Top 10 शानदार Haridwar Me Ghumne Ki Jagah Hindi में

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Haridwar me ghumne ki jagah hindi: हरिद्वार, उत्तराखंड की गोद में बसा एक ऐसा धार्मिक और सांस्कृतिक शहर है, जो न सिर्फ तीर्थयात्रियों बल्कि प्रकृति प्रेमियों और इतिहास के शौकीनों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। गंगा के पवित्र तट, प्राचीन मंदिर, जीवंत घाट, और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर हरिद्वार में घूमने के लिए कई अद्भुत स्थल हैं। 

यह भारत के सात प्रमुख तीर्थ स्थलों (सप्तपुरी) में से एक है और हिन्दू धर्म में इसका विशेष महत्व है। “हरि” का अर्थ है भगवान विष्णु और “द्वार” का अर्थ है द्वार या प्रवेशद्वार। यानी हरिद्वार का मतलब हुआ – भगवान हरि का द्वार। इसे “मोक्ष का द्वार” भी कहा जाता है।

इसकी ऊँचाई लगभग 314 मीटर (1,030 फीट) है | इसका निकटतम शहर ऋषिकेश (25 किमी), देहरादून (50 किमी) है | कुंभ मेला: हर 12 साल में आयोजित होने वाला कुंभ मेला हरिद्वार का सबसे बड़ा आयोजन है, जिसमें लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए आते हैं। हरिद्वार का उल्लेख कई पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। मान्यता है कि यहीं पर अमृत की कुछ बूंदें गिरी थीं, जिससे यह स्थान अमरता का प्रतीक बन गया। योग और ध्यान के लिए आश्रमों की भरमार है, जैसे शांतिकुंज, पतंजलि योगपीठ

हरिद्वार में वार्षिक मेले, धार्मिक जुलूस, और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। हरिद्वार में जाकर आध्यात्मिक शांति पा सकते हैं | गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए हमें हरिद्वार जाना चाहिए | प्राकृतिक और सांस्कृतिक सौंदर्य का अनुभव करने के लिए जाना चाहिए |

हरिद्वार में घूमने की जगह की लिस्ट

कैसे पहुँचें हरिद्वार:

रेलवे स्टेशन: हरिद्वार जंक्शन (HRD) देशभर से जुड़ा हुआ है।

हवाई अड्डा: निकटतम हवाई अड्डा जौली ग्रांट (देहरादून)

सड़क मार्ग: दिल्ली, देहरादून, ऋषिकेश, और अन्य प्रमुख शहरों से बस व टैक्सी सेवा उपलब्ध।

आइए जानते हैं हरिद्वार की टॉप 10 शानदार जगहों के बारे में, जिन्हें आपको अपनी यात्रा में जरूर शामिल करना चाहिए।

हरिद्वार पहुँचने के साधन और वहाँ के बजट रेस्टोरेंट्स तालिका

साधन (हरिद्वार पहुँचने के)विवरणयात्रा बजट (लगभग)रेस्टोरेंट्स (बजट में)औसत खर्च (प्रति व्यक्ति)
ट्रेनदिल्ली, लखनऊ, वाराणसी, कोलकाता, मुंबई से सीधी ट्रेनें₹100 – ₹600 (स्लीपर/AC)चोटीwala Restaurant, Hoshiyarpuri, Govind Bhog Bhojanalay₹100 – ₹200
बसदिल्ली, देहरादून, मेरठ, चंडीगढ़ से सीधी सरकारी व प्राइवेट बसें₹150 – ₹500Bikanerwala, Mathura Walo Ki Pracheen Dukaan₹80 – ₹150
टैक्सी / कैबदिल्ली/देहरादून से टैक्सी सेवा (ऑनलाइन बुकिंग जैसे ओला/उबर/लोकल कैब)₹2500 – ₹5000वही उपरोक्तवही उपरोक्त
निजी वाहनदिल्ली से NH334 होते हुए (~5 घंटे की यात्रा)₹1000 – ₹2000 (ईंधन)वही उपरोक्तवही उपरोक्त

1. हर की पौड़ी (Har Ki Pauri)(haridwar me ghumne ki jagah hindi)

Har Ki Pauri

हरिद्वार का सबसे पवित्र स्थल, हर की पौड़ी, वह स्थान है जहाँ गंगा नदी पहाड़ों से मैदानों में प्रवेश करती है। यह स्थान राजा विक्रमादित्य द्वारा बनवाया गया था। यहाँ ब्रह्म कुंड है, जहाँ अमृत के कुछ बूँदें गिरी थीं। शाम की गंगा आरती यहाँ का प्रमुख आकर्षण है। जिसमें सैकड़ों दीये गंगा में प्रवाहित किए जाते हैं | श्रद्धालु यहां डुबकी लगाकर अपने पापों से मुक्ति की कामना करते हैं | मान्यता है कि भगवान विष्णु ने यहां अपने पदचिह्न छोड़े थे। 

