Gujarat travel places list: गुजरात, भारत का पश्चिमी राज्य, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विविधताओं से भरपूर है। यहां रेगिस्तान की सफेदी से लेकर समुद्र के किनारे तक, मंदिरों की भव्यता से लेकर आधुनिकता के अद्भुत नमूने तक, हर पर्यटक के लिए कुछ न कुछ खास है। इसकी सीमाएं राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और पाकिस्तान से मिलती हैं। पश्चिम में यह अरब सागर से घिरा हुआ है, जिससे इसकी तटीय रेखा बहुत लंबी है (लगभग 1600 किलोमीटर)।
इस राज्य की राजधानी गांधीनगर है | गुजरात का सबसे बड़ा शहर अहमदाबाद है | इस राज्य के अन्य प्रमुख शहर वडोदरा, सूरत, राजकोट, जामनगर, भावनगर हैं | इस राज्य की जनसंख्या लगभग 6.27 करोड़ (2021 अनुमान) है | यहाँ की प्रमुख भाषा गुजराती है | यहाँ हिंदी और अंग्रेजी भी बोली जाती है |
गुजरात हड़प्पा सभ्यता (लोथल) का प्रमुख केंद्र रहा है। महात्मा गांधी का जन्मस्थान पोरबंदर, यहीं स्थित है। यह राज्य जैन, हिंदू और इस्लामी स्थापत्य कला का संगम है। गरबा और डांडिया गुजरात के प्रसिद्ध लोकनृत्य हैं।
कच्छ का रण (रण उत्सव), गिर राष्ट्रीय उद्यान (एशियाई शेरों का घर), सोमनाथ मंदिर, द्वारका, और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी जैसे स्थल यहाँ के प्रमुख आकर्षण हैं। उद्योग, कपड़ा, हीरे की कटिंग और पेट्रोकेमिकल्स के लिए प्रसिद्ध। कृषि में कपास, मूंगफली, बाजरा और सब्जियों की भरपूर पैदावार होती है।
नवरात्रि यहाँ का सबसे प्रसिद्ध त्योहार है, जिसे पूरे जोश और रंग-बिरंगे परिधानों में मनाया जाता है। मकर संक्रांति (उत्तरायण) और होली भी बड़े उत्साह से मनाई जाती है।

अगर आप गुजरात घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो इन 10 शानदार जगहों को अपनी यात्रा सूची में जरूर शामिल करें |
Tourist Places In Gujarat And 10 Must To Do Things
यातायात और कनेक्टिविटी:
Gujarat travel places list: सभी प्रमुख शहर हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों और राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़े हुए हैं।
कांडला और मुंद्रा भारत के प्रमुख बंदरगाह हैं।
गुजरात पहुँचने के परिवहन साधन और बजट रेस्टोरेंट्स तालिका
| साधन (गुजरात पहुँचने के) | विवरण | यात्रा बजट (लगभग) | रेस्टोरेंट्स (बजट में) | औसत खर्च (प्रति व्यक्ति) |
|---|---|---|---|---|
| ट्रेन | दिल्ली, मुंबई, राजस्थान, MP आदि से सीधी ट्रेनें | ₹300 – ₹1000 (स्लीपर/AC3) | Honest, Janta Khana Khazana, New Rajwadi Thali | ₹120 – ₹250 |
| बस | गुजरात राज्य परिवहन (GSRTC) और निजी बसें | ₹400 – ₹1200 | Khatti-Meethi Bhojanalay, Neelkanth Restaurant | ₹100 – ₹200 |
| फ्लाइट | दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु से सीधी उड़ानें (अहमदाबाद/सूरत) | ₹2500 – ₹7000 | Hocco Eatery, Gwalia Sweets (थाली) | ₹150 – ₹300 |
| टैक्सी / कैब | पास के राज्यों से टैक्सी सुविधा (राजस्थान, MP) | ₹3000 – ₹8000 | वही उपरोक्त | वही उपरोक्त |
| निजी वाहन | NH8 या अन्य हाईवे से गुजरात आ सकते हैं | ₹1500 – ₹4000 (ईंधन) | वही उपरोक्त | वही उपरोक्त |
1. कच्छ का रण (Great Rann of Kutch)(Gujarat travel places list)

कच्छ का रण दुनिया के सबसे बड़े नमक के रेगिस्तानों में से एक है। यहां की सफेद मिट्टी और दूर तक फैला सॉल्ट डेजर्ट एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है। हर साल यहां ‘रण उत्सव’ मनाया जाता है, जिसमें लोक संस्कृति, संगीत, नृत्य और स्थानीय हस्तशिल्प का आनंद लिया जा सकता है। रात में पूर्णिमा के समय सफेद रण की चमक देखने लायक होती है |
कच्छ का रण 23,300 किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है। यह स्थान समुद्र का एक हिस्सा है लेकिंन 1819 में आया भूकंप से यह उभर कर अलग हो गया है | सिकंदर के समय यह एक नौगम्य झील हुआ करता था | कच्छ के रण को दो हिस्सों में बता गया है | उत्तरी रण 257 किलो मीटर में ग्रेट रण के नाम से भी जाना जाता है जो उत्तरी इलाके में फैला हुआ है | पूर्वी रण जिसे लिटिल रण के नाम से भी प्रशिद्ध है ये उत्तरी रण से छोटा है | जैसा की हमने सुना होगा रण का मतलब हिंदी में रेगिस्तान से है।
गर्मियों में यहाँ का तापमान 44-50 डिग्री तक चला जाता है और सर्दियों में इसका तापमान घटकर 0 डिग्री से भी कम हो जाता है |
यहाँ हर साल 1 नवंबर से 20 फरवरी तक रन उत्सव चलता है | इस उत्सव को चांदनी रात को कच्छ रेगिस्तान में आयोजित किया जाता है | यहाँ पर देश तथा विदेश से सैलानी आते हैं | यहां से आप पाकिस्तान के सिंध प्रांत का नजारा भी आसानी से देख सकते हैं, जो कच्छ से बस थोड़ी ही दूरी पर स्थित है।
- रण ऑफ कच्छ दुनिया का सबसे बड़ा सफेद रेगिस्तान है, जो बर्फ से नहीं बल्कि नमक से बना हुआ है। यह रेगिस्तान 30 हजार वर्ग किमी में फैला हुआ है।
- कच्छ सी -स्विमिंग ड्रोमेडरीज या कूबड़ वाले ऊंटों का घर भी है, जिसका नाम खारोई है ।
- कच्छ में लोथल और धोलावीरा हड़प्पा संस्कृति से जुड़े ऐतिहासिक स्थल है, जो पृथ्वी पर प्राचीन सभ्यता के उदहारण हैं। लोथल को दुनिया के सबे पुराने डॉकयार्ड के रूप में जानते है, जबकि धोलावीरा भारत के सबसे पुराने टाउन प्लानिंग का अवशेष है।
