20 शानदार himachal pradesh paryatan sthal जो मन मोह लें

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Himachal Pradesh paryatan sthal: हिमाचल प्रदेश, जिसे “देवभूमि” या देवताओं की भूमि के नाम से भी जाना जाता है, भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में स्थित एक सुरम्य पर्वतीय राज्य है। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला है | हिमाचल प्रदेश की खूबसूरती देखते ही बनती है | यहाँ की नदिया, पहाड़िया और ऊंचे-ऊंचे पर्वत इसके खूबसूरती में चार चाँद लगाए हुए है , जो हर साल लाखो देशी तथा विदेशी पर्यटकों का भीड़ अपनी ओर आकर्षित करती है | इसकी हरियाली, बर्फ से ढकी चोटियां, शांत झरने, प्राचीन मंदिर और विविध सांस्कृतिक विरासत इसे पर्यटकों के लिए स्वर्ग बनाती है|

यह राज्य पशिचमी हिमालय की गोद में बसा हुआ है | यह पहाड़ो और नदियों से घिरा हुआ है, यहाँ की मूल नदिया रावी, चेनाब, सतलुज तथा व्यास और यमुना है | यह क्षेत्र छुट्टियां मनाने के लिए बहुत ही उपयुक्त है |

हिमाचल प्रदेश में सेबो की खेती बहुत ज्यादा होती है , इसलिय ऐसे सेबो के राज्य के रूप में जाना जाता है | हिमाचल प्रदेश का वातावरण बहुत ही अनुकूल होता है, यहाँ का दृश्य बहुत ही मनोहर और यहाँ की संस्कृति बहुत ही रंगीन है |

हिमाचल प्रदेश की सीमा पूर्व में उत्तरांचल, उत्तर में जम्मू-कश्मीर, पश्चिम में पंजाब, दक्षिण में उत्तर प्रदेश से लगी है।

यहाँ के 20 शानदार paryatan sthal न केवल प्राकृतिक सौंदर्य में अद्वितीय हैं, बल्कि इतिहास, भोजन, ठहरने के विकल्प, यात्रा की अवधि, सर्वोत्तम समय, पहुंचने के तरीके और निकटवर्ती स्थलों के संदर्भ में भी बेहद समृद्ध हैं। इस ब्लॉग में हम हिमाचल प्रदेश के 20 प्रमुख paryatan sthal की विस्तृत जानकारी साझा कर रहे हैं जो आपकी यात्रा को अविस्मरणीय बना देंगे।

हिमाचल प्रदेश का ट्रांसपोर्टेशन और रेस्टोरेंट बजट (प्रतिदिन का औसत)

खर्च का प्रकारबजट (INR ₹)विवरण
लोकल ट्रांसपोर्ट₹300 – ₹600बस, टैक्सी शेयरिंग, ऑटो; शहर के अंदर घूमने के लिए।
इंटरसिटी ट्रैवल₹500 – ₹1200बस (HRTC), वोल्वो या टैक्सी बुकिंग (मनाली → शिमला आदि)।
बाइक रेंट (ऑप्शनल)₹800 – ₹12001 दिन के लिए बाइक रेंटल, पेट्रोल शामिल नहीं।
पेट्रोल (बाइक के लिए)₹150 – ₹300रोजाना 30–50 किमी घूमने पर खर्च।
नाश्ता₹50 – ₹150लोकल ढाबा या छोटे होटल में।
दोपहर का भोजन₹150 – ₹300साधारण रेस्टोरेंट या ढाबा में थाली या स्नैक्स।
रात का खाना₹150 – ₹300मिड-रेंज रेस्टोरेंट या कैफे में डिनर।
चाय/कॉफ़ी + स्नैक्स₹50 – ₹100दिन भर में हल्की-फुल्की चीज़ें।

कुल अनुमानित बजट (प्रतिदिन)

श्रेणीन्यूनतम ₹अधिकतम ₹
ट्रांसपोर्टेशन₹300₹1500
भोजन/रेस्टोरेंट₹400₹850
कुल (प्रति दिन)₹700₹2350

Himachal Pradesh paryatan sthal: हिमाचल प्रदेश के 20 शानदार paryatan sthal जो मन मोह लें

1. शिमला (Himachal pradesh paryatan sthal)

Himachal pradesh paryatan sthal: शिमला, जिसे “हिल्स की रानी” (Queen of Hills) या ‘पहाड़ो की रानी’ भी कहा जाता है | शिमला हिमाचल प्रदेश की राजधानी है और भारत के सबसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों में से एक है। यह शहर समुद्र तल से लगभग 2200 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है | यह अपनी सुंदर वादियों, औपनिवेशिक वास्तुकला, ठंडी जलवायु और ऐतिहासिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। शिमला का नाम देवी श्यामला (काली माता का रूप) के नाम पर पड़ा। ब्रिटिश शासन के दौरान इसे 1864 में भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया था। अंग्रेजों ने यहाँ कई चर्च, स्कूल, और आवासीय भवन बनाए, जिनमें से कई अब भी संरक्षित हैं।

शिमला के प्रशिद्ध में मॉल रोड, रिज, टॉय ट्रेन और औपनिवेशिक वास्तुकला भी शामिल है | शिमला सबसे खूबसूरत पर्यटन में से एक है, जो हनीमून के लिए भी जाना जाता है | यहाँ खूबसूरत घटिया और पहाड़िया भी है |

शिमला हिमालय की दक्षिण-पश्चिमी श्रेणियों पर स्थित है | शिमला को सात पहाड़ियों के ऊपर बनाया गया है | शिमला के लोगों को अनौपचारिक रूप से “शिमलावासी” या (अंग्रेजी में शिमलाइट्स) के नाम जाना जाता है। शहर की अधिकांश धरोहर इमारतें अपने मूल ‘टुडोरबथन’ वास्तुकला में संरक्षित हैं। 

यहाँ आपको हिमाचली व्यंजन के साथ-साथ पंजाबी, तिब्बती और कॉन्टिनेंटल फूड भी मिलेंगे।  शिमला में लक्ज़री होटल, बजट होटल, रिसॉर्ट और होमस्टे भी उपलब्ध हैं। यहाँ का पूरा व्योरा लेने के लिए 2 से 3 दिन पर्याप्त है | यहाँ पर घूमने के लिए सर्वोत्तम समय अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर है |

  • शिमला में दक्षिण एशिया का एकमात्र प्राकृतिक आइस स्केटिंग रिंक की स्थापना 1920 में हुई |
  • यहाँ उत्तरी भारत का सबसे पुराना डाकघर (जनरल पोस्ट ऑफिस, 1882 में स्थापित) भी है |
  • शिमला का प्रसिद्ध ‘स्कैंडल पॉइंट’ एक दिलचस्प ऐतिहासिक स्थल है, जिसका नाम एक ब्रिटिश महिला और एक भारतीय राजा के साथ भागने की घटना के कारण पड़ा था |
  • शिमला में होने वाला ‘शिमला सम्मेलन’ 1945 भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण है, जिसमें द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भारत के राजनीतिक भविष्य पर चर्चा हुई थी |
  • रिज मैदान इतना खास है कि यहाँ गिरने वाला पानी दो अलग-अलग समुद्रों (अरब सागर और बंगाल की खाड़ी) तक पहुँचता है, एक भाग सतलुज नदी के ज़रिए और दूसरा यमुना नदी के ज़रिए |
  • शिमला शहर अपने औपनिवेशिक (ब्रिटिश) वास्तुकला, मनोहारी प्राकृतिक सुंदरता, मंदिरों और सालभर बढ़िया मौसम के लिए प्रसिद्ध है |
  • आज भी शिमला देश के प्रमुख हिल स्टेशनों में है—यहाँ हर साल लाखों पर्यटक आते हैं |

कैसे पहुंचे: शिमला हवाई अड्डा, कालका-शिमला रेलवे (यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल), और सड़क मार्ग से।

निकटवर्ती स्थल: कुफरी, चायल, नालदेहरा

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15 शानदार Haryana Paryatan Sthal जो आपको चौंका देंगे

2. मनाली (himachal pradesh paryatan sthal)

मनाली, हिमाचल प्रदेश का एक प्रसिद्ध हिल स्टेशन व् पर्यटक स्थल है | मनाली अपनी बर्फीली चोटियों, हरे-भरे वादियों और एडवेंचर एक्टिविटीज के लिए मशहूर है। यह स्थान प्रकृति प्रेमियों, रोमांचक गतिविधियों के शौक़ीनों और शांति की तलाश करने वालों के लिए आदर्श स्थान है। मनाली समुद्रतल से लगभग 2050 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है और यह कुल्लू घाटी के प्रवेश द्वार के रूप में काम करता है। मनाली का नाम संस्कृत शब्द ‘मणि’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है ‘मणि की भूमि’। मनाली का नाम ऋषि मणि से भी जुड़ा है। यह स्थान प्राचीन काल से धार्मिक और प्राकृतिक महत्व रखता है। यह स्थान बहुत पुराना है और यहाँ के मंदिरों और किलों से स्पष्ट होता है कि यह धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा है। ब्रिटिश काल में भी मनाली पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र था, लेकिन अब यह स्थान एडवेंचर पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है।

मनाली भारत के संस्कृति में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है | इसे सात ऋषियों का घर बताया गया है |

मनाली का मौसम सर्दियों में बहुत ठंडा और गर्मियों में हल्का ठंडा रहता है | मनाली का ठंडा मौसम भारत की चिलचिलाती गर्मी में भी राहत प्रदान करती है |

यहाँ साहसी खेलो जैसे  स्कीइंग, हाइकिंग (लंबी पैदल यात्रा), पर्वतारोहण, पैराग्लाइडिंग, राफ्टिंग, ट्रैकिंग, कायाकिंग और माउन्टेन बाइकिंग का आनंद ले सकते है |

