाएगी।

तारामंडल के बारे में विस्तृत जानकारी (Detailed Information of Planetarium)

विवरणजानकारी
स्थल का नामतारामंडल (Planetarium)
पतातारामंडल रोड, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
निकटतम रेलवे स्टेशनगोरखपुर जंक्शन (Gorakhpur Junction) – लगभग 5 किमी की दूरी पर
निकटतम हवाई अड्डामहायोगी गोरखनाथ एयरपोर्ट (Gorakhpur Airport) – लगभग 10 किमी की दूरी पर
समयसोमवार से रविवार: 10:00 AM से 6:00 PM तक
प्रवेश शुल्क₹40 – ₹100 (वयस्क), ₹20 – ₹50 (बच्चे)
विशेष कार्यक्रमखगोलशास्त्र पर आधारित शैक्षिक शो, फिल्में, वर्कशॉप
भोजनपास के कैफे और स्टॉल्स में हल्का भोजन जैसे समोसा, चाय, बिस्किट आदि
मुख्य आकर्षण3D प्रक्षेपण, खगोलशास्त्र पर आधारित शो, आकाशगंगा, ग्रहों के बारे में जानकारी
पास में प्रमुख स्थलगोरखनाथ मंदिर, रामगढ़ ताल, गोरखपुर जंक्शन, राप्ती नदी

2.6. बुद्ध संग्रहालय (Buddh Museum)

बुद्ध संग्रहालय, गोरखपुर का एक प्रमुख ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थल है, जो बुद्ध धर्म और उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं से संबंधित संग्रहण का केंद्र है। यह संग्रहालय विशेष रूप से भगवान बुद्ध के जीवन और उनकी शिक्षा पर आधारित पुरानी मूर्तियों, चित्रों, और अन्य कला कृतियों का भंडारण करता है।

यहाँ पर पर्यटक और शोधकर्ता भगवान बुद्ध के योगदान को समझ सकते हैं और उनके शिक्षाओं के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। बुद्ध संग्रहालय की स्थापना गोरखपुर में 1991 में की गई थी।

  • यहां भगवान बुद्ध के जीवन, बौद्ध धर्म, स्थानीय इतिहास और विभिन्न कालखंडों की कलाकृतियों का समृद्ध संग्रह है |
  • 4 मई 1997 को इसका वर्तमान भवन उद्घाटित हुआ |
  • ग्रहालय में अब 6 वीथिकाएं हैं, जिनमें बुद्ध की विविध मुद्राओं, बौद्ध धर्म, नवपाषाण काल से लेकर गुप्तकाल तक की मूर्तियों, चित्रकला, मानव विकास, जैन धर्म, शैव-वैष्णव कलाकृतियों आदि का प्रदर्शन किया गया है |
  • प्रस्तर, धातु, मृण्मूर्ति, सिक्के, लघुचित्र, थंका, हाथी दांत की मूर्तियां, हस्तलिखित ग्रंथ, ताम्रपत्र, नवग्रह युक्त लोटा, तिब्बती थंका आदि |
  • कुषाण, गुप्त, मौर्य, शुंग, गांधार और मथुरा कला शैलियों की दुर्लभ प्रतिमाएं |
विवरणजानकारी
स्थल का नामबुद्ध संग्रहालय (Buddh Museum)
पताबुद्ध पार्क, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
निकटतम रेलवे स्टेशनगोरखपुर जंक्शन (Gorakhpur Junction) – लगभग 3 किमी की दूरी पर
निकटतम हवाई अड्डामहायोगी गोरखनाथ एयरपोर्ट (Gorakhpur Airport) – लगभग 7 किमी की दूरी पर
समयसोमवार से रविवार: 10:00 AM से 5:00 PM तक
प्रवेश शुल्क₹20 – ₹50 (वयस्क), ₹10 – ₹30 (बच्चे)
विशेष कार्यक्रमबौद्ध धर्म से संबंधित कार्यशालाएँ, सांस्कृतिक कार्यक्रम
भोजनपास के कैफे और स्टॉल्स में हल्का भोजन जैसे समोसा, चाय, बिस्किट आदि
मुख्य आकर्षणभगवान बुद्ध की मूर्तियाँ, प्राचीन कलाकृतियाँ, शिलालेख, बौद्ध साहित्य
पास में प्रमुख स्थलगोरखनाथ मंदिर, रामगढ़ ताल, गोरखपुर जंक्शन, राप्ती नदी

2.7. नवीन पार्क (Navin Park)

