भारत में rishikesh haridwar me ghumne ki jagah धार्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर कई स्थल हैं, और ऋषिकेश व हरिद्वार इन दोनों शहरों का विशेष स्थान है। ये दोनों उत्तर भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित हैं और पर्यटकों को आध्यात्मिक शांति, आकर्षक नदियाँ, खूबसूरत पर्वत दृश्य और ऐतिहासिक स्थल प्रदान करते हैं।
ऋषिकेश उत्तराखण्ड में हिमालय की गोद में बसा गंगा नदी के किनारे एक बहुत ही खूबसूरत शहर है | जिसे “योग नगरी” और “एडवंचर सिटी” के नाम से भी जाना जाता है क्यूंकि यहॉं पर बंजी जंपिग और रिवर राफ्टिंग जैसी बहुत सारी एडवंचर एक्टिविटी होती हैंं।
ऋषिकेश नगर भगवान् विष्णु के नाम से लिया गया है | जो हृषीक अर्थात् ‘इन्द्रियों’ और ईश अर्थात् ‘ईश्वर’ की समास से बना है, और ‘इन्द्रियों के ईश्वर’ का संयुक्तार्थ देता है। यह गंगा नदी के दाहिने किनारे पर स्थित हिन्दुओ का एक तीर्थस्थल है |
हिंदू धर्म के अनुसार हरिद्वार उत्तराखंड का एक बहुत ही प्रमुख शहर है क्योंकि यहां से हिंदू धर्म के चार धाम केदारनाथ बद्रीनाथ गंगोत्री और यमुनोत्री धाम का गेटवे माना जाता है। इसके अलावा हरिद्वार में विश्व प्रसिद्ध है महाकुंभ और अर्ध कुंभ का भी आयोजन बड़े धूमधाम से किया जाता है
इन दोनों शहरों में घूमने के लिए 10 बेहतरीन जगहें, जहां आप न केवल खूबसूरत दृश्य का आनंद ले सकते हैं, बल्कि वहां के खानपान, शुल्क और समय संबंधी जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं।

ऋषिकेश और हरिद्वार तक पहुँचने के साधन
| परिवहन का साधन | विवरण | लागत (लगभग) | समय |
|---|---|---|---|
| ट्रेन | दिल्ली/लखनऊ/देहरादून से हरिद्वार तक ट्रेनें उपलब्ध हैं | ₹150 – ₹1000 (क्लास के अनुसार) | 4 – 6 घंटे |
| बस | उत्तराखंड रोडवेज या प्राइवेट वॉल्वो बसें | ₹200 – ₹700 | 5 – 7 घंटे |
| टैक्सी/कैब | दिल्ली से डायरेक्ट टैक्सी | ₹3000 – ₹6000 | 5 – 6 घंटे |
| फ्लाइट + टैक्सी | देहरादून (Jolly Grant एयरपोर्ट) तक फ्लाइट, फिर टैक्सी से हरिद्वार/ऋषिकेश | फ्लाइट: ₹1500 – ₹4000 टैक्सी: ₹600 – ₹1500 | फ्लाइट: 1 घंटा टैक्सी: 45 मिनट – 1 घंटा |
रेस्टोरेंट बजट (ऋषिकेश / हरिद्वार)
| रेस्टोरेंट प्रकार | लागत (प्रति व्यक्ति) | विवरण |
|---|---|---|
| सड़क किनारे ढाबा | ₹50 – ₹150 | सस्ता और स्थानीय स्वाद |
| मिड-रेंज रेस्टोरेंट | ₹150 – ₹400 | आरामदायक बैठने की व्यवस्था और विविध भोजन |
| हाई-एंड / कैफे | ₹400 – ₹800+ | ऋषिकेश में कई योगा कैफे और फ्यूजन फूड कैफे |
| पवित्र स्थानों के पास प्रसाद या लंगर | ₹0 – ₹50 (दान आधारित) | गुरुद्वारा या मंदिरों में भोजन |
1. लक्ष्मण झूला, ऋषिकेश (rishikesh haridwar me ghumne ki jagah)
लक्ष्मण झूला ऋषिकेश का सबसे प्रसिद्ध पुल है, जो गंगा नदी पर बना हुआ है। यह पुल पौराणिक महत्व रखता है और यहां से नदी के शानदार दृश्य दिखाई देते हैं। यह स्थल आध्यात्मिक और साहसिक पर्यटन के लिए आदर्श है। यहां से गंगा के लहरों का दृश्य बहुत सुंदर होता है लेकिन यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते 2020 से पूर्णतः बन्द कर दिया गया।
कहा जाता है भगवान राम जी के अनुज लक्ष्मण ने गंगा नदी पर बना जूट के रस्सी के पूल को पार किया था इसलिए इस पूल का नाम लक्ष्मण झूला पड़ा | हिन्दू धर्म के तीर्थ यात्रियों के लिए इसमें विशेष आस्था है | पास ही लक्ष्मण मंदिर भी है जो इस स्थान को और भी पवित्र बना देता है |
1889 में कोलकाता के सेठ सूरजमल झुहानूबाला ने स्वामी विशुदानंद की प्रेरणा से जूट की रस्सियों की जगह लोहे की तारों से मजबूत पुल बनवाया। यह पुल 284 फीट लंबा था, लेकिन 1924 की भीषण बाढ़ में बह गया। जो अब जर्जर हो चूका है और इस पूल वाले रास्ते को बंद भी कर दिया गया है |