हर की पौड़ी भारत के उत्तराखंड राज्य की एक धार्मिक और पवित्र नगरी हरिद्वार में एक धार्मिक स्थल है | इसका अर्थ है हर यानि शिव के चरण | कहा जाता है समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत के लिए देव और दानव झगड़ रहे थे तब हरिद्वार के हर की पौड़ी में अमृत की कुछ बूंदे गिरी थी इसलिय यह एक धार्मिक स्थान बन गया |

हर की पौड़ी’ शब्द का शाब्दिक अर्थ- “हर” का अर्थ है “भगवान शिव”, का “का अर्थ है” और “पौड़ी” का अर्थ है “कदम”।

माना जाता है कि भगवान विष्णु ने हर की पौड़ी में ब्रह्मकुंड की यात्रा की थी। घाट का नाम भगवान विष्णु के चरण चिह्न से पड़ा, उसी के निशान घाट के एक पत्थर पर मौजूद हैं। हर की पौड़ी में कुछ विशाल मेला भी लगते है जैसे अर्ध कुम्भ मेला, बैशाखी और कवर यात्रा |

  • माना जाता है कि यहां भगवान विष्णु ने वैदिक काल में अपने पैरो के निशान छोड़े थे। यह घाट “ब्रह्मकुंड” के नाम से भी जाना जाता है, कहा जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान अमृत की कुछ बूंदें गिर गई थीं
  • इसे पहली शताब्दी ईसापूर्व में राजा विक्रमादित्य ने अपने भाई भारतरी की याद में बनवाया था । 1819 में इसे ब्रिटिश सरकार द्वारा 100 फीट चौड़ा और 60 सीढ़ियों वाला बनाया गया ताकि कुंभ मेले में भारी भीड़ को संभाला जा सके। 1938 और 1986 में इसका विस्तार किया गया और एक प्रसिद्ध घंटाघर भी 1938 में स्थापित किया गया |
  • हर की पौड़ी पर हर दिन, विशेष रूप से शाम को, माँ गंगा की भव्य आरती होती है जो देशभर में मशहूर है। यहां हर बारह साल में कुंभ मेला लगता है, हर छह साल अर्धकुंभ मेला लगता है और सालाना वसाखी त्योहार वाला मेला भी लगता है |
  • गंगा नदी में इस घाट पर स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है, और यह मुक्ति का स्थान माना जाता है
  • यह गंगा नदी के पश्चिमी किनारे बसा है और गंगा को उत्तर की दिशा में मोड़ने का स्थान भी है |

Haridwar Tourist Places: सिर्फ ‘हर की पौड़ी’ ही नहीं, हरिद्वार में घूमने के

2. मंसा देवी मंदिर (Mansa Devi Mandir) (Haridwar me ghumne ki jagah hindi)

मंसा देवी मंदिर, शिवालिक पर्वत की बिल्वा पर्वत श्रेणी पर स्थित है। यह मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक है और यहाँ देवी मंसा की पूजा होती है। श्रद्धालु यहाँ अपनी मनोकामनाएँ पूरी करने के लिए धागा बांधते हैं। यहां तक पहुंचने के लिए रोपवे (केबल कार) या पैदल मार्ग दोनों उपलब्ध हैं। मंदिर से हरिद्वार का विहंगम दृश्य देखने को मिलता है |

मनसा देवी शक्ति का रूप है और भगवान् शिव की पुत्री है | कहा जाता है ये भगनवाँ शिव के मन से प्रकट हुई थी इसलिए इनका नाम मनसा पड़ा | मनसा का अर्थ है इच्छा या मनोकामना | माँ मनसा अपने सच्चे भक्तो के मनसा को पूर्ण करती है | देवी मनसा को नाग वासुकी की बहन माना जाता है |

मनसा देवी का मंदिर हरिद्वार से 3 किलो मीटर दूर शिवालिक की पहाड़ियों में स्थित है | यहाँ सालो साल श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है | मनसा देवी बहुत शक्तिशाली और दयालु देवियो में से एक हैं |