नवीन पार्क, गोरखपुर का एक प्रमुख पार्क है, जहाँ पर पर्यटक, बच्चे और परिवार आकर शांति से समय बिता सकते हैं। यह पार्क शहर के बीचों-बीच स्थित है और एक आदर्श स्थान है जहां लोग सुबह या शाम को घूमने के लिए आते हैं। यहाँ की हरियाली, खेल मैदान और झूलों का आनंद लेने के लिए बच्चे खास तौर पर यहाँ आते हैं। नवीन पार्क का वातावरण शांतिपूर्ण है और यह गोरखपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में एक है। नवीन पार्क की स्थापना गोरखपुर शहर में 20वीं शताब्दी के मध्य में की गई थी।

  • इस पार्क में सन 1940 में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सभा को संबोधित किया था, जहां उन्हें तत्कालीन प्रशासन द्वारा गिरफ्तार भी किया गया था। यह घटना इस पार्क के नामों में बदलाव (इस्माइल पार्क, लाल डिग्गी पार्क, नेहरू पार्क) का कारण बनी।
  • पार्क शहर के सबसे व्यस्त बाजार साहबगंज के पश्चिमी हावर्ड बांध के किनारे स्थित है।
  • वर्तमान में इस पार्क में सौंदर्यीकरण और सौंदर्य वृद्धि का कार्य चल रहा है, जिसमें झील, टर्टल पार्क (कछुआ संरक्षण द्वीप), ओपन एयर थियेटर, फूड कोर्ट, और संगीत फव्वारे जैसी नई सुविधाएं बनाई जा रही हैं।
  • पार्क में पंडित नेहरू की प्रतिमा के साथ साथ अमर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल का स्मारक भी बनाया जाएगा।
  • पार्क सुबह 5 बजे से शाम 8 बजे तक खुला रहता है; सुबह 5 से 9 बजे तक टहलने वालों के लिए फ्री एंट्री है, उसके बाद प्रवेश शुल्क लगता है।
  • यह पार्क गोरखपुर की ऐतिहासिक विरासत के साथ-साथ पर्यावरण और पर्यटन का केंद्र बनने की प्रक्रिया में है।

नवीन पार्क के बारे में विस्तृत जानकारी (Detailed Information of Navin Park)

विवरणजानकारी
स्थल का नामनवीन पार्क (Navin Park)
पतानवीन पार्क रोड, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
निकटतम रेलवे स्टेशनगोरखपुर जंक्शन (Gorakhpur Junction) – लगभग 3 किमी की दूरी पर
निकटतम हवाई अड्डामहायोगी गोरखनाथ एयरपोर्ट (Gorakhpur Airport) – लगभग 8 किमी की दूरी पर
समयसुबह 6:00 AM से शाम 7:00 PM तक
प्रवेश शुल्क₹10 – ₹20 (वयस्क), ₹5 – ₹10 (बच्चे)
विशेष कार्यक्रमसांस्कृतिक और खेलकूद कार्यक्रम, विशेष आयोजनों के दौरान झूलों और खेलों की गतिविधियाँ
भोजनपास के कैफे और स्टॉल्स में हल्का भोजन जैसे समोसा, चाय, बिस्किट आदि
मुख्य आकर्षणझूले, झील, जॉगिंग ट्रैक, हरियाली, परिवारिक वातावरण
पास में प्रमुख स्थलगोरखनाथ मंदिर, रामगढ़ ताल, गोलघर, राप्ती नदी

2.8. बौद्ध विहार (Buddhist Vihara)

बौद्ध विहार गोरखपुर में स्थित एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है, जो बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए एक श्रद्धा का केंद्र है। यह विहार भगवान बुद्ध के उपदेशों और उनके जीवन के महत्व को समझने के लिए एक आदर्श स्थान है।

बौद्ध विहार में श्रद्धालु ध्यान, पूजा और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए आते हैं। यह गोरखपुर में बौद्ध धर्म का महत्वपूर्ण प्रतीक है और यहाँ आने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए शांति और आत्मिक विकास का अनुभव होता है।