- लक्ष्मण झूला गंगा नदी पर बना एक प्रसिद्ध झूला पुल है, जिसकी लंबाई लगभग 450 फीट है और इसे 1929-1930 में बनाया गया था।
- इसका नाम भगवान श्रीराम के छोटे भाई, भगवान लक्ष्मण के नाम पर रखा गया है, क्योंकि पौराणिक मान्यता के अनुसार, लक्ष्मण ने इसी स्थान पर जूट की रस्सियों से गंगा नदी को पार किया था।
- इससे पहले इस पुल का निर्माण लोहे की तारों से 1889 में कोलकाता के सेठ सूरजमल झुहानूबला ने कराया था, लेकिन 1924 में आई बाढ़ में वह पुल बह गया।
- फिर ब्रिटिश सरकार ने 1927 में इसका पुनर्निर्माण शुरू किया और 1930 में यह तैयार हुआ।
- पुल के पश्चिमी किनारे पर भगवान लक्ष्मण का मंदिर स्थित है और दूसरी ओर भगवान श्रीराम का मंदिर है।
- यह पुल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और तीर्थयात्रियों के लिए खास स्थान रखता है।
- रक्षा कारणों से यह पुल 2020 में बंद कर दिया गया, क्योंकि यह भारी आवाजाही का भार सहन नहीं कर पा रहा था।
- लक्ष्मण झूला ऋषिकेश के प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक है, जहां से गंगा नदी की सुंदरता का आनंद लिया जा सकता है।
- पुल के आसपास कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल हैं, जैसे त्रयंबकेश्वर मंदिर, लक्ष्मण मंदिर, अखिलेश्वर महादेव मंदिर और श्री रघुनाथ जी मंदिर।
- लक्ष्मण झूला से जुड़ी ये पौराणिक और ऐतिहासिक कथाएं इसे एक धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन स्थल के रूप में विशेष बनाती हैं।
| स्थान | लक्ष्मण झूला |
| बोर्डिंग समय | 6:00 AM से 12:00 AM तक |
| शुल्क | मुफ्त |
| खानपान | आस-पास के कैफे और स्टॉल्स में चाय, स्नैक्स। |
| पता | लक्ष्मण झूला, ऋषिकेश |
2. राम झूला, ऋषिकेश

लक्ष्मण झूला की तरह ही राम झूला भी ऋषिकेश का प्रमुख आकर्षण है। इस पुल से गंगा की लहरों को निहारना एक अविस्मरणीय अनुभव है। इस स्थान से आसपास के मंदिर और आश्रमों के दृश्य भी अद्भुत होते हैं।
राम झूला भी एक प्रसिद्ध पुल है, जो गंगा नदी पर बना है और यहां से बहुत सुंदर दृश्य दिखाई देते हैं। यह धार्मिक स्थल भी है और आसपास के आश्रमों में साधना का माहौल होता है। इस पूल का संपर्क शिवानंद आश्रम, गीता भवन, परमार्थ निकेतन और स्वर्गाश्रम से जुड़ा है।
उत्तराखंड राज्य में स्थित ऋषिकेश शहर से 3 km दूर गंगा नदी पर बना राम झूला 33 साल पुराना है। इस पुल का निर्माण 1986 में उत्तेर प्रदेश सरकार द्वारा करवाया गया था। 750 फुट लम्बा यह पुल गंगा नदी के ऊपर झूलता है।
जो गोमुख से निकलकर पर्वतो के बिच से बहती हुई ऋषिकेश के समुद्र तल यानि धरती को स्पर्श करती है। इस पुल को लोहे की मजबूत तारो से बनाया गया है। राम झूला लक्ष्मण झूला से काफी बड़ा है | रात में रंग-बिरंगी चमकती लाइटों में ये बहुत अद्भुत दिखता है |
- राम झूला गंगा नदी पर ऋषिकेश में एक लोहे का झूला पुल है, जो शिवानंद नगर को स्वर्गाश्रम से जोड़ता है।
- यह झूला लक्ष्मण झूला से करीब 2 किलोमीटर आगे गंगा पर बना है और लंबाई में लगभग 750 फीट (230 मीटर) है, जो इसे लक्ष्मण झूले से बड़ा बनाता है।
- इसका निर्माण 1986 में किया गया था और तब से यह ऋषिकेश के प्रमुख चिन्हों में से एक है।
- राम झूला पतली लोहे की तारों से बना सस्पेंशन पुल है, जो पैदल यात्रियों और दोपहिया वाहनों दोनों के लिए खुला है।
- पौराणिक मान्यता है कि यह वही रास्ता है जहां भगवान राम और उनके भाई लक्ष्मण ने अपने वनवास के दौरान गंगा नदी को पार किया था, इसलिए इसे राम झूला कहा जाता है।
- यह पुल शिवानंद और स्वर्गाश्रम जैसे प्रसिद्ध आश्रमों को जोड़ता है, जो आध्यात्मिकभ्रमण के लिए महत्वपूर्ण केंद्र हैं।
- राम झूला से चलते हुए आप गंगा नदी और उसके आसपास के घाटियों का अद्भुत दृश्य देख सकते हैं, जो अत्यंत मनोरम अनुभव प्रदान करता है।
- यह ऋषिकेश में योग महोत्सव और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए भी प्रसिद्ध स्थल है।
