keral paryatan sthal-केरल पर्यटन स्थल: 10 प्रमुख आकर्षण स्थलों की सूची

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केरल को भारत का स्वर्ग या गॉड्स ओन कंट्री भी कहा जाता है | विज्ञापनों में केरल को ‘ईश्वर का अपना घर’ (God’s Own Country) कहा जाता है, यह कोई अतिशयोक्ति नहीं है। ये अपने प्राकृतिक सुंदरता , प्राकृतिक धरोहर , अनोखी परम्परा के लिए दुनिया भर में विख्यात है | यह भारत के दक्षिण में बसा राज्य है ये अपने समृद्ध इतिहास, अद्वितीय परंपराओं और आकर्षक पर्यटन स्थलों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है।

केरल भारत का एक राज्य है, जिसकी राजधानी त्रिवन्तपुरम या त्रिवेंद्रम है | यहाँ की मुख्य भाषा मलयालम है | यहाँ हिन्दू, मुस्लिम और ईसाई भी बड़ी संख्या में रहते हैं | भारत के दक्षिण-पश्चिम में अरब सागर और सह्याद्रि पर्वत श्रृंखलाओं के बीच एक खूबसूरत भूभाग स्थित है, जिसे केरल के नाम से जानते है | इस राज्य का क्षेत्रफल 38863 वर्ग किलोमीटर है और यहाँ मलयालम भाषा बोली जाती है।

कुछ पौराणिक कथाओ के अनुसार परसुराम ने अपना परसु समुद्र में फेके थे, जिस कारण कुछ उभरी आकर की भूमि समुद्र से बाहर निकल कर आया था जिससे लोगो के सामने केरल का अस्तित्व आया | यहां 10वीं सदी ईसा पूर्व से मानव बसाव के प्रमाण मिले हैं।

केरल शब्द की व्युत्पत्ति को लेकर विद्वानों में एकमत नहीं है। कहा जाता है कि “चेर – स्थल”, ‘कीचड़’ और “अलम-प्रदेश” शब्दों के योग से चेरलम बना था, जो बाद में केरल बन गया। केरल शब्द का एक और अर्थ है : – वह भूभाग जो समुद्र से निकला हो।

यहाँ केरल के दस प्रमुख पर्यटन स्थलों की सूची दी जा रही है, साथ ही केरल की संस्कृति, किठकली, भोजन, और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी दी जा रही है |

1. मुन्नार (Munnar)(keral paryatan sthal)

keral paryatan sthal

मुन्नार, केरल का एक प्रसिद्ध हिल स्टेशन है, जो केरल के पश्चिमी घाट में बसा है। यहाँ का वातावरण बहुत ही सुन्दर है | यहाँ चाय के बागान की खेती की जाती है जिससे वह अति मनमोहक हरियाली का दृश्य रहता है | यहाँ का दृश्य खूबसूरत है ,मुन्नार में आने वाले पर्यटकों को शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद मिलता है |

यहाँ पर आप पुरे भारत से अलग सौम्यता का अनुमान लग सकता है | यहाँ का अनुभव पुरे भारत से अलग है | यह स्थल पश्चिमी घाट के पहाड़ी क्षेत्र में बसा है और समुद्र स्तर से लगभग 1,600 मीटर की ऊँचाई पर है।

यहाँ का मौसम बहुत ही अनुकूल है जो पर्यटकों के लिए बहुत खास बन जाता है | यहाँ पे ठंडी जलवायु तथा सुरम्य पहाड़िया है जो इसको एक अच्छा डेस्टिनेशन बना देते है | मुन्नार कपल्स के लिए भी बहुत अच्छा जगह है यहाँ पे कपल्स के लिए घूमने के बहुत जगह है |

मुन्नार का मसालेदार चटपटा भोजन बहुत ही स्वादिष्ट होता है | यहाँ पे समुद्री भोजन भी पारम्परिकता के रूप में मिलता है | यहाँ शाकाहारी तथा मांशाहारी दोनों तरह का भोजन मिल जाता है |

यहाँ पे विविध प्रकार के चाय के भी चुश्की लिए जा सकते है | यहाँ पे हम ग्रीन टी , ब्लैक टी और मसालेदार चाय का भी आनंद ले सकते हैं |

यहाँ स्थित एरविकुलम नेशनल पार्क में आप नीलगिरी तहरी (Nilgiri Tahr) जैसी दुर्लभ प्रजातियों को देख सकते हैं। यह जगह प्रकृति प्रेमी और शांतमय वातावरण की तलाश करने वालो के लिए उत्तम है |

  • मुन्नार का अर्थ होता है “तीन नदियों का संगम” क्योंकि यहां तीन नदियां मुथिरा, पुजा नल्ला और थनी नदी एक साथ मिलती हैं।
  • यह केरल के इडुकी जिले में स्थित है और समुद्र तल से लगभग 1600 मीटर ऊँचाई पर बसा है, इसलिए यहां का मौसम साल भर ठंडा और सुखद रहता है।
  • मुन्नार की सबसे बड़ी खासियत इसके विस्तृत चाय के बागान हैं, जो पूरे दक्षिण भारत में सबसे बड़े और प्रसिद्ध माने जाते हैं।
  • यहां एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान है, जो दुर्लभ और लुप्तप्राय नीलगिरि थार (नीलगाय) का घर है।
  • मुन्नार में सलीम अली पक्षी अभयारण्य भी है, जिसमें 250 से ज्यादा पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं, जैसे एमराल्ड डव, हॉर्नबिल, बुलबुल, और कई अन्य।
  • यहां का एक दुर्लभ आकर्षण नीलकुरिंजी फूल है, जो हर 12 वर्षों में खिलता है और पूरे क्षेत्र को नीले रंग से रंग देता है।
  • मुन्नार की ऊँची चोटियों में अनामुडी पीक शामिल है, जो दक्षिण भारत की सबसे ऊंची चोटी है और समुद्र तल से लगभग 2700 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।
  • यह क्षेत्र ब्रिटिश वास्तुकला से प्रभावित है, यहां कई पुराने ब्रिटिश दौर के होटलों और चर्चों जैसे क्राइस्ट चर्च को देखा जा सकता है।
  • मुन्नार के स्थानीय त्यौहारों में ओमन और अटकल पोंगल प्रसिद्ध हैं, जो यहां की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं।
  • ट्रैकिंग, बाइक राइडिंग, और पहाड़ों की सैर के लिए मुन्नार एक लोकप्रिय गंतव्य है, खासकर मानसून और ठंडे मौसम में।

ठहरने के स्थान (Accommodation)

मुन्नार में रुकने के लिए कई स्थान हैं , जो बजट से लेकर लक्ज़री स्तर तक हैं। कुछ प्रमुख ठहरने के स्थान निम्नलिखित हैं:

1. लक्सरी रिसॉर्ट्स और होटल्स:

The Tea County Munnar: यह एक लक्ज़री होटल है, जो चाय बागानों के बीच में बसा है। यहां से पूरे मुन्नार का सुन्दर नजारा देखने को मिलता है |

Parakkat Nature Resort: यहाँ आप लग्जरी होटल का आनंद ले सकते है और यहाँ की अद्भुत तथा रोचक प्रकृति का मजा ले सकते है |

Tata Tea’s TATA Café: यह एक प्रीमियम कैफे और रिसॉर्ट है, इसके चारो तरफ प्रकृतिक सुंदरता है |

2. मध्यम बजट होटल्स:

Hotel Hillview Munnar: यह एक समृद्ध और आरामदायक होटल है, जो पर्यटकों के लिए अच्छी सुविधाएं देता है।

Westwood Riverside Garden Resort: यह रिसॉर्ट प्रकृति के पास होने का अनुभव देता है और साथ-साथ अच्छे कमरे और सेवाएं देता है |

3. बजट विकल्प:

Sreekrishna Residency: एक किफायती होटल जो आवश्यक सुविधाओं के साथ मिलता है।

Munnar Inn: एक सस्ता और अच्छा होटल है जहां आराम से ठहरने की सुविधा देता है।

करने के लिए चीजें (Things to Do)

