Agra Paryatan Sthal: 13 अद्भुत स्थल जो चौंका देंगे!

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Agra Paryatan sthal: आगरा भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित है। यह दिल्ली से लगभग 230 किलोमीटर दूर यमुना नदी के किनारे बसा हुआ एक ऐतिहासिक शहर है। आगरा का उल्लेख सबसे पहले महाभारत में ‘अग्रवन’ के रूप में हुआ है।

यह शहर मुगल साम्राज्य के दौरान प्रमुख केंद्र बना। बाबर, अकबर, जहाँगीर, शाहजहाँ जैसे सम्राटों ने यहाँ अनेक भव्य इमारतें बनवाईं। ताज महल को बनाने में 22 साल लगे और 20,000 कारीगरों ने काम किया।

आगरा पहले मुगल साम्राज्य की राजधानी था। पेठे की शुरुआत भी मुगलों के समय में हुई थी। आगरा में हर साल लाखों विदेशी पर्यटक आते हैं। आगरा के बारे में विस्तृत जानकारी यहाँ के खान-पान, पर्यटक स्थल , यहाँ की खरीददारी , घूमने का सही समय , करने योग्य चीजे, और यहाँ कैसे पहुंचे |

प्रमुख दर्शनीय स्थल (Tourist Places in Agra) (Agra Paryatan sthal)

ताज महल – प्रेम का प्रतीक, सफेद संगमरमर से बनी भव्य इमारत।

आगरा किला – मुगल साम्राज्य का शक्तिशाली गढ़।

फतेहपुर सीकरी – अकबर द्वारा बसाया गया शहर, बुलंद दरवाज़ा और सलीम चिश्ती की दरगाह यहीं हैं।

सिकंदरा – अकबर का मकबरा।

मेहताब बाग – ताज महल के सामने बसा बाग़, खासकर सूर्यास्त के समय बेहद सुंदर दृश्य।

चिनी का रोज़ा – फारसी वास्तुकला का उदाहरण।

मोती मस्जिद – शाहजहाँ द्वारा बनाई गई सफेद संगमरमर की मस्जिद।

अकबर का मकबरा (Sikandra Tomb) – सम्राट अकबर की समाधि, सुंदर वास्तुकला और बाग़ों से घिरा हुआ स्थान।

इत्माद-उद-दौला (Baby Taj) – मुगल वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण, इसे छोटे ताज महल के नाम से जाना जाता है।

रामबाग (Ram Bagh) – आगरा का सबसे पुराना मुगल गार्डन, जिसे बाबर ने बनवाया था।

मरीना बीच मार्केट और सदर बाजार – आगरा के प्रसिद्ध बाज़ार जहाँ आप पांडे के पेठे, हस्तशिल्प और संगमरमर की चीज़ें खरीद सकते हैं।

वृंदावन – राधा-कृष्ण की लीला स्थली

मथुरा – श्री कृष्ण की जन्मभूमि

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आगरा का खाना (Famous Food of Agra)

पेठा – आगरा का सबसे प्रसिद्ध मीठा, कई स्वादों में मिलता है (केसर, अंगूरी, पान)।

दालमोठ – तीखा और कुरकुरा स्नैक।

बेडई-कचौड़ी और आलू की सब्जी – पारंपरिक आगरा का नाश्ता।

मुगलई खाना – कबाब, बिरयानी, नाहरी आदि।

खरीदारी के स्थान (Shopping in Agra)

सदर बाजार – कपड़े, जूते, हस्तशिल्प।

किनारी बाजार – पारंपरिक कपड़े और सजावटी वस्तुएँ।

ताजगंज – संगमरमर की मूर्तियाँ, ताज महल की मिनिएचर कॉपियाँ।

राजा की मंडी – लोकल मार्केटिंग के लिए बेहतरीन जगह।

घूमने का सही समय (Best Time to Visit Agra)

अक्टूबर से मार्च: मौसम ठंडा और सुहावना होता है, देखने और घूमने के लिए आदर्श समय है।

गर्मियों (अप्रैल-जून) में तापमान बहुत अधिक होता है, जिससे यात्रा कठिन हो सकती है

कैसे पहुँचें (How to Reach Agra)(Agra Paryatan sthal)

हवाई मार्ग:

  • निकटतम हवाई अड्डा आगरा एयरपोर्ट (Kheria Airport) है, जो दिल्ली से कनेक्टेड है।

रेल मार्ग:

  • आगरा कैंट रेलवे स्टेशन सबसे मुख्य स्टेशन है।
  • दिल्ली, मुंबई, जयपुर, लखनऊ से अच्छी ट्रेनें उपलब्ध हैं।

सड़क मार्ग:

  • दिल्ली से यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए 3–4 घंटे में पहुँचा जा सकता है।
  • बसें, टैक्सी और प्राइवेट गाड़ियाँ सुविधाजनक विकल्प हैं।

आगरा में करने योग्य चीजें (Things to Do in Agra)

ताज महल में सूर्योदय या सूर्यास्त देखना।

आगरा के स्ट्रीट फूड का स्वाद लेना।

ताज महल के पास नाव की सवारी करना।

मुगल वास्तुकला की तस्वीरें खींचना।

लोकल बाजारों से हस्तशिल्प और स्मृति चिह्न खरीदना।

Agra Transportation & Restaurant Budget Table (Per Person)

CategoryOptionEstimated Cost (INR)Remarks
Travel to AgraTrain (Sleeper/General)₹100 – ₹250Budget option from Delhi, Jaipur, etc.
Train (Chair Car / 3AC)₹300 – ₹700Gatimaan Express or other fast trains
Bus (AC/Non-AC)₹300 – ₹600From nearby cities; state or private buses
Cab/Taxi (shared/self-drive)₹1,000 – ₹2,500Round trip, split cost if in group
Local TransportAuto Rickshaw / Tonga₹100 – ₹200Common near Taj Mahal & Fort
Ola/Uber/E-Rickshaw₹100 – ₹300Short city rides or full-day booking
RestaurantsStreet Food / Local Dhaba₹100 – ₹200Bedai, jalebi, chaat, petha, lassi
Mid-range Restaurant₹300 – ₹600North Indian, Mughlai, thali, buffet
High-end / Rooftop Dining₹800 – ₹1,500With Taj view, multicuisine, fine dining

आगरा एयरपोर्ट (AGR) के लिए हवाई यात्रा बजट

शहरएकतरफा किराया (INR)उड़ान विवरण
दिल्ली (DEL)₹7,389 – ₹11,8025–6 घंटे की उड़ान; स्पाइसजेट, इंडिगो, एयर इंडिया, ट्रूजेट
लखनऊ (LKO)₹2,100 – ₹4,2001–2 घंटे की उड़ान; इंडिगो
कोलकाता (CCU)₹5,514 – ₹11,4746–7 घंटे की उड़ान; इंडिगो
सूरत (STV)₹13,000 – ₹15,0007–8 घंटे की उड़ान; इंडिगो
जयपुर (JAI)₹14,000 – ₹15,0006–7 घंटे की उड़ान; इंडिगो
प्रयागराज (IXD)₹15,262 – ₹43,1511–2 घंटे की उड़ान; इंडिगो

Agra Paryatan Sthal: 13 अद्भुत स्थल जो चौंका देंगे! Uska Bistarpurvak jaankari :

1. ताज महल – प्रेम का प्रतीक, सफेद संगमरमर से बनी भव्य इमारत।

Agra Paryatan sthal: ताज महल भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के आगरा शहर में स्थित एक भव्य स्मारक है। यह सफेद संगमरमर से बना एक मकबरा है जिसे मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज़ महल की याद में बनवाया था। इसे प्रेम का प्रतीक माना जाता है और यह विश्व के सात अजूबों में शामिल है।