  • गोरखपुर शहर में बौद्ध धर्म से जुड़े छोटे-बड़े कई विहार और मंदिर हैं, जो स्थानीय बौद्ध समाज और पर्यटकों के लिए आस्था का केंद्र बने हुए हैं |
  • कुशीनगर, जो गोरखपुर ज़िले के पास है, बौद्ध धर्म के चार सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। यही वह स्थान है जहाँ भगवान बुद्ध ने अपना अंतिम उपदेश दिया, महापरिनिर्वाण (मोक्ष) प्राप्त किया और उनका दाह संस्कार हुआ
  • कुशीनगर में मौजूद थाई मंदिर और बौद्ध विहार वास्तुकला और शांतिपूर्ण वातावरण के लिए प्रसिद्ध हैं। यह मंदिर थाईलैंड के दानदाताओं द्वारा 1994 से शुरू होकर 2001 में आम जन के लिए खोला गया। यहाँ पर बौद्ध, जैन और हिंदू धर्म से जुड़ी प्राचीन मूर्तियां प्रदर्शित की गई हैं |
  •  कुशीनगर को इंटरनेशनल बुद्धिस्ट सर्किट में शामिल किया गया है, जहाँ हर साल हजारों विदेशी बौद्ध श्रद्धालु आते हैं, खासकर थाईलैंड, जापान, श्रीलंका देशों से
  • कुशीनगर का महापरिनिर्वाण मंदिर विश्व प्रसिद्ध है, जिसमें भगवान बुद्ध की लेटी हुई मूर्ति है। यहाँ हर साल वैशाख पूर्णिमा (बुद्ध पूर्णिमा) पर विशेष आयोजन होता है |
  • बौद्ध विहारों के आसपास बहुत सारे तालाब, लोटस तालाब, मिनिएचर गार्डन और शांत वातावरण है, जो ध्यान और साधना के लिए उपयुक्त है |
  • कुशीनगर के अलावा, कपिलवस्तु (गोरखपुर से 97 किमी दूर) भी महत्वपूर्ण बौद्ध स्थल है। यहाँ खुदाई में भगवान बुद्ध की अस्थियाँ (relics) प्राप्त हुईं हैं, और यह स्थान बुद्ध के प्रारंभिक जीवन (पहले 29 वर्ष) से जुड़ा है |
  • इन विहारों के परिसर में बौद्ध जीवन से जुड़ी कलाकृतियाँ और मूर्तियाँ प्रदर्शित की गई हैं, जिन्होंने गंधार और मथुरा कला शैली को दिखाया है
  • बौद्ध तीर्थों पर उत्पादन से जुड़े विशेष पूजा, ध्यान केंद्र, संग्रहालय और आर्ट गैलरी भी हैं, जो बौद्ध संस्कृति को जीवित रखते हैं |

बौद्ध विहार के बारे में विस्तृत जानकारी (Detailed Information of Buddhist Vihara)

विवरणजानकारी
स्थल का नामबौद्ध विहार (Buddhist Vihara)
पताबौद्ध विहार, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
निकटतम रेलवे स्टेशनगोरखपुर जंक्शन (Gorakhpur Junction) – लगभग 5 किमी की दूरी पर
निकटतम हवाई अड्डामहायोगी गोरखनाथ एयरपोर्ट (Gorakhpur Airport) – लगभग 8 किमी की दूरी पर
समयसोमवार से रविवार: 6:00 AM से 7:00 PM तक
प्रवेश शुल्कनि:शुल्क
विशेष कार्यक्रमध्यान केंद्र, पूजा और बौद्ध धर्म पर आधारित कार्यक्रम
भोजनपास के कैफे और स्टॉल्स में हल्का भोजन जैसे समोसा, चाय, बिस्किट आदि
मुख्य आकर्षणभगवान बुद्ध की मूर्तियाँ, ध्यान केंद्र, शांतिपूर्ण वातावरण
पास में प्रमुख स्थलगोरखनाथ मंदिर, रामगढ़ ताल, गोरखपुर जंक्शन, राप्ती नदी

2.9. इमामबाड़ा (Imambara)

इमामबाड़ा गोरखपुर का एक प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है। यह स्थल अपनी भव्यता और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। इमामबाड़ा मुख्य रूप से शिया मुसलमानों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है, और यहाँ पर धार्मिक आयोजनों, खासकर मुहर्रम के दौरान कार्यक्रम होते हैं।

गोरखपुर में स्थित इस इमामबाड़े की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अहमियत है, और यह पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। इमामबाड़ा का निर्माण 19वीं शताब्दी में हुआ था। यह स्थान शिया मुसलमानों के धार्मिक कार्यों, खासकर मुहर्रम के दौरान आयोजनों के लिए बनाया गया था।

  • गोरखपुर के इमामबाड़े में आदमकद (मानव आकार) का सोने और चांदी से बना ताजिया रखा गया है, जो पूरे देश में अपनी तरह का अनूठा और ऐतिहासिक है। इस ताजिए को देखने के लिए विशेष रूप से मोहर्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोग दूर-दूर से आते हैं। यह ताजिया केवल मोहर्रम के 10 दिनों के लिए ही आम जनता के दर्शन के लिए खोला जाता है।
  • इमामबाड़े में बाबा रोशन अली शाह द्वारा जलाई गई धुनी (पवित्र अग्नि) पिछले 300 वर्षों से लगातार जल रही है। मान्यता है कि यदि यह धुनी किसी कारणवश बुझ जाए, तो इसे गोरखनाथ मंदिर की धुनी से ही पुनः प्रज्वलित किया जाता है, जो हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक भी है |
  • यहाँ हजरत सैयद रोशन अली शाह का हुक्का, चिंमटा, खड़ाऊँ और बर्तन आदि भी सुरक्षित रखे गए हैं, जिन्हें देखने लोग आते हैं |
  • मोहर्रम के अवसर पर इमामबाड़े से शाही जुलूस निकाला जाता है, जो शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरता है। इस दौरान इमामबाड़ा मुतवल्लियान कमेटी प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर जुलूस की व्यवस्था करती है |
  • गोरखपुर का इमामबाड़ा न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह क्षेत्र की गंगा-जमुनी तहजीब, सांप्रदायिक सौहार्द और ऐतिहासिक विरासत का भी प्रतीक है।