- कच्छ (Kutch) का नाम इसके मानचित्र के कछुए के आकार पर आधारित है। ‘रण’ का अर्थ है रेगिस्तान, जो गुजराती और सिंधी भाषा में नमक की सतह वाले निर्जन मैदान को कहते हैं |
- प्राचीन काल में यह अरब सागर का एक उथला भाग था, जिसे धीरे-धीरे भूवैज्ञानिक बदलावों ने समुद्र से अलग कर दिया, जिससे यह एक बड़े झील में बदल गया, जो सिकंदर महान के समय नौगम्य थी। बाद में यह क्षेत्र दलदली नमक के मैदान में बदल गया |
- मानसून के दौरान यहाँ पानी भरा रहता है, जिससे यह क्षेत्र जलमग्न हो जाता है, और फिर शुष्क मौसम में नमक की सफेद सतह उभर आती है, जिससे इसे ‘व्हाइट डेजर्ट’ भी कहते है। कच्छ का रण कई तरह के जीव-जंतुओं जैसे भारतीय जंगली गधे और फ्लेमिंगो के लिए रहने की जगह है।
- कच्छ क्षेत्र अपनी कला-कृतियों जैसे कच्छी कढ़ाई, टाई-डाई, चमड़ा उद्योग, मिट्टी के बर्तनों, रागन पेंटिंग आदि के लिए मशहूर है।
- कच्छ का रण भुज से लगभग 85 किलोमीटर दूर है। भुज यहाँ का निकटतम हवाई और रेलवे स्टेशन है। अहमदाबाद से सड़क मार्ग से कच्छ पहुँचना लगभग 7 घंटे का सफर है |
- बहुत कम लोगों को ये पता है कि निरोना गांव के पास सुम्ब्रासर नाम की छोटी सी जगह एक ब्रिटिश महिला के कारण काफी पॉपुलर हो गई है। 30 साल पहले जूडी ट्रेडर नाम की ये ब्रिटिश महिला रन ऑफ कच्छ आई थी और उसे इस जगह से प्यार हो गया। तब से लेकर आज तक जुडी यहां की स्थानीय कला को बढ़ावा देने की पहल कर कला रक्षा ट्रस्ट चलाती है।
Top 10 tourist places in gujarat: गुजरात के 10 बेस्ट पर्यटन स्थल,
2. गिर नेशनल पार्क (Gir National Park)

गिर नेशनल पार्क एशियाई शेरों का एकमात्र प्राकृतिक आवास है। यहां जंगल सफारी के दौरान शेर, तेंदुआ, हिरण और कई प्रकार के पक्षी देखे जा सकते हैं। प्रकृति प्रेमियों और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स के लिए यह जगह स्वर्ग के समान है | यहाँ की सफारी और वन्यजीवों की विविधता पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।
- गिर नेशनल पार्क की स्थापना 1965 में हुई थी और 259 वर्ग किलोमीटर के कोर क्षेत्र को 1975 में राष्ट्रीय उद्यान के रूप में नाम दिया गया था।
- नतीजतन, भारत में केवल एक दर्जन एशियाई शेर ही रह गए, वे सभी गिर वन में थे, क्योंकि यह निजी शिकार क्षेत्र था।
- गिर पारिस्थितिकी तंत्र, अपने विविध वनस्पतियों और जीवों के साथ, सरकारी वन विभाग, वन्यजीव कार्यकर्ताओं और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के प्रयासों की बदौलत संरक्षित है। इसे अब गुजरात के पारिस्थितिक संसाधनों का मुकुट रत्न मानते है।
- गिर राष्ट्रीय उद्यान हजारों अन्य मायावी जंगली जानवरों और मुश्किल से मिलने वाले पक्षियों का घर है। कुछ उदाहरण दुर्लभ एशियाई जंगली गधे, लकड़बग्घा, गिर लोमड़ी, बौना कठफोड़वा, भूरी मछली उल्लू, काला हिरण आदि हैं।
- गिर राष्ट्रीय उद्यान भारत के सबसे पुराने राष्ट्रीय उद्यानों में गिना जाता है। भारत के गुजरात राज्य में स्थित है।
- गिर राष्ट्रीय उद्यान भी सबसे महत्वपूर्ण जैविक अध्ययन स्थलों में गिना जाता है, जो वैज्ञानिक अनुसंधान की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
- इस राष्ट्रीय उद्यान में सरीसृप, पक्षी, कीड़े और जानवर भी हैं।
- गिर कुछ शानदार वनस्पतियों से भी संपन्न है जो वन्यजीवों की तुलना में समृद्ध और विविध दोनों हैं।
- शुष्क-पर्णपाती लकड़ियों के अस्तित्व के कारण, गिर राष्ट्रीय उद्यान में शुष्क और कम-नम स्थितियों की उच्च सांद्रता है।
- एशियाई और अफ्रीकी शेर दोनों एक ही प्रजाति की उप-प्रजाति हैं।
- एशियाई शेर लगभग 1,00,000 साल पहले अफ्रीकी शेरों से अलग हो गए थे।
- यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि शेर केवल सामाजिक बिल्लियाँ हैं जो गर्व में रहती हैं।
- एशियाई शेर कभी मध्य पूर्व से भारत तक इस क्षेत्र में घूमते थे। इन शानदार जानवरों का केवल एक छोटा प्रतिशत आज जंगलो में रहता है।
- सासन गिर एशियाई शेरों सहित लगभग 2,375 विभिन्न वन्यजीव प्रजातियों का घर है।
- गिर वन्यजीव अभयारण्य भारत में महत्वपूर्ण झीलों में से एक के पास स्थित है जिसका नाम नालसरोवर है।
3. सापुतारा (Saputara)(Gujarat travel places list)
गुजरात का एकमात्र हिल स्टेशन सापुतारा, पश्चिमी घाट की खूबसूरती और ठंडी फिजाओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां झील, गार्डन, रोपवे और ट्रेकिंग के कई विकल्प हैं। मानसून के समय यहां की हरियाली देखते ही बनती है |
यह गुजरात के डांग जिले में स्थित है | सापुतारा गुजरात में घूमने वाली सबसे अच्छी जगहों में से एक है | यह हिल स्टेशन समुद्र तल से 875 मीटर की ऊचाई पर है |
सपुतारा का शाब्दिक अर्थ है सांपों का निवास स्थान, इसीलिए इस क्षेत्र के आदिवासी लोग सांपों की पूजा करते हैं। यहाँ के स्थानीय लोग आदिवासी हैं यहाँ के आदिवासी लोग सर्कार के आदेश पर इस जगह को खाली करके नवानगर चले गए | वे एक सामान्य व्यवहार में डांगी भाषा, कुकना बोली का उपयोग करते हैं।
यहाँ के लोगो का मुख्य व्यवसाय खेती, किसानी और पशुओ को चराना है | इसके अलावा, जंगल के लोग अपनी उपज को जंगल से इकट्ठा करने के साथ-साथ बीज, खखरा के पत्ते, लकड़ी के पत्ते, सागौन के बीज, करंज के बीज भी बेचते हैं।