  • यह मंदिर बिल्व पर्वत पर बसा है, जहाँ से हरिद्वार नगर, गंगा नदी और आसपास के पहाड़ों का मनोहर दृश्य देखा जा सकता है। यहाँ तक पहुंचने के लिए लगभग 786 सीढ़ियां बनी हुई हैं, साथ ही रोपवे की सुविधा भी उपलब्ध है, जो यात्रियों के लिए आसान है |
  • मंदिर में दो मूर्तियां स्थापित हैं: एक मूर्ति पंचभुजाओं और एक मुख वाली है, जबकि दूसरी मूर्ति आठ भुजाओं वाली है। इन मूर्तियों में मां मनसा देवी की शक्ति और करुणा का प्रतीक दर्शाया गया है |
  • मनसा देवी को मनोकामना पूरी करने वाली माता माना जाता है। यहां भक्त अपनी मुराद लेकर आते हैं, मौली (धागा) बांधकर अपनी इच्छाएं प्रकट करते हैं और पूरी होने पर आभार व्यक्त करते हैं। मंदिर तीन प्रमुख सिद्धपीठों—मनसा देवी, चंडी देवी, और माया देवी— में से एक है, जिसे त्रिकोण परिक्रमा में शामिल किया जाता है
  • नवरात्रि, कुंभ मेला, और अन्य धार्मिक अवसरों पर मंदिर में विशेष श्रद्धालु की संख्या होती है। विशेषकर कुंभ के दौरान यहां भक्तों की भारी भीड़ होती है |
  • वर्तमान मंदिर को बनाने का काम 19वीं सदी के आरंभ में मणिमाजरा रियासत के राजा गोपाल सिंह ने कराया था। इससे पहले यह स्थान खुद में पवित्र माना जाता था, जहां देवी की अदृश्य उपस्थिति की पूजा होती थी
  • मां मनसा देवी को सर्पों से रक्षा करने वाली देवी भी माना जाता है और वे नागराज वासुकी की बहन हैं। कहा जाता है कि उनके संरक्षण में सात नाग रहते हैं |
  • यह मंदिर सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है, लेकिन दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक बंद होता है क्योंकि उस समय मां का श्रृंगार किया जाता है

पर्यटक स्थल | जिला हरिद्वार, उत्तराखण्ड सरकार | भारत – Haridwar

3. चंडी देवी मंदिर (Chandi Devi Mandir)(haridwar me ghumne ki jagah hindi)

नील पर्वत की चोटी पर स्थित चंडी देवी मंदिर, देवी चंडी को समर्पित है। यह मंदिर 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित किया गया था। यहाँ तक पहुँचने के लिए ट्रैकिंग या रोपवे की सुविधा उपलब्ध है।  मंदिर का वातावरण शांत और आध्यात्मिक है, और यहां से हरिद्वार का सुंदर नजारा दिखता है |

पौराणिक कथाओ के अनुसार ,जब दानवो के राजा शुम्भ-निशुम्भ देवताओ पे अत्याचार करने लगे और स्वर्ग को अपनाना चाहते थे | तब पारवती माता के तेज से चंडिका देवी प्रकट हुई | माता चंडिका ने दोनों राक्षसों शुम्भ-निशुम्भ का वध कर दिया और यहाँ पे कुछ समय विश्राम भी की थी |

हरिद्वार में स्थित माता चंडी का मंदिर 52 शक्तिपीठो में से एक है | यहाँ माता खम्भ रूप में विराजित हैं और अपने भक्तो को दर्शन देती है और उनके मनोकामना को पूर्ण करती हैं |

  •  चंडी देवी मंदिर हरिद्वार के नील पर्वत की चोटी पर बना हुआ है, जो शिवालिक पर्वत श्रृंखला का भाग है और मुख्य शहर से लगभग 5 किलोमीटर दूर है। यह हरिद्वार के पंच तीर्थों में से एक प्रमुख तीर्थ है |
  • इस मंदिर की स्थापना प्राचीन काल में हुई मानी जाती है। कहा जाता है कि इसकी मुख्य मूर्ति आठवीं शताब्दी में महान संत आदि शंकराचार्य ने स्थापित की थी। मंदिर का आधुनिक स्वरूप 1929 में कश्मीर के राजा सुच्चत सिंह ने बनवाया था |
  • चंडी देवी का यह स्वरूप माता पार्वती की शक्ति चंडिका के रूप में उत्पन्न हुआ था, जिन्होंने दानवों के राजा शुम्भ और निशुम्भ का भयंकर वध इसी स्थान पर किया था। इस विजय के उपरांत माता ने नील पर्वत पर विश्राम किया और यहां वास किया । इसलिए यह स्थल अत्यंत पवित्र माना जाता है
  • चंडी देवी मंदिर हरिद्वार के तीन सिद्ध पीठों में से एक है (दूसरे दो मनसा देवी और माया देवी मंदिर हैं)। यह मनोकामना पूरी करने वाला स्थल माना जाता है जहाँ श्रद्धालु आकर अपनी मनोकामना पूर्ण करने की कामना करते हैं |
  • यह मंदिर सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है, लेकिन दोपहर 12 से 2 बजे तक कपाट बंद रहते हैं क्योंकि इस समय मंदिर में देवी का श्रृंगार होता है |
  • मंदिर की वास्तुकला और जंगलों, पहाड़ों से घिरी प्राकृतिक सुंदरता इसे और भी आकर्षक बना देते है। यहां आकर भक्तों को आध्यात्मिक शांति का एहसास होता है |