मुन्नार में बहुत सी ऐसी चीजें हैं जिन्हें पर्यटक करते हैं और वहां के प्राकृतिक सौंदर्य में खो जाते है :

1. चाय बागानों में भ्रमण: मुन्नार के चाय बागान में घूमना एक बेहद खास रोचक द्रिष्टिकोण है। जो आपको आनंद से भर देता है| आप यहां चाय के उत्पादन की प्रक्रिया देख सकते हैं और ताजे चाय पत्तों का एकत्रित भी कर सकते हैं।

2. एराविकुलम नेशनल पार्क: यहाँ पर आपको भारत के दुर्लभ एतिहासिक “नीलगिरी तहर” और अन्य वन्य जीवों को देखने को मिलता है। यह ट्रैकिंग और सफारी का शानदार आनंद लिया जा सकता है |

3. आटोलेट वॉटरफॉल: यह झरना मुन्नार का एक प्रमुख आकर्षण है, यहाँ का द्रिश्य मनमोहक है | जहां आप प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ले सकते हैं और यहां के ठंडे पानी में नहा सकते हैं |

4. मैटूपेटी डेम और झील: यहाँ पे आप नव की सवारी कर सकते जो आपको अति आनंद देगा | यहां के नज़ारों का आनंद ले सकते हैं। झील के आसपास हरियाली होती है और पहाड़ी दृश्य बहुत सुहावना होता है |

5. टी टॉवर: यहां से आप मुन्नार के चाय बागानों की खेती वाला इलाका देख सकते है और पहाड़ों का शानदार दृश्य देख सकते हैं।

6. मुन्नार में ट्रैकिंग: पहाड़ियों पर ट्रैकिंग करना एक अलग ही अहसास देता है यहां के एडवेंचर प्रेमियों के लिए एक आकर्षक गतिविधि है। यहां के कई ट्रैकिंग रास्ते अद्भुत दृश्य का अनुभव देते हैं।

घूमने की अवधि (Ideal Duration)

1 रात/2 दिन

लोकप्रिय पर्यटक स्थल (Popular Tourist Attractions)

  1. एराविकुलम नेशनल पार्क

2. आटोलेट वॉटरफॉल

3. मैटूपेटी डेम और झील

4. टी टॉवर

5. कोचीन की चाय बागान

6. होल्ट हिल्स और नीलगिरी तहर

7. मुन्नार की चाय फैक्ट्री

8. नदी और झरने जैसे कुड्लमला झरना और पांथलमकारा वॉटरफॉल

यात्रा का सर्वोत्तम समय (Best Time to Visit)

मुन्नार जाने का सर्वोत्तम समय अक्टूबर से मार्च तक होता है। इस समय मौसम ठंडा और सुखद होता है, जो घूमने के लिए उपयुक्त होता है। मानसून के दौरान, जून से सितंबर तक यहां भारी बारिश हो सकती है, इसलिए इस दौरान यात्रा करने से बचना चाहिए, हालांकि बारिश के बाद प्राकृतिक दृश्यता अत्यधिक खूबसूरत होती है।

निकटतम हवाई अड्डा (Nearest Airport)

मुन्नार के निकटतम हवाई अड्डा कोचीन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (Cochin International Airport) है, जो लगभग 110 किलोमीटर दूर बसा है। यहां से आप टैक्सी या बस द्वारा मुन्नार पहुंच सकते हैं।

निकटतम रेलवे स्टेशन (Nearest Railway Station)

मुन्नार का निकटतम रेलवे स्टेशन Aluva Railway Station (अलुवा रेलवे स्टेशन) है, जो लगभग 110 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। दूसरा प्रमुख रेलवे स्टेशन Ernakulam Railway Station है, जो लगभग 130 किलोमीटर दूर है। इन स्टेशनों से आप बस या टैक्सी द्वारा मुन्नार पहुंच सकते हैं।

सड़क मार्ग : मुन्नार जाने के लिए सड़क मार्ग सबसे अच्छा है। आप कोचि या एर्नाकुलम से टैक्सी, बस या प्राइवेट कार से सीधे मुन्नार पहुंच सकते हैं।

और जानें: 4 Days In Kerala Guide

2. अलेप्पी (Alleppey)

Alleppey

अलेप्पी को वेनिस ऑफ़ द ईस्ट के नाम से भी जाना जाता है, यह केरल का एक प्रमुख जलयान भूमि है। यहाँ की शांत झीलों में दौरा करना आपको अलग ही अनुभव देता है और बैकवॉटर्स में नाव की सवारी करना एक अलग प्रकार का यादगार अनुभव देता है।अलेप्पी में आप हाउसबोट में रुक सकते है | आप केरल के जीवन को एक नए दृष्टिकोण से देख सकते हैं।

अलेप्पी (Alleppey), जिसे अलाप्पुझा (Alappuzha) भी कहा जाता है, यह केरल राज्य में पर्यटकों को घूमने वाले स्थलों में से एक है | अपनी सुंदरता, backwaters (पानी के रास्तों) और पारंपरिक केरल की जीवनशैली के लिए प्रसिद्ध है।

यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, शांत जलमार्ग और स्थानीय जीवनशैली आपको अपनी तरफ आकर्षित करती है। अलेप्पी का बैकवाटर एक ऐसी जगह है जहाँ आप अपनी व्यस्त जीवनशैली से दूर शांति और सुकून पा सकते हैं।

अलेप्पी, केरल के बीच में बसा है, और यह पश्चिमी घाट के पास, अरबी सागर के किनारे पर बसा है। यह शहर अपनी प्राचीन backwaters और खूबसूरत नाव यात्रा के लिए प्रसिद्ध रूप से जाना जाता है।

  • अलेप्पी को “पूर्व का वेनिस” (Venice of the East) कहा जाता है क्योंकि यहां कई छोटी-छोटी नहरें और पानी के रास्ते हैं, जो शहर को प्राकृतिक सुंदरता और अनोखी जलमार्ग व्यवस्था प्रदान करते हैं। यह जगह बैकवाटर टूरिज्म के लिए विश्व प्रसिद्ध है, जहां हाउसबोट (houseboat) सफर बहुत लोकप्रिय हैं।
  • अलेप्पी का ऐतिहासिक महत्त्व भी काफी बड़ा है। यह जगह प्राचीन काल से व्यापार का केंद्र रही है, खासकर 16वीं और 17वीं सदी में इसे डच और पुर्तगाली व्यापारियों ने महत्वपूर्ण माना। यहां केरल के कोइर (नारियल के रस से बनने वाला उत्पाद) उद्योग का भी विकास हुआ है।
  • अलेप्पी केरल की सांस्कृतिक विरासत का अच्छा उदाहरण है, जहां स्थानीय त्यौहारों और जीवनशैली का आनंद लिया जा सकता है। नेहरू ट्रॉफी बोट रेस, जो अलेप्पी के विशाल वेंबनाड झील में आयोजित होती है, बहुत प्रसिद्ध है और स्थानीय लोगों की भागीदारी एवं उत्साह को दर्शाती है।
  • अलेप्पी का लाइटहाउस, जो 1862 से समुद्री जहाजों का मार्गदर्शन करता है, एक प्रमुख पर्यटन आकर्षण है। यह लाल और सफेद रंग में बंटा हुआ है और इसके भीतर एक छोटा संग्रहालय भी है जहां भारत के पहले घूमने वाले प्रकाश (revolving light) को देखा जा सकता है।
  • यहाँ का खाना जैसे करिमीन फिश फ्राई (Karimeen Fish Fry) और अप्पम (Appam) केरल की पारंपरिक और स्वादिष्ट व्यंजन हैं, जो यहां के स्थानीय स्वाद को दर्शाते हैं।
  • अलेप्पी की सड़कों पर पत्थर की बिछी हुई मार्ग और साफ-सुथरी सड़कें पुराने जमाने की दुनिया का अहसास कराती हैं। यह जगह पर्यटकों के लिए शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का अच्छा संगम प्रदान करती है।

