khajuraho paryatan sthal: जानें 15 शानदार जगहों की खूबियाँ

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khajuraho paryatan sthal: खजुराहो भारत के मध्य प्रदेश राज्य के छतरपुर जिले में स्थित एक ऐतिहासिक नगर है, जो अपनी प्राचीन और सुंदर मंदिरों के समूह के लिए विश्व में प्रसिद्ध है। यह स्थल खासकर कामुक मूर्तिकला और नग्न कलाकृतियों के कारण जाना जाता है, जो मंदिरों की दीवारों पर बेहद कलात्मक ढंग से बनाई गई हैं।

खजुराहो के मंदिरों का निर्माण 950 ई. से 1050 ई. के बीच चंदेल वंश के राजाओं द्वारा कराया गया था। यहाँ के मंदिर नागर शैली की वास्तुकला में बने हैं, जो भारतीय मंदिर निर्माण की एक प्रमुख शैली है। पत्थर की नक्काशी और गहराई से उकेरी गई मूर्तियाँ इनकी खासियत हैं।

कभी खजुराहो में लगभग 85 मंदिर थे, लेकिन आज केवल 20 से 25 मंदिर ही सुरक्षित हैं। ये मंदिर हिंदू और जैन धर्म दोनों से संबंधित हैं। खजुराहो के मंदिरों को 1986 में UNESCO World Heritage Site का दर्जा मिला। खजुराहो न केवल भारत, बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करता है। हर साल यहाँ खजुराहो डांस फेस्टिवल का आयोजन होता है, जिसमें देशभर के कलाकार हिस्सा लेते हैं।

खजुराहो (मध्य प्रदेश) पहुँचने का यातायात (ट्रांसपोर्ट) और रेस्तरां (खाना) का अनुमानित बजट एक दिन के लिए

कहाँ से (शहर)यात्रा का माध्यमआवागमन खर्च (एक तरफ़)खाने का खर्च (प्रति दिन)कुल अनुमानित बजट (1 दिन)
दिल्लीट्रेन (स्लीपर/3AC) / बस₹500 – ₹1200₹400 – ₹600₹900 – ₹1800
लखनऊट्रेन / बस₹400 – ₹800₹400 – ₹600₹800 – ₹1400
ग्वालियरट्रेन / बस₹200 – ₹400₹400 – ₹600₹600 – ₹1000
भोपालट्रेन / बस₹300 – ₹600₹400 – ₹600₹700 – ₹1200
वाराणसीट्रेन / बस₹400 – ₹700₹400 – ₹600₹800 – ₹1300
मुंबईट्रेन (3AC) / फ्लाइट₹1300 – ₹4000₹400 – ₹600₹1700 – ₹4600
कोलकाताट्रेन (3AC) / फ्लाइट₹1000 – ₹3500₹400 – ₹600₹1400 – ₹4100

1. खजुराहो का इतिहास: (khajuraho paryatan sthal)

खजुराहो‘ नाम ‘खजूर‘ (खजूर के पेड़) से बना है। माना जाता है कि पहले इस स्थान के चारों ओर खजूर के पेड़ बहुत अधिक थे, इसलिए इसे खजुरवाहिका कहा गया, जो धीरे-धीरे ‘खजुराहो’ बन गया।

खजुराहो का स्वर्णिम इतिहास चंदेल वंश से जुड़ा है। इस वंश ने 9वीं से 13वीं शताब्दी के बीच यहाँ भव्य मंदिरों का निर्माण कराया। चंदेल राजाओं ने धर्म, कला और वास्तुकला को बहुत बढ़ावा दिया। 13वीं शताब्दी के बाद मुगल आक्रमणों के चलते खजुराहो उपेक्षित हो गया। जंगलों में छिपे ये मंदिर सदियों तक गुमनाम रहे।

1838 ई. में ब्रिटिश सर्वेक्षक टी.एस. बर्ट (T.S. Burt) ने इन मंदिरों को फिर से खोजा। इसके बाद दुनिया की नज़र इस अद्भुत धरोहर पर पड़ी। खजुराहो का इतिहास लगभग एक हजार साल पुराना है। अपने क्षेत्र में खजुराहो की सबसे पुरानी ज्ञात शक्ति वत्स थी। क्षेत्र में उनके उत्तराधिकारियों में मौर्य, सुंग, कुषाण, पद्मावती के नागा, वाकाटक वंश, गुप्त, पुष्यभूति राजवंश और गुर्जर-प्रतिहार राजवंश शामिल थे।

2. खजुराहो पर्यटन स्थल (khajuraho paryatan sthal): जानें 15 शानदार जगहों की खूबियाँ

खजुराहो में घूमने वाले 15 ऐसी जगहों के बारे में बताने जा रही हूँ जो बहुत ही आकर्षक है | इस लेख में यहाँ के मंदिर , यहाँ के भोजन, रेस्टोरेंट , नजदीकी रेलवे स्टेशन आदि के बारे में सारणी के द्वारा दर्शया गया है | यहाँ के 15 पर्यटक स्थल ये हैं : कंदरिया महादेव मंदिर, लक्ष्मण मंदिर, विश्वनाथ मंदिर, देवी जगदम्बिका मंदिर, छत्रभुज मंदिर, दुलदेव मंदिर, पार्श्वनाथ जैन मंदिर, आदिनाथ मंदिर, शांति नाथ मंदिर, खजुराहो संग्रहालय (Archaeological Museum), रानेह फॉल्स (Raneh Falls), पन्ना टाइगर रिजर्व, बामन मंदिर समूह, जवाहर कला केंद्र (Khajuraho Art Center), और खजुराहो डांस फेस्टिवल |

2.1. कंदरिया महादेव मंदिर

कंदरिया महादेव मंदिर खजुराहो का सबसे प्रसिद्ध और भव्य मंदिर है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और यह चंदेल वंश की स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण माना जाता है। यह मंदिर अपनी ऊँचाई, मूर्तिकला और वास्तुकला के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

यह मंदिर चंदेल वंश के राजा विद्याधर द्वारा 11वीं शताब्दी (1025-1050 ई.) में बनवाया गया था। मंदिर की ऊँचाई लगभग 31 मीटर है और इसकी दीवारों पर लगभग 800 से अधिक सुंदर मूर्तियाँ बनाई गई हैं।

यह विशाल मंदिर खजुराहो की वास्तुकला का एक आदर्श नमूना है। यह अपने बाह्य आकार में 84 समरस आकृति के छोटे- छोटे अंग तथा श्रंग शिखरों में जोड़कर बनाया गया है। इसकी धराशिला ग्रेनाईट पत्थर की बनी हुई है तथा इस पर रेतीले पत्थर की खार-शिलाएँ निर्मित हैं। मंदिर की दीवारे फूलो की पत्तियों से सजी हुई हैं | मंदिर ऊँचे अधिस्थान पर स्थापित है, जिसपर अनेक सुसज्जित मूर्तियाँ हैं।