4. ब्रह्मा कुंड (Brahma Kund)(haridwar me ghumne ki jagah hindi)

ब्रह्मा कुंड वह स्थान है जहाँ गंगा नदी मैदानों में प्रवेश करती है। यहाँ पर भगवान ब्रह्मा ने यज्ञ किया था और भगवान विष्णु के पदचिन्ह भी पाए जाते हैं। यह स्थान धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। गंगा आरती इसी स्थान पर हर शाम को की जाती है, जो देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। श्रद्धालु मानते हैं कि यहाँ गंगा में स्नान करने से सारे पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह स्थान अमृत मंथन की कथा से जुड़ा हुआ है |

इस घाट का निर्माण अपने भाई ब्रिथारी (भर्तृहरि) की याद में राजा विक्रमादित्य ने करवाया था। भर्तृहरि को यही पर तपस्या करके अमरता मिला था | भर्तृहरि की स्मृति में राजा विक्रमादित्य ने पहले पहल ब्रह्मा कुंड और फिर पैड़ी (सीढ़ी) बनवाईं।  भर्तृहरि के नाम से ही इन पैड़ी का नाम ‘हरि की पैड़ी’ पड़ा।

  • ब्रह्मकुंड हरिद्वार का सबसे प्राचीन और पवित्र घाट है, जहाँ गंगा नदी में स्नान करने से पाप धुलकर मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसे कई धार्मिक ग्रंथों में विशेष स्थान दिया गया है |
  • कहा जाता है कि ब्रह्मकुंड वह स्थान है जहाँ भगवान ब्रह्मा ने तपस्या की थी और यहां उनकी उपस्थिति के कारण इस घाट का नाम ब्रह्मकुंड पड़ा। राजा श्वेत ने भगवान ब्रह्मा को यहां विराजमान होने का वरदान मांगा था
  • पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए गंगा को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाने के लिए कठोर तपस्या की थी। मां गंगा की गति इतनी तेज थी कि भगवान शिव ने उसे अपनी जटाओं में बांध कर हरिद्वार में स्वस्थानी रूप दिया। ब्रह्मकुंड घाट उस स्थान के निकट है जहाँ गंगा मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करती है और इसलिए इसका धार्मिक महत्व अत्यंत है |
  • ब्रह्मकुंड के किनारे मिली प्राचीन सीढ़ियाँ और मठ-मंदिरों के अवशेष मौर्य और गुप्तकालीन हस्ताक्षरों से जुड़ी हैं। यह क्षेत्र लगभग 2300 वर्ष पुराना माना जाता है |
  • ब्रह्मकुंड पर हर दिन भव्य गंगा आरती आयोजित की जाती है, जो भक्तों के लिए एक आत्मिक अनुभव का एहसास है
  • ब्रह्मकुंड का अर्थ है “ब्रह्मा का जलाशय” या “ब्रह्मा का कुण्ड”, जो इसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है
  • ब्रह्मकुंड हरिद्वार के हर की पौड़ी के नजदीक स्थित है, और इसे उस क्षेत्र के सबसे पवित्र स्थानों में गिना जाता है जहां भगवान विष्णु और शिव से जुड़ी कथाएं भी जुड़ी हैं

5. पतंजलि आयुर्वेद आश्रम (Patanjali Ayurvedic Ashram)

Swami Vivekanand Park

haridwar me ghumne ki jagah hindi:  पतंजलि आयुर्वेद आश्रम, बाबा रामदेव द्वारा स्थापित एक प्रमुख आयुर्वेदिक केंद्र है। यहाँ योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा की शिक्षा दी जाती है। यह स्थान स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती के प्रति जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

पतंजलि योगपीठ योग तथा आयुर्वेद में एक चिकित्सा और अनुसंधान संस्थान है। पंतजलि योगपीठ का उदेश्य है की ये पूरी दुनिया में आयर्वेदिक उपचार के लिए जाना जाये और लोगो को इससे अधिक से अधिक फायदा होये | इसकी स्थपना 2006 में बाबा रामदेव जी ने की थी |