इमामबाड़ा के बारे में विस्तृत जानकारी (Detailed Information of Imambara)

विवरणजानकारी
स्थल का नामइमामबाड़ा (Imambara)
पताइमामबाड़ा रोड, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
निकटतम रेलवे स्टेशनगोरखपुर जंक्शन (Gorakhpur Junction) – लगभग 3 किमी की दूरी पर
निकटतम हवाई अड्डामहायोगी गोरखनाथ एयरपोर्ट (Gorakhpur Airport) – लगभग 8 किमी की दूरी पर
समयसोमवार से रविवार: 9:00 AM से 6:00 PM तक
प्रवेश शुल्क₹20 – ₹50 (वयस्क), ₹10 – ₹20 (बच्चे)
विशेष कार्यक्रममुहर्रम के दौरान ताजिया जुलूस और अन्य धार्मिक आयोजन
भोजनपास के कैफे और स्टॉल्स में हल्का भोजन जैसे समोसा, चाय, बिस्किट आदि
मुख्य आकर्षणभव्य वास्तुकला, शाही नक्काशी, धार्मिक आयोजन
पास में प्रमुख स्थलगोरखनाथ मंदिर, रामगढ़ ताल, गोलघर, राप्ती नदी

2.10. कुशीनगर (Kushinagar)

कुशीनगर गोरखपुर जिले से लगभग 53 किलोमीटर दूर स्थित एक प्रमुख बौद्ध तीर्थ स्थल है, जो भगवान बुद्ध के निर्वाण स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। यह स्थान बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यधिक श्रद्धेय है, क्योंकि यहाँ भगवान बुद्ध ने अंतिम सांस ली थी।

कुशीनगर में कई महत्वपूर्ण बौद्ध स्थलों और मंदिरों का दर्शन किया जा सकता है, जो बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए तीर्थयात्रा का केंद्र हैं। यह स्थल दुनियाभर के बौद्ध तीर्थयात्रियों के लिए विशेष महत्व रखता है और यहाँ हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं।

यह स्थान भगवान बुद्ध के चार पवित्र स्थानों में से एक है। बुद्ध ने अपना अंतिम उपदेश यही पे दिया था, 483 ईसा पूर्व में महापरिनिर्वाण (मोक्ष) प्राप्त किया और रामाभार स्तूप में उनका अंतिम संस्कार किया | मंदिर के अंदर भगवान बुद्ध की 6.10 मीटर की निर्वाण मूर्ति स्थापित है। जो 5 वीं शताब्दी एडी के मोनोलिथ रेड-रेत पत्थर से बना हुआ है। यह ‘डाइंग-बुद्धा’ को अपने दाहिने तरफ पश्चिम की ओर अपने चेहरे पर रेखांकित किया हुआ है। 

भगवान बुद्ध के मरने के बाद से यह तीर्थयात्रा के लिए पवित्र स्थान बन गया | इंडो-जापानी मंदिर, बर्मा द्वारा निर्मित मंदिर, चीनी मंदिर, थाई मंदिर, कोरियाई, श्रीलंकाई, तिब्बती मंदिर, 15 एकड़ का ध्यान पार्क, संग्रहालय कुशीनगर में अन्य आकर्षण हैं।