  • यह मंदिर चंदेल राजवंश के सम्राट विद्याधर या उनके पूर्वज राजा यशोवर्मन द्वारा लगभग 1025 से 1050 ईस्वी के बीच बनवाया गया था। माना जाता है कि सम्राट विद्याधर ने इस मंदिर का निर्माण महमूद गजनवी को परास्त करने की विजय के उपलक्ष्य में करवाया था।
  • मंदिर का नाम “कंदरिया महादेव” भगवान शिव के एक रूप महादेव से जुड़ा है, और “कंदरिया” का अर्थ “गुफा” या “गुफा जैसा घर” होता है क्योंकि मंदिर का मुख्य द्वार एक गुफा जैसी संरचना को दर्शाता है।
  • कंदरिया महादेव मंदिर की ऊंचाई 116 फुट, लंबाई लगभग 109 फुट और चौड़ाई 60 फुट है। इसमें नागर और द्रविड़ वास्तुकला का मिश्रण देखने को मिलता है।
  • यह मंदिर लगभग 6,500 वर्ग फुट के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी छत पर 84 छोटे शिखरों के साथ एक मुख्य टॉवर है, जो शिव के कैलाश पर्वत का प्रतिनिधित्व करता है।
  • मंदिर की दीवारों और स्तंभों पर 872 से अधिक मूर्तियाँ खुदी हुई हैं जिनमें अनेक देवी-देवताओं, नृत्य दृश्य, और अन्य शिल्प कलाएं शामिल हैं, जो इसकी कला और सजावट की उत्कृष्टता दिखाती हैं।
  • गर्भगृह में भगवान शिव का लिंग स्थापित है और मंदिर के चारों ओर प्रदक्षिणा पथ भी है।
  • यह मंदिर अपनी पानीपत और प्राकृतिक आपदाओं के बाद भी अच्छी तरह संरक्षित है, और इसकी बनावट इतनी सुंदर है कि बलुआ पत्थर की बजाय लगने लगता है कि यह चंदन की लकड़ी पर तराशी गई हो।
  • कंदरिया महादेव मंदिर, खजुराहो के कुल 85 मंदिरों के समूह का हिस्सा है जिसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी है।

मंदिर की वास्तुकला नागर शैली में है, जो मध्यकालीन भारतीय मंदिर निर्माण का श्रेष्ठ उदाहरण है। इसकी दीवारों पर देवी-देवताओं, अप्सराओं, प्रेम दृश्य, संगीत और नृत्य से जुड़े अनेक जीवन दृश्य अंकित हैं। इसकी पूरी जानकारी सरणी में दी जा रही :

विषयविवरण
मंदिर का नामकंदरिया महादेव मंदिर
स्थानखजुराहो, छतरपुर, मध्य प्रदेश
निर्माण काल1025–1050 ई. (चंदेल वंश)
समर्पित देवताभगवान शिव
वास्तुकला शैलीनागर शैली
प्रमुख आकर्षण800+ मूर्तियाँ, ऊँचाई 31 मीटर
नजदीकी रेलवे स्टेशनखजुराहो रेलवे स्टेशन (5 किमी)
नजदीकी हवाई अड्डाखजुराहो एयरपोर्ट (4-5 किमी)
स्थानीय भोजनदाल बाटी, पोहा, जलेबी, स्ट्रीट फूड
प्रसिद्ध रेस्टोरेंटRaja Café, Maharaja Café
समयसुबह 6:00 से शाम 6:00 बजे
प्रवेश शुल्क (भारतीय)₹40/-
प्रवेश शुल्क (विदेशी)₹600/-
बच्चे (15 वर्ष तक)निःशुल्क

2.2 लक्ष्मण मंदिर(Lakshmana Temple)(khajuraho paryatan sthal)

लक्ष्मण मंदिर खजुराहो के पश्चिमी मंदिर समूह का एक प्रमुख मंदिर है और भगवान विष्णु को समर्पित है। यह खजुराहो का सबसे प्राचीन और वास्तुकला की दृष्टि से महत्वपूर्ण मंदिर माना जाता है।

इस मंदिर का निर्माण चंदेल वंश के राजा यशोवर्मन ने लगभग 930-950 ई. में करवाया था। यह मंदिर खासतौर पर अपनी नक्काशी, मूर्तियों की गहराई, और नागर शैली की वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।

माना जाता है यह मंदिर भगवान् विष्णु के बैकुंठ रूप को समर्पित है | लेकिन इसका नामांकरण मंदिर को बनाने वाले यशोवर्मा के उपनाम लक्षवर्मा के आधार पर हुआ है। शिल्प और वास्तु की दृष्टि से लक्ष्मण मंदिर खजुराहो के परिष्कृत मंदिरों में से एक है। इसके अर्द्धमंडप, मंडप और महामंडप की छतें स्तुपाकार हैं, जिसमें शिखरों का अभाव है। इस मंदिर के छत एक अलग विशेषता को प्रस्तुत करते हैं |

खजुराहो के मंदिर निर्माण के संबंध में कहा जाता है कि एक बार राजपुरोहित हेमराज की पुत्री हेमवती संध्या की बेला में सरोवर में स्नान करने पहुंची। उस दौरान आकाश में विचरते चंद्रदेव ने जब स्नान करती हेमवती को देखा तो वे उस पर आसक्त हो गए और उसी पल वे रूपसी हेमवती के समक्ष प्रकट हुए और उससे प्रणय निवेदन किया। इसके बाद दोनों के मधुर संयोग से जो पुत्र उत्पन्न हुआ उसने ही बड़े होकर चंदेल वंश की स्थापना की। समाज के भय से हेमवती ने उस बालक को वन में करणावती नदी के तट पर पाला और उसका नाम चंद्रवर्मन रखा।

बड़ा होकर चंद्रवर्मन एक प्रभावशाली राजा बना। एक बार जब चंद्रवर्मन सो रहा था तो उसकी माता हेमवती उसके सपने में आईं और ऐसे मंदिरों के निर्माण के लिए प्रेरित किया, जो समाज को ऐसा संदेश दें कि जीवन के अन्य पहलुओं के समान कामेच्छा भी एक अनिवार्य अंग है और इस इच्छा को पूर्ण करने वाला इंसान कभी पापबोध से ग्रस्त न हो।

  • लक्ष्मण मंदिर का निर्माण लगभग 930-950 ईस्वी के बीच हुआ था। यह चंदेल वंश के सातवें पीढ़ी के राजा यशोवर्मन (जिनका उपनाम लक्षवर्मा भी था) ने बनवाया था। मंदिर का नाम उन्हीं के उपनाम ‘लक्षवर्मा’ पर पड़ा है, इसलिए इसे लक्ष्मण मंदिर कहा जाता है, यह राम के छोटे भाई लक्ष्मण का मंदिर नहीं है।
  • यह मंदिर पंचायतन शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है और खजुराहो के मंदिरों में सबसे प्राचीन और पूर्ण विकसित शैली का है। मंदिर बलुआ पत्थर से निर्मित है, जिसकी लंबाई लगभग 98 फीट और चौड़ाई लगभग 45 फीट है।
  • लक्ष्मण मंदिर खजुराहो के परिष्कृत मंदिरों में से एक है। इसके संरचना में अर्द्धमंडप, मंडप, महामंडप शामिल हैं, जिनकी छतें स्तुपाकार हैं और इनमें शिखरों का अभाव है। मंदिर की बाहरी दीवारों और स्तंभों पर देवी-देवताओं, युग्मों, मिथुन और युद्ध, शिकार, हाथी, घोड़े, सैनिक, अप्सराएं आदि की नक्काशी अत्यंत मनोहारी और जीवंत है।
  • मंदिर के अधिष्ठान की जगती के चारों कोनों पर चार खूंटरा मंदिर बने हैं। इसके सामने विष्णु के वाहन गरुड़ के लिए एक मंदिर था, जिसकी प्रतिमा अब लुप्त हो चुकी है।
  • कुछ मान्यताओं के अनुसार, मंदिर के निर्माण के लिए मथुरा से 16,000 शिल्पकार बुलाए गए थे, और यह निर्माण लगभग 7 से 20 वर्षों में पूरा हुआ।
  • यह मंदिर खजुराहो के पश्चिमी समूह का सबसे बड़ा और प्रमुख मंदिर है और हिंदू आर्य स्थापत्य कला की विरासत का एक अद्भुत उदाहरण माना जाता है।
  •  इस मंदिर की नक्काशी इतनी सूक्ष्म और प्रगाढ़ है कि इसे मध्यकालीन भारतीय स्थापत्य और शिल्पकला का सर्वश्रेष्ठ नमूना माना जाता है।
  •  इसके मंडप और महामंडप की छतों के पीढ़े खपरों की छाजन के समान है,
  •  महामंडप की छत के पीढ़ो के सिरों का अलंकरण अंजलिबद्ध नागों की लघु आकृतियों से किया गया है।
  •  मंडप की छत पर लटकी हुई पत्रावली के साथ कलश का किरिट है।
  • इस मंदिर के प्रवेश द्वार के सिरदल एक दूसरे के ऊपर दो स्थूल सज्जापट्टियाँ हैं।
  • निचली सज्जापट्टी के केन्द्र में लक्ष्मी की प्रतिमा है।

मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की चार-मुखी मूर्ति स्थापित है। बाहरी दीवारों पर रामायण, महाभारत, समाजिक और कामकला से जुड़ी मूर्तियाँ हैं। यह मंदिर पूरी तरह सैंडस्टोन (बलुआ पत्थर) से बना है।

विषयविवरण
मंदिर का नामलक्ष्मण मंदिर
स्थानखजुराहो, जिला छतरपुर, मध्य प्रदेश
निर्माण काल930–950 ई.
निर्माताराजा यशोवर्मन (चंदेल वंश)
समर्पित देवताभगवान विष्णु
वास्तुकला शैलीनागर शैली
प्रमुख आकर्षणविष्णु की मूर्ति, नक्काशी, धार्मिक कथाएँ
नजदीकी रेलवे स्टेशनखजुराहो रेलवे स्टेशन (5 किमी)
नजदीकी हवाई अड्डाखजुराहो एयरपोर्ट (4-5 किमी)
स्थानीय भोजनदाल बाटी, पोहा-जलेबी, स्ट्रीट फूड
प्रसिद्ध रेस्टोरेंटRaja Café, Agrasen Restaurant
समयसुबह 6:00 से शाम 6:00
प्रवेश शुल्क (भारतीय)₹40/-
प्रवेश शुल्क (विदेशी)₹600/-
बच्चे (15 वर्ष तक)निःशुल्क

2.3. विश्वनाथ मंदिर(Vishwanath Temple)(khajuraho paryatan sthal)

Vishwanath Temple

विश्वनाथ मंदिर खजुराहो के पश्चिमी मंदिर समूह का एक प्रमुख मंदिर है। यह भगवान शिव को समर्पित है और इसे चंदेल शासक धंगदेव द्वारा 1002 ईस्वी में बनवाया गया था। यह मंदिर अपनी अद्भुत नागर शैली की वास्तुकला, बारीक नक्काशी और नंदी मंडप (जहाँ नंदी बैल की मूर्ति है) के लिए प्रसिद्ध है।

मंदिर की बाहरी दीवारों पर अप्सराओं और नर्तकी महिलाओं की सुंदर मूर्तियां, मिथुन मुद्रा वाली प्रतिमाएं, साथ ही योगासन और कुशलता से बनाए गए प्रेमी जोड़े उत्कीर्ण हैं। इसके अलावा, मंदिर के भीतर भगवान ब्रह्मा (तीन मुख वाले) और माता पार्वती की भी प्रतिमाएं मौजूद हैं |

विशेष रूप से, मंदिर की वास्तुकला में नवाचार के तौर पर मंदिर के निचले भाग की चारों ओर अलंकृत पट्टे हैं जो अप्सराओं की मूर्तियों से सजाए गए हैं, यही कारण है कि यह मंदिर अपनी अभूतपूर्व शिल्प कला के लिए प्रसिद्ध है |

इस मंदिर का नाम शिव के एक और नाम विश्वनाथ पर किया गया है। मंदिर की लंबाई 89′ और चौड़ाई 45′ है। मंडप की दीवार पर लगा अभिलेख चंदेल वंश के महान शासक धंग का है। इसमें संस्कृत में तैतीस पंक्तिया है | प्रमुख रथिकाओं पर चंद्रावलोकन है। इनमें सातदेव मातृ प्रतिमाएँ सुंदरता के साथ दिखाई गयी है | आसन्न पट्टिका फूलो से सजी हुई है | जंघा भाग पर तीन पालियों में प्रतिमाएँ बनाई गई है। भूमि और श्रृंगों पर आम्लक, चंद्रिका तथा कलश बनाया गया है। अंतराल की छत छः मंजिला बनी हुई है। महामण्डप पिरामिड प्रकृति की है, जो पंद्रह पीढ़ों से बनी है। इसके अतिरिक्त यहाँ उप- पिरामिड भी हैं। 

  • मंदिर का अभिलेख संस्कृत में है, जिसमें चंदेल राजाओं की वंशावली और मंदिर निर्माण का उल्लेख है |
  • मंदिर के प्रवेश मार्ग पर मिथुन की जागृत (सक्रिय) अवस्था की मूर्तियां हैं जो बहुत जीवंत लगती हैं |
  • गर्भगृह में दो शिवलिंग माने जाते हैं, जिनमें से एक पन्ना-शिला का है, हालांकि मूल शिवलिंग अभी उपलब्ध नहीं है |
  • नंदी की मूर्ति शिवलिंग के समांतर ही बैठी हुई है, जो यहां की वास्तुकला की खासियत है |

chitrakoot ke paryatan sthal

संपूर्ण जानकारी

विषयविवरण
मंदिर का नामविश्वनाथ मंदिर
स्थानखजुराहो, जिला छतरपुर, मध्य प्रदेश
निर्माण काललगभग 1002 ई.
निर्माताराजा धंगदेव (चंदेल वंश)
समर्पित देवताभगवान शिव
प्रमुख मूर्तियाँशिव, नंदी, देवी-देवता, अप्सराएँ
वास्तुकला शैलीनागर शैली
नजदीकी रेलवे स्टेशनखजुराहो रेलवे स्टेशन (5 किमी)
नजदीकी हवाई अड्डाखजुराहो एयरपोर्ट (4.5 किमी)
स्थानीय व्यंजनपोहा, कचौरी, दाल बाटी, स्ट्रीट फूड
प्रसिद्ध रेस्टोरेंटRaja Café, Blue Sky, Maharaja Café
समयसुबह 6:00 AM – शाम 6:00 PM
प्रवेश शुल्क (भारतीय)₹40/-
प्रवेश शुल्क (विदेशी)₹600/-
बच्चे (15 वर्ष तक)निःशुल्क

2.4. देवी जगदम्बिका मंदिर(Devi Jagadambi Temple)

देवी जगदम्बिका मंदिर, खजुराहो के पश्चिमी मंदिर समूह का एक प्रमुख मंदिर है। यह मंदिर देवी पार्वती (या दुर्गा) को समर्पित है | मंदिर के मध्य में देवी की चांदी की आंखें और हवन कुंड है। जिन्हें यहाँ जगदम्बिका (विश्व की माता) के रूप में पूजा जाता है।

खजुराहो के मंदिरों का निर्माण 10वीं और 12वीं शताब्दी के बीच चंदेल वंश के शासकों ने किया था। खजुराहो के अन्य मंदिरों के साथ, इस मंदिर को अपनी भव्य वास्तुकला, कला और ऐतिहासिक महत्व के कारण विश्व धरोहर स्थल के रूप में जाना जाता है।

देवी जगदम्बिका मंदिर, खजुराहो (मध्य प्रदेश) के प्रमुख और सुंदर मंदिरों में से एक है, जो लगभग 1025 ईस्वी के बाद चंदेला वंश के समय बना माना जाता है। यह मंदिर लगभग 77 फीट लंबा और 49 फीट चौड़ा है। शुरू में यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित था, लेकिन बाद में इसे देवी पार्वती (मां जगदम्बिका) को अर्पित कर दिया गया, जिसकी प्रतिमा गर्भगृह में स्थापित है। कुछ मान्यताओं में इसे मां काली को भी समर्पित माना जाता है, जो काले रंग में दर्शाई गई हैं।

कुछ लोग मानते हैं कि माँ काली (जगदम्बा) वास्तव में पार्वती की एक छवि है, जो काले रंग में रंगी हुई है। यह मंदिर कंदरिया महादेव के ही चबूतरे पर है |