ताजमहल का बनना 1631 ई. में शुरू हुआ | ताजमहल 1653 ई. (लगभग 22 साल) में बनकर तैयार हुआ | इसको बनाने वाले मुग़ल सम्राट शाहजहाँ है | इसके निर्माण का उद्देश्य मुमताज़ महल की समाधि के रूप में है। मुमताज़ महल की मृत्यु 1631 में अपने 14वें बच्चे को जन्म देते समय हुई थी।

यह एक इस्लामी, फारसी, तुर्की और भारतीय वास्तुकला शैली का मिश्रण है। पूरा ढाँचा सफेद संगमरमर से बना है जिसे राजस्थान के मकराना से लाया गया था। इसके चारों कोनों पर 4 मीनारें हैं जो हल्की झुकी हुई हैं ताकि भूकंप में मुख्य इमारत को नुकसान न पहुँचे।

इसमें मुख्य गुंबद, मीनारें, बाग़-बग़ीचे, मस्जिद और मेहमानख़ाना शामिल हैं। चारों ओर सुंदर चहारदीवारी और एक विशाल जलाशय है जिसमें ताज महल का प्रतिबिंब दिखाई देता है। इसके निर्माण में कुछ दुर्लभ चीजों का प्रयोग हुआ है जैसे सफेद संगमरमर, बहुमूल्य रत्न (जैसे पन्ना, मूंगा, फ़िरोज़ा), लाल बलुआ पत्थर, और शिल्पकारों ने महीन नक्काशी और जड़ाई (inlay work) का अद्भुत काम किया है।

ताज महल बनाने में 20,000 मजदूर, 1,000 हाथी और कई साल लगे। यह पूर्णतः सममित (symmetrical) संरचना है। इसका रंग दिन के समय और मौसम के अनुसार बदलता है – सुबह गुलाबी, दिन में सफेद, रात को सुनहरा। शाहजहाँ का मकबरा मुमताज़ की कब्र के बगल में है – एकमात्र असममित तत्व।

  • मुगलकाल में बनी ताजमहल की इमारत इकलौती ऐसी इमारत है, जिसे सफेद संगमरमर के पत्थरो्ं से बनाया गया है |। इस भव्य स्मारक के निर्माण में करीब 23 साल का लंबा वक्त लगा था, जिसे न सिर्फ भारतीय मजदूर बल्कि तुर्की और फारस के मजदूरों ने भी मिलकर बनाया था।
  • आगरा में स्थित ताजमहल एक ऐसी लकड़ी के आधार पर बनाया गया है, इसकी मजबूती के लिए नमी होना जरुरी है , और इस नमी को यमुना नदी बनाकर रखती है।
  • दुनिया के सात अजूबो में से एक ताजमहल जाने वाले मुख्य मार्ग के बीच जो फव्वारे लगाए गए हैं, वे किसी पाइप से नहीं जुड़े हैं, बल्कि हर फव्वारे के नीचे एक तांबे का टैंक है, यह सभी टैंक एक ही समय पर भरते हैं, और प्रेशर पड़ने पर इसमें पानी भी छोड़ते हैं।
  • मुगल सम्राट शाहजहां ताजमहल की तरह ही एक काला ताजमहल बनवाना चाहता था, लेकिन इससे पहले शाहजहां को उसके निर्दयी बेटे औंरगेजब ने बंधक बना लिया था, जिससे उसकी यह ख्वाहिश पूरी नहीं हो सकी।
  • ताजमहल को बनाने के लिए करीब 8 अलग-अलग देशों से सामान लाया गया था। और इसकी निर्माण सामग्री ढोने के लिए करीब 1500 हाथी लगे थे।
  • औरंगाबाद में इस भव्य और ऐतिहासिक स्मारक ताजमहल का डुप्लीकेट यानि की प्रतिकृति बनी हुई है, जो कि ‘मिनी ताज’ के नाम से मशहूर है। वास्तविक में यह ”बीवी का मकबरा” है।
  • आगरा का ताजमहल दुनिया के सात अजूबो में से एक अजूबा है | कहा जाता है ताजमहल को बनाने के बाद वह के राजा ने ऐसे बनाने वाले हाथ काट दिया था ताकि इसका दूसरा कोई ताजमहल का नमूना न बन सके |

पास में खाने की जगहें (Food Near Taj Mahal) :Pinch of Spice – मशहूर मुगलई रेस्तरां, Joney’s Place – स्थानीय खाना और विदेशी व्यंजन, Shankara Vegis – शुद्ध शाकाहारी भोजन और ताजगंज और सदर बाजार में स्ट्रीट फूड भी लोकप्रिय है।

खुलने का समय (Opening Hours): प्रत्येक दिन खुला रहता है: सुबह 6:00 बजे से शाम 6:30 बजे तक | शुक्रवार को बंद रहता है: (केवल नमाज़ के लिए मुस्लिमों के लिए खुला रहता है) | रात्रि दर्शन: पूर्णिमा, पूर्णिमा से पहले और बाद की रात (रात्रि 8:30 से 12:30 बजे तक)

घूमने की सलाह (Tips for Visitors): ताज महल में खाद्य सामग्री, मोबाइल चार्जर, तंबाकू, ड्रोन और सिगरेट ले जाना मना है। कैमरा ले जा सकते हैं, लेकिन मुख्य समाधि कक्ष में फोटो खींचना वर्जित है। भीड़ से बचने के लिए सुबह जल्दी पहुँचना बेहतर होता है। गाइड या ऑडियो गाइड लेना उपयोगी हो सकता है।

कैसे पहुँचे (How to Reach Taj Mahal)(Agra Paryatan sthal)

रेल मार्ग: निकटतम स्टेशन: आगरा कैंट रेलवे स्टेशन (6 किमी दूर) | यहाँ से टैक्सी, ऑटो या ई-रिक्शा से पहुँचा जा सकता है।

सड़क मार्ग: दिल्ली, जयपुर, लखनऊ आदि शहरों से सीधी बस सेवा। यमुना एक्सप्रेसवे द्वारा दिल्ली से सिर्फ 3 घंटे में।

हवाई मार्ग: आगरा एयरपोर्ट (Kheria Airport) – घरेलू उड़ानों के लिए उपलब्ध। निकटतम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा: इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, दिल्ली

प्रवेश शुल्क (Taj Mahal Ticket Price)(Agra Paryatan sthal)

श्रेणीटिकट शुल्क (INR)
भारतीय पर्यटक₹50
SAARC देशों के नागरिक₹540
विदेशी पर्यटक₹1100
15 वर्ष से कम उम्रनिःशुल्क

2. आगरा किला – मुगल साम्राज्य का शक्तिशाली गढ़।

Agra fort

आगरा का किला एक यूनेस्को द्वारा घोषित विश्व धरोहर स्थल है |  यह भारत का सबसे महत्वपूर्ण किला है | यहाँ भारत के मुग़ल सम्राट बाबर, हुमायु, अकबर , जहांगीर, शाहजहाँ और औरंजेब यही पे रहते थे | यही से पुरे भारत पे शासन करते थे |

Agra Paryatan sthal: आगरा किला उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में स्थित एक विशाल ऐतिहासिक किला है। यह यमुना नदी के किनारे स्थित है और ताज महल से लगभग 2.5 किमी की दूरी पर है। यह किला मुग़ल साम्राज्य की राजनीतिक शक्ति और वैभव का प्रमुख केंद्र था। मूल रूप से 11वीं शताब्दी में राजपूतों द्वारा बनाया गया था।

1526 में इब्राहीम लोदी ने इसे दिल्ली सल्तनत की राजधानी बनाया। 1556 में मुगल सम्राट अकबर ने इसे जीत लिया और इसे लाल पत्थर से बनवाकर एक विशाल दुर्ग का रूप दिया। बाद में शाहजहाँ ने इसमें संगमरमर का उपयोग कर इसे और भव्य बना दिया।