  • कुशीनगर वह स्थान है जहाँ भगवान बुद्ध ने अपने जीवन का अंतिम उपदेश दिया और यहीं उन्हें महापरिनिर्वाण (मोक्ष) प्राप्त हुआ था। इसी कारण यह बौद्ध धर्म के चार सबसे पवित्र स्थलों में शामिल है |
  • कुशीनगर का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में ‘कुशावती’ या ‘कुशीनारा’ के नाम से हुआ है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, इसकी स्थापना श्रीराम के पुत्र ‘कुश’ ने की थी |
  • 19वीं सदी में अंग्रेज़ पुरातत्वविदों ने यहाँ खुदाई करके प्रसिद्ध रामाभार स्तूप और भगवान बुद्ध की लगभग 6.10 मीटर लंबी लेटी हुई प्रतिमा प्राप्त की थी |
  • आज कुशीनगर में भारत ही नहीं, बल्कि थाईलैंड, जापान, श्रीलंका, बर्मा, तिब्बत आदि देशों के सुंदर बौद्ध मंदिर हैं। यह स्थान दुनियाभर के बौद्ध तीर्थयात्रियों के लिए एक प्रमुख पर्यटन स्थल बन गया है |
  • हर वर्ष बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर यहाँ एक माह तक मेला लगता है, जिसमें हज़ारों श्रद्धालु भाग लेते हैं। इसके अलावा, 10 अगस्त को भी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं |
  • कुशीनगर गोरखपुर से लगभग 51-53 किमी पूरब में राष्ट्रीय राजमार्ग 28 पर स्थित है। यहाँ का मुख्यालय पडरौना में है, जो लगभग 15 किमी दूर है |
  • कुशीनगर के आसपास का क्षेत्र मुख्यतः कृषि प्रधान है, और यहाँ की प्रमुख बोली भोजपुरी है। गेहूं, धान, गन्ना मुख्य फसलें हैं |
  • पर्यटन के आकर्षण:
    • महापरिनिर्वाण मंदिर (जहाँ बुद्ध की लेटी प्रतिमा है)
    • रामाभार स्तूप (बुद्ध का अंतिम संस्कार स्थल)
    • थाई, जापानी, चीनी, बर्मी, श्रीलंकाई आदि देशों के बौद्ध मंदिर
    • 15 एकड़ का ध्यान पार्क
  • पहले इसे ‘माथा कुंवर का कोट’ और ‘कसिया बाजार’ के रूप में जाना जाता था, बाद में आधिकारिक नाम ‘कुशीनगर’ हुआ |
  • यह गोरखपुर मंडल के अंतर्गत आता है और विश्वभर में बौद्ध संस्कृति व विरासत को जीवित रखने वाला स्थान माना जाता है |
श्रेणीकुशीनगरगोरखपुर
स्थानउत्तर प्रदेश, भारतउत्तर प्रदेश, भारत
प्रमुख आकर्षणमहापरिनिर्वाण मंदिर, रामभर स्तूप, बुद्ध संग्रहालय, जापानी मंदिरगोरखनाथ मंदिर, रामगढ़ ताल, गोरखपुर संग्रहालय, इमामबाड़ा
भोजनशाकाहारी भोजन, स्थानीय मिठाइयाँ (जैसे- लड्डू, खीर)शाकाहारी भोजन, चाट, तहरी, समोसा, लिट्टी चोखा, माछ-भात
घूमने का समयअक्टूबर से मार्च (सर्दी में)अक्टूबर से मार्च (सर्दी में)
प्रवेश शुल्कमहापरिनिर्वाण मंदिर: ₹20, संग्रहालय: ₹10, अन्य स्थल: ₹10-₹20गोरखनाथ मंदिर: नि:शुल्क, संग्रहालय: ₹10-₹20, अन्य स्थल: ₹10-₹20

2.11. सहजनवा झील (Sahjanwa Lake)

सहजनवा झील गोरखपुर जिले के सहजनवा क्षेत्र में स्थित एक प्रमुख जलाशय है, जो पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए एक आकर्षक स्थल है। यह झील प्राकृतिक सौंदर्य और शांति का प्रतीक है, जो आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए जल आपूर्ति का स्रोत भी है। सहजनवा गोरखपुर का एक प्रमुख औद्योगिक नगर है, जो राष्ट्रीय राजमार्ग 27 पर स्थित है |

  • सहजनवा, गोरखपुर जिले की एक प्रमुख तहसील है, जो प्रमुख रूप से औद्योगिक क्षेत्र (GIDA) और रेलवे स्टेशन के लिए जानी जाती है। यहां की झीलें और प्राकृतिक जलस्रोत आसपास के ग्रामीण व शहरी इलाकों के लिए उपयोगी हैं।
  • सहजनवा एवं आसपास के क्षेत्र में कई छोटे-बड़े तालाब और जलाशय हैं, जिनका उपयोग ग्रामीण कृषि, जल संरक्षण, मत्स्य पालन और स्थानीय जैव विविधता के लिए होता है।
  • झीलों और तालाबों के आसपास सर्दियों में कई प्रकार के प्रवासी पक्षी देखने को मिल सकते हैं, जो गोरखपुर के आसपास के रामगढ़ ताल या बखिरा झील जैसे बड़े जलाशयों में भी पाई जाती हैं |
  • सहजनवा क्षेत्र में जलधारण क्षमता वाले ये जलस्रोत स्थानीय लोगों के लिए पीने, नहाने, सिंचाई और दैनिक जीवन में उपयोगी हैं।
  • जिला प्रशासन द्वारा अमूमन साफ-सफाई, संरक्षण और जलनिकायों के विकास के प्रयास किए जाते रहे हैं, जिससे स्थानीय पारिस्थितिकी और पर्यटन संवर्धित हो सके |