यह मंदिर अपनी अद्भुत नक्काशी, सुंदरता और स्त्री सौंदर्य की बारीक मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है। इसकी दीवारों पर नृत्य करती अप्सराएँ, कामुक मूर्तियाँ और धार्मिक प्रतीक बनाये गए हैं। मंदिर का गर्भगृह देवी जगदम्बा की मूर्ति से सुसज्जित है। यह मंदिर छोटा लेकिन सबसे सुंदर रूप से सजा हुआ माना जाता है। यह UNESCO विश्व धरोहर स्थल का हिस्सा है।

  • मंदिर का निर्माण चंदेला राजवंश द्वारा 1000-1025 ईस्वी के बीच किया गया था।
  • गर्भगृह में देवी की विशाल प्रतिमा स्थापित है, जिसे जगदम्बिका या पार्वती माना जाता है।
  • मंदिर की बाहरी दीवारें मूर्तियों और नक़्क़ाशी से पूरी तरह सजी हुई हैं।
  • यह मंदिर कंदरिया महादेव मंदिर के समान चबूतरे पर बना है, परंतु ऊंचाई में छोटा है।
  • यह मंदिर पूरे सप्ताह सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक दर्शन के लिए खुला रहता है।
विषयविवरण
मंदिर का नामदेवी जगदम्बिका मंदिर
स्थानखजुराहो, जिला छतरपुर, मध्य प्रदेश
निर्माण काललगभग 1000–1025 ई.
निर्माताचंदेल वंश
समर्पित देवीदेवी पार्वती/जगदम्बा
प्रमुख मूर्तियाँअप्सराएँ, देवी मूर्तियाँ, स्त्री सौंदर्य
वास्तुकला शैलीनागर शैली
नजदीकी रेलवे स्टेशनखजुराहो रेलवे स्टेशन (5 किमी)
नजदीकी हवाई अड्डाखजुराहो एयरपोर्ट (4-5 किमी)
स्थानीय व्यंजनपोहा, कचौरी, दाल बाटी, स्ट्रीट फूड
प्रसिद्ध रेस्टोरेंटRaja Café, Blue Sky Restaurant
समयसुबह 6:00 AM – शाम 6:00 PM
प्रवेश शुल्क (भारतीय)₹40/-
प्रवेश शुल्क (विदेशी)₹600/-
बच्चे (15 वर्ष तक)निःशुल्क

2.5 छत्रभुज मंदिर(Chaturbhuj Temple)

छत्रभुज मंदिर खजुराहो के दक्षिणी मंदिर समूह में बसा एक अनोखा मंदिर है। यह मंदिर जटकारा ग्राम से लगभग आधा किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। यह मंदिर भगवान विष्णु के छत्रभुज (चार भुजाओं वाले) रूप को समर्पित है।

इसमें अर्धमंडप, मंडप, संकीर्ण अंतराल के साथ- साथ गर्भगृह है। इस मंदिर को बनाने में जावरी तथा दुलादेव मंदिर के निर्माणकाल के मध्य में किया गया है। बलुवे पत्थर से निर्मित खजुराहो का यह एकमात्र ऐसा मंदिर है, जिसमें मिथुन प्रतिमाओं का सर्वथा अभाव दिखाई देता है। सामान्य रूप से इस मंदिर की शिल्प- कला अवनति का संकेत करती है।

यह मंदिर खास इसलिए भी है क्योंकि यह खजुराहो का एकमात्र मंदिर है जिसमें कोई कामुक मूर्तियाँ नहीं हैं। इसकी शुद्ध धार्मिकता, वास्तुकला और विष्णु प्रतिमा इसे अनोखा बनाती है। भगवान विष्णु की इतनी ऊँची और प्रभावशाली प्रतिमा अन्यत्र दुर्लभ है। यह मंदिर उन पर्यटकों के लिए विशेष है जो धार्मिक शांति और कामुकता से मुक्त कला का अनुभव करना चाहते हैं। मंदिर का वातावरण अत्यंत शांत, आध्यात्मिक और ध्यान हेतु योग्य है।

  • यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और नाम “छत्रभुज” इसलिए पड़ा क्योंकि इसमें भगवान विष्णु की चार भुजाओं वाली विशाल मूर्ति गर्भगृह में स्थापित है। यह मूर्ति लगभग 2.7 मीटर (9 फुट) ऊँची है |
  • मंदिर खजुराहो के दक्षिणी मंदिर समूह का हिस्सा है और यह जटाकरी गांव के लगभग आधा किलोमीटर दक्षिण में स्थित है |
  • छत्रभुज मंदिर का मुख पश्चिम दिशा की ओर मुख किया हुआ है और यह एक ऊंचे चबूतरे पर बना है
  • यह खजुराहो के उन मंदिरों में से एक है जिसमें कहीं भी कामुक (मिथुन) मूर्तियां नहीं हैं, जो इसे बाकी मंदिरों से अलग बनाती हैं |
  • मंदिर की वास्तुकला में अर्धमंडप, मंडप और गर्भगृह शामिल हैं। यहाँ की मूर्तिकला अपेक्षाकृत सरल और शिल्प कला में कुछ हद तक अवनति के संकेत दिखती है, जैसे कि मूर्तियों के आभूषणों और विवरणों का अधूरा अंकन |
  • बलुआ पत्थर से निर्मित यह मंदिर अपनी संरचना और शिल्पकला के हिसाब से 10वीं से 12वीं शताब्दी के मध्य के चंदेल काल का माना जाता है |
  • मंदिर में कई पशु-प्राणियों की आकृतियाँ तथा कुछ विद्याधरों (पुरुष नर्तक) की सुंदर मुद्राएँ भी देखी जा सकती हैं, जबकि अप्सराओं और अन्य मूर्तियों में जीवंतता और भावाभिव्यक्ति की कमी पाई जाती है |
  • इसे जटाकरी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह जटाकरी गांव के पास स्थित है |

और पढ़े : छत्रभुज मंदिर के बारे में पूरी जानकारी

विषयविवरण
मंदिर का नामछत्रभुज मंदिर
स्थानदक्षिणी मंदिर समूह, खजुराहो, मध्य प्रदेश
निर्माण काललगभग 1100 ईस्वी
निर्माताचंदेल वंश
समर्पित देवताभगवान विष्णु (छत्रभुज रूप)
प्रमुख विशेषता9 फीट ऊँची विष्णु मूर्ति, कोई कामुक मूर्ति नहीं
वास्तुकला शैलीनागर शैली
नजदीकी रेलवे स्टेशनखजुराहो रेलवे स्टेशन (6 किमी)
नजदीकी हवाई अड्डाखजुराहो एयरपोर्ट (6-7 किमी)
स्थानीय व्यंजनपोहा, दाल बाटी, समोसा, खजुराहो थाली
प्रसिद्ध रेस्टोरेंटRaja Café, Maharaja Café
समयसुबह 6:00 – शाम 6:00
प्रवेश शुल्क (भारतीय)₹40/- (या मुफ्त)
प्रवेश शुल्क (विदेशी)₹600/- (या मुफ्त)
बच्चे (15 वर्ष तक)निःशुल्क

2.6. दुलदेव मंदिर(Duladeo Temple)

खजुराहो के मंदिर सुन्दर वास्तुकला और कामुक मूर्तियां के लिए जाना जाता है | पूरे साल मध्य प्रदेश के इस प्रसिद्ध स्थल में पर्यटकों, यात्रियों यहां तक कि इनके बारे में और जानने के लिए शोधकर्त्ताओं का भी भीड़ लगी रहती है |

दुलदेव मंदिर खजुराहो के पूर्वी मंदिर समूह में बसा एक अत्यंत सुंदर और ऐतिहासिक मंदिर है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जिन्हें यहां एक शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है और चंदेल काल की उत्कृष्ट वास्तुकला का उदाहरण दर्शाता है |

मंदिर की दीवारों पर शिव-पार्वती, नंदी, और दैनिक जीवन के दृश्य बनाये गए हैं। यहाँ भगवान शिव की मूर्ति को प्रमुख स्थान पर रखा गया है।