- कहा जाता है कि भगवान राम ने अपने 14 वर्ष के वनवास के पहले 11 साल सापुतारा के जंगलों में बिताए थे, इसलिए यह स्थान धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है |
- यहाँ के स्थानीय लोग मुख्यतः डांगी भाषा बोलने वाले आदिवासी हैं। इन जनजाति समुदायों में भील, खुम्बी, वर्ली और डांगी प्रमुख हैं। वे खेती, पशुपालन के साथ-साथ जंगल से लकड़ी, बीज, और अन्य उत्पाद इकट्ठा कर जीविकोपार्जन करते हैं। इनके वाद्य यंत्र बांस से बने होते हैं और लोक नृत्य तथा टैटू कला इन्हें अनोखा सांस्कृतिक पहचान देते हैं |
- सापुतारा में खूबसूरत झरने (जैसे गीरा जलप्रपात), सर्पगंगा झील, स्टेप गार्डन, सूर्योदय और सूर्यास्त बिंदु, वाघई बॉटनिकल पार्क जैसे पर्यटक स्थल भी हैं जो यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता को दर्शाते हैं। यहाँ पैरासेलिंग, गो-कार्टिंग, ज़ोरबिंग जैसे एडवेंचर स्पोर्ट्स भी काफी लोकप्रिय हैं |
- सापुतारा में गर्मी के दिनों में तापमान लगभग 30 डिग्री सेल्सियस तक रहता है, इसलिए यह गर्मी में भी एक स्वर्ग समान लगता है। यहाँ की ठंडी और ताजी हवा पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है |
- यहाँ मानसून महोत्सव तथा अन्य पारंपरिक त्योहार जैसे होली और नागपंचमी बड़े उत्साह से मनाए जाते हैं, जो आदिवासी संस्कृति का उत्सव होते हैं |
- 1960 के दशक में गुजरात सरकार ने इसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया। यहाँ ब्रिटिश शासन का कोई औपनिवेशिक प्रभाव नहीं है, इसलिए यह स्वदेशी संस्कृति और प्राकृतिक वातावरण का सुंदर मिश्रण प्रस्तुत करता है।
- सापुतारा टाइगर रिजर्व (नेशनल पार्क), आर्टिस्ट विलेज, नागेश्वर महादेव मंदिर, रोज़ गार्डन, और कई झरने यहाँ के महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थल हैं |
- सापुतारा का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन वाघई है जो लगभग 50 किलोमीटर दूर है। वायुमार्ग से निकटतम हवाई अड्डा बड़ोदरा है, जो लगभग 280 किमी दूर है। सूरत से सड़क मार्ग द्वारा भी यह जुड़ा हुआ है (करीब 164 किमी)।
4. स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (Statue of Unity)

यह दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है, जो सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित है। 182 मीटर ऊंची यह प्रतिमा नर्मदा नदी के किनारे स्थित है। यहां म्यूजियम, व्यूइंग गैलरी और सरदार सरोवर डेम का नजारा भी आकर्षण का केंद्र है | यह नर्मदा नदी के किनारे केवडिया में स्थित है और भारतीय एकता का प्रतीक है।
- गुजरात के वडोदरा के पास नर्मदा ज़िले में स्थित सरदार सरोवर बांध से 3.5 किमी. नीचे की तरफ, राजपिपाला के निकट साधुबेट नामक नदी द्वीप पर 182 मीटर ऊँची सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा लगी है।
- मात्र 33 महीनों में तैयार हुई यह प्रतिमा, चीन के केंद्रीय हेनान प्रांत में स्थित स्प्रिंग टेंपल की 11 सालों में निर्मित 153 मीटर ऊँची प्रतिमा (अब तक विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा का दर्जा प्राप्त था) से भी ऊँची है और न्यूयॉर्क की स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी (93 मी.) की ऊँचाई से करीब दोगुनी है।
- प्रतिमा के निर्माण के लिये भारत भर के किसानों से ‘लोहा कैंपेन’ के तहत, आवश्यक लोहे को इकट्ठा किया गया था।
- इस मूर्ति का डिज़ाइन पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित मूर्तिकार ‘राम वनजी सुतर’ ने तैयार किया था।
- प्रतिमा का निर्माण भारत की लार्सन एवं टूब्रो कंपनी तथा राज्य संचालित सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड द्वारा किया गया।
- इसे बनवाने के लिए गुजरात सरकार ने सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट (SVPRET) का गठन किया था।
- इस स्टैच्यू में लिफ्ट की व्यवस्था की गई है जिससे पर्यटक प्रतिमा के हृदय स्थल तक जा सकेंगे। यहाँ एक गैलरी बनी हुई है जहाँ एक साथ 200 पर्यटक खड़े होकर सतपुड़ा और विंध्यांचल पहाड़ियों से घिरे नर्मदा नदी, सरदार सरोवर बांध और वहाँ स्थित फूलों की घाटी का नजारा भी देख सकेंगे।
5. धोलावीरा और लोथल (Dholavira & Lothal)(Gujarat travel places list)
ये दोनों स्थल सिंधु घाटी सभ्यता के प्राचीन शहर हैं। धोलावीरा और लोथल में खुदाई के दौरान मिली ऐतिहासिक वस्तुएं और संरचनाएं भारत के गौरवशाली अतीत की झलक दिखाती हैं। इतिहास प्रेमियों के लिए ये जगहें बेहद खास हैं |
धोलावीरा पश्चिम भारत के गुजरात राज्य में कुटच जिले के भचाऊ तालुका के खादिरबेट गाँव की जगह पर बसा हुआ है। यह गाँव राधनपुर से 165 किलो मीटर दूर है। स्थानिक लोग इसे कोटडा टिम्बा भी कहते है, क्योकि इस जगह पर प्राचीन इंडस घाटी सभ्यता और हड़प्पा शहर के खंडहर पड़े हुए है।
लोथल कई उल्लेखनीय विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध है:
- डॉकयार्ड: डॉकयार्ड का सबसे बड़ा हिस्सा लोथल में है जिसे दुनिया भर में सबसे पुराना माना जाता है। इसने अन्य राज्यों और यहां तक कि मेसोपोटामिया के साथ समुद्री व्यापार को बढ़ावा दिया।