  • मनाली का नाम पौराणिक ऋषि मनु के नाम से आया है, जिसका अर्थ है “मनु का निवासस्थान”। मान्यता है कि प्रलय के बाद ऋषि मनु यहीं आए और मानव जीवन का पुनः निर्माण किया। पुराने मनाली गांव में उन्हें समर्पित प्राचीन मंदिर भी मौजूद है |
  • मनाली कुल्लू जिले में ब्यास नदी के किनारे 1950 से 2050 मीटर की ऊँचाई पर बसा हुआ हिल स्टेशन है, जो कुल्लू घाटी के उत्तरी छोर पर स्थित है |
  • मनाली में हडिम्बा मंदिर, वशिष्ठ मंदिर, रोहतांग दर्रा, जोगिनी झरना, भृगु झील, नेहरू कुंड जैसे कई दर्शनीय स्थल हैं। हडिम्बा मंदिर पांडवों के अज्ञातवास से जुड़ा माना जाता है |
  • मनाली की घाटियाँ, सदाबहार जंगल, बर्फ से ढकी चोटियाँ और पारदर्शी ब्यास नदी पर्यटकों को अपनी ओर खींचती हैं। यहाँ सर्दियों में बर्फबारी होती है और पर्यटक बर्फ के खेलों का आनंद लेते हैं |
  •  अंग्रेजों ने मनाली में सेब के पेड़ और ट्राउट मछली खूब उगाई। 1980 के बाद मनाली पर्यटन मे बहुत तेजी से विकास हुआ और यह क्षेत्र ज्यादा प्रसिद्ध हुआ |
  • कहा जाता है कि भगवान हनुमान की माता अंजनी ने मनाली की एक पहाड़ी पर ध्यान तथा पूजा की थी। इसी क्षेत्र की तीन प्रमुख पहाड़ियों में पुराने मनाली में मनु मंदिर, ढुंगरी में हडिम्बा मंदिर, और वशिष्ठ में वशिष्ठ मंदिर स्थित हैं |
  • मनाली में लगभग 4000 से अधिक होटल हैं जो पर्यटकों की सुविधा के लिए उपलब्ध हैं। यह जगह भारत और विदेश से भारी संख्या में सैलानी आकर्षित करती है |
  • मनाली लाहौल-स्पीति और लेह जैसे दूरदराज़ क्षेत्रों के लिए प्रमुख प्रवेश मार्ग है, इसलिए इसे “देवताओं की घाटी” के रूप में भी जाना जाता है |

भोजन: स्थानीय हिमाचली व्यंजन जैसे सिद्दू, चना मद्रा, तिब्बती और पंजाबी भोजन।

ठहरने का स्थान: होटल, रिसॉर्ट, होमस्टे और कैम्पिंग विकल्प।

घूमने की अवधि: 3-4 दिन

सर्वोत्तम समय (Best Time to Visit)

  • सर्दियों में (नवंबर से फरवरी): यदि आप बर्फबारी का अनुभव करना चाहते हैं तो यह समय सबसे अच्छा है।
  • गर्मियों में (मार्च से जून): मनाली की ठंडी जलवायु के कारण यह गर्मियों में भी एक बेहतरीन स्थल है। यह समय ट्रैकिंग और अन्य एडवेंचर गतिविधियों के लिए आदर्श है।
  • मानसून (जुलाई से सितंबर): मानसून के दौरान लैंडस्लाइड्स और भूस्खलन का खतरा रहता है, इसलिए यह समय घूमने के लिए सुरक्षित नहीं होता।

कैसे पहुँचें (How to Reach)

  • हवाई मार्ग: मनाली का निकटतम हवाई अड्डा भुंतर एयरपोर्ट है, जो मनाली से लगभग 50 किमी दूर स्थित है। यहां से आपको टैक्सी या बस द्वारा मनाली पहुंचना होता है।
  • रेल मार्ग: मनाली में रेल सेवा नहीं है, लेकिन आप कुल्लू या कांगड़ा तक ट्रेन द्वारा पहुँच सकते हैं, और फिर वहाँ से मनाली तक टैक्सी या बस ले सकते हैं।
  • सड़क मार्ग: मनाली रोड से दिल्ली, चंडीगढ़ और अन्य बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। वोल्वो बस सेवा और टैक्सी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

प्रमुख आकर्षण (Main Attractions

रोहतांग पास, सोलांग वैली, हिडिंबा देवी मंदिर, नग्गर किला और आर्ट गैलरी ,चंद्रताल झील, और त्रिशूल और पीर पंजाल पर्वत श्रृंखलाएं |

धर्मशाला और मैक्लोडगंज (हिमाचल प्रदेश) की जानकारी

3. धर्मशाला और मैक्लोडगंज

himachal pradesh paryatan sthal: मैक्लॉडगंज (McLeod Ganj), जिसे मकलोडगंजमैक्लोडगंज या मैकलोड गंज के नाम से भी जाना तथा लिखा जाता है | धर्मशाला और मैक्लोडगंज, हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित दो प्रमुख पर्यटन स्थल हैं। धर्मशाला को ‘छोटा ल्हासा’ भी कहा जाता है क्योंकि यह तिब्बती शरणार्थियों का प्रमुख निवास स्थान है।

यधर्मशाला और मैक्लोडगंज दोनों स्थान न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध हैं, बल्कि तिब्बती संस्कृति और दलाई लामा के निवास स्थान के रूप में भी इनकी महत्वपूर्ण पहचान है। धर्मशाला का नाम संस्कृत शब्द ‘धर्म’ (धर्म का पालन) और ‘शाला’ (स्थान) से लिया गया है, जो एक धार्मिक स्थान को दर्शाता है।

धर्मशाला ब्रिटिश काल के दौरान एक प्रमुख सैनिक और प्रशासनिक केंद्र था। यह स्थान तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के निर्वासन के बाद से विशेष रूप से प्रसिद्ध हुआ, जब वे 1959 में चीन से भागकर यहाँ आकर बसे। वर्तमान में धर्मशाला तिब्बती संस्कृति और बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र है।

यहाँ का मौसम साल भर सुहाना रहता है | यहाँ की हरियाली, ऊंची पहाड़िया, देवदार और चीड़ के वृक्ष इसको स्वर्ग के सामान बना देते हैं |

यहाँ का प्रशिद्ध व्यंजन तिब्बती व्यंजन जैसे मोमोज़, थुक्पा और स्थानीय हिमाचली भोजन है। यहाँ ठहरने के लिए होटल, गेस्ट हाउस, होमस्टे मिल जायेंगे | यहाँ घूमने के लिए 2 से 3 दिन पर्याप्त है | यहाँ पर घूमने के लिए अच्छा समय मार्च से जून और सितंबर से नवंबर है |

  • धर्मशाला का नाम संस्कृत शब्दों ‘धारण’ (धारण करना) और ‘राम’ (तीर्थयात्रियों के लिए विश्राम स्थल) से बना है। यह 16वीं शताब्दी से शरणार्थियों और तीर्थ यात्रियों के लिए ठहरने का स्थान था |
  • धर्मशाला के ऊपरी भाग को मैक्लोडगंज कहते हैं , जो तिब्बती दल और दलाई लामा का रहने का स्थान है। 1959 में तिब्बत से निकले गए दलाई लामा ने यहाँ शरण ली और तब से यह तिब्बती डायस्पोरा का प्रमुख केंद्र बन गया |
  • धर्मशाला की आबादी लगभग 1 लाख है जहाँ हिंदू, तिब्बती बौद्ध, मुस्लिम, ईसाई और सिख शांति से रहते हैं। यहां कई मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारे एक साथ देखने को मिलते है |
  • धर्मशाला में ज्वालामुखी देवी मंदिर, भागसू जलप्रपात, डल झील, कांगड़ा किला, कालचक्र मंदिर, नाम्ग्याल मठ और त्सुगलाग्खांग (दलाई लामा का मंदिर परिसर) प्रमुख आकर्षण हैं। भागसू फॉल्स और त्रिउंड ट्रेक शानदार प्रकृति प्रेमियों के लिए अच्छी जगह हैं |
  • यह स्टेडियम समुद्र तल से लगभग 1457 मीटर की ऊँचाई पर बना है और यह विश्व के सबसे ऊंचे क्रिकेट मैदानों में से एक है, जो हिमालय की राजसी पृष्ठभूमि में देखने को मिलता है |
  • धर्मशाला की मुस्लिम आबादी का एक दिलचस्प इतिहास है, जिसमें 1947 के बाद जम्मू-कश्मीर के मुसलमानों को यहां बसाया गया। धर्मशाला का नाम यहाँ स्थित चंदन नाथ मंदिर के नाम पर भी पड़ा है, जो 1000 से अधिक वर्षों पुराना है |
  •  दलाई लामा का त्सुगलाग्खांग परिसर और नाम्ग्याल मठ यहाँ के प्रमुख धार्मिक आकर्षण स्थल हैं, जो आध्यात्मिकता और तिब्बती संस्कृति को जीवित रखने में मदद करते हैं |
  • देवदार के पेड़ों से घिरी यह जगह शांतिपूर्ण और मनोरम( सुन्दर) है, जो प्रकृति प्रेमियों, ट्रेकर्स और आध्यात्मिक साधकों के लिए परफेक्ट मानी जाती है |

कैसे पहुँचें:

  • हवाई मार्ग: धर्मशाला का निकटतम हवाई अड्डा कांगड़ा एयरपोर्ट है, जो शहर से लगभग 13 किमी दूर है।
  • रेल मार्ग: धर्मशाला का कोई रेलवे स्टेशन नहीं है, लेकिन निकटतम रेलवे स्टेशन कांगड़ा है, जो यहां से लगभग 20 किमी दूर है। वहाँ से टैक्सी या बस से पहुँच सकते हैं।

प्रमुख आकर्षण (Main Attractions)

तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा का आवास, भगीनी नाथ मंदिर, त्रियुंड, कांगड़ा किला और धर्मशाला स्टेडियम |

4. कसौल (himachal pradesh paryatan sthal)

कसोल, हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में पार्वती घाटी में स्थित एक छोटा लेकिन बेहद लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। कसोल में भी सुन्दर प्रकृति का नाजारा लिया जा सकता है | यह पहड़ियो बीच में बसा छोटा सा गौण है |