- राम झूला देखने में लक्ष्मण झूला से मिलता-जुलता है, पर इसकी लंबाई और साइज इसे क्षेत्र का बड़ा और अधिक व्यस्त पुल बनाता है।
- यहां से गुजरते वक्त गिरते हुए गंगा के पानी और झूले के हिलने का अनुभव यात्रियों को बहुत रोमांचक लगता है।
| स्थान | राम झूला |
| बोर्डिंग समय | 5:30 AM से 12:00 AM तक |
| शुल्क | मुफ्त |
| खानपान | आस-पास के कैफे और स्थानीय भोजन। |
| पता | राम झूला, ऋषिकेश |
3. त्रिवेणी घाट, हरिद्वार (rishikesh haridwar me ghumne ki jagah)
हरिद्वार का त्रिवेणी घाट गंगा आरती के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थल हरिद्वार के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में से एक है। यहां सूर्यास्त के समय गंगा आरती का दृश्य बहुत ही आत्मिक और आकर्षक होता है।
त्रिवेणी घाट तीन नदियों के संगम गंगा, यमुना और सरस्वती का समूह है, जो ऋषिकेश में यह सबसे पूज्यनीय पवित्र स्थल का स्थान है। | त्रिवेणी घाट गंगा नदी के तट पर स्थित है | इस घाट का प्रयोग ज्यादातर तीर्थ यात्री स्नान करने में करते हैं |
यह भी माना जाता है की यहाँ पर स्नान करने से लोगो का पाप धूल जाता है और वे पवित्र हो जाते हैं | इस घाट का उल्लेख महाभारत और रामायण में भी मिल जायेगा |
ऐसा भी माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने इस पवित्र स्थल पर आये थे और जब उन्हें ‘जरा’ नामक शिकारी ने तीर से घायल कर दिया था। त्रिवेणी घाट के तट पर लोकप्रिय गीता मंदिर एवं लक्ष्मीनारायण मंदिर स्थित हैं।
यहां पर सूर्यास्त के समय की गंगा आरती बहुत ही प्रभावशाली होती है। rishikesh haridwar me ghumne ki jagah यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है।
- त्रिवेणी घाट उत्तराखंड के ऋषिकेश में स्थित एक प्रमुख और प्रसिद्ध घाट है, जो गंगा नदी के किनारे बना है और पवित्र स्नान के लिए महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है।
- त्रिवेणी घाट उत्तराखंड के ऋषिकेश में स्थित एक प्रमुख और प्रसिद्ध घाट है, जो गंगा नदी के किनारे बना है और पवित्र स्नान के लिए महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है।
- पौराणिक मान्यता है कि यहां स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और आत्मा की शुद्धि होती है। स्कंद पुराण और विष्णु पुराण में इसका उल्लेख है।
- त्रिवेणी घाट पर प्रतिदिन तीन समय आरती होती है—सुबह, दोपहर और शाम को। शाम की गंगा आरती, जिसे महाआरती कहा जाता है, बहुत ही लोकप्रिय और दर्शनीय होती है।
- त्रिवेणी घाट पर प्रतिदिन तीन समय आरती होती है—सुबह, दोपहर और शाम को। शाम की गंगा आरती, जिसे महाआरती कहा जाता है, बहुत ही लोकप्रिय और दर्शनीय होती है।
- त्रिवेणी घाट के एक छोर पर शिवजी की जटा से निकलती गंगा की प्रतिमा है, वहीं दूसरी ओर अर्जुन को गीता ज्ञान देते हुए श्रीकृष्ण की विशाल प्रतिमा और एक बड़ा गंगा माता मंदिर भी स्थित है।
- यह घाट गंगा नदी के दाईं ओर मोड़ पर है, और यहां से गंगा नदी की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लिया जा सकता है।
- त्रिवेणी घाट का धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्त्व अत्यधिक है और यह स्थान श्रद्धालुओं की आध्यात्मिक यात्रा का एक अनिवार्य हिस्सा है।
| स्थान | त्रिवेणी घाट |
| बोर्डिंग समय | 5:00 AM से 9:00 PM तक |
| शुल्क | मुफ्त |
| खानपान | घाट के पास विभिन्न स्टॉल्स में स्थानीय भोजन। |
| पता | त्रिवेणी घाट, हरिद्वार |
4. हरकी पैड़ी, हरिद्वार
हरकी पैड़ी, हरिद्वार का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है, जो गंगा नदी के किनारे स्थित है। यह जगह भक्तों के लिए बहुत ही पवित्र मानी जाती है। यहां लोग अपनी पूजा अर्चना करते हैं और गंगा स्नान करते हैं।