- नगर नियोजन: शहर ग्रिड पैटर्न पर आधारित था जिसमें सड़कों और रहने वाले क्वार्टरों को उल्लेखनीय रूप से डिजाइन किया गया है।
- जल निकासी प्रणाली: भूमिगत नालियों, सोख्ता गड्ढों के उपयोग के साथ उन्नत जल निकासी प्रणाली, स्वच्छता पर काफी जोर देती है।
- अनुष्ठानिक संरचनाएं: अग्नि वेदिकाओं के साक्ष्य अनुष्ठानिक गतिविधि और धार्मिक अभ्यास की ओर इशारा करते हैं।
धोलावीरा की कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- जल संरक्षण प्रणाली: विशाल टैंक और नालियों का नेटवर्क जल प्रबंधन में उन्नत योजना की गवाही देते हैं जो इस शुष्क जलवायु में आवश्यक होगी।
- नगर नियोजन: इसे तीन व्यापक क्षेत्रों में विभाजित किया गया था – गढ़, मध्य नगर और निचला नगर, जिनमें से प्रत्येक की अपनी अलग सुरक्षा व्यवस्था थी।
- साइनबोर्ड: सिंधु घाटी स्थलों पर विशाल पत्थर के शिलालेख हैं जो संभवतः साइनबोर्ड हो सकते हैं।
- टेराकोटा पाइप: टेराकोटा पाइप के माध्यम से जल निकासी उन्नत तकनीकी उपयोग का संकेत देती है।
- कलाकृतियाँ: मिट्टी के बर्तन, मुहरें और औजार जैसी विभिन्न कलाकृतियाँ जो उनके जीवन और व्यापारिक गतिविधियों के बारे में बताती हैं।
- धोलावीरा
- यह कच्छ जिले के भचाऊ तालुका में खादिरबेट द्वीप पर स्थित है और सिन्धु घाटी सभ्यता का भारत में सबसे बड़ा नगर माना जाता है। यह लगभग 5000 वर्ष पुराना है |
- धोलावीरा में सिंधु घाटी सभ्यता की परिष्कृत जल संचयन व्यवस्था मिलती है, जिसे “जल दुर्गा” यानी जल किला कहते है। यहाँ वर्षा जल संग्रहण की अद्भुत प्रणाली विकसित थी |
- यह नगर लगभग 47 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ था जिसमें अलग-अलग भागो में रहने की जगह, जलाशय, और बाज़ार थे, जो शहर के सुव्यवस्थित और योजनाबद्ध होने का प्रमाण हैं |
- धोलावीरा में प्राचीनतम ज्ञात साइनबोर्ड (शिलालेख) मिला है, जिसे शायद दुनिया का सबसे पुराना साइन बोर्ड मानते है। इसके दस बड़े पत्थर पर बने शिलालेख अब भी पढ़े नहीं गए हैं |
- इस स्थल को 2021 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में घोषित किया गया, जो भारत का 40वां विश्व धरोहर स्थल है |
- लोथल
- लोथल भी गुजरात में स्थित एक प्रमुख सिन्धु घाटी सभ्यता स्थल है, जिसे विश्व का सबसे प्रारंभिक डॉकयार्ड मानते है। यह प्राचीन समय में व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र था |
- लोथल का डॉकयार्ड सिंधु घाटी के समुद्री व्यापार के लिए उपयोग किया जाता है | इसे आधुनिक अभियांत्रिकी का उदाहरण मानते है, जिसने जहाज-निर्माण और जल यातायात में मदद की थी |
- लोथल में औद्योगिक गतिविधियाँ, व्यापार, शिल्प कला, और नगर नियोजन का प्रगतिशील स्वरूप दिखता है, जिससे यह स्थल पुरातत्व एवं इतिहास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- यह स्थान अहमदाबाद के नजदीक है, इसलिए धोलावीरा के मुकाबले पर्यटन और अध्ययन के लिए अधिक सुलभ है |
6. मांडवी बीच और विजय विलास पैलेस (Mandvi Beach & Vijay Vilas Palace)

मांडवी का समुद्र तट बहुत ही सुन्दर और साफ़ है | जो पर्यटकों को आकर्षित करती है | यहां का विजय विलास पैलेस राजसी वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण है। यहाँ बीच पर ऊंट की सवारी और वॉटर स्पोर्ट्स का आनंद भी लिया जा सकता है |
मांडवी बीच गुजरात के पश्चमी भाग ‘कच्छ’ जिले में स्थित है | यह गुजरात के प्रशिद्ध बीचो में से एक है | यहाँ सालो साल सैलानी घूमने के लिए आते हैं |
भारत के गुजरात राज्य के कच्छ जिले में स्थित विजय विलास पैलेस एक भव्य और ऐतिहासिक महल है। यह स्थान जंगल के बीचो-बीच जो अपनी अनूठी सुंदरता से सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करती है | कच्छ जिले के मांडवी बिच के नजदीक जंगल में स्थित है। महल के ऊपर पर्यटकों को मांडवी बीच आसानी से दिखाई देता है। कच्छ की शाही परंपरा का प्रतिक कहलाने वाला ये महल भारतीय स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करता है |
महाराव विजयजी महाराज के शासनकाल 1929 में विजय विलास पैलेस बना था। इस महल को ग्रीष्मकालीन आवास के रूप में डिजाइन कराया गया था। उस समय के शाशक महाराव विजयजी के नाम पर इस महल का नाम पड़ा |
- मांडवी बीच
- मांडवी बीच अरबी सागर के किनारे बसा है और कच्छ जिले के दक्षिणी क्षेत्र में फैला हुआ है। यहाँ की रेत सुनहरी-भूरी रंग की और साफ होती है |
- यह बीच खासतौर पर यहाँ की ठंडी और ताजी समुद्री हवा, खूबसूरत सूर्यास्त और पवनचक्कियों के चलते पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है। शाम को यहाँ खाने-पीने के स्टॉल लगते हैं, जो स्थानीय व्यंजनों का आनंद देते हैं |
- मांडवी बीच पर पर्यटक ऊँट की सवारी, घुड़सवारी, पतंगबाजी एवं जलक्रीड़ा (पैरासेलिंग, स्कीइंग, सर्फिंग) जैसी गतिविधियाँ करते हैं, जो इसे एक एडवेंचर और मनोरंजन स्थल भी बनाती हैं |
- मांडवी शहर एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक बंदरगाह था और यहाँ का विजय विलास पैलेस बीच के निकट स्थित है, जो कच्छ के महाराजाओ का ग्रीष्मकालीन रहने का स्थान था । पैलेस में रिसॉर्ट की सुविधाएँ भी हैं |