महर्षि पंतजलि योग अविष्कार के ज्ञाता माने जाते हैं | पतंजलि योगपीठ आयुर्वेदिक अस्पतालों, प्रयोगशालाओं, अनुसंधान केंद्रों आदि में पीड़ितों का इलाज करता है तथा उन्हें चिकित्सा संबंधी सेवाएं प्रदान करता है। इसके अलावा पतंजलि योगपीठ संस्थान कैंटीन तजा एटीएम की सेवाएं भी प्रदान करता है। x

  • पतंजलि का मुख्यालय और इसके दोबारा बनाई गयी इकाइयां हरिद्वार के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित हैं, जहां सौंदर्य प्रसाधन, व्यक्तिगत देखभाल, खाद्य उत्पाद, और आयुर्वेदिक दवाओं का उत्पादन होता है
  • पतंजलि योगपीठ योग और आयुर्वेद शिक्षा का एक बड़ा संस्थान है, जहां योग प्रशिक्षकों और आयुर्वेदाचार्यों का प्रशिक्षण होता है और लोगों को सर्वसुलभ चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराई जाती है |
  • यह आश्रम हरिद्वार के प्राकृतिक और स्वच्छ वातावरण में स्थित है, जो मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य सुधार के लिए एक अच्छा जगह माना जाता है |
  • पतंजलि योगपीठ न केवल भारत में बल्कि विश्व स्तर पर योग और आयुर्वेद के प्रचार में एक महत्वपूर्ण संस्थान बन चुका है।

6. शांति कुंज (Shanti Kunj)(haridwar me ghumne ki jagah hindi)

शांति कुंज हरिद्वार का एक प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र है, जो अखिल विश्व गायत्री परिवार का मुख्यालय है। इसकी स्थापना पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी शर्मा द्वारा की गई थी। यह स्थान भारतीय संस्कृति, योग, ध्यान और नैतिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी स्थापना वर्ष 1971 में हुआ |

यहाँ प्रतिदिन वैदिक मंत्रों के साथ गायत्री यज्ञ होता है। लोग यहाँ आकर अपनी साधना और ध्यान का अभ्यास करते हैं। शांति कुंज में नियमित रूप से योग शिविर, ध्यान कक्षाएं और स्वाध्याय सत्र आयोजित किए जाते हैं, जहाँ मानसिक शांति और आत्मिक उन्नति पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

यह स्थान हरिद्वार-दिल्ली राजमार्ग पर, हर की पौड़ी से लगभग 5-6 किमी दूर है। यह सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है |

  • यह आश्रम लगभग तीन किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। यह हरिद्वार के सप्त सरोवर क्षेत्र में, महर्षि विश्वामित्र की तपस्थली पर, गंगा नदी के पास और रेलवे स्टेशन से लगभग 6 किमी दूर स्थित है |
  •  शांति कुंज में जीवन-निर्माण, परिवार-निर्माण, समाज-निर्माण के लिए कई प्रशिक्षण और कार्यशालाएँ लागू की जाती हैं। यहाँ जीवन जीने की कला, नैतिक शिक्षा, ग्राम्य विकास, कुटीर उद्योग प्रशिक्षण आदि निःशुल्क चलाए जाते हैं
  • आश्रम में गायत्री माता का मंदिर, यज्ञशाला, अखण्ड दीप, देवात्मा हिमालय मंदिर, ऋषि मंदिर, ज्ञान मंदिर, चिकित्सा केंद्र, और देव संस्कृति देखने योग्य महत्वपूर्ण स्थान हैं |
  • शांति कुंज में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु गायत्री मंत्र उच्चारित करते हैं। यहाँ के नियमित यज्ञ और साधना से शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। माना जाता है कि यहां 11 बार गायत्री मंत्र के जाप मात्र से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं |
  •  आश्रम में सेवा कार्य स्वयंसेवकों द्वारा संचालित होते हैं, जहाँ रहना, खाना, और साधना निशुल्क उपलब्ध हैं, जो इसे विशेष बनाते हैं।
  • शांति कुंज को युग निर्माण का केंद्र माना जाता है, जहाँ धर्म, संस्कृति और मानव जीवन के सुधार हेतु एक व्यापक आंदोलन चल रहा है। यह स्थान लोगों को आध्यात्मिक जागरण और शांति का अनुभव कराता है |

7. चिल्ला वन्यजीव अभयारण्य (Chilla Wildlife Sanctuary)

Haridwar me ghumne ki jagah hindi:  चिल्ला वन्यजीव अभयारण्य, हरिद्वार से लगभग 9 किलोमीटर दूर स्थित है। यहाँ बाघ, हाथी, भालू और विभिन्न पक्षियों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यह स्थान प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीवों के शौकिनों के लिए आदर्श है।