हर की पौड़ी अर्थात हरि की पौड़ी का मतलब होता है भगवान की सीढ़ी माना जाता है। एक समय भगवान विष्णु यहां पर आए थे और उन्हीं के पदचिन्ह इस घाट पर बन गए जिसे मां गंगा हमेशा छूते हुए बहती रहती हैं।
हरकी पैड़ी उत्तराखंड हरिद्वार में एक पवित्र स्थल है | इसका भावार्थ है “हर यानी शिव के चरण”। हिन्दू धार्मिक कथा के अनुसार जब अमृत मंथन हुआ था जब देव और राक्छस अमृत के लिए झगड़ रहे थे तो अमृत की कुछ बूँदें हरिद्वार के इस स्थान पे भी गिरी थी जिस स्थान का नाम हरकी पैड़ी है | यहाँ पे स्नान से मोक्ष की प्राप्ति होती है |
- हरकी पैड़ी हरिद्वार का सबसे पवित्र और प्रमुख गंगा घाट है, जहां से गंगा नदी पहाड़ों को छोड़कर मैदानों में प्रवेश करती है।
- नाम “हरकी पैड़ी” का मतलब है “हरि के चरण” यानी भगवान विष्णु के पैर, क्योंकि यहां एक पत्थर में भगवान विष्णु के पदचिह्न माने जाते हैं।
- पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के समय अमृत की कुछ बूंदें पृथ्वी पर गिरी थीं, जिनमें से एक बूंद इस स्थान पर गिरी थी, इसलिए इसे बहुत पवित्र माना जाता है।
- राजा भर्तृहरि, जो राजा विक्रमादित्य के भाई थे, ने इस स्थान पर कई वर्षों तक तपस्या की थी। राजा विक्रमादित्य ने उनकी स्मृति में यहां पर घाट का निर्माण करवाया था।
- हरकी पैड़ी पर हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए आते हैं क्योंकि यहां स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप धो देते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- हर की पैड़ी पर शाम को मां गंगा की भव्य आरती होती है, जो बहुत प्रसिद्ध और मनमोहक दृश्य होता है।
- यहां कुंभ मेला भी आयोजित होता है, जो हर 12 साल में लगता है और अर्ध कुंभ मेला हर 6 साल में।
- हिंदू मान्यता के अनुसार, इस घाट पर मृत्यु होने पर व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- इस घाट पर स्थित ब्रह्म कुंड में स्नान करना भी अत्यंत पवित्र माना जाता है।
| स्थान | हरकी पैड़ी |
| बोर्डिंग समय | 6:00 AM से 8:00 PM तक |
| शुल्क | मुफ्त |
| खानपान | पास में हल्का भोजन और प्रसाद। |
| पता | हरकी पैड़ी, हरिद्वार |
5. स्वर्गाश्रम, ऋषिकेश (rishikesh haridwar me ghumne ki jagah)
स्वर्गाश्रम ऋषिकेश में स्थित एक शांतिपूर्ण rishikesh haridwar me ghumne ki jagah या स्थान है, जहां आपको योग और ध्यान सिखने का अवसर मिलता है। यहां स्थित आश्रमों में साधना के लिए वातावरण बहुत ही उपयुक्त है, और यह एक धार्मिक और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।
स्वर्गाश्रम ऋषिकेश का शांतिपूर्ण स्थल है, जहां योग और ध्यान के अभ्यास के लिए आदर्श वातावरण है। यहां आप ध्यान और योग में गहरी शांति पा सकते हैं।
स्वर्गाश्रम का अर्थ है “स्वर्ग से बना” अर्थात स्वर्ग | इस आश्रम का निर्माण स्वामी विशुद्धःनंद की याद में किया गया था | जो संत काली कमली वाला के नाम से जाने जाते थे | यह गंगा पर राम झूला पर स्थित है | यहाँ पर देशी तथा विदेशी दोनों पर्यटक आते है | इस क्षेत्र का नाम काली कमली वाला भी है |
- स्वर्गाश्रम ऋषिकेश का सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध आश्रम है, जिसकी स्थापना स्वामी विशुद्धानंद के द्वारा की गई थी, जिन्हें “काली कमली वाला” के नाम से भी जाना जाता था।
- स्वर्गाश्रम ऋषिकेश का सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध आश्रम है, जिसकी स्थापना स्वामी विशुद्धानंद के द्वारा की गई थी, जिन्हें “काली कमली वाला” के नाम से भी जाना जाता था।
- स्वर्गाश्रम परिसर में कई सुंदर मंदिर और साधुओं के लिए कुटियां हैं, जहां वे ध्यान और भजन के लिए निवास करते हैं।
- आश्रम क्षेत्र में तीन धर्मशालाएं हैं जो तीर्थयात्रियों और भक्तों के लिए आवास प्रदान करती हैं।
- आश्रम के आस-पास शाकाहारी भोजन के कई रेस्तरां और हस्तशिल्प दुकाने भी उपलब्ध हैं।