केरल का पारंपरिक भोजन अलेप्पी में भी मिल जाता है, जो मुख्य रूप से समुद्री भोजन, नारियल और मसालेदार व्यंजनों से भरपूर होता है। यहाँ के प्रमुख व्यंजन केरल साद्या (Kerala Sadya), कण्टी सूप (Kutti Soup), फिश करी (Fish Curry), पप्पदम (Pappadam) और स्मोक्ड फिश (Smoked Fish) है |

ठहरने के स्थान (Accommodation)

अलेप्पी में विभिन्न प्रकार के ठहरने के लिए जगह मिल जायेंगे :

हाउसबोट्स: अलेप्पी की हाउसबोट से ही पहचान बनती है, जहां आप backwaters में नाव पर ठहर सकते हैं। कई हाउसबोट्स में लग्जरी सुविधाएं भी देती हैं।

रिसॉर्ट्स और होटेल्स: अलेप्पी में अच्छे रिसॉर्ट्स और होटेल्स भी हैं, जो सभी बजट के हिसाब से अच्छे हैं।

The Lakeview Resort

Punnappra Backwater Resort

Vembanad Lake Resort

गेस्ट हाउसेस और होमस्टे भी यहाँ पर मिल जाते जिसमे आप रुक सकते हैं, जो आपको स्थानीय जीवन का अनुभव देने के लिए बेहतरीन होते हैं।

करने के लिए चीजें (Things to Do)

अलेप्पी की सबसे प्रसिद्ध गतिविधि हाउसबोट क्रूज़ है | यहाँ पर आप कायाकिंग भी कर सकते है | अल्लेपी कृषि पर्यटन स्थान भी है | यहाँ एक ऐतिहासिक स्थल कृष्णापुरम पैलेस भी है | अलेप्पी बीच में आप सूर्यास्त का नजारा भी देख सकते है | बोटिंग के लिए वेम्बनाड झील अच्छा है |

लोकप्रिय पर्यटक स्थल (Popular Tourist Spots)

वेम्बनाड झील: यह केरल की सबसे बड़ी झील है और अलेप्पी का प्रमुख आकर्षण है।अलेप्पी बीच: यह समुद्र तट शांति और सौंदर्य का प्रतीक है।कृष्णापुरम पैलेस: इस ऐतिहासिक महल में केरल की पारंपरिक वास्तुकला को देखा जा सकता है।पुरकुलम्मा मंदिर: यह एक प्रसिद्ध मंदिर है जो सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।चेरथला: यहां एक और प्रसिद्ध समुद्र तट है और यह पौराणिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।

यात्रा का सर्वोत्तम समय (Best Time to Visit)

अलेप्पी में जाने का सर्वोत्तम समय अक्टूबर से मार्च तक होता है। इस दौरान मौसम ठंडा और सुखद रहता है। अप्रैल से जून तक यहाँ गर्मी अधिक होती है, और जुलाई से सितंबर के बीच मानसून के कारण यात्रा करना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

निकटतम हवाई अड्डा (Nearest Airport)

कोचि इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Cochin International Airport) अलेप्पी से लगभग 75 किमी दूर है। यह अलेप्पी का सबसे निकटतम प्रमुख हवाई अड्डा है। यहां से टैक्सी या बस द्वारा अलेप्पी पहुंचा जा सकता है।

निकटतम रेलवे स्टेशन: अलेप्पी रेलवे स्टेशन; यह शहर की सीमा के भीतर है।

घूमने की अवधि (Recommended Duration)

1 रात/2 दिन

3. कोवलम (Kovalam)(keral paryatan sthal)

केरल का एक प्रमुख समुद्र तट कोवलम है , जो राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम से करीब 16 किलोमीटर दूर बसा है। यहाँ पर पुरे विश्व में से पर्यटन घूमने के लिए आते है यह सभी प्रमुख पर्यटन जगहों में से एक है |

कोवलम में सफेद रेट के समुद्र तट है और नीले पानी के कारण यह जगह कोवलम का प्रमुख बीच डेस्टिनेशन है | आप यहाँ सर्फिंग, स्नॉर्कलिंग और अन्य जलक्रीड़ा का आनंद ले सकते हैं |

कोवलम में समुद्र के किनारे स्थित रिसॉर्ट्स और होटल्स आरामदायक सुविधाएँ प्रदान करते हैं, जिससे यह स्थल एक आदर्श छुट्टी स्थल बन जाता है।

यहाँ के ताजे समुद्री भोजन और शांत वातावरण में घूमने का अनुभव बेहद रुचिकर होता है

  • कोवलम तिरुवनंतपुरम जिले में स्थित है और इसे विश्व के सबसे दर्शनीय बीचों में गिना जाता है। यहाँ के ताड़ के पेड़ और सुनहरी रेत के किनारे नीला समुद्र देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक आते हैं।
  • कोवलम तीन अर्धचन्द्राकार समुद्र तटों का समूह है: हवा तट (Hawa Beach), लाइटहाउस तट (Lighthouse Beach), और समुद्र तट (Samudra Beach)। इनमें से विशेष रूप से हवा तट और लाइटहाउस तट पर्यटकों को खास तौर पर आकर्षित करते हैं।
  • कोवलम में स्थित विहिन्जम लाइटहाउस, अरब सागर के किनारे बना है, जिसे लाइटहाउस बीच कहा जाता है। इस लाइटहाउस पर चढ़कर कोवलम और आसपास के खूबसूरत गाँवों और समुद्र का अद्भुत दृश्य देखा जा सकता है।
  • ब्रिटिश मिशनरी जार्ज अल्फ्रेड बेकर ने कोवलम के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे कोवलम की खूबसूरती से इतने प्रभावित थे कि यहीं रहने लगे। उनके परिवार ने केरल में शिक्षा की नींव रखी, जिससे केरल शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बन सका।
  • कोवलम बीच पर विभिन्न जल क्रीड़ा गतिविधियां होती हैं, जैसे तैराकी, कैटमैरन क्रूजिंग, और आयुर्वेदिक मसाज, जो इसे पर्यटकों के लिए और भी आकर्षक बनाती हैं।
  • कोवलम के आसपास पदमानभस्वामी महल भी है, जो त्रावनकोर के शासकों का निवास स्थल था और इसकी दीवारों पर 17वीं और 18वीं सदी की चित्रकारी के अद्भुत उदाहरण देखे जा सकते हैं।
  • शंकुमुघम बीच, कोवलम के निकट एक प्रसिद्ध स्थल है, जहाँ का सूर्यास्त और सूर्योदय बेहद मनमोहक होता है और पर्यटक यहाँ सांझ का आनंद लेने आते हैं।

यहाँ पर आप विभिन्न प्रकार के भोजन जैसे साद्या (Sadya), फिश करी (Fish Curry), पुट्टू (पुत्तू), केरल स्टाइल फ्राइड फिश (Kerala Style Fried Fish), और नारियल पानी (Coconut Water) का आनंद ले सकते है जो यहाँ के प्रमुख व्यंजन हैं |

ठहरने के स्थान (Accommodation)

कोवलम में विभिन्न प्रकार के रुकने के लिए जगह हैं, जो विभिन्न बजट और सुविधाओं के हिसाब से प्राप्त हो जाते हैं :

लक्सरी रिसॉर्ट्स: जैसे कि “The Leela Kovalam”, “Turtle on the Beach”, और “Somatheeram Ayurveda Resort” जो समुद्र के नजदीक शानदार सुविधाएं मिल जाती है ।

मिड-रेंज होटल्स: “Niraamaya Retreats Surya Samudra” और “Kovalam Beach Hotel” में आरामदायक कमरे और सुविधाएँ मिलती हैं।

गेस्ट हाउस और होमस्टे: यहाँ आप अधिक किफायती ऑप्शन भी पा सकते हैं जैसे कि “Bethsaida Hermitage” और “The Gateway Hotel”.