अभयारण्य वर्ष 1977 में बनाया गया था, बाद में 1983 में इसे मोतीचूर और राजाजी अभयारण्यों के साथ मिलाकर इसे राजाजी राष्ट्रीय उद्यान बना दिया गया।

यह 830 वर्ग किलो मीटर में बना हुआ है | यहाँ के जानवरों में पाए जाने वाले हाथियों की संख्या ज्यादा है, इसके अलावा तेंदुए, बारहसिंगा, सांभर, भालू और छोटी बिल्लियों है, यहां लगभग 315 सुंदर पक्षी प्रजातियां हैं जो यहां देखे जा सकते हैं।

घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से जून के बीच है।

  • चिल्ला अभयारण्य में जंगल सफारी का अनुभव बेहद रोमांचक या मनमोहक होता है। यहां जंगल सफारी के लिए गाइड और जीप उपलब्ध होती हैं, जो आगंतुकों को वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में ले जाती हैं। सफारी का सबसे उपयुक्त समय नवंबर से जून के बीच माना जाता है |
  • यह अभयारण्य राजाजी टाइगर रिजर्व का भाग है, जो वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता को संरक्षित करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यहां के अधिकारियों द्वारा प्राकृतिक आवास और प्रजातियों के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं |
  • चिल्ला अभयारण्य हरिद्वार और ऋषिकेश के बीच स्थित है, इसलिए यहां से दोनों धार्मिक शहरों का भी आनंद लिया जा सकता है। प्राकृतिक सौंदर्य के बीच गंगा नदी का किनारा और शांत वातावरण भी पर्यटकों को आकर्षित करता है
  • हाल ही में प्रशासन ने चिल्ला रेंज को पूरे वर्ष पर्यटकों के लिए खोल दिया है, जिससे वन्यजीवन प्रेमियों को कभी भी यहां आने का मौका मिलता है

8. स्वामी विवेकानंद पार्क (Swami Vivekanand Park)

Swami Vivekanand Park

स्वामी विवेकानंद पार्क, हर की पौड़ी के निकट स्थित एक शांतिपूर्ण स्थल है। यहाँ भगवान शिव और स्वामी विवेकानंद की भव्य मूर्तियाँ स्थापित हैं। यह स्थान ध्यान और आत्म चिंतन के लिए उपयुक्त है।

  • हर की पौड़ी में पिकनिक मानाने के लिए आदर्श या अच्छा जगह है |
  • यहाँ पर घासो की लम्बी लॉन और फूलो की बिछी चादर भी पर्यटकों को आकर्षित करती हैं |
  • स्वामी विवेकानंद उत्तराखंड भी कई बार आये थे देहरादून के साथ हरिद्वार भी आये थे |
  • यह पार्क सुबह 7 से शाम 6 बजे तक खुला रहता है |
  • हर की पौड़ी में स्नान करने के बाद आप यहाँ जा करके आराम तथा भोजन कर सकते हैं |
  • यह पार्क हर की पौड़ी के बहुत करीब स्थित है और हरिद्वार के प्रमुख मनोरंजक और आरामदायक स्थानों में से एक माना जाता है। पार्क का आकार त्रिकोणाकार है जिसमें हरी-भरी घास की लंबी लॉन और रंग-बिरंगे फूलों की क्यारियां मौजूद हैं, जो इसे बेहद मनमोहक और शांति प्रदान करने वाला स्थान बनाती हैं।
  • यहाँ स्वामी विवेकानंद की भव्य और विशाल मूर्ति स्थापित है, जो इस पार्क का मुख्य आकर्षण है। इसके साथ ही भगवान शिव की भी एक बड़ी प्रतिमा पार्क में स्थित है, जो दूर से ही नजर आती है।
  • स्वामी विवेकानंद पार्क में लोग ध्यान लगाने, टहलने और परिवार के साथ पिकनिक मनाने आते हैं क्योंकि यहाँ का शांत वातावरण मानसिक शांति देने वाला है।
  • पार्क हरिद्वार रेलवे स्टेशन से लगभग 2.9 किलोमीटर दूर है और यहाँ आने के लिए स्थानीय परिवहन व्यवस्था उपलब्ध है।
  • यह स्थान न केवल प्राकृतिक सुंदरता के लिए बल्कि स्वामी विवेकानंद के विचारों और दर्शन की याद दिलाने के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो युवाओं को प्रेरित करता है।

9. भारत माता मंदिर (Bharat Mata Mandir)