1000 और 1150 इसवी के दौरान बना यह मंदिर, खजुराहो के अन्य मंदिरों, जो इससे पहले बनाए गए थे, की तरह अत्यधिक अलंकृत नहीं है, परंतु इसकी भी अपनी विशेषताएं हैं।

दुलादेव मंदिर नोरनधारा मंदिर के रूप में बनाया गया है,  जिसका मतलब है कि यह ऐसा मंदिर है जिसमें कोई चल पथ नहीं है।मंदिर का मुख्य हॉल काफी बड़ा है | यह अष्टकोण की आकृति में बना हुआ है |   

मंदिर की एक खास विशेषता है कि इसमें स्थापित पवित्र शिवलिंग की सतह पर 999 लिंगों को खोद कर बनाया गया है। माना जाता है कि इस शिवलिंग की एक परिक्रमा करना 1000 परिक्रमाओं के बराबर होता है। 

यह मंदिर खजुराहो के अन्य मंदिरों से थोड़ा हटकर है क्योंकि इसका आकार छोटा है, लेकिन इसकी नक्काशी और डिज़ाइन बहुत ही आकर्षक और अनूठा है।

  • दुलदेव मंदिर शिव को समर्पित है और इसे दूल्हादेव (दिव्य दूल्हा) भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है “दिव्य दूल्हा”।
  • यह मंदिर खजुराहो के मुख्य मंदिरों से लगभग डेढ़ मील दूर है और खजुराहो के दक्षिणी मंदिर समूह का हिस्सा है।
  • मंदिर की वास्तुकला जटिल और समन्वित है, जिसमें सुंदर मूर्तियाँ और नक्काशी की गई हैं। इसमें गंगा की चतुर्भुज प्रतिमा अत्यंत सुंदर ढंग से अंकित है, जो आकाश में उड़ने का प्रयास करती लगती है।
  • मंदिर के बाहरी और भीतरी भाग में अनेक जीवंत भावभंगिमाओं वाले नर्तकी, अप्सराएं और मिथुन की मूर्तियां हैं, जो बहुत ही आकर्षक और दर्शनीय हैं।
  • दुलदेव मंदिर का निर्माण चंदेल वंश के अंतिम मंदिरों में से एक माना जाता है, जो लगभग 12वीं शताब्दी के आरंभ में बनाया गया था।
  • मंदिर के पत्थरों पर “वसल” नामक एक कुशल शिल्पकार का नाम अंकित है, जिसने इसकी जटिल और सुंदर छाप छोड़ी है।
  • दूल्हादेव मंदिर की संरचना में मण्डप, महामण्डप और मुखमण्डप हैं, जिसमें गणेश और वीरभद्र की कलात्मक प्रतिमाएं भी मौजूद हैं।
  • मंदिर के शिखर पर सात रथ (सप्तरथ) हैं, जो वास्तुकला की विशिष्टता को दर्शाते हैं।
  • बाहरी दीवारों पर देवी-देवताओं, मिथुन, दिग्पाल तथा जीवों की छवियां और नक्काशी की गई हैं, जो संस्कृतियों, लोक जीवन और पौराणिक कथाओं को दर्शाती हैं।
विषयविवरण
मंदिर का नामदुलदेव मंदिर
स्थानखजुराहो, जिला छतरपुर, मध्य प्रदेश
निर्माण काल10वीं-11वीं शताब्दी
समर्पित देवताभगवान शिव
प्रमुख मूर्तियाँभगवान शिव, नंदी की मूर्तियाँ
वास्तुकला शैलीनागर शैली
नजदीकी रेलवे स्टेशनखजुराहो रेलवे स्टेशन (5 किमी)
नजदीकी हवाई अड्डाखजुराहो एयरपोर्ट (5 किमी)
स्थानीय व्यंजनपोहा, कचौरी, दाल बाटी, स्ट्रीट फूड
प्रसिद्ध रेस्टोरेंटRaja Café, Blue Sky Restaurant
समयसुबह 6:00 AM – शाम 6:00 PM
प्रवेश शुल्क (भारतीय)₹40/-
प्रवेश शुल्क (विदेशी)₹600/-
बच्चे (15 वर्ष तक)निःशुल्क

2.7. पार्श्वनाथ जैन मंदिर(Parshvanath Jain Temple)

यह मंदिर मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में है | इस मंदिर को 950 ई. से 970 ई. के बीच में बनाया गया | इसे यशोवर्मन के पुत्र राजा गंध के शाशन काल में बनवाया गया | जिसमें से मंदिर के प्रमुख भागों में मंडप, अंतराल तथा गर्भगृह बना हुआ है, जिनके पास परिक्रमा मार्ग का निर्माण भी हो रखा है।

पार्श्वनाथ जैन मंदिर खजुराहो के पूर्वी मंदिर समूह में स्थित एक ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है। यह मंदिर भगवान पार्श्वनाथ (जिन्हें जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर के रूप में पूजा जाता है) को समर्पित है। मंदिर में भगवान पार्श्वनाथ की रूप व मुद्रा में स्थापित मूर्ति है, जो बहुत ही सुंदर और शांतिपूर्ण है।

इस मंदिर की वास्तुकला बेहद सुंदर और अद्भुत है, जिसमें जैन धर्म के प्रतीक और धार्मिक चित्रण की नक्काशी की गई है। यह मंदिर खजुराहो के अन्य मंदिरों से वास्तुकला की दृष्टि से थोड़ी अलग है, और इसे जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल माना जाता है।

अन्य विशेषताएं

  • अर्धमंडप के अधिष्ठान की सज्जापट्टी पर हाथियों की प्रक्षेपित पट्टी उत्कृष्ट है।
  •  भूत टोड़ा, कीर्तिमुख, शालमंजिका टोड़ा, नाग प्रतिमाएँ यहाँ वर्तमान है।
  •  कीर्तिमुख तथा विद्याधर एक प्रस्तर की श्रृंखला के तंतु से जुड़े हुए हैं।
  •  शाखाओं की सज्जा मंदार पुष्प, व्याल, मिथुन तथा बेलबूटों से ही गई है।
  • इसका द्वार पंचशाला प्रकृति का है।
  • खार पत्थर की कुर्सी पर पार्श्वनाथ की काली प्रतिमा है।
  • यहाँ ॠषभनाथ के प्रतीक ॠषभ उपस्थित हैं।
विषयविवरण
मंदिर का नामपार्श्वनाथ जैन मंदिर
स्थानखजुराहो, जिला छतरपुर, मध्य प्रदेश
निर्माण काललगभग 950-1050 ईस्वी
समर्पित देवताभगवान पार्श्वनाथ (जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर)
प्रमुख मूर्तियाँभगवान पार्श्वनाथ की पत्थर से बनी मूर्ति
वास्तुकला शैलीनागर शैली
नजदीकी रेलवे स्टेशनखजुराहो रेलवे स्टेशन (6 किमी)
नजदीकी हवाई अड्डाखजुराहो एयरपोर्ट (6 किमी)
स्थानीय व्यंजनपोहा, कचौरी, दाल बाटी, जैन शाकाहारी थाली
प्रसिद्ध रेस्टोरेंटRaja Café, Blue Sky Restaurant
समयसुबह 6:00 AM – शाम 6:00 PM
प्रवेश शुल्क (भारतीय)₹40/-
प्रवेश शुल्क (विदेशी)₹600/-
बच्चे (15 वर्ष तक)निःशुल्क

2.8. आदिनाथ मंदिर(Adinath Temple)

आदिनाथ मंदिर खजुराहो के पूर्वी मंदिर समूह में स्थित एक महत्वपूर्ण जैन मंदिर है। यह मंदिर भगवान आदिनाथ (जिन्हें जैन धर्म के पहले तीर्थंकर के रूप में पूजा जाता है) को समर्पित है। यह मंदिर अपने अद्वितीय वास्तुकला और उत्कृष्ट नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है।