यह किला न केवल एक सैन्य ठिकाना था, बल्कि सम्राटों का निवास स्थान भी था। किला लाल बलुआ पत्थर से बना है, इसलिए इसे “लाल किला” भी कहा जाता है (हालाँकि यह दिल्ली के लाल किले से अलग है)। इसके चारों ओर एक गहरी खाई बनी हुई थी।

  • इस किले को बनवाने की कोशिश काफी सारे शासको ने किया था परंतु वर्तमान में जो किला हम देख रहे है उसका निर्माण अकबर द्वारा 1565 ई. से 1573 ई. के मध्य लगभग 8 वर्षो तक करवाया था।
  • इस किले के निर्माण में लगभग 40,000 श्रमिकों ने आठ साल तक प्रत्येक दिन लगातार काम किया था।
  • वर्ष 1506 ई. में सिकंदर लोधी ने देश की राजधानी, दिल्ली को आगरा में स्थानांतरित कर दिया और आगरा के किले को अपने निवास के रूप में उपयोग कर, आगरा को “दूसरी राजधानी” की संज्ञा दी थी।
  • यह किला 380,000 वर्ग मीटर (94 एकड़) में फैला एक अर्धवृत्तीय किला है।
  • यह किला भी ताजमहल, दिल्ली के लाल किला की तरह यमुना नदी के किनारे स्थित है। इस किले की बाहरी दीवारें लगभग 70 फुट ऊंची हैं।
  • इस किले के परिसर के अंदर ही 3 मस्जिद स्थापित हैं। जिसे मोती मस्जिद, मीना मस्जिद और नगीना मस्जिद के नाम से जानते है। इसमें एक ज़नाना मीना बाजार भी बना हुआ है।
  • आगरा के किले में 4 प्रवेश द्वार हैं जिसमे सबसे प्रमुख द्वारा दिल्ली गेट और दूसरा लाहौर गेट है। लाहौर गेट को अमर सिंह गेट भी कहा जाता है, जिसका नाम अमर सिंह राठौर के नाम पर रखा गया।
  • इस किले के परिसर के भीतर 9 आलिशान महल भी बने है। जिनमें जहांगीर महल, खास महल, दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, शाह जहानी महल, मच्ची भवन, बंगाली महल, शीश महल और अकबरी महल आदि सम्मिलित है।
  • इस किले की सुन्दरता व नक्काशीयों को देखते हुये यूनेस्को द्वारा साल 1983 में इसे विश्व धरोहर स्थल  घोषित कर दिया गया।
  • भारत की सबसे प्रसिद्ध फिल्मो में से एक 1960 में आई मुगल-ए-आज़म का प्रसिद्ध गाना ‘प्यार किया तो डरना क्या’ की शूटिंग भी आगरा के किले में की गई थी।
  • इस किले को वर्ष 2000 में मिस्र के पॉप स्टार हिशाम अब्बास ने अपने एक मशहूर संगीत वीडियो “हबीबी दाह” में फिल्माया था।
  • इस किले ने वर्ष 2004 में वास्तुकला के लिए आगा खान पुरस्कार जीता। भारत पोस्ट ने इस कार्यक्रम का जश्न मनाने के लिए एक टिकट भी जारी किया था।

3. फतेहपुर सीकरी – अकबर द्वारा बसाया गया शहर, बुलंद दरवाज़ा और सलीम चिश्ती की दरगाह यहीं हैं।

Agra Paryatan sthal: फतेहपुर सीकरी उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में स्थित एक ऐतिहासिक नगर है। इसे मुग़ल सम्राट अकबर ने 16वीं शताब्दी में अपनी राजधानी के रूप में बसाया था। यह शहर आज भी अपनी वास्तुकला, धार्मिक महत्व और ऐतिहासिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है।

1571 se 1585 तक यह मुग़ल साम्रज्य अकबर की राजधानी रही और बाद में पानी की कमी के कारण इस छोड़ कर चले गए | अकबर को इसे छोड़कर लाहौर जाना पड़ा। फतेहपुर सीकरी मस्जिद के बारे में कहा जाता है कि यह मक्‍का की मस्जिद की नकल है और इसके डिजाइन हिंदू और पारसी वास्‍तुशिल्‍प जैसे है उसी की तरह है |

प्राचीन काल से फ़तेहपुर सीकरी ‘विजयपुर सीकरी’ के नाम से जाना जाता था। विक्रम संवत 1010-1067 ईसवी के एक शिलालेख में इस जगह का नाम “सेक्रिक्य” मिलता है। 

मस्जिद का प्रवेश द्वार 54 मीटर ऊचा बुलंद दरवाजा है | जो 1573 में बना | मस्जिद के उत्तर में शेख सलीम चिश्‍ती की दरगाह है जहाँ नि:संतान महिलाएँ दुआ मांगने के लिए आती हैं।

आँख मिचौली, दीवान-ए-खास, बुलंद दरवाजा, पांच महल, ख्‍वाबगाह, जौधा बाई का महल,शेख सलीम चिश्ती के पुत्र की दरगाह, शाही मसजिद, अनूप तालाब फतेहपुर सीकरी के प्रमुख स्‍मारक हैं।

फतेहपुर सीकरी की नींव अकबर ने 1571 ई. में रखी थी। अकबर की कोई संतान नहीं थी, इसलिए उन्होंने सूफी संत शेख सलीम चिश्ती से आशीर्वाद लिया। जब अकबर को पुत्र (जहाँगीर) प्राप्त हुआ, तो उन्होंने आभार स्वरूप यहाँ एक भव्य नगर बसाया।

  • बादशाह अकबर ने इस शहर की योजना बनाने में 15 वर्ष लगाया था |
  • बादशाह ने गुजरात पर फतह पाने के लिए 1573 में यही से प्रस्थान (कूच) किया था।
  • मुगल बादशाह बाबर ने राणा सांगा पे सीकरी नामक स्थान पर विजय पाने के बाद यही पर अपना अधिकार जमाया था।
  • इसके निर्माण से पहले मुगलों की राजधानी आगरा थी, लेकिन फतेहपुर सीकरी बनने के बाद सम्राट ने राजधानी को नए नगर में स्थानांतरित कर लिया था।
  • साल 1571 से 1585 तक फतेहपुर सीकरी मुगलों की राजधानी थी ।
  • ऐसा माना जाता है कि फतेहपुर सीकरी मस्जिद मक्का में बनी मस्जिद की नकल है और इसके नमूने हिंदू और पारसी वास्तुशिल्प से लिए गए हैं।
  • फतेहपुर सीकरी में स्थित बुलंद दरवाजा एशिया का सबसे ऊंचा दरवाजा है।
  • यहाँ की जनसंख्या 28,757 है। जिसमें पुरुषों की जनसंख्या 53% और महिलाओं की जनसंख्या 46% है।
  • फतेहपुर सीकरी की औसत साक्षरता दर 46% है, जो राष्ट्रीय औसत दर 74% से कम है, जिसमे पुरुष साक्षरता 57% है और महिला साक्षरता 34% है।
  • यह शहर आगरा जिले के पंद्रह ब्लॉक मुख्यालयों में से एक है।
  • इस शहर के अंतर्गत 52 ग्राम पंचायते आती हैं।
  • शहर का सबसे नजदीक रेलवे स्टेशन फतेहपुर सीकरी रेलवे स्टेशन है, जो शहरी केंद्र से लगभग 1 किलोमीटर (62 मीटर) की दूरी पर स्थित है।
  • आगरा एयरपोर्ट (जिसे खेरिया एयरपोर्ट भी कहा जाता है), शहर का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है, जो यहाँ से केवल 40 किलोमीटर (25 मीटर) की दूरी पर स्थित है।
  • इसके आलावा आप यहाँ सड़क मार्ग द्वारा भी आसानी से पंहुच सकते है।