यह स्थान विशेष रूप से युवाओं, ट्रैकिंग के शौकीनों और बैकपैकर्स के बीच मशहूर है। इसे अक्सर “भारत का मिनी इज़राइल” कहा जाता है क्योंकि यहाँ बड़ी संख्या में इज़राइली पर्यटक आते हैं और उनकी झलक यहाँ के कैफे, खाने और संस्कृति में दिखाई देती है।

यह पार्वती नदी के किनारे, भुंतर से लगभग 30 किमी की दूरी पर बसा है। इसकी उचाई लगभग 1580 मीटर (5184 फीट) समुद्र तल से है। 1990 के दशक के बाद से जब विदेशी पर्यटकों, खासकर इज़राइलियों ने यहाँ आना शुरू किया, तब से यह धीरे-धीरे भारत के “हिप्पी ट्रेल” का हिस्सा बन गया।

भोजन: कैफे संस्कृति, वेस्टर्न और स्थानीय भोजन।
ठहरने का स्थान: होमस्टे, छोटे होटल।
घूमने की अवधि: 2-3 दिन
सर्वोत्तम समय: मार्च से जून और सितंबर से नवंबर
कैसे पहुंचे: मनाली से सड़क मार्ग द्वारा।
निकटवर्ती स्थल: मालाना, पार्वती नदी

5. कुल्लू (himachal pradesh paryatan sthal)

जब भी हम हिमाचल प्रदेश में घूमने का प्लान बनाते हैं कुल्लू का नाम जुबान पे आ ही जाता है | कुल्लू, हिमाचल प्रदेश का एक प्रमुख और खूबसूरत पर्यटन स्थल है, जो अपनी हरी-भरी घाटियों, ऊँचे पहाड़ों, नदियों, और देवस्थलों के लिए जाना जाता है। कुल्लू हिमचाल प्रदेश में एक जिला भी है | यह पार्वती और ब्यास नदियों के संगम पर बसा हुआ है और अपने पारंपरिक उत्सवों, खासकर दशहरा महोत्सव, के लिए प्रसिद्ध है।

कुल्लू को “देवों की घाटी” (Valley of Gods) भी कहा जाता है, क्योंकि यहाँ कई पौराणिक और धार्मिक स्थलों का समावेश है। इसका समुद्र तल से उचाई लगभग 1220 मीटर (4000 फीट) है | कुल्लू का प्राचीन नाम “कुलांता पीठ” था, जिसका अर्थ है “संसार का अंतिम छोर” या रहने योग्य दुनिया का अंत। मान्यता है कि महाभारत काल में यह क्षेत्र धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण था।

कुल्लू रघुनाथ जी (भगवान राम) की भूमि मानी जाती है, और यहाँ हर साल दशहरे के दौरान रघुनाथ जी की रथ यात्रा निकलती है, जिसमें हज़ारों लोग भाग लेते हैं। यहाँ के सेब के बागान, मंदिर और दशहरा पर्यटकों को भारी मात्रा में अपनी ओर आकर्षित करते हैं |

  • देशभर में मशहूर कुल्लू दशहरा यहाँ का सबसे बड़ा उत्सव या त्यौहार है। जब देश के बाकी भागो में दशहरा  का समाप्त हो जाता है, उसी समय कुल्लू का यह त्योहार शुरू हो जाता है। इसमें देवी-देवताओं की भव्य रथ यात्रा निकाली जाती है और सात दिनों तक मेला लगता है, जिसमें हिमाचल के ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के लोग सम्लित होते हैं |
  • ब्यास नदी के किनारे बसे कुल्लू को “सिल्वर वैली” भी कहते है। यहाँ वसंत और शरद ऋतु में घाटियों में रंग-बिरंगे रोडोडेंड्रॉन की बहुत सारी फूलों की कतार खिली रहती है और सर्दियों में पर्वतों पर बर्फ की चादर बिछी रहती है |
  • कुल्लू क्षेत्र ट्रैकिंग, राफ्टिंग, माउंटेन बाइकिंग जैसी एडवेंचर गतिविधियों के लिए भी प्रसिद्ध है। पास ही स्थित फ्रेंडशिप पीक ट्रेक उत्साही पर्वतारोहियों के लिए पसंदीदा स्थानों में में गिना जाता है |
  • यहाँ 17वीं शताब्दी में बना रघुनाथजी मंदिर विशेष रूप से प्रशिद्ध है, जिसमें अयोध्या से लाई गई श्रीराम की प्रतिमा स्थापित है। नगर (प्राचीन राजधानी) में बने लकड़ी-पत्थर के महलों को आज होटल में बदल दिया गया है पास ही बिजली महादेव जैसा अनूठा शिव मंदिर भी है
  • कुल्लू की पारम्परिक पोशाक और गहने बहुत जाने माने हैं। यहाँ के लोक नृत्य जैसे ‘नाटी’, ‘हॉन’ और ‘हल्की’ सांस्कृतिक आयोजनों का मुख्य आकर्षण भी हैं
  • हिमाचल प्रदेश में सबसे ज्यादा बादल फटने की घटनाएँ कुल्लू में ही होती हैं |
  • कुल्लू से पास में मनाली, तीर्थन घाटी, नगर, बिजली महादेव, मालाणा गाँव आदि दर्शनीय स्थल भी हैं |
  • प्रसिद्ध रूसी चित्रकार निकोलस रोएरिच ने अपने जीवन के अंतिम साल नगर (कुल्लू) में बिताए, जहाँ उनके नाम पर एक संग्रहालय भी है |

प्रमुख आकर्षण (Main Attractions)

रघुनाथ मंदिर, ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क (GHNP), बिजली महादेव मंदिर, अखाड़ा बाजार, मणिकरण साहिब (35 किमी), कसोल (30 किमी), और लारजी डैम |

भोजन: हिमाचली व्यंजन जैसे चना मद्रा, दाल।
ठहरने का स्थान: होटल, रिसॉर्ट।
घूमने की अवधि: 2 दिन
सर्वोत्तम समय: अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर
कैसे पहुंचे: मनाली से सड़क मार्ग।
निकटवर्ती स्थल: मनाली, रोहतांग पास

6. बिलिंग-बीर (himachal pradesh paryatan sthal)

बीर और बिलिंग, हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित दो खूबसूरत गाँव हैं जो मिलकर एक अनोखा पर्यटन स्थल बनाते हैं। यह स्थान विशेष रूप से पैराग्लाइडिंग की विश्व राजधानी (Paragliding Capital of India) के रूप में प्रसिद्ध है।

यहाँ की शांति, तिब्बती संस्कृति, हरे-भरे पहाड़, और रोमांचकारी खेल इसे एक आदर्श एडवेंचर और स्पिरिचुअल डेस्टिनेशन बनाते हैं। बीर मूलतः एक शांतिपूर्ण गाँव है जो बौद्ध धर्म और तिब्बती संस्कृति से जुड़ा हुआ है। 1960 के दशक में तिब्बती शरणार्थियों को यहाँ बसाया गया था, जिसके कारण यह क्षेत्र एक तिब्बती आध्यात्मिक केंद्र बन गया। पैराग्लाइडिंग की शुरुआत 1980 के दशक में हुई, और अब यह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का स्थल बन चुका है।

यहाँ हर साल पैराग्लाइडिंग का खेल आयोजित किया जाता है | जब हम पैराग्लाइडिंग करते है तो टेक ऑफ साइड को बिलिंग कहते है जबकि लैंडिंग साइट को बीर कहा जाता हैं। इस कारण से इस शहर का नाम बीर बिलिंग के नाम से जानते हैं।

  • बीर बिलिंग घूमने आने वाले लोग पैराग्लाइडिंग करने के लिए आते हैं।
  • यही पर देश का सबसे प्राचीन मंदिर बना हुआ हैं।
  • चामुंडा देवी का मंदिर बीर बिलिंग में हैं।
  • शंकर जी का बैजनाथ मंदिर प्रमुख पर्यटक स्थल में से एक हैं।
  • बीर-बिलिंग को “इंडिया की पैराग्लाइडिंग कैपिटल” कहा जाता है। यहाँ हर साल देश-विदेश से हजारों लोग पैराग्लाइडिंग को करने तथा देखने के लिए आते है |
  • बिलिंग पैराग्लाइडिंग के लिए विश्व का दूसरा सबसे ऊँचा टेकऑफ स्थल है; लगभग 2,400 मीटर की ऊंचाई से उड़ान भरते हैं और लैंडिंग बीर (लगभग 1,500 मीटर) में होती है |
  • बिलिंग उड़ान (टेकऑफ) स्थल है, जबकि बीर पायलट्स और यात्रियों की लैंडिंग साइट है — इन दोनों को मिलाकर इसे “बीर-बिलिंग” कहा जाता है |
  • यहां पैराग्लाइडिंग का सबसे उपयुक्त वक्त मार्च–मई और अक्टूबर–नवंबर है, जब आसमान साफ तथा मौसम अनुकूल रहता है
  • बीर-बिलिंग में पैराग्लाइडिंग की कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाएं (World Paragliding Championship सहित) आयोजित हो चुकी हैं
  •  पैराग्लाइडिंग के अलावा यहाँ ट्रेकिंग, माउंटेन बाइकिंग, कैम्पिंग, गाँवों में घूमना, गुनहर नदी में ट्रैकिंग और बीर-चौगान के चाय बागान देखना भी प्रसिद्ध है |
  • बीर-बिलिंग के हरे-भरे पहाड़, शांत घाटियां, और साफ-सुथरी हवा सुकून व रोमांच का संगम देती हैं |
  •  बीर का नाम सेन वंश के पूर्वज ‘बीरसेन’ के नाम पर पड़ा है |
  • यहाँ की ‘Deer Park Institute’ बौद्ध शिक्षा का प्रमुख केंद्र है, और ‘Bir Tea Factory’ (चाय फैक्टरी) पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है |
  • यहाँ रहना, घूमना और रोमांचक एक्टिविटीज काफी बजट-फ्रेंडली हैं—पैराग्लाइडिंग लगभग 1,500–2,000 रुपये में हो जाती है