- स्वर्गाश्रम योग, ध्यान और आध्यात्मिक चिंतन के लिए विश्वभर के पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है।
- इस आश्रम का नाम “स्वर्ग” शब्द से जुड़ा है, जो इसे एक शांतिपूर्ण और आत्मिक स्वर्ग समान स्थान बनाता है।
- स्वर्गाश्रम से राम झूला और त्रिवेणी घाट आदि प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचना आसान है।
- यह क्षेत्र प्रकृति की हरियाली और गंगा नदी के शुद्ध जल के बीच एक आध्यात्मिक वातावरण प्रदान करता है, जो मानसिक शांति एवं आध्यात्मिक उन्नति के लिए आदर्श है।
| स्थान | स्वर्गाश्रम |
| बोर्डिंग समय | 6:00 AM से 7:00 PM तक |
| शुल्क | योग कक्षाओं के लिए शुल्क। |
| खानपान | आश्रम में शाकाहारी भोजन। |
| पता | स्वर्गाश्रम, ऋषिकेश |
6. ब्रह्मकुंड, हरिद्वार

हरिद्वार में स्थित ब्रह्मकुंड को बहुत ही पवित्र माना जाता है। यहां पवित्र स्नान करने के बाद लोग अपने पापों से मुक्ति पाते हैं। यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए एक आस्थावान स्थल है।
यहां प्रतिदिन भव्य गंगा आरती होती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। ब्रह्मकुंड पर स्नान और आरती का अनुभव हरिद्वार यात्रा का मुख्य आकर्षण है | यह स्थान हरिद्वार के धार्मिक महत्व को दर्शाता है।
ऐसा कहा जाता है कि ब्रह्माजी स्वयं यहां विराजमान हैं, और इसी कारण इस घाट का महत्व अन्य घाटों से अधिक है | हरिद्वार में गंगा की मुख्य धारा से एक शाखा निकालकर ब्रह्मकुंड में प्रवाहित की गई है, जिसमें अधिकांश तीर्थयात्री स्नान करते हैं
- ब्रह्मकुंड हरिद्वार के सबसे प्राचीन और पवित्र घाटों में से एक है, जहां गंगा नदी में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसे ब्रह्माजी के निवास स्थान के रूप में माना जाता है।
- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राजा श्वेत ने यहां तपस्या की और ब्रह्माजी को प्रसन्न कर इस स्थान का नाम ब्रह्मकुंड रखा गया। ब्रह्मा जी इसी स्थान पर विराजमान हैं।
- एक कथा के अनुसार, सगर के साठ हजार पुत्रों के कल्याण के लिए भगीरथ ने कठोर तपस्या की, जिसके फलस्वरूप मां गंगा इस जगह पर धरती पर आईं।
- समुद्र मंथन के समय अमृत कलश की कुछ बूंदें इस स्थान पर गिरीं, इसलिए यहां कुंभ और अर्धकुंभ मेला भी लगता है।
- यहां स्नान करने से मन, वचन, कर्म के सभी पाप धुल जाते हैं और शारीरिक, मानसिक, वाचिक सभी रोग दूर होते हैं।
- ब्रह्मकुंड घाट पर प्रतिदिन गंगा की आरती होती है, जो धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है।
- पौराणिक ग्रंथों और तीर्थ पुरोहितों का मानना है कि यह घाट गंगा नदी के आगमन से पूर्व भी पवित्र था, इसलिए इसका विशेष महत्व है।
- ब्रह्मकुंड को गंगा के आगमन से पूर्व की पवित्रता और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है, जो इसे हरिद्वार के प्रमुख तीर्थ स्थलों में एक विशिष्ट स्थान प्रदान करता है।
| स्थान | ब्रह्मकुंड |
| बोर्डिंग समय | 6:00 AM से 7:00 PM तक |
| शुल्क | मुफ्त |
| खानपान | आसपास छोटे स्टॉल्स में भोजन। |
| पता | ब्रह्मकुंड, हरिद्वार |
7. नीलकंठ महादेव मंदिर, ऋषिकेश
नीलकंठ महादेव मंदिर ऋषिकेश से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और यहां तक पहुंचने के लिए ट्रैकिंग करनी होती है। इस मंदिर से गंगा और पहाड़ियों का दृश्य बहुत ही सुंदर दिखाई देता है।
कहा जाता है की भगवान् शिव ने इसी स्थान पर समुद्र मंथन से निकला हुआ विष पिया था | उसी समय उनकी अर्धांगिनी देवी पार्वती ने उनका गला यानि कंठ दबा दिया था | जिसकी वजह से जहर उनकी पेट में नहीं गया | इस तरह विष उनके गले में ही रह गया था | विष पान के बाद उनका गला नीला पड़ गया था | इसलिए उनको (भगवान् शिव को) गला नीला पड़ने के कारण नीलकंठ के नाम से जाना जाने लगा | भगवान् शिव का एक नाम नीलकंठ भी है | मंदिर के अंदर पानी का एक झरना है जहाँ भक्तगण मंदिर के दर्शन करने से पहले स्नान करते हैं |