4. सिकंदरा – अकबर का मकबरा।(Agra Paryatan sthal)

Agra Paryatan sthal: सिकंदरा आगरा का एक ऐतिहासिक क्षेत्र है, जहाँ पर मुग़ल सम्राट अकबर महान का मकबरा स्थित है। यह मकबरा आगरा शहर से लगभग 4 किमी दूर स्थित है और यह मुग़ल स्थापत्य का एक अद्भुत उदाहरण है।

इस मकबरे का निर्माण अकबर ने स्वयं अपनी जीवित अवस्था में शुरू करवाया था। अकबर की मृत्यु के बाद, उनके पुत्र जहाँगीर ने इसे 1613 ई. में पूरा करवाया। यह मकबरा मुग़ल, हिन्दू, बौद्ध, जैन और इस्लामी शैलियों का मिश्रण है। इसे लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से बनाया गया है।

सिकंदरा का नाम सिकंदर लोदी के नाम पे रखा गया | मकबरे के चारों कोनों पर तीन मंजिला मीनारें हैं। ये मीनारें लाल पत्‍थरों से बनी हैं जिन पर संगमरमर का सुंदर काम किया गया है। मकबरे के चारो तरफ सूंदर बाग़ है | जिसके बीच में बरादी महल है जिसका निर्माण सिकंदर लोदी ने करवाया था। सिकंदरा से आगरा के बीच में अनेक मकबरे हैं | यहाँ दो कोस मीनार भी है |

आगरा-मथुरा राष्ट्रीय राज मार्ग पर अकबर का मकबरा है, जिसे सिकंदरा कहते हैं। यह लोदी स्थापत्य कला पर आधारित पांच मंजिली इमारत है। इसमें सबसे नीचे अकबर की कब्र है।

  • इस ऐतिहासिक मकबरे का निर्माण सबसे प्रसिद्ध मुगल शासक अकबर के लिए उनके पुत्र जहांगीर ने करवाया था।
  • यह मकबरा भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश में आगरा के उपनगर सिकंदरा में मथुरा रोड (एनएच 2) पर स्थित है।
  • इस मकबरे का निर्माण 1605 ई. में शुरु किया गया था और लगभग 8 वर्षो के बाद इसे 1613 ई. तक बनाकर तैयार कर दिया गया था।
  • यह प्रसिद्ध मकबरा लगभग 119 एकड़ के क्षेत्रफल में फैला है।
  • मुगल सम्राट औरंगजेब ने भारत पर लगभग 49 वर्षो तक शासन किया था, उनके शासनकाल के दौरान विद्रोही राजा राम जाट ने अपने पिता गोकुला की मौत का बदला लेने के लिए अकबर की कब्र को खोला और उसमे से अकबर की हड्डियों को बहार निकालकर उसको अपमानित किया जिसके बाद औरंगजेब ने उस विद्रोही राजा को बहुत ही भयानक मौत दी थी।
  • इस प्रसिद्ध मकबरे से महज 1 कि.मी. की दूरी पर अकबर की सबसे प्रिय पत्नी मरियम-उज-ज़मानी की कब्र स्थित है।
  • इस मकबरे का निर्माण प्राचीन मुगल शैली के अनुसार किया गया है, जिस कारण इस मकबरे में जगह-जगह पर विभिन्न प्रकार की इस्लामिक नक्काशियां देखने को मिलती है।
  • यह मकबरा लाल बलुआ पत्थरों और संगमरमर के सुंदर पत्थरों द्वारा निर्मित किया गया है, जिस कारण इसकी खूबसूरती आज भी वैसी ही है जैसे पहले थी।
  • इस मकबरे में कई द्वार है परंतु दक्षिण प्रवेश द्वार सबसे बड़ा है, जिसके ऊपर 4 सफेद संगमरमर द्वारा निर्मित मीनारे स्थित है।
  • इस मकबरे की स्थिति बाद में बहुत खराब हो गई थी, जिसे बाद में एक ब्रिटिश अधिकारी लॉर्ड कर्ज़न की सहायता से पुननिर्मित करवाया गया था।

प्रवेश शुल्क (Entry Fees)

श्रेणीशुल्क (INR)
भारतीय पर्यटक₹30
विदेशी पर्यटक₹310
SAARC/बिम्सटेक देश₹35
15 वर्ष से कम उम्रनिःशुल्क

खुलने का समय (Timings): खुला रहता है: प्रतिदिन सुबह 6:00 बजे से शाम 6:30 बजे तक

कैसे पहुँचें (How to Reach Sikandra) : स्थान: आगरा-दिल्ली हाईवे पर, आगरा शहर से लगभग 10 किमी दूर | रेलवे स्टेशन से दूरी: आगरा कैंट स्टेशन से लगभग 12 किमी | आगरा फोर्ट स्टेशन से: 10-15 मिनट की दूरी

5. मेहताब बाग – ताज महल के सामने बसा बाग़, खासकर सूर्यास्त के समय बेहद सुंदर दृश्य।

mehtab bagh

Agra Paryatan sthal: मेहताब बाग, जिसका अर्थ है “चाँदनी बाग़” या “मूनलाइट गार्डन”, ताज महल के ठीक सामने यमुना नदी के पार स्थित एक सुंदर मुगल उद्यान है। यह ताज महल का प्रतिबिंब देखने का सबसे बेहतरीन स्थान माना जाता है, खासकर सूर्यास्त के समय

मुगल सम्राट बाबर ने इस बाग़ की शुरुआत की थी, जिसे बाद में शाहजहाँ ने और विकसित करवाया। ऐसा कहा जाता है कि शाहजहाँ ताज महल के सामने एक काला ताज महल बनाना चाहते थे और मेहताब बाग उसी की जगह चुनी गई थी।

1990 के दशक में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इसका पुनर्निर्माण करवाया। बाग़ की खुदाई के दौरान ताज महल के प्रतिबिंब के लिए बना एक बड़ा तालाब भी खोजा गया।

मेहताब बाग़ आगरा के पर्यटक स्थलों में एक हैं। मेहताब बाग़ मुग़ल द्वारा निर्मित उन ग्यारह बागों में से अंतिम बाग़ है जो यमुना नदी के साथ, ताज महल और आगरा किले के सामने स्थित है। 

मेहताब बाग़ के बीच में एक बड़ा सा अष्टभुजीय तालाब है, जिसमें ताजमहल का प्रतिबिंब बनता है। पर्यटक इस बाग़ से ताजमहल की अनुपम छठा को निहार सकते हैं। इस तालाब के लिए पानी बगल के झरने से लाया गया था। 

  • मेहताब बाग ताजमहल के सामने यमुना नदी के विपरीत तट पर स्थित है।
  • इसे शाहजहां ने बनवाया था, और इसे “चाँदनी बाग” भी कहा जाता है।
  • कहा जाता है कि यहाँ काले संगमरमर का “काला ताजमहल” बनना था, लेकिन हुआ नहीं।
  • 1990 के दशक में यहां पुरातात्विक खुदाई हुई जिसमें 25 फव्वारे और अष्टकोणीय तालाब मिले।
  • यह जगह सूर्यास्त के वक्त सबसे सुंदर दृश्य प्रस्तुत करती है, जहाँ ताजमहल का प्रतिबिंब नदी में दिखाई देता है।
  • बाग में 40 से अधिक विभिन्न प्रकार के पौधे और पेड़ लगाए गए हैं, जो मुगल काल की चारबाग शैली की खासियत हैं।

प्रवेश शुल्क (Entry Fees)