भोजन: स्थानीय और कैफे व्यंजन।
ठहरने का स्थान: होमस्टे, गेस्ट हाउस।
घूमने की अवधि: 1-2 दिन
सर्वोत्तम समय: अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर
कैसे पहुंचे: धर्मशाला से सड़क मार्ग।
निकटवर्ती स्थल: धर्मशाला, मैक्लोडगंज

7. लाहुल-स्पिति (himachal pradesh paryatan sthal)

लाहौल-स्पीति, हिमाचल प्रदेश का एक अद्वितीय और रहस्यमय जिला है | जिला का मुख्यालय केलांग है | जो अपनी बर्फीली घाटियों, प्राचीन बौद्ध मठों, और साहसिक पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है। यह जिला भारत और तिब्बत की सीमा पर स्थित है और अपनी ठंडी जलवायु, ऊँची पर्वत श्रृंखलाओं और धार्मिक विविधता के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है।

लाहौल-स्पीति को “हिमाचल का ठंडा रेगिस्तान” कहा जाता है। यहाँ की औसत वार्षिक वर्षा केवल 170 मिमी है, जिससे यह क्षेत्र बंजर और शुष्क दिखाई देता है। स्पीति नदी इस क्षेत्र की मुख्य जलधारा है, जो किन्नौर जिले के खाब स्थान से सतलज नदी में मिलती है। चंद्र और भागा नदियाँ क्रमशः लाहौल और स्पीति घाटियों से निकलकर चिनाब नदी का निर्माण करती हैं ।

  •  लाहौल का प्राचीन नाम ल्ह युल है, जिसका तिब्बती भाषा में अर्थ “देवताओं का प्रदेश” है। यहाँ की संस्कृति में देवता, गंधर्व, किन्नर, और मनुष्यों के संगम की मान्यता है |
  • लाहौल-स्पीति हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा (12,210 वर्ग किमी) और सबसे कम आबादी (2001 की जनगणना अनुसार केवल 33,224) वाला जिला है। इसका मुख्यालय कीलोंग है |
  • इस जिले की औसत ऊँचाई 10,000 फीट से भी ज्यादा है। स्पीति घाटी तो औसतन 4,270 मीटर (14,010 फीट) ऊँची है और रेगिस्तानी पर्वतीय इलाकों में गिनी जाती है, जिसमें बारिश बेहद कम (सिर्फ 170 मिमी वार्षिक) होती है |
  • चंद्र और भागा नदियों का संगम स्थल तांदी में है, जिसे चंद्रभागा कहा जाता है। यही बाद में चिनाब नदी बनती है, और यह गंगा जितना पवित्र है |
  • कुंजुम दर्रा (4551 मीटर) लाहौल और स्पीति को जोड़ता है, तो रोहतांग दर्रा लाहौल को कुल्लू से जोड़ता है |
  • यहाँ के प्रमुख पर्यटन स्थल – की गोम्पाचंद्रताल झीलकाजा टाउनशाशुर गोम्पात्रिलोकिनाथ मंदिर आदि हैं |
  •  यह क्षेत्र हज़ारों वर्षों से बौद्ध संस्कृति का इलाका रहा है। यहाँ के लोग तिब्बत, लद्धाख, किन्नौर व सिक्किम जैसी ही संस्कृति और परंपरा को बनाये रखते हैं। स्पीति में कई प्राचीन बौद्ध मठ (मोनास्ट्रीज) भी हैं
  • लाहौल और स्पीति का अपना अलग ऐतिहासिक सफर रहा है। कभी यह लद्दाख और कुल्लू के शासकों के अधीन रहा, फिर रणजीत सिंह और बाद में अंग्रेजों के कायदे में आया। 1960 में इनका नया संयुक्त जिला बना |
  • यहाँ की खानपान शैली, लोक-कला और पारंपरिक मकानों में तिब्बती छाप देखी जा सकती है। स्थानीय उत्सव व नृत्य भी खास हैं |
  •  कभी लाहौल-स्पीति शेष प्रदेश से कटी रहती थी, लेकिन अब अटल टनल, रोहतांग के बनने से ज्यादातर महीनों यहाँ पहुँचना आसान हो गया है
  • यहाँ सर्दियाँ बहुत कठोर होती हैं, कई महीने बर्फ से ढकी रहने की वजह से सीमित यातायात और आवास की व्यवस्था रहती है, तो पर्यटकों या यात्रियों को पूरी तैयारी के साथ यात्रा करनी चाहिए |

भोजन: तिब्बती और स्थानीय व्यंजन।
ठहरने का स्थान: होमस्टे, गेस्ट हाउस।
घूमने की अवधि: 4-5 दिन
सर्वोत्तम समय: जून से सितंबर
कैसे पहुंचे: मनाली से सड़क मार्ग।
निकटवर्ती स्थल: कुल्लू, मनाली

8. नारकंडा (himachal pradesh paryatan sthal)

नारकंडा (Narkanda) हिमाचल प्रदेश का एक प्रसिद्ध हिल स्टेशन है, जो शिमला जिले में स्थित है। यह समुद्र तल से लगभग 2,700 मीटर (8,900 फीट) की ऊंचाई पर बसा है और खासकर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, सेब के बागानों और स्कीइंग के लिए प्रसिद्ध है।

  • नारकंडा भारत का सबसे प्राचीन स्कीइंग केंद्र है। सर्दियों में बर्फ से ढकी ढलानों पर स्कीइंग का अनुभव लेने हर साल देश-विदेश से पर्यटक आते हैं |
  •  यह हिल स्टेशन समुद्र तल से लगभग 2,708 मीटर (8,885 फीट) की ऊँचाई पर है, जिससे यहाँ का मौसम साल भर सुहाना रहता है |
  • नारकंडा को सेबों के देश का प्रवेश द्वार भी कहते है। यहाँ के सेब और चेरी के बागान हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान निभाते हैं |
  • नारकंडा की सबसे प्रसिद्ध जगह हाटू चोटी है, जिसकी ऊँचाई लगभग 3,352 मीटर है। यहाँ स्थित हाटू माता मंदिर से जुड़ी कथा के अनुसार, इसे रावण की पत्नी मंदोदरी ने बनवाया था। पहाड़ी पर देवदार के घने जंगल, चौड़ी घाटियाँ और बर्फीली चोटियाँ अद्भुत दिखती हैं
  • नारकंडा का पौराणिक महत्व भी है—मान्यता है कि पांडव अपने अज्ञातवास के दौरान यहां रुके थे। भीम का चूल्हा नामक चट्टानों का समूह इसी कथा से जुड़ा है, जहाँ भीम खाना पकाया करते थे |
  • चारों ओर मखमली घास के मैदान, ऊँचे-ऊँचे देवदार, कैल और ताश के पेड़ यहाँ की हवा को महकदार और वातावरण को अत्यंत शांत बनाते हैं। गर्मियों और सर्दियों, दोनों मौसम में नारकंडा की सुंदरता अलग रंग बिखेरती है |
  •  शिमला से मात्र 60-65 किलोमीटर दूर है और सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है, जिससे यहाँ पहुँचना बेहद आसान है |
  • नारकंडा में सिर्फ स्कीइंग ही नहीं, बल्कि ट्रेकिंग, हाइकिंग, बर्ड वॉचिंग जैसी गतिविधियाँ भी खूब पसंद की जाती हैं |
  • नारकंडा का न्यूनतम तापमान 0°C तक गिर सकता है और अधिकतम औसत 11°C के करीब रहता है, जिससे पूरे साल ठंडक और ताजगी बनी रहती है |

सारणी

विषयविवरण
स्थितिशिमला जिले में, शिमला से लगभग 60 किमी दूर
ऊंचाई2,700 मीटर (8,900 फीट)
प्रसिद्ध के लिएबर्फबारी, स्कीइंग, सेब के बागान, ट्रैकिंग
मुख्य आकर्षणहाटू पीक (Hatu Peak), स्कीइंग स्लोप्स, तनी जुब्बर झील
बर्फबारी का समयदिसंबर से फरवरी
आने का सर्वोत्तम समयमार्च से जून (ग्रीष्मकाल), दिसंबर से फरवरी (सर्दियों में बर्फबारी के लिए)
कैसे पहुँचेसड़क मार्ग से शिमला होते हुए, निकटतम रेलवे स्टेशन: शिमला; निकटतम हवाई अड्डा: जुब्बरहट्टी (शिमला एयरपोर्ट)

9. पराशर झील (himachal pradesh paryatan sthal)

पराशर झील (Parashar Lake) हिमाचल प्रदेश के मंडी ज़िले में स्थित एक शांत और सुंदर झील है, जो समुद्र तल से लगभग 2,730 मीटर (8,960 फीट) की ऊँचाई पर बसी है। यह झील अपने आध्यात्मिक महत्व, रहस्यमयी तैरते टापू (floating island) और चारों ओर फैली हिमालयी पहाड़ियों के अद्भुत दृश्य के लिए प्रसिद्ध है।