- आसपास मजार-ए-नुरानी दरगाह, जैन मंदिर, रुकमावती ब्रिज और शिपयार्ड देखने योग्य स्थल हैं, जो मांडवी के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं |
- मांडवी बीच का सफर भुज से लगभग 60 किलोमीटर दूर है, जो इसे भुज से एक दिन की यात्रा के लिए एक लोकप्रिय विकल्प बनाता है |
- विजय विलास पैलेस
- यह महल लगभग 6 से 7 वर्षों में बनकर तैयार हुआ और इसका डिजाइन राजस्थानी स्थापत्य कला से लिया गया है। इसमें संगमरमर और स्थानीय पत्थरों का प्रयोग हुआ है |
- विजय विलास पैलेस मांडवी बीच के बिल्कुल समीप समुद्र के किनारे और घने जंगलों के बीच बसा हुआ है । इसका समीर दर्शन और ठंडी समुद्री हवा इसे गर्मियों में ठंडक पहुंचाता है |
- यह महल कच्छ के महाराजाओं का ग्रीष्मकालीन रहने का स्थान था और आज भी इसे राज्य परिवार उपयोग करता है। महल के अंदर शिकार किए गए जानवरों के संरक्षित अवशेष देखे जा सकते हैं, जिसमें उस समय की शाही जीवनशैली झलकती है |
- विजय विलास पैलेस कई लोकप्रिय बॉलीवुड फिल्मों का लोकेशन रहा है, जैसे ‘हम दिल दे चुके सनम’, ‘लगान’, ‘कमांडो’ आदि। इसकी भव्य कला और मनोहर दृश्य फिल्म निर्माताओं को आकर्षित करते हैं।
- महल के अंदर पुराने फर्नीचर, नक्काशीदार बालकनी, गुंबद, और खुली जगहें हैं जहाँ से समुद्र व आसपास का सुंदर दृश्य दिखता है। पैलेस का एक भाग रिसॉर्ट में बदल दिया गया है, जिससे पर्यटक यहाँ ठहर भी सकते हैं।
- महल के आंगन में महाराज द्वारा शेर पर गोली चलाने का इतिहास जुड़ा हुआ है और शेर की खाल अभी भी महल में प्रदर्शित है, जो उस समय की घटनाओं का प्रमाण है |
7. साबरमती आश्रम, अहमदाबाद (Sabarmati Ashram, Ahmedabad)
यह स्थान महात्मा गांधी का यह ऐतिहासिक आश्रम स्वतंत्रता संग्राम का साक्षी रहा है। यहां गांधी जी के जीवन से जुड़ी वस्तुएं और फोटो गैलरी देखी जा सकती हैं। यहाँ का साबरमती रिवरफ्रंट भी घूमने के लिए एक सुंदर स्थान है |
साबरमती आश्रम भारत के गुजरात राज्य अहमदाबाद जिले के प्रशासनिक केंद्र अहमदाबाद के समीप साबरमती नदी के किनारे स्थित है | यह स्थान 1917 से साबरमती आश्रम नाम से जाना जाने लगा | आश्रम वृछो की शीतल छाया में है | यहाँ की सादगी और शांति लोगो को आश्चर्य चकित कर देती है |
साबरमती आश्रम गाँधी जी का घर भी कहलाता है | यह आश्रम आजादी की लड़ाईयों का साक्छी रहा है | इसी आश्रम से महात्मा गाँधी ने सत्याग्रह आंदोलन की सुरुवात की थी |
- सबसे पहले यह आश्रम 1915 में अहमदाबाद के कोचरब क्षेत्र में बना, लेकिन 1917 में इसे साबरमती नदी के किनारे वर्तमान स्थल पर स्थानांतरित किया गया |
- गांधीजी ने आश्रम को आत्मनिर्भरता, सादगी, सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों के अनुसार स्वयं डिज़ाइन किया था। आश्रम में कृषि, पशुपालन, और खादी उत्पादन जैसे ग्रामोद्योग को बढ़ावा दिया गया |
- साबरमती आश्रम से ही 1930 में महात्मा गांधी ने प्रसिद्ध दांडी मार्च (नमक सत्याग्रह) की शुरुआत की, जिसने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा दी |
- आश्रम ने अस्पृश्यता उन्मूलन, सामाजिक समानता, धार्मिक एकता, और आत्मनिर्भर ग्राम समुदाय के निर्माण के लिए कार्य किया। यह गांधीजी के सामाजिक एवं राजनीतिक प्रयोगों का केंद्र था |
- आश्रम का वातावरण शांतिपूर्ण, वृक्षों की छांव वाला तथा नदी के किनारे बसा हुआ है। इसके एक ओर सेंट्रल जेल और दूसरी ओर दुधेश्वर श्मशान है, जो गांधीजी की सोच और सामाजिक प्रथाओं के बारे में बताता है |
- आज यह आश्रम गांधीजी के जीवन, कार्यों और उनके आदर्शों को समर्पित एक संग्रहालय के रूप में कार्यरत है, जो उन्हें याद करने और समझने का महत्वपूर्ण स्थान है।
- हाल ही में 2024 में प्रधानमंत्री ने साबरमती आश्रम पुनर्विकास परियोजना की शुरुआत की, जिसके तहत इसे संरक्षित और पुनर्निर्मित किया जाएगा, जिसमें 1,200 करोड़ रुपये का निवेश होगा।
- यहाँ आश्रमवासियों ने सादगी, सहकारिता और शारीरिक श्रम को प्राथमिकता दी, जहां चर्खा चलाना, खेती करना और स्वयं की जरूरतें पूरी करना मुख्य था।
8. अक्षरधाम मंदिर, गांधीनगर (Akshardham Temple, Gandhinagar)(Gujarat travel places list)
भगवान स्वामीनारायण को समर्पित यह मंदिर अपनी भव्यता और अद्भुत वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। गुलाबी बलुआ पत्थर से बना यह मंदिर श्रद्धालुओं और पर्यटकों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र है |
अक्षर धाम मंदिर भारत में दो स्थानों में बना हुआ है जो दिल्ली और गुजरात में है | अक्षरधाम मंदिर को भगवान् श्री स्वामीनारायण की याद में बनवाया गया है | मंदिर को स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर के नाम से भी जाना जाता है |
‘अक्षरधाम‘ का अर्थ है ईश्वर का दिव्य निवास | यह स्थान धार्मिक, सांस्कृतिक, अध्यात्म, भक्ति और हिन्दुओ के पूजा घर के लिए जाना जाता है |
- अक्षरधाम मंदिर (दिल्ली) – इस मन्दिर का उद्घाटन 6 नवम्बर, सन् 2005 में हुआ और 8 नवम्बर, 2005 को इसे आम जनता के लिए खोल दिया गया |
- अक्षरधाम मंदिर (गांधीनगर, गुजरात) – इस मंदिर का उद्घाटन सन् 1992 ई. में हुआ |
- यह मंदिर ‘स्वामीनारायण संप्रदाय’ द्वारा बनवाया गया था।