करने के लिए चीजें (Things to Do)

समुद्र तट पर आराम, वाटर स्पोर्ट्स, आयुर्वेद उपचार, योग और ध्यान, सूर्यास्त देखना, स्पा और मसाज |

लोकप्रिय पर्यटक स्थल

लाइट हाउस बीच (Lighthouse Beach), समुद्र तट और स्नॉर्कलिंग, पल्लीचल मंदिर (Pallipuram Church), आयुर्वेद उपचार केंद्र, वीरामगम चिल्ड्रन पार्क (Vellayani Lake)

यात्रा का सर्वोत्तम समय (Best Time to Visit)

कोवलम में घूमने के लिए सर्वोत्तम समय नवंबर से फरवरी तक है।

निकटतम हवाई अड्डा (Nearest Airport)

तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (Trivandrum International Airport): यह कोवलम से करीब 15 किलोमीटर दूर है और यहां से टैक्सी या बस द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। यह हवाई अड्डा अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों के लिए प्रमुख केंद्र है।

निकटतम रेलवे स्टेशन (Nearest Railway Station)

तिरुवनंतपुरम रेलवे स्टेशन (Trivandrum Railway Station): यह कोवलम का निकटतम रेलवे स्टेशन है, जो लगभग 16 किलोमीटर की दूरी पर बसा है। यहां से टैक्सी या बस द्वारा कोवलम पहुंचा जा सकता है।

घूमने की अवधि (Recommended Duration)

 1 दिन

4. वायनाड (Wayanad)

वायनाड, केरल के उत्तर-पूर्वी हिस्से में बसा एक सुंदर और शांतिपूर्ण हिल स्टेशन है | यहाँ लोग झरने, गुफाएं देखने तथा यहाँ सैर-सपाटे करने के लिए आते है , यहाँ का हरियाली भरा द्रिश्य अति सुन्दर है | मलयालम में वायनाड का अर्थ होता है- धान के खेतों की भूमि। यह स्थान एडवेंचर प्रेमियों और वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी के लिए बहुत आनंददायक है |

यहाँ की रीती-रिवाज और संस्कृति बहुत ही सरल और आसान है जिसे कोई भी आसानी से ग्रहण कर सकता है | यहाँ वन्य जीवो को देखा जा सकता है | यह प्रकृति प्रेमियों के लिए बहुत ही विशिष्ट जगह है | यहाँ की जलवायु पर्दूषण रहित है |

यहाँ का Edakkal Caves और कालीपट्टा वॉटरफॉल पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। यह स्थल उन लोगों के लिए आदर्श है जो एडवेंचर, प्रकृति और शांतिपूर्ण वातावरण में रुचि रखते हैं।

  • वायनाड एक खूबसूरत पहाड़ी जिला है, जो 2100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और लगभग 3000 साल पुराने घने जंगलों से घिरा हुआ है। इसे केरल का प्राकृतिक खजाना माना जाता है, जहां प्राकृतिक जंगल, नदियां, पहाड़ और वन्यजीव मिलते हैं।
  • वायनाड का मुथंगा वन्यजीव अभयारण्य खास तौर पर प्रसिद्ध है, जो हाथियों के लिए एक परियोजना क्षेत्र है। यहां हाथी, हिरण, बाघ, जंगली भालू, चीता, बाइसन सहित कई जीवजन्तु पाए जाते हैं।
  • वायनाड में कुरुवा द्वीप भी है जो कबीनी नदी से जुड़ा है। यह द्वीप अपने प्राकृतिक सौंदर्य और दुर्लभ जड़ी-बूटियों के लिए जाना जाता है। पर्यटक यहां पक्षियों के कलरव और हरियाली का आनंद लेते हैं।
  • वायनाड में पजास्सी मकबरा एक ऐतिहासिक स्थल है जहां 1805 में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले राजा पजास्सी का अंतिम संस्कार हुआ था। यह जगह पिकनिक और नौकायन के लिए लोकप्रिय है।
  • ह्मगिरी पहाड़ी पर स्थित थिरुनेल्ली मंदिर भी एक प्राचीन धार्मिक स्थल है, जिसके आसपास पहाड़ियों और जंगलों का सुमधुर वातावरण है।
  • वायनाड में ट्रेकिंग के लिए फैंटम रॉक एक दिलचस्प प्राकृतिक स्थल है। यह चट्टान एक मानव खोपड़ी जैसी दिखती है और पर्यटकों तथा ट्रेकर्स के बीच बहुत लोकप्रिय है।
  • यहां के झरने जैसे मीनमुट्टी जलप्रपात, चेतलयम जलप्रपात और बाणासुरा सागर बांध भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
  • विगत वर्षों में वायनाड भूस्खलन जैसी आपदाएं भी आई हैं, जिनसे स्थानीय लोगों को भारी नुकसान हुआ। नदी-नालों के उफान और भारी बारिश के चलते कुछ इलाकों में भूस्खलन हुआ है जिससे जीवन प्रभावित हुआ है।
  • वायनाड की प्राकृतिक सुंदरता, वन्यजीव, प्रभावशाली इतिहास और ट्रेकिंग के विकल्प इसे पर्यटकों के लिए एक बेहतरीन हिल स्टेशन बनाते हैं।

वायनाड में आपको केरल की पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखने का अवसर मिलता है। यहां के प्रमुख व्यंजन हैं: अप्पम (Appam), इडली और डोसा (Idli & Dosa) , केरली पराठा (Kerala Parotta), काडला करी (Kadala Curry), नारियल आधारित करी (Coconut-based Curry), और वायनाड स्पेशल चिकन करी |

ठहरने के स्थान (Accommodation)

वायनाड में हर बजट के हिसाब से ठहरने की जगह उपलब्ध हैं:

होटल्स: वायनाड में कई अच्छे होटलों की सुविधा मिल जाती है जैसे कि ‘The Wayanad Gateway’ और ‘Vythiri Village Resort’।

विला और रिसॉर्ट्स: रिसॉर्ट्स जैसे ‘Wayanad Silverwoods’ और ‘Banasura Hill Resort’ में भी ठहरने की सुविधाएं हैं, जहां आप प्राकृतिक दृश्य का आनंद भी ले सकते हैं।

हॉस्पिटैलिटी: वायनाड में ऐतिहासिक और पारंपरिक ठहरने के ऑप्शन भी हैं जो आपको केरल की संस्कृति का अनुभव देंगे |

करने के लिए चीजें (Things to Do)

ट्रैकिंग और हाइकिंग: वायनाड में आपको कई ट्रैकिंग और हाइकिंग ट्रेल्स मिलेंगे जैसे ‘Edakkal Caves’ और ‘Banasura Hill’. वायनाड वाइल्डलाइफ सेंचुरी: वायनाड वाइल्डलाइफ सेंचुरी में आप वन्यजीवों को देख सकते हैं, जैसे हाथी, बाघ, भालू और तेंदुआ। झरने देखना: ‘Soochipara Waterfalls’, ‘Meghamalai Waterfalls’, और ‘Pookode Lake’ जैसी खूबसूरत झरनों का आनंद लें। कृषि पर्यटन: वायनाड में आप चाय और मसाले बागानों में पर्यटन कर सकते हैं। सांस्कृतिक स्थल: ‘Edakkal Caves’ में प्राचीन चित्रकारी देख सकते हैं, जो इतिहास प्रेमियों के लिए खास आकर्षण हैं।

लोकप्रिय पर्यटक स्थल (Popular Tourist Attractions)

एडक्कल गुफाएं (Edakkal Caves), पूकोड लेक (Pookode Lake), सूचीपारा जलप्रपात (Soochipara Waterfalls), वायनाड वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी (Wayanad Wildlife Sanctuary), बानासुरा डेम (Banasura Dam)

यात्रा का सर्वोत्तम समय (Best Time to Visit)

वायनाड जाने के लिए सर्वोत्तम समय अक्टूबर से मई के बीच है।

निकटतम हवाई अड्डा (Nearest Airport)