सहजनवा झील का विवरण

श्रेणीविवरण
स्थानसहजनवा, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, भारत
प्राकृतिक स्थितिजलाशय, झील, जल स्रोत
मुख्य आकर्षणशांतिपूर्ण वातावरण, जल पक्षी, प्राकृतिक सौंदर्य
सुविधाएंजल आपूर्ति, स्थानीय पर्यटन स्थल, आसपास के गांवों के लिए जल स्रोत
निकटतम रेलवे स्टेशनसहजनवा रेलवे स्टेशन (SWA)
निकटतम हवाई अड्डागोरखपुर एयरपोर्ट (GOP)
आसपास के प्रमुख स्थलरामगढ़ ताल, बखिरा चिरई बिहार, गोरखनाथ मंदिर

2.12. महालक्ष्मी मंदिर (Mahalaxmi Temple)

यह मंदिर गोरखपुर में धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान रखता है, जहां भक्त देवी महालक्ष्मी की पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। नजदीकी रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा गोरखपुर शहर में स्थित हैं, जिससे मंदिर तक पहुंचना सुविधाजनक है। मंदिर परिसर में नियमित पूजा के साथ-साथ त्योहारों के दौरान विशेष अनुष्ठान होते हैं और भक्तों के लिए प्रसाद और भोजन की व्यवस्था भी रहती है। यह मंदिर न केवल आध्यात्मिक शांति देता है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र भी है

  • यह मंदिर गोरखपुर शहर के कटघर, मोहद्दीपुर, या आसपास के क्षेत्र में स्थित है और स्थानीय स्तर पर धन, समृद्धि और शुभता की देवी महालक्ष्मी को समर्पित है। यहाँ प्रतिवर्ष विशेषकर दीपावली और शुक्रवार को श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है।
  • लोक-मान्यता के अनुसार, सच्चे मन से माँ लक्ष्मी से प्रार्थना करने पर भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है और आर्थिक कष्ट दूर होते हैं। यहाँ माँ लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु और गणेश जी की भी पूजा की जाती है।
  • दीपावली पर प्रतिवर्ष विशेष पूजा, आकर्षक सजावट और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।
  • शारदीय नवरात्र और शुक्रवार को भी विशेष पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है।
  • मंदिर परिसर साफ-सुथरा और शांत वातावरण वाला है। यहाँ श्रद्धालुओं के लिए बैठने, ध्यान और प्रसाद वितरण की व्यवस्था होती है।
  • इस मंदिर में कई सामाजिक व धार्मिक गतिविधियां होती हैं, जैसे अन्नदान, भंडारा, गरीबों को वस्त्र वितरण आदि।
विषयजानकारी
मंदिर का नाममहालक्ष्मी मंदिर, गोरखपुर
स्थितिगोरखपुर, उत्तर प्रदेश
समर्पित देवीदेवी महालक्ष्मी (धन और समृद्धि की देवी)
वास्तुकलापारंपरिक हिंदू मंदिर वास्तुकला, जिसमें काले पत्थर का उपयोग और उत्तर भारतीय-दक्षिण भारतीय शैली का मिश्रण है। मुख्य गर्भगृह अंधकारमय होता है।
मुख्य मूर्तियाँदेवी महालक्ष्मी, देवी महाकाली, देवी महासरस्वती
पूजा-अर्चनादैनिक पूजा, काकड़ आरती (सुबह), शयन आरती (रात), फूल, मिठाई, नारियल चढ़ाना
प्रमुख त्योहारनवरात्रि (9 रातों का विशेष अनुष्ठान), दिवाली (दीपों से सजावट)
सांस्कृतिक महत्वधार्मिक स्थल के साथ-साथ सांस्कृतिक केंद्र, भजन, सामुदायिक समारोह, धर्मार्थ कार्य, निःशुल्क भोजन वितरण
नजदीकी रेलवे स्टेशनगोरखपुर रेलवे स्टेशन (Gorakhpur Junction) – गोरखपुर का मुख्य रेलवे हब है।
नजदीकी हवाई अड्डागोमती नगर हवाई अड्डा, गोरखपुर (Gorakhpur Airport)
भोजनमंदिर के आसपास स्थानीय उत्तर भारतीय व्यंजन उपलब्ध, जैसे कि पूरी-भाजी, दाल-चावल, हलवा आदि। मंदिर परिसर में भी प्रसाद और निःशुल्क भोजन (अन्नदान) मिलता है।
पतामहालक्ष्मी मंदिर, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, भारत
समयसुबह 5:00 बजे से रात 9:00 बजे तक (पूजा और दर्शन के लिए)
प्रवेश शुल्कमंदिर में प्रवेश निशुल्क है। पूजा और अनुष्ठान के लिए कोई विशेष शुल्क नहीं है।