  • मान्यता है कि भीम ने अपनी कोहनी से पहाड़ पर प्रहार कर इस झील का निर्माण किया, ताकि ऋषि पराशर यहां तपस्या कर सकें |
  • यह स्थान ऋषि पराशर को समर्पित है, जिन्होंने यहाँ कठिन तप किया था। झील के किनारे 14वीं शताब्दी में राजा बाणसेन द्वारा बनवाया गया एक प्राचीन पैगोडा शैली का मंदिर भी है, जो हिमाचली वास्तुकला का सुंदर उदाहरण है |
  • पराशर झील में एक रहस्यमयी तैरता द्वीप (स्थानीय भाषा में ‘टाहला’) है, जो अपनी जगह बदलता रहता है। यह द्वीप झील के लगभग 7-21% हिस्से को घेरता है और आज तक वैज्ञानिक रूप से भी पूरी तरह समझा नहीं जा सका |
  • यहाँ से धौलाधार की बर्फ से ढकी चोटियों और घने देवदार व ओक के जंगलों का सुंदर नजारा दिखाई देता है, जो इसे ट्रैकिंग, कैंपिंग और प्राकृतिक प्रेमियों के लिए उपयुक्त स्थान बनाता है |
  • दुर्गम रास्तों और सीमित प्रचार के कारण यहाँ पर्यटक अपेक्षाकृत कम आते हैं, जिससे यह स्थान अत्यंत शांत और प्राकृतिक बना रहता है
  • पराशर झील की सटीक गहराई आजतक कोई नहीं माप पाया, यह भी इस झील को रहस्यपूर्ण बनाता है।
  • इस झील का पानी केवल पूजा-पाठ के लिए उपयोग होता है, और आम लोग झील में स्नान नहीं करते
विषयविवरण
स्थितिमंडी ज़िला, हिमाचल प्रदेश
ऊंचाई2,730 मीटर (8,960 फीट)
प्रसिद्ध के लिएतैरता टापू (Floating Island), पराशर ऋषि मंदिर, ट्रैकिंग
धार्मिक महत्वमाना जाता है कि इस झील की स्थापना पराशर ऋषि ने की थी, और यहीं उन्होंने तपस्या की थी
मुख्य आकर्षण13वीं शताब्दी का त्रि-स्तरीय लकड़ी का मंदिर (पराशर ऋषि मंदिर), हिमालय का 360° व्यू, झील का तैरता द्वीप
कैसे पहुँचेमंडी से लगभग 50 किमी दूरी; सड़क मार्ग से वाहन जाते हैं, अंतिम कुछ किलोमीटर ट्रैक भी किया जा सकता है
सर्वोत्तम समयअप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर; सर्दियों में बर्फबारी देखने के लिए दिसंबर से फरवरी भी बढ़िया समय है

10. रिवालसर

रिवालसर (Rewalsar), हिमाचल प्रदेश के मंडी ज़िले में स्थित एक आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है। यह स्थान हिंदू, बौद्ध और सिख धर्मों के अनुयायियों के लिए पवित्र माना जाता है। यहाँ एक झील (रिवालसर झील) है, जिसे ‘त्रिधर्मीय तीर्थस्थल’ भी कहा जाता है।

  • रिवालसर हिंदू, बौद्ध और सिख धर्म के लिए एक साथ आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है। एक ही जगह पर भगवान शिव, गुरु पद्मसंभव और गुरु गोबिंद सिंह जी से जुड़े धार्मिक स्थल मौजूद हैं |
  • मिथकीय और ऐतिहासिक महत्व:
    • पौराणिक कथाओं के अनुसार, यहां महर्षि लोमश ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की थी।
    • बौद्ध परंपरा में यह गुरु पद्मसंभव (गुरु रिन्पोचे) का तपस्थली माना जाता है, जिन्होंने यहीं से तिब्बत की ओर उड़ान भरी थी।
    • सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने भी यहाँ के पहाड़ी राजाओं को मुगलों के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया था
  • महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल:
    • गुरुद्वारा रिवालसर साहिब: गुरु गोबिंद सिंह जी की याद में राजा जोगिंदर सेन ने 1930 में बनवाया था।
    • लोमश ऋषि मंदिर, शिव मंदिर, कृष्ण मंदिर: झील किनारे हिंदू आस्था के लिए प्रमुख।
    • बौद्ध मठ: रिवालसर में तीन बड़े बौद्ध मठ भी हैं।
    • नैना देवी मंदिर: रिवालसर से 10 किलोमीटर दूर पहाड़ी पर स्थित है, माना जाता है कि सती माता की आंखें यहाँ गिरी थीं
  • रिवालसर में हर साल बैसाखी (स्थानीय भाषा में बसोआ) और छेश्चू (बौद्ध पर्व) के भव्य मेले लगते हैं, जिनमें अलग-अलग धर्मों के अनुयायी बड़ी संख्या में इकट्ठे होते हैं
  •  रिवालसर को तिब्बती में “त्सो पेमा” कहते है, जिसका अर्थ “कमल की झील” है
  • चारों ओर से पहाड़ों और देवदार के पेड़ों से घिरा रिवालसर अपने शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रशिद्ध है।
  • बॉबी देओल की फिल्म “करीब” की शूटिंग रिवालसर में हुई थी, जिससे रिवालसर को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली
  • झील में मछलियाँ पाली जाती हैं, जिन्हें धार्मिक भावनाओं के चलते कोई नुकसान नहीं पहुंचाता। झील के तैरते द्वीप आज भी एक रहस्य हैं और काफी आकर्षण का केंद्र हैं |

विषयविवरण
स्थितिमंडी जिला, हिमाचल प्रदेश
ऊंचाईलगभग 1,360 मीटर (4,460 फीट)
प्रसिद्ध के लिएरिवालसर झील, धार्मिक स्थल (हिंदू, बौद्ध, सिख), पद्मसंभव गुफा और मूर्ति
धार्मिक महत्वपद्मसंभव (गुरु रिंपोछे) की तपस्थली; सिख गुरु गोबिंद सिंह जी का आगमन
कैसे पहुँचेंमंडी से 24 किमी दूर, सड़क मार्ग से आसानी से पहुँचा जा सकता है
सर्वोत्तम समयमार्च से जून, और सितंबर से नवंबर

11. डलहौजी (himachal pradesh paryatan sthal)

डलहौजी (Dalhousie) हिमाचल प्रदेश का एक प्रसिद्ध पहाड़ी पर्यटन स्थल है, जो अपनी औपनिवेशिक वास्तुकला, हरियाली, शांति, और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। यह स्थान समुद्र तल से करीब 1,970 मीटर (6,460 फीट) की ऊँचाई पर स्थित है और 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश वायसरॉय लॉर्ड डलहौजी के नाम पर बसाया गया था।

  • डलहौजी में कई पुराने ब्रिटिश युग के चर्च और इमारतें संरक्षित हैं, जैसे सेंट जॉन्स चर्च और सेंट फ्रांसिस कैथोलिक चर्च, जो इसकी ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं |
  •  डलहौजी पांच पहाड़ियों (कैथलॉग पोट्रेस, तेहरा, बकरोटा, बोलुन आदि) पर फैला है और यहाँ की ऊंचाई विभिन्न प्रकार के वनस्पति-जीव को रहने का स्थान प्रदान करती है, जिनमें चीड़, देवदार, ओक और रोडोडेंड्रॉन के फूल शामिल हैं। यहाँ से तीन राजसी पर्वत श्रृंखलाएँ नजर आती हैं |
  • पर्यटन स्थल:
    • खज्जियार: इसे ‘मिनी स्विट्ज़रलैंड ऑफ इंडिया’ कहते है। यह देवदार के घने जंगलों और सुंदर झीलों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ घोड़े की सवारी, ज़ॉर्बिंग जैसी रोमांचक गतिविधियाँ भी उपलब्ध हैं
    • पंचपुला: पाँच पुलों और प्राकृतिक झरनों वाला क्षेत्र, जो शांति और हरियाली के लिए जाना जाता है
    • कलाटोप वन्यजीव अभयारण्य: प्राकृतिक ट्रेकिंग के लिए प्रसिद्ध, जहाँ वनस्पति और जीव जंतुओं की विविधता देखने को मिलती है |
    • रॉक गार्डन: रिसाइकल की गई वस्तुओं से बनाए गए कलात्मक शिल्पों और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध |
    • चमेरा झील: एक मानव-निर्मित झील, जहाँ बोटिंग और मछली पकड़ने जैसे मनोरंजक कार्य होते हैं
  • डलहौजी का मौसम मनमोहक और सुखद रहता है। गर्मी में यह ट्रेकिंग और घूमने के लिए अच्छा स्थान है, जबकि सर्दियों में बर्फबारी यहाँ की मुख्य खासियत है, जो बर्फ के शौकीनों के लिए स्वर्ग के समान है
  • मॉल रोड पर तिब्बती और स्थानीय हस्तशिल्प की दुकाने हैं, जहाँ पर्यटक खरीदारी कर सकते हैं और लोक संस्कृति का एहसास कर सकते हैं |
विषयविवरण
स्थितिचंबा ज़िला, हिमाचल प्रदेश
ऊंचाईलगभग 1,970 मीटर (6,460 फीट)
स्थापना वर्ष1854 (ब्रिटिश काल में)
प्रसिद्ध के लिएऔपनिवेशिक इमारतें, हिल स्टेशन, ट्रेकिंग, प्राकृतिक नज़ारे, शांत वातावरण
कैसे पहुँचेसड़क मार्ग से पठानकोट से 80 किमी; निकटतम रेलवे स्टेशन: पठानकोट; निकटतम हवाई अड्डा: कांगड़ा या पठानकोट
सर्वोत्तम समयमार्च से जून (गर्मी), अक्टूबर से दिसंबर (सर्दी)

12. कसौली

कसौली (Kasauli) हिमाचल प्रदेश के सोलन ज़िले में स्थित एक छोटा लेकिन बेहद शांत और सुरम्य हिल स्टेशन है। यह समुद्र तल से लगभग 1,800 मीटर (5,900 फीट) की ऊँचाई पर स्थित है और खासतौर पर अपने ब्रिटिशकालीन भवनों, पाइन और देवदार के जंगलों, और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। यह शिमला और चंडीगढ़ के बीच एक आदर्श वीकेंड डेस्टिनेशन माना जाता है।