वायनाड का निकटतम हवाई अड्डा कालीकट अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (Calicut International Airport) है, जो लगभग 65 किलोमीटर दूर है। इसके अलावा, मंगलुरु हवाई अड्डा भी करीब 130 किलोमीटर दूर है।

निकटतम रेलवे स्टेशन (Nearest Railway Station)

वायनाड का निकटतम रेलवे स्टेशन कोझीकोड रेलवे स्टेशन (Kozhikode Railway Station) है, जो लगभग 65 किलोमीटर दूर है। यहां से टैक्सी या बस के जरिए वायनाड पहुंचा जा सकता है।

घूमने की अवधि (Recommended Duration)

 1 रात/2 दिन

5. कुम्बलंगी (Kumbalangi)

कुम्बलंगी, केरल के कोच्चि शहर के पास बसा एक शांत और प्राकृतिक गांव है, कुम्बलंगी केरल का पहला “फिशिंग विलेज” है | जो अपनी पारंपरिक मछुआरी संस्कृति, खूबसूरत बैकवाटर और अद्वितीय इको-टूरिज्म के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थान प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए बहुत अच्छा है। यह जगह आमतौर पर उन लोगो को अपनी तरफ खींचती है जो शांति, प्रकृति और स्थानीय जीवन का अनुभव करना चाहते है |

यह गांव बैकवाटर पर स्थित है और यहाँ आप मछुआरों के साथ नाव की सवारी कर सकते हैं और केरल के ग्रामीण जीवन का अनुभव ले सकते हैं। कुम्बलंगी में ठहरने का अनुभव विशेष रूप से प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक गतिविधियों का आनंद लेने वाले पर्यटकों के लिए अच्छा है।

  • कुम्बलंगी को केरल सरकार ने भारत का पहला “मॉडल फिशिंग विलेज” (आदर्श मछली पकड़ने वाला गांव) बनाया है। यह परियोजना एक शांत और परंपरागत मछली पकड़ने वाले गांव को पर्यटन के लिए एक आदर्श स्थल में बदलने का प्रयास है।
  • कुम्बलंगी का जीवन मुख्यतः मछली पकड़ने और पारंपरिक हस्तशिल्प से जुड़ा है। यहां की जनता मिलनसार और पारंपरिक संस्कृति के जीवंत प्रतिनिधि हैं।
  • यहां पर्यटक नारियल के छिलकों से कॉयर की रस्सियाँ बनाना, ताड़ के पत्तों से छत बनाना, और पारंपरिक खिलौने बनाने जैसी गतिविधियों में सहभागी बन सकते हैं, जिससे केरल की संस्कृति का सीधा अनुभव होता है।
  • कुम्बलंगी का प्रसिद्ध मलयालम फिल्म “कुम्बलंगी नाइट्स” (2019) इसी गांव की पृष्ठभूमि में बनी है, जो गांव के जीवन और पारिवारिक रिश्तों को दर्शाती है।
  • खोपरे (नारियल के गू थे) से निकला तेल यहां की महिलाओं के घने और लंबे बालों का राज माना जाता है।
  • कुम्बलंगी अपनी सुंदर प्राकृतिक जलधाराओं, हरियाली और शांति के कारण इको-टूरिज्म के लिए भी प्रसिद्ध है। पर्यटक यहां प्राकृतिक सुंदरता और स्थानीय जीवन का आनंद ले सकते हैं।
  • कोच्चि से मात्र 10 किलोमीटर दूर स्थित यह गांव शहर के व्यस्त जीवन से दूर शांति और प्राकृतिक जीवन की एक झलक प्रदान करता है।
  • कुम्बलंगी की यह पहल पूरे भारत में एक अनूठा उदाहरण है कि किस तरह एक पारंपरिक मछली पकड़ने वाले गांव को पर्यटन और सांस्कृतिक संरक्षण के माध्यम से विकसित किया जा सकता है।

कुम्बलंगी में आपको केरल के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखने को मिलता है, खासकर मछली आधारित भोजन। कुछ प्रमुख व्यंजन जो यहां लोकप्रिय हैं जो ये हैं केरली मछली करी (Kerala Fish Curry), पापड़ और कच्ची मछली (Fish and Papad), कडला करी (Kadala Curry), पोटोत्टी (Puttu), अद्भुत नारियल आधारित करी (Coconut-based Curries).

ठहरने के स्थान (Accommodation) keral paryatan sthal

कुम्बलंगी में ठहरने के लिए कुछ सुंदर और आरामदायक जगह हैं:

होटल्स और रिसॉर्ट्स: ‘Kumbalangi Homestay’, ‘Chungath Homestay’, और ‘Kumbalangi Lake Resort’ जैसे रिसॉर्ट्स में आप पर्यावरण के साथ मेलजोल करके रह सकते हैं।

होमस्टे: कुम्बलंगी में कई होमस्टे भी उपलब्ध हैं जहां आप स्थानीय संस्कृति का अनुभव करते हुए ठहर सकते हैं।

गेस्ट हाउस: यह भी एक अच्छा और सस्ता जगह है, जो आपको गांव के पारंपरिक जीवन के नज़दीक रखने में मदद करेगा।

करने के लिए चीजें (Things to Do)

कुम्बलंगी में आप बहुत सी दिलचस्प चीजें कर सकते हैं: कुम्बलंगी इको-टूरिज्म: स्थानीय मछुआरों के जीवनशैली का अनुभव कराता है। नाव की सवारी के जरिए बैकवाटर का आनंद ले सकते हैं। मछली पकड़ना और स्थानीय जीवन, कुम्बलंगी डेवेलपमेंट प्रोजेक्ट, नाव की सवारी (Boating), पारंपरिक कुम्बलंगी भोजन |

लोकप्रिय पर्यटक स्थल (Popular Tourist Attractions)

कुम्बलंगी के आसपास कुछ लोकप्रिय पर्यटक स्थल हैं: जैसे कुम्बलंगी इको-टूरिज्म विलेज, कुम्बलंगी बैकवाटर्स, चालादेवी मन्दिर, वायनाड |

यात्रा का सर्वोत्तम समय (Best Time to Visit)

कुम्बलंगी में यात्रा करने का सर्वोत्तम समय अक्टूबर से अप्रैल तक है, जब मौसम हल्का और सुखद होता है।

निकटतम हवाई अड्डा (Nearest Airport)

कुम्बलंगी का निकटतम हवाई अड्डा कोचीन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (Cochin International Airport) है, जो लगभग 30 किलोमीटर दूर है। यहां से आप टैक्सी या बस द्वारा कुम्बलंगी पहुंच सकते हैं।

निकटतम रेलवे स्टेशन (Nearest Railway Station)

कुम्बलंगी का निकटतम रेलवे स्टेशन कोचीन रेलवे स्टेशन (Cochin Railway Station) है, जो लगभग 14 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां से टैक्सी या ऑटो रिक्शा द्वारा कुम्बलंगी पहुंच सकते हैं।

घूमने की अवधि (Recommended Duration)

कुम्बलंगी में घूमने के लिए 1 से 2 दिन का समय उपयुक्त है।

6. थिरुवनंतपुरम (Thiruvananthapuram)

थिरुवनंतपुरम केरल की राजधानी है | केरल की राजधानी थिरुवनंतपुरम में आप प्रसिद्ध पद्मनाभस्वामी मंदिर, संग्रहालय और किले देख सकते हैं। यह अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, यह हिन्दू धर्म के लोगो के लिए प्रमुख तीर्थ स्थल है |

थिरुवनंतपुरम केरल राज्य का सबसे बड़ा नगर और राजधानी है | यह थिरुवनंतपुरम जिले का मुख्यालय है | केरल राजधानी के अतिरिक्त केरल शैक्षणिक व्यवस्था का केंद्र भी यही है। कुछ शैक्षणिक केंद्र जैसे विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र और राजीव गाँधी जैव प्रौद्योगिकी भी यही पे है |

केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम को त्रिवेंद्रम के नाम से भी जाना जाता है | यह देवताओ की नगरी के नाम से मशहूर है | इस शहर को महात्मा गाँधी ने नित हरा नगर की संज्ञा दी थी। इस नगर का नाम शेषनाग अनंत के नाम पर पड़ा जिनके ऊपर पद्मनाभस्वामी (भगवान विष्णु) विश्राम करते हैं।

इसके अतिरिक्त , संग्रहालय, किले और अन्य ऐतिहासिक स्थल भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। थिरुवनंतपुरम का समुद्र तट और आसपास के हिल्स भी इस शहर को और भी आकर्षक बनाते हैं।

  • थिरुवनंतपुरम केरल की राजधानी है, जिसे त्रिवेंद्रम के नाम से भी जाना जाता है। इसका नाम भगवान विष्णु के एक अवतार “अनंत” (शेषनाग) से जुड़ा है, और इसका अर्थ है “भगवान अनंत का शहर”।
  • यह शहर अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध है, खासकर पद्मनाभस्वामी मंदिर के लिए, जो भगवान विष्णु को समर्पित एक प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर के नीचे कई तहखाने हैं, जिनमें अत्यधिक मूल्यवान खजाने छिपे हैं।
  • थिरुवनंतपुरम में टेक्नोपार्क स्थित है, जो भारत का सबसे बड़ा आईटी पार्क है, जहां लगभग 400 कंपनियां हैं और 52,000 से अधिक लोग काम कर रहे हैं। यह शहर आईटी हब के रूप में तेजी से उभर रहा है।
  • यहाँ के समुद्री तट जैसे कोवलम बीच, शांगुमुघम बीच, और वरकला बीच पर्यटकों के लिए आकर्षण के केंद्र हैं। विशेष रूप से पूवर और वरकला बीच को प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है।
  • थिरुवनंतपुरम में 1857 में स्थापित भारत के सबसे पुराने चिड़ियाघरों में से एक है, जो वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक प्रसिद्ध स्थल है। इसके अलावा, यहाँ विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र भी स्थित है।
  • यह शहर शिक्षा और संस्कृति का केंद्र भी है, जहाँ केरल विश्वविद्यालय स्थित है, और यहाँ कई सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सव आयोजित होते हैं, जिनमें सबसे प्रसिद्ध ओणम और इंद्रजात्रा है।
  • थिरुवनंतपुरम की अर्थव्यवस्था में हस्तशिल्प, मसाले व्यापार, मलयालम फिल्म इंडस्ट्री और पर्यटन का बड़ा योगदान है।
  • यह शहर पुराने और नए का मिश्रण है, जहां प्राचीन मंदिरों के साथ-साथ आधुनिकता का भी समावेश देखा जा सकता है।
  • थिरुवनंतपुरम में कई संग्रहालय और ऐतिहासिक स्थल हैं, जैसे मालेगा पैलेस, पद्मनाभपुरम पैलेस, और नेपियर संग्रहालय, जो शहर के समृद्ध इतिहास और कला को दर्शाते हैं।

यहाँ यात्रा करने के तरीके:

वायु मार्ग: थिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है, जो सीधे अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों से जुड़ा हुआ है।

रेल मार्ग: थिरुवनंतपुरम रेलवे स्टेशन से पूरे भारत से ट्रेन सेवाएं उपलब्ध हैं।

सड़क मार्ग: आप कर्नाटका, तमिलनाडु या अन्य बड़े शहरों से बस या टैक्सी के माध्यम से थिरुवनंतपुरम पहुँच सकते हैं।

7. एर्नाकुलम (Ernakulam)

एर्नाकुलम केरल राज्य के मध्य भाग में स्थित एक प्रमुख नगर और जिला है। यह कोच्चि (Cochin) शहर का मुख्यभूमि (mainland) क्षेत्र है और कोच्चि महानगर का सबसे शहरी हिस्सा माना जाता है |  एर्नाकुलम को केरल की वाणिज्यिक राजधानी भी कहा जाता है, क्योंकि यह राज्य का एक प्रमुख आर्थिक, व्यापारिक और औद्योगिक केंद्र है

एर्नाकुलम, कोचीन का एक प्रमुख हिस्सा है, जो व्यापार, संस्कृति और आधुनिकता का अद्भुत संगम है। यहाँ के प्रसिद्ध बैकवॉटर्स, चर्च, और किले आपको एक अद्वितीय अनुभव देने योग्य हैं |

  • एर्नाकुलम अरब सागर के तट पर बसा है और यहाँ से फोर्ट कोच्चि, मट्टनचेरी, वाइपीन द्वीप, विलिंगडन द्वीप आदि प्रमुख स्थल जुड़े हुए हैं |
  • यह जिला केरल के सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में से एक है और यहाँ की आबादी 20 लाख से अधिक है |
  • कोच्चि को “अरब सागर की रानी” (Queen of Arabian Sea) भी कहा जाता है |
  • एर्नाकुलम में कई दर्शनीय स्थल हैं, जैसे मरीन ड्राइव, सुभाष पार्क, दरबार हॉल ग्राउंड, महात्मा गांधी रोड, केरल उच्च न्यायालय, बी.आर. अम्बेडकर स्टेडियम |
  • एर्नाकुलम को केरल की वाणिज्यिक राजधानी कहा जाता है और यह कोच्चि महानगर क्षेत्र का मुख्य हिस्सा है। इसे भारत का पहला 100% साक्षर जिला माना जाता है, जहां उच्च साक्षरता दर है।
  • एर्नाकुलम जिले में कोच्चि, काक्कनाड, अलुवा और अन्य प्रमुख क्षेत्र आते हैं। यहाँ केरल का सबसे बड़ा महानगरीय क्षेत्र है और यह राज्य में सबसे अधिक राजस्व अर्जित करने वाला जिला भी है।
  • एर्नाकुलम में कोच्चि का प्रसिद्ध मरीन ड्राइव है, जो एक सुंदर समुद्र तट सड़क है और यहाँ से अरब सागर का मनोरम प्राकृतिक दृश्य दिखता है। लोग यहाँ शाम को अक्सर सूर्यास्त देखने आते हैं।
  • एर्नाकुलम जिले में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, केरल उच्च न्यायालय और कोच्चि स्टॉक एक्सचेंज जैसे महत्वपूर्ण संस्थान भी स्थित हैं, जो इसे आर्थिक और तकनीकी केंद्र बनाते हैं।
  • एर्नाकुलम में एर्नाकुलाथप्पन मंदिर, एक प्राचीन शिव मंदिर भी है, जो अपनी वास्तुकला और पश्चिममुखी शिव की मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है।
  • यहाँ मलयालम प्रमुख भाषा है, लेकिन अंग्रेजी, तमिल और हिंदी भी बोली और समझी जाती हैं।
  • कोच्चि में ज्यू शहर भी है, जो प्राचीन यहूदी बस्ती है और इसकी वास्तुकला और सांस्कृतिक इकाई पर्यटकों को आकर्षित करती है।

यहाँ की बैकवाटर सवारी, खासकर चालिका और क्यूज़िन के लिए प्रसिद्ध है। इसको गेटवे टू केरल भी कहा जाता है।

यहाँ यात्रा करने के तरीके:

यहाँ यात्रा करने के तरीके:

वायु मार्ग: कोचि इंटरनेशनल एयरपोर्ट एर्नाकुलम के पास स्थित है।

रेल मार्ग: कोचीन रेलवे स्टेशन से एर्नाकुलम तक टैक्सी या बस से आसानी से पहुँचा जा सकता है।

सड़क मार्ग: एर्नाकुलम को कोच्चि और अन्य प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग द्वारा जोड़ा गया है।

8. कथकली (Kathakali)(keral paryatan sthal)

केरल में कथकली का नृत्य किया जाता है जो केरल का सांस्कृतिक धरोहर है | इस नृत्य को करने के लिए कलाकार रंग – बिरंगे कपडे पहनते है और चेहरे पे मेक उप लगते है। कथकली का नृत्य केरल के विभिन्न हिस्सों में होता है | खासकर थिरुवनंतपुरम और कोच्चि में। यह नृत्य शैली केरल की संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे देखना आपके यात्रा अनुभव को और भी रोमांचक बना देगा |