- मंदिर 32 मीटर ऊंचा, 73 मीटर लंबा और 39 मीटर चौड़ा है।
- भगवान स्वामीनारायण को समर्पित इस मंदिर का निर्माण 6000 गुलाबी बलुआ पत्थरों से हुआ है। स्वामीनारायण की मूर्ति इस मंदिर की सैद्धांतिक मूर्ति है।
- इस प्रसिद्ध मंदिर के बनाने में कहीं भी इस्पात या सीमेंट का इस्तेमाल नहीं हुआ है।
- अक्षरधाम मंदिर के प्रथम तल में स्थित ‘हरी मंडपम’ मंदिर का सबसे पवित्र स्थल है। भगवान स्वामीनारायण और उनके अनुयायियों की मूर्तियां यहां स्थापित हैं।
- मंदिर के बगीचे और फव्वारे बेहद आकर्षक हैं।
- गांधीनगर आने वाले यात्री स्मारक और मंदिर की अनूठी सुंदरता को देखने आते हैं।
- अक्षरधाम की टैगलाइन है- “यह वह स्थान है, जहाँ कला चिरयुवा है, संस्कृति असीमित है और मूल्य कालातीत हैं।”
- अक्षरधाम मंदिर गांधीनगर में स्थित है और यह स्वामीनारायण संप्रदाय द्वारा 1992 में स्थापित एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यह मंदिर लगभग 23 एकड़ में फैला है और अहमदाबाद हवाई अड्डे से लगभग 25 किलोमीटर तथा गांधीनगर रेलवे स्टेशन से 5 किलोमीटर दूर है |
- मंदिर की वास्तुकला अत्यंत भव्य और पारंपरिक भारतीय शैली की है, जिसमें उपयोग होने वाला लगभग 6000 टन गुलाबी बलुआ पत्थर है, जबकि इसमें सीमेंट और इस्पात का एक भी टुकड़ा इस्तेमाल नहीं किया गया है |
- अक्षरधाम मंदिर का मुख्य आकर्षण गर्भगृह में स्थापित स्वामीनारायण भगवान की लगभग 7 फीट ऊंची मूर्ति है, जिस पर सोने की परत चढ़ी हुई है। इसके साथ ही यहाँ उनके प्रमुख अनुयायियों की मूर्तियाँ भी हैं |
- मंदिर में कुल 234 नक्काशीदार खंभे, 9 विशाल गुंबद, 20 शिखर, और लगभग 20,000 मूर्तियाँ स्थापित हैं, जिनमें ऋषि, संत, देवता और पौराणिक पात्र शामिल हैं, जो हिंदू धर्म, संस्कृति और दर्शन की समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं |
- मंदिर परिसर में “भारत उपवन” नामक खूबसूरत हरे-भरे बाग लगाये गए हैं, जिनमें भारत के महान युगीनायकों और महाकाव्यों की कांस्य मूर्तियाँ रखी गई हैं। ये प्राकृतिक वातावरण भक्तों व पर्यटकों के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव का एहसास प्रदान करते हैं |
- यहाँ आधुनिक तकनीक के साथ भव्य संगीत-प्रकाश शो का आयोजन होता है, जिसमें राधा-कृष्ण की कथाएँ, महाभारत, रामायण के प्रेरक प्रसंग प्रस्तुत किये जाते हैं, जो दर्शकों को असाधारण आध्यात्मिक आनंद देते हैं |
- अक्षरधाम मंदिर का निर्माण करीब 13 वर्षों में लगभग 600 कारीगरों द्वारा स्वामी महाराज के निर्देशन में किया गया, जो भारतीय वास्तुकला एवं शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण है |
- मंदिर परिसर में “अक्षरधाम सेंटर फॉर एप्लाइड रिसर्च इन सोशल हार्मोनी (AARSH)” भी स्थित है, जो सामाजिक अध्ययन तथा सामजिक सद्भाव के लिए एक प्रमुख संस्था है |
- यह मंदिर स्वामीनारायण संप्रदाय के लिए एक आध्यात्मिक केंद्र होने के साथ-साथ गुजरात व पूरे भारत के पर्यटकों के बीच भी अत्यंत लोकप्रिय है |
9. चंपानेर-पावागढ़ (Champaner-Pavagadh)(Gujarat travel places list)
युनेस्को विश्व धरोहर स्थल चंपानेर-पावागढ़ पुरातत्व पार्क में ऐतिहासिक किले, मंदिर और मस्जिदें हैं। पावागढ़ की पहाड़ी पर स्थित कालिका माता मंदिर भी श्रद्धालुओं के लिए खास महत्व रखता है |
चम्पानेर-पावागढ़ गुजरात के पंचमहल जिले में स्थित है | चम्पानेर-पावागढ़ पार्क को गुजरात के सुल्तान महमूद बेगड़ा द्वारा बनवाया गया था | वर्ष 2004 में इसे युनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल किया जा चुका है | इसमें 36 विश्व धरोहर स्थल शामिल है |
इसकी सबसे दिलचस्प बात पावागढ़ का ऐतिहासिक पहाड़ी हिमयलय के हिस्से के रूप में जाना जाता है | माना जाता है कि यह स्थान रामायण महाकाव्य से सम्बंधित हैं। इसे 8 वी सताब्दी में चावड़ा राजवंश के एक प्रमुख शासक राजा वनराज चावड़ा ने बनवाया और इस स्थान का नाम अपने दोस्त चंपा के नाम पे रख दिए |
- चंपानेर को विश्व विरासत स्थल की सूची 2004 में यूनेस्को द्वारा सम्लित किया गया |
- पावागढ़ पुरातत्व उद्यान में 11 विभिन्न प्रकार की इमारते विद्यमान हैं, जिनमे कई मस्जिद, मंदिर, अनाज के भंडार, कब्र, कुएं, दीवारें और बरामदे आदि आते हैं।
- समुद्र तल से इस पहाड़ी की उचाई लगभग 800 मीटर है |
- पावागढ़ की पहाड़ियां गुजरात राज्य के सोलंकी राजाओं और फिर खिची चौहानों के शासनकाल के दौरान हिन्दुओं के लिए मशहूर किला था।
- ये स्मारक मौलिया पठार नामक एक पहाड़ पर बसा हुआ है।
- मौलिया पठार में पावगढ़ पहाड़ी पर बना सबसे पुराना मंदिर जो लकुलीश (Lakulish) को समर्पित है, यह 10वी-11वीं शताब्दी में बना था | अन्य मंदिर लगभग 13वीं से 15वीं शताब्दी के बीच बने थे, जो हिन्दू और जैन संप्रदायों के हैं।
- सभी मंदिरों को नागर शैली में बनाया गया था, जिनमें गर्भगृह, मंडप और प्रवेश द्वार आदि शामिल है।
- यहाँ बने ऐतिहासिक स्मारकों में किले की एक श्रृंखला सी बनी हुई है।
- इन किलों को बलुआ पत्थर से बनवाया गया था, जिसमें बुर्ज और खूबसूरत बालकनियां बनी हुई है।
- सुल्तान बेगाडा द्वारा निर्मित पूर्वी गेट के पास जामी मस्जिद (जामा मस्जिद) बड़ौदा हेरिटेज ट्रस्ट द्वारा सूचीबद्ध 114 स्मारकों में सबसे उल्लेखनीय है। यह शाही बाड़े से 50 मीटर पूर्व में बसा हुआ है।