श्रेणीशुल्क (INR)
भारतीय नागरिक₹25
विदेशी पर्यटक₹300
बच्चे (15 वर्ष तक)निःशुल्क

खुलने का समय (Timings): रोज़ाना खुला: सुबह 6:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक | सबसे अच्छा समय: सूर्यास्त से एक घंटा पहले पहुँचना बेहतर होता है | समर में: शाम को ठंडी हवा के साथ घूमने का अनुभव शानदार होता है |

और पढ़े : मेहताब बाघ की पूरी जानकारी

6. चिनी का रोज़ा – फारसी वास्तुकला का उदाहरण।

चिनी का रोज़ा उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में यमुना नदी के किनारे स्थित एक सुंदर और अनोखा मकबरा है। यह मकबरा मुख्य रूप से अपनी फारसी वास्तुकला और चीनी टाइलों की सजावट के लिए जाना जाता है।

यह मकबरा मुग़ल काल में बनाए गए सबसे अलग और कलात्मक स्मारकों में से एक है। चिनी का रोज़ा का निर्माण 1635 ई. में हुआ था। यह मकबरा अफ़ज़ल ख़ान शिराज़ी का है, जो मुग़ल सम्राट शाहजहाँ के दरबार में एक प्रतिष्ठित प्रधान मंत्री (Wazir) और कवि थे।

अफ़ज़ल ख़ान मूलतः ईरान (फारस) के शिराज़ शहर से थे। इसका सबसे बड़ा आकर्षण है – “चीनी टाइलों” (Glazed Tiles) से की गई सजावट, जो ईरान से मँगाई गई थीं। इसलिए इसे “चिनी का रोज़ा” कहा जाता है — “चिनी” का मतलब यहाँ है चीनी या काँच की रंगीन टाइलें। यह एत्मादपुर रोड, यमुना नदी के किनारे, आगरा पे बसा है |

  • इसका निर्माण 1635 में शाहजहां के वजीर अफजल खान शीराज़ी के लिए हुआ था, जो खुद एक प्रसिद्ध कवि और विद्वान थे।
  • नीले रंग के ग्लेज्ड टाइल्स को खासतौर पर चीन और अफगानिस्तान से आयातित किया गया था, जिनका प्रयोग इसे “चीनी के टाइल्स” के नाम से प्रसिद्ध बनाता है।
  • इसका नाम “चीनी का रोज़ा” इस टाइल्स के कारण पड़ा, न कि किसी चीनी से जुड़ी वस्तु से।
  • यह मकबरा फारसी वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है और मुगल काल में भारतीय वास्तुकला में फारसी कला के प्रवेश को दर्शाता है।
  • मकबरे का मुख दिशा मक्का की ओर है, जो इस्लामी वास्तुकला की एक खासियत है।
  • स्मारक को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित और पुनर्स्थापित किया जा रहा है, क्योंकि समय के साथ इसके कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो चुके थे।
  • यह ताजमहल और इत्माद-उद-दौला मकबरा के करीब है, लेकिन अपनी विशिष्ट नीली चमक और कला के कारण अलग पहचाना जाता है।
  • यह स्मारक मुगल साम्राज्य में कला, संस्कृति और प्रशासन के समृद्ध इतिहास का प्रतीक है।

खुलने का समय (Timings): रोज़ खुला रहता है: सुबह 6:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक

कैसे पहुँचें (How to Reach Chini Ka Rauza): ताज महल से: रिक्शा, ऑटो या कैब से 10 मिनट | आगरा फोर्ट से दूरी: लगभग 3 किमी | Google Maps पर “Chini Ka Rauza” सर्च करें — रास्ता आसान है।

7. मोती मस्जिद – शाहजहाँ द्वारा बनाई गई सफेद संगमरमर की मस्जिद।

मोती मस्जिद, जिसका अर्थ है “मोती जैसी सुंदर मस्जिद“, एक शानदार सफेद संगमरमर से बनी मस्जिद है, जिसे मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने बनवाया था। यह मस्जिद आगरा किले के भीतर स्थित है और इसकी गिनती मुगल स्थापत्य कला के बेहतरीन उदाहरणों में होती है।

मोती मस्जिद का निर्माण शाहजहाँ ने 1648 से 1654 ई. के बीच करवाया। यह मस्जिद खासतौर पर दरबार के शाही कर्मचारियों और खास लोगों के लिए बनाई गई थी। इसे “मोती” नाम इसलिए मिला क्योंकि इसका सफेद रंग और चमकदार रूप किसी चमकते मोती जैसा लगता है।

इसके अंदर साफ-सुथरी मेहराबें, नक्काशीदार खंभे और फर्श पर सफेद-काले पत्थरों से बनी नमाज़ की पंक्तियाँ हैं। यह आगरा किला परिसर, आगरा, उत्तर प्रदेश में है |

  • मस्जिद के निर्माण के लिए शुद्ध सफेद पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था, जिसके कारण यह मोती के समान चमकदार सफेद मख़मली दिखाई पड़ती है।
  • मोती मस्जिद में 7 खण्ड है, जिनको खंडदार मेहराब और खम्बो ने सहारा दे रखा है, आगे प्रत्येक को फिर से तीन गलियारों में विभाजित किया गया है।
  • मस्जिद की छत पर 3 गुंबद बने हैं, जिन्हें सफेद संगमरमर से बनाया गया हैं। गुम्बद की दीवारों को लाल बलुआ पत्थर से बनाया गया हैं।
  • मस्जिद के बायीं तरफ दीवान-ऐ-आम स्थित है, यह वे स्थान है जहां पर सम्राट अपनी प्रजा से भेंट करने के लिए दरबार को आयोजित करते थे।
  • मस्जिद में बने फर्श का ढलान पूर्व दिशा से पश्चिम दिशा की ओर नीचे की तरफ जाता है।
  • मस्जिद परिसर के मध्य के एक संगमरमर का टैंक है और साथ ही एक पारम्परिक धूप घड़ी जो दरबार के एक कोने पर स्थित अष्टकोणीय संगमरमर के स्तंभ पर स्थापित की गयी है।
  • मस्जिद के अन्दर 3 प्रवेश द्वार है, जिनमे से सबसे बड़ा द्वार परिसर की पूर्वी तरफ स्थित है जिसे मुख्य द्वार भी कहा जाता है। दक्षिणी और उत्तरी छोर पर बाकी दो अतिरिक्त द्वार है।
  • यह मस्जिद मुग़ल शासनकाल में बनी सबसे महँगी वास्तुकलाओं में से एक है। उस समय इसकी कुल निर्माण लागत 1,60,000 रूपए थी।

प्रवेश शुल्क (Entry Fees)

श्रेणीशुल्क (INR)
भारतीय नागरिक₹50
विदेशी नागरिक₹650
15 वर्ष से कम उम्रनिःशुल्क

8. अकबर का मकबरा (Sikandra Tomb) – सम्राट अकबर की समाधि, सुंदर वास्तुकला और बाग़ों से घिरा हुआ स्थान।

अकबर का मकबरा, जिसे सिकंदरा का मकबरा (Sikandra Tomb) भी कहा जाता है, मुग़ल सम्राट अकबर महान की समाधि है। यह मकबरा आगरा के पास सिकंदरा क्षेत्र में स्थित है और यह मुग़ल वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

इसे शांत बाग़ों, सुंदर संरचना और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। अकबर की मृत्यु 1605 ई. में हुई, और उसके बाद उनके पुत्र जहाँगीर ने इस मकबरे का निर्माण 1613 ई. में पूरा करवाया। यह मकबरा न केवल उनकी समाधि है, बल्कि उनकी सहिष्णु, सांस्कृतिक और वास्तुकला प्रिय सोच का प्रतीक भी है |