कथकली मालाबार, कोचीन और त्रावणकोर के आस पास प्रचलित नृत्य शैली है। कथकली, केरल की सुप्रसिद्ध शास्त्रीय रंगकला है | 17 वीं शताब्दी में कोट्टारक्करा तंपुरान (राजा) ने जिस रामनाट्टम का आविष्कार किया था उसी का विकसित रूप है कथकली।  यह रंगकला नृत्यनाट्य कला का सुंदरतम रूप है।

कथकली के साहित्यिक रूप को ‘आट्टक्कथा’ कहते हैं। गायक गण वाद्यों के वादन के साथ आट्टक्कथाएँ गाते हैं। कलाकार उन पर अभिनय करके दिखाते हैं। कथा का विषय भारतीय पुराणों और इतिहासों से लिया जाता है।  

  • कथकली केरल की पारंपरिक नृत्य कला है, जो लगभग 300 साल पुरानी शास्त्रीय रंगमंचीय शैली है। इसे मलयालम भाषा में ‘कहानी का खेल’ कहा जाता है। यह नृत्य कला भारतीय महाकाव्यों जैसे रामायण, महाभारत की कथाओं का नाट्य रूपांतरण है, जिसमें संगीत, अभिनय और नृत्य का सामंजस्य होता है।
  • कथकली में कलाकार भावों और कथाओं को अभिव्यक्त करने के लिए विधिबद्ध हस्तमुद्राओं और चेहरे के भावों का उपयोग करते हैं। मेकअप में पांच मुख्य प्रकार होते हैं: पच्चा (हरा – शालीन नायक), कत्ती (खलनायक), ताड़ी (तीन प्रकार की दाढ़ी, जैसे सफेद, लाल, काली), करि (काला – राक्षस), और मिनुक्क (नाजुक पात्र जैसे स्त्री और संत)। चेहरे को चावल और चूने के लेप से सजाया जाता है, जिससे वह मुखौटे जैसा दिखता है।
  • कथकली का संगीत केरल के पारंपरिक सोपान संगीत और कर्नाटक संगीत पर आधारित होता है, जिसमें ढोल, मद्दलम, चेंगिला, इलत्तालम आदि वाद्य शामिल होते हैं।
  • कथकली का प्रशिक्षण कठिन होता है, जिसमें नर्तकों को शरीर की विशेष कसरतें और भावाभिव्यक्ति सिखाई जाती है। यह कला थियेटर और नृत्य का अनूठा मिश्रण है, जो देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर देता है।
  • कथकली का विकास 16वीं-17वीं सदी में कोट्टारक्कारा तंपुरान के रामनाट्टम से हुआ माना जाता है और यह केरल की सांस्कृतिक धरोहर में गिना जाता है। इसकी भव्य वेशभूषा, मुखौटा और नृत्य की बारीकियों ने इसे विश्व प्रसिद्ध बना दिया है।

कथकली एक प्रसिद्ध नृत्य रूप है जिसे केरल के विभिन्न हिस्सों में देखा जा सकता है।

  • व्यूअर के लिए स्थान: कोच्चि, थिरुवनंतपुरम और कालीकट जैसे प्रमुख शहरों में कथकली नृत्य के प्रदर्शन होते हैं।

वायनाड और मुन्नार जैसे हिल स्टेशन और बीच रिसॉर्ट्स में भी स्थानीय नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं।

9. केरल का भोजन (Kerala Cuisine)

केरल (keral paryatan sthal) के पारंपरिक भोजन में नारियल का इस्तेमाल बहुत होता है। यहाँ का “साध्या” (Sadya), एक प्रकार का शाकाहारी थाली, जिसे केले के पत्ते पर परोसा जाता है, ये बहुत प्रसिद्ध है।

केरल का भोजन बहुत स्वादिष्ट और दूसरे जगहों से भिन्न होता है, जिसमें समुद्री भोजन का भी अहम स्थान है। मांसाहारी लोगो के लिए काला करी बहुत प्रसिद्ध भोजन है |

यहाँ का पुथुनी पिठी (स्टीम राइस पेस्ट) और ताजे समुद्री भोजन का स्वाद लेना एक अद्वितीय अनुभव है। केरल का भोजन स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है, क्योंकि इसमें आयुर्वेदिक तत्वों का उपयोग किया जाता है।

  • केरल का मुख्य आहार चावल और नारियल पर आधारित है। यहाँ चावल को विभिन्न तरीकों से पकाया जाता है और नारियल का प्रयोग भी हर व्यंजन में प्रमुख होता है, चाहे वह घी के साथ हो या नारियल तेल में।
  • केरल की पारंपरिक दावत को ‘सद्या’ कहा जाता है, जो खास अवसरों और त्योहारों पर केला के पत्ते पर परोसी जाती है। सद्या में कई तरह के शाकाहारी व्यंजन और मिठाइयाँ शामिल होती हैं।
  • केरल के भोजन में मांसाहारी और शाकाहारी दोनों प्रकार के व्यंजन मिलते हैं। मछली, चिकन और मसालों का उसमें विशेष महत्व है। समुद्री भोजन के लिए केरल especially प्रसिद्ध है, जैसे करीमीन पोल्लिचाथु (मसालेदार मछली व्यंजन)।
  • केरल के कई व्यंजन भाप में पकाए जाते हैं जैसे पुट्टू (चावल और नारियल से बना स्टफ्ड रोल) और इडियप्पम (स्ट्रिंग हॉपर)। ये हल्के और स्वादिष्ट होते हैं।
  • यहाँ के मसाले जैसे करी पत्ते, इलायची, दालचीनी, धनिया, और हल्दी भोजन को तीखा और सुगंधित बनाते हैं।
  • केरल के मिठाईयों में इक्पुम (इडली की तरह), परप्पु वरट्टु, और पायसम (मीठी खीर) प्रमुख हैं।
  • केरल का भोजन केवल स्वादिष्ट ही नहीं बल्कि स्वास्थ्यवर्धक भी माना जाता है क्योंकि इसमें नारियल तेल, मसालों और प्राकृतिक सामग्रियों का भरपूर उपयोग होता है।
  • केरलीय भोजन संस्कृति में भोजन करते समय केले के पत्ते का उपयोग करना एक प्राचीन और लोकप्रिय परंपरा है, जो आज भी त्योहारों और खास मौकों पर निभाई जाती है।
  • केरल की पाक कला में क्षेत्रीय और धार्मिक भिन्नताएं भी देखने को मिलती हैं, जहां अलग-अलग समुदाय अपनी विशिष्ट विधियों से भोजन बनाते और खाते हैं।

सबसे अच्छा तरीका है:

  • स्थानीय रेस्तरां: कोचीन, थिरुवनंतपुरम, अलेप्पी और मुन्नार जैसे प्रमुख शहरों में खाने के स्थानों की कोई कमी नहीं है

होमस्टे: होमस्टे में रुककर आप स्थानीय कुकिंग शैलियों का अनुभव ले सकते हैं।

10. केरल की गतिविधियाँ (Kerala Activities)