  • कसौली हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले का एक सुंदर हिल स्टेशन है, जो समुद्र तल से करीब 1795 मीटर की ऊँचाई पर बसा है। यह शिमला से लगभग 77-80 किलोमीटर दूर है और अपनी साफ-सुथरी और शांत वादियों के लिए प्रसिद्ध है |
  • कसौली का नाम कुसुमावली या कुसमाली (फूलों की कतार) से लिया गया माना जाता है, क्योंकि यहाँ हर मौसम में विभिन्न रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं। एक अन्य मान्यता है कि इसका नाम कौशल्या नामक जलधारा या हिमालय की तलहटी में बसे ‘कसुल’ गांव से पड़ा |
  • कसौली से जुड़ी रामायण काल की एक कथा के अनुसार, जब हनुमान संजीवनी बूटी लेने हिमालय गए थे, तो वापसी में उन्होंने यहीं की एक पहाड़ी (मंकी प्वाइंट) पर अपना पैर टिकाया था। इस पहाड़ी की आकृति आज भी पैर के पंजे जैसी मानी जाती है और यहां हनुमानजी का मंदिर भी है |
  • मुख्य आकर्षण:
    • मंकी प्वाइंट: कसौली का सबसे ऊंचा स्थान और हनुमानजी से जुड़ा मंदिर, यहां बंदरों की टोलियां भी देखी जा सकती हैं
    • सनसेट प्वाइंट: सूर्यास्त का मनोरम दृश्य के लिए प्रसिद्ध स्थान, जहां से घाटियों का अद्भुत नजारा दिखता है |
    • गिल्बर्ट ट्रेल: प्रकृति प्रेमियों के लिए लोकप्रिय ट्रैकिंग ट्रेल, हरियाली से घिरा खूबसूरत वॉकवे |
    • क्राइस्ट चर्च: ब्रिटिश काल का बना ऐतिहासिक चर्च, जो कसौली का प्रतीक है |
    • बाबा बालक नाथ मंदिर: कसौली के पास स्थित धार्मिक स्थल, प्राकृतिक सौंदर्य के बीच बसा है |
  • कसौली को अंग्रेज़ों ने छावनी और हिल स्टेशन के रूप में विकसित किया। यहाँ 1850 में पहली बार सेना की छावनी बसाई गई थी और कसौली क्लब जैसी औपनिवेशिक विरासत आज भी देखने को मिलती है
  • कसौली को प्राकृतिक सुंदरता, स्वच्छता और शांत माहौल के लिए जाना जाता है। यह जगह भीड़-भाड़ से दूर प्रकृति प्रेमियों और स्वास्थ्य लाभ के इच्छुक लोगों के लिए उपयुक्त स्थान है |
  •  यहां सालभर मौसम सुहावना रहता है, जिसके कारण बड़ी संख्या में पर्यटक और टीवी सीरियल्स की शूटिंग भी होती रहती है
  • कसौली के पास गड़खल में स्थित ‘मोहन मीकिन्स डिस्टिलरी’ को एशिया की पहली डिस्टिलरी माना जाता है
विषयविवरण
स्थितिसोलन ज़िला, हिमाचल प्रदेश
ऊंचाईलगभग 1,800 मीटर (5,900 फीट)
स्थापना1842 में ब्रिटिशों द्वारा
प्रसिद्ध के लिएहेरिटेज वॉक, प्राकृतिक सुंदरता, शांत हिल स्टेशन, औपनिवेशिक वास्तुकला
निकटतम शहरचंडीगढ़ (60 किमी), शिमला (77 किमी)
कैसे पहुँचेसड़क मार्ग से आसानी से; निकटतम रेलवे स्टेशन: कालका; निकटतम एयरपोर्ट: चंडीगढ़
सर्वोत्तम समयमार्च से जून और सितंबर से नवंबर

13. मशोबरा (himachal pradesh paryatan sthal)

Mashobra हिमाचल प्रदेश के शिमला ज़िले में स्थित एक शांत और सुरम्य हिल स्टेशन है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक महत्व और समृद्ध वन्यजीव संपदा के लिए जाना जाता है। यह शिमला से लगभग 12 किमी दूर स्थित है और समुद्र तल से लगभग 2,150 मीटर (7,050 फीट) की ऊँचाई पर बसा है।

मशोबरा का इतिहास अंग्रेजो से जुड़ा हुआ है | बरीश अधिकारी अपनी गर्मी की छुट्टी यही बिताते थे | इसका उल्लेख कई ऐतिहासिक दस्ताबेज में भी मिलता है | ब्रिटिश गवर्नर-जनरल का ग्रीष्म कालीन निवेश स्ताहन भी यही हुआ करता था |

  • मशोबरा भारत के दो राष्ट्रपति रिट्रीट में से एक के लिए प्रसिद्ध है। हर साल भारत के राष्ट्रपति “द रिट्रीट” नामक आलीशान आवास का दौरा करते हैं और यहाँ रहने के दौरान उनका कोर ऑफिस भी यहीं शिफ्ट है। यह जगह ब्रिटिश काल की एक विरासत इमारत है, जो 1850 में बनी थी
  • यहाँ ‘मशोबरा रिज़र्व फॉरेस्ट सेंचुरी’ है, जो एशिया के सबसे बड़े वाटरशेड्स में गिना जाता है। यहाँ देवदार, ओक और चीड़ के घने जंगल हैं, जहाँ हिमालयन चील, तीतर, तेंदुआ और भौंकने वाला हिरण भी देखने को मिलते हैं
  • मशोबरा में पैराग्लाइडिंग, रॉक क्लाइम्बिंग, ट्रेकिंग, और बर्ड वॉचिंग जैसी कई साहसिक गतिविधियाँ की जा सकती हैं, जिससे यह एडवेंचर प्रेमियों के लिए उपयुक्त स्थल बन जाता है |
  • मशोबरा हिल स्टेशन ब्रिटिश अधिकारियों की पहली पसंद था, जो शिमला के पास शांत वातावरण में रहना चाहते थे। यहां की कई इमारतें, जैसे ‘वाइल्ड फ्लावर हॉल’, ब्रिटिश काल की भव्यता को दर्शाती हैं |
  • मशोबरा के हरियाले बागानों में सेब और अन्य फलों की पैदावार होती है, जो यहां के नजारों को और भी खूबसूरत बना देती है |
  • मशोबरा, 1850 में लॉर्ड डलहौज़ी द्वारा बनाए गए ऐतिहासिक हिंदुस्तान-तिब्बत मार्ग के द्वारा शिमला से जुड़ा हुआ है |
  • कभी भारतीय राष्ट्रपतियों का ग्रीष्मकालीन आराम करने का स्थल रहा है |
  •  यहाँ का मौसम सालभर ठंडा रहता है और गर्मियों में यह जगह घूमने के लिए आदर्श मानी जाती है

मशोबरा में घूमने के प्रमुख स्थल

  • वाइल्डफ्लावर हॉल
  • क्रेगनैनो नेचर पार्क
  • महासू देवता मंदिर
  • एडवेंचर स्पोर्ट्स
  • सेब के बागान

भोजन: स्थानीय हिमाचली व्यंजन।
ठहरने का स्थान: रिसॉर्ट, होटल।
घूमने की अवधि: 1-2 दिन
सर्वोत्तम समय: अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर
कैसे पहुंचे: शिमला से सड़क मार्ग।
निकटवर्ती स्थल: शिमला, कुफरी

14. ज्वाला देवी मंदिर (himachal pradesh paryatan sthal)

ज्वाला देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा ज़िले के ज्वालामुखी कस्बे में स्थित एक प्रसिद्ध हिन्दू शक्तिपीठ है। यह मंदिर देवी ज्वाला की पूजा के लिए समर्पित है, जो देवी दुर्गा के नौ रूपों में से एक मानी जाती हैं।

मंदिर का विशेष आकर्षण यहाँ से निकलने वाली प्राकृतिक ज्वालाएँ हैं, जो बिना किसी बाहरी ईंधन के निरंतर जलती रहती हैं। ज्वाला देवी मंदिर भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है कि यहाँ देवी सती की जीभ गिरी थी, जब भगवान शिव उनके मृत शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे। इस स्थान पर देवी की जीभ के गिरने के कारण यहाँ प्राकृतिक अग्नि प्रकट हुई, जिसे देवी की उपस्थिति माना जाता है।

मंदिर का पुनर्निर्माण राजा भूमिचंद कटोच ने करवाया था, जिन्हें देवी ने स्वप्न में मंदिर निर्माण का आदेश दिया था। 1835 में, पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह और हिमाचल के राजा संसारचंद ने इस मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया, जिससे हिंदू और सिख दोनों ही समुदायों में इस मंदिर के प्रति आस्था बढ़ी।

  • इस मंदिर में तेल, घी या किसी ईंधन के बिना जमीन से 9 स्थायी ज्वालाएं सदियों से लगातार जल रही हैं। इनका वैज्ञानिक कारण आज तक स्पष्ट नहीं हो पाया है, और कई बार गहराई तक खुदाई के बाद भी गैस या तेल का कोई स्रोत नहीं मिला |
  • मान्यता है कि यहाँ माता सती की जीभ गिरी थी, इसी कारण यह जगह शक्तिपीठों में सम्मिलित है। इन 9 ज्वालाओं को देवी के 9 स्वरूपों (अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यवासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अंबिका, अंजीदेवी, महाकाली) के रूप में पूजा जाता है |
  • इस मंदिर के निर्माण का श्रेय प्राचीन काल में पांडवों को और फिर राजा भूमि चंद को दिया जाता है। बाद में, 1835 में महाराजा रणजीत सिंह और राजा संसार चंद ने इसका पुनर्निर्माण करवाया था |
  • कहा जाता है कि मुगल सम्राट अकबर ने मंदिर की ज्वालाएं बुझाने के लिए कई प्रयास किए, जैसे पानी और नहर घुमा देना, लेकिन वे असफल रहे। इसी कारण उन्होंने खुशी में सोने का छत्र चढ़ाया था, लेकिन मान्यता है कि देवी ने उसकी भेंट स्वीकार नहीं की और वह छत्र रहस्यमय तरीके से एक अन्य धातु में बदल गया, जिसका रहस्य आज तक सामने नहीं आ सका
  • ब्रिटिश काल के दौरान भी यहां के रहस्य का पता लगाने का कई बार प्रयास किया गया, किन्तु कोई ठोस कारण या स्रोत नहीं मिल सका |
  •  धार्मिक मान्यता है कि कलियुग के अंत में ही यहाँ की ज्वाला शांत होगी और तब तक यह ज्वाला माता की अनुपम कृपा स्वरूप चिरंतन प्रज्वलित रहेगी |
  •  भक्तों का विश्वास है कि यहां मां के दर्शन मात्र से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है |