2.13. महायोगी गोरखनाथ एयरपोर्ट (Mahayogi Gorakhnath Airport)

महायोगी गोरखनाथ एयरपोर्ट (Mahayogi Gorakhnath Airport), गोरखपुर, उत्तर प्रदेश का प्रमुख हवाई अड्डा है, जिसे भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) द्वारा संचालित किया जाता है। यह हवाई अड्डा भारतीय वायुसेना के बेस पर स्थित है और नागरिक उड्डयन के लिए एक नागरिक क्षेत्र के रूप में कार्य करता है।​

महायोगी गोरखनाथ एयरपोर्ट (Gorakhpur Airport), जिसे स्थानीय रूप से गोरखपुर हवाई अड्डा भी कहा जाता है, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर का प्रमुख घरेलू हवाई अड्डा है। इसका नाम प्रसिद्ध योगी और संत गोरखनाथ जी के नाम पर रखा गया है, जो गोरखपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक हैं

  • इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 0.71 एकड़ है और यहाँ 9000 फीट लंबी पक्की हवाई पट्टी है |
  • यहाँ का नया टर्मिनल भवन अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त है, जिसका उद्घाटन 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया गया था |
  • 1979 में इसकी स्थापना सैन्य उद्देश्यों के लिए हुई थी |
  • 1986 में इसे नागरिक उपयोग के लिए भी खोल दिया गया |
  • 2018 में एयरपोर्ट के बुनियादी ढांचे का बड़ा विस्तार किया गया, जिसमें रनवे को 1400 मीटर से बढ़ाकर 3000 मीटर किया गया और नया टर्मिनल भवन बनाया गया |
  • यह एयरपोर्ट भारतीय वायुसेना के सेंट्रल एयर कमांड के अधीन भी है, जहाँ से सैन्य विमान और हेलीकॉप्टर संचालित होते हैं |

महायोगी गोरखनाथ एयरपोर्ट का विवरण

श्रेणीविवरण
हवाई अड्डा कोडIATA: GOP, ICAO: VEGK
स्थानएयरपोर्ट क्षेत्र, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश 273001
प्रबंधनभारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) द्वारा संचालित
निकटतम रेलवे स्टेशनगोरखपुर जंक्शन (GKP) – लगभग 8 किमी दूर
निकटतम हवाई अड्डागोरखपुर एयरपोर्ट (GOP)
सीधी उड़ानेंदिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता, लखनऊ
सुविधाएंस्मोकिंग लाउंज, कैफे कॉफी डे, फूड कोर्ट, वाई-फाई, समाचार पत्र, टीवी, शॉप्स (WH Smith, Souvenir Shop)

2.14. गोरखपुर रेलवे म्यूजियम (Gorakhpur Railway Museum) 

गोरखपुर रेलवे म्यूजियम (Railway Museum, Gorakhpur) उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर का एक प्रमुख पर्यटन स्थल और ऐतिहासिक धरोहर है, जो भारतीय रेलवे की समृद्ध विरासत और तकनीकी विकास को दर्शाता है। यह म्यूजियम गोरखपुर शहर के गोल्फ कोर्स के पास, कुशीनगर रोड (पार्क रोड) पर स्थित है, और शहर के केंद्र से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर है

  • गोरखपुर रेलवे म्यूजियम का उद्घाटन 7 जुलाई 2007 को हुआ था, जिससे यह भारत के नवीनतम रेलवे संग्रहालयों में से एक है |
  • इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय रेलवे, विशेषकर उत्तर भारतीय रेलवे के इतिहास, तकनीकी विकास और सांस्कृतिक योगदान को संरक्षित और प्रदर्शित करना है |
  • यहाँ 19वीं सदी के पुराने भाप इंजनों, डेमो ट्रेनों और ऐतिहासिक कोचों का संग्रह है।
  • विभिन्न समयों में रेलवे कर्मचारियों द्वारा पहने गए यूनिफॉर्म, घड़ियाँ, फर्नीचर, फोटो गैलरी, और रेलवे से जुड़ी अन्य वस्तुएँ प्रदर्शित हैं |

गोरखपुर रेलवे म्यूज़ियम का विवरण

श्रेणीविवरण
स्थानरेलवे स्टेडियम कॉलोनी, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश 273009, भारत
निर्माण काल1890–1900 के बीच बंगाल एवं उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा आवासीय उद्देश्य से निर्मित
मुख्य आकर्षण1874 में लंदन में निर्मित ‘लॉर्ड लॉरेंस’ स्टीम इंजन, ऐतिहासिक टिकट काउंटर, सिग्नल मशीन, रेलवे उपकरण, फर्नीचर, यूनिफॉर्म, फोटो गैलरी, पुस्तकालय, टॉय ट्रेन, बच्चों के लिए खेल क्षेत्र, ‘हेरीटेज कोच’ रेस्टोरेंट