  • मुडियेट्टू: यह केरल का एक पारंपरिक नृत्य नाटक है जो देवी काली और राक्षस दरिका के बीच लड़ाई की पौराणिक कहानी पर आधारित है। इसे धार्मिक अनुष्ठान के रूप में निभाया जाता है और यह यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में शामिल है। पूरा गांव इस सामुदायिक अनुष्ठान में हिस्सा लेता है, जहां कलाकार उपवास और प्रार्थना द्वारा खुद को शुद्ध करते हैं और रंग-बिरंगे चित्रों के साथ देवी की पूजा करते हैं।
  • लोक क्रीड़ाएँ: केरल में बहुत सी पारंपरिक खेल और क्रीड़ाएँ प्रचलित हैं, जिनमें नृत्य, गान, पुराकथा संदर्भ, और सामूहिक सहभागिता होती है। इनमें कबड्डी, तुळ्ळल, कथकळि, पूरक्कळि, और अरवनक्कळि जैसी कई खेल-कला रूप शामिल हैं। ये लोक क्रीड़ाएँ सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
  • त्योहार और उत्सव: केरल में ओणम, नवरात्रि, महाशिवरात्रि, तथा मकरविलक्कु जैसे भव्य त्यौहार मनाए जाते हैं, जिनमें सांस्कृतिक और धार्मिक रस्में होती हैं। ओणम विशेषतः फसल कटाई के मौसम में मनाया जाता है और इस दौरान पारंपरिक खेल, खान-पान, और नृत्य का आयोजन होता है।
  • कथकली और कुटियाट्टम: ये केरल के प्रसिद्ध रंगमंचीय नृत्य हैं। कथकली एक भव्य नृत्य-नाटक है जिसमें पात्रों के मुखौटे, विशिष्ट मेकअप और हस्त मुद्राओं के माध्यम से कथाएं प्रस्तुत की जाती हैं। कुटियाट्टम अधिक प्राचीन और परंपरागत संस्कृत रंगमंच है जिसे धार्मिक अनुष्ठानों में करते हैं।
  • हस्तशिल्प और पर्यावरणीय कला: केले के रेशे से बने बैग, चटाई और कागज की लुगदी से बने कथकली के मुखौटे जैसी हस्तशिल्प की कला केरल की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है।
  • आधुनिक और पारंपरिक गतिविधियों का मेल: केरल में प्राचीन कला, नृत्य, उत्सव, और खेल आधुनिक सामाजिक जीवन में भी जीवित हैं, जो पर्यटकों और स्थानीय लोगों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।

keral paryatan sthal में बहुत सी रोमांचक गतिविधियाँ की जा सकती हैं, जैसे:

बैम्बू राफ्टिंग: एर्नाकुलम और वायनाड में यह गतिविधि विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

नदी क्रूज: अलेप्पी और कोच्चि में बैकवॉटर्स में क्रूज की सवारी।

आयुर्वेदिक उपचार: केरल में आयुर्वेद की प्राचीन विधियाँ उपलब्ध हैं जो आपको शारीरिक और मानसिक शांति देती हैं।

केरल यात्रा के लिए सही मौसम (Best Season to Visit Kerala)

केरल में यात्रा का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से अप्रैल के बीच होता है। इस दौरान मौसम ठंडा और सुखद रहता है, जो यात्रा के लिए सही टाइम होता है। मानसून के मौसम में (जून से सितंबर) भी कुछ लोग आयुर्वेद उपचार के लिए केरल जाते हैं, क्योंकि इस समय हवा में नमी अधिक होती है, जो आयुर्वेद उपचार के लिए फायदेमंद होता है।

रुकने के लिए जगह (Places to Stay)(keral paryatan sthal)

केरल में रहने के लिए बहुत सी विविधताएँ हैं, जैसे:

होटल्स और रिसॉर्ट्स: केरल के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे मुन्नार, कोवलम, अलेप्पी और वायनाड में बेहतरीन होटल्स और रिसॉर्ट्स हैं।

हॉमस्टे: स्थानीय संस्कृति और जीवनशैली को अनुभव करने के लिए आप केरल के विभिन्न गाँवों में हॉमस्टे का विकल्प भी चुन सकते हैं।

आयुर्वेदिक रिसॉर्ट्स: आयुर्वेद उपचार के लिए विशेष रिसॉर्ट्स केरल में उपलब्ध हैं, जहाँ आप आराम से रुक सकते हैं और उपचार का आनंद ले सकते हैं।

यात्रा के दौरान ध्यान रखने वाली बातें (Travel Tips)(keral paryatan sthal)

पानी और सुरक्षा: केरल में गर्मी हो सकती है, इसलिए ढेर सारा पानी पीते रहें और सूर्य की गर्मी से बचने के लिए सनस्क्रीन का उपयोग करें।

स्थानीय भाषा: केरल की मुख्य भाषा मलयालम है, लेकिन हिंदी और अंग्रेज़ी भी यहाँ समझी जाती है।

सड़क सुरक्षा: ट्रैवल करते समय हमेशा अपनी सुरक्षा का ध्यान रखें और सड़कों पर सतर्क रहें, खासकर भीड़-भाड़ वाले इलाकों में।

स्थानीय परिवहन: केरल में बस, टैक्सी, और ऑटो की सेवा उपलब्ध है। लोकल परिवहन का उपयोग करना सस्ता और सुविधाजनक है।

केरल में 5-7 दिन घूमने का औसत खर्च (प्रति व्यक्ति):

खर्च का प्रकारऔसत खर्च (INR में)विवरण
यात्रा (ट्रेन/फ्लाइट)₹2,000 – ₹8,000शहर पर निर्भर (दिल्ली/मुंबई से फ्लाइट महंगी हो सकती है)
होटल/होमस्टे₹1,000 – ₹3,000 प्रति रातबजट होटल से लेकर 3-स्टार तक
खाना₹300 – ₹700 प्रति दिनस्थानीय भोजन सस्ता और स्वादिष्ट होता है
स्थानीय यात्रा (टैक्सी/ऑटो/बस)₹1,000 – ₹3,000 कुलघूमने के स्थानों के अनुसार
पर्यटन स्थल टिकट/बोटिंग आदि₹500 – ₹2,000 कुलमुन्नार, अल्लेप्पी बोट हाउस, थेक्कडी आदि में
हाउस बोट (Alleppey/Kumarakom)₹5,000 – ₹8,000 प्रति रात (दो व्यक्ति)यह वैकल्पिक है, लेकिन केरल की खासियत है

5-7 दिन के लिए कुल अनुमानित खर्च:

  • बजट यात्रा (बैकपैकर स्टाइल): ₹10,000 – ₹15,000
  • मध्यम बजट (कम्फर्ट + बोट हाउस): ₹18,000 – ₹25,000
  • लक्ज़री टूर: ₹30,000 से ऊपर

निष्कर्ष

keral paryatan sthal एक ऐसा स्थल है जहाँ आप प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक धरोहर, स्वादिष्ट भोजन और रोमांचक गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं। यह राज्य विभिन्न प्रकार के पर्यटकों के लिए उपयुक्त है, चाहे आप एक एडवेंचर प्रेमी हों या बस शांति और आराम की तलाश में। केरल की यात्रा आपके जीवन के सबसे अविस्मरणीय अनुभवों में से एक हो सकती है।

FAQ


वर्कला के समुद्र तट की खासियत क्या है जो इसे अनूठा बनाती है?

वर्कला समुद्र तट को अनूठा और खास बनाने वाली सबसे बड़ी वजह इसकी भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताएं हैं:
ऊँची चट्टानों का समुद्र से मिलना:
वर्कला दक्षिणी केरल का एकमात्र ऐसा समुद्र तट है जहाँ ऊँची तृतीयक तलछटी चट्टानें सीधे अरब सागर से मिलती हैं। इन चट्टानों को “वर्कला संरचना” कहा जाता है और यह एक भूवैज्ञानिक स्मारक भी है|
आध्यात्मिक महत्व:
वर्कला बीच को “पापनाशम” भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है “पापों का नाश करने वाला”। मान्यता है कि यहाँ स्नान करने से पाप धुल जाते हैं, इसलिए यह धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है|
प्राकृतिक सुंदरता और शांति:
यहाँ की लाल चट्टानों की तलहटी में फैला समुद्र तट, नारियल के पेड़, प्राकृतिक जलधाराएँ, और सूर्यास्त का दृश्य इसे बेहद शांत और खूबसूरत बनाते हैं|
आयुर्वेदिक स्पा और प्राकृतिक झरने:
वर्कला के पास आयुर्वेदिक स्पा और चट्टानों से निकलने वाले प्राकृतिक जलस्रोत भी हैं, जो स्वास्थ्य और ताजगी के लिए प्रसिद्ध हैं|

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