- जामा मस्जिद हिंदू और मुस्लिम वास्तुकला का एक शानदार मिश्रण है और इसे सुरुचिपूर्ण से निर्मित पश्चिमी भारत की सबसे बेहतरीन मस्जिदों में गिना जाता है।
- वड़ोदरा से चंपानेर की दूरी मात्र 45 कि.मी. है, जहाँ बस और दूसरे वाहनों द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।
गुजरात में देखने लायक स्थान | – भारत का मानचित्र (मैप)
10. द्वारकाधीश मंदिर, द्वारका (Dwarkadhish Temple, Dwarka)
Gujarat travel places list: भगवान कृष्ण को समर्पित यह मंदिर हिंदुओं के चार धामों में से एक है। अरब सागर के किनारे स्थित यह मंदिर अपनी भव्यता और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यहां की शाम की आरती और समुद्र तट का नजारा मन मोह लेता है |
इस मंदिर को जगत मंदिर के नाम से भी जाना जाता है | द्वारकाधीश मंदिर में भगवान् श्री कृष्ण की पूजा की जाती है | भारत के सबसे प्रमुख और भव्य मंदिर में से एक है | जिसे रामेश्वरम, बद्रीनाथ और पुरी के बाद हिंदुओं के बीच चार धाम पवित्र तीर्थ स्थलों के लिए जाना जाता है | यहाँ साल में लाखो श्रद्धालु दर्शन के लिए आते है |
मन जाता है यह मंदिर लगभग 2200 साल पुरांना है | इसका निर्माण वज्रनाभ द्वारा किया गया था। इस भव्य मंदिर में भगवान श्री कृष्ण के साथ साथ सुभद्रा, बलराम और रेवती, वासुदेव, रुक्मिणी और कई अन्य देवी-देवताओं को समर्पित मंदिर भी हैं।
- मंदिर के अंदर एक स्मारक है, जो भगवान कृष्ण की यात्रा के लिए समर्पित है।
- 8वीं शताब्दी के सबसे बड़े हिंदू धर्मशास्त्री और दार्शनिक आदि शंकराचार्य ने श्री द्वारकाधीश मंदिर का दौरा किया था।
- भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के निष्कर्ष यह बताते हैं कि यह मंदिर लगभग 2,200 – 2,500 साल पुराना है।
- मंदिर की लंबाई का क्षेत्र 21 मीटर है (पूर्व से पश्चिम तक) और मंदिर की चौड़ाई 23 मीटर है (उत्तर से दक्षिण तक), जिसके साथ ही मंदिर की सबसे ऊंची चोटी 51.8 मीटर ऊंची है।
- मंदिर के सर्वश्रेष्ठ चोटी पर एक ध्वज लहराता है, जो सूर्य और चंद्रमा के प्रतीक को दर्शाता है। इसके साथ ही लोगो का यह मानना है कि भगवान कृष्ण तब तक रहेंगे जब तक सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी पर मौजूद रहेंगे।
- मंदिर के ध्वज को दिन में 5 बार बदल दिया जाता है, लेकिन प्रतीक में कोई बदलाव नहीं होता है।
- यह मंदिर 72 स्तंभों द्वारा समर्थित है तथा 5 मंजिला इमारत का मुख्य मंदिर है।
- इस मंदिर को जगत मंदिर या निज मंदिर के रूप में भी जाना जाता है।
- यह मंदिर चूना पत्थर से बना हुआ है जो अभी भी प्राचीन स्थिति में है और जो भारत की प्राचीनतम शैली को दर्शाता है।
- श्री द्वारकाधीश मंदिर में दो प्रवेश द्वार हैं, जो मुख्य द्वार है वह उत्तर दिशा की ओर है जिसे “मोक्ष द्वार” कहा जाता है। इसका पहला द्वार एक मुख्य बाजार की ओर जाता है। इसके अतिरिक्त मंदिर का दूसरा प्रवेश द्वार दक्षिण दिशा की ओर है, जिसे “स्वर्ग द्वार” कहा जाता है। इसके साथ दक्षिण द्वार गोमती नदी की ओर जाता है और इस द्वार तक आने के लिए बाहर 56 सीढ़ियाँ हैं।
- 1473 ई॰ से 1531 ई॰ के मध्य द्वारिकाधीश मंदिर में कृष्णजन्माष्टमी त्योहार, गोकुलाष्टमी या कृष्ण का जन्म दिवस के कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी। जिसे अब हर साल बड़े हर्शौल्लास के साथ मनाया जाता है।
- महाभारत और पुराणों के अनुसार, मथुरा में कंस के वध के पश्चात कंस के ससुर जरासंध और अन्य शत्रुओं से यादवों की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण ने मथुरा छोड़ दी। वे समुद्र के पास आए और सागर देवता से 12 योजन भूमि मांगी। विष्कर्मा ने उसी भूमि पर एक अद्भुत नगरी द्वारका का निर्माण किया, जहाँ भगवान कृष्ण अपने परिवार और यादव कुल के साथ बस गए |
- मान्यता है कि द्वारकाधीश मंदिर उसी स्थल पर बना है, जहां द्वापर युग में श्रीकृष्ण का ‘हरि गृह’ था। इसका मूल निर्माण श्रीकृष्ण के परपोते वज्रनाभ ने करवाया था |
- अमर लोककथा के अनुसार, कभी ऋषि दुर्वासा क्रोधवश रुक्मिणी जी को श्राप दे बैठते हैं कि वे श्रीकृष्ण से अलग रहें—इसी कारण रुक्मिणी मंदिर मुख्य मंदिर से दूर स्थित है |
यात्रा के लिए सुझाव
- सही मौसम चुनें: अक्टूबर से मार्च का समय गुजरात घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
- स्थानीय व्यंजन जरूर चखें: खाखरा, थेपला, ढोकला, फाफड़ा, जलेबी और गुजराती थाली का स्वाद लें।
- हस्तशिल्प और शॉपिंग: कच्छ की कढ़ाई, पटोला साड़ी, और स्थानीय हस्तशिल्प की खरीदारी करें।
- पर्यावरण का ध्यान रखें: पर्यटन स्थलों को स्वच्छ और सुरक्षित रखें।
निष्कर्ष
गुजरात की यात्रा आपको इतिहास, संस्कृति, प्रकृति और आध्यात्म का अनूठा संगम प्रदान करती है। ऊपर दी गई 10 शानदार जगहों की सूची आपकी यात्रा को यादगार बना देगी। तो अगली बार जब भी छुट्टियों का प्लान बनाएं, गुजरात की इन अद्भुत जगहों को जरूर अपनी लिस्ट में शामिल करें और इस राज्य की विविधता का आनंद लें |
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FAQ
गुजरात के इन स्थलों के लिए कौन-कौन से पैकेज टूर उपलब्ध हैं ?