आदिनाथ मंदिर एक ऐसी जगह है जहा आप घूम सकते है और मध्यकालीन भारतीय वास्तुकला को देख सकते है | इसकी प्रदक्षिणा की परिक्रमा कर सकते है | मंदिर लंबे समय से भारतीय-आर्य स्थापत्य शैली का प्रतिबिंब है। इसमें देवी-देवताओं की अद्भुत आकृतियाँ बनी हुई है |

मंदिर में भगवान आदिनाथ की प्रतिमा स्थित है, जिसे बहुत सुंदर और शांतिपूर्ण तरीके से प्रतिष्ठित किया गया है।इस मंदिर की दीवारों पर जैन धर्म की धार्मिक चित्रकला, नक्काशी, और प्रतीक बनाये गए हैं।

  • यह मंदिर जैन तीर्थंकर आदिनाथ को समर्पित है, जो जैन धर्म के पहले आध्यात्मिक शिक्षक माने जाते हैं |
  • मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी के आसपास माना जाता है, जो खजुराहो के अन्य मंदिरों के साथ उस समय के स्थापत्य और नक्काशी कला का उत्कृष्ट उदाहरण है |
  • मंदिर की बाहरी दीवारों पर हिंदू देवी-देवताओं की भी मूर्तियां हैं, जो यहाँ की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक सह-अस्तित्व को दर्शाती हैं |
  • यह मंदिर खजुराहो के पूर्वी मंदिर समूह में स्थित है जहाँ तीन प्रमुख जैन मंदिर हैं: घंटाई मंदिर, आदिनाथ मंदिर, और पार्श्वनाथ मंदिर |
  • आदिनाथ मंदिर में जटिल नक्काशी वाली मूर्तियां और शिल्पकारी देखने को मिलती है, जो जैन धर्म की शिल्प परंपरा को दर्शाती हैं।
  • मंदिर में प्रवेश के लिए कोई शुल्क नहीं है और यह सभी दिन सुबह 5 बजे से दोपहर 12 बजे तक तथा शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है |
विषयविवरण
मंदिर का नामआदिनाथ मंदिर
स्थानखजुराहो, जिला छतरपुर, मध्य प्रदेश
निर्माण काललगभग 10वीं-11वीं शताब्दी
समर्पित देवताभगवान आदिनाथ (जैन धर्म के पहले तीर्थंकर)
प्रमुख मूर्तियाँभगवान आदिनाथ की पत्थर से बनी मूर्ति
वास्तुकला शैलीनागर शैली
नजदीकी रेलवे स्टेशनखजुराहो रेलवे स्टेशन (6 किमी)
नजदीकी हवाई अड्डाखजुराहो एयरपोर्ट (6 किमी)
स्थानीय व्यंजनपोहा, कचौरी, दाल बाटी, जैन शाकाहारी थाली
प्रसिद्ध रेस्टोरेंटRaja Café, Blue Sky Restaurant
समयसुबह 6:00 AM – शाम 6:00 PM
प्रवेश शुल्क (भारतीय)₹40/-
प्रवेश शुल्क (विदेशी)₹600/-
बच्चे (15 वर्ष तक)निःशुल्क

2.9. शांति नाथ मंदिर(Shantinath Temple)(khajuraho paryatan sthal)

शांति नाथ मंदिर खजुराहो के पूर्वी मंदिर समूह में स्थित एक प्रमुख जैन मंदिर है, जो भगवान शांति नाथ (जिन्हें जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर के रूप में पूजा जाता है) को समर्पित है। यह मंदिर अपनी वास्तुकला, नक्काशी और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।

मंदिर में भगवान शांति नाथ की प्रतिमा स्थित है, और इसकी दीवारों पर जैन धर्म के धार्मिक दृश्य बनाये गए हैं।मंदिर का वातावरण शांतिपूर्ण और ध्यान के लिए उपयुक्त है। यह मंदिर जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है।

  • इस मंदिर का निर्माण 10वीं-11वीं शताब्दी में चंदेल वंश के शासनकाल में हुआ था |
  • मंदिर में कुल 18 छोटे-छोटे shrines (मंदिर) हैं, जिनमें कई जैन तीर्थंकरों की मूर्तियाँ स्थापित हैं |
  • मंदिर के गर्भगृह में भगवान शांतिनाथ की 11 फीट 3 इंच ऊँची भव्य प्रतिमा स्थापित है, जो कायोत्सर्ग मुद्रा में है |
  • मंदिर के स्तंभों और आंगन में जटिल नक्काशी और शिल्पकला का सुंदर प्रदर्शन मिलता है |
  • यह मंदिर जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है और यहाँ नियमित रूप से धार्मिक अनुष्ठान तथा तीर्थ यात्राएँ आयोजित होती हैं |
विषयविवरण
मंदिर का नामशांति नाथ मंदिर
स्थानखजुराहो, जिला छतरपुर, मध्य प्रदेश
निर्माण कालइस मंदिर का निर्माण 10वीं-11वीं शताब्दी में चंदेल वंश के शासनकाल में हुआ था135लगभग 10वीं-11वीं शताब्दी
समर्पित देवताभगवान शांति नाथ (जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर)
प्रमुख मूर्तियाँभगवान शांति नाथ की पत्थर से बनी मूर्ति
वास्तुकला शैलीनागर शैली
नजदीकी रेलवे स्टेशनखजुराहो रेलवे स्टेशन (6 किमी)
नजदीकी हवाई अड्डाखजुराहो एयरपोर्ट (6 किमी)
स्थानीय व्यंजनपोहा, कचौरी, दाल बाटी, जैन शाकाहारी थाली
प्रसिद्ध रेस्टोरेंटRaja Café, Blue Sky Restaurant
समयसुबह 6:00 AM – शाम 6:00 PM
प्रवेश शुल्क (भारतीय)₹40/-
प्रवेश शुल्क (विदेशी)₹600/-
बच्चे (15 वर्ष तक)निःशुल्क

 2.10. खजुराहो संग्रहालय (Archaeological Museum)

खजुराहो संग्रहालय (Archaeological Museum) खजुराहो के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह संग्रहालय खजुराहो के प्रसिद्ध मंदिरों और उनके इतिहास को प्रदर्शित करता है। संग्रहालय में विभिन्न पत्थर की मूर्तियाँ, नक्काशी, और प्राचीन चित्रकला के अद्भुत उदाहरण रखे गए हैं, जो खजुराहो के इतिहास और कला को समझने में मदद करते हैं।

यह संग्रहालय मध्यकालीन भारतीय कला और जैन धर्म के सांस्कृतिक महत्व को दर्शाता है और पर्यटकों के लिए एक आकर्षण का केंद्र है।

खजुराहो में मुख्य रूप से दो प्रमुख संग्रहालय हैं—पुरातत्वीय संग्रहालय (Archaeological Museum) और आदिवर्त जनजातीय लोक कला संग्रहालय (Adivart Tribal Folk Art Museum)। ये दोनों संग्रहालय खजुराहो की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत को संरक्षित और प्रदर्शित करते हैं।

1. पुरातत्वीय संग्रहालय, खजुराहो

  • यह संग्रहालय 1957 में स्थापित किया गया था। इसका उद्देश्य खजुराहो के क्षतिग्रस्त मंदिरों की मूर्तियों, स्थापत्य अवशेषों और अन्य पुरातात्विक वस्तुओं को संरक्षित करना है |
  • संग्रहालय में ब्राह्मण, जैन और बौद्ध धर्म से संबंधित महत्वपूर्ण मूर्तियाँ और कलाकृतियाँ हैं, जिन्हें पाँच दीर्घाओं में प्रदर्शित किया गया है |