नीलकंठ महादेव मंदिर ऋषिकेश से लगभग 3500 फीट की ऊँचाई पर स्वर्ग आश्रम की पहाड़ी की चोटी पर स्थित है।
- यह मंदिर ऋषिकेश के पास मणिकूट पर्वत पर लगभग 3,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और भगवान शिव को समर्पित है।
- पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब विष (हलाहल) निकला, तब भगवान शिव ने पूरी सृष्टि की रक्षा के लिए वह विष अपने गले में ग्रहण किया। विष के कारण उनका गला नीला पड़ गया, इसलिए उन्हें नीलकंठ कहा जाता है।
- यह मंदिर उसी स्थान पर बना है जहां भगवान शिव ने विष ग्रहण किया था और लंबे समय तक समाधि लगाकर रहे थे।
- मंदिर की दीवारों पर समुद्रमंथन की घटनाओं की सुंदर नक़्क़ाशी और चित्रकारी की गई है, जो इसे और भी आकर्षक बनाती हैं।
- यहाँ स्थित शिवलिंग को स्वयंभू माना जाता है, यानी यह स्वयं प्रकट हुआ है और इसका आध्यात्मिक महत्व अत्यधिक है।
- मंदिर के आसपास होती मणिकूट, ब्रह्मकूट और विष्णुकूट पर्वत श्रृंखला इसे प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण करती है।
- सावन मास में लाखों श्रद्धालु इस मंदिर में जलाभिषेक करने और दर्शन करने आते हैं, क्योंकि इस समय यहां विशेष पूजा और मेले का आयोजन होता है।
- मंदिर तक पहुंचने के लिए तीर्थयात्री पैदल चलकर पहाड़िया रास्तों से गुजरते हैं, जो अपनी अद्भुत प्राकृतिक छटा के कारण आकर्षण का केंद्र होता है।
- मंदिर परिसर में एक झरना भी है, जहां भक्त स्नान करते हैं और मंदिर के दर्शन से पूर्व शुद्ध होते हैं।
- यहाँ भगवान शिव को गंगाजल चढ़ाना और धागा बांधना एक प्रचलित परंपरा है, जिसे भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर खोलते हैं।
| स्थान | नीलकंठ महादेव मंदिर |
| बोर्डिंग समय | 5:00 AM से 7:00 PM तक |
| शुल्क | मुफ्त |
| खानपान | मंदिर के पास छोटे भोजनालय। |
| पता | नीलकंठ महादेव मंदिर, ऋषिकेश |
8. मायाकुंड, ऋषिकेश

मायाकुंड एक पवित्र स्थान है, जहां पर लोग ध्यान और साधना के लिए आते हैं। यहां का वातावरण बहुत ही शांत और शांतिपूर्ण होता है। अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं, तो यह जगह आपको बहुत भाएगी। यहाँ का वातावरण प्राकृतिक होता है।
- मायाकुंड में कई प्रसिद्ध स्थल हैं, जैसे त्रिवेणी घाट, जो ऋषिकेश का सबसे लोकप्रिय घाट है और यहां हर शाम भव्य गंगा आरती होती है |
- मायाकुंड क्षेत्र में निर्मल आश्रम जैसी प्राचीन संस्थाएं भी स्थित हैं, जिसकी स्थापना 1903 में महंत बुद्ध सिंह जी महाराज ने की थी |
- यहां ऋषिकुंड नामक एक प्राचीन कुंड भी है, जिसे दिव्य और पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इस कुंड में मां यमुना का आशीर्वाद है और इसके पास भगवान राम व माता सीता का मंदिर (रघुनाथ मंदिर) भी स्थित है |
- मायाकुंड में त्रिवेणी घाट, ऋषिकुंड, रघुनाथ मंदिर, निर्मल आश्रम आदि दर्शनीय स्थल हैं।
- मायाकुंड ऋषिकेश के पास गंगा नदी के तट पर स्थित एक पवित्र जलकुण्ड है, जिसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत खास है।
- यहाँ स्नान करने को अत्यंत शुभ माना जाता है और श्रद्धालु इसे गंगा की पवित्रता का एक रूप मानते हैं।
- पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह स्थान उस तपस्वी के लिए प्रसिद्ध है जिसने कठोर साधना करके ईश्वर की कृपा प्राप्त की थी।
- मायाकुंड ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम क्षेत्र के करीब है और यह एक शांत, मनमोहक और आध्यात्मिक वातावरण प्रदान करता है।
- आसपास के क्षेत्र में कई प्राचीन मंदिर और आश्रम हैं, जो योग, ध्यान और अध्यात्म का केंद्र हैं।
- यह कुण्ड प्रकृति के बीच स्थित होने के कारण प्राकृतिक सुकून और शांति का अनुभव कराता है।