2.15. नवल उत्सव पार्क (Naval Utsav Park)

गोरखपुर में स्थित नवल उत्सव पार्क (Naval Utsav Park) एक प्रमुख मनोरंजन स्थल है, जो परिवारों, बच्चों और पर्यटकों के लिए आदर्श है। यह पार्क विभिन्न आकर्षणों, सुविधाओं और गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध है।

  • नवल उत्सव पार्क गोरखपुर में एक प्रमुख सार्वजनिक पार्क है, जो शहरवासियों और पर्यटकों के लिए खुला हरा‑भरा मनोरंजन स्थल है।
  • यह पार्क पारंपरिक स्थल मौजूदा झीलों, हरे-भरे वृक्षों और pathways के साथ एक खूबसूरत लैंडस्केप प्रदान करता है, जो स्थानीय जनता को ड्रॉ करता है।
  • नाम से ही स्पष्ट है — यहाँ नवल (नया वर्ष) उत्सव या अन्य पर्व‑पंचायती आयोजन किए जाते हैं। नववर्ष, सांस्कृतिक उत्सव, और सामुदायिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है जिससे यह पार्क जीवन्तता से भर जाता है। 
  • परिवार, बच्चे, युवा और बुजुर्ग इसे मॉर्निंग वॉक, योगाभ्यास, पिकनिक, और स्वंतंत्र सामाजिक मेलजोल के लिए पसंद करते हैं।
  • जैसे नव वर्ष के अवसर पर गोरखपुर के कई पार्कों और झीलों के आसपास मेले जैसा माहौल रहता है, नवल उत्सव पार्क भी इनमें शामिल माना जा सकता है, जहाँ लोग बोटिंग, फ्लोटिंग रेस्टोरेंट, मेला‑महौल आदि का आनंद लेते हैं |

नवल उत्सव पार्क का विवरण

श्रेणीविवरण
स्थानगोरखपुर, उत्तर प्रदेश, भारत
मुख्य आकर्षणझूले, वाटर राइड्स, बच्चों के खेल क्षेत्र, हरियाली, पिकनिक स्थल, सांस्कृतिक कार्यक्रम
विशेष सुविधाएंस्वच्छता, सुरक्षा, परिवारों के लिए उपयुक्त वातावरण, पार्किंग की सुविधा
मौसम अवधिदिनांकसमय
गर्मियाँ1 अप्रैल – 30 सितंबरसुबह 10:00 बजे – शाम 6:00 बजे
सर्दियाँ1 अक्टूबर – 31 मार्चसुबह 9:00 बजे – शाम 5:00 बजे
श्रेणीशुल्क (₹)
प्रवेश शुल्क20-50
झूला/वाटर राइड10-30 प्रति राइड
सुविधाविवरण
खाद्य विकल्पपार्क के भीतर छोटे कैफे, स्टॉल्स, स्नैक्स आदि
पिकनिक क्षेत्रपरिवारों के लिए पिकनिक स्थल, हरियाली के बीच बैठने की व्यवस्था
सुविधाएंस्वच्छता, सुरक्षा, पार्किंग, बच्चों के लिए खेल क्षेत्र

निष्कर्ष:

गोरखपुर एक विविधता से भरपूर स्थल है, जहाँ धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक धरोहर, और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्वितीय संगम देखने को मिलता है। यहाँ आने वाले पर्यटकों को न केवल शांति और ध्यान का अनुभव मिलता है, बल्कि भारतीय संस्कृति और इतिहास का भी गहरा ज्ञान प्राप्त होता है।

FAQ

रामगढ़ ताल पर बोटिंग का अनुभव कैसा होता है?

Ans. रामगढ़ ताल पर बोटिंग का अनुभव बेहद आनंददायक और रोमांचक होता है। यहाँ नौका विहार (बोटिंग) मुख्य आकर्षण है, जहाँ आप ताल के शांत और विस्तृत जल में नाव की सवारी का आनंद ले सकते हैं | बोटिंग के दौरान ताल का प्राकृतिक सौंदर्य, ठंडी हवा और पानी की लहरों की हल्की आवाज़ मन को शांति देती है। हाल के वर्षों में यहाँ वाटर स्पोर्ट्स और बोटिंग सुविधाओं को और बेहतर किया गया है, जिससे पर्यटकों को रोमांचक और सुरक्षित अनुभव मिलता है | परिवार, दोस्तों या बच्चों के साथ यहाँ बोटिंग करना एक यादगार अनुभव बन जाता है।

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