2. आदिवर्त जनजातीय लोक कला संग्रहालय

  • यह संग्रहालय 2023 में 4 एकड़ क्षेत्रफल में स्थापित किया गया है और मध्य प्रदेश की 7 प्रमुख जनजातियों—गोंड, बैगा, कोरकू, भील, भारिया, सहरिया और कोल—की परंपराओं, कला, वेशभूषा और रहन-सहन को दर्शाता है |
  • यह संग्रहालय पर्यटकों को मध्य प्रदेश की अद्भुत जनजातीय संस्कृति से परिचित कराता है और स्थानीय व विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है।
विषयविवरण
संग्रहालय का नामखजुराहो संग्रहालय (Archaeological Museum)
स्थानखजुराहो, जिला छतरपुर, मध्य प्रदेश
निर्माण काल1967 में स्थापित
संग्रहालय की मुख्य वस्तुएँप्राचीन मूर्तियाँ, नक्काशी, शिलालेख, ऐतिहासिक चित्रकला
वास्तुकला शैलीपारंपरिक भारतीय वास्तुकला
नजदीकी रेलवे स्टेशनखजुराहो रेलवे स्टेशन (5 किमी)
नजदीकी हवाई अड्डाखजुराहो एयरपोर्ट (5 किमी)
स्थानीय व्यंजनपोहा, कचौरी, दाल बाटी, जैन शाकाहारी थाली
प्रसिद्ध रेस्टोरेंटRaja Café, Blue Sky Restaurant
समयसुबह 9:00 AM – शाम 5:00 PM
प्रवेश शुल्क (भारतीय)₹10/-
प्रवेश शुल्क (विदेशी)₹250/-
बच्चे (15 वर्ष तक)निःशुल्क

2.11. रानेह फॉल्स (Raneh Falls) (khajuraho paryatan sthal)

रानेह फॉल्स खजुराहो से लगभग 20 किमी की दूरी पर स्थित एक प्राकृतिक जलप्रपात है, जो कन्हा नदी पर स्थित है। यह जलप्रपात खजुराहो के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है और विशेष रूप से अपनी प्राकृतिक सुंदरता, गहरे पानी की धार, और पठारी इलाकों के लिए प्रसिद्ध है।

आप यहाँ की सुंदरता का लुफ्त उठा सकते हैं और यहाँ चाय की चुस्किया ले सकते हैं | यह जगह बहुत ही खूबसूरत है यहाँ फोटो क्लिक कर सकते हो और अपने दोस्तों को भी अपने फोटो और यहाँ की जगह की फोटो दिखा सकते हो |

हालांकि, इस स्थान की भव्यता झरने तक ही सीमित नहीं है; इसमें रॉक फॉर्मेशन भी शामिल हैं। ग्रेनाइट का परिदृश्य क्रिस्टल टावरों के उत्तराधिकार से बना हुआ दिखाई देता है जैसे कि चट्टानों को ऊपर से सावधानी से डिज़ाइन किया गया हो।

khajuraho paryatan sthal: रानेह फॉल्स अपने गहरे घाटियों, पानी के गिरने के दृश्य, और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है। यह स्थान वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी और प्राकृतिक पर्यटन के लिए आदर्श है।

  • रानेह फॉल्स केन नदी पर बना है, जहाँ नदी एक संकरी घाटी से होकर बहती है जो लगभग 5 किलोमीटर लंबी और करीब 30 मीटर गहरी है। इस घाटी की चट्टानें शुद्ध क्रिस्टलीय ग्रेनाइट की हैं, जो गुलाबी, लाल, भूरे और कई रंगों में रंगी हुई हैं। यही कारण है कि यह जगह ‘इंडिया का मिनी ग्रैंड कैन्यन’ के रूप में भी जानी जाती है।
  • जलप्रपात की खासियत यहां झरनों की एक श्रृंखला है, जो साल भर चलते रहते हैं जबकि मानसून के मौसम में कई और मौसमी झरने भी दिखाई देते हैं। बरसात के बाद यह स्थल और भी सुंदर हो जाता है।
  • रानेह फॉल्स की घाटी ज्वालामुखी विस्फोट से बनी आग्नेय चट्टानों की खास जगह है। ये ज्वालामुखी लावा जब ठंडा हुआ तो विभिन्न रंगों की चट्टानें बनीं जो प्रकृति की अनोखी रचना हैं।
  • यह स्थान पर्यटकों के लिए कई व्यू पॉइंट्स, संग्रहालय और सुरक्षा के लिए फेंसिंग जैसी सुविधाओं से लैस है। गाइड के साथ दर्शन अनिवार्य है।
  • रानेह फॉल्स के पास ही पांडव जलप्रपात और केन घड़ियाल अभयारण्य स्थित है, जो क्षेत्र की जैव विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ाते हैं।
  • यहां वाहन और पैदल आने के लिए टिकट शुल्क लिया जाता है और पास के इको-टूरिज्म कॉटेज में ठहरने की सुविधा भी मौजूद है।
  • रानेह फॉल्स पर्यटकों के बीच अपनी प्राकृतिक सुंदरता, रंगीन चट्टानों और जलप्रपातों के कारण काफी प्रसिद्ध है और इसे मई 2017 में भारत के पसंदीदा वाटरफॉल के रूप में “श्रेष्ठ हॉलिडे अवॉर्ड” से भी नवाजा गया है।
विषयविवरण
जलप्रपात का नामरानेह फॉल्स
स्थानखजुराहो, जिला छतरपुर, मध्य प्रदेश
जलप्रपात की ऊँचाई45 फीट
नजदीकी रेलवे स्टेशनखजुराहो रेलवे स्टेशन (20 किमी)
नजदीकी हवाई अड्डाखजुराहो एयरपोर्ट (20 किमी)
स्थानीय व्यंजनपोहा, कचौरी, दाल बाटी, जैन शाकाहारी थाली
प्रसिद्ध रेस्टोरेंटRaja Café, Blue Sky Restaurant
समयसुबह 8:00 AM – शाम 6:00 PM
प्रवेश शुल्क (भारतीय)₹10/-
प्रवेश शुल्क (विदेशी)₹100/-
बच्चे (15 वर्ष तक)निःशुल्क

12. पन्ना टाइगर रिजर्व (Panna Tiger Reserve)

पन्ना टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश के खजुराहो से लगभग 25 किमी दूर स्थित एक प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य है, जो विश्व धरोहर स्थल कांची नदी के पास बसा हुआ है। यह टाइगर रिजर्व शेर, बाघ, तेंदुआ, और अन्य वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध है। पन्ना टाइगर रिजर्व की सबसे खास बात यह है कि यहाँ टाइगर्स की संख्या का पुनर्निर्माण हुआ है, जिससे यह क्षेत्र एक प्रमुख पर्यावरणीय संरक्षित क्षेत्र बन गया है।

पन्ना टाइगर रिजर्व का क्षेत्र 543.05 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और यहाँ की हरियाली, जंगल, और नदी इस क्षेत्र को प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर बनाती हैं। इस अभयारण्य में आप सफारी के जरिए बाघों और अन्य वन्य जीवों को देख सकते हैं, जो एक रोमांचक अनुभव होता है।

1. पन्ना भारत का 22 वां टाइगर रिज़र्व है और मध्य प्रदेश का पांचवा अभ्यराण्य है |

2. पन्ना राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1981 में की गई थी और 1994 में इसे टाइगर रिजर्व घोषित किया गया

3. वर्तमान में यहाँ 40 से अधिक बाघ हैं, साथ ही तेंदुआ, भालू, चीतल, चिंकारा, नीलगाय, सांभर, जंगली कुत्ता, भेड़िया, और 200 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ भी पाई जाती हैं |

4. केन नदी, जो इस रिजर्व का मुख्य आकर्षण है |

5. 2011 में पन्ना को यूनेस्को बायोस्फीयर रिजर्व घोषित किया गया

13. बामन मंदिर समूह (Baman Temple Group)

वामन मंदिर (अक्सर बामन मंदिर भी कहा जाता है) खजुराहो के पूर्वी मंदिर समूह का एक प्रमुख हिस्सा है। यह मंदिर भगवान विष्णु के पाँचवें अवतार वामन को समर्पित है, जो उनके बौने रूप के लिए प्रसिद्ध है |