- मायाकुंड में स्नान करने से व्यक्ति के सभी मानसिक और शारीरिक अपराधों और कष्टों से मुक्ति मिलती है, ऐसा स्थानीय मान्यता है।
- मायाकुंड में स्नान करने से व्यक्ति के सभी मानसिक और शारीरिक अपराधों और कष्टों से मुक्ति मिलती है, ऐसा स्थानीय मान्यता है।
| स्थान | मायाकुंड |
| बोर्डिंग समय | 7:00 AM से 6:00 PM तक |
| शुल्क | मुफ्त |
| खानपान | पास में छोटे कैफे। |
| पता | मायाकुंड, ऋषिकेश |
9. सप्तऋषि आश्रम, ऋषिकेश
सप्तऋषि आश्रम ऋषिकेश के एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल में से एक है। यह आश्रम गंगा के किनारे स्थित है और यहां साधना, ध्यान, और योग की प्रैक्टिस करने के लिए शांत वातावरण मिलता है। यहां आकर आपको शांति और आध्यात्मिक अनुभव मिलेगा। यह जगह शांतिपूर्ण वातावरण में समय बिताने के लिए आदर्श है।
सप्तऋषि आश्रम गंगा नदी के तट पर, हरिद्वार से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक प्रसिद्ध और ऐतिहासिक आश्रम है। यह आश्रम ऋषिकेश के रास्ते में, हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में आता है, और ऋषिकेश से भी इसकी दूरी कम है, इसलिए कई बार इसे ऋषिकेश के आसपास का आश्रम भी कहा जाता
- मान्यता है कि प्राचीन काल में सात महान ऋषि—कश्यप, वशिष्ठ, अत्रि, विश्वामित्र, जमदग्नि, भारद्वाज और गौतम—यहां तपस्या करते थे। गंगा की तेज धारा से परेशान होकर, उन्होंने गंगा को अपनी साधना के लिए सात धाराओं में विभाजित किया था, जिससे यह स्थान ‘सप्त सरोवर’ या ‘सप्तऋषि आश्रम’ कहलाता है |
- सप्तऋषि आश्रम उत्तराखंड के हरिद्वार के पास गंगा नदी के तट पर स्थित एक प्राचीन और शांतिपूर्ण आश्रम है, जो सप्त ऋषियों (सात महावीर्य ऋषि) के नाम पर रखा गया है।
- इस आश्रम की स्थापना 1943 में गोस्वामी गुरुदत्त द्वारा की गई थी। यह एक सुव्यवस्थित परिसर है जिसमें रहने के लिए कई कमरे, योग कक्षाएं और ध्यान केंद्र हैं।
- आश्रम के पास गंगा नदी सात धाराओं में विभाजित होती है जिसे सप्त सरोवर भी कहा जाता है, जो इसे धार्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।
- यह स्थान योग, ध्यान और आध्यात्मिक साधना के लिए प्रसिद्ध है, और विश्वभर से साधक ये स्थान शांति, शक्ति और अध्ययन के लिए आते हैं।
- आश्रम एक प्राकृतिक हरे-भरे इलाके में स्थित है, जो पर्यटकों और आध्यात्मिक यात्रीयों दोनों के लिए अपनी शांति और स्वच्छता के लिए जाना जाता है।
- यह आश्रम हर की पौड़ी से लगभग 5-7 किलोमीटर की दूरी पर है, और ऋषिकेश से भी देखा जा सकता है जो लगभग 15 किलोमीटर दूर है।
- आश्रम में गरीब बच्चों के लिए आवासीय छात्रावास और संस्कृति विद्यालय भी संचालित होता है, जो स्थानीय समाज सेवा के लिए महत्वपूर्ण है।
- स्थान की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गंगा नदी को इस क्षेत्र में सात धाराओं में विभाजित किया गया ताकि सप्त ऋषि यहां साधना करते समय disturbed न हों।
- यहाँ नियमित रूप से योग, ध्यान और संस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जो इसे आध्यात्मिक शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र बनाते हैं।
| स्थान | सप्तऋषि आश्रम |
| बोर्डिंग समय | 6:00 AM से 8:00 PM तक |
| शुल्क | आश्रम में ध्यान कक्षाओं का शुल्क। |
| खानपान | आश्रम में शाकाहारी भोजन। |
| पता | सप्तऋषि आश्रम, ऋषिकेश |
10. भारत मंदिर, हरिद्वार

भारत मंदिर हरिद्वार का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। यह मंदिर भगवान श्रीराम को समर्पित है और यहां दर्शन करने से भक्तों को मानसिक शांति मिलती है। हरिद्वार के अन्य मंदिरों की तरह यहां भी पूजा अर्चना और गंगा स्नान का महत्व है। यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए एक शांतिपूर्ण स्थान है।