गुजरात के लिए उपलब्ध प्रमुख पैकेज टूर
गुजरात के दर्शनीय स्थलों को घूमने के लिए कई प्रकार के पैकेज टूर उपलब्ध हैं, जिन्हें IRCTC, GSRTC और विभिन्न ट्रैवल एजेंसियां संचालित करती हैं। ये पैकेज धार्मिक, ऐतिहासिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक स्थलों को कवर करते हैं। यहां कुछ प्रमुख पैकेज टूर की जानकारी दी जा रही है:
1. IRCTC ‘Fragrance of Gujarat’ टूर पैकेज
समयावधि: 10 दिन, 9 रात
शामिल स्थल: अहमदाबाद, द्वारका, सोमनाथ, वडोदरा, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और आसपास के अन्य प्रमुख स्थल
शुरुआत: कोलकाता से ट्रेन द्वारा
विशेषताएं: ग्रुप टूर, कन्फर्म ट्रेन टिकट, होटल स्टे, भोजन, गाइडेड टूर
बुकिंग: IRCTC की वेबसाइट पर
कीमत: कमरे की शेयरिंग और क्लास के अनुसार अलग-अलग
IRCTC Gujarat Tour Package: कन्फर्म टिकट के साथ घूम आएं गुजरात की …
अरे वाह, इतने कम पैसों में irctc घुमा रहा है गुजरात, 10 दिन के टूर पैकेज में …
2. IRCTC ‘Garvi Gujarat’ भारत गौरव ट्रेन पैकेज
समयावधि: 10 दिन
शामिल स्थल: सोमनाथ, नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, द्वारकाधीश मंदिर, पावागढ़ महाकाली मंदिर, मोढेरा सूर्य मंदिर, रानी की वाव, दीव किला, साबरमती आश्रम, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, चंपानेर-पावागढ़
शुरुआत: दिल्ली
विशेषताएं: ट्रेन यात्रा, होटल, भोजन, गाइडेड टूर
कीमत: 54,710 रुपये से शुरू, क्लास और शेयरिंग के अनुसार अलग-अलग
अरे वाह, इतने कम पैसों में irctc घुमा रहा है गुजरात, 10 दिन के टूर पैकेज में …
IRCTC लाया गर्वी गुजरात टूर पैकेज, भारत गौरव ट्रेन से करें घूमें ऐतिहासिक …
3. GSRTC वॉल्वो बस टूर पैकेज (अहमदाबाद से सोमनाथ)
समयावधि: 2 दिन, 1 रात
शामिल स्थल: सोमनाथ मंदिर, त्रिवेणी संगम, भल्का तीर्थ, राम मंदिर, गीता मंदिर
शुरुआत: अहमदाबाद
विशेषताएं: वॉल्वो बस, होटल स्टे (डिलक्स, स्टैंडर्ड, सूट विकल्प), भोजन
बुकिंग: GSRTC की वेबसाइट या अधिकृत एजेंट्स के माध्यम से
4. कस्टम और लोकल टूर पैकेज
अहमदाबाद लोकल टूर: 3,000-5,000 रुपये में अहमदाबाद के प्रमुख दर्शनीय स्थल
कस्टम ट्रिप पैकेज: आपकी पसंद के अनुसार गुजरात के किसी भी क्षेत्र (कच्छ, सौराष्ट्र, गिर, सापुतारा आदि) के लिए उपलब्ध, कीमत और सुविधाएं आपके चयन पर निर्भर
5. अन्य प्रमुख IRCTC एवं निजी टूर ऑपरेटर पैकेज
द्वारका, सोमनाथ, गिर नेशनल पार्क, कच्छ का रण, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, पाटन, मोढेरा आदि के लिए विशेष पैकेज
गिर जंगल सफारी, कच्छ रण उत्सव, सौराष्ट्र के मंदिरों की यात्रा, ऐतिहासिक किलों और धरोहर स्थलों के लिए थीम आधारित टूर
बुकिंग और जानकारी
सभी प्रमुख पैकेज की बुकिंग IRCTC की वेबसाइट (irctctourism.com), GSRTC की वेबसाइट या अधिकृत ट्रैवल एजेंट्स से की जा सकती है।
पैकेज की कीमतें सीट, होटल श्रेणी, शेयरिंग, और यात्रा की क्लास के अनुसार बदलती हैं।
धार्मिक, ऐतिहासिक, प्रकृति प्रेमियों और परिवारों के लिए अलग-अलग विकल्प उपलब्ध हैं।
नोट:
गुजरात के इन पैकेज टूर में आमतौर पर यात्रा, ठहराव, भोजन, गाइडेड टूर और प्रमुख प्रवेश शुल्क शामिल होते हैं। अपनी सुविधा और बजट के अनुसार उपयुक्त पैकेज का चयन करें और यात्रा की तिथियों की पुष्टि अवश्य करें।