भीतर की असली समाधि (cenotaph) एक साधारण कक्ष में बनी है, जो शांति और सादगी का प्रतीक है। मुख्य भवन चार मंज़िलों का है, और ऊपर की मंज़िल पूरी तरह से सफेद संगमरमर से बनी है। परिसर में कई जानवर जैसे हिरण, मोर, नीलगाय और बंदर भी देखे जा सकते हैं।

  • मकबरे का निर्माण अकबर ने अपने जीवन काल में लगभग 1600 के आसपास शुरू किया था, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद इसका निर्माण उनके पुत्र जहांगीर ने पूरा किया |
  • मकबरे की बाहरी झलक में लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर का सुंदर संयोजन है, जिसमें 99 नाम-ए-अल्लाह नक्काशी के साथ लिखे गए हैं
  • मकबरे के चारों ओर तीन मंजिला मीनारें हैं, जो लाल पत्थर से बनी हैं और संगमरमर की नक्काशी से सजी हैं |
  • मकबरा चारों ओर से सुंदर बाग़ों से घिरा हुआ है, जिसमें बरादी महल भी शामिल है, जो सिकंदर लोदी द्वारा बनवाया गया था |
  • मकबरे के शीर्ष तल को चंद्रमहाल (मून पैलेस) कहा जाता है, क्योंकि चाँदनी में यह खूबसूरत चमकता है, जबकि नीचे के तीन तल हवामहल कहलाते हैं, जो चारों ओर से खुला है और हवा आती है |
  • मकबर का वास्तुकला और डिजाइन विविध धार्मिक स्थापत्य शैलियों का मिश्रण है, जो सम्राट अकबर की धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक है |

खुलने का समय (Timings) : रोज़ाना खुला: सुबह 6:00 बजे से शाम 6:30 बजे तक | समय सुझाव: सुबह का समय या शाम को सूर्यास्त के आसपास सबसे सुंदर दृश्य मिलता है।

प्रवेश शुल्क (Entry Fees)

श्रेणीशुल्क (INR)
भारतीय नागरिक₹30
विदेशी नागरिक₹310
SAARC/बिम्सटेक देश₹50
15 वर्ष से कम उम्रनिःशुल्क

9. इत्माद-उद-दौला (Baby Taj) – मुगल वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण, इसे छोटे ताज महल के नाम से जाना जाता है।

Agra Paryatan sthal: इत्माद-उद-दौला का मकबरा आगरा का एक बेहद सुंदर और ऐतिहासिक स्थल है, जिसे अक्सर “बेबी ताज (Baby Taj)” या छोटे ताज महल के नाम से जाना जाता है। यह मुग़ल काल की पहली पूरी संगमरमर से बनी इमारत है और ताज महल के निर्माण की प्रेरणा मानी जाती है।

इस मकबरे का निर्माण मुग़ल सम्राट जहाँगीर की पत्नी नूरजहाँ ने अपने पिता मीरज़ा ग़ियास बेग की याद में करवाया था। मीरज़ा ग़ियास बेग को जहाँगीर दरबार में “इत्माद-उद-दौला” की उपाधि दी गई थी, जिसका अर्थ है “राज्य का स्तंभ”।

यह मकबरा 1622 से 1628 ई. के बीच बनकर तैयार हुआ। इसे “बेबी ताज” इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका डिजाइन और वास्तुकला ताज महल से मिलती-जुलती है। यह मुघलपुरा, आगरा, उत्तर प्रदेश में है |

चारों ओर से ऊंची दीवारों से घिरे 165 मीटर के विशाल बगीचा परिसर के मध्य में स्थित यह मुख्य मकबराए मुगलकालीन चार बाग मकबरा शैली का प्रतीक है। इसके पूर्व में इसका भव्य प्रवेश द्वार बनाया गया है। नदी के तट पर केंद्रीय कक्ष और गलियारे के साथ एक ऐसा ही भव्य जलमण्डल बनाया गया है। इस बगीचे की सिंचाई नदी तट पर खड़ी की गई पानी की टंकियों से लघु जलमार्गों के माध्यम से की जाती थी।

लाल बलुआ पत्थर के ऊंचे चबूतरे पर बना यह मकबरा वग्रकार है। मुख्य मकबरे के केंद्रीय मेहराब के सामने इस चबूतरे पर चार टैंक हैं और प्रत्येक छोर पर बीच में एक-एक फव्वारा है।

  • यह मकबरा 23 वर्गमीटर में यमुना नदी के पूर्वी किनारे पर बना है |
  • यह मकबरा एनएच-2 पर स्थित राम बाग सर्किल से सिर्फ दो कि.मी. दूरी पर स्थित है।
  • इस मकबरे को बनाने का काम चार बाग नाम से मशहूर पर्सियन गार्डन के बीच में लाल पत्थर के खम्बों पर किया गया है।
  • मुगलकालीन यह मकबरा अन्य मकबरों से अपेक्षाकृत छोटा है, जिसके कारण इसे कई बार श्रंगारदान भी कहते है।
  • भारत में बना यह पहला मकबरा है जिसे पूरी तरह सफ़ेद संगमरमर से बनाया गया था । अपनी खूबसूरती के कारण यह मकबरा आभूषण बक्से के रूप में भी जाना जाता है।
  • मकबरे की दीवारों पर पेड़-पौधों, जानवरों और पक्षियों के चित्रों की सुन्दर नक्काशी की गई हैं।
  • यमुना के हिस्से को छोडकर स्मारक के तीनों तरफ लाल पत्थरो का परिकोटा बना हुआ है, स्मारक का मुख्य द्वार पूर्व दिशा की ओर है।
  • पत्थर की उठी हुई पथिकाओ के मध्य में पानी की उथली नालियों ने स्मारक के बाग को एक समान चार भागो में बाटा हुआ है। लाल पत्थर की यह पथिकाए मुख्य मकबरे व चारों तरफ की इमारतों को आपस में जोड़ती है।
  • मकबरे के बचे हुए खाली भाग में पथिकाओ के किनारे सुंदर फूलो की क्यारियां व बीच में घास का मैदान बना हुआ है, जिसके बीच मुख्य संगमरमर का मकबरा एक ऊँचे चबूतरे पर बना हुआ है।
  • मकबरे के अंदर मध्य में मुख्य हाल है, जिसमें मिर्जा ग्यासबेग और उनकी पत्नी अस्मत बेगम की सुनहरे रंग की नकली कब्रे बनी हुई है।
  • स्मारक के मुख्य चौकोर हाल की छत रंगीन व सुनहरे रंग की बेहद सुन्दर कलाकारी से सजी हुई है।
  • मुख्य हाल के चारों तरफ के कोनो में चार कमरे बने हुए है, जिनमे नूरजहाँ की बेटियों और उनके रिश्तेदारों की कब्रे बनी हुई है। यह चारों कमरे आपस में एक-दूसरे से जुड़े हुए है।
  • मकबरे में कहीं-कहीं पर आदमियों के चित्रों को भी देखा जा सकता है जो एक अनोखी चीज है क्योंकि इस्लाम में मनुष्य का सजावट की चीज के रूप में इस्तेमाल करना मना होता है।
  • मकबरे की दीवारों पर अर्ध कीमती पत्थरों जैसे जैस्पर और टोपाज एवं शराब की बोतलों के रूप में उकेरी हुई नक्काशियाँ बहुत ही अद्भुत दिखाई पड़ती हैं।
  • बेबी ताज के नाम से मशहूर इस मकबरे की नक्काशी इतनी सुन्दर है कि बाद में ताजमहल बनाते समय उन्हें अपना लिया गया था। बहुत से पर्यटकों को यहाँ की कई नक्काशी ताजमहल से भी ज्यादा अच्छी लगती है।
  • केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने इस मकबरे को आदर्श स्मारक का दर्जा प्रदान किया हुआ है |