भारत मंदिर ऋषिकेश के मध्य में स्थित सबसे प्राचीन और प्रमुख मंदिरों में से एक है। यह मंदिर भगवान हृषिकेश नारायण (भगवान विष्णु) को समर्पित है और ऋषिकेश शहर का नाम भी इन्हीं भगवान के नाम पर पड़ा है |
भारत मंदिर का उल्लेख स्कन्द पुराण के केदार खंड (अध्याय 115-120) में मिलता है। मान्यता है कि 17वें मन्वंतर में रैभ्य मुनि की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने यहां प्रकट होकर कहा था कि वे ‘हृषिकेश’ नाम से सदा यहां निवास करेंगे, इसी कारण इस स्थान का नाम ऋषिकेश पड़ा |
- भारत माता मंदिर हरिद्वार में स्थित एक आठ मंजिला मंदिर है, जिसे भारत माता को समर्पित किया गया है। इसे “मदर इंडिया टेम्पल” के नाम से भी जाना जाता है।
- इस मंदिर का उद्घाटन 1983 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था।
- मंदिर की ऊंचाई लगभग 180 फीट है और इसमें आठ मंजिलें हैं, जिनमें हर मंजिल की अपनी एक खास कहानी और धार्मिक महत्ता है।
- पहली मंजिल पर भारत माता की बड़ी मूर्ति और भारत का नक्शा होता है।
- दूसरी मंजिल को “शूर मंजिल” कहा जाता है, जहां झांसी की रानी, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी जैसे भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्तियां हैं।
- तीसरी मंजिल “मातृ मंदिर” के नाम से जानी जाती है, जो भारत की महान महिलाओं जैसे मीरा बाई, सावित्री आदि को समर्पित है।
- चौथी मंजिल में कबीर दास, गौतम बुद्ध, तुलसीदास और श्री साईं बाबा जैसे महान पुरुषों की मूर्तियां हैं।
- पांचवीं मंजिल भारत के विभिन्न धर्मों और भागों का प्रतिनिधित्व करती है।
- छठी मंजिल देवी शक्ति को समर्पित है, जहां देवी दुर्गा, देवी सरस्वती, देवी पार्वती आदि की पूजा होती है।
- सातवीं मंजिल भगवान विष्णु को समर्पित है और यहां उनके दस अवतारों की मूर्तियां भी स्थापित हैं।
- आठवीं और शीर्ष मंजिल पर भगवान शिव का मंदिर है, जहां से हिमालय पर्वत और सप्त सरोवर की सुंदरता देखी जा सकती है।
- मंदिर का निर्माण स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी ने करवाया था और यह राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति का प्रतीक माना जाता है।
- यह मंदिर कई भक्तों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है, जो हरिद्वार की धार्मिक महत्ता को बढ़ाता है।
| स्थान | भारत मंदिर |
| बोर्डिंग समय | 6:00 AM से 9:00 PM तक |
| शुल्क | मुफ्त |
| खानपान | पास में हल्का भोजन। |
| पता | भारत मंदिर, हरिद्वार |
निष्कर्ष:
ऋषिकेश और हरिद्वार में स्थित ये 10 बेहतरीन स्थल न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यहां के प्राकृतिक दृश्य और शांति भी पर्यटकों को बहुत आकर्षित करते हैं। इन स्थानों की यात्रा से आपको आध्यात्मिक और मानसिक शांति मिलेगी, और प्रकृति के साथ एक गहरा संबंध महसूस होगा। अगर आप भी एक यादगार यात्रा की तलाश में हैं, तो ऋषिकेश और हरिद्वार की इन जगहों का दौरा अवश्य करें |
FAQ
कौन सी जगह आपको सबसे ज्यादा शांतिपूर्ण अनुभव देगी?
Ans. गर आप ऋषिकेश-हरिद्वार क्षेत्र में सबसे ज्यादा शांतिपूर्ण अनुभव की तलाश में हैं, तो ऋषिकेश का त्रिवेणी घाट और परमार्थ निकेतन आश्रम आपके लिए सबसे उपयुक्त स्थान हैं।
त्रिवेणी घाट
यह घाट गंगा नदी के किनारे स्थित है और यहां सुबह-शाम की गंगा आरती, नदी की कलकल ध्वनि, और आसपास का शांत वातावरण आपको गहरे सुकून का अनुभव कराता है। यहां बैठकर ध्यान करना, बहते पानी की आवाज सुनना और सूर्योदय या सूर्यास्त देखना बेहद शांतिपूर्ण होता है।
परमार्थ निकेतन आश्रम
यह आश्रम योग, ध्यान और साधना के लिए प्रसिद्ध है। यहां का वातावरण बेहद शांत, हरियाली से भरपूर और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत है। गंगा किनारे बैठकर ध्यान लगाना या आश्रम की आरती में शामिल होना आपको भीतर तक शांति का अहसास कराएगा।

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