भारत माता मंदिर, हरिद्वार का एक अनोखा और प्रेरणादायक स्थल है जो धार्मिक भावना के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता, देशभक्ति, और भारत की महान विरासत का प्रतीक है। यह मंदिर उन गिने-चुने मंदिरों में से है जो किसी देवी-देवता के बजाय भारत माता यानी भारत देश को समर्पित है।

इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1983 में हुआ था | इसके संस्थापक स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि हैं | इसका उद्घाटन भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा की गई थी | यह मंदिर कुल 8 मंज़िलों का है और प्रत्येक मंज़िल को भारतीय संस्कृति, इतिहास, और महान विभूतियों को समर्पित किया गया है।

यहाँ भारत माता की एक विशाल संगमरमर की मूर्ति है, जिन्हें सिंहासन पर आसीन दिखाया गया है। यह देशभक्ति की भावना को जागृत करती है। हर मंजिल एक विशेष पहलू को दर्शाता है | जैसे की द्वितीय तल – शूरवीरों को समर्पित, तृतीय तल – महिला शक्ति को समर्पित, चतुर्थ तल – संतों और आचार्यों को समर्पित, पाँचवाँ तल – विभिन्न धर्मों की एकता, छठा व सातवाँ तल – कला और संस्कृति और आठवाँ तल – दर्शनीय व्यू पॉइंट को दर्शाता है |

यह स्थान सत्तू घाट, हरिद्वार से लगभग 4-5 किमी दूरी पर है | यह सुबह 8:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक खुला रहता है |

  • यह मंदिर आठ मंजिला है और लगभग 180 फीट ऊंचा है, इसलिए इसे “मदर इंडिया टेम्पल” के नाम से भी जाना जाता है।
  • मंदिर के प्रत्येक मंजिल में भारत के प्राचीन ऋषि-मुनि, वैज्ञानिक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, महापुरुष, संत, देवी-देवताओं और वीरांगनाओं की मूर्तियां स्थापित हैं, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय गौरव को दर्शाती हैं।
  • मंदिर में भारत माता की एक विशाल और भव्य मूर्ति भी स्थापित है, जो राष्ट्रभक्ति की भावना को जागृत करती है।
  • भारत माता मंदिर हरिद्वार में देशभर से श्रद्धालु और पर्यटक दूर-दूर से आते हैं, खासकर उन लोगों के लिए जो राष्ट्रप्रेम और भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में रुचि रखते हैं।
  • यह मंदिर न केवल आध्यात्मिक स्थल है बल्कि यहाँ राष्ट्रवादी भावना को भी प्रेरित किया जाता है, जिससे यह युवाओं और इतिहास प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण बन गया है।

10. क्रिस्टल वर्ल्ड (Crystal World)

Haridwar me ghumne ki jagah hindi: क्रिस्टल वर्ल्ड, हरिद्वार का एक प्रमुख जल पार्क है। यहाँ विभिन्न जल खेलों और मनोरंजन की सुविधाएँ उपलब्ध हैं। यह परिवारों और बच्चों के लिए एक आदर्श स्थल है। क्रिस्टल वर्ल्ड हरिद्वार का सबसे बड़ा और सबसे रोमांचक मनोरंजन स्थल है, जो उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन आकर्षणों में से एक है।

यह पार्क 18 एकड़ में फैला हुआ है और इसमें 40 से अधिक जल और थ्रिल राइड्स, दो अद्वितीय संग्रहालय, और एक विशाल फूड कोर्ट शामिल हैं। यहाँ का प्रमुख आकर्षण जल और थ्रिल राइड्स मेडनेस टॉवर: 60 फीट ऊंचा टॉवर जिसमें 6 रोमांचक राइड्स हैं, जैसे ‘Suicide 360’ और ‘Power Drop’।

वेव पूल और रेन डांस: 2000 लोगों की क्षमता वाला वेव पूल और डीजे के साथ रेन डांस क्षेत्र। यहाँ का इंटरएक्टिव आर्ट संग्रहालय: 25 3D पेंटिंग्स के साथ एक अद्वितीय संग्रहालय है |

सोमवार से रविवार, सुबह 10:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक (जल पार्क), और सुबह 10:30 बजे से शाम 8:00 बजे तक (मनोरंजन पार्क)।