बामन मंदिर समूह खजुराहो के पश्चिमी मंदिर समूह के नजदीक स्थित एक ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है। इस मंदिर समूह को ब्रह्मा और विष्णु की पूजा के लिए समर्पित माना जाता है। यह मंदिर अपनी वास्तुकला और नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है। बामन मंदिर समूह में कुल चार मंदिर हैं, जो एक दूसरे के निकट स्थित हैं। इनमें से कुछ मंदिरों में विष्णु और ब्रह्मा की मूर्तियाँ स्थापित हैं, जबकि कुछ मंदिरों में हिंदू देवताओं के चित्रकला और नक्काशी देखने को मिलती है।

यह समूह खजुराहो के प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों में से एक है, जो हर साल बड़ी संख्या में पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है। बामन मंदिर की वास्तुकला हिंदू शैली में बनी हुई है, जिसमें चतुष्कोणीय संरचना और अति सुंदर नक्काशी देखने को मिलती है।

  • वामन मंदिर का निर्माण चंदेल वंश के शासनकाल में 1050 से 1075 ईस्वी के बीच हुआ था |
  •  यह मंदिर खजुराहो के पूर्वी क्षेत्र में, ब्रह्मा मंदिर के उत्तर-पूर्व में लगभग 200 मीटर की दूरी पर स्थित है |
  • मंदिर की लंबाई लगभग 62 फीट और चौड़ाई 45 फीट है। यह अपेक्षाकृत ऊँचे मंच (अधिष्ठान) पर स्थित है |
  • मंदिर की योजना में गर्भगृह, अंतराल, महामंडप (मुख्य हॉल) और अर्धमंडप (प्रवेश पोर्च) शामिल हैं |

14. जवाहर कला केंद्र(Khajuraho Art Center)

khajuraho paryatan sthal: जवाहर कला केंद्र खजुराहो का एक प्रमुख सांस्कृतिक स्थल है, जो खजुराहो के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को प्रकट करता है। यह केंद्र हस्तशिल्प, लोक कला, और स्थानीय कारीगरी का अद्भुत संग्रह है। यहाँ आप खजुराहो के पारंपरिक नृत्य कला, चित्रकला, और हस्तनिर्मित कृतियाँ देख सकते हैं, जो स्थानीय कलाकारों द्वारा बनाई जाती हैं।

खजुराहो की पर्यटन यात्रा के दौरान, यह कला केंद्र पर्यटकों के लिए एक शानदार स्थान है जहाँ वे क्षेत्रीय कला और संस्कृति का अनुभव कर सकते हैं। जवाहर कला केंद्र खजुराहो में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों और नृत्य महोत्सवों के लिए भी प्रसिद्ध है।

  • जवाहर कला केंद्र का उद्देश्य खजुराहो के ऐतिहासिक मंदिरों की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और विकसित करना है, साथ ही नेशनल और इंटरनेशनल पर्यटकों को आकर्षित करना भी इसका लक्ष्य है।
  • यहाँ खजुराहो नृत्य महोत्सव जैसे प्रमुख सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जिसमें भारतीय शास्त्रीय नृत्य के कलाकार भाग लेते हैं। यह महोत्सव आमतौर पर हर साल अक्टूबर में होता है और इसमें देश-विदेश से कई कलाकार और दर्शक शामिल होते हैं।
  • कला केंद्र में नृत्य, संगीत, चित्रकला, हस्तकला आदि की विभिन्न प्रदर्शनी और कार्यशालाएँ आयोजित की जाती हैं, जो खजुराहो की कला संस्कृति को जीवित रखती हैं।
  • यह केंद्र पर्यटकों को खजुराहो के मंदिरों की ऐतिहासिक, कलात्मक और सांस्कृतिक जानकारी भी प्रदान करता है, जिससे उनकी यात्रा और भी समृद्ध होती है।
  • जवाहर कला केंद्र पर्यटकों के लिये एक मार्गदर्शक की तरह कार्य करता है, जिससे वे मंदिरों के स्थापत्य और मूर्तिकला की गहराई तक समझ पाते हैं।
  • कला केंद्र प्रदेश के सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ाने और स्थानीय कला को प्रोत्साहित करने में भी सक्रिय भूमिका निभाता है।

15. खजुराहो डांस फेस्टिवल (Khajuraho Dance Festival)

khajuraho paryatan sthal: खजुराहो डांस फेस्टिवल हर साल फरवरी-मार्च में आयोजित होता है। इसमें शास्त्रीय नृत्य जैसे भरतनाट्यम, कथक, कुचिपुड़ी आदि का मंचन होता है। मंदिरों की पृष्ठभूमि में होने वाला यह उत्सव बहुत ही अद्भुत अनुभव होता है।

गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड: 19–20 फरवरी 2025 को आयोजित शास्त्रीय नृत्य मैराथन में 139 कलाकारों ने 24 घंटे 9 मिनट तक लगातार नृत्य प्रस्तुत किया, जिससे गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बना।

कला प्रदर्शनियाँ: महोत्सव में विभिन्न कला प्रदर्शनियाँ आयोजित की गईं, जिनमें शिल्पकला, चित्रकला, और हस्तशिल्प शामिल थे।​

  • देश-विदेश के प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्य कलाकार अपनी प्रस्तुतियाँ देते हैं, जिनमें भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी, कुचिपुड़ी, मोहिनीअट्टम, मणिपुरी आदि प्रमुख हैं |
  • मंच के पीछे खजुराहो के प्राचीन मंदिरों का भव्य दृश्य, रोशनी से सजा हुआ, उत्सव को अद्वितीय बनाता है।
  • इस वर्ष (2025) 51वाँ संस्करण आयोजित हो रहा है, जिसमें रिकॉर्ड-ब्रेकिंग डांस परफॉर्मेंस, हेरिटेज टूर, क्राफ्ट एग्जीबिशन, फूड फेस्टिवल, और साहसिक गतिविधियाँ भी शामिल हैं |
  • “हुनर मेला” में मध्य प्रदेश की पारंपरिक कला और शिल्प का प्रदर्शन, स्थानीय व्यंजनों का स्वाद और ग्रामीण पर्यटन का अनुभव भी मिलता है

3. निष्कर्ष (Conclusion)

khajuraho paryatan sthal: खजुराहो सिर्फ ऐतिहासिक मंदिरों का शहर नहीं, बल्कि यह कला, संस्कृति, प्रकृति और आध्यात्मिकता का संगम है। अगर आप भारत की समृद्ध विरासत को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो खजुराहो जरूर जाएँ और इन 15 शानदार जगहों की खूबसूरती का आनंद लें।

FAQ


खजुराहो के किन स्थलों पर आप प्राचीन कला और शिल्प का अनुभव कर सकते हैं?

Ans. सांस्कृतिक विविधता की झलक पा सकते हैं। यहाँ उन प्रमुख स्थलों की सूची दी गई है, जहाँ खजुराहो की अद्भुत प्राचीन कला और शिल्प को नजदीक से देखा और महसूस किया जा सकता है:
Khajuraho Temple
Kandariya Mahadev Temple
लक्ष्मण मंदिर (Lakshman Temple)
लक्ष्मण मंदिर खजुराहो के सबसे पुराने और संरक्षित मंदिरों में से एक है। इसकी दीवारों पर विष्णु अवतार, देवी-देवताओं, नर्तकियों और विभिन्न कलाओं को दर्शाती मूर्तियाँ हैं। 
चित्रगुप्त मंदिर (Chitragupta Temple)
चित्रगुप्त मंदिर सूर्य देवता को समर्पित है और यहाँ की मूर्तियों में नृत्य करती हुई नर्तकियों, देवी-देवताओं और सामाजिक जीवन की झलक मिलती है। इसकी मूर्तिकला में तत्कालीन समाज और कला का सुंदर समावेश है।
भारतीय पुरातत्व संग्रहालय (Archaeological Museum)
जैन संग्रहालय (Jain Museum)

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