खुलने का समय (Timings) : प्रत्येक दिन खुला: सुबह 6:00 बजे से शाम 6:30 बजे तक | भीड़ कम होने के कारण यहां शांति और फोटोग्राफी का बेहतरीन मौका मिलता है।

प्रवेश शुल्क (Entry Fees)

श्रेणीशुल्क (INR)
भारतीय नागरिक₹30
विदेशी नागरिक₹310
15 वर्ष से कम उम्रनिःशुल्क

10. रामबाग (Ram Bagh) – आगरा का सबसे पुराना मुगल गार्डन, जिसे बाबर ने बनवाया था।

Agra Paryatan sthal: रामबाग, जिसे पहले आराम बाग़ भी कहा जाता था, आगरा का सबसे पुराना और ऐतिहासिक मुग़ल बाग़ (Mughal Garden) है। इसे मुग़ल सम्राट बाबर ने बनवाया था। यह बाग़ यमुना नदी के किनारे स्थित है और इसकी योजना पारंपरिक चारबाग शैली में बनाई गई थी।

यह स्थल शांति, हरियाली और इतिहास का सुंदर संगम है। यह लगभग 1528 ई. में बना था | इसके निर्माता मुग़ल सम्राट बाबर, जो भारत में मुग़ल साम्राज्य के संस्थापक थे। यह बाग़ मूल रूप से बाबर के विश्राम और शांति के लिए बनवाया गया था, इसलिए इसका नाम आराम बाग़ रखा गया था, जिसका अर्थ है – विश्राम का बाग़।

  • रामबाग को बाबर ने 1528 में बनवाया था, जब वे भारत में थे। बाबर की मृत्यु (1530) के बाद उन्हें अस्थायी रूप से यहीं दफनाया गया था, बाद में उनके अवशेष काबुल ले जाए गए |
  • यह भारत का पहला फारसी शैली (चारबाग प्रति वास्तु) पर आधारित म्यूगल गार्डन है, जिसमें उद्यान को चार भागों में बांटने वाली जल-संरचनाएँ, रास्ते और पवेलियन हैं |
  • मूल नाम ‘आराम बाग’ था, क्योंकि बाबर यहां विश्राम करते थे। मराठों के समय में अपभ्रंश होकर इसका नाम ‘रामबाग’ पड़ गया |
  • यह यमुना नदी के किनारे, ताजमहल से लगभग 2.3 किमी उत्तर दिशा में स्थित है |
  • गार्डन ऊंची चारदीवारी, बुर्जियाँ, हरे-भरे लॉन, छायादार पथ, दो मंजिला इमारतें, संगमरमर के चबूतरे, और जल वितरण तंत्र (नहरें, हौज, फव्वारे) से सुसज्जित है |
  • बाबर के जीवन एवं मुग़ल उद्यान निर्माण की शुरुआती झलक दिखाता है। बाद में बनाये गए कई मुगल स्मारकों (जैसे हुमायूं का मकबरा, ताजमहल) की चारबाग शैली की प्रेरणा भी यहीं से मिली |
  • भारतीय नागरिकों के लिए 10 रुपए, विदेशी नागरिकों के लिए 100 रुपए (2025 तक) |
  • यह न सिर्फ इतिहासकारों, बल्कि प्रकृति व वास्तुकला प्रेमियों के बीच भी एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है |

11. मरीना बीच मार्केट और सदर बाजार – आगरा के प्रसिद्ध बाज़ार जहाँ आप पांडे के पेठे, हस्तशिल्प और संगमरमर की चीज़ें खरीद सकते हैं।

Agra Paryatan sthal: सदर बाजार आगरा का सबसे प्रसिद्ध और व्यस्त बाजार है। यह बाजार कैंटोनमेंट क्षेत्र में स्थित है और यहाँ हर दिन हजारों स्थानीय लोग और पर्यटक खरीदारी के लिए आते हैं। यह जगह पांडे के पेठे, हस्तशिल्प, संगमरमर की कलाकृतियाँ, चमड़े के सामान, और कपड़ों के लिए मशहूर है।

  • मीना बाजार की शुरुआत मुगल सम्राट अकबर ने की थी। इसका आयोजन महल के आंगन में हरम की महिलाओं के लिए खास मौके (जैसे नौरोज) पर होता था, जहां महिलाएं चीजें बेचती और खरीदती थीं, और केवल बादशाह को ही प्रवेश की अनुमति थी |
  • यह परंपरा आगरा किले में शुरू हुई और बाद में दिल्ली सहित अन्य जगहों पर भी फैल गई |
  • यहां बेचने और खरीदने दोनों का काम महिलाएं ही करती थीं, जिनमें शाही परिवार की महिलाएं और बाहरी सुंदरियां शामिल होती थीं |
  • सामान अक्सर ज्यादा कीमत पर बिकता था, और उससे होने वाली आमदनी को जरूरतमंदों में बांट दिया जाता था |
  • मीना बाजार में ही कई ऐतिहासिक मुलाकातें हुईं। ऐसा कहा जाता है कि शाहजहाँ और मुमताज़ महल की पहली मुलाकात भी इसी बाजार में हुई थी |
  • आगरा का कोठी मीना बाजार वह जगह है, जहाँ मराठा सम्राट शिवाजी महाराज को मुगलों ने बंदी बनाया था
  • आज मीना बाजार सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं बल्कि आम जनता के लिए खुला है, और यहाँ कपड़े, गहने, हस्तशिल्प आदि खूब मिलते हैं |
  • सदर बाजार ताजमहल और आगरा किले के पास स्थित सबसे व्यस्त और लोकप्रिय बाजारों में से एक है।
    यहाँ आप पांडे के पेठे (आगरा की प्रसिद्ध मिठाई), संगमरमर के शिल्प, चमड़े के जूते, कालीन, हस्तशिल्प और पारंपरिक कपड़े आदि खरीद सकते हैं।
  • बाजार में फूड स्टॉल्स, मिठाई की दुकानें और चाट की शृंखला स्थानीय स्वाद का बेहतरीन अनुभव कराती है।
    यह बाजार आगरा घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए ‘शॉपिंग हब’ बन चुका है।
  • मीना बाजार ऐतिहासिक रंग में रंगा है, जबकि सदर बाजार आज के दौर की खरीदारी और खानपान की जरूरतों को पूरा करता है।
  • दोनों बाजारों में आपको आगरा की मशहूर पेठा मिठाई, संगमरमर की नक्काशीदार वस्तुएं, और स्थानीय हस्तशिल्प के साथ-साथ पारंपरिक भारतीय बाजारों की रौनक देखने को मिलेगी।

खुला रहता है: दोपहर 11:00 बजे से रात 10:00 बजे तक |

साप्ताहिक अवकाश: मंगलवार को बंद रहता है |

क्या करें (Things to Do)

स्ट्रीट शॉपिंग का मज़ा लें, स्वादिष्ट पेठे और नमकीन चखें, लोकल कला और संस्कृति को करीब से देखें और अगर बारगेनिंग (मोल-भाव) में अच्छे हैं, तो यह आपके लिए परफेक्ट जगह है |

12. वृंदावन – राधा-कृष्ण की लीला स्थली(Agra Paryatan sthal)

वृंदावन, जो उत्तर प्रदेश के Mathura जिले में स्थित है, हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। यह स्थान विशेष रूप से भगवान श्री कृष्ण और राधा जी के साथ जुड़ा हुआ है।

वृंदावन का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व अत्यधिक है क्योंकि यह वह स्थान है जहाँ भगवान कृष्ण ने अपनी बाल्यकाल की लीलाएं और राधा के साथ प्रेम की कथाएं मचाई थीं। यहाँ की हर गली, मंदिर और बाग़ में राधा और कृष्ण की उपस्थिति का अहसास होता है।