भोजन: मंदिर के आसपास स्थानीय भोजन।
ठहरने का स्थान: गेस्ट हाउस, धर्मशाला।
घूमने की अवधि: 1 दिन
सर्वोत्तम समय: पूरे वर्ष
कैसे पहुंचे: कांगड़ा से सड़क मार्ग।
निकटवर्ती स्थल: धर्मशाला, मैक्लोडगंज

15. त्रियुंड ट्रेक (himachal pradesh paryatan sthal)

त्रियुंड ट्रेक हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला और मैक्लोडगंज के पास स्थित एक प्रसिद्ध और आसान हिमालयी ट्रेक है। यह ट्रेक शुरुआती ट्रैकर्स, परिवारों और सप्ताहांत यात्रियों के लिए आदर्श है, जो बर्फ से ढकी धौलाधार पर्वत श्रृंखला और कांगड़ा घाटी के मनोरम दृश्य देखना चाहते हैं।

अगर आपको ट्रैकिंग करनी है तो आप ट्रैकिंग के लिए प्रशिद्ध स्थान त्रियुंड ट्रेक में जाये | इस ट्रैकिंग की खाशियत है इसके पूर्व में खनियारा, चामुंडा, पालमपुर दिखाई देता है, तो उत्तर में विशाल धौलाधार पर्वत खड़ा है. वहीं दक्षिण में धर्मशाला, कांगड़ा, शाहपुर व ब्यास नदी व पौंग डैम दिखता है, तो पश्चिम में गुणा माता व घेरा की पहाड़ियां दिखाई देती हैं | यह स्थान ट्रेक के लिए ही जाना जाता है | यह धर्मशाला से 19-20 किलो मीटर की दूरी पर है |

  • कहा जाता है – त्रियुंड ट्रेक को अपने सुंदर नजारों और ऊँचाई के कारण ‘स्वर्ग की सीढ़ी’ भी कहा जाता है
  • ट्रेक के दौरान एक तरफ बर्फ से ढके धौलाधार की पहाड़ियाँ और दूसरी तरफ गहरी कांगड़ा घाटी दिखाई देती है
  • त्रियुंड 2,828 मीटर (करीब 9,278 फीट) की ऊँचाई पर स्थित है और ट्रेक की कुल लंबाई लगभग 9-10 किलोमीटर है |
  •  यह ट्रेक शुरुआत करने वालों के लिए भी उपयुक्त है, क्योंकि अधिकतर रास्ता सरल है, केवल अंतिम 1 किलोमीटर में थोड़ी सीधी चढ़ाई और ‘22 मोड़’ (ट्वेंटी टू कर्व्स) की चुनौती है
  • घने देवदार, ओक और रोडोडेंड्रोन (गुरांस) के जंगल, झरने और बादलों की सतह के बेहद करीब पहुँचने का अनुभव यहाँ मिल सकता है |
  •  टॉप पर टेंट लगा कर आप रात रुक सकते हैं और खुले आसमान के नीचे तारों वाली रात का अद्भुत अनुभव ले सकते हैं |
  • मार्ग में बौद्ध मठों की घंटियों की आवाज़ और धार्मिक झंडियाँ माहौल को और पवित्र बनाती हैं
  • रास्ते में कई कैफे या छोटे स्टॉल मिलते हैं, जहाँ मैगी, चाय, दाल-चावल जैसी खाद्य सामग्री आसानी से मिल जाती है
  • आम तौर पर इस ट्रेक को एक दिन में पूरा किया जा सकता है; आईडियल समय मार्च से जून और सितंबर से नवंबर तक का है ताकि मौसम साफ और रास्ते सुरक्षित रहें |

भोजन: होमस्टे और कैफे में।
ठहरने का स्थान: होमस्टे, कैंपिंग।
घूमने की अवधि: 1-2 दिन
सर्वोत्तम समय: मार्च से जून और सितंबर से नवंबर
कैसे पहुंचे: मैक्लोडगंज से पैदल या टैक्सी।
निकटवर्ती स्थल: धर्मशाला, मैक्लोडगंज

16. कुथार किला

कुथार किला हिमाचल प्रदेश के सोलन ज़िले में स्थित एक ऐतिहासिक किला है, जिसका इतिहास लगभग 800 वर्ष पुराना है। यह किला कुत्थार क़स्बे में, शिमला से लगभग 52 किमी की दूरी पर और सोलन से 33.5 किमी की दूरी पर स्थित है। कुथार किला एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, जो अपनी वास्तुकला, इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है |

  •  कुठार किला लगभग 800 वर्ष पुराना है और इसे गोरखा राजाओं एवं राजपूत ठाकुर वंश द्वारा बनवाया गया था। यह कभी कुठार रियासत (पूर्व में कृष्णगढ़) का शाही निवास था |
  • किले का आर्किटेक्चर राजपूत व मुग़ल शैली का अद्भुत मिश्रण है। मुख्य द्वार और दीवारों पर सुंदर नक़्क़ाशी एवं भित्तिचित्र मिलते हैं। यहां का वास्तु आपको हिमाचल में भी राजस्थान जैसा एहसास देगा |
  • यह किला पहाड़ी की चोटी पर बसा है, जिसकी पृष्ठभूमि में घाटियाँ, पहाड़, हरियाली, सुंदर बगीचे और जलाशय हैं। किले से आसपास की प्राकृतिक खूबसूरती का शानदार नजारा देखने को मिलता है
  • किला लगभग 52.8 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें छोटे-छोटे तालाब, बगीचे, और एक लघु संग्रहालय है; संग्रहालय में प्राचीन सिक्के, मूर्तियाँ और ऐतिहासिक वस्तुएं संजोई गई हैं
  •  किले के भीतर महिषासुरमर्दिनी मंदिर और गौरीशंकर मंदिर जैसे ऐतिहासिक मंदिर स्थापित हैं, जिनकी खास कलात्मकता व धार्मिक महत्व है
  •  कुठार कभी ब्रिटिश राज के अधीन रियासत रही, और नेपाल गोरखा, ठाकुर राजवंश समेत कई शासकों के अधीन रही है |
  • किले के पास ट्रेकिंग, रॉक क्लाइम्बिंग, और कैंपिंग जैसी साहसिक गतिविधियाँ भी की जा सकती हैं
  • किले का एक भाग अब होटल में बदल गया है, जहाँ सैलानी राजा-महाराजा की तरह ठहरने का अनुभव ले सकते हैं।
  • यह सोलन शहर से लगभग 20 किमी दूर है, और शिमला हवाई अड्डे (जुब्बड़हट्टी) से भी केवल एक घंटे की दूरी पर स्थित है |
  • किले की बालकनी व पिछला हिस्सा विहंगम या सुन्दर प्राकृतिक दृश्य प्रस्तुत करता है और आज भी किले की प्राचीन दीवारों को मूल स्वरूप में संरक्षित किया गया है |

भोजन: आसपास के होटल में।
ठहरने का स्थान: शिमला में।
घूमने की अवधि: 1-2 घंटे
सर्वोत्तम समय: अप्रैल से सितंबर
कैसे पहुंचे: शिमला से सड़क मार्ग।
निकटवर्ती स्थल: शिमला

17. सोलांग वैली (himachal pradesh paryatan sthal)

सोलांग वैली, जिसे “स्नो प्वाइंट” भी कहा जाता है, मनाली से लगभग 13 किमी दूर स्थित एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह घाटी अपने रोमांचक साहसिक खेलों, बर्फीले दृश्यों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। यह एडवेंचर स्पोर्ट्स का केंद्र है।

सोलांग वैली हिमाचल प्रदेश में कुल्लू घाटी के शीर्ष पे बसा हुआ है |  सोलंग वैली में यह घाटी ब्यास कुंड और सोलंग गाँव के बीच मनाली से रोहतांग दर्रे के रास्ते में पड़ती है। सोलांग में भरी मात्रा में पर्यटक आते हैं | यहां आप पैराग्लाइडिंग, पैराशूटिंग, घुड़सवारी से लेकर मिनी ओपन जीपों की सवारी विशेष रूप से कर सकते हैं | सर्दियों के दौरान जब यह घाटी बर्फ से ढकी हुई होती है तो इस दौरान स्कीइंग यहां एक लोकप्रिय खेल है।

  • सोलंग वैली का नाम यहां स्थित सोलंग गांव के नाम पर रखा गया है। इसे सोलंग नाला (Solang Nala) के नाम से भी जाना जाता है। सोलंग का मतलब पास के गांव और नाले का मतलब पानी की धारा है।
  • सोलंग वैली के आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोग हिंदी, हिमाचली और पहाड़ी भाषाएं बोलते हैं।
  • सोलंग घाटी में चाय और मैगी ज्यादातर खाने पीने की दुकानों पर बिकती है। अलग स्वाद के कारण यह यहां आने वाले पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय है।
  • यहां की दुकानों पर लकड़ी के क्राफ्ट है जेवर बिकते हैं।
  • सोलंग वैली में कमर्शियल स्कीइंग ग्राउंड की स्थापना सन् 2011 में हुई थी। यहां पर्यटकों को ट्रेनिंग भी दी जाती है।
  • यहां के ग्लेशियर और बर्फ से ढकी पहाड़ियां बहुत प्रसिद्ध हैं।
  • सर्दियों में यहां का तापमान 5 से -15 डिग्री सेल्सियस और गर्मियों में 4 से 26 डिग्री सेल्सियस होता है।

भोजन: स्थानीय और कैफे।
ठहरने का स्थान: रिसॉर्ट, होमस्टे।
घूमने की अवधि: 1-2 दिन
सर्वोत्तम समय: मार्च से जून और सितंबर से नवंबर
कैसे पहुंचे: मनाली से सड़क मार्ग।
निकटवर्ती स्थल: मनाली, रोहतांग पास