  • श्री राकेश जैन द्वारा इस पार्क की स्थापना 2005 में हुई |
  • क्रिस्टल वर्ल्ड में भारत की सबसे तेज़ वर्टिकल लूप राइड (60 फीट ऊंची) भी है, जो एड्रेनालाईन प्रेमियों के लिए खास आकर्षण है |
  • पार्क में कई प्रकार के जोशपूर्ण राइड्स जैसे रोलर कोस्टर, कैरोसेल, बम्पर कार आदि उपलब्ध हैं, साथ ही एक वाटर पार्क जोन है जिसमें वेव पूल, स्लाइड्स और स्प्लैश एरिया शामिल हैं |
  • यहां एक इंटरेक्टिव संग्रहालय भी है जिसमें 14 सिलिकॉन मूर्तियां हैं, जो भारतीय कलाकारों की प्रतिभा को दर्शाती हैं |
  • क्रिस्टल वर्ल्ड में एक बहु-व्यंजन फूड कोर्ट भी है, जहां केएफसी, पिज्जा हट, सबवे जैसे फेमस ब्रांड और शाकाहारी-मांसाहारी दोनों प्रकार के व्यंजन उपलब्ध होते हैं |
  • यह पार्क निजी पार्टियों, शादियों, जन्मदिनों आदि के आयोजन के लिए भी उपयुक्त स्थल है
  • क्रिस्टल वर्ल्ड हरिद्वार रेलवे स्टेशन से लगभग 12-15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, और दिल्ली-हरिद्वार मुख्य सड़क के पास आसानी से पहुंचा जा सकता है |
  • यह जगह परिवार, दोस्तों और बच्चों के साथ मस्ती करने और गर्मियों में ठंडक पाने के लिए अच्छा जगह है |

प्रवेश शुल्क:

  • वयस्क: ₹700 (सप्ताह के दिनों में) / ₹800 (शनिवार और रविवार)
  • बच्चे: ₹600 (सप्ताह के दिनों में) / ₹700 (शनिवार और रविवार)
  • वरिष्ठ नागरिक: ₹600 (सप्ताह के दिनों में) / ₹700 (शनिवार और रविवार)

स्थान और संपर्क जानकारी

  • पता: दिल्ली रोड, बतेड़ी, हरिद्वार, उत्तराखंड 249405, भारतharidwarrishikeshtourism.in
  • संपर्क नंबर: +91 99270 65949

यात्रा सुझाव

सर्वश्रेष्ठ समय: अक्टूबर से मार्च तक, जब मौसम सुखद होता है।

सुविधाएँ: पार्किंग, शौचालय, लॉकर सुविधाएँ, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, और व्हीलचेयर सुविधा उपलब्ध है।

सावधानियाँ: जल राइड्स के लिए स्विमसूट, तौलिया और अतिरिक्त कपड़े साथ लाएँ।

निष्कर्ष:

हरिद्वार न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक धरोहर और आध्यात्मिक केंद्र भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इन शीर्ष 10 स्थानों की यात्रा से आप हरिद्वार के विविध पहलुओं का अनुभव कर सकते हैं। अपनी यात्रा की योजना बनाते समय इन स्थलों को अपनी सूची में अवश्य शामिल करें।

FAQ


चंडी देवी मंदिर के चढ़ाई के लिए कौन से रूट होते हैं?

चंडी देवी मंदिर, हरिद्वार की नील पर्वत की चोटी पर स्थित है और यहां चढ़ाई करने के लिए मुख्यतः ती न रूट उपलब्ध हैं:
1. रोपवे (केबल कार) मार्ग:
यह सबसे सुविधाजनक और लोकप्रिय तरीका है। रोपवे का प्रवेश द्वार मुख्य सड़क के पास है, जहां से टिकट लेकर आप केबल कार के माध्यम से सीधे मंदिर तक पहुंच सकते हैं। रोपवे का किराया लगभग ₹240 (एक तरफ) है और इससे मंदिर तक पहुँचने में 15-20 मिनट लगते हैं |
2. पैदल मार्ग (मुख्य ट्रैक):
यह मार्ग रोपवे के पास से ही शुरू होता है। यह लगभग 1.5 से 3 किलोमीटर लंबा है, जिसे श्रद्धालु पैदल तय करते हैं। यह रास्ता समतल है, सीढ़ियां कम हैं और रास्ते में विश्राम के लिए जगह-जगह बेंच और दुकानें मिलती हैं। पैदल चढ़ाई में औसतन 45 मिनट से 1.5 घंटे का समय लग सकता है, श्रद्धालु अपनी सुविधा और गति के अनुसार यात्रा कर सकते हैं |
3. बाइक/वाहन मार्ग:
एक अन्य मार्ग है, जहां तक आप बाइक या छोटे वाहन से जा सकते हैं। यह मार्ग पार्किंग तक जाता है, उसके बाद बाकी दूरी पैदल तय करनी होती है। यह रास्ता भीड़ के समय या बुजुर्गों के लिए सुविधाजनक हो सकता है

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