वृंदावन का इतिहास बहुत प्राचीन है और यह श्री कृष्ण के जीवन के महत्वपूर्ण क्षणों से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण अपने बचपन और युवावस्था के अधिकतर वर्ष यहाँ बिताए थे, जहाँ उन्होंने अपनी गौवों के साथ बंसी बजाई और राधा के साथ प्रेम लीला की।

वृंदावन का नाम “वृक्षों के बाग़” से पड़ा है, क्योंकि इस क्षेत्र में बहुत सारे वृक्ष और बाग़ थे, जो कृष्ण की लीलाओं का साक्षी बने। इसे “गोकुल” और “ब्रज भूमि” के अंतर्गत भी माना जाता है, जहां भगवान कृष्ण ने अपनी गोविंद लीलाओं का प्रदर्शन किया।

  • श्रीकृष्ण के बचपन और किशोरावस्था की सबसे महत्वपूर्ण घटनाएँ, जैसे माखन चुराना, गोपियों के साथ रासलीला, कालिया नाग दमन आदि मुख्यतः वृंदावन और उसके आस-पास के क्षेत्रों (निधिवन, सेवा कुंज आदि) में हुई थीं |
  • वृंदावन को राधा और कृष्ण की रासलीलाओं का पवित्र केंद्र माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि निधिवन में आज भी रात को राधा-कृष्ण अपनी लीलाएँ करते हैं, और इस समय वहाँ मानव प्रवेश निषिद्ध है |
  • वृंदावन में सैंकड़ों छोटे-बड़े कृष्ण और राधा के मंदिर हैं, जिनमें बांके बिहारी मंदिर, राधा वल्लभ मंदिर, राधा रमण मंदिर, रंगजी मंदिर, सेवा कुंज, निधिवन, प्रेम मंदिर आदि सबसे प्रसिद्ध हैं |
  • वृंदावन का महत्व वैदिक ग्रंथों में भी उल्लेखित मिलता है, जैसे श्रीमद्भागवत, विष्णुपुराण और रघुवंश आदि। श्री चैतन्य महाप्रभु ने 1515 ई. में वृंदावन आकर इसके पुनरुत्थान में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी |
  • यहाँ होली, जन्माष्टमी, रासलीला और वृंदावन परिक्रमा जैसे त्यौहार भव्य तरीके से मनाए जाते हैं, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु आते हैं |
  • मान्यता है कि वृंदावन का कण-कण राधा-कृष्ण की लीलाओं से पवित्र और रसमय है, और यहाँ की भूमि, वनों व कूँडों में आज भी दिव्य ऊर्जा का अनुभव होता है |

कैसे पहुँचे वृंदावन? (How to Reach Vrindavan?)

हवाई मार्ग: सबसे नजदीकी एयरपोर्ट इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (दिल्ली) है, जो वृंदावन से लगभग 160 किमी दूर है।

रेल मार्ग: सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन मथुरा जंक्शन है, जो वृंदावन से लगभग 15 किमी की दूरी पर स्थित है।

13. मथुरा – श्री कृष्ण की जन्मभूमि(Agra Paryatan sthal)

मथुरा, जो उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र में स्थित है, हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक स्थल है। मथुरा को भगवान श्री कृष्ण की जन्मभूमि के रूप में जाना जाता है। यह शहर श्री कृष्ण के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं का केंद्र रहा है।

मथुरा न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यहां की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर भी बहुत महत्वपूर्ण है। मथुरा का नाम भगवान श्री कृष्ण के जन्म के साथ जुड़ा हुआ है, जो यहाँ के काराग्रह (कारागार) में पैदा हुए थे।

  • यह माना जाता है कि उसी कारागार का स्थान आज “कटरा केशव देव” है, जहां प्रभु ने जन्म लिया था। इसके निकट ही वर्तमान श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर स्थित है |
  • यहां का मंदिर सैकड़ों वर्षों में कई बार बना और टूटा है—पहला भव्य मंदिर लगभग 2000 वर्ष पूर्व 1वीं सदी में बना था | सम्राट विक्रमादित्य के समय इसका पुनर्निर्माण हुआ, उसके बाद महमूद गजनवी (1017 ई.), सिकंदर लोदी (16वीं सदी) और औरंगजेब (17वीं सदी) जैसे आक्रांताओं ने इसे नष्ट किया | वर्तमान मंदिर का निर्माण ओरछा के राजा वीर सिंह बुंदेला ने 1618 ई. में कराया था |
  • जन्मस्थान परिसर के गर्भगृह को सबसे पवित्र स्थान माना जाता है, जहां आज भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को रात 12 बजे विशेष पूजा होती है | यहीं से “भक्ति आंदोलन” और “श्रीमद्भगवद्गीता” का भी गहरा संबंध है |
  • इस स्थल पर शाही ईदगाह मस्जिद भी है, जिससे विवाद की दीर्घ ऐतिहासिक पृष्ठभूमि जुड़ी है। अनेक अदालती फैसले, स्वामित्व के मुद्दे और सामाजिक संवाद इस जगह से जुड़े रहे हैं।
  • मथुरा यमुना नदी के किनारे स्थित अत्यंत प्राचीन नगर है, जो ‘ब्रज मंडल’ का केंद्र है और लाखों श्रद्धालुओं, पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहता है |

क्या करें और देखें (Things to Do and See)

मंदिरों का दौरा करें: मथुरा के प्रमुख मंदिरों जैसे श्री कृष्ण जन्मभूमि, गोवर्धन पर्वत, और वृंदावन के मंदिरों का दौरा करें।

कृष्ण भक्ति का अनुभव लें: यहां की कीर्तन, भजन और पूजा विधियाँ अद्भुत हैं।

पारंपरिक ब्रजस्थली संस्कृति का आनंद लें: मथुरा और वृंदावन की गलियों में घूमकर आप यहाँ की पारंपरिक कला और संस्कृति का अनुभव कर सकते हैं।

गोपियों और कृष्ण की लीलाओं का अवलोकन: गोवर्धन पर्वत पर पैदल यात्रा करें और कृष्ण की लीलाओं को महसूस करें।

तैयार हो जाएं रंगों से खेलते हुए: मथुरा में होली का उत्सव विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जहाँ आप रंगों और मस्ती के बीच कृष्ण की लीला का अनुभव कर सकते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

Agra Paryatan sthal: आगरा, जो भारतीय संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, अपने अद्भुत और प्राचीन पर्यटन स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ के प्रमुख स्थल जैसे ताज महल, आगरा किला, फतेहपुर सीकरी, और सिकंदरा न केवल भारत, बल्कि दुनिया भर के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। आगरा के इन ऐतिहासिक स्थलों में न केवल भारतीय शाही इतिहास की गाथाएँ छिपी हुई हैं, बल्कि यहां की वास्तुकला और कला की अनूठी झलक भी देखने को मिलती है।

FAQ

फतेहपुर सीकरी क्यों यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है?

Ans. फतेहपुर सीकरी यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल इसलिए है क्योंकि यह मुगल वास्तुकला का उत्कृष्ट और अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है, जिसमें इस्लामी, हिंदू और पारसी वास्तुकला शैलियों का समन्वय देखने को मिलता है। इसे मुगल सम्राट अकबर ने 1571 में बसाया था और यह उनके शासनकाल की राजधानी भी रही। फतेहपुर सीकरी में कई भव्य स्मारक हैं जैसे बुलंद दरवाजा, जामा मस्जिद, दीवान-ए-खास, पंचमहल और सूफी संत शेख सलीम चिश्ती का मकबरा, जो स्थापत्य कला और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक हैं।

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