18. पालमपुर

पालमपुर, हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित एक खूबसूरत हिल स्टेशन है, जो अपनी चाय बगानों, बर्फ से ढकी धौलाधार पर्वत श्रृंखला और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। पालमपुर कांगड़ा घाटी में स्थित है, जो शिमला से लगभग 208 किमी, धर्मशाला से 35 किमी और पठानकोट से 112 किमी दूर है। पालमपुर को टी सिटी भी कहते हैं |

  • पालमपुर इतिहास के बारे में देखा जाए तो पता चलता है कि यह पहले यह एक सिख राज्य का हिस्सा था, जो बाद में अंग्रेजों के अधिकार में आ गया था और यह अंग्रेजों के व्यापार का केंद्र बन गया।
  • पालमपुर से धौलाधार की पर्वत श्रेणियां पूरी तरह से बर्फ से ढकी हुई दिखाई पड़ती है।
  • पालमपुर में चाय के बागान 2000 हेक्टेयर में फैले हुए हैं।
  • पालमपुर से 30km दुर दलाई लामा का शहर मैकलोडगंज हैं।

भोजन: हिमाचली व्यंजन।
ठहरने का स्थान: होटल, रिसॉर्ट।
घूमने की अवधि: 1-2 दिन
सर्वोत्तम समय: पूरे वर्ष
कैसे पहुंचे: कांगड़ा हवाई अड्डा, सड़क मार्ग।
निकटवर्ती स्थल: धर्मशाला, कांगड़ा

19. बीड़

बीड़, जिसे आधिकारिक रूप से बीड़-बिलिंग के नाम से जाना जाता है, हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह स्थान विशेष रूप से अपने साहसिक खेलों, विशेषकर पैराग्लाइडिंग के लिए प्रसिद्ध है। कुल्लू घाटी का एक खूबसूरत गांव है |

  • बीड़ को भारत की पैराग्लाइडिंग राजधानी कहा जाता है। यह जगह विश्वप्रसिद्ध बीड़-बिलिंग घाटी का हिस्सा है, जहाँ दुनियाभर से पैराग्लाइडिंग प्रेमी आते हैं। बिलिंग टेकऑफ (उड़ान शुरुआत) साइट है, जबकि बीड़ लैंडिंग स्थान है |
  • बीड़ समुद्र तल से लगभग 1300 मीटर (लगभग 4300 फीट) ऊंचाई पर बसा है, जो इसे प्राकृतिक खूबसूरती और ठंडे मौसम वाला आकर्षक हिल स्टेशन बनाता है। यहाँ से धौलाधार पर्वत श्रृंखला की मनमोहक पहाड़ियाँ और घाटियाँ देखी जा सकती हैं |
  • बीड़ में एक बड़ा तिब्बती शरणार्थी कॉलोनी है, जहां अनेक बौद्ध मठ और स्तूप मौजूद हैं। इसलिए यह आध्यात्मिक अध्ययन, ध्यान (मेडिटेशन) और पारिस्थितिक पर्यटन के लिए भी जाना जाता है |
  • बीड़-बिलिंग ने साल 2015 में पैराग्लाइडिंग वर्ल्ड कप का आयोजन किया, जो इसे विश्व मानचित्र पर प्रमुख साहसिक खेल स्थल के रूप में स्थापित करता है। यहाँ अनेक भारतीय पैराग्लाइडर्स ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल प्रदेश और भारत का नाम रोशन किया है |
  • बीड़ में पर्यटकों के लिए होटल, कैफे, और ट्रेकिंग, फोटोग्राफी, टैक्सी सेवा सहित कई सुविधाएँ उपलब्ध हैं। स्थानीय युवाओं के लिए यह क्षेत्र रोजगार का बड़ा स्रोत बन गया है |
  •  बीड़ बिलिंग गगल हवाई अड्डा से लगभग 68 किमी, धर्मशाला से लगभग 50 किमी दूर है। इसके निकटतम रेलवे स्टेशन बैजनाथ-पापरोली है, जिससे आसपास के कई शहर जुड़े हुए हैं। सड़क मार्ग से दिल्ली, चंडीगढ़, शिमला, मनाली से भी यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है
  • बीड़ के आसपास सुंदर चाय के बागान, घने जंगल, हरे-भरे मैदान और साफ़ पहाड़ियाँ हैं, जो इसे प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग बनाते हैं।
  • इस क्षेत्र को विशेष पर्यावरणीय संरक्षण के तहत रखा गया है, जहाँ बिना अनुमति निर्माण निषिद्ध है ताकि प्राकृतिक सुंदरता और पारिस्थितिकी संरक्षित रहे |

भोजन: स्थानीय भोजन।
ठहरने का स्थान: होमस्टे।
घूमने की अवधि: 1 दिन
सर्वोत्तम समय: अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर
कैसे पहुंचे: कुल्लू से सड़क मार्ग।
निकटवर्ती स्थल: कुल्लू, मनाली

20. कमरुनाग झील

कमरुनाग झील, हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के करसोग घाटी में स्थित एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल है। यह झील समुद्र तल से लगभग 3,334 मीटर (10,935 फीट) की ऊँचाई पर स्थित है और देवदार के घने जंगलों से घिरी हुई है, जो इसे प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षक बनाती है।

कमरुनाग झील की अपनी धार्मिक आस्था के लिए भी लोग मानते है | और इस झील को सोना, चांदी चढ़ता है | यह झील खजानो की झील है | कहा जाता है इस खजाने की रक्षा दैविक शक्तिया करती हैं |

  • मान्यता है कि कमरुनाग झील के भीतर अरबों-खरबों रुपये का खजाना दबा है। इसमें सोना, चांदी और अन्य कीमती वस्तुएं मौजूद हैं, जो श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर झील में अर्पित करते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी यहां सोने-चांदी के सिक्के और नकदी झील में चढ़ाई जाती है |
  •  स्थानीय मान्यता के अनुसार, झील में मौजूद खजाने की रक्षा स्वयं कमरुनाग देवता या दैविक शक्तियां करती हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि किसी ने अगर खजाना निकालने की कोशिश की, तो उसे दंड भुगतना पड़ता है |
  • इस झील का सीधा संबंध महाभारत काल से जोड़ा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, पांडवों ने यहां अपनी संपत्ति कमरुनाग देवता को समर्पित की थी |
  • हर साल जून के महीने में यहाँ विशेष मेला लगता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। मान्यता है कि 14-15 जून को बाबा कमरुनाग दुनिया में दर्शन देते हैं|
  • गर्मियों में जब झील का जल स्तर कम होता है, तो झील की तलहटी में अर्पित किए गए सिक्के और अन्य वस्तुएं तैरती हुई देखी जा सकती हैं |
  •  इस झील तक पहुंचने के लिए पहाड़ी और जंगलों से होकर गुजरना पड़ता है, जो एडवेंचर और ट्रेकिंग प्रेमियों के लिए आकर्षण का बड़ा कारण है
  • कमरुनाग झील जैसी परंपरा, जहां लोग अरबों की दौलत श्रद्धा में अर्पित करते हैं और कोई उसे निकालने का साहस नहीं करता, दुनिया में बेहद दुर्लभ है |

भोजन: स्थानीय भोजन।
ठहरने का स्थान: पास के गांवों में होमस्टे।
घूमने की अवधि: 1-2 दिन
सर्वोत्तम समय: जुलाई से सितंबर
कैसे पहुंचे: मनाली से ट्रेकिंग द्वारा।
निकटवर्ती स्थल: मनाली, सोलांग वैली[3]

हिमाचल प्रदेश यात्रा के लिए सुझाव

सर्वोत्तम समय: मार्च से जून और सितंबर से नवंबर के बीच मौसम सुहावना रहता है।

भोजन: हिमाचली भोजन के साथ-साथ तिब्बती, पंजाबी और कॉन्टिनेंटल व्यंजन उपलब्ध हैं।

ठहरने के विकल्प: होटल, रिसॉर्ट, होमस्टे, और कैंपिंग।

कैसे पहुंचे: शिमला, धर्मशाला, भुंतर (मनाली के नजदीक) हवाई अड्डे; सड़क मार्ग से अच्छी कनेक्टिविटी।

  • निकटवर्ती स्थलों का भ्रमण: एक जगह घूमने के बाद आसपास के अन्य दर्शनीय स्थलों का भ्रमण अवश्य करे|

निष्कर्ष

हिमाचल प्रदेश के ये 20 पर्यटन स्थल न केवल प्राकृतिक सौंदर्य में बेजोड़ हैं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिकता का भी अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हैं। अपनी यात्रा की योजना बनाकर आप इन स्थलों की सैर कर सकते हैं और जीवनभर के लिए यादगार अनुभव प्राप्त कर सकते हैं।

FAQ

मनाली की सोलांग घाटी क्यों हर पर्यटक का पसंदीदा स्थान है?

Ans. Himachal Pradesh paryatan sthal: सोलांग घाटी मनाली का सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थल इसलिए है क्योंकि यहाँ बर्फ से ढके पहाड़ों और शानदार ग्लेशियरों के मनमोहक दृश्य मिलते हैं, जो हर मौसम में पर्यटकों को आकर्षित करते हैं| सर्दियों में घाटी पूरी तरह बर्फ से ढक जाती है, जिससे यह जगह किसी फिल्मी स्वर्ग जैसी लगती है और स्कीइंग, स्नोबोर्डिंग, स्लेजिंग जैसे विंटर स्पोर्ट्स का आनंद लिया जा सकता है | गर्मियों में यहाँ पैराग्लाइडिंग, ज़ोरबिंग, माउंटेन बाइकिंग, घुड़सवारी, रॉक क्लाइम्बिंग जैसी रोमांचक गतिविधियाँ होती हैं, जो एडवेंचर प्रेमियों के लिए इसे जन्नत बना देती हैं|
सोलांग घाटी की प्राकृतिक सुंदरता, साफ नीला आसमान, बर्फीली चोटियाँ और हरे-भरे देवदार के जंगल हर यात्री को मंत्रमुग्ध कर देते हैं|

1 thought on “20 शानदार himachal pradesh paryatan sthal जो मन मोह लें”

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